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एक भाई की वासना (completed)

Story Hindi 141 pages 6 months ago

अपडेट 1

हैलो.. मेरा नाम काजल है। मेरी शादी को कोई 8-9 महीने हुए हैं।
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मेरे पति का नाम सूरज है..
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वो मेरे ऑफिस में मेरे साथ ही काम करते थे.. लेकिन शादी के बाद मैंने जॉब छोड़ दी और घर पर ही रहने लगी हूँ।

सूरज कोई बहुत ज्यादा अमीर आदमी नहीं हैं। उसकी फैमिली शहर के पास ही एक गाँव में रहती है.. उधर थोड़ी सी ज़मीन है.. जिस पर उसके घर वाले अपना गुज़र-बसर करते हैं। गाँव में उसके बाप.. माँ.. बहन और एक छोटा भाई रहते हैं। उसका छोटा भाई अपनी बाप के साथ जमीनों पर ही होता है। गाँव के स्कूल में ही बहन पढ़ रही थी.. वो बहुत ही प्यारी लड़की है.. रश्मि..
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यानि वो मेरी ननद हुई।

मैं अपने पति सूरज के साथ शहर में ही रहती हूँ। हमने एक छोटा सा मकान किराए पर लिया हुआ है.. इसमें एक बेडरूम मय अटैच बाथरूम.. छोटा सा टीवी लाउंज और एक रसोई है।

घर के अगले हिस्से में एक छोटी सी बैठक है.. जिसका एक दरवाज़ा घर से बाहर खुलता है.. और दूसरा टीवी लाउंज है.. घर के पिछले हिस्से में एक छोटा सा बरामदा है। बस.. तक़रीबन 3 कमरे का घर है.. ऊपर की छत बिल्कुल खाली है।
मेन गेट के अन्दर थोड़ी सी जगह गैराज के तौर पर जहाँ पर सूरज अपनी बाइक खड़ी करता है।

मैं और सूरज अपनी शादी से बहुत खुश हैं और बड़ी ही अच्छी लाइफ गुज़र रही थी। भले ही.. सूरज का बैक ग्राउंड गाँव का था.. लेकिन फिर भी शुरू से शहर में रहने की वजह से वो काफ़ी हद तक शहरी ही हो गया था। रहन-सहन.. ड्रेसिंग वगैरह सब शहरियों की तरह ही थी.. और वो काफ़ी ओपन माइंडेड भी था।

घर पर हमेशा वो मुझसे फरमाइश करता के मैं मॉडर्न किस्म के कपड़े ही पहनूं.. इसलिए घर पर मैं अक्सर टाइट लैंगिंग्स और टॉप्स.. स्लीव लैस शर्ट्स और हर किस्म की वेस्टर्न ड्रेसस पहन लेती थी।
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मैं अक्सर जब भी बाहर जाती.. तब भी मेरी ड्रेसिंग काफ़ी मॉडर्न ही होती थी।
मैं अक्सर जीन्स और टी-शर्ट पहनती थी या सलवार कमीज़ पहनती तो.. वो भी फैशन के मुताबिक़ ही एकदम चुस्त और मॉडर्न ही होती थी।
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घर से बाहर भी वो मुझे अक्सर लेगिंग पहना कर ले जाता था.. घर आ जाता तो मुझसे सिर्फ़ ब्रेजियर और लेगिंग में ही रहने की फरमाइश करता था..
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सूरज मेरे हुस्न और मेरे जिस्म का दीवाना था। हमेशा मेरी गोरे रंग और खूबसूरत जिस्म की तारीफ करता था।
जब भी मौका मिलता.. वो मेरी चूचियों को मसल देता था..
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और मेरे खुले गले में हाथ डाल कर मेरी चूचियों को सहलाता रहता था।

अपने पति को खुश करने और उसे लुभाने के लिए मैं भी हमेशा डीप और लो नेक की कमीजें सिलवाती थी.. जिसमें से मेरी चूचियों भी नजर आती थीं और मम्मों का क्लीवेज तो हर वक़्त ही ओपन होता था।
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दिन में जब भी मौका मिलता.. हम लोग सेक्स करते थे..

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बल्कि सच बात तो यह है कि मैं शादी से पहले ही अपना कुँवारापन सूरज पर लुटा चुकी थी।
जी हाँ.. सूरज ही मेरी पहली और आखिरी प्यार था और यह सूरज की प्यार ही थी.. जो के मुझे शादी से पहले ही उसके बिस्तर तक उसकी बाँहों में ले आई थी।

शादी के 8-9 महीने बाद भी जब हमारी सेक्स लाइफ और हवस से भरी हुई ज़िंदगी पूरे सिरे पर थी.. तो एकदम इसमें एक ब्रेक सी लग गई और एक टकराव सा आ गया।

इसकी वजह यह थी कि मेरी ननद रश्मि… ने स्कूल का आखिरी इम्तिहान पास कर लिया था और उसने कॉलेज में एडमिशन लेने का इच्छा ज़ाहिर किया.. तो मेरे ससुर जी ने पहले तो इन्कार कर दिया.. लेकिन जब उसके चहेते बड़े भाई सूरज ने भी अपने बाप से बात की.. तो मेरे ससुर जी ने हामी भर ली कि अगर सूरज उसकी जिम्मेदारी उठा सकता है.. तो ठीक है।

अब दिक्कत यह थी कि गाँव में कोई कॉलेज नहीं था और उसे शहर में आना था। जब रश्मि ने कॉलेज में एडमिशन लिया.. तो वो गाँव से शहर में आ गई। अब ज़ाहिर है कि उसे हमारे साथ ही रहना था तो रश्मि शहर में हमारे साथ उस छोटे से मकान में ही शिफ्ट हो गई।

रश्मि की आने से और हमारे साथ रहने से मुझे और तो कोई दिक्कत नहीं थी.. लेकिन सिर्फ़ एक असुविधा था कि हमारी सेक्स लाइफ थोड़ी बंदिशों वाली हो जाने थी।

अब हमें जो भी करना हो.. तो अपने कमरे में ही करना था। वैसे रश्मि बहुत ही अच्छे नेचर की लड़की थी.. अभी क़रीब 19 साल की ही थी.. बहुत ही सुंदर और खूबसूरत लड़की थी। बिल्कुल दूध की तरह गोरा रंग.. और मक्खन की तरह से नरम-नरम जिस्म था उसका..
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उसके सीने की उठान.. यानि चूचियों उभर चुकी थीं.. लेकिन अभी बहुत बड़ी नहीं थीं। जाहिर सी बात है कि मुझसे तो छोटी ही थी.. बहुत ही सादा और मासूम सी लड़की थी।
मुझसे बहुत ही प्यार करती थी और बहुत ही इज्जत देती थी।

जब से घर में आई.. तो रसोई में भी मेरा हाथ बंटाती थी.. और मेरे साथ घर का काफ़ी काम करती थी। मैं भी रश्मि की शक्ल में एक अच्छी सी सहेली को पाकर खुश थी।

उसके सोने का इंतज़ाम उस छोटी सी बैठक में ही एक सिंगल बिस्तर लगवा कर.. कर दिया गया था। वो वहीं पर ही पढ़ती थी और वहीं पर ही सोती थी। बाथरूम उसे हमारा वाला ही इस्तेमाल करना पड़ता था.. जिसका एक दरवाज़ा छोटे से टीवी लाउंज में खुलता था और दूसरा हमारे बेडरूम में खुलता था।

बस रात को सोते वक़्त हम लोग अपने बेडरूम वाला बाथरूम का दरवाज़ा अन्दर से बंद कर लेते थे.. ताकि रश्मि बाहर से ही उसे इस्तेमाल कर सके।

रश्मि वैसे तो बहुत ही खूबसूरत लड़की थी.. लेकिन सारी ज़िंदगी गाँव में रहने की वजह से बिल्कुल ही ‘डल’ लगती थी। उसकी ड्रेसिंग भी बहुत ज्यादा ट्रेडीशनल किस्म की होती थी। सादा सी सलवार-कमीज़ पहनती थी.. कभी भी मॉडर्न किस्म के कपड़े नहीं पहनती थी।

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मुझे घर में लेगिंग पहने देखना शुरू किया.. तो वो बहुत ही हैरान हुई.. तो मैंने हंस कर कहा- अरे यार क्यों हैरान होती हो.. यह सब आज के वक़्त की ज़रूरत और फैशन है.. इसके बिना ज़िंदगी का क्या मज़ा है.. वैसे भी तो घर पर सिर्फ़ तुम्हारे भैया ही होते हैं ना.. और जब भी बाहर जाती हूँ.. तो उनके साथ ही जाती हूँ.. तो फिर मुझे किस चीज़ की फिकर है।

रश्मि - लेकिन भाभी बाहर तो बहुत से लोग होते हैं.. वो आपको अजीब नजरों से नहीं देखते क्या?
मैं - अरे यार देखते हैं.. तो देखते रहें.. मेरा क्या जाता है.. वैसे इन लोगों की कमीनी नज़रों का भी अपना ही मज़ा होता है।
मैंने एक आँख मार कर रश्मि से कहा.. तो वो झेंप गई।

मैं उसे हमेशा ही मॉडर्न और न्यू फैशन के कपड़े पहनने को कहती.. लेकिन वो इन्कार कर देती।
‘मुझे शरम आती है.. ऐसी कपड़े पहनते हुए.. और फिर मुझे इन कपड़ों में देख कर भैया बुरा मान जाएंगे..’

शहर में आने के बाद सूरज ने उसे खूब शहर की सैर करवाई। हम लोग सूरज की बाइक पर बैठ कर घूमने जाते.. मैं सूरज के पीछे बैठ जाती और मेरे पीछे रश्मि बैठती थी।
हम लोग खूब शहर की सैर करते.. और रश्मि भी खूब एंजाय करती थी।

बाइक पर बैठे-बैठे मैं अपनी चूचियों को सूरज की बैक पर दबा देती
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और उसके कान में ख़ुसर-फुसर करती जाती- क्यूँ फिर फील हो रही हैं ना मेरी चूचियां तुमको?
मेरी कमर पर सूरज भी जानबूझ कर अपनी कमर से थोड़ा-थोड़ा हरकत देता और मेरी चूचियों को रगड़ देता। कभी मैं उसकी जाँघों पर हाथ रख कर मौका मिलते ही उसकी पैन्ट के ऊपर से ही उसके लण्ड को सहला देती थी..
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जिससे सूरज को बहुत मज़ा आता था।

हमारी इन शरारतों से बाइक पर पीछे बैठे हुई रश्मि बिल्कुल बेख़बर रहती थी।

सूरज अपनी बहन से बहुत ही प्यार करता था.. आख़िर वो उसकी सबसे छोटी बहन थी ना.. कम से कम भी उससे 8 साल छोटी थी.. और वो मुझसे 5 साल छोटी थी।

रोज़ाना सूरज खुद ऑफिस जाते हुए रश्मि को कॉलेज छोड़ कर जाता और वापसी पर साथ ही लेता आता था। मुझे भी कभी भी इस सबसे कोई दिक्कत नहीं हुई थी। जैसा कि ननद-भाभी में घरों में झगड़ा होता है.. मेरे और रश्मि कि बीच में ऐसा कभी भी नहीं हुआ था.. बल्कि मुझे तो वो अपनी ही छोटी बहन लगती थी।

अपडेट 2

आपने अभी तक पढ़ा..
शहर में आने के बाद सूरज ने उसे खूब शहर की सैर करवाई । हम लोग सूरज की बाइक पर बैठ कर घूमने जाते.. मैं सूरज के पीछे बैठ जाती और मेरे पीछे रश्मि बैठती थी।
हम लोग खूब शहर की सैर करते.. और रश्मि भी खूब एंजाय करती थी।

बाइक पर बैठे-बैठे मैं अपनी चूचियों को सूरज की बैक पर दबा देती और उसके कान में ख़ुसर-फुसर करती जाती- क्यूँ फिर फील हो रही हैं ना मेरी चूचियां तुमको?
मेरी कमर पर सूरज भी जानबूझ कर अपनी कमर से थोड़ा-थोड़ा हरकत देता और मेरी चूचियों को रगड़ देता।

कभी मैं उसकी जाँघों पर हाथ रख कर मौका मिलते ही उसकी पैन्ट के ऊपर से ही उसके लण्ड को सहला देती थी.. जिससे सूरज को बहुत मज़ा आता था।

हमारी इन शरारतों से बाइक पर पीछे बैठे हुई रश्मि बिल्कुल बेख़बर रहती थी।

सूरज अपनी बहन से बहुत ही प्यार करता था.. आख़िर वो उसकी सबसे छोटी बहन थी ना.. कम से कम भी उससे 8 साल छोटी थी.. और वो मुझसे 5 साल छोटी थी।

रोज़ाना सूरज खुद ऑफिस जाते हुए रश्मि को कॉलेज छोड़ कर जाता और वापसी पर साथ ही लेता आता था। मुझे भी कभी भी इस सबसे कोई दिक्कत नहीं हुई थी। जैसा कि ननद-भाभी में घरों में झगड़ा होता है.. मेरे और रश्मि कि बीच में ऐसा कभी भी नहीं हुआ था.. बल्कि मुझे तो वो अपनी ही छोटी बहन लगती थी।

अब आगे ..

फिर एक दिन वो घटना हुआ जो इस कहानी के आगे बढ़ने की वजह बना, उससे पहले ना कुछ ऐसा-वैसा हुआ हमारे घर में, और ना ही किसी के दिमाग में था.. लेकिन उस वाकिये के बाद मेरा दिमाग एक अजीब ही रास्ते पर चल पड़ा और मैंने वो सब करवा दिया जो कि कभी नहीं होना चाहिए था।

वो इतवार का दिन था और हम सब लोग घर पर ही थे । दोपहर के वक़्त हम सब लोग टीवी लाउंज में ही बैठे हुए टीवी देख रहे थे कि सूरज ने चाय की फरमाइश की.. इससे पहले कि मैं उठती.. रश्मि फ़ौरन ही उठी और बोली- भाभी आप बैठो.. मैं बना कर लाती हूँ।

मैंने उसे ‘थैंक्स’ बोला और दोबारा टीवी देखने लगी, सूरज भी मेरा पास ही बैठा हुआ था।

अचानक ही रसोई से रश्मि की एक चीख की आवाज़ सुनाई दी और साथ ही उसके गिरने की आवाज़ आई । मैं और सूरज दोनों ही फ़ौरन ही उठ कर रसोई की तरफ चिल्लाते हुए भागे ।
‘क्या हुआ है रश्मि?’

जैसे ही हम लोग अन्दर गए तो देखा कि रश्मि नीचे रसोई कि फर्श पर गिरी हुई है और अपने पैर को पकड़ कर दबा रही है और वो दर्द के मारे कराह रही थी।

हम फ़ौरन ही उसके पास बैठ गए और मैं बोली- क्या हुआ रश्मि.. कैसे गिर गई?
रश्मि - बस भाभी.. पता ही नहीं चला कि कैसे मेरा पैर मेरी शलवार में फँस गया और मैं नीचे गिर पड़ी।
सूरज - अरे यह तो शुक्र है कि अभी इसने चाय नहीं उठाई हुई थी.. नहीं तो गर्म-गर्म चाय ऊपर गिर कर और भी नुक़सान कर सकती थी।

मैंने आहिस्ता-आहिस्ता रश्मि को पकड़ कर उठाना चाहा.. उसका दूसरा बाज़ू सूरज ने पकड़ा और हमने रश्मि को खड़ा किया.. तो वो अपना बायाँ पैर नीचे ज़मीन पर नहीं रख पा रही थी। बड़ी ही मुश्किल से वो अपना एक पैर ऊपर उठा कर मेरी और अपने भैया की सहारे पर लंगड़ाती हुई टीवी लाउंज में पहुँची।
इतने से रास्ते में भी वो कराहती रही- भाभी नहीं चला जा रहा है.. बहुत दर्द हो रहा है।

टीवी लाउंज में लाकर हम दोनों ने उसे सोफे पर ही लिटा दिया और मैं उसके पास बैठ गई।
सूरज - लगता है कि इसके पैर में मोच आ गई है।
मैंने रश्मि को सीधा करके सोफे पर लिटाया और उसके पैर की तरफ आकर उसके पैर को सहलाती हुए बोली- हाँ.. लगता तो ऐसा ही है..

मैंने सूरज से कहा- आप रश्मि के बेडरूम में जाकर मूव तो उठा लायें.. ताकि मैं इसके पैर की थोड़ी सी मालिश कर सकूँ।

मेरी बात सुन कर सूरज फ़ौरन ही कमरे में चला गया और मैं आहिस्ता-आहिस्ता उसके पैर को सहलाती रही। अभी भी रश्मि दर्द के मारे कराह रही थी।
चंद लम्हों के बाद ही सूरज वापिस आया और उसने मूव मुझे दी। मैंने थोड़ी सी ट्यूब से मलहम निकाली और उसे रश्मि के पैर के ऊपर मलने लगी।

फिर मैंने सूरज से कहा- जरा रसोई में जा कर रबर की बोतल में पानी गरम करके ले आओ.. ताकि थोड़ी सी सिकाई भी की जा सके।
सूरज भी अपनी बहन के पैर में मोच आने की वजह से बहुत ही परेशान था। इसलिए फ़ौरन ही रसोई में चला गया।

रश्मि के पैर के ऊपर मूव लगाने के बाद मैंने उसकी सलवार को थोड़ा ऊपर घुटनों की तरफ से उठाया.. ताकि उसकी टांग के निचले हिस्से पर भी मूव लगा दूँ।
रश्मि ने उस वक़्त एक बहुत ही लूज और खुली गले वाली सलवार पहनी हुई थी और शायद यही वजह थी कि वो रसोई में इसके पाएंचे से उलझ कर गिर गई थी।
जैसे ही मैंने रश्मि की सलवार को उसकी घुटनों तक ऊपर उठाया तो रश्मि की गोरी-गोरी टाँगें मेरी आंखों के सामने नंगी हो गईं।
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उफफ्फ़.. रश्मि की टाँगें कितनी गोरी और मुलायम थीं.. जैसे ही मैंने उसकी नंगी टाँग को छुआ.. तो मुझे ऐसा लगा कि जैसे मैंने मक्खन में हाथ डाल दिया हो.. मैं उसकी टांग की मालिश का भूल कर आहिस्ता-आहिस्ता उसकी टाँग को सहलाने लगी।

धीरे-धीरे अपना हाथ उसकी नंगी टाँग पर फेरने लगी। कभी पहले ऐसा नहीं हुआ था.. लेकिन आज मुझे एक अलग ही मज़ा आ रहा था। मुझे उसकी मखमली टाँग को सहलाने का मौका जो मिल गया था।
फिर मैंने अपने ख्यालों को झटका और उसकी टाँग पर मूव लगाने लगी।

थोड़ी ही देर में सूरज गरम पानी की रबर की बोतल ले आया और मेज पर रख दी।

अब वो दूसरी सोफे पर बैठ कर दोबारा से टीवी देखने लगा.. रश्मि की टाँग पर मूव लगाते हुए अचानक ही मेरी नज़र सूरज की तरफ गई.. तो हैरानी से जैसे मेरी आँखें फट सी गईं।
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मैंने देखा कि सूरज की नजरें टीवी की बजाय अपनी सग़ी बहन की नंगी टाँगों को देख रही हैं।
मुझे इस बात पर बहुत ही हैरत हुई कि सूरज कैसे अपनी छोटी बहन की नंगी टाँग को ऐसे देख सकता है।
उसकी आँखों में जो हवस थी..
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वो मैं अच्छी तरह से पहचान सकती थी.. आख़िर मैं उसकी बीवी थी।

यह देख कर एक लम्हे के लिए तो मेरे हाथ रश्मि की टाँग पर रुक से गए.. लेकिन मुझमें हिम्मत ना हुई कि मैं अपने पति से नजरें मिलाऊँ या उसको रोकूँ या टोकूँ.. मैंने अपनी नजरें वापिस रश्मि की टाँग पर जमा दीं और आहिस्ता-आहिस्ता मूव मलने लगी।

रश्मि को किसी बात का होश नहीं था.. वो तो बस अपनी आँखें बंद किए हुए पड़ी हुई थी। रश्मि की नंगी गोरी टाँग को सहलाते सहलाते मेरे दिमाग में एक शैतानी ख्याल आया..

कि क्यों ना मैं इसकी टाँग को थोड़ा और एक्सपोज़ करूँ और देखूँ कि तब भी सूरज अपनी बहन की गोरी टाँगों को नंगा देखता रहता है या नहीं..

यही सोच कर मैंने आहिस्ता से रश्मि की सलवार उसके घुटनों के ऊपर सरका दी.. और अब उसकी खुली पायेंचे वाली सलवार उसके घुटनों से ऊपर आ गई थी.. जिसकी वजह से रश्मि का घुटना और उसकी जाँघ का थोड़ा सा निचला हिस्सा भी नंगा हो गया था।

मैंने उसके घुटनों पर भी आहिस्ता-आहिस्ता मूव लगानी शुरू कर दी और मसाज करती हुई.. मैंने तिरछी नज़र से अपने पति की तरफ देखा.. तो पता चला कि अब भी वो चोर नज़रों से अपनी बहन की नंगी टाँग की ओर देख रहे थे।
मैं दिल ही दिल में मुस्करा दी।

कितनी अजीब बात थी कि एक भाई भी अपनी सग़ी छोटी बहन की नंगी टाँग को ऐसी प्यासी नज़रों से देख रहा था.. जैसे कि वो उसकी बहन ना हो.. बल्कि कोई गैर लड़की हो!

मुझे इस गंदे खेल में अजीब सा मज़ा आ रहा था और मैं इसलिए इस मसाज को एक्सटेंड करती जा रही थी.. ताकि सूरज ज्यादा से ज्यादा अपनी बहन के जिस्म से अपनी आँखों को सेंक सके।

अब मेरे दिमाग में एक और शैतानी ख्याल आया।

अपडेट 3

आपने अभी तक पढ़ा..

मैंने उसके घुटनों पर भी आहिस्ता-आहिस्ता मूव लगानी शुरू कर दी और मसाज करती हुई.. मैंने तिरछी नज़र से अपने पति की तरफ देखा.. तो पता चला कि अब भी वो चोर नज़रों से अपनी बहन की नंगी टाँग की ओर देख रहे थे।
मैं दिल ही दिल में मुस्करा दी।

कितनी अजीब बात थी कि एक भाई भी अपनी सग़ी छोटी बहन की नंगी टाँग को ऐसी प्यासी नज़रों से देख रहा था.. जैसे कि वो उसकी बहन ना हो.. बल्कि कोई गैर लड़की हो!
मुझे इस गंदे खेल में अजीब सा मज़ा आ रहा था और मैं इसलिए इस मसाज को एक्सटेंड करती जा रही थी.. ताकि सूरज ज्यादा से ज्यादा अपनी बहन के जिस्म से अपनी आँखों को सेंक सके।

अब आगे ..

अब मेरे दिमाग में एक और शैतानी ख्याल आया जिससे मैं सूरज को और भी क़रीब से उसकी बहन की नंगी मुलायम टाँगें दिखा सकती थी। मैंने अपने पास ही सोफे पर रखी हुई मूव नीचे फर्श पर गिरा दी। थोड़ी देर के बाद मैंने सूरज को आवाज़ दी- सुनो.. जरा मुझे मूव नीचे से उठा कर दें..
मैंने यह बात बिना सूरज की तरफ देखते हुए कही.. और वो ऐसे चौंका जैसे किसी ख्वाब से जगा हो..
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फिर वो हमारी तरफ बढ़ा। इतनी देर में मैंने रश्मि की दूसरी टाँग भी नंगी कर दी थी और उसको भी मैं मजे से सहला रही थी। रश्मि को जैसे अब दर्द से कुछ सुकून मिल रहा था.. जिसकी वजह से वो आँखें मूंदे लेटी हुई थी।
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सूरज मेरे क़रीब आया और नीचे फर्श पर से मूव उठा कर मेरी तरफ बढ़ाई लेकिन मैंने अपनी स्कीम की मुताबिक़ बिना उसकी तरफ देखते हुए कहा- थोड़ी सी यहाँ पर लगा दो..

मैंने रश्मि की दूसरी टांग की तरफ इशारा करते हुए उससे कहा..

दिल ही दिल में मैं मुस्करा रही थी और देखना चाहती थी कि अपनी बहन की नंगी टाँग के इतने क़रीब होते वक्त सूरज का क्या रिएक्शन होता है।
दूसरी तरफ मासूम रश्मि आँखें बंद करके चुपचाप लेटी हुई थी… उसे नहीं अंदाज़ा था कि उसकी भाभी क्या गेम खेल रही है और उसका अपना सगा बड़ा भाई किस नज़र से उसके नंगे जिस्म को देख रहा है..

आहिस्ता से सूरज ने हाथ बढ़ाया और रश्मि की एक नंगी टाँग के ऊपर से हाथ गुज़ार कर दूसरी तरफ वाली टाँग पर मूव लगाने लगा।
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मेरी नज़र उसके हाथ पर ही थी.. जिसमें मुझे हल्की-हल्की कंपकंपाहट महसूस हो रही थी।

दूसरी टाँग की तरफ हाथ ले जाते हुए उसका हाथ रश्मि की पहली टाँग को टच करने लगा। मैंने आहिस्ता से उसकी चेहरे की तरफ देखा.. तो उसका चेहरा लाल हो रहा था और नजरें तो जैसे अपनी बहन की मखमली गोरी-गोरी नंगी टाँगों से चिपकी ही पड़ी थीं।

मूव लगा कर सूरज ने हाथ पीछे हटाया और मूव को टेबल पर रख कर वापिस दूसरे सोफे पर जा कर बैठ गया और टीवी देखने की एक्टिंग करने लगा। जबकी उसकी नज़र अब भी चोरी-छिपे रश्मि की नंगी टाँगों को ही देख रही थीं।

थोड़ी देर चुप रहने की बाद सूरज बोला- आख़िर तुमको हुआ क्या था.. जो नीचे ऐसी गिर पड़ीं?
रश्मि बोली- भैया वो मेरा पैर पायेंचे में फँस गया.. तो गिर गई..

मुझे तो जैसे मौका ही मिल गया.. मैंने फ़ौरन ही कहा- गिरना ही पड़ेगा ना तुमको.. जो इतने पुरानी फैशन की खुले-खुले पायंचों वाली सलवारें पहनती हो। मैंने कितनी बार कहा है कि माहौल और फैशन के मुताबिक़ ड्रेसिंग किया करो।
मैंने उसे प्यार से डाँटते हुए कहा।

सूरज भी बोला- हाँ.. ठीक ही तो कह रही है तुम्हारी भाभी.. वैसे यह तुम्हारा ही काम है ना.. कि तुम इसे समझाओ कि शहर में कैसे रहना होता है..
मैं- मेरे पर क्यों गुस्सा होते हो.. पूछ लो इससे.. कितनी बार कहा है इसे.. कि मेरी तरह की ड्रेसिंग किया करो.. लेकिन यह नहीं मानती है.. यह तुमसे डरती है.. कि पता नहीं भैया बुरा न मान जाएं।

सूरज - लो.. इसमें मेरे बुरा मानने वाली कौन सी बात है.. आख़िर वक़्त कि मुताबिक़.. एक हद में रह कर.. तो चलना ही होता है ना..
मैं- यही तो मैं इसको समझाती हूँ कि देखो मैं भी तो लेटेस्ट कपड़े पहनती हूँ ना.. तो क्या कभी तुम्हारी भाई ने मुझे रोका है.. या कभी बाहर कुछ ऐसा-वैसा हुआ है.. जो तुम डरती हो?

रश्मि शरमाते हुए बोली- अच्छा भाभी अब बस भी करो न.. क्यों भैया के सामने मेरी वाट लगाने में लगी हुई हैं।
रश्मि की इस बात पर मैं और सूरज दोनों हँसने लगे। मैं महसूस कर चुकी थी कि सूरज को अपनी सग़ी बहन की नंगी टाँगों को देख कर बहुत अच्छा लगा था।

मैं सोच रही थी कि अगर रश्मि भी मेरे जैसे ही कपड़े पहने.. तो सूरज की तो फट ही जाएगी और फिर मैं देखूँगी कि अपनी बहन पर नज़र डालने से कैसे वो खुद को रोकता है।

मेरे दिल में सिर्फ़ और सिर्फ़ शरारत थी कि मैं एक भाई को उसकी बहन की जरिए से टीज़ करूँ और देखूँ कि आख़िर एक भाई कितना ज़ब्त कर सकता है.. या अपनी बहन कि जिस्म को किस हद तक देख सकता है।

कुछ दिन की लिए रश्मि को अपनी कॉलेज से छुट्टी करनी पड़ी और इन दिनों वो घर पर ही रहती थी।

मैं उसकी रोज़ाना मूव लगा कर मालिश करती थी.. लेकिन हमेशा ही मेरी यही कोशिश होती थी कि मैं उसकी टाँगों की मालिश उसके भाई के सामने ही करूँ.. ताकि उसे अपनी बहन के जिस्म से आँखें सेंकने का मौका मिल सके । उधर सूरज का भी यही हाल था कि जब भी मैं रश्मि को क्रीम लगाती.. तो वो आस-पास ही भटकता रहता था।

इसी दौरान मैंने रश्मि को एक जीन्स लाकर दी
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और उसने बहुत ही शरमाते हुए एक लोंग शर्ट के साथ पहनी।
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मैंने भी उसको टी-शर्ट पहनने पर जोर नहीं दिया कि चलो शुरू तो कराया.. तो एक दिन इसको सेक्सी कपड़े भी पहना दूँगी।

जब सूरज जॉब से वापिस आया तो रश्मि उस जीन्स में बाहर ही नहीं आ रही थी। बड़ी मुश्किल से वो बाहर आई तो उसका चेहरा शर्म से सुर्ख हो रहा था और वो नजरें ऊपर नहीं कर पा रही थी।

हालांकि उसकी शर्ट ने उसकी पूरी जीन्स को छुपाया हुआ था और उसकी जीन्स सिर्फ़ घुटनों से नीचे से ही नज़र आ रही थी।
वो बाहर आई तो वो अपनी कमीज़ को अपने जिस्म के साथ चिपका रही थी और नीचे को खींच रही थी.. जैसे कि अपनी जीन्स को छुपाना चाहती हो।

सूरज ने उसे देखा तो पहली तो हैरान हुआ और फिर जोर-जोर से हँसने लगा.. जिसे देख कर मैं भी हँसने लगी।
उधर रश्मि का और भी बुरा हाल हो गया.. शर्म से उसका चेहरा रोने वाला हो रहा था।
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मैं- देख लो सूरज .. आज बड़ी मुश्किल से तुम्हारी इस चहेती बैकवर्ड माइंडेड बहन को जीन्स पहनाई है.

अपडेट 4

आपने अभी तक पढ़ा..
मैं- देख लो सूरज .. आज बड़ी मुश्किल से तुम्हारी इस चहेती बैकवर्ड माइंडेड बहन को जीन्स पहनाई है और इसकी तो शरम ही नहीं जा रही है.. देखो तो सही क्या कोई खराबी है इसमें.. जो इसने पहनी हुई है?

अब आगे ..

सूरज ने रश्मि की तरफ ऊपर से नीचे तक देखा और बोला- नहीं यार.. बिल्कुल परफेक्ट है। रश्मि तुम तो ऐसे ही घबरा रही हो.. अरे काजल तुमने इसे कोई शर्ट लेकर नहीं दी क्या?

मैं- यार.. मैंने इसके लिए वो भी ले देनी थी.. लेकिन इसने साफ़-साफ़ इन्कार कर दिया कि मैं टी-शर्ट नहीं पहनूंगी… इसलिए मैं नहीं ले कर आई।
सूरज - चलो फिर किसी दिन ला देना… जस्ट रिलेक्स करो रश्मि .. क्यों परेशान हो रही हो.. यह तो आजकल सब लड़कियाँ कॉलेज में और बाहर भी पहनती हैं।

फिर हम सबने खाना खाया और अपने-अपने कमरों में आ गए।

धीरे-धीरे रश्मि को जीन्स की आदत होने लगी और वो फ्रीली घर में जीन्स पहनने लगी.. लेकिन अभी भी उसने कभी भी टी-शर्ट नहीं पहनी थी।
अब मेरा अगला कदम उसको लेगिंग पहनाने का था..

जिसमें उसके जिस्म की निचले हिस्से की पूरी गोलाइयां उसके भाई की नज़रों के सामने आ जातीं । काफ़ी बार मैंने उससे कहा.. लेकिन वो शर्मा जाती थी और मेरी बात मानने को तैयार नहीं होती थी।

एक रोज़ मैं और रश्मि दोनों घर पर अकेले थे। सूरज के जाने के बाद जब हम काम से फुर्सत हुए .. तो मेरे दिमाग में एक ख्याल आया । मैंने अपनी एक ब्लैक कलर की लेगिंग निकाली और रश्मि को अपने कमरे में बुलाया ।

वो आई तो मैंने उससे कहा- रश्मि देखो इस वक़्त तो तुम्हारे भैया भी घर पर नहीं हैं.. तो तुम एक बार मुझे यह लेगिंग पहन कर तो दिखाओ।

रश्मि शरम से सुर्ख हो गई और इन्कार करने लगी.. लेकिन मैंने भी आज.. उसकी बात ना मानने का पक्का इरादा कर लिया हुआ था।
जब मैं उससे जिद करती रही तो फिर वो मानी और मेरी ब्लैक लेगिंग लेकर बाथरूम में चली गई।

कुछ देर के बाद रश्मि अपनी सलवार उतार कर मेरी वाली ब्लैक टाइट लेगिंग पहन कर बाथरूम से बाहर आई और बाथरूम के दरवाजे के पास ही खड़ी हो गई।
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उस देख कर मेरी आँखें चमक उठीं.. वो टाइट ब्लैक लेगिंग रश्मि की खूबसूरत और सुडौल टाँगों पर बेहद प्यारी और सेक्सी लग रही थी।
उसकी टाँगों का हर एक कर्व उसमें बहुत ही प्यारा और अट्रॅक्टिव लग रहा था। रश्मि मुझसे दूर अपनी नजरें झुका कर खड़ी हुई थी और उसके चेहरे पर एक शर्मीली सी मुस्कान थी।
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मैंने उसे अपने पास आने को कहा.. वो आहिस्ता-आहिस्ता चलती हुई मेरी पास आई.. तो मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने पास बिस्तर पर बैठा लिया।
ऊपर से उसने अभी भी अपनी लंबी सी कमीज़ पहनी हुई थी। मैंने अपने पास बैठा कर अपना हाथ उसकी टाँग के ऊपर रखा और आहिस्ता-आहिस्ता सहलाने लगी और बोली- देखो इस लेगिंग में तुम कितनी खूबसूरत लग रही हो।

रश्मि शर्मा कर बोली- लेकिन भाभी इस लेग्गी में तो पूरे का पूरा जिस्म जैसे नंगा ही लग रहा है।
मैं मुस्करा कर बोली- अरे पगली ऐसा क्यों सोचती हो तुम.. यह तो बन्दी की खुद महसूस करने की बात है ना.. अब मुझे देखो.. मैं तो यह पहन कर बाहर भी चली जाती हूँ और तुम्हारे भैया कोई ऐतराज़ भी नहीं करते हैं।

रश्मि मेरी तरफ देख कर शरमाती हुई बोली- भाभी आपने तो हद ही की है.. भला इतनी खुले गले के कपड़े भी कोई पहनता है क्या?
रश्मि ने मेरे डीप और लो-नेक गले की तरफ इशारा करते हुए कहा.. जिसमें से मेरी चूचियों का ऊपरी हिस्सा और क्लीवेज साफ़-साफ़ नज़र आ रहा था।

मैंने मुस्करा कर अपनी गले की तरफ देखा और अपना हाथ रश्मि की टाँग पर ऊपर की तरफ.. जो उसकी टाइट लेग्गी में साफ़ नज़र आ रही थी.. पर ले जाते हुए बोली- अरे यह सब तेरे भैया की ही फरमाइश तो है.. वो ही मुझे घर में ऐसी सेक्सी हालत में ही देखना चाहते हैं.. तो फिर मैं क्या कर सकती हूँ।

मेरी बात पर रश्मि हँसने लगी।

रश्मि - भाभी क्या आपको ऐसे कपड़ों में कुछ गलत फील नहीं होता क्या.. या कोई परेशानी तो नहीं होती.. जब बाहर लोग आपको देखते हैं तब?

मैं मुस्कुराई और बोली- अरे बस शुरू-शुरू में होता था.. लेकिन अब मैं आदी हो गई हूँ । अब तो हर लड़की ही ऐसा ही ड्रेस पहनती है.. फैशन ही इस चीज़ का है.. तो अब क्या कर सकते हैं.. अगर फैशन के साथ ना चली.. तो ‘पेण्डू’ ही लगूँगी ना.. इसलिए अब मुझे दूसरों की गंदी नजरें भी बुरी नहीं लगतीं.. बल्कि सच पूछो तो मुझे मज़ा भी आता है.. जब कोई मेरे जिस्म को ऐसी नजरों से देख रहा हो.. पता है इससे औरत को संतुष्टि होती है कि उसका जिस्म इतना अट्रॅक्टिव है कि वो मर्दों की नज़रों को अपनी तरफ खींच सकी।

रश्मि मेरी बातें हैरान होकर सुन रही थी लेकिन आज उसका दिमाग कुछ-कुछ.. जैसे मेरी बातों को समझ भी रहा था।

मैंने उसे तसल्ली से समझाया- देख तू मेरी बहन की तरह है.. तो मुझे ही तेरा ख्याल रखना है ना.. कि तू वक़्त के साथ-साथ चले.. ताकि कल को तेरा भी किसी अच्छी जगह पर रिश्ता हो जाए और तू अपने पति के साथ अपनी ज़िंदगी एंजाय कर सके । अरे यह जो थोड़ा बहुत जिस्म को शो करना होता है ना.. यह तो बस ऐसे ही है और अब तो एक रुटीन ही बन गया है.. इस बात को कोई भी माइंड नहीं करता।

रश्मि - लेकिन भाभी वो भैया?
मैं- तू क्या समझती है कि यह जो लड़कियाँ बाहर इतनी टाइट जीन्स और लेग्गी पहन कर फिरती हैं.. तो क्या उनके घर में उनके बाप या भाई नहीं होते क्या? अरे पगली सब ही होते हैं.. लेकिन वो लोग अब इस चीज़ को माइंड नहीं करते और वक़्त कि मुताबिक़ चलते हैं.. ऐसे ही तू भी बस अपने भाई से डरती रहती है.. मैं तुमको यकीन दिलाती हूँ कि वो कुछ नहीं कहेंगे तुझे. और अगर कोई ऐसी-वैसी बात की.. तो मैं खुद उनको सम्भाल लूँगी.. और फिर अपना घर तो इस सबकी प्रैक्टिस करने के लिए सबसे अच्छी जगह है..

रश्मि शायद मेरी बात समझ गई थी.. मैंने उससे कहा- अभी आज तू मेरी वाली यही लेग्गी पहन ले.. फिर मैं तुझे तेरी साइज़ की और भी प्यारी प्यारी सी नई ला दूँगी।

रश्मि शर्मा गई लेकिन कुछ बोली नहीं । फिर मैं उसे लेकर रसोई में आ गई और हम लोग खाना तैयार करने लगे.. क्योंकि सूरज के आने का टाइम भी हो रहा था। काम करते हुए रश्मि थोड़ा घबरा भी रही थी.. एक-दो बार उसने मुझसे कहा भी कि भाभी मैं चेंज करना चाहती हूँ.. लेकिन मैंने बड़ी मुश्किल से उसे मना ही लिया कि वो आज अपने भाई के सामने भी यह लेग्गी पहनेगी।

जैसे ही डोर पर सूरज की बेल बजी.. तो रश्मि ने मुझसे कहा- जाओ दरवाज़ा आप ही खोलो।

खुद वो रसोई मैं ही रुक गई । मैंने मुस्करा कर उसे देखा और फिर दरवाजा खोलने बाहर आ गई। मैंने दरवाज़ा खोल कर जैसे ही सूरज अपनी बाइक पार्क कर रहा था.. तो मैंने उसे बताया।

मैं- सूरज.. देखो आज रश्मि ने बहुत मुश्किल से हिम्मत करके लेग्गी पहनी है.. तुम से बहुत डर रही थी..

बस तुम को उसकी तरफ कोई तवज्जो नहीं देनी और ना ही उससे कुछ कहना.. ना कोई कमेंट देना है.. और उसकी तरफ ऐसे ही नॉर्मल रहना है.. जैसे कि रोज़ उससे व्यवहार करते हो.. ताकि वो थोड़ी सामान्य हो जाए और आहिस्ता-आहिस्ता इस नई ड्रेसिंग की आदी हो सके। अगर तुमने कोई ऐसी-वैसी बात की.. तो फिर वो दोबारा से अपनी पहली वाली लाइफ में चली जाएगी।

मुझे पता था कि सूरज के लिए अपनी बहन की टाँगों को टाइट लेगिंग में देखने से खुद को रोकना बहुत मुश्किल हो जाएगा.. लेकिन मैं तो खुद ही उसे थोड़ा और तड़पाना चाहती थी और दूसरी बात यह भी है कि सच में मैं रश्मि को थोड़ा कंफर्टबल भी करना चाहती थी ताकि आइन्दा भी उसे ऐसे और इससे भी थोड़ा ज्यादा ओपन कपड़े पहनने में आसानी हो सके।

बहरहाल सूरज ने मेरी बात मान ली और बोला- अच्छा ठीक है।
अन्दर आ कर सूरज ने अपने कमरे में जाकर चेंज किया। फिर वो फ्रेश होकर वापिस आया और लंच करने कि लिए बैठ गया।

मैं रसोई में गई और कुछ बर्तन ले आई और फिर रश्मि को भी खाना लेकर आने का कहा । मैं सूरज के पास बैठ गई और रश्मि का वेट करने लगी।

अपडेट 5

आपने अभी तक पढ़ा..
मैं- सूरज.. देखो आज रश्मि ने बहुत मुश्किल से हिम्मत करके लेग्गी पहनी है.. तुम से बहुत डर रही थी.. बस तुम को उसकी तरफ कोई ध्यान नहीं देनी और ना ही उससे कुछ कहना.. ना कोई कमेंट देना है.. और उसकी तरफ ऐसे ही नॉर्मल रहना है.. जैसे कि रोज़ उससे व्यवहार करते हो.. ताकि वो थोड़ी सामान्य हो जाए और आहिस्ता-आहिस्ता इस नई ड्रेसिंग की आदी हो सके। अगर तुमने कोई ऐसी-वैसी बात की.. तो फिर वो दोबारा से अपनी पहली वाली लाइफ में चली जाएगी।

मुझे पता था कि सूरज के लिए अपनी बहन की टाँगों को टाइट लेगिंग में देखने से खुद को रोकना बहुत मुश्किल हो जाएगा.. लेकिन मैं तो खुद ही उसे थोड़ा और तड़पाना चाहती थी और दूसरी बात यह भी है कि सच में मैं रश्मि को थोड़ा कंफर्टबल भी करना चाहती थी ताकि आइन्दा भी उसे ऐसे और इससे भी थोड़ा ज्यादा ओपन कपड़े पहनने में आसानी हो सके।

बहरहाल सूरज ने मेरी बात मान ली और बोला- अच्छा ठीक है।
अन्दर आ कर सूरज ने अपने कमरे में जाकर चेंज किया। फिर वो फ्रेश होकर वापिस आया और लंच करने कि लिए बैठ गया।

मैं रसोई में गई और कुछ बर्तन ले आई और फिर रश्मि को भी खाना लेकर आने का कहा। मैं सूरज के पास बैठ गई और रश्मि का वेट करने लगी।
अब आगे..

थोड़ी देर के बाद रश्मि खाने की ट्रे लेकर आई.. तो उसका चेहरा शर्म से सुर्ख हो रहा था.. लेकिन जैसे ही वो बाहर आई तो सूरज ने उसकी तरफ से अपनी नज़र हटा लीं और अख़बार देखने लगा।

फिर रश्मि ने खाना टेबल पर रखा और मेरे साथ ही बैठ गई । हम तीनों ने हमेशा की तरह खाना खाना शुरू कर दिया और इधर-उधर की बातें करने लगे।
सूरज रश्मि से उसकी पढ़ाई और कॉलेज की बातें करने लगा ।

आहिस्ता-आहिस्ता रश्मि भी नॉर्मल होने लगी । उसके चेहरे पर जो परेशानी थी.. वो खत्म होने लगी और वो काफ़ी रिलेक्स हो गई.. क्योंकि उसे अहसास हो गया था कि उसका भाई उससे कुछ नहीं कह रहा है।
सब कुछ वैसा ही हो रहा था.. जैसे कि यह सब एक आम सी बातें ही हो।

खाने के दौरान मैंने एक-दो बार रश्मि को पानी और कुछ और लाने के लिए रसोई में भी भेजा.. ताकि सूरज का रिस्पॉन्स देख सकूँ और वो भी अपनी बहन को पहली बार चुस्त लेग्गी में देख सके ।
हुआ भी ऐसा ही कि जैसे ही रश्मि उठ कर गई..
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तो फ़ौरन ही सूरज की नजरें उसकी तरफ चली गईं और वो अपनी बहन की लेग्गी में नज़र आती हुई टाँगों को देखने लगा।
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मैं दिल ही दिल में मुस्कुराई और बोली- अच्छी लग रही है ना.. इस पर लेग्गी.. यह तो मैंने उसे अभी अपनी पहनाई है.. अब एक-आध दिन में मैं उसे उसकी साइज़ की ही ला दूँगी।
सूरज थोड़ा सा चौंका और बोला- हाँ ला देना उसे भी..

वो ज़ाहिर यह कर रहा था कि उसे इसमें कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं है कि उसकी बहन ने क्या पहना हुआ है.. लेकिन मैं जानती थी कि उसे भी अपनी बहन को ऐसी ड्रेस में देखने का कितना शौक़ है।
मैंने सारी बातें अपनी और सूरज की कल्पनाओं में ही रहने दीं और खाना खाने लगी.. तभी रश्मि भी वापिस आ गई।
खाना खाकर मैं और सूरज अपने कमरे में आ गए और रश्मि अपने कमरे में चली गई।

शाम को हम कमरे से बाहर आए तो रश्मि चाय बना चुकी हुई थी। वो चाय ले आई और हम लोग टीवी देखते हुए चाय पीने लगे। एक चीज़ देख कर मुझे खुशी हुई कि रश्मि ने लेग्गी चेंज नहीं की थी और अभी भी उसी लेग्गी में थी। शायद अब वो कंफर्टबल हो गई थी कि इस ड्रेस को पहनने में भी कोई परेशानी नहीं है।

जब वो टीवी देख रही थी तो उसकी शर्ट भी बेख़याली में उसकी जाँघों तक आ गई थी और मैं नोट कर रही थी कि सूरज की नज़र भी बार-बार उसकी लेग्गी की तरफ ही जा रही थी..
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और वो उसकी टाँगों और जाँघों को देखता जाता था।
मैं दिल ही दिल में मुस्करा रही थी कि कैसे एक भाई अपनी बहन के जिस्म को ताक रहा है और इस चीज़ को देख कर मेरे अन्दर एक अजीब सी लज़्ज़त की लहरें दौड़ रही थीं।

मैं इस चीज़ को इसी तरह आहिस्ता-आहिस्ता और भी आगे बढ़ाना चाहती थी। मैं देखना चाहती थी कि एक मर्द की लस्ट और हवस दूसरी औरतों की लिए तो होती ही है.. तो अपनी सग़ी बहन के लिए किस हद तक जा सकती है।

कुछ दिन में रश्मि अब घर में लेग्गी और जीन्स पहनने की आदी हो गई और बहुत रिलेक्स होकर घर में डोलती फिरती थी। उसके भाई सूरज की तो मजे हो गए थे.. वो अपनी बहन और मुझसे नज़र बचा कर वो रश्मि की गोरी टाँगों को देखता रहता था।

मैंने रश्मि को 3-4 लैगीज उसकी साइज़ की ला दी थीं.. जिनमें से एक स्किन कलर की थी.. एक ब्लैक एक रेड और एक वाइट थी।
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जब रश्मि ने अपनी साइज़ की लेग्गी पहनी.. तो वो उस कि जिस्म पर और भी फिट आई और उसमें वो और भी सेक्सी लग रही थी। लेकिन मैंने उसे कुछ भी अहसास नहीं होने दिया । पहले दिन के बाद से अब तक कभी भी मैंने सूरज से दोबारा इस टॉपिक पर बात नहीं की थी और ना ही उसने कोई बात की.. बस वो छुप कर सब कुछ देखता रहता और अपनी बहन के जिस्म के नज़ारे एंजाय करता था।

एक रोज़ मैंने रश्मि को अपनी एक टी-शर्ट निकाल कर दी कि इसे पहन लो। बहुत समझाने के बाद जब उसने वो शर्ट पहनी.. तो वो उसको जरा ढीली थी और उसके चूतड़ों को भी कवर कर रही थी। लेकिन उससे नीचे उसकी जाँघों को बिल्कुल भी नहीं ढक रही थी।
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उसने मेरे कहने पर नीचे लेग्गी पहन ली, उसकी चुस्त लैगी में फंसे हुए उसके चूतड़ों को तो मेरी शर्ट ने कवर कर लिया थी.. लेकिन उससे नीचे उसकी जाँघों और टाँगें और भी सेक्सी और अट्रॅक्टिव लग रही थीं।
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उसे देख कर मैंने उसकी तारीफ की और कहा- रश्मि अब तुमको मैं तुम्हारी साइज़ की फिटिंग वाली टी-शर्ट लाकर दूँगी.. फिर मेरी ननद रानी और भी प्यारी लगेगी।

मैंने जानबूझ कर सेक्सी की बजाय प्यारी का लफ्ज़ इस्तेमाल किया था.. ताकि उसे बुरा ना लगे और मेरी बुलबुल मेरे हाथों से ना निकल जाए।

आज मेरी टी-शर्ट पहन कर उसने अपने भाई का भी जिक्र नहीं किया था.. क्योंकि उसे भी अब पता चल गया था कि उसके भैया भी उसकी ड्रेसिंग पर कोई ऐतराज़ नहीं करते हैं। इसी सोच कि चलते आज उसने लेग्गी के साथ टी-शर्ट पहन कर एक काफ़ी बोल्ड क़दम उठा लिया था।

जब सूरज घर आया.. तो आज जब उसने अपनी बहन को देखा.. तो उसका मुँह खुला का खुला ही रह गया।
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जब वो रसोई में काम करती हुई अपनी बहन को देख रहा था.. मैं बेडरूम से छुप कर देखते हुए उसके चेहरे के भावों को देख रही थी।
कुछ देर तक तो वो ऐसे ही चुपचाप देखता रहा.. फिर अचानक ही इधर-उधर मुझे देखने लगा.. जैसे कि उसे पकड़े जाने का डर हो।
मैंने खुद को पीछे हटा लिया ताकि उसे अपने गलती का अहसास या शर्मिंदगी ना हो।

खाने के दौरान भी रश्मि थोड़ी सी अनकंफर्टबल थी.. लेकिन सूरज भी चुप-चुप सा था और चोरी-चोरी रश्मि की टाँगों की तरफ ही देख रहा था।

शाम को जब हम लोग टीवी देख रहे थे.. तो भी सूरज की नजरें अपनी बहन के जिस्म के निचले हिस्से पर ही भटक रही थीं.. क्योंकि आज उसके जिस्म का पहले से ज्यादा हिस्सा नज़र आ रहा था और उसी से अंदाज़ा हो रहा था कि उसकी बहन की जाँघों की शेप कितनी प्यारी है।
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सूरज अपनी बहन के जिस्म को देख कर मजे ले रहा था और मैं सूरज की हालत को देख कर एंजाय कर रही थी।
मैं इस अलग किस्म की हवस का नज़ारा कर रही थी।

अब तो जब भी सूरज इस तरह अपनी बहन के जिस्म को देख रहा होता था..

तो मेरे अन्दर भी तड़फ और गर्मी सी पैदा होने लगती थी।
सूरज की नज़र अपनी बहन के जिस्म पर होती थीं.. लेकिन गीलापन मेरी चूत कि अन्दर होने लगता था।
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अपडेट 6

आपने अभी तक पढ़ा..
शाम को जब हम लोग टीवी देख रहे थे.. तो भी सूरज की नजरें अपनी बहन के जिस्म के निचले हिस्से पर ही भटक रही थीं.. क्योंकि आज उसके जिस्म का पहले से ज्यादा हिस्सा नज़र आ रहा था और उसी से अंदाज़ा हो रहा था कि उसकी बहन की जाँघों की शेप कितनी प्यारी है।

सूरज अपनी बहन के जिस्म को देख कर मजे ले रहा था और मैं सूरज की हालत को देख कर एंजाय कर रही थी।
मैं इस अलग किस्म की हवस का नज़ारा कर रही थी।
अब तो जब भी सूरज इस तरह अपनी बहन के जिस्म को देख रहा होता था.. तो मेरे अन्दर भी तड़फ और गर्मी सी पैदा होने लगती थी।
सूरज की नज़र अपनी बहन के जिस्म पर होती थीं.. लेकिन गीलापन मेरी चूत कि अन्दर होने लगता था।

अब आगे..

अब मैंने रश्मि को नए सलवार कमीज़ भी सिलवा कर दिए। उसकी शर्ट्स अब लेटेस्ट फैशन की मुताबिक़ थीं.. जो कि शॉर्ट लेंग्थ और बहुत ही टाइट सिली हुई थीं।
उसके सीने की उभारों पर बहुत टाइट फिटिंग थीं.. जिसकी वजह से उसकी चूचियां बहुत ज्यादा उभर गई थीं।
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कमर पर पीछे ज़िप होने की वजह से उसकी शर्ट उसके जिस्म पर बहुत ही फँस कर आती थी. और शर्ट की लम्बाई भी सिर्फ़ और सिर्फ़ उसकी हाफ जाँघों तक होती थी।
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मैंने उसकी रुटीन से हट कर उसके गले को भी थोड़ा डीप और लो नेक करवा दिया था । गला ज्यादा डीप नहीं था.. लेकिन उसका खूबसूरत गोरा-गोरा सीना नंगा नज़र आता था.. लेकिन क्लीवेज या चूचियां नज़र नहीं आती थीं।

ज़ाहिर है कि अभी वो इतनी बोल्ड नहीं हुई थी कि अपनी चूचियों को मेरी तरह से शो करती.. लेकिन यह बात ज़रूर थी कि जब वो झुकती थी.. तो अनायास ही उसकी चूचियां और क्लीवेज का कुछ हिस्सा ज़रूर नज़र आ सकता था।
मुझे तो नज़र आ भी जाता था।
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अब अक्सर मैं उसे घर में टाइट कुरती और लेग्गी ही पहनाती थी.. जिसमें उसका जिस्म और भी खिल उठता था। उसका खूबसूरत और सुडौल जिस्म बहुत ज्यादा उभर कर आ जाता था। नीचे उसकी जाँघें और चूतड़ चिपकी हुई लेग्गी में मानो नंगे ही नज़र आ रहे होते और ऊपर से उसके कुरते में फंसे हुए उसके चूचे भी बहुत ही खूबसूरत लगते थे।

आहिस्ता-आहिस्ता मेरी तरह ही उसने भी घर में दुपट्टा लेना छोड़ दिया था। इस तरह की टाइट ड्रेस में अपनी बहन को देख कर तो सूरज की चाँदी ही चाँदी हो जाती थी और उसकी नजरें अपनी बहन के जिस्म पर से हटती ही नहीं थीं।
मुझे महसूस होने लगा था कि आहिस्ता-आहिस्ता रश्मि को भी पता चल रहा है कि उसका भाई उसके जिस्म को देखता है.. लेकिन कोई ऐतराज़ नहीं करता।

तो उसे भी काफ़ी हद तक रिलेक्स फील होता और वो भी कोई ऐतराज़ ना करती कि भाई देख रहा है तो क्यों देख रहा है।

मैंने यह भी महसूस किया था कि सूरज अपनी बहन के नीचे झुकने का इंतज़ार रहता था.. चाहे वो उसकी आगे को हों या पीछे से.. क्योंकि उसे इस तरह थोड़ी बहुत अपनी बहन की चूचियों की झलक भी नज़र आ जातीं थी।

एक रोज़ ऐसा हुआ कि कॉलेज से आकर रश्मि ने एक सफ़ेद रंग की कुरती और स्किन कलर की लेगिंग पहन ली। सूरज अभी तक नहीं आया था..
मौसम भी कुछ खराब लग रहा था और इसलिए रश्मि कॉलेज से खुद ही पहले ही आ गई थी।
मैंने सूरज को भी कॉल कर दी थी कि रश्मि घर आ गई है.. तो वो भी आ जाएं।
तो सूरज आज ड्यूटी ऑफ करके सीधा ही घर आ गया।

रश्मि ने जो सफ़ेद कुरती पहनी थी उसके नीचे उसने काली ब्रेजियर पहन ली थी।
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गर्मी का मौसम होने की वजह से कुरती भी बहुत ही पतले कपड़े की थी.. लेकिन उसमें से जिस्म सीधे तौर पर नज़र नहीं आता था.. बस हल्की सी झलक ही दिखती थी कि नीचे का बदन कैसा गोरा है।

उसकी बैक और फ्रंट पर उसकी ब्लैक ब्रेजियर की स्ट्रेप्स भी हल्की-हल्की नज़र आती थीं। उसकी कुरती की लम्बाई भी ज्यादा नहीं थी.. हमेशा की तरह सिर्फ़ उसकी हाफ जाँघों तक ही थी। नीचे स्किन कलर की लेग्गी में उसकी खूबसूरत टांगें और जाँघें बहुत ही प्यारी लग रही थीं और सेक्सी भी..

अपना ड्रेस चेंज करके रश्मि हमेशा की तरह मेरी साथ रसोई में आकर लग गई । अब मैं उससे ज्यादा ड्रेसिंग की बारे में बात नहीं करती थी.. ताकि वो ईज़ी फील करे और किसी प्रेशर या ज़बरदस्ती की वजह से कोई भी काम ना करे।
यही वजह थी कि कॉलेज के माहौल और मेरे सपोर्ट की वजह से वो काफ़ी हद तक खुल चुकी थी।

सुबह सबके जाने के बाद मैंने कपड़े धो कर बाहर बरामदे में सूखने के लिए लटका दिए थे। बारिश का मौसम हो रहा था.. मुझे ख्याल आया कि मैं कपड़े उतार लाऊँ.. कहीं और ना भीग जाएं।

जैसे ही मैं रश्मि को बाहर से कपड़े उतार कर लाने का कहने लगी.. तो एकदम एक शैतानी ख्याल मेरे दिमाग में कूदा और मैं हौले से मुस्करा कर चुप होकर खामोश ही रह गई।

वो ही हुआ कि थोड़ी देर में बारिश शुरू हो गई.. लेकिन रश्मि को नहीं पता था कि बाहर कपड़े सूखने के लिए लटक रहे हैं.. इसलिए उसे उनको उठाने का ख्याल नहीं था.. बारिश थी भी काफ़ी तेज.. थोड़ी देर में ही घंटी बजी.. तो मैंने फ़ौरन ही जा कर गेट खोला और सूरज अपनी बाइक समेत अन्दर आ गया। बारिश की वजह से सूरज पूरी तरह से भीग चुका था। उसकी जीन्स और शर्ट भीग चुकी थी।
वो बोला- आज तो बारिश ने भिगो ही दिया है।
मैं भी मुस्कराई और हम दोनों अन्दर आ गए।

सूरज ने अपनी शर्ट उतारी और एक तरफ रख दी और कुर्सी पर बैठ गया।
अब मैंने रश्मि को आवाज़ दी- पानी लाओ अपने भैया के लिए।
वो फ़ौरन ही रसोई से पानी का गिलास भर कर ले आई।

जैसे ही सूरज की नज़र अपनी बहन की सेक्सी ड्रेस पर पड़ी.. तो एक लम्हे के लिए तो वो चकित ही हो गया.. लेकिन फिर उसने खुद को सम्भाला और फटाफट पानी का गिलास रश्मि से पकड़ कर पीने लगा।

रश्मि वापिस रसोई की तरफ बढ़ी.. तो पानी पीते हुए सूरज की नजरें अपनी बहन के मटकते चूतड़ों और जाँघों पर ही थीं।

अपडेट 7

आपने अभी तक पढ़ा..
पानी पीते हुए सूरज की नजरें अपनी बहन के मटकते चूतड़ों और जाँघों पर ही थीं।

अब आगे..

मैं हौले-हौले मुस्करा रही थी।
जैसे ही रश्मि रसोई में जाने लगी.. तो मैंने उसे आवाज़ दे कर रोका और कहा- रश्मि मुझे याद आया.. मैंने तो कपड़े धो कर बाहर डाले हुए हैं.. जल्दी से जाओ और इनको उतार लाओ.. वर्ना सारे कि सारे भीग जाएंगे।

‘जी भाभी..’ कह कर रश्मि बाहर सहन की तरफ चली गई और अब मैं अपनी प्लान के मुताबिक़ हो रहे ड्रामे के अगले हिस्से की इंतज़ार में थी।

बाहर तेज बारिश हो रही थी.. गर्मी कि इस मौसम में मेरी ननद रश्मि अपनी पतली सी कुरती और लेग्गी पहने हुई बाहर से कपड़े उतार रही थी और उसका भाई अन्दर बैठा हुआ था और शायद वो भी इंतज़ार था कि अब उसके सामने क्या नजारा आने वाला है।

क़रीब 5 मिनट बाद रश्मि कमरे के अन्दर आई तो उफ्फ़.. क्या हॉट मंज़र था.. कपड़े तो वो उतार लाई थी.. लेकिन उसके अपने कपड़े पूरी तरह से भीग चुके थे, सफ़ेद रंग की पतली सी कुरती बिल्कुल भीग कर उसके गोरे-गोरे जिस्म से चिपक चुकी थी,
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उसका गोरा गोरा बदन कुरती के नीचे से बिल्कुल साफ़ नंगा नज़र आ रहा था, उसकी चूचियों पर पहनी हुई काली रंग की ब्रेजियर भी बिल्कुल साफ़ दिखने लगी थी।
वो ब्रेजियर उसकी चूचियों से चिपक कर ऐसे दिख रही थी.. मानो उसने वो काली ब्रेजियर अपनी शर्ट के ऊपर से ही पहनी हुई हो।
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उसकी लेग्गी भी थी तो मोटी जर्सी कपड़े की.. मगर वो भी भीग कर और भी उसकी मोटी जाँघों और टाँगों से चिपक चुकी हुई थी।
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मेरी नजरें तो उसके जिस्म पर ही चिपक गई थीं।

वो मुड़ कर एक टेबल पर कपड़े रखने लगी.. उसकी कमर हमारी तरफ थी। उसकी कमर पर उसकी ब्रेजियर की स्ट्रेप और हुक बिल्कुल साफ़ नज़र आ रहा था और उसकी कमर भी कमीज़ में से भीगी हुई साफ़ दिख रही थी।
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साफ़ पता चल रहा था कि उसका जिस्म किस क़दर गोरा-चिट्टा है।
रश्मि को इस हालत में देख कर मेरी हालत ऐसी हो रही थी.. तो उसके अपने सगे भाई का हाल तो और भी पतला हो रहा था। उसकी नज़रें अपनी बहन के जिस्म पर से नहीं हट रही थीं और मैंने भी बिना उसको डिस्टर्ब किए.. उसे अपनी बहन के इस तरह नंगे हो रहे जिस्म का नज़ारा करने दिया।

जैसे ही रश्मि कपड़े रख कर मुड़ी तो सूरज मेरी तरफ देखने लगा और बोला- यार मुझे कोई कपड़े दो पहनने के लिए..
मैंने महसूस किया कि उसकी आवाज़ काँप रही थी।

रश्मि अपने कमरे की तरफ बढ़ी तो मैंने उससे पूछा- कहाँ जा रही हो?
वो बोली- भाभी मैं चेंज करके आती हूँ.. पूरे कपड़े भीग गए हैं..
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लेकिन मैं उसको इतनी आसानी से जाने दे कर उसके भाई का मज़ा खराब नहीं करना चाहती थी, मुझे उसे इसी हालत में रोके रखना था और उसे रुकने पर मजबूर करना था।

मैंने एक शर्ट पकड़ी और उससे कहा- रश्मि , तुम जल्दी से अपने भैया की यह शर्ट प्रेस कर दो.. मैं खाना देख लेती हूँ.. चूल्हे पर पड़ा है.. कब से नहीं देखा.. कहीं जल न जाए।
रश्मि इन्कार करना चाहती थी.. लेकिन फिर अपनी आदत की चलते चुप ही रही। उसने एक नज़र अपने भैया पर डाली.. जो कि वहीं चेयर पर बैठा.. अब एक मैगजीन देख रहा था.. और फिर रश्मि टीवी लाउंज के एक कोने में पड़े हुए इस्तती स्टैंड की तरफ बढ़ गई।

मैं रसोई में आ गई ताकि सूरज भी खुल कर अपनी बहन के जिस्म का दीदार कर सके।

जहाँ रश्मि खड़ी होकर शर्ट प्रेस कर रही थी.. वहाँ पर उसकी पीठ सूरज की तरफ थी।
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मैं छुप कर दोनों को देख सकती थी.. मैंने बाहर झाँका तो देखा कि सूरज की नज़रें अपनी बहन के जिस्म पर ही थीं और उसका एक हाथ अपने लंड को जीन्स के ऊपर से दबा रहा था।
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मैं समझ गई कि अपनी बहन के जिस्म को इस हालत में देख कर वो अपने लंड को खड़ा होने से नहीं रोक पा रहा है।
मैं दिल ही दिल में मुस्करा दी..

इतने में सूरज उठा और एक पजामा उठा कर रश्मि की तरफ बढ़ा। मैं समझ गई कि अब वो और क़रीब से अपनी बहन के जिस्म को देखना चाहता है।
पास जाकर उसने वो पजामा भी इस्तरी स्टैंड पर रखा और बोला- रश्मि इसे भी प्रेस कर दो..
यह कहते हुए उसकी नजरें अपनी बहन की चूचियों पर थीं.. जो कि गीली सफ़ेद कुरती में काली ब्रेजियर में साफ़ नज़र आ रही थीं।
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एक भरपूर नज़र डाल कर सूरज वापिस अपनी जगह पर आकर बैठ गया और जब तक रश्मि कपड़े प्रेस करती रही.. वो उसके जिस्म को ही देखता रहा।

जैसे ही रश्मि ने कपड़े प्रेस कर लिए तो अपने भाई से बोली- भैया, ले लें.. कपड़े प्रेस हो गए हैं..

अब मुझे पता था कि वो वापिस अपने कमरे में अपनी कपड़े बदलने के लिए जाएगी.. लेकिन मैं उसे रोकना चाहती थी इसलिए जैसे ही उसने अपने कमरे की तरफ क़दम बढ़ाए.. तो मैंने उसे आवाज़ दे दी- रश्मि .. जरा इधर तो आओ रसोई में थोड़ी देर के लिए..

जैसा कि मुझे पता था कि वो मेरी बात को नहीं टालेगी.. वो ही हुआ.. रश्मि सीधी उसी हालत में मेरे पास रसोई में आ गई।
मैंने उसे थोड़ा सा काम बताया तो वो बोली- भाभी मुझे चेंज कर आने दें..

मैंने उसके जिस्म की तरफ एक नज़र डाली और बहुत ही बेपरवाही से बोली- अरे अब क्या चेंज करना है.. कपड़े तो सूख ही चुके हैं.. अभी कुछ ही देर में पंखे के नीचे बिल्कुल ही खुश्क हो जाने हैं.. छोड़ो कपड़ों की फिकर.. तुम जल्दी से सलाद बना लो.. तो फिर हम लोग खाना खाते हैं..

पहले ही बहुत देर हो गई है..

रश्मि भी थोड़ी सी बेफिकर होकर रसोई के काम में लग गई और मैं दिल ही दिल में अपनी कामयाबी पर मुस्करा दी कि मैं आज एक भाई को उसकी बहन का नंगा जिस्म थोड़ा सा छुपी हुई हालत में दिखाने में कामयाब हो गई हूँ।

मुझे हँसी तो सूरज पर आ रही थी कि कैसे अपनी बहन के नंगी हो रहे जिस्म को देख रहा था।
अब मुझे इस पर हैरत नहीं होती थी.. बल्कि खुशी होती थी और मज़ा भी आता था। मेरा तो बस नहीं चल रहा था कि मैं कब रश्मि को उसके भाई के सामने बिल्कुल नंगी कर दूँ।

कुछ ही देर मैं हम सब लोग बैठे खाना खा रहे थे। रश्मि के कपड़े सूख चुके थे.. लेकिन उसकी काली ब्रेजियर अभी भी गीली थी.. जिसकी वजह से वो अब भी साफ़ नज़र आ रही थी।
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अब रश्मि को कोई फिकर नहीं थी.. उसे महसूस ही नहीं हो रहा था कि उसका अपना सगा भाई.. अपनी बीवी की मौजूदगी में भी.. उसकी नज़र बचा कर.. उसके जिस्म और उसकी ब्रेजियर और उसकी चूचियों को देख रहा है।

मेरी नज़रें तो सूरज की हर हरकत पर थीं कि कैसे खाना खाते हुए.. वो अपनी बहन की चूचियों को देख रहा है।

खाना खाने के बाद मुझे गरम लोहे पर एक और वार करने का ख्याल आया और मैंने अपने इस नए आइडिया पर फ़ौरन अमल करने का इरादा कर लिया।

अपडेट 8

आपने अभी तक पढ़ा..
मेरा तो बस नहीं चल रहा था कि मैं कब रश्मि को उसके भाई के सामने बिल्कुल नंगी कर दूँ।

कुछ ही देर मैं हम सब लोग बैठे खाना खा रहे थे। रश्मि के कपड़े सूख चुके थे.. लेकिन उसकी काली ब्रेजियर अभी भी गीली थी.. जिसकी वजह से वो अब भी साफ़ नज़र आ रही थी। अब रश्मि को कोई फिकर नहीं थी.. उसे महसूस ही नहीं हो रहा था कि उसका अपना सगा भाई.. अपनी बीवी की मौजूदगी में भी.. उसकी नज़र बचा कर.. उसके जिस्म और उसकी ब्रेजियर और उसकी चूचियों को देख रहा है।
मेरी नज़रें तो सूरज की हर हरकत पर थीं कि कैसे खाना खाते हुए.. वो अपनी बहन की चूचियों को देख रहा है।
खाना खाने के बाद मुझे गरम लोहे पर एक और वार करने का ख्याल आया और मैंने अपने इस नए आइडिया पर फ़ौरन अमल करने का इरादा कर लिया।

अब आगे..

बारिश रुक चुकी हुई थी और बाहर हल्की-हल्की हवा चल रही थी.. जिसके वजह से मौसम बहुत ही प्यारा हो रहा था, मैंने सूरज से कहा- आज मौसम बहुत अच्छा हो रहा है.. चलो मुझे और रश्मि को बाहर घुमाने लेकर चलो।
मेरी बात सुन कर रश्मि भी खुशी से उछल पड़ी और बोली- हाँ भैया.. भाभी ठीक कह रही हैं.. बाहर चलते हैं।
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सूरज ने एक नज़र अपनी बहन की चूचियों पर डाली और फिर प्रोग्राम ओके कर दिया और बोला- बस तैयार हो जाओ.. फिर चलते हैं।

सूरज अपने कमरे में चला गया.. मैं और रश्मि ने बर्तन समेट कर रसोई में रख कर काम ओके किया और बाहर आ गए ।
मैं रश्मि के साथ उसके कमरे में गई और उसे एक उसकी टाइट सी जीन्स और एक नई टी-शर्ट निकाल कर दी।

मैं बोली- आज तुम यह पहन कर चलोगी बाहर.. नहीं तो मैं तुमको लेकर भी ना जाऊँगी।
रश्मि मेरी बात सुन कर मुस्कुराई और बोली- ठीक है भाभी.. जैसा आप कहो।
मैंने उसके गाल पर एक हल्का सा किस किया और बोली- शाबाश मेरी प्यारी ननद रानी..

फिर मैं अपने कमरे में आ गई।
मैंने भी जीन्स और कुरती पहन ली..
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कुरती तो हाफ जाँघों तक ही थी और जीन्स भी टाइट थी।
सूरज भी तैयार हो चुका हुआ था।

हम दोनों तैयार होकर टीवी लाउंज में आ गए और मैं चाय बनाने लगी।
जैसे ही मैं चाय लेकर आई तो रश्मि भी आ गई।
उसे देख कर तो मेरा और सूरज दोनों का मुँह खुला का खुला रह गया।

उसकी टाइट टी-शर्ट में उसकी खूबसूरत चूचियों बहुत ज्यादा गजब ढा रही थीं उसकी चूचियाँ बहुत ही सख़्त और अकड़ी हुई और जानदार शानदार लग रही थीं।
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टी-शर्ट उसकी जीन्स की शुरुआत तक ही थी और नीचे टाइट जीन्स में रश्मि की गाण्ड बहुत ज्यादा उभर रही थी।
उसकी जीन्स और टी-शर्ट उसके जिस्म पर बिल्कुल फंसे हुए थे.. लेकिन वो बहुत ही प्यारी लग रही थी।

हमने चाय पी और मैं बोली- सूरज आज तुम्हारी बहन को कोई नहीं कह सकता की यह पेण्डू ('pendu' refers to anyone from a village) है.. यह तो आज पूरी की पूरी शहरी लड़की लग रही है।
मेरी बात सुन कर रश्मि शर्मा गई।
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फिर हम तीनों सैर के लिए घर से बाहर निकले और सूरज ने अपनी बाइक निकाल ली।

घर को लॉक करके जब सूरज ने बाइक स्टार्ट की.. तो मैंने उसके पीछे बैठने की बजाए अपने प्रोग्राम के मुताबिक़ रश्मि को कहा कि वो अपने भाई के पीछे बैठे।

रश्मि को अंदाज़ा नहीं था कि मैं क्या सोच रही हूँ.. इसलिए वो चुप करके सूरज के पीछे बाइक पर बैठ गई।

यह तो मुझे ही पता था ना कि अब रश्मि का पूरा जिस्म अपने भाई के जिस्म से चिपक जाएगा और उसकी चूचियाँ पूरी तरह से सूरज की कमर से प्रेस हो जाना थीं और यही चीज़ मैं चाहती थी।
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आज मैं पहली बार सूरज को उसकी बहन के बदन का और उसकी चूचियों का स्पर्श महसूस करवाना चाहती थी।
रश्मि के बैठने के बाद मैं भी उछल कर बाइक पर पीछे बैठ गई और बैठते ही मैंने रश्मि को थोड़ा सा और आगे की तरफ दबा दिया।
अब मैं और रश्मि दोनों ही एक ही तरफ टाँगें करके बैठे हुई थीं और रश्मि का पूरे का पूरा जिस्म का अगला हिस्सा यानि उसकी चूचियाँ अपने भाई की पीठ के साथ चिपकी हुई थीं।

रश्मि ने अपना एक हाथ अपने भाई के कंधे पर रखा हुआ था और दूसरा एक साइड पर था। मैंने एक हाथ रश्मि की तरफ से डाल कर अपने पति सूरज की जाँघ पर रख दिया हुआ था।

जैसे ही बाइक चली तो मैंने आहिस्ता-आहिस्ता सूरज की जाँघ को अपने हाथ से सहलाना शुरू कर दिया।

एक-दो बार सूरज ने मेरे हाथ पर अपना हाथ रख कर मुझे रोकने की कोशिश की.. लेकिन मेरा हाथ नहीं रुका और मैंने आहिस्ता-आहिस्ता अपना हाथ सूरज की पैन्ट के ऊपर से उसके लण्ड पर रख दिया।

मुझे फील हुआ कि उसका लंड थोड़ा-थोड़ा अकड़ा हुआ है।

ज़ाहिर है कि अपनी बहन की सॉलिड चूचियों का टच अपनी पीठ पर फील करके वो कैसे बेखबर रह सकता था।

मैंने भी अब आहिस्ता-आहिस्ता उसके लण्ड पर उसकी पैन्ट के ऊपर से हाथ फेरना शुरू कर दिया.. जिससे उसका लंड और भी सख़्त होने लगा।

एक बार तो उसने मेरा हाथ अपने लंड पर अपनी हाथ के साथ भींच ही दिया। मेरी इन तमाम हरकतों से रश्मि बिल्कुल बेख़बर थी और पूरी तरह से बाइक की सैर और मौसम को एंजाय कर रही थी।

अब मैंने अपनी तवज्जो रश्मि की तरफ की और अपना चेहरा आहिस्ता से उसकी कंधे पर रख दिया.. जैसे सिर्फ़ नॉर्मल में ही रखा हो । धीरे-धीरे मैं उसकी गर्दन को अपने होंठों से सहलाने लगी।
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रश्मि को भी जैसे थोड़ी गुदगुदी सी फील हुई.. तो वो कसमसाने लगी ।
मैंने थोड़ा सा और आगे को खिसकते हुए उसे और भी अपने भाई की कमर के साथ चिपका दिया, फिर मैंने धीरे से उसके कान में कहा-
रश्मि देख लड़कें तुझे कैसे देख रही हैं..
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रश्मि ने मुस्करा कर थोड़ी सी गर्दन मोड़ कर मेरी तरफ देखा और बहुत धीरे से बोली- भाभी आपको भी तो देख रही हैं।
वो इतनी आहिस्ता से बोली थी.. ताकि उसका भाई उसकी आवाज़ ना सुन सके।

मैंने दोबारा से उसकी गर्दन पर अपनी गरम-गरम साँसें छोड़ते हुए कहा- आज तो तू क़यामत लग रही है।
रश्मि बोली- और भाभी आप तो हर रोज़ और हर वक़्त ही क़यामत लगती हो..
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मैंने धीरे से अपना दूसरा हाथ थोड़ा ऊपर को किया.. रश्मि की कमर पर रख दिया.. उसकी चूची के पास.. जस्ट उसकी ब्रा के लेवेल पर.. इस तरह हाथ रखने से मेरा हाथ उसकी चूची को छू रहा था और सूरज की कमर पर भी चल रहा था।
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मेरा दूसरा हाथ अभी भी सूरज की पैन्ट के ऊपर उसके लण्ड पर ही था।
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मैं महसूस कर रही थी कि जैसे-जैसे मैं और रश्मि धीरे-धीरे बातें कर रही थीं.. तो ज़रूर उसे भी हमारी आवाजें जाती होंगी.. जिसकी वजह से उसके लण्ड में हरकत सी हो रही थी। मैं इस बात को बिना किसी रुकावट के महसूस कर रही थी।

जैसे ही एक पार्क के पास सूरज ने बाइक रोकी.. तो मैंने हाथ हटाने से पहले उसके लण्ड को अपनी मुठ्ठी में लेकर जोर से एक बार दबा दिया.. ताकि वो बैठने ना पाए।
क्योंकि आपको तो पता ही है.. कि लंड है ही ऐसी चीज़ कि इसे जितना भी दबाओ.. यह उतना ही उछल कर खड़ा होता है.. और अकड़ता जाता है।

पार्क के गेट पर हम दोनों बाइक पर से उतर आईं और सूरज बाइक पार्किंग स्टैंड पर पार्क करने चला गया।

अपडेट 9

आपने अभी तक पढ़ा..

मेरा दूसरा हाथ अभी भी सूरज की पैन्ट के ऊपर उसके लण्ड पर ही था। मैं महसूस कर रही थी कि जैसे-जैसे मैं और रश्मि धीरे-धीरे बातें कर रही थीं.. तो ज़रूर उसे भी हमारी आवाजें जाती होंगी.. जिसकी वजह से उसके लण्ड में हरकत सी हो रही थी। मैं इस बात को बिना किसी रुकावट के महसूस कर रही थी।

जैसे ही एक पार्क के पास सूरज ने बाइक रोकी.. तो मैंने हाथ हटाने से पहले उसके लण्ड को अपनी मुठ्ठी में लेकर जोर से एक बार दबा दिया.. ताकि वो बैठने ना पाए।
क्योंकि आपको तो पता ही है.. कि लंड है ही ऐसी चीज़ कि इसे जितना भी दबाओ.. यह उतना ही उछल कर खड़ा होता है.. और अकड़ता जाता है।
पार्क के गेट पर हम दोनों बाइक पर से उतर आईं और सूरज बाइक पार्किंग स्टैंड पर पार्क करने चला गया।

अब आगे..

रश्मि बोली- भाभी मुझे तो बहुत ही अजीब लग रहा है.. इस ड्रेस में बड़ी ही शर्म सी महसूस हो रही है।

मैं- अरे पगली बिल्कुल ईज़ी होकर रहना और किसी किस्म की भी कोई बेवक़ूफों वाली हरकत ना करना और ना ही ऐसी शक़ल बनाना.. कुछ भी नहीं होगा.. बस तू देखती रहना कि दूसरी लड़कियों ने भी कैसे-कैसे कपड़े पहने हुए हैं.. फिर तुझे कोई भी शर्म महसूस नहीं होगी और ना ही अजीब लगेगा।
इससे पहले कि रश्मि कुछ और कहती सूरज भी हमारे पास आ गया और हम तीनों ही पार्क में चले गए।

अभी हम लोग थोड़ी ही दूर गए थे कि मैंने जानबूझ कर रश्मि का हाथ पकड़ा और सूरज से आगे-आगे चलने लगे उसे लेकर.. मक़सद मेरा इसमें यही था कि सूरज की नज़र अपनी बहन की ठुमकती गाण्ड पर पड़ती रहे और वो सिर्फ़ और सिर्फ़ यही देखता रहे और उसके दिमाग पर अपनी बहन के जिस्म के छूने से जो नशा सा हुआ है.. वो नशा ना उतर सके।
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मैंने महसूस किया कि हो भी ऐसा ही रहा था कि सूरज की नजरें अपनी बहन की टाइट जीन्स में फंसी हुई गाण्ड पर ही घूम रही थीं।
मैं और रश्मि इधर-उधर की बातें करते हुए चलते जा रहे थे। इधर-उधर जो भी लड़की किसी सेक्सी ड्रेस में नज़र आती.. तो मैं उसकी तरफ भी इशारा करके रश्मि को बताती जाती थी।

इस तरह इशारा करने से सूरज की नज़र भी उस लड़की की तरफ ज़रूर जाती थी और उसे भी कुछ ना कुछ अंदाज़ा हो जाता था कि हम क्या बातें कर रहे हैं और किस लड़की के लिबास की बात हो रही हैं।
रश्मि मुझसे बोली- भाभी ड्रेस तो आपने भी बहुत ओपन पहना हुआ है.. देखिए जरा इस कुरती का गला कितना खुला और डीप है.. जो आपने पहना हुआ है।
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मैं उसकी तरफ देख कर हँसी और बोली- अरे यार.. फिर क्या हुआ.. इससे क्या फ़र्क़ पड़ता है.. कोई देखता है तो देखे.. जब मेरे पति को किसी के देखने से तो ऐतराज़ नहीं है.. फिर मुझे क्या?
मेरी बात सुन कर रश्मि हँसने लगी और मैं भी हँसने लगी।

फिर हम लोग तीनों जा कर एक बैंच पर बैठ गए और इधर-उधर की बातें करने लगे। वहाँ से थोड़ी ही दूर पर एक कैन्टीन थी। कुछ देर के बाद सूरज ने अपना पर्स निकाला और उसमें से कुछ पैसे निकाल कर रश्मि को दिए और बोला- जाओ रश्मि.. वहाँ कैन्टीन से कुछ खाने-पीने की चीजें ले आओ।

रश्मि अकेले कैन्टीन की तरफ जाते हुए झिझक रही थी.. मैंने उसे उत्साहित किया- हाँ हाँ.. जाओ.. कुछ नहीं होता.. हम लोग यहीं तो तुम्हारे सामने बैठे हैं।

रश्मि उठी और कैन्टीन की तरफ बढ़ गई। सूरज जाते हुए उसकी गाण्ड को ही देख रहा था.. जो कि पूरी तरह इधर-उधर मटक रही थी।
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कुछ देर सूरज उसी को देखता रहा फिर मुझसे बोला- यह तुम बाइक पर बैठे क्या शरारतें कर रही थीं।
मैं मुस्कुराई और अंजान बनते हुए बोली- कौन सी शरारत?
सूरज- वो जो मेरे लण्ड को दबा रही थी।
मैं हंस कर बोली- मैंने सोचा कि आज मैं अपनी चूचियों को तुम्हारी पीठ पर रगड़ नहीं सकती.. तो ऐसी ही थोड़ा सा तुम को मज़ा दे दूँ।
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मैंने जानबूझ कर रश्मि की चूचियों के उसकी पीठ पर लगने का जिक्र नहीं किया.. क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि वो शर्मिंदा हो। लेकिन एक बात हुई कि जैसे ही मैंने अपनी चूचियों की उसकी पीठ पर लगाने का जिक्र किया.. तो फ़ौरन ही उसकी नज़र रश्मि की तरफ उठ गई.. जैसे उसे एक बार फिर से याद आ गया हो कि कैसे रश्मि अपनी चूचियों को उसकी पीठ के साथ लगा कर बैठी हुई थी।

उसी वक़्त रश्मि कैन्टीन से स्नैक्स और कोल्ड-ड्रिंक्स लेकर मुड़ी.. तो सूरज की नजरें रश्मि की टाइट टी-शर्ट में उभरी हुई नज़र आ रही चूचियों पर घूम गईं।
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मैंने भी कोई बात करके उसको डिस्टर्ब करना मुनासिब ना समझा और इधर-उधर देखने लगी।

हम तीनों ने बैठ कर स्नैक्स और ड्रिंक्स से एंजाय किया और फिर जब थोड़ा अँधेरा होने लगा.. तो हम लोग घर की तरफ वापिस लौटे। मैंने दोबारा रश्मि को सूरज के पीछे बैठाया।
पूरे रास्ते फिर मेरी वो ही हरकतें चलती रहीं और रश्मि अपनी चूचियों को अपने भाई की पीठ पर दबा कर बैठे रही। मैं भी सूरज का लंड आहिस्ता-आहिस्ता दबाती और सहलाती रही।

घर आकर मैंने अपने कपड़े बदल लिए। आज रात मैंने सूरज का एक बरमूडा पहन लिया था.. जो कि मेरे घुटनों तक का था और ऊपर से मैंने एक टी-शर्ट पहन ली।
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कभी-कभी मैं घर में यह ड्रेस भी पहन लेती थी। अब मेरी गोरी-गोरी टाँगें घुटनों तक बिल्कुल नंगी हो रही थीं।

सूरज ने चाय के लिए कहा तो रश्मि चाय बनाने चली गई और मैं सूरज के बिल्कुल साथ लग कर बैठ गई और टीवी देखने लगी।
सूरज भी जब से आया था.. तो वो गरम हो रहा था, उसने मौका मिलते ही मुझे अपने पास खींच लिया और मेरे गालों को चूमने लगा।
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मैंने अपना हाथ उसकी पजामे के ऊपर से उसके लण्ड पर रखा और बोली- क्या बात है.. आज बड़े गरम हो रहे हो?
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सूरज ने भी मेरा बरमूडा थोड़ा सा घुटनों से ऊपर को खिसकाया और मेरी जाँघों को नंगी करके उस पर हाथ फेरने लगा।
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थोड़ी देर मैं जैसे ही रश्मि चाय बना कर वापिस आई तो सूरज ने अपना हाथ मेरी नंगी जाँघों से हटा लिया। लेकिन मैं अभी भी उसके साथ चिपक कर बैठे रही।

रश्मि ने हम पर एक नज़र डाली और जब मेरी नज़र से उसकी नज़र मिली.. तो वो धीरे से मुस्करा दी और मैंने भी उसे एक स्माइल दी।
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फिर हम सब चाय पीने लगे और मैं उसी हालत मैं अपने पति के साथ चिपक कर बैठे रही। मेरी जाँघें अभी भी नंगी थीं लेकिन मुझे कोई फिकर नहीं थी कि मैं अपनी नंगी जाँघों को कवर कर लूँ।
रश्मि भी मेरी नंगी जांघ और मेरे हाथों को अपने भाई की जाँघों पर सरकते हुए देखती रही।

अपडेट 10

आपने अभी तक पढ़ा..
सूरज भी जब से ऑफिस से आया था.. तो वो गर्म हो रहा था, उसने मौका मिलते ही मुझे अपने पास खींच लिया और मेरे गालों को चूमने लगा।
मैंने अपना हाथ उसके पजामे के ऊपर से उसके लण्ड पर रखा और बोली- क्या बात है.. आज बड़े गरम हो रहे हो?
सूरज ने भी मेरा बरमूडा थोड़ा सा घुटनों से ऊपर को खिसकाया और मेरी जाँघों को नंगी करके उस पर हाथ फेरने लगा।
थोड़ी देर मैं जैसे ही रश्मि चाय बना कर वापिस आई तो सूरज ने अपना हाथ मेरी नंगी जाँघों से हटा लिया लेकिन मैं अभी भी उसके साथ चिपक कर बैठे रही।

रश्मि ने हम पर एक नज़र डाली और जब मेरी नज़र से उसकी नज़र मिली.. तो वो धीरे से मुस्करा दी और मैंने भी उसे एक स्माइल दी।
फिर हम सब चाय पीने लगे और मैं उसी हालत मैं अपने पति के साथ चिपक कर बैठे रही। मेरी जाँघें अभी भी नंगी थीं लेकिन मुझे कोई फिकर नहीं थी कि मैं अपनी नंगी जाँघों को कवर कर लूँ।
रश्मि भी मेरी नंगी जांघ और मेरे हाथों को अपने भाई की जाँघों पर सरकते हुए देखती रही।
अब आगे ..

फिर हम दोनों रसोई में गईं तो रश्मि मुझे छेड़ती हुए बोली- भाभी आपको तो बिल्कुल भी शरम नहीं आती.. कैसे चिपक कर बैठे हुई थीं आप.. भैया के साथ?
मैं मुस्कुराई और बोली- जब तेरी शादी होगी ना.. तो देखना तेरा पति तुझे हर वक़्त अपनी साथ चिपका कर रखेगा।
रश्मि- नहीं जी.. भाभी जी.. मैं आपकी तरह बेशर्म नहीं हूँ.. जो हर वक़्त चिपकी रहूँगी।
मैं- अरे तू ना भी चिपकेगी.. तो भी तेरी जैसे चिकनी लड़की को कौन सा मर्द होगा.. जो अपने साथ ना चिपकाना चाहेगा.. सच कहूँ.. यह तो तू सूरज की बहन है.. तो बची हुई है.. वरना सूरज ही कब का तुझे…
मैं यह बात कह कर हँसने लगी।

रश्मि का चेहरा सुर्ख हो गया और वो शर्मा कर बोली- भाभी क्या है ना.. आप कुछ भी बोल देती हो.. कुछ तो शरम करो ना.. वो मेरे भैया हैं और आप उनकी बारे में ऐसी बातें कह रही हो।

मैं मुस्कुराई और उसकी गाल पर हाथ फेरती हुई बोली- क्या करूँ.. जो सच है वो कह दिया.. तू बहन है उसकी.. लेकिन फिर तू इतनी खूबसूरत है कि वो तेरा भाई होकर भी तुझे देखता रहता है, मैं तो खुद तुझ से जलने लगी हूँ।
मैंने प्यार से उसकी चूची पर चुटकी काटते हुए कहा।

रश्मि शर्मा गई.. मैं रश्मि के दिल में भी हल्की सी चिंगारी जलाना चाहती थी.. ताकि वो भी सूरज की तरफ थोड़ा ध्यान दे और उसे भी अंदाज़ा हो सके कि उसका भाई उसकी तरफ देखता है।
मैं अपने मक़सद में कामयाब भी हो गई थी।

रश्मि को शरमाती देख कर मैं धीरे से मुस्कुराई और अपने बेडरूम की तरफ बढ़ते हुए बोली- अच्छा भई.. मैं तो अब चली अपनी जानू के साथ एंजाय करने..

मेरी बात पर रश्मि मुस्करा दी और मैं अपने बेडरूम की तरफ बढ़ गई।
अपने बेडरूम में आई तो सूरज पहले से ही लेट चुका हुआ था, मैं भी उसके साथ ही लेट गई। बिस्तर पर लेटते साथ ही सूरज ने मुझे अपनी तरफ खींच लिया और अपनी बाँहों में लेकर चूमने लगा।
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मैं भी सुबह से एक भाई की अपनी बहन के लिए हवशी नजरें देख-देख कर गरम हो रही थी.. इसलिए कोई भी विरोध नहीं किया और उसका साथ देनी लगी।
जैसे ही मैंने उसके लण्ड पर हाथ रखा तो मुझे वो पहले से ही तैयार मिला.. पता नहीं अभी तक उसके ज़हन में शायद अपनी बहन का जिस्म घूम रहा था.. जो वो अकड़ा हुआ था।
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मैं दिल ही दिल में मुस्कराई और उसका पजामा नीचे उतार कर उसका लंड बाहर निकाल लिया.. अब मैं उसे अपने बरमूडा के ऊपर से ही अपनी चूत पर रगड़ने लगी।
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सूरज ने मेरा बरमूडा भी उतारा और फ़ौरन ही मेरी ऊपर को सरका कर अपना लंड मेरी चूत में ‘खच्च’ से डाल दिया। मेरी चूत पहले से ही गीली हो गई थी।
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धीरे-धीरे सूरज ने मुझे चोदना शुरू कर दिया… वो मेरे होंठों और मेरे गालों को चूमते हुए अपना लंड मेरी चूत में अन्दर-बाहर कर रहा था और मैं भी उसकी नंगी कमर पर हाथ फेरते हुए उसको सहला रही थी।
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अचानक ही मैं बहुत ही मस्त आवाज़ में बोली- यार तुम तो रश्मि का भी ख्याल नहीं करते.. हर वक़्त तुमको मुझे चोदने का ही ख्याल रहता है..
मैंने यह बात सिर्फ़ और सिर्फ़ उसके दिमाग में उसकी बहन का अक्श लाने के लिए कही थी।

अजीब बात यह हुई कि.. हुआ भी ऐसा ही.. जैसे ही मैंने रश्मि का नाम लिया तो सूरज की आँखें बंद हो गईं और उसके धक्कों की रफ़्तार में तेजी आ गई।
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वो मेरे होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा।
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मैं समझ गई कि इस वक़्त वो अपनी बहन का चेहरा ही अपनी आँखों के सामने देख रहा है। मैंने भी उसे डिस्टर्ब करना मुनासिब नहीं समझा और भी जोर से उसे अपने साथ लिपटा लिया।

अभी भी उसकी आँखें बंद थीं और वो धनाधन अपना लंड मेरी चूत में अन्दर-बाहर कर रहा था.. बल्कि शायद अपनी ख़यालों में अपनी बहन की चूत चोद रहा था।
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थोड़ी देर बाद सूरज ने अपना माल मेरी चूत में ही छोड़ दिया और धीरे से मेरी बगल में ही ढेर हो गया।
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उसकी आँखें अभी भी बंद थीं और वो लंबी-लंबी साँस ले रहा था, चुदाई के बाद उसकी ऐसी हालत पहली कभी नहीं हुई थी।
मैंने भी उसकी तरफ करवट ली और धीरे-धीरे उसकी सीने पर हाथ फेरते हुए मुस्कराने लगी। मेरा तीर ठीक निशाने पर लगा था और मेरा पति अभी भी अपनी बहन के बारे में ही सोच रहा था।

अगले दिन सूरज ने ऑफिस से छुट्टी कर ली और घर पर ही था। रश्मि कॉलेज के लिए तैयार हुई तो सूरज ने बाइक निकाली और उसे कॉलेज छोड़ आया।
उसके वापिस आने के बाद हम दोनों ने नाश्ता किया और कुछ देर के बाद मैं नहाने चली गई। सूरज वहीं टीवी लाउंज में ही टीवी देख रहा था।

नहा कर मैंने बाथरूम का टीवी लाउंज वाला दरवाजा खोला और सूरज से बोली- यार यहाँ टेबल पर जो धुले हुए कपड़े पड़े हैं.. उन में से मेरी ब्रेजियर तो उठा दो प्लीज़..
सूरज- ओके डार्लिंग..

यह कह कर वो कपड़ों की तरफ बढ़ा और उसे जाता हुआ देख कर मैं मुस्कराने लगी.. क्योंकि सब कुछ मेरी स्कीम के मुताबिक़ ही हो रहा था। दरअसल मैंने सूरज और रश्मि के जाने के बाद उन कपड़ों के ढेर में से अपनी ब्रेजियर निकाल ली हुई थी और अब वहाँ पर सिर्फ़ और सिर्फ़ रश्मि की ही एक ब्रेजियर पड़ी हुई थी।

वो ही हुआ.. कि सूरज कपड़ों के ढेर के पास गया और उसमें से कपड़े उलट-पुलट करने लगा। उसे उस कपड़ों के ढेर में से सिर्फ़ एक ही काली रंग की ब्रेजियर मिली और वो उसे उठा कर मेरे पास ले आया और बोला- यह लो डार्लिंग..
मैंने ब्रेजियर ली और सूरज वापिस जा कर सोफे पर बैठ गया। जैसे ही वो वापिस गया तो मैंने उसे दोबारा बुलाया।
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मैं- अरे यार यह क्या है… यार.. यह तो तुम रश्मि की ब्रेजियर उठा ले आए हो.. मेरी लाओ ना निकाल कर.. तुमको पता नहीं चलता कि क्या.. कि यह कितनी छोटी है?

सूरज ने चौंक कर मेरी तरफ देखा और मैंने खुले दरवाजे से उसकी बहन की ब्रेजियर उसकी हाथ में पकड़ा दी।
सूरज ने एक नज़र मेरी नंगी चूचियों पर डाली और मैंने जानबूझ कर बाथरूम का दरवाज़ा थोड़ा बंद कर दिया ताकि वो मुझे ना देख सके… लेकिन मैं छुप कर उसे देखने लगी कि वो क्या करता है?

अपडेट 11

आपने अभी तक पढ़ा..
सूरज को उस कपड़ों के ढेर में से सिर्फ़ एक ही काली रंग की ब्रेजियर मिली और वो उसे उठा कर मेरे पास ले आया और बोला- यह लो डार्लिंग..
मैंने ब्रेजियर ली और सूरज वापिस जा कर सोफे पर बैठ गया। जैसे ही वो वापिस गया तो मैंने उसे दोबारा बुलाया।

मैं- अरे यार यह क्या है… यार.. यह तो तुम रश्मि की ब्रेजियर उठा ले आए हो.. मेरी लाओ ना निकाल कर.. तुमको पता नहीं चलता कि क्या.. कि यह कितनी छोटी है।
सूरज ने चौंक कर मेरी तरफ देखा और मैंने खुले दरवाजे से उसकी बहन की ब्रेजियर उसकी हाथ में पकड़ा दी।

सूरज ने एक नज़र मेरी नंगी चूचियों पर डाली और मैंने जानबूझ कर बाथरूम का दरवाज़ा थोड़ा बंद कर दिया ताकि वो मुझे ना देख सके… लेकिन मैं छुप कर उसे देखने लगी कि वो क्या करता है..?
अब आगे ..

जैसे कि मुझे उम्मीद थी.. सूरज अपनी हाथ में पकड़ी हुई अपनी बहन की ब्रेजियर को देखने लगा। उसने वो ब्रा फैलाई और आहिस्ता आहिस्ता उसको फील करने लगा।
मेरी नज़रें उसकी चेहरे पर पड़ीं.. तो उसका चेहरा अजीब सा हो रहा था।

वापिस कपड़ों के तरफ जाते हुए उसने जो हरकत की.. उसे देख कर तो मेरी चूत ही गीली हो गई।
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सूरज ने अपनी बहन की ब्रेजियर को अपनी चेहरे पर फेरा और उसे अपनी नाक से लगा कर सूंघा भी।
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हालांकि धुली हुई ब्रेजियर में से कहाँ उसकी बहन के जिस्म की खुशबू आनी थी।

थोड़ी देर के बाद वो वापिस आया और बाथरूम का बन्द दरवाजा खोल कर बोला- नहीं यार.. वहाँ पर कोई नहीं है.. दूसरी ब्रेजियर यहीं पड़ी हुई होगी।
मैंने कहा- अच्छा ठीक है.. मैं आकर देख लेती हूँ।

अभी भी उसकी हाथ में रश्मि की ब्रा मौजूद थी.. जिसे देख कर मैं मुस्कराई और उसके हाथ से ब्रा को ले लिया। फिर मैं एक तौलिया अपनी नंगे जिस्म पर लपेट कर बाथरूम से बाहर लाउंज में ही निकल आई।
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सूरज दोबारा से सोफे पर बैठ कर टीवी देख रहा था। मैंने जैसे बेखयाली में वो रश्मि की ब्रेजियर दोबारा से उसके पास ही सोफे पर फेंक दी और बोली- क्या है यार.. एक काम भी नहीं होता तुम से मेरा..
यह कह कर मैं अपने बेडरूम में चली गई, अपने कमरे से मैं दोबारा बाहर झाँक कर देखने लगी.. ऐसे कि सूरज मुझे ना देख पाए।

मैंने देखा कि सूरज ने एक-दो बार बेडरूम की तरफ देख कर मेरी तरफ से तसल्ली की और फिर अपने क़रीब ही सोफे पर पड़ी हुई अपनी बहन की ब्रेजियर को दोबारा से उठा लिया।

जैसे ही उसने उसे ब्रा को उठाया.. तो मेरे चेहरे पर मुस्कान फैल गई।
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सूरज ने दोबारा से अपनी बहन की ब्रेजियर उठा ली हुई थी और उस पर आहिस्ता आहिस्ता हाथ फेरते हुए उसे फील कर रहा था.. जैसे कि उसमें अपनी बहन की चूचियों को सोच रहा हो।

मैं कुछ देर उसे अपने बहन की ब्रेजियर से खेलती हुए देखती रही और फिर मुस्करा कर उसे ब्रा से एंजाय करते हुए छोड़ कर.. अपनी अल्मारी की तरफ बढ़ गई।

मैंने अपनी ब्रेजियर निकाल कर पहनी और फिर नीचे से एक लेग्गी पहन ली लेकिन ब्रा के ऊपर टॉप नहीं पहना और फिर बाहर आ गई।
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जैसे ही मैंने दरवाज़ा खोला तो सूरज ने रश्मि की ब्रा फ़ौरन ही सोफे पर फेंक दी। मैंने देख तो लिया था.. लेकिन शो ऐसे ही किया.. जैसे मैंने कुछ भी ना देखा हो।
फिर मैंने कपड़ों में से रश्मि के कपड़े और सोफे पर से उसकी ब्रेजियर उठाई और उसकी अल्मारी में रख आई।

पहले तो सूरज थोड़ा सा घबराया था लेकिन जब उसने देखा कि उसकी इस हरकत का मुझे कुछ भी पता नहीं चला.. तो वो काफ़ी रिलेक्स हो गया था।
मैं तो खुद भी उसे अहसास करवा कर अपना काम और मज़ा खराब नहीं करना चाहती थी ना.. और उसे अपने ही बहन की तरफ जाने का पूरा-पूरा मौका देना चाहती थी।

दो दिन के बाद सुबह जब सूरज ऑफिस के लिए कमरे में ही तैयार हो रहा था.. तो मैंने उससे कहा- सूरज.. प्लीज़ आज ऑफिस से आते हुए थोड़ी शॉपिंग तो करते आना..
सूरज- क्या मंगवाना है?
मैं- यार 3-4 सैट लेटेस्ट और खूबसूरत डिज़ाइन वाली ब्रेजियर के तो ले ही आना।
सूरज- ओके डार्लिंग.. लेता आऊँगा।
मैं- ओह हाँ.. याद आया.. वो ना साइज़ तुम 34 इंच लेकर आना।

सूरज ने हैरान होकर मेरी तरफ देखते हुए बोला- क्यों.. 34 क्यों.. तुम्हारा साइज़ तो 36 है.. फिर छोटा नंबर क्यों मंगवा रही हो?

मैंने उसके उतारे हुए कपड़े समेटते हुए बड़े ही साधारण अंदाज़ में कहा- वो 34 की साइज़ की ब्रेजियर रश्मि के लिए मंगवानी हैं ना.. उसकी ब्रा सबकी सब पुरानी हैं और पुरानी डिज़ाइन की हैं.. उसके लिए कुछ अच्छी डिज़ाइन की ब्रेजियर ले आना।
मैंने इतनी नॉर्मल अंदाज़ में कहा था.. जैसे कि उससे बाज़ार से कोई सब्ज़ी या घर की कोई और चीज़ मंगवा रही हूँ।

लेकिन मेरी इस बात से सूरज चकित हो चुका था। उसे इसे हालत में छोड़ कर मैं मुस्कराती हुई कमरे से बाहर आ गई और रसोई में जाकर नाश्ता तैयार करने लगी।
जब सूरज और रश्मि भी नाश्ते के लिए आ गए.. तो हम सब नाश्ता करने लगे।

मैंने नोट किया कि आज सूरज बड़ी ही अजीब नज़रों से रश्मि को देख रहा था। आज भी उसकी नजरें बार-बार उसकी चूचियों पर जा रही थीं.. जैसे कि वो खुद भी अपनी बहन की चूचियों की साइज़ का अंदाज़ा करना चाह रहा हो।
उसकी यह हालत देख कर मैं दिल ही दिल में मुस्करा रही थी।
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इतने दिनों में अब यह तब्दीली आ चुकी हुई थी कि रश्मि को भी कुछ-कुछ फील होने लगा था कि उसके भाई की नजरें उसके जिस्म की इर्द-गिर्द ही घूमती रहती हैं..
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लेकिन वो भी कुछ बुरा फील नहीं करती थी और उस बात को साधारण सी बात ही समझती थी।
मैंने कभी भी उसे बुरा मानते हुए या खुद को छुपाते हुए नहीं देखा था।

जब शाम को सूरज घर वापिस आया तो उसके हाथ में एक शॉपिंग बैग था। जिसे उसके हाथ में देख कर ही मेरे चेहरे पर मुस्कान फैल गई। लेकिन मैंने अपनी मुस्कराहट सूरज से छुपा ली।

अपने कमरे में आकर सूरज ने मुझे वो शॉपिंग बैग दिया और बोला- यह ले आया हूँ.. जो तुमने मँगवाया था.. देख लेना और अगर कुछ चेंज-वेंज करना हो तो भी करवा लाऊँगा।

मैंने भी बड़े ही साधारण तरीके से उससे बैग लिया और उसे कमरे में एक तरफ ‘ओके’ कह कर रख दिया.. जैसे मुझे कोई ख़ास दिलचस्पी ना हो और यह एक आम सी बात ही हो।

लेकिन अन्दर से मैं बहुत उत्सुक थी कि देखूँ कि सूरज अपनी बहन के लिए किस किस्म की ब्रा सिलेक्ट करके लाया है।

अगले दिन रश्मि घर पर ही थी तो सूरज के जाने के बाद मैंने वो शॉपिंग बैग उठाया और बाहर आ गई। जहाँ पर रश्मि बैठी टीवी देख रही थी।
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मेरे हाथ मैं नया शॉपिंग बैग देख कर खुश होती हुए बोली- वाउ भाभी.. शॉपिंग करके आई हो.. कब गई थीं आप.. और क्या लाई हो.. दिखाओ मुझे भी?
मैं मुस्करा कर बोली- नहीं यार मैं तो नहीं गई थी.. कुछ चीजें तुम्हारे भैया से ही मँगवाई हैं और वो भी तुम्हारे लिए..
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मैं अब रश्मि के पास ही बैठ चुकी थी और उसका भी पूरा ध्यान अब मेरी तरफ ही था।
रश्मि- अरे भाभी मेरे लिए क्या मंगवा लिया है.. दिखाओ ना मुझे भी?
मैंने बैग मैं से चारों बॉक्स निकाल कर बाहर टेबल पर हम दोनों की सामने रख दिए। बॉक्स पर ब्रा पहने हुई मॉडल्स की फोटो थीं.. जिनको देखते ही रश्मि चौंक उठी।

अपडेट 12

आपने अभी तक पढ़ा..
अन्दर से मैं बहुत उत्सुक थी कि देखूँ कि सूरज अपनी बहन के लिए किस किस्म की ब्रा सिलेक्ट करके लाया है।
अगले दिन रश्मि घर पर ही थी तो सूरज के जाने के बाद मैंने वो शॉपिंग बैग उठाया और बाहर आ गई। जहाँ पर रश्मि बैठी टीवी देख रही थी।

मेरे हाथ मैं नया शॉपिंग बैग देख कर खुश होती हुए बोली- वाउ भाभी.. शॉपिंग करके आई हो.. कब गई थीं आप.. और क्या लाई हो.. दिखाओ मुझे भी?
मैं मुस्करा कर बोली- नहीं यार मैं तो नहीं गई थी.. कुछ चीजें तुम्हारे भैया से ही मँगवाई हैं और वो भी तुम्हारे लिए..

मैं अब रश्मि के पास ही बैठ चुकी थी और उसका भी पूरा ध्यान अब मेरी तरफ ही था।
रश्मि- अरे भाभी मेरे लिए क्या मंगवा लिया है.. दिखाओ ना मुझे भी?
मैंने बैग मैं से चारों बॉक्स निकाल कर बाहर टेबल पर हम दोनों की सामने रख दिए। बॉक्स पर ब्रा पहने हुई मॉडल्स की फोटो थीं.. जिनको देखते ही रश्मि चौंक उठी।
अब आगे ..

रश्मि- भाभी यह क्या है?

मैं- अरे यार तुम्हारे लिए कुछ नई ब्रा मँगवाई हैं मेरा तो मार्केट में चक्कर लग ही नहीं पा रहा था.. इसलिए तुम्हारे भैया से ही कहा था कि ला दो.. आओ खोल कर देखते हैं कि तुम्हारे भैया कैसी डिज़ाइन्स लाए हैं अपनी बहना के लिए।
मेरी बात सुन कर रश्मि का चेहरा शरम से सुर्ख हो गया.. वो झेंपती हुई बोली- भाभी.. आपको भैया से मंगवाने की क्या ज़रूरत थी.. पता नहीं वो मेरे बारे में क्या सोचते होंगे..

मैं मुस्कराई और बोली- अरे इसमें ऐसी कौन सी बात है.. मेरे लिए भी तो खरीद कर ले ही आते हैं ना वो.. तो तुम्हारे लिए ले आए.. तो कौन सी गलत बात हो गई है यार..
मैंने सब लिफ़ाफ़े खोले और उनमें से ब्रा निकाल कर देखने लगी।

उनमें से 2 तो कढ़ाई वाली थीं.. बहुत ही खूबसूरत डिज़ाइन की महंगी वाली ब्रा..

जिनमें से एक ब्लैक और दूसरी स्किन कलर की थी। तीसरी ब्रेजियर नेट वाली थी.. जिसको पहनने पर सब कुछ नज़र आता था। चौथी वाली ब्रा हाफ कप वाली थी.. जिसकी स्ट्रेप पारदर्शी प्लास्टिक की थीं।
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मैंने एक-एक ब्रा खोल कर रश्मि के हाथ में दीं और बोली- यार तेरे भैया बहुत ही सेक्सी ब्रा लाए हैं तुम्हारे लिए।
रश्मि उन सभी ब्रा को हाथों में लेकर देख भी रही थी और शरम से लाल भी हो रही थी।
मैं- अरे यार इस नेट वाली में तो तुम्हारी चूचियाँ बिल्कुल ही नंगी ही रह जाएंगी।
मैंने हँसते हुए कहा।
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रश्मि शर्मा कर मुझे जवाब देते हुए बोली- भाभी आपके पास भी तो हैं ना.. नेट वाली ब्रा.. आप भी तो पहनती हो ना..
मैं फ़ौरन बोली- मेरी पहनी हुई नेट वाली ब्रा तो तुम्हारे भैया को दिखाने के लिए होती है.. तुमको भी क्या यह पहन कर अपने भैया को दिखाना है।

मेरी इस बात पर तो रश्मि उछल ही पड़ी और बोली- भाभी कैसी बातें करती हो आप.. मैं क्यों पहन कर दिखाऊँगी भैया को?
उसका चेहरा शरम से सुर्ख हो गया।
मैं मुस्करा कर बोली- वैसे उसने लाकर तो तुमको इसलिए दी है ना.. शायद तुम्हारे भैया तुमको इसमें देखना चाहते ही हों..
रश्मि बोली- भाभी क़सम से.. आप बहुत खराब बातें करती हो।
मैं भी उसके साथ मिल कर हँसने लगी।

फिर रश्मि वो बैग लेकर अपने कमरे में चली गई.. मैंने भी उसे कोई आग्रह नहीं किया कि वो मुझे नई ब्रा पहन कर दिखाए।
शाम को सूरज घर आया तो आज भी हमेशा की तरह उसकी नज़रें अपनी बहन की चूचियों पर ही थीं.. जैसे अब वो यह जानना चाहता हो कि उसने नई ब्रा पहनी है कि नहीं।

मैंने महसूस किया कि अपने भाई की नज़रों को फील करके रश्मि भी थोड़ा शर्मा रही थी और मैं उन दोनों भाई-बहन की दशा का मजा ले रही थी।

सूरज की अपनी बहन पर तांक-झाँक ऐसे ही चलती रहती थी। गर्मी का मौसम चल रहा था और हमने काफ़ी महीनों से ही एसी लगवाने के लिए पैसे इकठ्ठे करने शुरू किए हुए थे।

अब जाकर हमारे पास इतने पैसे हुए थे कि हम एक एसी लगवा सकें.. तो फिर आख़िरकार हमने अपने बेडरूम में एसी लगवा ही लिया। उस रोज़ हम लोग बहुत खुश थे.. आख़िर हम जैसे मिडिल क्लास के लिए एसी का लग जाना भी एक बहुत बड़ी बात थी।
रात को मैं और सूरज अब एसी में सोने लगे।

लेकिन जल्दी ही मुझे और सूरज को रश्मि का ख्याल आया।

मैं- सूरज.. यार यह बात तो ठीक नहीं है कि हम लोग तो एसी चलाकर सो जाते हैं और उधर रश्मि गर्मी में ही सोती है।
सूरज- हाँ.. कहती तो तुम ठीक हो लेकिन अब कैसे करूँ..? हमारा कमरा भी इतना बड़ा नहीं था कि उसमें कोई और बिस्तर लगाया जा सके और ना ही उसमें कोई भी और सोफा वगैरह ही पड़ा हुआ था।

काफ़ी सोच विचार के बाद मेरे शैतानी दिमाग ने एक अनोखा आइडिया दिया जिससे मेरा काम भी आगे बढ़ने की उम्मीद थी।
मैं सूरज से बोली- सूरज एक बात हो सकती है कि हम रश्मि को अपने साथ ही बिस्तर पर सुला लें।
सूरज चौंक कर बोला- लेकिन यह कैसे हो सकता है.. इस तरह तो हमारी प्राइवेसी खत्म हो जाएगी यार.. और कैसे हम उसे अपने बिस्तर पर सुला सकते हैं?

मैं- यार कोई परेशानी नहीं होगी.. बस मैं बीच में लेट जाया करूँगी.. इसमें कौन सी कोई दिक्कत है यार.. बस उसे आज इधर ही सोने का कह देते हैं। इस तरह गर्मी में उसको सुलाना तो ठीक नहीं है ना..
सूरज मेरा फ़ैसला सुन कर चुप हो गया और कुछ सोचने लगा।

शाम को खाने के वक़्त हमने रश्मि को यह बता दिया। उसने बहुत इन्कार किया.. लेकिन मैंने उसकी कोई भी बात सुनने से इन्कार कर दिया और आख़िर रश्मि को मेरी बात माननी ही पड़ी।
रात हुई तो मैं और सूरज अपने कमरे में आकर लेट गए.. एसी चल रहा था और कमरा काफी ठंडा हो रहा था।

थोड़ी देर तक पढ़ने के बाद रश्मि भी आ गई.. मैंने कमरे में जलता हुआ नाईट बल्व भी बंद कर दिया और अब कमरे में घुप्प अँधेरा था। कमरे में सिर्फ़ एसी की जगमगाते हुए नंबर्स की ही रोशनी हो रही थी।

रश्मि हमारे बिस्तर के पास आई तो मैंने थोड़ा सा और सूरज की तरफ सरक़ कर रश्मि के लिए और भी जगह बनाई और वो झिझकते हुए मेरे साथ लेट गई।

अब मेरी एक तरफ मेरा पति सो रहा था और दूसरी तरफ उसकी बहन.. यानि मैं दोनों बहन-भाई के दरम्यान लेटी हुई थी।

सूरज की आदत थी कि वो मेरे साथ चिपक कर मुझे अपनी बाँहों में समेट कर सोता था।
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अब जब रश्मि कमरे में आई तो सूरज सो चुका हुआ था और मेरी करवट दूसरी तरफ थी.. लेकिन वो पीछे से मुझे चिपका हुआ था।
जैसे ही रश्मि की नज़र हम दोनों पर इस हालत में पड़ी.. तो उसके चेहरे पर एक शर्मीली सी मुस्कराहट फैल गई।

मैं भी उसकी तरफ देख कर मुस्कराई और उसे चुप करके अपने पास लेटने का इशारा किया। वो खामोशी से मेरे साथ सीधी ही लेट गई।
मैंने आहिस्ता से उसके कान में कहा- अरे यार कुछ फील ना करना.. तुम्हारे भैया की मेरे साथ ऐसे ही चिपक कर सोने की आदत है.. बहुत चिपकू हैं तेरे भैया..

मेरी बात सुन कर रश्मि भी मुस्कराने लगी। मैंने अपनी बाज़ू उठाई और रश्मि के पेट पर रख कर उसे एक झटके से थोड़ा और अपनी करीब खींच लिया।

इस तरह वो मेरे साथ चिपक गई थी लेकिन साथ ही सूरज का हाथ भी उसके जिस्म से टच हो रहा था।

सूरज तो सो रहा था.. लेकिन उसकी बहन को ज़रूर उसके हाथ अपनी कमर की साइड पर महसूस हो रहा था.. जिसकी वजह से वो थोड़ा सा बैचेन सी हो रही थी। लेकिन फिर भी वो आराम से लेटी रही.. क्योंकि मैंने उसके जिस्म पर से अपना हाथ नहीं हटाया था।

अब पोजीशन यह थी कि सूरज मेरे साथ चिपका हुआ था और मैं उसकी बहन के साथ चिपक कर सोने लगी थी।

मैंने आहिस्ता से दोबारा उसके कान के क़रीब अपनी होंठ लिए. जाकर कहा- शर्मा क्यों रही हो.. कल को तुम्हें भी तो ऐसी ही सोना है ना..
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रश्मि ने चौंक कर मेरी तरफ देखा तो मैंने उसके गोरे-गोरे गाल की एक पप्पी ली और बोली- हाँ.. तो क्या तुम अपने पति के साथ चिपक कर नहीं सोया करोगी क्या?
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मेरी बात सुन कर रश्मि शर्मा गई और अपनी आँखें बंद कर लीं।

एसी की ठंडी-ठंडी हवा में कुछ ही देर में हम सबकी आँख लग गई। मैंने भी करवट ली और अपने पति के साथ चिपक कर एक बाज़ू उसकी ऊपर डाल कर सो गई।
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अपडेट 13

आपने अभी तक पढ़ा..
सूरज तो सो रहा था.. लेकिन उसकी बहन को ज़रूर उसके हाथ अपनी कमर की साइड पर महसूस हो रहा था.. जिसकी वजह से वो थोड़ा सा बैचेन सी हो रही थी। लेकिन फिर भी वो आराम से लेटी रही.. क्योंकि मैंने उसके जिस्म पर से अपना हाथ नहीं हटाया था।

अब पोजीशन यह थी कि सूरज मेरे साथ चिपका हुआ था और मैं उसकी बहन के साथ चिपक कर सोने लगी थी।

मैंने आहिस्ता से दोबारा उसके कान के क़रीब अपनी होंठ लिए. जाकर कहा- शर्मा क्यों रही हो.. कल को तुम्हें भी तो ऐसी ही सोना है ना..

रश्मि ने चौंक कर मेरी तरफ देखा तो मैंने उसके गोरे-गोरे गाल की एक पप्पी ली और बोली- हाँ.. तो क्या तुम अपने पति के साथ चिपक कर नहीं सोया करोगी क्या?
मेरी बात सुन कर रश्मि शर्मा गई और अपनी आँखें बंद कर लीं।

एसी की ठंडी-ठंडी हवा में कुछ ही देर में हम सबकी आँख लग गई। मैंने भी करवट ली और अपने पति के साथ चिपक कर एक बाज़ू उसकी ऊपर डाल कर सो गई।
अब आगे..

बहुत सुबह जब मेरी आँख खुली तो हमारी हालत यह थी कि मैं रश्मि की तरफ मुँह करके लेटी हुई थी।
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मेरा एक हाथ उसके सीने पर था। उसकी चूचियाँ मेरी बाज़ू के नीचे थीं। सूरज का बाज़ू मेरे ऊपर से होकर मेरी चूची को थामे हुए था।
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उसकी एक टाँग मेरी टाँगों के ऊपर से गुज़र रही थी और रश्मि की टाँग पर पहुँची हुई थी।
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इस हालत को देख कर मैं मुस्करा दी.. दोनों बहन-भाई अभी तक सोए हुए थे। कमरे से बाहर हल्की-हल्की रोशनी हो रही थी.. अभी लेकिन दिन नहीं चढ़ा था।

मेरी नींद टूट चुकी थी.. मैंने आहिस्ता से अपने हाथ को हरकत दी और सोई हुई रश्मि का एक मुम्मा अपनी हाथ में ले लिया.. उसे आहिस्ता से सहलाने लगी।
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रश्मि ने नीचे से ब्रा भी पहनी हुई थी उसकी चूची बहुत ही सॉलिड लग रही थी। आहिस्ता-आहिस्ता मैं उसे सहलाने और दबाने लगी। उसकी चूची को दबाना मुझे अच्छा लग रहा था।
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उसका खूबसूरत गोरा-चिट्टा चेहरा मेरी आँखों के सामने और मेरे होंठों के बहुत ही क़रीब था।

मैं ज्यादा देर तक खुद पर कंट्रोल ना कर सकी और उसकी चिकने गाल को एक किस कर लिया।
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मेरे जागने के साथ ही मेरे अन्दर का शैतान भी जाग चुका था.. मुझे एक शैतानी ख्याल आया और साथ ही मेरी आँखें कमरे के उस अँधेरे में भी चमक उठीं।
मैंने एक नज़र रश्मि के चेहरे पर डाली.. वो सो रही थी। सूरज के सोने का तो उसके खर्राटों से ही कन्फर्म हो रहा था।

अब मैंने अपनी चूचियों पर लटक रहा सूरज का हाथ अपने हाथ में लेकर उठाया
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और बहुत ही आहिस्ता से उसे रश्मि की चूची पर रख दिया.. हाथ तो मैंने सूरज का रखा था.. रश्मि की चूची पर.. लेकिन इस चीज़ के मजे की वजह से सिसकारी मेरी मुँह से निकल गई “’सस्स्स्स्स्…’
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सूरज का हाथ रश्मि की चूची पर रखने के बाद मैंने फ़ौरन ही रश्मि के चेहरे की तरफ देखा.. लेकिन वो बेख़बर सो रही थी।
सूरज का हाथ भी अपनी बहन की चूची के ऊपर बिल्कुल सटा हुआ था। उस बेचारे को तो पता भी नहीं था कि उसके हाथ में उसके ख्वाबों की ताबीर मौजूद है।
मैं धीरे से मुस्करा दी..
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अब मैंने अपना हाथ सूरज के हाथ के ऊपर रखा और आहिस्ता-आहिस्ता उसके हाथ को रश्मि की चूची के ऊपर फेरने लगी।
यह खेल मैं ज्यादा देर तक ना खेल सकी क्योंकि एक बार फिर मेरी आँख लग गई।

सुबह जब मेरी आँख खुली तो उस वक़्त सूरज ने दूसरी तरफ करवट ली हुई थी और मैं उसकी कमर के साथ उसी की तरफ मुँह करके उससे चिपक कर लेटी हुई थी.. मेरा बाज़ू उसके ऊपर था।
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रश्मि उठ कर जा चुकी हुई थी। मैं सीधी होकर लेट गई और रात जो कुछ हुआ.. उसके बारे में सोचने लगी।
मेरे चेहरे पर हल्की सी मुस्कराहट फैली हुई थी।

इतनी में रश्मि ट्रे में चाय के तीन कप ले आई।
उसे देख कर मैं मुस्कुराई और वो मेरे पास ही बिस्तर पर लेटते हुए बोली- भाभी आप तो भैया के साथ चिपक कर बहुत ही बेशर्मी के साथ सोती हो.. सुबह भी आप उनके साथ चिपकी हुई थीं।

मैंने उसे आँख मारी और बोली- सारी रात तो तेरा भाई तेरे साथ चिपका रहा है.. थोड़ी देर के लिए मैंने चिपक लिया तो क्या हो गया यार?
मेरी बात सुन कर वो हँसने लगी। फिर मैंने सूरज को भी उठाया और हम तीनों ने चाय ली और गप-शप भी करते रहे।

ऐसे ही इसी रुटीन में 3-4 दिन गुज़र गए। रात को रश्मि हमारे ही कमरे में हमारे बिस्तर पर हमारे साथ सोने लगी।

एक रात जब रश्मि लेटने के लिए आई.. तो हम दोनों भी अभी जाग ही रहे थे।

हम तीनों लेट कर बातें करने लगे। थोड़ी ही देर गुज़री कि मैंने करवट बदली और सूरज की तरफ मुँह करके लेट गई और साथ ही उसके ऊपर अपना बाज़ू डालती हुए उसे हग कर लिया।
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सूरज आहिस्ता से बोला- यार रश्मि है, तेरे पीछे लेटी हुई है।

लेकिन मैंने उसका ख्याल किए बिना ही अपनी टाँग भी उसके ऊपर रखी और उससे लिपटते हुए बोली- कुछ नहीं होता.. उसे क्या पता.. वो तो अभी बच्ची है।

मैंने मुड़ कर रश्मि की तरफ देखा तो उसकी चेहरे पर शर्मीली सी मुस्कराहट थी।
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कुछ देर के बाद मैंने रश्मि की तरफ अपना मुँह किया और उसे हग कर लिया और बोली- सॉरी रश्मि.. तुमने माइंड तो नहीं किया ना?वो मुस्करा दी और बोली- नहीं भाभी इट्स ओके..

मैंने सूरज का भी हाथ खींचा और अपने ऊपर रख लिया।
अब वो पीछे से मुझे हग किए हुए था
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और मैंने सीधी लेटी हुई रश्मि को हग किया हुआ था, सूरज का हाथ रश्मि के पेट को छू रहा था।
मैंने महसूस किया कि रश्मि को अपने भाई का हाथ थोड़ा बेचैन कर रहा है।
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मुझे एक शरारत सूझी.. मैंने सूरज का हाथ पकड़ कर रश्मि के पेट पर रखा और बोली- देखो सूरज रश्मि का पेट कितना सपाट है.. और मेरा पेट कितना मोटा हो गया है.. देखो रश्मि इसे फील करके..

मेरी इस हरकत से दोनों बहन-भाई ही चौंक पड़े..
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लेकिन मैंने सूरज को हाथ हटाने का मौका दिए बिना ही उसके हाथ को रश्मि के पेट पर फेरना शुरू कर दिया।
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रश्मि का चेहरा शरम से सुर्ख हो गया था। सूरज का भी मुझे पता था कि वो ऊपर से तो संकोच दिखा रहा है.. लेकिन अन्दर से वो अपनी बहन के पेट को छूना ज़रूर चाहता है।
लेकिन कुछ समय के बाद मैंने सूरज के हाथ पर से अपना हाथ हटाया तो फिर भी सूरज ने कुछ देर तक के लिए अपना हाथ रश्मि के पेट पर ही पड़ा रहने दिया।

उस रात को मेरी आधी रात को आँख खुली तो मुझे टॉयलेट जाने की ज़रूरत पड़ी। मैं अपनी जगह से उठी और उन दोनों बहन-भाई के बीच में से निकली और उठ कर वॉशरूम में चली गई।

जब मैं वापिस आई तो अचानक ही मेरे ज़हन में एक ख्याल आया। मैंने रश्मि को देखा.. तो वो गहरी नींद में थी। मैंने आहिस्ता से उसे करवट दी तो वो घूम कर बिस्तर पर मेरी वाली जगह पर अपने भाई सूरज के क़रीब आ गई।
मैं मुस्कराई और रश्मि को अपनी जगह पर करके खुद उसकी वाली जगह पर लेट गई।

अब मुझे सोना नहीं था बल्कि आगे जो होने वाला था.. उसका इंतज़ार करना था।

अपडेट 14

आपने अभी तक पढ़ा..
उस रात को मेरी आधी रात को आँख खुली तो मुझे टॉयलेट जाने की ज़रूरत पड़ी। मैं अपनी जगह से उठी और उन दोनों बहन-भाई के बीच में से निकली और उठ कर वॉशरूम में चली गई।

जब मैं वापिस आई तो अचानक ही मेरे ज़हन में एक ख्याल आया। मैंने रश्मि को देखा.. तो वो गहरी नींद में थी। मैंने आहिस्ता से उसे करवट दी तो वो घूम कर बिस्तर पर मेरी वाली जगह पर अपने भाई सूरज के क़रीब आ गई।

मैं मुस्कराई और रश्मि को अपनी जगह पर करके खुद उसकी वाली जगह पर लेट गई।
अब मुझे सोना नहीं था बल्कि आगे जो होने वाला था.. उसका इंतज़ार करना था।

अब आगे..

थोड़ी देर के बाद वो ही हुआ जिसका अन्दाजा था..

सूरज ने करवट बदली और रश्मि की तरफ मुँह कर लिया। लेकिन उसे नहीं पता था कि वहाँ पर मैं नहीं.. बल्कि उसकी अपनी बहन रश्मि लेटी हुई है। इसलिए उसने अपनी नींद में ही आदत के मुताबिक़ ही अपना बाज़ू रश्मि के ऊपर डाला और उसे बाँहों में भरते हुए अपने क़रीब खींच लिया.. जैसे कि वहाँ पर रश्मि नहीं बल्कि मैं हूँ।
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मैं धीरे से मुस्कराई और रश्मि को थोड़ा और आगे को पुश कर दिया।
अब रश्मि की चूचियाँ सूरज के सीने के साथ चिपक गई थीं लेकिन अभी तक दोनों बहन-भाई नींद में ही थे अगरचे दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए थे।
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मैंने अपना हाथ रश्मि के ऊपर से आगे बढ़ाया और सूरज के पजामे के ऊपर से ही उसका लंड पकड़ कर आहिस्ता आहिस्ता सहलाने लगी।
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मैं सूरज के लंड को खड़ा करना चाहती थी और नींद में ही सूरज का लंड आहिस्ता आहिस्ता खड़ा होने लगा।
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जैसे ही सूरज का लंड खड़ा हुआ.. तो उसने अपनी एक टाँग भी रश्मि की जाँघों के ऊपर डाली और अपना लंड उसकी जाँघों के दरम्यान घुसाते हुए उससे चिपक गया।

मैं मुस्कराई और अपना हाथ पीछे खींच लिया। मेरा काम काफ़ी हद तक हो चुका था।
सूरज का इस तरह से रश्मि को अपने साथ चिपकाने और दबाने की वजह से रश्मि की आँख खुल गई।

जैसे ही वो थोड़ा सा कसमसाई तो मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और थोड़ी सी आँख खोल कर उसे देखने लगी।

रश्मि ने जल्दी से करवट ली और सीधी होकर मेरी तरफ देखने लगी कि यह कैसे हुआ है कि वो मेरी जगह पर है। लेकिन मैं सोती हुई बन गई।

वो हैरत से मेरी तरफ देख रही थी.. फिर उसने आहिस्ता से अपने भाई का हाथ अपने जिस्म पर से उठाया और पीछे कर दिया। अब वो बिल्कुल सीधी लेटी हुई थी और थोड़ी सी कन्फ्यूज़ लग रही थी। सूरज के खर्राटों की आवाज़ अभी भी आ रही थी।

दोबारा थोड़ी देर में वो ही हुआ जिसकी सूरज को आदत पड़ी हुई थी। उसने दोबारा अपना हाथ फैलाया और रश्मि के सीने पर रख कर इस बार उसकी छोटी सी चूची को अपनी हाथ में ले लिया। रश्मि ने घबरा कर पहले सूरज की तरफ देखा और फिर मेरी तरफ.. लेकिन जब उसे तसल्ली हो गई कि हम दोनों ही सो रहे हैं और किसी को भी होश नहीं है।

रश्मि की चूची के ऊपर उसके भाई का हाथ था.. जिसने मुठ्ठी में अपनी बहन की चूची को लिया हुआ था। रश्मि ने आहिस्ता से अपना हाथ अपने भाई के हाथ पर रखा और उसे पीछे को हटाने लगी। एक लम्हे के लिए यूँ अपनी चूचियों पर किसी का टच उसे भी अच्छा ही लगा था.. लेकिन फिर उसने अपने भाई का हाथ हटा दिया।

लेकिन अभी एक मुसीबत और भी तो थी ना.. सूरज का अकड़ा हुआ लंड उसकी जाँघों से लड़ रहा था। रश्मि थोड़ी सी मेरी तरफ सरकी और मेरी तरफ करवट लेकर लेट गई.. मुझे थोड़ी मायूसी हुई।

अब रश्मि का रुख़ मेरी तरफ था। उसने अपना बाज़ू मेरे पेट पर रखा और मुझे अपने आगोश में लेकर के लेट गई।

लेकिन अगले ही लम्हे वो उछल ही पड़ी। मैं भी हैरान हुई और फिर थोड़ा सा देखा.. तो सूरज अपनी नींद में अपनी टाँग रश्मि के चूतड़ों के ऊपर ला चुका हुआ था और ज़ाहिर है कि उसका लंड पीछे से आकर कर रश्मि की गाण्ड में घुस गया हुआ था। जैसे कि वो मेरी गाण्ड में पीछे से घुसा देता था।

अभी भी उसे यही पता था कि वो अपनी बीवी के साथ ही है.. क्योंकि अगर उसे पता चल जाता कि यह मैं नहीं.. उसकी बहन है.. तो वो ज़रूर पीछे हो चुका होता।

मैंने देखा कि मेरे पेट के ऊपर रखा हुआ रश्मि का हाथ पीछे को गया.. तो मेरी चूत ही जैसे पानी छोड़ गई।

ज़ाहिर है कि रश्मि ने पीछे हाथ ले जाकर अपने भाई का लंड पीछे को करने की कोशिश की थी.. लेकिन उसका हाथ काफ़ी देर तक वापिस नहीं आया था।
शायद वो अपने भाई के लंड को फील कर रही थी।

फिर उसने अपना हाथ वापिस आगे किया और मेरे पेट पर रख कर मुझे हिलाते हुए आवाज़ देने लगी- भाभी.. भाभी.. उठो मैं रश्मि..
मैंने जैसे नींद में आँखें खोलीं और बोली- हाँ.. क्या बात है.. इतनी रात को क्यों जाग रही हो?
वो बोली- भाभी.. यह मैं आपकी जगह पर कैसे आ गई हूँ?

मैंने अब आँखें खोलीं और बोली- अरे यार मैं बाथरूम में गई थी.. वापिस आई तो तुम घूमती हुई मेरी जगह पर पहुँची हुई थीं.. तो मैं यहीं पर तुम्हारी जगह पर लेट गई।
वो बोली- अच्छा भाभी.. चलो आप वापिस आओ अपनी जगह पर..

मैंने नींद में होने की एक्टिंग ही करते हुए दूसरी तरफ करवट ली और बोली- सो जा यार.. क्यों मेरी भी नींद खराब कर रही हो।

रश्मि बेबस होकर वहीं लेटी रह गई। लेकिन अब वह मेरे साथ और भी चिपक गई ताकि उसके भाई से उसका फासला हो जाए।

फिर मैंने रश्मि को सीधी होते हुए महसूस किया। लेकिन अगले ही लम्हे मुझे अपनी कमर के पास सूरज का हाथ महसूस हुआ। मेरे चेहरे पर मुस्कराहट आ गई.. क्योंकि एक बार फिर से उसका हाथ अपनी बहन की चूचियों पर आ चुका हुआ था।

थोड़ी ही देर में मुझे रश्मि की आवाज़ सुनाई दी- भैया… उठो जरा.. यह मैं हूँ.. भाभी नहीं हैं..
फिर मुझे सूरज की बौखलाई सी आवाज़ सुनाई दी- अरे तू यहाँ कैसे आ गई.. और तेरी भाभी कहाँ है?
रश्मि आहिस्ता से बोली- भैया वो उधर चली गई हुई हैं।
फिर सूरज की आवाज़ आई- सॉरी रश्मि.. मैं समझा था कि काजल है।

इसके साथ ही सूरज ने दूसरी तरफ करवट ली और दोबारा से सोने लगा। लेकिन मैं जानती थी कि दोनों बहन-भाई को काफ़ी देर तक नींद आने वाली नहीं थी।
मुझे यह भी पता था कि अब कुछ और नहीं होगा.. इसलिए मैंने भी अपनी आँखें मूँदीं और सो गई।
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अपडेट 15

आपने अभी तक पढ़ा..
रश्मि बेबस होकर वहीं लेटी रह गई। लेकिन अब वह मेरे साथ और भी चिपक गई ताकि उसके भाई से उसका फासला हो जाए।

फिर मैंने रश्मि को सीधी होते हुए महसूस किया। लेकिन अगले ही लम्हे मुझे अपनी कमर के पास सूरज का हाथ महसूस हुआ। मेरे चेहरे पर मुस्कराहट आ गई..

क्योंकि एक बार फिर से उसका हाथ अपनी बहन की चूचियों पर आ चुका हुआ था।

थोड़ी ही देर में मुझे रश्मि की आवाज़ सुनाई दी- भैया… उठो जरा.. यह मैं हूँ.. भाभी नहीं हैं..
फिर मुझे सूरज की बौखलाई सी आवाज़ सुनाई दी- अरे तू यहाँ कैसे आ गई.. और तेरी भाभी कहाँ है?
रश्मि आहिस्ता से बोली- भैया वो उधर चली गई हुई हैं।
फिर सूरज की आवाज़ आई- सॉरी रश्मि.. मैं समझा था कि काजल है।

इसके साथ ही सूरज ने दूसरी तरफ करवट ली और दोबारा से सोने लगा। लेकिन मैं जानती थी कि दोनों बहन-भाई को काफ़ी देर तक नींद आने वाली नहीं थी।
मुझे यह भी पता था कि अब कुछ और नहीं होगा.. इसलिए मैंने भी अपनी आँखें मूँदीं और सो गई।
अब आगे..

सुबह जब मेरी आँख खुलीं तो दोनों बहन-भाई पहले ही उठ चुके हुए थे। मैं भी उठ कर बाहर आई और नाश्ता तैयार करने लगी।
जब मैंने नाश्ता टेबल पर लगाया और दोनों बहन-भाई को बुलाया तो मैंने महसूस किया कि वो दोनों एक-दूसरे से नजरें नहीं मिला पा रहे थे।
रश्मि के चेहरे पर शर्म की लाली थी.. उसकी नजरें शरम से नीचे झुकी हुई थीं और सूरज भी अपनी नजरें चुरा रहा था और शर्मिंदा सा लग रहा था।
थोड़ी ही देर में वो दोनों घर से चले गए।

सूरज दोपहर में ही घर आ गए, उनके दफ्तर में किसी कारण से छुट्टी हो गई थी..
कुछ देर बातचीत होने के बाद सूरज कमरे में आराम करने चले गए।

मैंने और रश्मि ने भी इस गरम दोपहर में एसी में सोने का सोचा और मैं और रश्मि बिस्तर पर आकर लेट गई पर मुझे नींद नहीं आने वाली थी तो मैंने सूरज की तरफ देखा, वो आँखें मूंदे लेटे हुए थे।

फिर मैंने रश्मि की ओर देखा, उसकी आँखें भी बंद हो गई थीं। मुझे नहीं पता था कि वो सो रही है या जाग रही है लेकिन एक बात पक्का थी कि सूरज अभी तक जाग रहा था।
मैं भी आँख बन्द करके सोने का ड्रामा करने लगी..

तभी मैंने देखा कि सूरज ने अपना हाथ मेरे ऊपर से होता हुआ रश्मि की नंगी बाज़ू के ऊपर रख दिया और आहिस्ता-आहिस्ता उसकी बाज़ू को सहलाने लगा।
मेरी पीठ सूरज की तरफ ही थी.. इसलिए मुझे उसका लंड अकड़ता हुआ महसूस हो रहा था.. जो कि मेरी गाण्ड में चुभ रहा था।

अचानक ही रश्मि ने करवट बदली और दूसरी तरफ मुँह करके लेट गई। सूरज ने फ़ौरन ही अपना हाथ पीछे खींच लिया.. लेकिन ज्यादा देर तक सूरज खुद को ना रोक सका।

अब रश्मि की कमर हमारी तरफ थी, उसकी टॉप के नीचे पहनी हुई उसकी काली ब्रेजियर साफ़ नज़र आ रही थी।
थोड़ी देर इन्तजार करने के बाद सूरज ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और अपनी एक उंगली रश्मि की ब्रेजियर के हुक पर फेरने लगा।
यह सब देख कर मेरी चूत गीली होती जा रही थी।
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सूरज रश्मि की ब्रेजियर के हुक्स और स्ट्रेप्स पर अपनी ऊँगली फेरने लगा और धीरे-धीरे उनको महसूस कर रहा था।
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सूरज का खड़ा हुआ लंड पीछे से मेरी गाण्ड में घुस रहा था।

अब मुझसे भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था। मैं सूरज को थोड़ा और तड़फाना चाहती थी और उसे यहीं तक ही रोक लेना चाहती थी इसलिए मैंने नींद का नाटक ही करते हुए करवट ली और सूरज से लिपट गई।
अब मैं सूरज को आवाज करते हुए चूमने लगी..
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सूरज भी अब जल्दी से सीधा होकर सम्भल कर लेट गया।

तभी रश्मि उठी और कमरे से बाहर निकल गई जिससे मुझे समझ आ गया कि ये भी जागते हुए ही सूरज का हाथ महसूस कर रही थी।
कुछ देर बाद में उठने के बाद मैं जब रसोई में गई तो रश्मि भी वहीं थी।
मुझे देख कर बोली- भाभी यह आप कमरे में क्या हरकतें कर रही थीं?
मतलब अब वो ये जाहिर कर रही थी या शायद उसे नहीं मालूम था कि उसकी ब्रा में कौन ऊँगली कर रहा था।

मैंने भी हँसते हुए उसकी बात को घुमा दिया और बोली- मैं कर रही थी या तुम्हारे भैया.. वो ही तो मुझे तंग कर रहे थे।
मैंने जानबूझ कर ऐसी बात बोली ताकि यह साफ़ हो सके कि वो किसके बारे में ये सब कह रही थी।

रश्मि भी समझ गई और उसने भी बात को घुमाते हुए थोड़ा शरमाती हुए बोली- लेकिन आपको इतना शोर तो नहीं मचाना चाहिए था ना..

मैं हँसने लगी और अब मैंने भी बात को अपने ऊपर ही लेने के इरादे से कहा- यार तुझे क्या पता.. मियाँ-बीवी में इस तरह के खेल चलते ही रहते हैं.. ऐसे ना करो तो ज़िंदगी में मज़ा ही कहाँ आता है।
रश्मि- लेकिन भाभी.. आपको कुछ तो ख्याल करना चाहिए ना..

मैं हंस कर बोली- यार तेरे भैया ने ख्याल करने का मौका ही नहीं दिया.. इसलिए तो मैं चिल्ला रही थी और तुझे अपनी मदद के लिए बुला रही थी.. लेकिन तूने भी आकर मेरी कोई मदद नहीं की और वैसे ही भाग गई।
रश्मि शर्मा कर बोली- मैं भला क्या मदद कर सकती थी आपके.? आप दोनों मियां-बीवी का मामला है.. मैं क्यों बीच में रुकावट बनती।

हम दोनों हँसने लगे और फिर चाय बना कर रसोई से बाहर आ गए और हम तीनों चाय उसी बेडरूम में बैठ कर पीने लगे।

उस रात जब हम लोग सोने के लिए लेटे.. तो जल्दी ही सूरज ने दूसरी तरफ करवट ले ली और बोला- अब मैं सो रहा हूँ..
मैं भी खामोशी से रश्मि की तरफ करवट लेकर लेट गई।

थोड़ी देर हम दोनों ने बातचीत की और फिर हमारी भी आँख लग गई। अभी मेरी आँख लग ही रही थी कि कुछ पलों के बाद.. मुझे थोड़ी सी हलचल अपने पीछे महसूस हुई।
उसी के साथ.. सूरज का बाज़ू मेरे ऊपर आ गया। मैंने अपनी आँखें थोड़ी सी खोलीं तो देखा कि सूरज आहिस्ता-आहिस्ता रश्मि के कन्धों पर हाथ फेर रहा था।

मैं मन्द मन्द मुस्करा दी और उसकी हरकतों को देखने लगी, नींद तो मेरी फ़ौरन ही गायब हो गई।

सूरज का हाथ आहिस्ता आहिस्ता फिसलता हुआ रश्मि के कंधे से नीचे को आने लगा। जैसे ही सूरज ने रश्मि की चूची को छुआ.. मेरी चूत में एक करेंट सा दौड़ गया।
बहुत ही आहिस्ता से सूरज ने अपना हाथ रश्मि की चूची पर रखा और कुछ देर तक अपना हाथ वैसे ही पड़ा रहने दिया।

जब उसने देखा कि रश्मि के जिस्म में कोई हरकत नहीं हुई.. तो उसे यक़ीन हो गया कि वो सो रही है।

सूरज ने आहिस्ता आहिस्ता अपने हाथ को हरकत देते हुए अपनी बहन रश्मि की चूची को सहलाना शुरू कर दिया।
मेरी चूत यह मंज़र देख कर गीली होती जा रही थी कि एक भाई अपनी सोई हुई बहन की चूचियों को सहला रहा है।
मैं देख रही थी कि सूरज अपने पूरे हाथ में उसका पूरे का पूरा चीकू ले लिया और अब वो आहिस्ता-आहिस्ता उसे दबा रहा था।
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रश्मि की छोटी सी चूची उसकी मुठ्ठी में आराम से पूरी आ रही थी.. लेकिन रश्मि को शायद कोई होश नहीं था.. क्योंकि वो सोई हुई थी।
थोड़ी देर में सूरज का हाथ थोड़ा सा ऊपर को गया और उसने अपना हाथ रश्मि के सीने के नंगे हिस्से पर रख दिया और अपनी उंगली आहिस्ता आहिस्ता उसकी नंगी छाती पर गले के नीचे फेरने लगा।

मेरे पीछे सूरज अपनी कोहनी के बल उठ चुका हुआ था और बड़े आराम से अपनी बहन की चूचियों और जिस्म पर हाथ फेर रहा था।
कभी उसके हाथ अपनी बहन की चूचियों को सहलाने लगते और कभी उसके पेट के ऊपर हाथ फेरने लगता। फिर सूरज ने थोड़ा सा और ऊपर होकर मेरे ऊपर से झुकते हुए अपनी बहन के गाल पर एक किस कर ली,
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हाथ तो सूरज अपनी बहन की चूचियों और जिस्म पर घूम रहा था लेकिन वो अपना लंड मेरे अन्दर ठोकता जा रहा था।

मुझे भी इससे मज़ा ही आ रहा था।
वैसे भी पिछले कुछ रोज़ से मैं सूरज के साथ छेड़-छाड़ करके उसे उत्तेजित तो कर ही देती थी.. लेकिन उसे अपनी चूत दिए हुए मुझे 15 दिन से ऊपर हो चुके थे, इसलिए भी वो इतना बेक़ाबू हो रहा था।

रश्मि की चूची दबाते दबाते शायद सूरज ने जज़्बाती होकर कुछ ज्यादा ही मसक दिया था.. जिसकी वजह से रश्मि थोड़ा सा कसमासाई और फिर उसने मेरी तरफ करवट ले ली।

जैसे ही रश्मि हिली तो सूरज ने फ़ौरन ही अपना हाथ पीछे खींच लिया और दूसरी तरफ मुँह कर करते हुए लेट गया।

तभी मैंने अपनी आँखें हल्की सी खोल कर देखा तो देखा कि रश्मि ने आहिस्ता आहिस्ता अपनी आँखें पूरी खोल ली हैं और मेरी तरफ देख रही है।

फिर उसने थोड़ा सा ऊपर होकर अपने भाई की तरफ देखा और धीरे से मुस्करा कर फिर लेट गई, उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी और आँखें खुली हुई थीं।
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मैं दिल ही दिल मैं सोच रही थी कि क्या रश्मि को भी पता था कि उसका भाई उसकी चूचियों को दबा रहा है।

अपडेट 16

आपने अभी तक पढ़ा..

रश्मि की चूची दबाते-दबाते शायद सूरज ने जज़्बाती होकर कुछ ज्यादा ही मसक दिया था.. जिसकी वजह से रश्मि थोड़ा सा कसमासाई और फिर उसने मेरी तरफ करवट ले ली।
जैसे ही रश्मि हिली तो सूरज ने फ़ौरन ही अपना हाथ पीछे खींच लिया और दूसरी तरफ मुँह कर करते हुए लेट गया।

तभी मैंने अपनी आँखें हल्की सी खोल कर देखा तो देखा कि रश्मि ने आहिस्ता आहिस्ता अपनी आँखें पूरी खोल ली हैं और मेरी तरफ देख रही है।
फिर उसने थोड़ा सा ऊपर होकर अपने भाई की तरफ देखा और धीरे से मुस्करा कर फिर लेट गई। उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी और आँखें खुली हुई थीं।
मैं दिल ही दिल मैं सोच रही थी कि क्या रश्मि को भी पता था कि उसका भाई उसकी चूचियों को दबा रहा है।
अब आगे..

अगर ऐसा था तो उसने कोई ऐतराज़ क्यों नहीं किया और अगर उसने सब कुछ जानते हुए भी कोई ऐतराज़ नहीं किया तो फिर तो यह मेरी बहुत बड़ी कामयाबी थी कि मैं दोनों बहन-भाई को इतना क़रीब लाने में कामयाब हो गई थी और मैं अपनी इस कामयाबी पर दिल ही दिल में बहुत खुश हो रही थी।

अगली शाम रश्मि ने मेरी कहने पर एक मिनी स्कर्ट और टी-शर्ट पहन ले. स्कर्ट उसके चूतड़ों को आधा ढांप रही थी लेकिन उसकी जाँघों की पूरी पूरी शेप और टाँगें बिल्कुल साफ़ दिख रही थीं।
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रश्मि बहुत ही सेक्सी लग रही थी.. जैसे ही सूरज ने उसे देखा तो उसकी चेहरे पर मुस्कराहट फैल गई।
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मेरी नज़रें उससे टकराईं तो रश्मि ने शर्मा कर अपना सिर झुका लिया। मैं देख रही थी कि जिधर-जिधर भी रश्मि जा रही थी.. सूरज की नजरें उसी के जिस्म पर रह रही थीं। ऊपर टाइट टी-शर्ट में उसकी चूचियाँ बिल्कुल फंसी हुई थीं और उसका गला भी थोड़ा डीप था.. जिसकी वजह से उसका खूबसूरत गोरा-चिकना सीना भी काफ़ी खुला सा नज़र आ रहा था।
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लेकिन चूचियाँ या क्लीवेज तो नहीं दिख सकता था। सोने के वक़्त तक भी रश्मि अपने जिस्म की जलवे बिखेरती रही और अपने भाई पर अपनी हुस्न की बिजलियाँ गिराती रही।

रोज़ की तरह आज भी सोने के लिए मैं और सूरज पहले ही कमरे में आ गए।
अब जो आग रश्मि ने अपने भाई के जिस्म और दिमाग में लगाई थी.. उसकी वजह से सूरज ने अन्दर आते ही मुझे खींचा और अपने सीने से लगा लिया।
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मैंने भी कोई रुकावट नहीं की और उसे और भी गर्म करने के लिए उससे लिपट गई और उसके किस का जवाब किस से देने लगी।
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नीचे मैंने उसके बरमूडा में हाथ डाला और उसका लंड पकड़ लिया.. जो धीरे-धीरे मेरे हाथ में फूलने लगा। मैं भी उसके लण्ड को अपने हाथ में दबाते हुए आगे-पीछे करते हुए और भी खड़ा करने लगी। इधर दूसरे हाथ से अपनी मखमली चुत सहलाने लगी।
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सूरज बोला- जान जल्दी से एक बार चोद लेने दो ना..
मैंने कहा- नहीं… अभी नहीं.. तुम्हारी बहन ने आ जाना है।
सूरज बोला- नहीं.. तुम थोड़ी देर के लिए सिटकनी लगा कर आओ।

मैंने उसके लण्ड को सहलाते हुए कहा- नहीं.. जब वो सो जाएगी.. तो तुम खामोशी से जो भी करना चाहो.. मेरे पीछे लेटे-लेटे कर लेना।
आख़िर में सूरज मान गया।

तभी दरवाज़ा खुला और रश्मि अन्दर आई.. तो उसे देख कर हम दोनों अलग हो गए। जैसे ही रश्मि बिस्तर के क़रीब आई.. तो मैं फ़ौरन ही उसकी जगह पर होकर लेट गई और बोली- रश्मि आज तुम बीच में सोओगी।

रश्मि चौंकी और हैरान होकर बोली- लेकिन क्यों भाभी?
सूरज भी हैरत से मेरी तरफ देख रहा था।
मैं मुस्कुराई और हँसते हुए बोली- तुम्हारे भैया.. मुझे बहुत तंग करते हैं.. इसलिए आज मैं इस तरफ सोऊँगी और तुमको बीच में सोना पड़ेगा।

रश्मि का चेहरा शर्म से लाल हो गया.. लेकिन मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसे घसीटा और उसे अपने और सूरज के बीच अपनी वाली जगह पर लिटा दिया।
रश्मि के चेहरे पर घबराहट के साथ शरम के आसार साफ़ नज़र आ रहे थे.. और वो मेरी तरफ देख रही थी।
मैं मुस्करा कर बोली- थैंक्यू माय डियर ननद..

मैंने महसूस किया था कि सूरज के चेहरे पर पहले वाली मायूसी के बाद अब थोड़ी उत्तेजना आ गई थी।
आज इस नई स्थितियों की वजह से हम में से कोई भी बोल नहीं रहा था।

मैंने ही थोड़ी सी बातें कीं और उन दोनों ने ‘हूँ.. हाँ..’ में जवाब दिया।
फिर मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं।

हमारा बिस्तर इतना बड़ा नहीं था कि हम सब लोग एक-दूसरे से दूर-दूर होकर सो सकें.. इसलिए रश्मि का जिस्म अपने भाई के जिस्म से टच कर रहा था।
मेरी देखते ही देखते रश्मि ने भी आँखें बंद कर लीं और शायद इस सारी सूरते-हाल को हज़म करने की कोशिश करते हुए सोने लगी।

लेकिन उसके जिस्म से टच होता हुआ उसके भाई का जिस्म भी उसे शायद बेचैन कर रहा था।

ज़ाहिर है कि मैं सो नहीं रही थी और सूरज के हरकत में आने का इन्तजार कर रही थी। कुछ ही देर गुज़री कि वो ही हुआ जिसका मुझे इन्तजार था।
सूरज ने अपनी बहन की तरफ करवट ली और आहिस्ता से अपना हाथ उठा कर रश्मि के पेट पर रख दिया।

मेरी नज़र फ़ौरन ही रश्मि के चेहरे की तरफ गई। मैंने महसूस किया कि उसके चेहरे के हाव-भाव एकदम से थोड़े से चेंज हो गए.. लेकिन फ़ौरन ही उसने दोबारा से अपनी चेहरे को सपाट कर लिया। अब वो खुद को संम्भालते हुए दोबारा से आँखें बंद करके पड़ी रही।

मेरे जिस्म के पास पड़े हुए उसके हाथ में मुझे थोड़ी सी हरकत सी भी फील हुई थी.. जैसे की एकदम किसी के छूने से वो उसका जिस्म काँप उठा हो।
मैं दिल ही दिल में मुस्करा उठी।

सूरज का हाथ कुछ देर के लिए एक ही जगह पर रश्मि के पेट के ऊपर पड़ा रहा। फिर आहिस्ता आहिस्ता उसका हाथ हिलने लगा और उसने अपने हाथ को अपनी बहन के पेट के ऊपर हौले-हौले हरकत देते हुए उसके पेट को उसकी शर्ट के ऊपर से सहलाना शुरू कर दिया।
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सूरज का हाथ आहिस्ता आहिस्ता अपनी बहन के पेट पर हरकत कर रहा था और उसके चेहरे के हाव-भाव बदल रहे थे.. लेकिन उसकी आँखें अभी भी बंद थीं।

पेट पर हाथ फेरने की बाद सूरज ने अपना हाथ थोड़ा सा नीचे लिए जाते हुए रश्मि की जांघ पर रख दिया।

रश्मि की जाँघें एक दम रुई के माफिक नरम थी और सायद जांघ सहलाने में सूरज को मजा आ रहा था।
सूरज ने अपना हाथ आहिस्ता आहिस्ता रश्मि की जाँघों पर फिराना शुरू कर दिया और उसकी जाँघों को सहलाने लगा।
सूरज का हाथ नीचे उसके घुटनों तक जाता और फिर ऊपर को आ जाता। उसे अपनी बहन की जाँघों पर हाथ फेरने में शायद बहुत ही अच्छा लग रहा था।
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मैंने भी महसूस किया कि वो थोड़ा सा ऊपर को उठा और उसने बहुत ही आहिस्ता से रश्मि के गले की तरफ अपनी मुँह कर बढ़ाया और उसके गोरे-गोरे सुरहिदार गले को चूम लिया।

अपडेट 17

आपने अभी तक पढ़ा..

सूरज ने अपना हाथ आहिस्ता-आहिस्ता रश्मि की जाँघों पर फिराना शुरू कर दिया और उसकी जाँघों को सहलाने लगा।
सूरज का हाथ नीचे उसके घुटनों तक जाता और फिर ऊपर को आ जाता। उसे अपनी बहन की जाँघों पर हाथ फेरने में शायद बहुत ही अच्छा लग रहा था।

मैंने भी महसूस किया कि वो थोड़ा सा ऊपर को उठा और उसने बहुत ही आहिस्ता से रश्मि के गाल की तरफ अपनी मुँह कर बढ़ाया और उसके गोरे-गोरे गाल को चूम लिया।
अब आगे..

मैं यह सब कुछ अपनी अधखुली आँखों से देख रही थी। एक भाई को इस तरह से अपनी बहन के जिस्म से मजे लेते हुए और उसे किस करते हुए देख कर मेरी अपनी चूत भी गीली हो रही थी।
अब मेरा ख्वाहिश हो रही थी कि जल्दी से सूरज अपनी बहन की चूत को छुए लेकिन मुझे लग रहा था कि वो इस हद तक जाने से डर रहा है।

सूरज ने थोड़ा सा ऊपर होकर अब मेरी तरफ देखा और फिर उसका हाथ अपने पजामे की ऊपर से ही अपने खड़े हुए लंड पर चला गया। उसने अपने लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया और आहिस्ता आहिस्ता अपने लंड को रश्मि की जांघों के साथ रगड़ने लगा।

मेरा दिल कर रहा था कि जल्दी से अपनी चूत को अपने हाथ से सहलाते हुए उसे ठंडा करना शुरू करूँ..
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लेकिन मैं सूरज के सामने खुद को एक्सपोज़ करके उसे शर्मिंदा नहीं करना चाहती थी कि उसे पता चले कि उसकी बीवी को पता चल गया है कि वो अपनी ही सग़ी बहन को इस तरह से छू रहा है।

एक बात का मुझे थोड़ा-थोड़ा यक़ीन होता चला जा रहा था कि हो ना हो.. रश्मि भी जाग रही है और अपने भाई के अपने जिस्म पर टच करने का मज़ा ले रही है।
वो भी शायद अपनी झिझक और शर्म की वजह से ही उसे रोक नहीं पा रही थी।

जब रश्मि को अहसास हुआ कि उसका भाई हद से गुज़रता जा रहा है.. तो उसने इससे बचने के लिए एकदम अपना रुख़ बदला.. और मेरी तरफ करवट ले ली। अब उसने मेरे ऊपर अपनी बाँहें डाल लीं।

इस अचानक हुई हरकत से सूरज भी थोड़ा बौखला गया और फ़ौरन ही पीछे हट कर लेट गया।

लेकिन मुझे पता था कि इस वक़्त रश्मि के खूबसूरत चूतड़ सूरज के बिल्कुल सामने होंगे और उसके लिए खुद को रोकना मुश्किल होगा।
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उसे छूने से जैसे ही रश्मि ने मुझे हग किया..

तो मुझे उसका नर्म ओ मुलायम जिस्म इस क़दर प्यारा लगा कि मैंने भी फ़ौरन ही उसे हग कर लिया और खुद भी उससे चिपक गई।
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अब सूरज के लिए कुछ और कर पाना मुश्किल था.. शायद इसलिए उसने भी जल्दी से दूसरी तरफ करवट ले ली और जल्द ही सो गया।

अगले दिन जब मैं सुबह नाश्ता बना रही थी तो रश्मि रसोई में आई।
मैंने ऐसे ही उसे तंग करने के लिए कहा- रात को कब सोई थी तुम?

मेरी बात सुन कर रश्मि घबरा गई और थोड़ा हकलाकर बोली- भाभी… आपके साथ ही तो आँख लग गई थी मेरी.. कककक.. क्यों पूछ रही हो आप यह?
मैंने उसे आँख मारी और बोली- इसलिए पूछ रही हूँ कि तेरे भैया ने तुझे तो तंग नहीं किया रात को?

मेरी बात सुनते ही रश्मि के चेहरे का रंग ही उड़ गया और उसकी आँखें फैल गईं।
फिर वो बोली- भाभी भला मुझे भैया क्यों तंग करेंगे?

मैं मुस्कराई और उसके गोरे-गोरे चिकने लाल होते हुए गाल पर एक चुटकी लेते हुए बोली- इसलिए तो मैंने तुझे बीच में अपनी जगह पर सुलाया था.. मैं होती तेरी जगह.. तो सारी रात ही मुझे तंग करते रहते तेरे भैया..

रश्मि कुछ सोच मैं डूबी हुई थी जैसे याद कर रही हो कि कैसे उसके भाई ने रात को उसके जिस्म को टच किया था।
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मैंने उससे कहा- अरे किस सोच में डूब गई हो.. तैयारी करो.. कॉलेज नहीं जाना क्या?

मेरी बात सुन कर उसे तो जैसे मौका मिल गया तो वो फ़ौरन ही रसोई से भाग गई। नाश्ते की टेबल पर दोनों आए तो रश्मि की नजरें आज भी नीचे को झुकी हुई थीं और हमेशा की तरह सूरज की नज़र उसके जिस्म पर ही बहक रही थी।

रश्मि ने अपना कॉलेज का सफ़ेद यूनिफॉर्म पहना हुआ था और शर्ट के नीचे उसने ब्लैक ब्रेजियर पहन रखी थी। अभी उसने दुपट्टा नहीं लिया हुआ था।
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जब वो उठ कर रसोई की तरफ गई तो सूरज की नज़र फ़ौरन ही उसकी पीछे गई उसकी बैक पर उसकी ब्लैक ब्रा की स्ट्रेप्स और हुक्स पर गई.. जो बिल्कुल साफ़ नज़र आ रही थी।
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सूरज की प्यासी नजरें देख कर मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। जब वो दोनों बाइक पर जाने लगे.. तो मैं हमेशा की तरह उन दोनों को सी-ऑफ करने की लिए गेट पर ही थी।
मैंने महसूस किया कि रश्मि आज अपने भाई के पीछे बैठती हुई थोड़ा झिझक रही थी। ज़ाहिर है कि उसे याद आ गया था कि रात को उसका भाई उसके जिस्म को कैसे-कैसे छू रहा था।

मैं उन दोनों की हालत पर मुस्करा रही थी। फिर आख़िर रश्मि सूरज के पीछे बैठे और दोनों निकल गए।

दोपहर को सूरज से पहले ही रश्मि जल्दी कॉलेज से वापिस आ गई। आज मैंने सोच रखा था कि इसे इसके भाई की सामने कुछ और एक्सपोज़ करना है। इसलिए जैसे ही वो अपने कमरे में अपना यूनिफॉर्म चेंज करने की लिए जाने लगी.. तो मैंने उसको कहा- ठहरो.. मैं अभी आती हूँ।

मैं अपने कमरे में गई और उसके भाई का एक बरमूडा और अपनी एक स्लीबलैस टी-शर्ट उठा लाई और बोली- रश्मि..

आज से तुम घर में यह भी पहना करोगी.. देखो ना कितनी गर्मी है..
रश्मि ने हैरत से उस बरमूडा की तरफ देखा और बोली- भाभी मैं यह कैसे पहन सकती हूँ.. वो भी भैया की सामने।
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मैं बोली- अरे इसमें शरमाने वाली कौन सी बात है.. देखो तो मैंने भी तो रात से यही पहना हुआ है और वैसे भी हमारे घर पर कौन से कोई मेहमान आते हैं जो हमें फिकर होगी।
रश्मि- लेकिन.. भाभीईई..

मैं- लेकिन वेकिन कुछ नहीं.. बस मुझे नहीं पता.. अगर नहीं पहना ना मेरी मर्ज़ी के मुताबिक़.. तो इसे फेंक दो सोफे पर.. और अपनी मर्ज़ी का पहन लो जो पहनना है.. लेकिन फिर मुझसे बात ना करना तुम..
यह कह कर मैं मुड़ी और रसोई की तरफ बढ़ी।
मैंने भावुक होते हुए अपना तीर चलाया और मेरी उम्मीद के मुताबिक़ मेरा तीर लगा भी ठीक निशाने पर..

रश्मि ने फ़ौरन ही आगे बढ़ कर मुझे पीछे से हग कर लिया और अपनी बाँहें मेरे गले में डाल कर पीछे से अपना मुँह आगे लाते हुए मेरे गाल को किस किया और बोली- मैं अपनी प्यारी सी भाभी को कैसे नाराज़ कर सकती हूँ.. अरे भाभी तुम कहो तो मैं कुछ भी नहीं पहनूंगी.. लेकिन तुम मुझसे नाराज़ ना होना।
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मैंने मुस्करा कर रश्मि की बालों में हाथ फेरा और बोली- यह हुई ना मेरी प्यारी सी ननद वाली बात.. सच में रश्मि तू तो बहुत ही प्यारी और मासूम है.. हाँ.. तू मेरी मासूम सी ननद है मेरी जान..
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मैं दिल ही दिल में अपने शैतानी खेल पर मुस्कराती हुई रसोई में आ गई और रश्मि चेंज करने के लिए अपने कमरे की तरफ बढ़ गई।

अपडेट 18

आपने अभी तक पढ़ा..

रश्मि ने फ़ौरन ही आगे बढ़ कर मुझे पीछे से हग कर लिया और अपनी बाँहें मेरे गले में डाल कर पीछे से अपना मुँह आगे लाते हुए मेरे गाल को चूम लिया और बोली- मैं अपनी प्यारी सी भाभी को कैसे नाराज़ कर सकती हूँ.. अरे भाभी तुम कहो तुम कहो तो मैं कुछ भी नहीं पहनूंगी.. लेकिन तुम मुझसे नाराज़ ना होना।

मैंने मुस्करा कर रश्मि की बालों में हाथ फेरा और बोली- यह हुई ना मेरी प्यारी सी ननद वाली बात.. सच में रश्मि तू तो बहुत ही प्यारी और मासूम है.. हाँ.. तू मेरी मासूम सी ननद है मेरी जान..
मैं दिल ही दिल में अपने शैतानी खेल पर मुस्कराती हुई रसोई में आ गई और रश्मि चेंज करने के लिए अपने कमरे की तरफ बढ़ गई।
अब आगे..

कुछ देर के बाद रश्मि अपने कमरे से मेरा दिया हुआ कपड़े पहन कर मेरे पास रसोई में आई तो बहुत ही शर्मा रही थी। मैंने उसे देखा तो हमेशा की तरह उससे मज़ाक़ करने की बजाए उसको उत्साहित करने लगी कि तुम सच में बहुत ही प्यारी लग रही हो।
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रश्मि ने अपने भाई वाला जो बरमूडा पहना था.. वो उसके घुटनों तक आ रहा था.. उससे नीचे उसकी गोरी-गोरी टाँगें बिल्कुल नंगी थीं.. बिल्कुल ही साफ़ गोरी-गोरी चिकनी टाँगें जिन पर एक भी बाल नहीं था..

मतलब किसी को भी उसकी चिकनी टाँगें देखते साथ ही मज़ा आ जाए।
ऊपर से उसने मेरी स्लीवलैस शर्ट पहन ली थी, यह शर्ट उसको काफ़ी ढीली थी, उसकी दोनों बाँहें बिल्कुल नंगी थीं, बिल्कुल गोरे और चिकने कन्धों पर उसकी ब्रेजियर की तनियाँ एकदम साफ़ नज़र आ रही थीं।
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स्लीवलैस शर्ट होने की वजह से रश्मि ने प्लास्टिक की पारदर्शी स्ट्रेप्स वाली ब्रेजियर पहन ली थी। ताकि कम से कम नज़र आ सकें… लेकिन कन्धों पर सब मर्दों की नजरें तो ब्रा की स्ट्रेप्स पर ही होती है ना..
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शर्ट की स्ट्रेप्स तो चौड़ी थीं.. लेकिन फिर भी थोड़ी सी भी चलने-फिरने के साथ ही वो पीछे को हट जाती थीं और ब्रेजियर की स्ट्रेप्स नजर आने लगती थीं।
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मैंने बिना कुछ ज्यादा बात किए रश्मि को काम पर लगा दिया.. ताकि उसे भी कोई अहसास ना हो।

काम करते हुए रश्मि आहिस्ता से बोली- भाभी वो भैया.. मेरा मतलब है कि वो भैया नाराज़ हो गए तो.. मुझे ऐसी ड्रेस में देख कर.. मेरा मतलब था!

मैं- अरे पगली तू तो इतनी प्यारी लग रही है.. तो तेरा भाई तुझे देख कर क्यों नाराज़ होगा.. कोई भी भाई अपनी बहन पर नाराज़ नहीं होता।

शाम में जब सूरज घर आया तो खाने की टेबल पर पहुँचने तक उसकी मुलाक़ात रश्मि से नहीं हो सकी। सूरज टेबल पर बैठा था और जैसे ही रश्मि खाने की ट्रे लेकर आई तो सूरज की आँखें फटी की फटी रह गईं।
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(सूरज का रश्मि को देख ऐसे करने का भावना आया )
उसकी नजरें अपनी बहन की नंगी टाँगों पर जमी हुई थीं। जो कि उसके बरमूडा के नीचे बिल्कुल नंगी थीं।

मैं सूरज की नज़रों को ही देख रही थी लेकिन शो ऐसा ही कर रही थी। जैसे कि मैं उन लोगों को नहीं देख रही होऊँ।

रश्मि बुरी तरह से शर्मा रही थी और सूरज की नजरें न चाहते हुए भी अपनी बहन के जिस्म पर से नहीं हट पा रही थीं। कभी वो उसकी नंगी बाँहों को देखता और कभी चिकनी टाँगों को देखने लगता।
मैंने देखा कि रश्मि के कन्धों पर उसकी ब्रेजियर के स्ट्रेप्स भी साफ़ नज़र आ रहे हैं।जब रश्मि खाना परोसने के लिए झुकी उसको देख कर तो मेरी भी हालत खुसक गई ,
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हम दोनों पति पत्नी रश्मि को कहा जाने वाले नजर से देख रहे थे तो रश्मि को खाने के समय ऑक्वर्ड फ़ील हो रही थी,रश्मि ने बड़ी ही मुश्किल से खाना खाया.. मैं इधर-उधर की बातों से उसकी तवज्जो हटाने की कोशिश करती रही लेकिन वो अपनी ड्रेस में बहुत ही परेशानी महसूस कर रही थी।
खाने के बाद सूरज ने कुछ देर बैठ कर टीवी देखा.. रात हो रही थी तो वो अपने बेडरूम में सोने चला गया।

मैंने रसोई से सामान समेटा और फिर चाय बना कर मैंने और रश्मि ने पी। चाय पीने के बाद मैं उससे बोली- आओ एसी में सोने चलते हैं..

रश्मि ड्रेस चेंज करने की कहना चाहती थी लेकिन कह ना पाई और खामोशी से मेरे साथ हमारे बेडरूम में आ गई।

हम दोनों कमरे में आए तो सूरज सो रहा था.. उसकी हल्के-हल्के खर्राटे कमरे में गूँज रहे थे।
लेकिन मुझे शक़ था कि वो सो नहीं रहा होगा.. जाहीर है कि वो अपनी बहन के आने का इन्तजार कर रहा होगा।
कमरे में आकर मैंने दरवाजा बन्द किया और बिस्तर पर जाने की बजाए टॉयलेट में चली गई.. ताकि रश्मि बिस्तर पर आराम से लेट सके और कुछ दिमाग की उलझन से मुक्त हो सके।

थोड़ी देर बाद मैं बाथरूम से बाहर निकली तो रश्मि अपनी ही वाली तरफ को लेटी हुई थी। मैंने बिस्तर के क़रीब आकर उसे आगे को होने को कहा.. पहले तो वो चुप रही.. फिर आहिस्ता से अपने भैया की तरफ सरक़ गई।

मुझे खुशी इस बात की थी कि अगर वो कल रात जाग रही थी और उसे अपने भाई के हाथों से खुद के जिस्म को छूने का पता चला था.. तो उसके बावजूद भी उसने अपने भाई के साथ लेटना क़बूल कर लिया था। शायद उसे भी इस खेल में कुछ मज़ा आने लगा था।

ज़ाहिर है कि वो एक नौजवान झूबसूरत लड़की थी.. जिसे आज तक कभी भी किसी मर्द ने नहीं छुआ था और जब कोई उसे छू रहा था.. तो उसे उसका छूना अच्छा लग रहा था।

अब उसका बदन इस चीज़ को मानने के लिए तैयार नहीं था कि वो उसका भाई है.. तो यह गलत है।
लेकिन उसका दिमाग उसे अभी भी समझाता था.. जिसकी वजह से उसके अन्दर अभी भी थोड़ी झिझक बाकी थी।

दूसरी वजह उसकी उस झिझक का कारण मैं थी। उसके ख्याल में मुझे इन सब बातों कुछ भी एहसास नहीं था.. और अगर मुझे पता हो जाएगा.. तो ऐसा लगता था कि इस बात का मैं बहुत बुरा मान जाऊँगी.. कि वो मेरे पति के साथ जिस्मानी मजा लेना चाह रही है।

हालांकि उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि यह सारा गेम मेरा ही था.. जिस पर वो दोनों बहन-भाई ना चाहते हुए भी आगे बढ़ रहे थे और एक-दूसरे के क़रीब आते जा रहे थे.. बिना यह सोचे समझे कि यह एक गुनाह है.. और गलत बात है।

सूरज दूसरी तरफ मुँह करके लेटा हुआ था और रश्मि बिल्कुल सीधी.. अपनी पीठ के बल लेटी हुई थी।
मैंने रश्मि की तरफ करवट ली और उससे बातें करने लगी। हम दोनों ने बरमूडा ही पहना हुआ था और दूसरी तरफ सूरज ने भी अपना शॉर्ट्स पहन रखा था, हम दोनों की नंगी टाँगें एक-दूसरे से टच हो रही थीं।

मैंने अपनी टाँग ऊपर करके रश्मि की टाँग पर रखी और उसकी टाँग को आहिस्ता-आहिस्ता सहलाते हुए बोली- रश्मि तुम्हारा जिस्म बहुत ही मुलायम है।
रश्मि शरमाई और बोली- भाभी आप का भी तो ऐसा ही है..
मैं- रश्मि जो भी लड़का तुम्हें हासिल करेगा ना.. वो बहुत ही लकी होगा..!
रश्मि शर्मा कर बोली- क्या मतलब भाभी?
मैं- अरे तेरे जैसे खूबसूरत लड़की जिसको अपने नीचे लिटाने को मिलेगी.. उसकी तो समझो कि लॉटरी ही निकल पड़ेगी।

रश्मि मेरी बात सुन कर शर्मा गई। मैं ऐसी बातें इसलिए कर रही थी ताकि अगर सूरज सो नहीं रहा है.. तो वो भी मेरी बातें सुन सके और मैं उसको उत्तेजित करने की लिए ऐसी बातें कर रही थी।

ऐसी उत्तेजित बातें करते समय मेरी खुद की चूत में रस निकलने लगा था।

अपडेट 19

आपने अभी तक पढ़ा..
मैं- रश्मि जो भी लड़का तुम्हें हासिल करेगा ना.. वो बहुत ही लकी होगा..
रश्मि शर्मा कर बोली- क्या मतलब भाभी?
मैं- अरे तेरे जैसे खूबसूरत लड़की जिसको अपने नीचे लिटाने को मिलेगी.. उसकी तो समझो कि लॉटरी ही निकल पड़ेगी..

रश्मि मेरी बात सुन कर शर्मा गई। मैं ऐसी बातें इसलिए कर रही थी ताकि अगर सूरज सो नहीं रहा है.. तो वो भी मेरी बातें सुन सके और मैं उसको उत्तेजित करने की लिए ऐसी बातें कर रही थी।
ऐसी उत्तेजना भरी बातें करते समय मेरी खुद की चूत में रस निकलने लगा था।
अब आगे..

ऐसी ही थोड़ी देर तक बातें करने के बाद मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं.. जैसे कि मैं सो गई हूँ। काफ़ी देर तक खामोशी रही.. मुझे नींद भला कहा आने थी। थोड़ी सी आँख खोल कर मैंने देखा तो रश्मि की आँखें भी बंद थीं।
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ऐसी ही क़रीब-क़रीब एक घंटा गुज़र गया.. तो मुझे रश्मि की दूसरी तरफ सूरज हिलता हुआ महसूस हुआ। उसने जैसे नींद में ही करवट ली और सीधा अपनी बाज़ू और टांग को अपनी बहन के ऊपर रख दिया।

मैंने देखा की रश्मि ने फ़ौरन ही आहिस्ता से आँखें खोलीं और सबसे पहले अपने भाई की तरफ देखा और फिर मेरी तरफ देख कर मेरा पक्का किया कि मैं सो रही हूँ या जाग रही हूँ।
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अपनी तसल्ली करके रश्मि ने आराम से अपनी आँखें बंद कर लीं। मैं हैरान हुई कि उसने अपने भाई का बाज़ू या टांग हटाने की कोई कोशिश नहीं की। उसके भाई की बाज़ू उसकी चूचियों से बिल्कुल नीचे लगी पड़ी थी और टांग उसकी जाँघों पर थी।
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मैं समझ गई कि रश्मि भी आज मजे लेने के चक्कर में है।
अब मेरी तरह से रश्मि भी सोती हुई बनी हुई थी.. लेकिन उसे यह नहीं पता था कि मैं जाग रही हूँ।

कुछ ही देर गुज़ारने के बाद मुझे सूरज के हाथ में हल्की-हल्की हरकत महसूस हुई। सूरज का अपनी बहन के जिस्म के ऊपर रखा हुआ हाथ आहिस्ता आहिस्ता हरकत में आ रहा था।
उसने आहिस्ता आहिस्ता अपना हाथ अपनी बहन की टी-शर्ट के ऊपर से ही उसके पेट पर फेरना शुरू कर दिया।
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जब उसे महसूस हुआ कि उसकी बहन के जिस्म में कोई भी हरकत नहीं हो रही है.. तो उसको यक़ीन हो गया कि वो सो रही है.. अब उसकी हिम्मत बढ़ चली और उसके हाथ का रश्मि के सीने की पहाड़ियों पर चढ़ने का सफ़र शुरू हुआ।
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सूरज ने आहिस्ता आहिस्ता अपने हाथ से रश्मि की चूचियों के निचले हिस्से को छूना शुरू कर दिया। सूरज का हाथ अपनी बहन की चूचियों को नीचे से छू रहा था।
आहिस्ता आहिस्ता उसने अपने हाथ को हरकत देते हुए रश्मि की चूचियों की ऊपर रख दिया और हाथ ऊपर रख कर वहीं पर कुछ देर के लिए ठहर गया।
जैसे वो रश्मि की प्रतिक्रिया देखना चाह रहा हो।

मुझे मज़ा आ रहा था.. लेकिन उससे बढ़ कर रश्मि के संयम पर हैरत हो रही थी कि कैसे वो खामोश अपने चेहरे के हाव-भाव को कंट्रोल करके लेटी हुई है।

सूरज ने आहिस्ता आहिस्ता अपने हाथ को रश्मि की चूचियों पर गोल-गोल घुमाना शुरू कर दिया।
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एक भाई के हाथ के नीचे उसकी बहन की चूची देख कर मेरी तो अपनी चूत गीली होने लगी थी। मेरा दिल कर रहा था कि मैं अपने हाथ अपनी चूत पर ले जाऊँ और अपनी चूत को सहलाने लगूँ लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकती थी।
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रश्मि ने जो शर्ट पहन रखी थी.. वो स्लीबलैस थी और उसका गला भी काफ़ी बड़ा था.. जिसमें उसकी सीने का काफ़ी हिस्सा साफ़ नंगा नज़र आता था।
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दोनों चूचियों पर हाथ फेरते हुए सूरज के हाथ आहिस्ता आहिस्ता रश्मि के नंगे सीने पर आ गए और उसने अपनी उंगलियों को अपनी बहन के नंगे और गोरे-गोरे उठे हुए सीने पर रख दिए।

अब आहिस्ता आहिस्ता वो अपना हाथ अपनी बहन के गले के नीचे छातियों पर फेरने लगा।

सूरज का हाथ आहिस्ता-आहिस्ता रश्मि के सीने पर फिसलता हुआ मेरी तरफ को आने लगा और उसने अपना हाथ रश्मि की शर्ट की स्ट्रेप्स को नीचे को सरका दिया और फिर वापिस अपना हाथ ऊपर की तरफ ले गया।
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रश्मि के सीने पर हाथ फेरते हुए उसका हाथ आहिस्ता आहिस्ता नीचे को जाने लगा।
अब इस तरह लेटने की वजह से रश्मि की चूचियों का क्लीवेज भी साफ़ नज़र आ रहा था। सूरज ने अपनी एक उंगली उस खूबसूरत क्लीवेज में घुसेड़ दी और आहिस्ता आहिस्ता उसे आगे-पीछे करने लगा।
सूरज की एक टाँग अभी तक रश्मि की टाँगों पर ही थी।
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अपनी बहन की चूचियों की क्लीवेज में कुछ देर अपनी उंगली फेरने के बाद मेरे पति ने अपने हाथ की बाक़ी उंगलियां भी आहिस्ता आहिस्ता रश्मि की टी-शर्ट के अन्दर को घुसेड़ना शुरू कीं और अपना पूरा हाथ रश्मि की चूचियों पर ले गया।

अभी शायद वो रश्मि की चूचियों पर उसकी ब्रा की ऊपर से ही हाथ फेर रहा था। उसका हाथ रश्मि की ब्रेजियर के ऊपर से ही उसकी चूचियों को छू रहा था।
सूरज के हाथ रश्मि की नंगी चूचियों को भी छू रहे थे.. जो कि उसकी ब्रा के आधे कप में से बाहर निकल रही थीं।

मेरी नज़र रश्मि के चेहरे की तरफ गई.. तो उसकी आँखें हल्की-हल्की सी हिल-डुल रही थीं.. जैसे की वो खुद को पूर सुकून में रखने की कोशिश कर रही हो।

उस अँधेरे कमरे में जहाँ सिर्फ़ एसी की जलते-बुझते नंबर्स की बहुत ही मद्धिम सी रोशनी फैली हुई थी। उस रोशनी में कोई भी किसी की चेहरे के हाव-भाव नहीं देख सकता था। किसी को नहीं पता था कि दूसरा जाग रहा है.. या सो रहा है।

हर कोई दूसरी को सोता हुआ ही समझ रहा था। हम तीनों के तीनों उस बिस्तर पर एक-दूसरे के क़रीब लेटे हुए भी जाग रहे थे लेकिन सूरज समझ रहा था कि मैं और रश्मि दोनों सो रहे हैं।

रश्मि मेरे सोए हुए होने की प्रार्थना कर रही थी और खुद भी सोने की एक्टिंग करते हुए अपने भाई को अपने जिस्म से खेलने का मौका दे रही थी।

ज्यादा देर तक अपना हाथ रश्मि की शर्ट की अन्दर रखे बिना ही सूरज ने अपना हाथ उसकी शर्ट से बाहर निकाला और फिर बिस्तर पर उठ कर बैठ गया।

मैंने फ़ौरन ही अपनी आँखें बंद कर लीं। चंद लम्हों के बाद मैंने देखा तो वो उठ कर बिस्तर के हमारे पैरों वाली साइड पर चला गया हुआ था और नीचे झुक कर आहिस्ता आहिस्ता अपनी बहन के गोरे-गोरे पैरों को चूमने लगा था।
वो रश्मि के पैरों को नीचे और ऊपर से चूम रहा था। उसके पैरों को चूमते हुए धीरे-धीरे उसकी टाँगों पर आ गया और उसकी चिकनी और गोरी टाँगों पर हाथ फेरने लगा।

फिर नीचे झुक कर अपने होंठ उसकी गोरी टाँगों पर रख दिए और उन मरमरी टाँगों को चूमने लगा।
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रश्मि की नंगी टाँगों के पास ही मेरी भी टाँगें थीं और वो भी नंगी थीं। सूरज ने एक नज़र मेरे चेहरे पर डाली और फिर अपना दूसरा हाथ मेरी नंगी गोरी टाँग पर रख दिया।
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अब उसका एक हाथ मेरी टांग को भी सहला रहा था.. तो दूसरा अपनी बहन की टांग को सहला रहा था।
शायद वो दोनों को कंपेयर कर रहा था कि कौन ज्यादा चिकनी है.. उसकी बहन या उसकी बीवी..

रश्मि की टाँगों पर हाथ फिराता हुआ सूरज ऊपर को आ रहा था। अब उसका हाथ रश्मि के घुटनों तक पहुँच चुका था और फिर उसका हाथ ऊपर को सरका और उसने अपना हाथ अपनी बहन की नंगी जांघ पर रख दिया।
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जैसे ही सूरज के हाथ ने रश्मि की नंगी जाँघों को छुआ.. तो मेरी चूत ने तो फ़ौरन ही पानी छोड़ दिया।
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मैं अब ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी और ना ही मैं इतनी जल्दी और इतनी आसानी से अभी सूरज को रश्मि की चूत तक पहुँचने देना चाहती थी।

अपडेट 20

आपने अभी तक पढ़ा..

रश्मि की टाँगों पर हाथ फिराता हुआ सूरज ऊपर को आ रहा था। अब उसका हाथ रश्मि के घुटनों तक पहुँच चुका था और फिर उसका हाथ ऊपर को सरका और उसने अपना हाथ अपनी बहन की नंगी जांघ पर रख दिया।
जैसे ही सूरज के हाथ ने रश्मि की नंगी जाँघों को छुआ.. तो मेरी चूत ने तो फ़ौरन ही पानी छोड़ दिया।
मैं अब ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी और ना ही मैं इतनी जल्दी और इतनी आसानी से अभी सूरज को रश्मि की चूत तक पहुँचने देना चाहती थी।
अब आगे..

मैंने थोड़ी सी हरकत की तो सूरज फ़ौरन ही पीछे हट कर लेट गया।
मैं बड़े ही आराम से उठी जैसे नींद से जागी हूँ और आराम से बाथरूम की तरफ चल दी।
बाथरूम में जाकर मैंने अपनी चूत को अच्छे से धोया.. जो बिल्कुल गीली हो गई थी,
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फिर मैंने बाहर निकलने से पहले थोड़ा सा छुप कर बाहर देखा.. तो सूरज थोड़ा सा उठ कर अपनी बहन की गालों को चूम रहा था और कभी उसकी होंठों को भी पी रहा था..

लेकिन साथ ही बार-बार बाथरूम की तरफ भी देख रहा था।
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मैंने बाथरूम में थोड़ा सा शोर किया और फिर दरवाज़ा खोल दिया.. लेकिन सूरज को अपनी जगह पर टिक जाने का पूरा मौका दे दिया।
फिर बाथरूम से वापिस आकर मैं अपनी जगह पर लेटने की बजाए सूरज की तरफ आ गई और उसके साथ लेटने की बजाए उसके ऊपर लेट गई क्योंकि उसके साथ लेटने के लिए जगह नहीं थी।
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मेरे ऊपर लेटने की वजह से सूरज ने नींद में होने का नाटक करते हुए आँखें खोलीं और बोला- हाँ क्या है?
मैंने बिना कुछ कहे उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसके होंठों को चूमने लगी।
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सूरज भी जो अब तक अपनी बहन के जिस्म से छेड़छाड़ करने से गरम हो चुका था.. उसने भी मुझे अपनी बाँहों में भर लिया।
मैं यह सब कुछ जानबूझ कर कर रही थी.. क्योंकि मुझे पता था कि रश्मि भी जाग रही है और वो यह सब देख रही होगी।
मुझे चूमते हुए और मेरी कमर और मेरी गाण्ड पर हाथ फेरते हुए सूरज मेरे कान में आहिस्ता से बोला- रश्मि जाग जाएगी।
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मैं अपने होंठ सूरज के रश्मि की साइड वाले कान की तरफ ले गई और थोड़ी ऊँची आवाज़ में बोली- नहीं जानू, तुम्हारी बहन गहरी नींद में सो रही है.. वो सुबह से पहले नहीं उठेगी.. बस जल्दी से तुम मेरे जिस्म से अपनी प्यास बुझा लो..
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मैं ये सब इतनी ऊँची आवाज़ में कह रही थी.. ताकि रश्मि भी यह बात आसानी से सुन ले।

मैं नीचे को जाने लगी और सूरज की टाँगों के बीच आ गया। मैंने सूरज के शॉर्ट्स को नीचे खींचा और उसके अकड़े हुए लंड को अपने हाथ में ले लिया। मैंने सूरज की लंड की टोपी को चूम लिया
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और बोली- जानू.. तुम्हारा लंड तो पहले से ही तैयार है.. लगता है कि किसी हसीन और खूबसूरत लड़की की ख्वाब ही देख रहे थे?
सूरज मुस्कराया और एक नज़र रश्मि पर डाल कर बोला- हाँ..

मैंने सूरज की लंड की टोपी को ज़ुबान से चाटा और बोली- ख्वाब देखने की क्या ज़रूरत है.. जब तुम्हारी पास इतनी खूबसूरत चीज़ मौजूद है.. तो चढ़ जाते बस.. और चोद लेते.. तुम्हें किसी से इजाज़त लेने की तो ज़रूरत नहीं है ना..
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सूरज ने चौंक कर मेरी तरफ देखा और बोला- क्या मतलब?
मैं मुस्कराई उसकी घबराहट देख कर और बोली- हाँ.. तो और क्या.. तुम्हारी बीवी हूँ.. और खूबसूरत भी हूँ.. तो दिल कर रहा था तो आकर चोद लेते मुझे..में अपने मुंह से उसका सुपड़ा निकाल किस का मुंह बनाते हुए आँख मार दी
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मेरी बात सुन कर सूरज ने सकून की साँस ली।
मेरा इशारा तो रश्मि की तरफ ही था.. लेकिन मैं अपनी बात को सम्भाल ले गई।

अब मैंने सूरज के लंड को अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसने लगी। मैं पूरी तरीके से खुल कर सूरज के साथ सेक्स करना चाहती थी..

ताकि रश्मि को भी मालूम हो सके कि कैसे सेक्स करते हैं।
मेरी एक टाँग रश्मि के जिस्म से भी टच कर रही थी।
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मैं अब कोई भी कोशिश नहीं कर रही थी कि रश्मि को पता ना चले क्योंकि मुझे तो पहले से ही पता था कि रश्मि जाग रही है.. और सब कुछ देख भी रही है.. और महसूस भी कर रही है।

मैंने अच्छी तरह से अपने पति के लंड को भर-भर कर चाटा और फिर बिस्तर से नीचे उतर कर अपना बरमूडा और अपनी टी-शर्ट उतार दी।
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नीचे मैंने ना ब्रेजियर पहनी हुई थी और ना ही पैन्टी.. पूरी तरह से नंगी होकर मैं दोबारा से सूरज की ऊपर आ गई।
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सूरज ने मुझे बहुत रोका कि पूरे कपड़े ना उतारो.. लेकिन मैं कहाँ मानने वाली थी.. जबकि मुझे पता था कि रश्मि अपनी आँखें नहीं खोलेगी।

सूरज के ऊपर आकर मैंने अपनी चूत को सूरज के लंड के ऊपर रखा और धीरे-धीरे उसे अपने चूत में लेते हुए नीचे को बैठ गई।
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फिर आहिस्ता आहिस्ता ऊपर-नीचे को होकर अपनी चूत चुदवाने लगी।
मैं आगे को झुकी और सूरज के गाल पर चुम्बन करने लगी।
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फिर मैं रश्मि की तरफ देखते हुए बोली- सूरज देखो.. तुम्हारी बहन सोती हुए में कितनी मासूम और खूबसूरत लग रही है।
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सूरज ने भी अपनी नज़र रश्मि के चेहरे पर जमा दी और अब बिना मेरी तरफ देखे हुए आहिस्ता आहिस्ता मुझे चोदने लगा।
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अब मैंने भी अपने मम्मों को सूरज के मुँह में देते हुए जरा तेज आवाज में सीत्कार करना शुरू कर दिया ताकि बगल में लेटी हुई मेरी ननद की बुर में चींटियाँ रेंगने लगें।
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‘हाय.. जानू चूसो न मेरे मम्मों को.. आह्ह.. कितना मस्त चूसते हो और ओह.. तुम्हारा लौड़ा तो आज मेरे नीचे कुछ ज्यादा ही मजा दे रहा है.. मेरी जान किसी और की फ़ुद्दी चोद रहे हो क्या..’
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सूरज कुछ नहीं बोला.. बस धकापेल मेरी चूत को चोदता रहा।
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थोड़ी देर के बाद जब हम दोनों चुदाई करके झाड गए..
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तो हम दोनों ने वॉशरूम में जाकर जिस्मों को साफ़ किया और फिर अपनी-अपनी जगह पर आकर लेट गए।
अब हम तीनों ही आराम से सो गए।

अगली सुबह जब हम लोग उठे तो रश्मि पहली ही रसोई में जा चुकी हुई थी।
मैंने सूरज को उठाया और तैयार होने का कह कर खुद भी रसोई में चली गई।

रश्मि चाय बना रही थी.. मैंने जैसे ही उसे देखा.. तो वो शर्मा गई। मैंने महसूस किया कि वो मुझसे नजरें नहीं मिला पा रही है।
मैंने उससे कहा- चलो भी.. जल्दी से तैयार होकर कॉलेज की लिए निकलो.. फिर मुझे भी नहाना है।

रश्मि शरारती अंदाज़ में बोली- क्यों आज ऐसी क्या बात हो गई कि आपको सुबह-सुबह ही नहाने की फिकर लग गई है।
मैं मुस्करा कर बोली- अरे यार तुझे बताया तो था कि तेरे भैया रात को बहुत तंग करते हैं.. तो बस रात को उन्होंने पकड़ लिया था।
रश्मि- भैया ने आपको पकड़ लिया या आपने उन्हें पकड़ा था।
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मैं जानती थी कि वो सब कुछ देख रही थी.. इसलिए यह बात कह रही है। मैं फिर भी उसकी बात को छुपाते हुए बोली- तू तो सारी रात बेहोश होकर सोई रहती है.. तुझे क्या पता कि तेरे भैया कितना तंग करते हैं.. मुझे तो पूरी रात नहीं सोने देते। इसलिए तुझे अपनी जगह पर लिटाया था कि शायद तू ही कुछ हेल्प करेगी.. लेकिन फिर तेरा भी मुझे कोई फ़ायदा नहीं हुआ।

रश्मि शर्मा कर चाय के कप उठाते हुए बोली- भाभी.. मैं भला भैया को उनकी शरारतों से कैसे रोक सकती हूँ?

मैं चुप हो गई और मुस्कुराने लगी।
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इसके बाद हम सब नाश्ते की टेबल पर आए.. तो सूरज की नजरें आज तो रश्मि की जिस्म पर कुछ ज्यादा ही गहरी थीं और उसके नशीले जिस्म से नजर उसकी हट ही नहीं रही थीं।

मैं इस सबको देख कर मजे ले रही थी, लेकिन अभी भी वो

अपडेट 21

आपने अभी तक पढ़ा..
हम सब नाश्ते की टेबल पर आए.. तो सूरज की नजरें आज तो रश्मि की जिस्म पर कुछ ज्यादा ही गहरी थीं और उसके नशीले जिस्म से उसका नजर हट ही नहीं रही थीं।
मैं इस सबको देख कर मजे ले रही थी, लेकिन अभी भी वो दोनों यही समझ रहे थे कि मुझे दोनों को इनकी हरकतों का मालूम नहीं है।
अब आगे..

नाश्ते के बाद वो दोनों बहन-भाई चले गए और मैं रसोई का सामान समेटने के बाद नहाने के लिए चली गई। फुव्वारे से ठंडी-ठंडी पानी की गिरती बूंदों के नीचे नहाते हुए मैं यही सोच रही थी कि अब आगे क्या किया जाए.. जिससे सूरज को अपनी बहन के क़रीब आने का और भी मौका मिले और अपनी बहन का जिस्म को देखने और भोगने का भरपूर मौका मिल सके।
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हालांकि मैं दोनों को बिस्तर पर तो एक-दूसरे के क़रीब ला ही चुकी थी। अब मैं उनके दरम्यान की शरम और परदे की दीवार को भी गिरा देना चाहती थी।

दोपहर को दोनों एक साथ ही वापिस आ गए।
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खाने की टेबल पर ही मैंने सूरज को कह दिया कि आज हम दोनों को शाम को शॉपिंग के लिए लेकर चलो.. मुझे कुछ रेडीमेड कपड़े ख़रीदने हैं।
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सूरज मान गया कि शाम को खरीददारी के लिए निकलते हैं।

तक़रीबन अँधेरा ही हो चुका था जब हम लोग शॉपिंग की लिए निकले। चूंकि अगले दिन रविवार था.. इसलिए कोई फिकर नहीं थी कि रात को देर हो जाएगी या सुबह कॉलेज और ऑफिस जल्दी जाना है।

मैंने एक पोलका डॉट वाली फ्राक पहनी थी और मेरी फ्राक का गला हमेशा की तरह ही डीप था.. जिसकी वजह से मेरा क्लीवेज आसानी से नज़र आ रहा था।
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रश्मि ने जीन्स ही पहनी थीं ।

जो कि ज्यादा वल्गर या सेक्सी नहीं लग रही थीं।
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रश्मि भी आज खूब बन-संवर कर तैयार हुई थी। उसने बहुत ही अच्छा सा परफ्यूम भी लगाया हुआ था और हल्का सा मेकअप भी कर रखा था।

उसके पतले-पतले प्यारे-प्यारे होंठों पर रेड लिप ग्लो लगी हुई थी.. जिसकी वजह से उसके लिप्स बहुत ही सेक्सी लग रहे थे। दिल करता था कि उनको चूम ही लें।
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मैंने आज भी रश्मि को हम दोनों के बीच में बिल्कुल सूरज के पीछे बैठाया और खुद उसको सूरज की कमर के साथ दबाते हुए उसके पीछे बैठ गई।

रश्मि की दोनों खुबसूरत चूचियाँ अपने भाई की कमर के साथ दब रही थीं और आज मुझे पक्का यक़ीन था कि सूरज भी खुद उनको अपनी पीठ से महसूस करना चाह रहा होगा।
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यही वजह थी कि वो थोड़ा-थोड़ा अपनी कमर को आगे-पीछे भी कर रहा था।
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मैंने अचानक ही हाथ एक साइड से आगे ले जाकर सूरज की जांघ पर रखा और फिर जैसे ही उसकी पैन्ट के ऊपर से उसके लण्ड को छुआ.. तो पता चला कि वो तो पहले से ही खड़ा हो चुका है।
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सूरज के लंड के ऊपर हाथ फेरते हुए मैं थोड़ा सा ऊँची आवाज़ में रश्मि से बोली- रश्मि डार्लिंग.. आज तो तुम बहुत प्यारी लग रही हो और तुम्हारे लिप्स तो बहुत ही सेक्सी लग रही हैं। मेरा तो दिल करता है कि इनको चूम ही लूँ।

मैंने अपनी आवाज़ इतनी तेज रखी थी कि सूरज भी सुन सके और उसके सुनने का अहसास मुझे उसके लण्ड से हुआ.. जिसने मेरे हाथ में एक साथ दो-तीन झटके लिए।
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मैं मुस्करा दी और आहिस्ता से अपने होंठ रश्मि की गर्दन से थोड़ा नीचे पीठ के ऊपरी हिस्से को चूम लिया।
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रश्मि कसमसाई- भाभी.. क्या करती हो यार..
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मैं उसकी गर्दन के नीचे अपने होंठ आहिस्ता-आहिस्ता चलाते हुए बोली- डार्लिंग तू प्यारी ही इतनी लग रही है आज.. तो मैं क्या करूँ..
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वो चुप रही।

मैंने फिर पूछा- तू बता.. तूने क्या क्या लेना है?
वो बोली- कुछ नहीं भाभी..
मैंने आहिस्ता से उसकी चूची को एक साइड से छुआ और बोली- नई ब्रेजियर ही ले लो.. आज तो तेरे भैया भी साथ ही हैं।
रश्मि ने पीछे को हौले से अपनी कोहनी मेरी पेट में मारी और बोली- भाभी कुछ तो शरम करो.. भैया भी साथ हैं।

मैं जोर-जोर से हँसने लगी और फिर उसके कान में बोली- उस दिन से भी तो अपने भैया की ही लाई हुई ब्रा पहन रही है ना.. तो उनके साथ आकर लेने में क्या शरम है तुझे?

रश्मि चुप रही लेकिन मैंने देखा कि वो मुस्करा रही थी। मुझे यक़ीन था कि मेरी यह नोक-झोंक सूरज ने भी सुन ली होगी और यही मैं चाहती थी कि वो भी मेरी यह बातें सुन कर एन्जॉय करे।

सूरज ने एक बड़े शॉपिंग माल के बाहर बाइक रोकी और हम नीचे उतर आए।

सूरज बाइक पार्क करने गया तो रश्मि बोली- भाभी.. यार कुछ तो शरम किया करो न.. भैया अगर सुन लें तो.. क्या सोचेंगे?
मैंने दिल ही दिल में सोचा कि उस वक़्त तो तुझे शरम नहीं आती.. जब तेरे भैया तेरी चूचियों और जिस्म पर हाथ फेर रहे होते हैं। उस वक़्त तो बड़े मजे ले रही होती हो।
लेकिन मैं चुप रही और बोली- अरे कुछ नहीं होता.. उसे हमारी बातों का क्या पता..

इतने मैं सूरज भी आ गया और हम तीनों मॉल में दाखिल हो गए।

ये काफ़ी मॉडर्न किस्म का मॉल था.. जहाँ पर अनेक किस्म की दुकानें थीं और आजकल कुछ दुकानों पर सेल भी चल रही थी.. इसलिए मैं यहाँ आई थी वरना सूरज की इनकम में ज्यादा महँगी शॉपिंग अफोर्ड नहीं हो सकती थी ना..

हम लोग एक दुकान में गए.. तो वहाँ पर कई किस्म की ड्रेसेज को मॉडल्स के ऊपर पहनाया गया था.. कुछ मॉडल्स के ऊपर ब्रा और पैन्टी पहना कर रखी हुई थीं।
कुछ पुतलों पर ड्रेस भी थी.. तो कुछ में काफ़ी सेक्सी किस्म की जालीदार कपड़ें सजाए गए थे।
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इस दुकान पर आकर रश्मि का चेहरा तो शरम से सुर्ख ही हो गया था। वो इधर-उधर देखते हुए बहुत शर्मा और घबरा रही थी।
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अपने भाई की मौजूदगी की वजह से उसे ज्यादा शर्म महसूस हो रही थी।

वहाँ पर कपड़े देखते हुए मुझ एक मॉडल पर पहनी हुई एक बहुत ही कामुक किस्म की ड्रेस नज़र आई, इसके कन्धों पर सिर्फ़ पतली सी डोरियाँ थीं और छाती का ऊपरी हिस्सा बिल्कुल नंगा था।
आप यूँ समझ लें कि इसमें से चूचियों का भी ऊपरी हिस्सा नंगा हो रहा था..
लेकिन बाक़ी चूचे नीचे तक का हिस्सा सिल्की टाइप के बिल्कुल झीने से कपड़े से कवर था और उस ड्रेस की लम्बाई भी सिर्फ़ कमर तक ही थी जिससे सिर्फ पेट कवर हो सके, नीचे उस मॉडल पर उस ड्रेस के साथ सिर्फ़ एक छोटी सी पैन्टी बंधी हुई थी।

दरअसल यह एक जालीदार ड्रेस पति और बीवी के लिए तन्हाई में पहनने के लिए था।
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मुझे वो ड्रेस पसंद आ गया.. मैंने सूरज से कहा- मुझे यह ड्रेस पसंद आया है।
पास ही रश्मि भी खड़ी थी.. वो थोड़ा और घबरा गई।
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अपडेट 22

आपने अभी तक पढ़ा..
वहाँ पर कपड़े देखते हुए मुझ एक मॉडल पर पहनी हुई एक बहुत ही कामुक किस्म की ड्रेस नज़र आई। इसमें चूचियों का भी ऊपरी हिस्सा नंगा हो रहा था.. लेकिन बाक़ी चूचे नीचे तक का हिस्सा सिल्की टाइप के बिल्कुल झीने से कपड़े से कवर था और उस ड्रेस की लम्बाई भी सिर्फ़ कमर तक ही थी जिससे सिर्फ पेट कवर हो सके। नीचे उस मॉडल पर उस ड्रेस के साथ सिर्फ़ एक छोटी सी पैन्टी बंधी हुई थी।

दरअसल यह एक जालीदार ड्रेस पति और बीवी के लिए तन्हाई में पहनने के लिए था।
मुझे वो ड्रेस पसंद आ गया.. मैंने सूरज से कहा- मुझे यह ड्रेस पसंद आया है।
पास ही रश्मि भी खड़ी थी..

वो थोड़ा और घबरा गई।

अब आगे..

सूरज बोला- पसंद है.. तो ले लो.. रात में पहनने के लिए हो जाएगा।
मैं मुस्कराई और रश्मि की तरफ देख कर बोली- दो लूँगी।
सूरज- दो किस लिए?
मैं- एक रश्मि के लिए भी लेना है।

रश्मि ने चौंक कर मेरी तरफ और फिर मेरी सामने की ड्रेस को देखा और बोली- भाभी मैं.. मैंने इस ड्रेस का क्या करना है।
मैं- अरे यार.. ले लो.. कभी-कभी पहन लिया करना.. क्यों सूरज ठीक कह रही हूँ ना?

सूरज ने एक नज़र अपनी बहन की तरफ देखा तो उसकी आँखों में एक वासनामय चमक थी.. लेकिन बहुत ही साधारण से अंदाज़ में बोला- हाँ.. ले लो लेना है तो.. इसमे बुराई तो कोई नहीं है.. काफी आरामदायक रहेगी।

मैंने दो का ऑर्डर दे दिया.. सेल्समेन ने मुझसे साइज़ नम्बर जानना चाहा.. जिस पर रश्मि आहिस्ता-आहिस्ता ऐतराज कर रही थी.. लेकिन मैंने उसका साइज़ नम्बर भी बता दिया।

सेल्समेन ने दो ड्रेस निकाल दिए, दोनों अलग-अलग रंग के थे, मेरी ड्रेस हल्के नीले रंग की थी और रश्मि की लाल रंग की थी।
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मैंने शरारत के अंदाज़ में रश्मि की तरफ देखा और बोली- रश्मि तुम ऐसा करो कि अन्दर जाकर ट्राई करके देख लो.. कि साइज़ वगैरह ठीक है कि चेंज करना है।
रश्मि घबरा कर- नहीं नहीं.. कोई ज़रूरत नहीं है..
सेल्समेन- नहीं मैडम.. प्लीज़ आप एक बार पहन कर चैक कर लें.. उधर ऊपर है हमारा ट्राइयरूम.. वहाँ पर कोई भी नहीं है.. आप लोग ऊपर जाकर चैक कर लें।

मैंने दोनों ड्रेसज उठाए और रश्मि का हाथ पकड़ कर बोली- आओ मेरे साथ..
साथ ही मैंने सूरज को भी आने का कह दिया। ऊपर गए तो छोटा सा ही एक कमरा था.. जिसमें एक हिस्से में ट्रायल रूम बना हुआ था।
मैंने रश्मि को कहा- जाओ चैक कर लो..

मैंने पकड़ कर रश्मि को ट्रायल रूम में जबरिया ढकेल दिया।
रश्मि लाल चेहरे के साथ अन्दर चली गई।

थोड़ी देर के बाद मैंने उसे आवाज़ दी और पूछा- हाँ बोलो.. ठीक है या नहीं?
रश्मि- जी भाभी ठीक है..
मैं- खोलो दरवाजा.. मुझे देखने तो दो..

रश्मि ने अन्दर से लॉक खोला तो मैं ट्रायलरूम में दाखिल हुई और अन्दर का मंज़र देखा तो मेरे तो होश ही उड़ गए।
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उस सेक्सी नाईट ड्रेस में रश्मि तो क़यामत ही लग रही थी, उसका खूबसूरत चिकना चिकना सीना बिल्कुल खुला हुआ था, उसकी चूचियों का ऊपरी हिस्सा उस ड्रेस में से बाहर ही नंगा हो रहा था, कन्धों से तो बिल्कुल ही नंगी लग रही थी.. उन पर सिर्फ़ पतली पतली सी डोरियाँ थीं।
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मैंने देखा और बोली- हाँ.. परफेक्ट है यार.. तुम पर बहुत ही प्यारा लग रहा है.. बस अब चेंज कर लो..
मैं जैसे ही बाहर निकलने लगी तो मैंने सूरज जो गेट के पास ही खड़ा था.. को कहा- सूरज देखना.. रश्मि ठीक है ना इस ड्रेस में?

मेरी इस बात से दोनों ही बहन-भाई चौंक पड़े..

लेकिन ज़ाहिर है कि सूरज यह मौक़ा कैसे जाने दे सकता था.. वो फ़ौरन ही दरवाजे के नजदीक आ गया और अन्दर अपनी बहन को उस ड्रेस में देखा तो उसकी आँखें तो जैसे फट गई थीं और मुँह खुल गया..
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लेकिन कोई लफ्ज़ मुँह से ना निकला।
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फिर हकलाते हुए बोला- हाँ.. ठीक है.. अच्छा है..

मैंने अब सूरज को बाहर धकेला और खुद भी बाहर आ गई और अपने पीछे दरवाज़ा बंद कर दिया। रश्मि ने दरवाज़ा लॉक किया और उसने ड्रेस चेंज करके दोबारा अपनी शर्ट पहन ली।

कुछ देर के बाद वो बाहर आई तो उसका चेहरा सुर्ख हो रहा था और सूरज के चेहरे पर ऐसे आसार थे.. जैसे उसे बहुत ही मज़ा आया हो।
सूरज मुझसे मेरे ड्रेस देखने बाहने बोला- डार्लिंग यह ड्रेस तो अच्छा है.. तुम रात के अलावा भी घर में वैसे भी पहन सकती हो।
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सूरज की दिल की बात मैं समझ गई थी.. इसलिए उसका दिल रखने के लिए बोली- हाँ हाँ.. क्यों नहीं पहना जा सकता.. वैसे भी आजकल इतनी गर्मी तो हो ही रही है.. तो ऐसी ही हल्की-फुल्की ड्रेसज घर में पहनने के लिए तो होनी ही चाहिए।

फिर नीचे आ कर हमने वो ड्रेस पैक करवा लिए और फिर मैं कुछ और देखने लगी कि शायद कुछ और भी मुझे मेरे मतलब का मिल जाए.. जो कि एक बहन को अपने भाई की सामने खुला और नंगा करने में.. मेरे खेल में मेरी मददगार हो।
फिर सूरज से थोड़ा हट कर मैंने कुछ ब्रा पेन्टी खरीदी अपने और रश्मि के लिए।
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रश्मि तो नहीं लेना चाह रही थी लेकिन मैंने उसे भी लेकर दी। ब्लैक रंग की जाली वाली.. जिसमें से उसकी दोनों चूचियाँ ही नंगी नज़र आएं।
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रश्मि बोली- भाभी यह नहीं..

मैंने उसे चिढ़ाया उअर उसके मम्मों की तरफ उंगली करते हुए कहा- अच्छी है यह.. यार ले लो.. इसमें तुम्हारी यह दोनों ही साफ़-साफ़ दिखेंगी।

रश्मि मेरी बात सुन कर फिर शर्मा गई क्योंकि थोड़ी ही फासले पर खड़ा हुआ सेल्समेन भी मुस्कराने लगा था.. शायद उसने मेरी बात सुन ली थी।

इतनी शॉपिंग करते हुए ही हमें 11 बज गए.. फिर हम वहाँ से निकले और एक जगह से आइसक्रीम ली और खाने लगे। फिर एक बड़ा पिज़्ज़ा खरीदा और फिर घर पहुँच गए।
घर पहुँच कर लाउंज में ही हम तीनों बैठ गए और बातें करने लगे।

सूरज बोला- लाओ यार.. दिखाओ तो क्या-क्या लिया है?
मैंने फ़ौरन ही हैण्डबैग खोला और दोनों नाईट ड्रेसज उसके सामने रख दिए और बोली- यह लिए हैं।

सूरज- यह तो मैंने देखा था.. और भी कुछ लिया है या तुम दोनों ऐसे ही फिरती रही हो?

सूरज की बात सुन कर रश्मि घबरा गई। मैंने रश्मि को इस स्थिति में देखा तो मैं मुस्कराई और उसकी घबराहट का मज़ा लेते हुए फिर हैण्ड बैग में अपना हाथ डाल दिया।

रश्मि ने इशारे से मुझे रोकना चाहा.. लेकिन मैंने दोनों ब्रा बाहर निकाल लीं और सूरज की तरफ बढ़ा दीं।

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सूरज ने दोनों ब्रा मेरे हाथ से लीं और देखने लगा.. रश्मि अपनी नजरें चुरा रही थी।

सूरज ब्रा को निप्पल की जगह मसल कर उनकी क्वालिटी देखने का बहाना करता रहा.. फिर बोला- अरे यह तुम दोनों डिफरेंट नम्बर की क्यों लाई हो?

मैं मुस्कराई और रश्मि की तरफ देखा कर बोली- अरे यार.. एक मेरी है और दूसरी ब्रा रश्मि की है..
सूरज ने भी फ़ौरन ही रश्मि की तरफ देखा.. तो वो फ़ौरन ही दूसरी तरफ देखने लगी।

सूरज ने भी जल्दी से मेरे हाथ में दोनों ब्रा दे दीं और बोला- हाँ.. ठीक हैं.. अच्छी हैं दोनों..
रश्मि उठ कर रसोई में चली गई।
उसके जाने के बाद सूरज बोला- यार तुम मुझे यह अपनी नई ड्रेस पहन कर तो दिखाओ..

मैंने कहा- ठीक है.. हम दोनों ही पहन कर आती हैं.. फिर देखना कि ठीक है कि नहीं..
सूरज बोला- हाँ.. ठीक है आप लोग पहन कर आओ और मैं जब तक ओवन में पिज़्ज़ा गरम करता हूँ।
वो रसोई में गया और रश्मि को बाहर भेज दिया।

मैंने उससे कहा- तुम्हारे भैया कहते हैं कि यह जो ड्रेस लिया है ना.. वो पहन कर दिखाओ।
रश्मि बोली- नहीं.. भाभी मैं नहीं पहनूंगी।

अपडेट 23

आपने अभी तक पढ़ा..
रश्मि उठ कर रसोई में चली गई, उसके जाने के बाद सूरज बोला- यार तुम मुझे यह अपनी नई ड्रेस पहन कर तो दिखाओ..
मैंने कहा- ठीक है.. हम दोनों ही पहन कर आते हैं.. फिर देखना कि ठीक है कि नहीं..

सूरज बोला- हाँ.. ठीक है आप लोग पहन कर आओ और मैं जब तक ओवन में पिज़्ज़ा गरम करता हूँ।
वो रसोई में गया और रश्मि को बाहर भेज दिया।
मैंने उससे कहा- तुम्हारे भैया कहते हैं कि यह जो ड्रेस लिया है ना.. वो पहन कर दिखाओ।
रश्मि बोली- नहीं.. भाभी मैं नहीं पहनूंगी।
अब आगे..

मैं- अरे यार क्यों शर्मा रही हो? तुमको इसमें तुम्हारे भैया देख तो चुके ही हैं.. तो फिर घबराना कैसा है? चलो जल्दी से जाओ और यह ड्रेस पहन कर आओ और मैं भी पहन कर आती हूँ.. और हाँ नीचे जीन्स ही रहने देना.. उस मॉडल की तरह कहीं पैन्टी पहन कर ना आ जाना बाहर..
रश्मि- भाभीइई..

मैं हँसने लगी।

फिर मैं अपने बेडरूम में आ गई और रश्मि अपने कमरे में चली गई। मैंने जल्दी से अपनी शर्ट उतारी और फिर अपनी ब्रा भी उतारा
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फिर वो झीना सा खुला हुए ड्रेस पहन लिया।
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मेरी चूचियाँ बड़ी थीं.. तो उस ड्रेस में और भी खुलासा हो रही थीं.. चूचियों के बीच की दरार भी काफ़ी ज्यादा दिख रही थी।
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मेरी आधी चूचियाँ तो नंगी दिख रही थी, मैंने वो पहना और बाहर आ गई..
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इतने में सूरज भी पिज़्ज़ा गरम करके आ गया।
मुझे देख कर उसने लार टपकाई.. और अपनी आँख दबा दी।

फिर हम दोनों बैठ कर रश्मि का वेट करने लगे।
जब वो बाहर नहीं आई.. तो मैंने उसे आवाज़ दी- रश्मि आ भी जाओ अब.. जल्दी से.. पिज़्ज़ा फिर से ठंडा हो रहा है..

तभी रश्मि ने हौले से दरवाज़ा खोला और बाहर क़दम रखा.. तो हम दोनों की नज़रें उस पर ही थीं। उस छोटी से शॉर्ट सेक्सी ड्रेस में वो बहुत प्यारी और सेक्सी लग रही थी।
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उस का कुंवारा खूबसूरत गोरा-चिट्टा जिस्म बहुत ही सेक्सी लग रहा था।
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देखने वाले का फ़ौरन ही उसे अपने बाँहों में लेने के लिए दिल मचल जाए..

रश्मि बेहद शर्मा रही थी.. इससे पहले कि वो चेंज करने के लिए वापिस जाती।
सूरज ने पिज़्जा का बॉक्स खोला और बोला- चलो आ जाओ जल्दी से ले लो..

रश्मि शरमाती हुई हौले-हौले क़दम उठाते हुई आई और मेरे पास सूरज के सामने ही बैठ गई।

अब हम तीनों ही पिज़्ज़ा खाने लगे।

मैं और सूरज की बहन दोनों ही सूरज के सामने इस तरह अधनंगे हालत में बैठे हुए थे और दोनों के ही खूबसूरत जिस्म.. सूरज पर बिजलियाँ सी गिरा रहे थे।
ज़ाहिर है कि सूरज की नजरें ज्यादातर अपनी बहन ही को देख रही थीं।

मैं भी इस चीज़ को नोट कर रही थी जैसे ही रश्मि सामने टेबल पर रखे हुए पिज्जा का पीस उठाने के लिए आगे को झुकती.. तो उसका ड्रेस सामने से नीचे को हो जाता और उसकी खूबसूरत चूचियों की घाटी नज़र आने लगती।
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रश्मि ने अपनी ब्रेजियर नहीं उतारी थी और उस ड्रेस के नीचे उसकी हरे रंग की ब्रा की स्ट्रेप्स बिल्कुल खुली हुई दिख रही थीं।
थोड़ी देर बाद सूरज बोला- रश्मि जाकर रसोई में फ्रिज से कोक निकाल कर ले आओ।

रश्मि उठी और रसोई की तरफ बढ़ गई। उसकी पीठ पर वो ड्रेस इस क़दर नीचे तक खुला हुआ था कि उसकी ब्रा की पट्टी से भी नीचे तक वो ड्रेस खुली हुई थी।
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रश्मि की ब्रेजियर की पट्टी और उसके हुक बिल्कुल साफ़ नज़र आ रहे थे।
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यूँ समझो कि रश्मि की पीठ पर से उसकी पूरी की पूरी ब्रेजियर बिल्कुल साफ़ नज़र आ रही थी। हरे ब्रेजियर की अलावा रश्मि की पूरी की पूरी गोरी-गोरी चिकनी कमर भी बिल्कुल नंगी नज़र आ रही थी। उसकी गोरे-गोरे सफ़ेद कन्धे बिल्कुल ओपन थे.. उस ड्रेस से नीचे उसकी टाइट जीन्स थी.. जिसमें उसकी गोल-गोल चूतड़ बहुत ही अधिक फँस कर बहुत ही सेक्सी नज़र आ रहे थे।

सूरज बोला- इसकी पिछली तरफ का हिस्सा कुछ ज्यादा ही लो नहीं है क्या?
मैं- हाँ है तो सही.. लेकिन यह असल में बिना ब्रेजियर की पहनने वाली ड्रेस है ना.. जो कि तुम्हारी बहन ने गलती से ब्रा के साथ पहन ली है।

इतने में रश्मि कोक ले आई, दूर से चल कर आते हुए भी वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी।
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रश्मि वापिस आकर दोबारा अपनी जगह पर बैठ गई। पिज़्ज़ा खाते हुए मैंने उससे कहा- रश्मि.. तुमने यह ड्रेस की नीचे ब्रा क्यों पहनी है.. इसे तो ब्रा के वगैर पहनना होता है.. देखो सारी ब्रा साफ़ नज़र आ रही है।

मेरी बात सुन कर रश्मि घबरा गई।
सूरज बोला- अरे यार क्यों तंग कर रही हो इसे..

पहली बार तो पहना है उसने यह ड्रेस.. आहिस्ता-आहिस्ता पता चल जाएगा इसे भी.. कि कौन सा कपड़ा कैसे पहना जाता है।

रश्मि चुप कर गई.. खाने के बाद हम दोनों ने बर्तन रखे और फिर मैं रश्मि को पकड़ कर अपने कमरे में ले आई।

उसने बहुत कहा कि वो ड्रेस चेंज करके आएगी.. लेकिन मैंने उसकी एक ना सुनी और बोली- जब है ही यह नाईट ड्रेस.. तो रात को ही पहनोगी ना..

मैं उसे उसके कमरे में ले गई और उसे पैन्ट चेंज करके उसे दिया हुआ सूरज का बरमूडा पहनने को कहा। कल रात की बात से मुझे यक़ीन था कि वो ज़रूर पहन कर आएगी.. क्योंकि उसे भी अपने भाई के छूने से आख़िर मज़ा जो आ रहा था।

मैंने अपने कमरे में आकर सूरज के सामने ही खड़े होकर अपनी पैन्ट उतारी और फिर एक बरमूडा पहन लिया। अब मेरा ऊपरी और नीचे का जिस्म दोनों ही बहुत ज्यादा नंगा नज़र आ रहा था।

मैं खामोशी से जाकर सूरज के पास बैठ गई और उससे बातें करने लगी।
सूरज बोला- डार्लिंग आज तुम इस ड्रेस में बहुत ही हॉट लग रही हो।

मैं मुस्कराई और बोली- हॉट तो तुम्हारी बहन भी लग रही है.. लेकिन कहीं उसे ना कह देना ऐसा.. शरमिंदा हो जाएगी। पहले ही बड़ी मुश्किल से मैंने उसे गाँव के माहौल से आज़ाद किया है।
सूरज भी हँसने लगा.. इतने में शरमाती हुई रश्मि कमरे में आ गई.. जहाँ उसका अपना सगा भाई उसकी इंतज़ार में था।

रश्मि कमरे में दाखिल हुई तो अभी मैंने लाइट बंद नहीं की थी.. ट्यूब लाइट की सफ़ेद रोशनी में रश्मि का खूबसूरत चिकना जिस्म चमक रहा था, उसके गोरे-गोरे कंधे और छाती के ऊपर खुले मम्मे बहुत प्यारे लग रहे थे। नीचे उसके गोरे-गोरे बालों से बिल्कुल साफ चिकनी टाँगें.. घुटनों से नीचे बिल्कुल नंगी थीं।
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अपने भाई के बरमूडा में हलचल हुआ जैसे ही वो अन्दर दाखिल हुई.. क्यूँ की सूरज की नजरें उसी के जिस्म पर थीं।

आज मेरे ज़हन में एक और ख्याल आया था। आज मैंने सूरज से कहा- वो बिस्तर पर हम दोनों के बीच में लेटेगा और हम दोनों तुम्हारे बगल में लेटेंगी।

सूरज और रश्मि दोनों ही मेरी इस बात को सुन कर हैरान हुए लेकिन सूरज तो फ़ौरन ही बिस्तर पर बीच में होकर लेट गया। मैं उसकी एक तरफ लेट गई और फिर ज़ाहिर है कि रश्मि को सूरज के दूसरी तरफ बिस्तर पर लेटना पड़ा।

कुछ मिनटों तक सीधे लेटने के बाद मैंने करवट ली और सूरज के ऊपर अपना बाज़ू डाल कर उसे खुद से चिपकाती हुए लेट गई।
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मैंने अपनी एक टाँग भी सूरज के ऊपर उसकी टाँगों पर रख दी। रश्मि भी सीधे ही लेटी हुई थी.. और यह सब देख रही थी।

मैं आहिस्ता-आहिस्ता सूरज के गालों पर रश्मि की तरफ से हाथ फेर रही थी और कभी उसकी नंगे कन्धों पर हाथ फेरने लगती।
मैं रश्मि को भी और सूरज को भी यही शो कर रही थी कि जैसे मैं उस वक़्त बहुत ज्यादा चुदासी हो रही हूँ।

हालांकि असल में मैं सूरज को गरम कर रही थी।
मैं अपनी जाँघों के नीचे सूरज के लंड को आहिस्ता आहिस्ता सहला भी रही थी।

कमरे में काफ़ी अँधेरा हो गया था.. और कुछ नज़र नहीं आता था। जब तक कि बहुत ज्यादा गौर ना किया जाए।
मैं अपना हाथ सूरज की छाती पर ले आई और आहिस्ता आहिस्ता उसकी छाती को सहलाने लगी।
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मेरा हाथ सरकता हुआ सूरज की छाती से नीचे उसके पेट पर आ गया और फिर मैं और भी नीचे जाने लगी.. तो सूरज मेरी तरफ मुँह करके आहिस्ता से बोला- डार्लिंग रश्मि है.. इधर देख लेगी वो..

अपडेट 24

आपने अभी तक पढ़ा..
मैं रश्मि को भी और सूरज को भी यही शो कर रही थी कि जैसे मैं उस वक़्त बहुत ज्यादा चुदासी हो रही हूँ।
हालांकि असल में मैं सूरज को गरम कर रही थी। मैं अपनी जाँघों के नीचे सूरज के लंड को आहिस्ता-आहिस्ता सहला भी रही थी।
कमरे में काफ़ी अँधेरा हो गया था.. हस्ब ए मामूल और कुछ नज़र नहीं आता था। जब तक कि बहुत ज्यादा गौर ना किया जाए।

मैं अपना हाथ सूरज की छाती पर ले आई और आहिस्ता-आहिस्ता उसकी छाती को सहलाने लगी। मेरा हाथ सरकता हुआ सूरज की छाती से नीचे उसके पेट पर आ गया और फिर मैं और भी नीचे जाने लगी.. तो सूरज मेरी तरफ मुँह करके आहिस्ता से बोला- डार्लिंग रश्मि है.. इधर देख लेगी वो..
अब आगे..

मैं अपना हाथ उसकी बरमूडा में पुश करके अन्दर दाखिल करते हुई बोली- नहीं.. अँधेरा है.. उसे कुछ नहीं दिख रहा है।
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सूरज चुप हो गया.. और मैंने हाथ अन्दर डाल कर उसके लण्ड को अपने हाथ में ले लिया। उसका लंड आहिस्ता-आहिस्ता खड़ा हो रहा था और मैंने उसे सहलाते हुए आहिस्ता-आहिस्ता खड़ा कर दिया।
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साथ-साथ मैं उसकी गर्दन को भी चूम रही थी
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और अपनी चूचियों को उसकी बाज़ू पर रगड़ रही थी.. जो कि मैंने अपनी ड्रेस को नीचे करते हुए बाहर निकाल ली हुई थीं।

अब मेरा नंगी चूची सूरज की बाज़ू से रगड़ रही थीं और उसका लंड भी मेरे हाथ में था।
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सूरज की हालत उत्तेजना से बुरी हो रही थी और उसके शॉर्ट्स की अन्दर खड़ा हुआ लंड और उस पर हरकत करता हुआ हाथ.. उसकी बहन को साफ़ नज़र आ रहा था।

दूसरा.. मैं जो उसकी गर्दन पर किस कर रही थी..
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वो भी मैं जानबूझ कर आवाज़ पैदा करती हुए कर रही थी.. ताकि उसकी आवाज़ भी उसकी बहन को सुनाई दे सके।
कुछ देर तक ऐसी ही चूमने के बाद मैंने सूरज का बाज़ू पकड़ कर उसे अपनी तरफ को कर लिया।

अब सूरज का चेहरा मेरी तरफ था और मैंने उसके गले में अपनी बाँहें डालीं और उसके ऊपर अपनी नंगी टाँग रखते हुए उससे चिपक गई।
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मेरी जाँघों के खुल जाने से सूरज का अकड़ा हुआ लंड सीधा मेरी चूत से टकरा रहा था।
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मैंने भी एक हाथ से उसे पकड़ा और उसे अपनी चूत पर रगड़ने लगी।

जब फिर भी मेरी तसल्ली ना हुई तो मैंने सूरज के शॉर्ट्स को थोड़ा सा नीचे को करके उसका लंड बाहर निकाल लिया और उसे अपनी चूत पर रगड़ने लगी।
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सूरज भी मुझे अपनी बाहों में भर कर अपने साथ चिपकाते हुए मेरा कान में आहिस्ता से बोला- तुमको आज क्या हो गया है डार्लिंग?
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लेकिन मैं मस्ती में अपनी आँखें बंद किए बस उसके लण्ड से अपनी चूत को रगड़ती जा रही थी।
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कुछ देर के बाद मैंने सूरज को छोड़ा और आहिस्ता से बोली- सॉरी डार्लिंग..
और फिर थोड़ा पीछे हट कर लेट गई।

यह सूरज के खड़े लण्ड पर धोखा जैसा हुआ।

सूरज सीधा हुआ तो फ़ौरन ही रश्मि ने दूसरी तरफ करवट ले ली.. मैं समझ गई कि वो सब कुछ बड़े मजे से देख रही थी।

अब कमरे में बिल्कुल खामोशी और अँधेरा था। हम तीनों ही आँखें बंद किए हुए लेटे थे.. और सब ही एक-दूसरे के सोने का इन्तजार कर रहे थे।

क़रीब एक घंटे तक जब बिस्तर पर बिल्कुल कोई हरकत ना हुई तो अचानक ही सूरज ने रश्मि की तरफ करवट ले ली। रश्मि अभी भी दूसरी तरफ मुँह करके लेटी हुई थी और उसकी खूबसूरत उठी हुई गाण्ड.. उसके भाई के लण्ड के ठीक सामने थी.. बल्कि यूँ कहें कि उसके भाई के लंड के बिल्कुल सामने चुदने को तैयार दिख रही थी।
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उस छोटे से जालीदार ड्रेस में रश्मि की खूबसूरत कमर सूरज की नज़रों के सामने बिल्कुल नंगी हो रही थी।
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उसकी ब्रेजियर की स्ट्रेप्स और बेल्ट और हुक्स साफ़-साफ़ दिख रहे थे।
उसकी गोरी-गोरी चिकनी कमर कमरे के अन्दर मौजूद हल्की सी रोशनी में चमक रही थी।

कुछ देर में सूरज का हाथ सरकता हुआ रश्मि की कमर के पास पहुँचा और उसने धीरे-धीरे अपने हाथ की बैक से रश्मि की कमर को सहलाना शुरू कर दिया।
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उसके हाथ की बैक साइड.. अपनी बहन की नंगी कमर पर ऊपर-नीचे सरक़ रही थी और वो अपनी बहन की नंगी और गोरी कमर के चिकनेपन को महसूस कर रहा था।
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थोड़ी देर के बाद सूरज ने अपना हाथ को सीधा किया और उसे आहिस्ता से रश्मि की कमर के नंगे हिस्से पर रख दिया।

जब रश्मि ने कोई हरकत नहीं की तो सूरज ने हौले-हौले रश्मि की नंगी कमर को सहलाना शुरू कर दिया।
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सूरज का हाथ अपनी बहन की बिल्कुल बाहर को निकली हुई ब्रेजियर की तनियों पर गया। वो रश्मि की ब्रा की तनियों को आहिस्ता-आहिस्ता छूने लगा और उस पर अपनी उंगली को फेरना शुरू कर दिया।

रश्मि की कमर पर से शुरू करके अपनी उंगली को कन्धों पर चिपकी हुई ब्रा की स्ट्रेप के ऊपर फिराता हुआ नीचे को लाने लगा और फिर उसकी उंगली रश्मि की ब्रा की हुक वाली पट्टी पर आ गई।

अब सूरज ने अपनी बहन की ब्लैक ब्रेजियर की हुक पर अपनी उंगली फेरनी शुरू कर दी.. जिसने ब्रा की दोनों सिरों को मिलाकर रश्मि की खूबसूरत चूचियों को जकड़ कर रखा हुआ था।

उस पट्टी के सहारे ही रश्मि के मस्त मम्मे सधे और बंधे हुए थे।

कुछ देर तक तो सूरज रश्मि की ब्रा की स्ट्रेप्स पर हाथ फिराता रहा और कभी उसकी नंगी गोरी कमर पर ऊपर- नीचे और उसके कन्धों पर अपना हाथ फेरता रहा।
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फिर उसने अपना हाथ आगे ले जाते हुए अपनी बहन की चूची पर अपना हाथ ढीला सा रख दिया।
आहिस्ता-आहिस्ता उसका हाथ बंद होने लगा और उसकी मुठ्ठी में रश्मि की चूची समा गई।
अब सूरज अपनी बहन की चूची को आहिस्ता-आहिस्ता सहलाने लगा।
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इस पोजीशन में सूरज रश्मि के और भी क़रीब चला गया हुआ था। अब उसने आहिस्ता से अपने होंठ अपनी बहन की नंगी कमर पर रखे और अपनी बहन की नंगी चिकनी कमर को एक बार चूम लिया।

ज़ाहिर है कि सिर्फ़ एक बार किस करने से उसकी तसल्ली होने वाली नहीं थी। अब तो जैसे वो पागल ही हो गया.. उसने बार-बार अपनी बहन की नंगी कमर और नंगे कन्धों पर किस करना और उन्हें चूमना शुरू कर दिया।
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नीचे सूरज का हाथ रश्मि की उभरी हुई गाण्ड पर पहुँचा और आहिस्ता-आहिस्ता उसने अपना हाथ रश्मि की गाण्ड पर फेरना शुरू कर दिया।
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बिना किसी पैन्टी के पतले से कपड़े के बरमूडा में फंसी हुई रश्मि की चिकनी गाण्ड.. ज़ाहिर है कि उसे बहुत ज्यादा मज़ा दे रही होगी। इसलिए उसका हाथ उसकी गाण्ड पर फिसलता ही जा रहा था।
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मैं सूरज के पीछे ही थोड़ी ऊँची होकर यह सब देख रही थी।

आहिस्ता आहिस्ता सूरज ने अपनी ज़ुबान बाहर निकाली और उसकी कमर को चाटने लगा। उसके कन्धों को चूमा और फिर अपनी ज़ुबान उन पर फेरनी लगा। सूरज ने रश्मि की उस नेट ड्रेस की डोरी वाली स्ट्रेप को पकड़ा जो कि उसके कंधों पर फंसी थी.. और फिर आहिस्ता-आहिस्ता उसे नीचे उसके कन्धों से बाज़ू पर ले आया।

मेरी चूत तो जैसे गर्मी से जल ही उठी कि आज अपनी बहन के लिए सूरज और भी ज्यादा हवस की आग में भड़क रहा है।
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सूरज ने अपना हाथ दोबारा से अपनी बहन के सीने पर रखा और आहिस्ता-आहिस्ता उसके नंगे सीने को सहलाने लगा।
यह नेट ड्रेस ऊपर से तो वैसे भी काफ़ी ओपन था.. तो सूरज का हाथ बड़े ही आराम से ड्रेस के अन्दर भी दाखिल हो रहा था और उसकी ब्रा से निकलती हुई उसकी मदमस्त चूचियों के ऊपरी हिस्से को मसल रहा था।
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अचानक सूरज ने अपने हाथ को पूरा रश्मि की शर्ट के अन्दर डाला और उसकी ब्रेजियर के ऊपर से उसकी चूची को पकड़ लिया।
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मुझे ऐसा अहसास हुआ.. क्योंकि जैसे ही उसका हाथ उसकी ब्रा के ऊपर से उसकी चूची पर आया.. तो रश्मि के जिस्म ने एक झुरझुरी सी ली.. लेकिन फिर रश्मि तुरंत ही शांत भी हो गई।

मैं दिल ही दिल में रश्मि के कंट्रोल की दाद दे रही थी कि किस क़दर की हिम्मत वाली लड़की है कि एक मर्द के हाथ के स्पर्श पर भी खुद को इतना कंट्रोल कर रही है।

जबकि मेरी चूत तो यह देख-देख कर ही पानी छोड़े जा रही थी कि एक भाई अपनी बहन की चूचों को सहला रहा है।
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अपडेट 25

आपने अभी तक पढ़ा..

अचानक सूरज ने अपने हाथ को पूरा रश्मि की शर्ट के अन्दर डाला और उसकी ब्रेजियर के ऊपर से उसकी चूची को पकड़ लिया।
मुझे ऐसा अहसास हुआ.. क्योंकि जैसे ही उसका हाथ उसकी ब्रा के ऊपर से उसकी चूची पर आया.. तो रश्मि के जिस्म ने एक झुरझुरी सी ली.. लेकिन फिर रश्मि तुरंत ही शांत भी हो गई।

मैं दिल ही दिल में रश्मि के कंट्रोल की दाद दे रही थी कि किस क़दर की हिम्मत वाली लड़की है कि एक मर्द के हाथ के स्पर्श पर भी खुद को इतना कंट्रोल कर रही है।
जबकि मेरी चूत तो यह देख-देख कर ही पानी छोड़े जा रही थी कि एक भाई अपनी बहन की चूचों को सहला रहा है।
अब आगे..

अब शायद कुछ ज्यादा हो गया था.. जो कि रश्मि बर्दाश्त ना कर सकी या फिर सूरज के लंड ने रश्मि की गाण्ड के दरम्यान घुसने की कोशिश की..
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जिसकी वजह से एकदम रश्मि सीधी हो गई और सूरज ने भी खुद को सम्भालते हुए अपना हाथ फ़ौरन ही पीछे खींच लिया।

अब रश्मि अपनी पीठ के बल बिल्कुल सीधी होकर लेट गई.. पर सूरज उसी की तरफ मुँह करके लेटा हुआ था।

एक बार उसने मुड़ कर मेरी तरफ देखा और फिर कुछ क्षण इन्तजार करने के बाद मैंने देखा कि उसका चेहरा आहिस्ता आहिस्ता रश्मि के क़रीब जाने लगा।
रश्मि की नेट ड्रेस की तनियाँ अभी भी उसके कन्धों से नीचे ही थीं और उसका सीना मानो जैसे कि पूरा नंगा ही हो रहा था।
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सूरज ने आहिस्ता से अपने होंठ रश्मि के कन्धों पर रख दिए और उसके कंधे को चूम लिया।

जब रश्मि के जिस्म में कोई भी हरकत नहीं हुई.. तो सूरज की हिम्मत बढ़ने लगी और उसने रश्मि के कन्धों को किस करते हुए थोड़ा और आगे को आते हुए उसके सीने के ऊपरी हिस्से को और फिर अपनी बहन के गाल को भी चूम लिया।
एक बार तो उसने हिम्मत करते हुए रश्मि के पतले-पतले गुलाबी होंठों को भी किस कर लिया।
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सूरज की हवस में और उसके लौड़े की चुदास में बढोती होता जा रहा था और उसकी हिम्मत भी बढ़ती ही जा रही थी।

अब उसने आहिस्ता से रश्मि की दूसरे कन्धे से भी उसकी ड्रेस की डोरी को नीचे की तरफ सरकाना शुरू कर दिया और कुछ ही समय के बाद दूसरी तरफ की डोरी भी उसके बाज़ू पर झूल रही थी।

अब रश्मि के सीने पर उस शर्ट के ऊपर सिर्फ़ और सिर्फ़ उसकी काले रंग की ब्रेजियर की तनियाँ ही नज़र आ रही थीं।

सूरज कुछ देर तक इसी हालत में अपनी सोई हुई बहन को देखता रहा और फिर उसने अपनी उंगलियों में पकड़ कर रश्मि की नेट ड्रेस को उसकी चूचियों से नीचे को करना शुरू कर दिया।

उस ढीली सी नेट ड्रेस को जब सूरज ने आहिस्ता आहिस्ता नीचे को उतारा.. तो थोड़ी सी कोशिश के बाद रश्मि की चूचियाँ उसकी काली ब्रेजियर समेत खुल सी गईं।
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सूरज की तो आँखें ही खुल गईं और अपनी सग़ी बहन की चूचियों को इस तरह सिर्फ़ ब्रेजियर में देख कर उसका चेहरा भी खिल उठा।

रश्मि की गोरे-गोरे मम्मे उस काली ब्रेजियर में बहुत ही प्यारे लग रहे थे.. और उसकी आधी चूचियों उसकी ब्रा में से बाहर थीं।

उसकी चूचियों के बीच बहुत ही खूबसूरत सा क्लीवेज बन रहा था। उसकी लेटे हुए होने की वजह से उसकी चूचियों ऊपर की तरफ को जैसे उबली पड़ रही थीं और बहुत ही सेक्सी और खूबसूरत मंज़र पेश कर रही थीं।
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मैंने भी आज पहली बार अपनी ननद को इस हालत में देखा था तो उसके खूबसूरत जिस्म को देख कर मेरे मुँह और चूत में भी पानी आ रहा था।

सूरज ने अपना हाथ रश्मि के सीने पर दोबारा रखा और फिर आहिस्ता-आहिस्ता से उसके सीने पर हाथ फेरने लगा।

उसके हाथ अब अपनी बहन की चूचियों के ऊपरी हिस्से पर भी जा रहे थे और सूरज अपनी बहन की चूचियों के नंगे हिस्सों को मस्ती से सहलाने लगा था।
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कुछ पलों बाद सूरज ने अपनी एक उंगली को रश्मि की क्लीवेज में दाखिल किया और उसे आहिस्ता-आहिस्ता अन्दर-बाहर करने लगा।

उसने अचानक पीछे मुड़ कर मेरी तरफ दोबारा देखा और मेरे सोए होने की तसल्ली करके सूरज थोड़ा सा ऊपर को उठा और झुक कर उसने अपने होंठ अपनी बहन की चूचियों के ऊपरी नंगे हिस्से पर रख दिए और अपनी बहन की चूचियों का अपनी ज़िंदगी का पहला किस ले लिया।
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उन दोनों की लाइफ में इस सेक्स को लेकर जाने आगे कितने और किस.. और क्या-क्या आने वाला था।

मैं अब इस खेल को आज की रात के लिए यहीं पर रोक देना चाहती थी.. ताकि दोनों के अन्दर ही तड़फ और प्यास बाक़ी रहे और एक ही रात में सारी हदें पार ना कर लें। यही सोच कर मैं एकदम नींद की हालत का नाटक करती हुई सूरज के साथ चिपक गई और उसे मजबूर कर दिया कि वो अब कुछ और ना कर सके।

मैंने उसे इतना मौका भी नहीं दिया कि वो अपनी बहन का ड्रेस ही दुरूस्त कर सके।

उसकी बहन उसके बिल्कुल क़रीब उस अधनंगी हालत में पड़ी रही कि उसकी चूचियाँ उसकी ब्रा में उसके भाई के सामने खुली पड़ी थीं और वो बार-बार उनको देख रहा था.. लेकिन छू नहीं पा रहा था।

कुछ देर के बाद मैंने सूरज को करवट दिलाते हुए अपनी तरफ खींच लिया और उसे अपने मम्मों से चिपका लिया।
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आख़िर कुछ देर बाद ही उसकी भी मेरे साथ ही आँख लग गई।

अगले दिन रविवार था.. तो सब ही देर तक सोते रहे। सबसे पहली मेरी आँख खुली.. कमरे में बिल्कुल हल्की हल्की दिन की रोशनी हो रही थी.. क्योंकि सारे परदे बंद थे।
मैंने अपने मोबाइल में वक्त देखा तो 9 बज रहे थे।

मैं अपनी जगह से उठी और उठ कर वॉशरूम गई और फिर सबके लिए चाय बनाने रसोई में चली गई।

मैंने रसोई में चाय बनाई और फिर जब मैं चाय की तीन कप लेकर बेडरूम में वापिस आई तो अन्दर का नजारा देख कर मैं मुस्करा उठी।

बेड पर सूरज अपनी बहन से लिपट कर सो रहा था और नींद में होने की वजह से रश्मि भी उससे लिपटी हुई थी।
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वो अपना बाज़ू सूरज के गले में डाल कर उससे चिपकी हुई थी। उसका बरमूडा भी उसकी जाँघों पर ऊपर तक चढ़ा हुआ था और उसकी गोरी-गोरी जाँघों नंगी हो रही थीं।

वो दोबारा अपनी ड्रेस को तो अपनी ब्रा पर करके ही सोई थी.. लेकिन अब फिर उसकी ड्रेस का एक स्ट्रेप कन्धों से नीचे बाजुओं पर आया हुआ था।

सूरज की टाँगें उसकी चिकनी मुलायम नंगी जांघों पर थीं और उसका हाथ रश्मि की कमर पर था।
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चाय को बगल में टेबल पर रखने के बाद मैं रश्मि की तरफ ही बैठ गई और अपना हाथ बहुत ही आहिस्ते से उसकी नंगी जांघ पर रख दिया।
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ओह .. सच में रश्मि की बहुत ही चिकनी और मुलायम थी..
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मेरा दिल चाह रहा था कि धीरे-धीरे उसकी जाँघों को सहलाती रहूँ..!
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मैं कभी भी लेज़्बीयन नहीं रही थी.. लेकिन आज रश्मि की खूबसूरती को देख कर मुझ पर भी नशा सा छा रहा था।
मैं सोच रही थी कि अगर मेरा यह हाल हो रहा है.. तो सूरज बेचारा अपनी बहन की जवानी को इस हालत में देख कर कैसे खुद को रोक सकता है।

मेरा हाथ धीरे-धीरे रश्मि की नंगी जाँघों को सहला रहा था और थोड़ा उसके ऊपर तक चढ़े हुए बरमूडा के अन्दर तक भी फिसल रहा था।
रश्मि का नंगा कन्धों भी मेरी आँखों के सामने था। मैं आहिस्ता से झुकी और अपने होंठ रश्मि के नंगी कन्धों पर रख कर उसे चूम लिया।
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रश्मि बड़ी मदहोशी में अपने भाई के साथ चिपकी हुई सो रही थी।

अपडेट 26

आपने अभी तक पढ़ा..

मैं कभी भी लेज़्बियन नहीं रही थी.. लेकिन आज रश्मि की खूबसूरती को देख कर मुझ पर भी नशा सा छा रहा था।
मैं सोच रही थी कि अगर मेरा यह हाल हो रहा है.. तो सूरज बेचारा अपनी बहन की जवानी को इस हालत मैं देख कर कैसे खुद को रोक सकता है।

मेरा हाथ धीरे-धीरे रश्मि की नंगी जाँघों को सहला रहा था और थोड़ा उसके ऊपर तक चढ़े हुए बरमूडा के अन्दर तक भी फिसल रहा था।
रश्मि का नंगा कन्धों भी मेरी आँखों के सामने था। मैं आहिस्ता से झुकी और अपने होंठ रश्मि के नंगी कन्धों पर रख कर उसे चूम लिया।
रश्मि बड़ी मदहोशी में अपने भाई के साथ चिपकी हुई सो रही थी।
अब आगे..

रश्मि के कन्धों को चूमते और उसे सहलाते हुए मैंने आहिस्ता-आहिस्ता अपना हाथ उसकी नेट ड्रेस के अन्दर घुसेड़ना शुरू कर दिया। मेरा हाथ रश्मि की खुबसूरत टाइट चूचियों के बीच क्लीवेज पर पहुँच गया।
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मैंने आहिस्ता आहिस्ता रश्मि की चूचियों पर अपनी हाथों की उंगलियों को फेरना शुरू कर दिया।

मुझ पर रश्मि की चूचियों को छूने के बाद बहुत ही ज्यादा मस्ती सी छाने लगी थी।
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उसकी ठोस चूचियाँ और क्लीवेज में हाथ फेरते हुए मैं हौले-हौले उसके नंगे गोरे चिकने कन्धों को चूम रही थी।
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अपने भाई की बाँहों में ज़कड़ी हुई और उससे चिपकी हुई.. वो बहुत ही प्यारी और सेक्सी लग रही थी।
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मेरे ज़हन में ख्याल आया कि जब इसकी चूत में इसके भाई का लंड जाएगा तो उस वक्त ये मासूम परी कैसी लगेगी.. और कितना मज़ा आएगा वो मंज़र देखने में.. यह सोचते ही मेरे चेहरे पर एक कातिलाना मुस्कराहट दौड़ गई।

कुछ देर बाद कमरे की बत्ती जलाकर उन दोनों को जगाने लगी। दोनों को आवाज़ दी.. तो कुछ ऐसा हुआ कि दोनों ने एक साथ ही आँख खोली और जैसे ही दोनों की नज़र एक-दूसरे पर पड़ी।

इस बात को समझते हुए कि दोनों बहन-भाई के चेहरे एक-दूसरे के इतने क़रीब हैं और दोनों ने एक-दूसरे को सोते में इस तरह से चिपका लिया हुआ है.. तो दोनों ही एकदम से पीछे हटे और शर्मिंदा से होते हुए उठ कर बिस्तर की पुस्त से पीठ लगाते हुए बैठ गए।
मैं दोनों की हालत देख कर हँसने लगी।

सूरज थोड़ा शर्मिंदा होता हुआ बोला- तुम किस वक़्त उठ कर चली गई थीं?
मैं मुस्कराई कि अभी गई थी और शायद आप समझे कि मैं अभी आपके पास ही यहीं लेटी हुई हूँ।

मेरी बात सुन कर रश्मि ने शर्म से सिर झुका लिया और अपने कन्धों पर अपनी नेट ड्रेस की डोरी ठीक करती हुए उसने चाय का कप उठा लिया।
उसके कंधों पर उसकी ब्रेजियर की स्ट्रेप्स अभी भी बिल्कुल खुली ही दिख रही थीं।
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सूरज उठ कर वॉशरूम में चला गया। मैंने आहिस्ता से रश्मि के गोरे-गोरे नंगी बाजुओं पर चुटकी काटी और बोली- आज तो तू अपने भैया के साथ बड़ी चिपक कर सो रही थी?
रश्मि शर्मा कर- भाभी बस पता ही नहीं चला और भैया को भी तो चाहिए था ना कि वो दूर हो कर सोते..
मैं- वो तो शायद समझे होंगे कि मैं ही उनके साथ चिपकी हुई हूँ.. अब नींद में उसे क्या पता कि यह खूबसूरत जिस्म उसकी अपनी बहना का है।

रश्मि शर्मा गई।
मैं- वैसे यार क़सूर उसका भी नहीं है..
रश्मि चुस्की लेते हुए बोली- वो कैसे भाभी??
मैं- देखो ना.. तुम्हारे जैसी खूबसूरत लड़की किसी की बाँहों में हो तो किसे होश रहेगा डार्लिंग..
यह कहते हुए मैंने उसकी कन्धों पर एक चुम्मी कर दी।
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रश्मि- भाभी.. आप भी ना बस..
रश्मि शर्मा गई.. इतने में सूरज भी वॉशरूम से बाहर आ गया।

हम तीनों ही चाय पीने लगे। मैं और रश्मि उस नेट शर्ट और बरमूडा में बैठे हुए थे.. दोनों की ही टाँगें घुटनों के ऊपर तक खुली हुई नंगी हो रही थीं।

ऊपर से हम दोनों का सीना भी खुला हुआ था.. मेरा क्लीवेज तो काफ़ी ज्यादा ही नज़र आ रहा था। जब कि रश्मि की चूचियों का ऊपरी हिस्सा भी काफ़ी सेक्सी लग रहा था।
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चाय के दौरान ही सूरज बोला- यार नाश्ते में क्या बनाया है?
मैंने कहा- साहब जी आज हमने कुछ नहीं बनाना.. आप ही जाओ और बाज़ार से कोई अच्छा सा नाश्ता लेकर आओ।
सूरज बोला- ठीक है.. मैं फ्रेश होकर जाता हूँ।

चाय पीने के बाद सूरज वॉशरूम गया और अपनी कपड़े बदल कर मार्केट चला गया।
रश्मि बोली- भाभी मैं भी यह ड्रेस चेंज करके आती हूँ।

मैंने उसका हाथ पकड़ा और बोली- नहीं आज हम दोनों ने ही ड्रेस चेंज नहीं करना.. आज रविवार है ना.. तो घर में यही ड्रेस चलेगा। तुम जल्दी से फ्रेश हो जाओ.. फिर मैं तुम्हारा थोड़ा सा मेकअप करती हूँ। तुम्हारे भैया कह रहे थे कि तुम्हें भी मेकअप वगैरह करा दिया करूँ.. ऐसी ही फिरती रहती है।

मैंने हँसते हुए उससे झूठ बोला।
मेरी बात सुन कर रश्मि थोड़ा शर्मा गई और बोली- लेकिन घर में मेकअप की क्या ज़रूरत है?

मैंने कहा- अरे यार.. घर में भी करना चाहिए.. इसमें क्या हर्ज है.. अब जल्दी से मुँह-हाथ धोकर आओ.. तुम्हारे भैया चाहते हैं कि तुम घर में उनको खूबसूरत नज़र आओ।
रश्मि- तो क्या ऐसे में मैं खूबसूरत नहीं दिखती हूँ भाभी?

मैं- खूबसूरत तो हो.. लेकिन मेकअप करके तुम्हारी में सेक्सी लुक आ जाता है ना रश्मि..
मैंने रश्मि को एक आँख मारते हुए कहा.. तो वो मुस्कराती हुई उठ कर वॉशरूम में चली गई।

कुछ देर के बाद रश्मि बाथरूम से तौलिया से अपना चेहरा पोंछती हुई बाहर आई.. मैंने उसे पकड़ कर अपनी ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठा लिया।
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मैं बोली- बैठो यहाँ.. मैं तुम्हारा मेकअप करती हूँ।

मैं रश्मि के पीछे खड़ी हुई और उसके बालों में अपनी उंगलियाँ फेरने लगी। फिर अपना हाथ उसकी नंगे कन्धों पर रख कर उनको सहलाते हुए नीचे को झुकी और उसकी कन्धों को चूमती हुई बोली- कितनी खूबसूरत है मेरी ननद.. भगवान तुम्हें हर बुरी नज़र से बचाए.. लेकिन मुझे लगता है कि तुझे अपने भाई की ही नज़र लग जानी है।
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रश्मि मेरी बात पर हँसने लगी। मैंने आहिस्ता से अपना हाथ आगे ले जाकर उसकी चूचियों पर रखा.. तो वो उछल ही पड़ी।
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मैंने उसकी चूचियों को अपनी मुठ्ठी में भर कर मसल दिया और बोली- हाय.. क्या सॉलिड चूचियों हैं तेरी.. मेरी जान..
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रश्मि बोली- भाभी क्या करती हो आप.. तुम्हारी भी तो हैं ना.. बल्कि मेरी से भी बड़ी-बड़ी हैं।

मेरी नज़र रश्मि की पीठ पर उसकी ब्रेजियर की स्ट्रेप्स और हुक्स पर पड़ी।
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मैं- रश्मि यह तुमने क्यों नीचे पहनी हुई है.. यह तो बिल्कुल ही खुली नज़र आ रही है.. और भी ज्यादा सेक्सी लगती है.. उतारो इसे.. पूरी की पूरी ब्रेजियर खुलम्म-खुल्ला अपने भैया को दिखाती फिर रही हो.. क्या छुपा हुआ है इसमें?

यह कह कर मैंने रश्मि की ब्रेजियर की हुक को पकड़ा और उसकी ब्रेजियर को खोल दिया।

इससे पहले कि वो कोई विरोध करती या मुझे रोकती.. मैंने उसकी ब्रा की स्ट्रेप्स उसके कन्धों से नीचे खींच दिए और उसके साथ ही उसकी शर्ट की डोरियाँ भी नीचे उतार दीं।
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एकदम से रश्मि की दोनों चूचियों मेरी नज़रों की सामने बिल्कुल से नंगी हो गईं।
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रश्मि ने फ़ौरन से ही अपनी चूचियों पर अपने दोनों हाथ रख दिए और बोली- भाभि..भाभी.. यह क्या कर रही हो आप..? मुझे क्यों नंगी कर दिया?
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अपडेट 27

आपने अभी तक पढ़ा..
मैंने रश्मि की ब्रेजियर की हुक को पकड़ा और उसकी ब्रेजियर को खोल दिया।
इससे पहले कि वो मुझे रोकती.. मैंने उसकी ब्रा की स्ट्रेप्स उसके कन्धों से नीचे खींच दिए और उसके साथ ही उसकी शर्ट की डोरियाँ भी नीचे उतार दीं।
एकदम से रश्मि की दोनों चूचियों मेरी नज़रों की सामने बिल्कुल से नंगी हो गईं।

रश्मि ने फ़ौरन से ही अपनी चूचियों पर अपने दोनों हाथ रख दिए और बोली- भाभिइ..भाभीई.. यह क्या कर रही हो आप..? मुझे क्यों नंगी कर दिया?
अब आगे..

मैं हँसते हुए उसके हाथों को पीछे खींचने के लिए जोर लगाने लगी और वो भी मस्ती के साथ मेरे साथ जोर आज़माईश करने लगी। लेकिन मैंने अपने दोनों हाथ उसकी चूचियों पर पहुँचा ही दिए और अपनी ननद की दोनों नंगी चूचियों को अपनी मुठ्ठी में ले लिया और बोली- उउफफफफ.. क्या मजे की हैं तेरी चूचियाँ.. रश्मि.. मेरा दिल करता है कि इनको कच्चा ही खा जाऊँ।
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रश्मि- सोच लो भाभी.. फिर मैं भी इन दोनों को खा जाऊँगी।
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मैं- हाँ हाँ.. पहले ही भाई नहीं छोड़ता इन सबको खाना और चूसना.. अब उसकी बहन भी इनके पीछे पड़ने लगी है।

अब मैंने रश्मि की ब्रेजियर को उसकी बाज़ू में से बाहर निकाल दी और आहिस्ता-आहिस्ता उसकी दोनों चूचियों को हाथों से निकाल कर दोबारा से उसकी शर्ट की डोरियों को उसके कन्धों पर चढ़ा दिया.. लेकिन उसकी ड्रेस की डोरियाँ ठीक करने के बावजूद भी मैंने उसकी चूचियों को उसकी शर्ट के बाहर ही रखा.. तो वो हँसने लगी।
‘भाभी इनको तो अन्दर कर दो..’
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अब वो मुझसे अपनी चूचियों को नहीं छुपा रही थी।
मैं- चल ठीक.. आज तू अगर ऐसे ही अपने भैया के सामने रह जाती है ना.. तो जो मर्ज़ी मुझसे माँग लेना.. मैं दे दूँगी..
रश्मि मेरी बात सुन कर हँसने लगी और बोली- लगता है कि आप मुझे भैया से मरवा कर ही रहोगी।
मैं मुस्कुराई और धीमी आवाज़ में बोली- तुमको नहीं.. तुम्हारी मरवाऊँगी.. तुम्हारे भैया से..
रश्मि बोली- भाभी क्या बोला आपने.. फिर से बोलना जरा..

मैं हँसने लगी.. उसकी बात पर मुझे पता चल गया था कि मेरी बात रश्मि ने सुन तो ली ही है।
मैंने जान बूझ कर उसकी ब्रा वहीं अपने बिस्तर पर फेंक दी और दोबारा से रश्मि के मेकअप को सैट करने लगी।

थोड़ी ही देर में मेरे मेकअप ने रश्मि के हसीन चेहरे को और भी हसीन कर दिया।

उसके होंठों पर लगी हुई चमकदार सुर्ख लिपिस्टिक बहुत ही सेक्सी लग रही थी। मैंने उसे तैयार करने के बाद उसके गोरे-गोरे गालों पर एक चुटकी ली और बोली- आज तो मेरी ननद पूरी छम्मक-छल्लो सी लग रही है।

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मेरी बात सुन कर रश्मि शर्मा गई और बोली।
रश्मि- भाभी घर पर दिन के वक़्त यह ड्रेस कुछ ज्यादा ही ओपन नहीं हो जाएगा।
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मैं- अरे नहीं यार.. कुछ भी ज्यादा या कम नहीं है.. देख मैं भी तो इसी ड्रेस में ही हूँ ना.. मैंने कौन सा इसे चेंज कर लिया हुआ है और एक बात तुमको बताऊँ कि तेरे आने से पहले तो मैं घर पर तुम्हारे भैया के होते हुए सिर्फ़ ब्रेजियर ही पहन कर फिरती रहती थी। अब तो सिर्फ़ तुम्हारी वजह से इतनी फॉरमैलिटी करनी पड़ती है।
रश्मि- क्या सच भाभी??

मैं- हाँ तो और क्या.. अगर तू कहे.. तो मैं ऐसी दोबारा से भी हो सकती हूँ।
मेरी बात सुन कर वो खामोश हो गई।
फिर हम दोनों बाहर लाउंज में आ गए और टीवी देखने लगे।

इतनी में घंटी बजी.. सूरज के आने की सोच कर मैंने जानबूझ कर रश्मि से कहा- जाओ.. गेट खोलो.. तुम्हारे भैया आए हैं।
वो शर्मा कर बोली- नहीं भाभी आप ही जाओ..
मैंने इन्कार कर दिया और उसे दरवाजे की तरफ ढकेला और वो चुप करके गेट की तरफ बढ़ गई।

मुझे पता था कि इतनी खूबसूरत हालत में अपनी बहन को देख कर सूरज को ज़रूर शॉक लगेगा.. इसलिए मैं भी उनकी तरफ ही गेट को देख रही थी।

वो ही हुआ कि जैसे ही रश्मि ने गेट खोला.. तो उसे देख कर सूरज का मुँह खुला का खुला रह गया।
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अपनी बहन के खिलते हुए गोरे रंग और उस पर किए हुए इस क़दर खुबसूरत मेकअप की वजह से रश्मि पर तो नज़र ही नहीं टिक पा रही थी।
गेट खोल कर रश्मि ने मुस्करा कर अपने भाई को देखा और फिर वापिस मुड़ते हुए सूरज ने जल्दी से गेट बंद किया और रश्मि के पीछे-पीछे चलने लगा।

रश्मि की कमर पर नज़र पड़ी तो उसे एक और शॉक लगा कि उसकी बहन ने अब रात वाली काली ब्रेजियर भी नहीं पहनी हुई थी.. और वो भी उतार चुकी हुई थी।
अब बैक पर रश्मि की गोरी-गोरी चिकनी कमर बिल्कुल नंगी हो रही थी।

मैंने महसूस किया कि रश्मि भी बहुत ही धीरे-धीरे चलते हुए आ रही थी।
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अन्दर आकर रश्मि नाश्ते का सामान लेकर रसोई में चली गई और सूरज मेरे पास आ गया।
मैंने मुस्करा कर उसकी तरफ देखा और बोली- आज हमारी रश्मि प्यारी लग रही है ना?

सूरज ने मेरी तरफ देखा और बोला- हाँ हाँ, बहुत अच्छी लग रही है।

मैं उठी और रसोई की तरफ जाते हुए सूरज से बोली- यार वो बेडरूम से चाय की सुबह वाला कप तो उठा लाना.. उसको भी साथ ही धो लेती हूँ।

यह कह कर मैं रसोई में चली गई.. मुझे पता था कि अन्दर का क्या हसीन मंज़र सूरज का इंतज़ार में होगा।

मैं रसोई में रश्मि के पास आ गई और उसे नाश्ता लगाने मैं मदद करने लगी।

थोड़ी देर बाद मैंने रश्मि से कहा- रश्मि जाकर देखना कि तुम्हारे भैया क्या कर रहे हैं.. उन्हें बेडरूम से कप उठा कर लाने के लिए कहा था.. मुझे लगता है कि दोबारा से वहाँ जाकर सो गए हैं।

रश्मि मुस्कराई और बेडरूम की तरफ बढ़ी और मैं उसको रसोई के दरवाजे के पीछे से देखने लगी।

रश्मि ने जैसे ही अन्दर झाँका तो एकदम पीछे हट गई। उसने रसोई की तरफ मुड़ कर देखा.. लेकिन जब मुझ पर नज़र नहीं पड़ी.. तो दोबारा छुप कर अन्दर देखने लगी।

मैं समझ सकती थी कि अन्दर क्या हो रहा होगा।
जाहिर सी बात थी कि अपने बिस्तर पर जो मैंने रश्मि की ब्रेजियर फैंकी थी.. वो सूरज के आने तक वहीं पड़ी हुई थी.. तो अब सूरज ने उसे देख लिया होगा और उसे उठा कर उसका जायज़ा ले रहा होगा। उसे अच्छे से अंदाज़ा था कि यह मेरी ब्रेजियर नहीं है और अब तो उसे साइज़ का भी पता हो गया था। उसे यह भी पता था कि मैंने तो कल से ब्रा पहनी ही नहीं हुई है।
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अन्दर सूरज अपनी बहन की ब्रेजियर के साथ खेल कर मजे ले रहा था और बाहर खड़ी हुई रश्मि अपने भाई को अपनी ही ब्रेजियर से खेलते हुए देख रही थी।
यह नहीं पता था कि सूरज अपनी बहन की ब्रा के साथ कर क्या रहा है.. लेकिन फिलहाल उसके लिए कुछ करने का था तो नहीं वहाँ.. पर तब भी कुछ देर तक मैंने दोनों को एंजाय करने दिया।

फिर थोड़ा दरवाजे से पीछे हट कर मैंने सूरज को और फिर रश्मि को आवाज़ दी और जल्दी आने को कहा। मेरी आवाज़ सुन कर रश्मि रसोई में आ गई।
मैंने रश्मि का चेहरा देखा तो वो सुर्ख हो रहा था.. मैंने पूछा- आए नहीं तुम्हारे भैया.. क्या कर रहे हैं?
रश्मि बोली- आ रहे हैं वो बस अभी आते हैं।

वो मेरे सवाल का जवाब देने में घबरा रही थी। फिर वो आहिस्ता से बोली- भाभी आपने मेरी ब्रा वहीं बिस्तर पर ही फेंक दी थी क्या?
मैं- ओह हाँ.. बस यूँ ही ख्याल ही नहीं रहा बस.. क्यों क्या हुआ है उसे?

अपडेट 28

आपने अभी तक पढ़ा..

फिर थोड़ा दरवाजे से पीछे हट कर मैंने सूरज को और फिर रश्मि को आवाज़ दी और जल्दी आने को कहा। मेरी आवाज़ सुन कर रश्मि रसोई में आ गई।
मैंने रश्मि का चेहरा देखा तो वो सुर्ख हो रहा था.. मैंने पूछा- आए नहीं तुम्हारे भैया.. क्या कर रहे हैं?
रश्मि बोली- आ रहे हैं वो बस अभी आते हैं।

वो मेरे सवाल का जवाब देने में घबरा रही थी। फिर वो आहिस्ता से बोली- भाभी आपने मेरी ब्रा वहीं बिस्तर पर ही डाल दी थी क्या?
मैं- ओह हाँ.. बस यूँ ही ख्याल ही नहीं रहा बस.. क्यों क्या हुआ है उसे?
अब आगे..

रश्मि बोली- नहीं.. कुछ नहीं भाभी.. कुछ नहीं हुआ..
फिर वो जल्दी से खाना उठा कर बाहर आ गई। मैंने उसे ब्रेकफास्ट टेबल के बजाए आज छोटी सेंटर टेबल पर लगाने के लिए कहा।
ज़ाहिर है कि इसमें भी मेरे दिमाग की कोई शैतानी ही शामिल थी ना..

थोड़ी ही देर में सूरज भी बेडरूम से कप की ट्रे लेकर आ गया।

मैंने पूछा- कहाँ रह गए थे?

उसने घबरा कर एक नज़र रश्मि पर डाली और बोला- वो बस बाथरूम में चला गया था।
रश्मि अपने भाई की तरफ नहीं देख रही थी.. बस सोफे पर बैठे अपने भाई के आने का इन्तजार कर रही थी।

क्योंकि रात को उसे सोई हुई समझ कर उसका भाई जो जो उसके साथ करता रहा था और जो कुछ अब वो उसकी ब्रेजियर के साथ कर रहा था.. तो वो उसके लिए बहुत ही उत्तेजित हो उठी थी.. लेकिन उसे शर्मा देने वाला महसूस भी हो रहा था।

सूरज आया तो मेरे साथ ही सोफे पर बैठ गया और हम तीनों ने नाश्ता शुरू कर दिया। रश्मि हम दोनों के बिल्कुल सामने बैठे थी। अब खाना इस टेबल पर रखने में मेरा ट्रिक यह था कि यह जो टेबल थी.. वो काफ़ी नीची थी और इस पर खाना खाते हुए आगे को काफ़ी झुकना पड़ता था।
इस तरह आगे को नीचे झुकने का पूरा-पूरा फ़ायदा मैं सूरज को दे रही थी.. क्योंकि रश्मि भी नीचे झुक कर खाना खा रही थी और उसके नीचे झुकने की वजह से उसकी नेट शर्ट और भी नीचे को लटक रही थी। इस वजह से उसकी चूचियाँ और भी ज्यादा एक्सपोज़ हो रही थीं।
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सूरज की नज़र भी सीधी-सीधी अपनी बहन की खुली ओपन क्लीवेज और चूचियों पर ही जा रही थी।
मैंने महसूस किया कि सूरज नाश्ता कम कर रहा था और अपनी बहन की चूचियों को ज्यादा देख रहा था।

एक और बात जो मैंने नोट की.. वो यह थी कि रश्मि को पता था कि उसकी चूचियाँ काफ़ी ज्यादा खुली नज़र आ रही हैं और उसका भाई इनका पूरी तरह से मज़ा ले रहा है.. लेकिन इसके बावजूद भी रश्मि ने अपनी पोजीशन को चेंज करने की और अपनी चूचियों को छुपाने की कोई कोशिश नहीं की।
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वैसे भी उसकी और मेरी शर्ट इतनी ज्यादा ओपन थी कि हमारे पास अपनी खुली चूचियों को छुपाने के लिए कुछ नहीं था।

हमारी ध्यान हटाने के लिए सूरज बोला- यार आज तो बाहर मौसम काफ़ी खराब हो रहा है.. काले बादल भी छाए हुए हैं.. लगता है कि आज बारिश हो जाएगी।

रश्मि- जी भैया.. अच्छा है ना बारिश हो जाए.. तो कुछ गर्मी से राहत मिलेगी।
बारिश का जिक्र आते ही मैं दिल ही दिल मैं बारिश कि लिए दुआ माँगने लगी ताकि कुछ और भी मस्ती करने का मौका मिल सके।
नाश्ता करने के बाद मैंने और रश्मि ने बर्तन उठाए और रसोई में ले जाकर रखे।

फिर मैं रश्मि को चाय बना कर लाने का कह कर रसोई से बाहर टीवी लाउंज में आ गई और सूरज के बिल्कुल साथ लग कर बैठ गई। सूरज ने भी टीवी देखते हुए मेरी गर्दन के पीछे से अपना बाज़ू डाला और मेरी दूसरे कन्धों पर ले आया और ऊपर से ही मेरी चूचियों को सहलाने लगा।

फिर उसका हाथ आहिस्ता आहिस्ता मेरी ओपन शर्ट में नीचे चला गया और उसने मेरी शर्ट के अन्दर हाथ डाल कर मेरी एक चूची को पकड़ लिया और आहिस्ता आहिस्ता उससे खेलने लगा।
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मैंने भी उसे मना नहीं किया और ना ही उसकी बहन के पास होने का इशारा दिया बल्कि उसे खुल कर एंजाय करने दे रही थी और खुद भी उससे चिपकती जा रही थी.. ताकि उसका हाथ बहुत ही आसानी के साथ और भी मेरी शर्ट के अन्दर तक चला जाए।

हम दोनों ही इसी हालत में बैठे हुए टीवी देख रहे थे.. मैं थोड़ी तिरछी नज़र से रसोई की तरफ भी देख रही थी.. इतने में रश्मि टीवी लाउंज में दाखिल हुई तो मैंने अपनी नज़र उस पर नहीं डाली और भी ज्यादा में सूरज से चिपक गई।

सूरज का हाथ अभी भी मेरी शर्ट के अन्दर मेरी चूची से खेल रहा था। उसकी बहन ने आते ही सब कुछ देख लिया था।
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मैंने देखा कि कुछ देर तो वो वहीं रसोई के दरवाजे पर खड़ी हुई यह नज़ारा देखती रही.. फिर आहिस्ता आहिस्ता क़दमों से चलते हुए हमारी टेबल के क़रीब आई और झुक कर टेबल पर चाय की ट्रे रख दी।
उसके चेहरे पर हल्की-हल्की मुस्कराहट थी।

उसे देखते ही सूरज ने अपना हाथ मेरी शर्ट से बाहर निकाल लिया.. लेकिन इससे पहले तो रश्मि सब कुछ देख ही चुकी थी कि कैसे उसका भाई मेरी शर्ट की अन्दर अपना हाथ डाल कर मेरी चूचियों से खेल रहा है।
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सूरज ने अपना हाथ तो मेरी शर्ट से निकाल लिया था.. लेकिन अभी तक मेरे कन्धों पर ही रखा हुआ था। मैं भी बिना कोई शरम किए हुए सूरज के साथ चिपक कर बैठी हुई थी।

रश्मि ने मुस्कराते हुए वहीं पर ही हम दोनों को चाय के कप पकड़ा दिए और फिर वो भी चाय लेकर मेरे पास बैठ गई।
अब मैं बीच में थी और दोनों बहन-भाई मेरी दोनों तरफ बैठे थे।

रश्मि के नंगे कंधे भी मेरे कंधों से टकरा रहे थे और सूरज के हाथ भी मेरे कन्धों से होते हुए अपनी बहन के कन्धों को छू जाते थे।
लेकिन वो बिना किसी मुस्किल के आराम से बैठी हुई थी।

मैंने चाय का एक सिप लिया और उन दोनों के बीच में से उठते हुए बोली- यार चीनी कुछ कम है.. मैं अभी डाल कर लाई।
फिर मैं उन दोनों बहन-भाई के बीच में से उठ गई और फिर रसोई में आ गई।

वहाँ से मैंने देखा कि सूरज ने थोड़ा सा सरकते हुए रश्मि के कन्धों पर गर्दन से पीछे बाज़ू डाल कर अपना हाथ रखा और फिर उसके कन्धों को सहलाते हुए बोला- और सुनाओ रश्मि.. तुम्हारी पढ़ाई कैसे चल रही है?
रश्मि भी सटते हुए बोली- जी भैया.. पढ़ाई भी और कॉलेज भी.. ठीक चल रहे हैं।

मैंने देखा कि रश्मि ने अपने जिस्म को अपने भाई के हाथ की पकड़ से छुड़ाने की कोई कोशिश नहीं की.. बल्कि उसी तरह बैठी रही।
कुछ देर तक मैंने उन दोनों को बिना कोई और बातचीत किए हुए मज़ा लेने दिया और फिर रसोई से बाहर आ गई।

मेरे आते ही दोनों सम्भल कर बैठ गए। मैं महसूस कर रही थी कि दोनों बहन-भाई के बीच बिना कोई बातचीत शुरू हुए ही एक लगाव सा बनता जा रहा था।
रश्मि को अपने भाई के टच से लुत्फ़ आने लगा था और शायद सूरज को भी पता चलता जा रहा था कि उसकी बहन भी कुछ-कुछ एंजाय करने लगी है।

मैं अब जाकर सूरज की दूसरी तरफ बैठ गई और उसे बीच में ही बैठा रहने दिया। ऐसे ही चाय पीते और गप-शप लगाते हुए हम लोग टीवी देखते रहे।

हम दोनों ननद-भाभी ने इसे ड्रेस में पूरा दिन घर में अपने जिस्म के नंगेपन की बिजलियाँ गिराते हुए गुजारा। पूरे दिन हम दोनों के नंगे जिस्मों को देख कर सूरज पागल होता रहा। कई बार जब भी उसने मुझे अकेले पाया.. तो अपनी बाँहों में मुझे दबोच लिया और चूमते हुए अपनी प्यास बुझाने लगा।
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मैंने भी उसके लण्ड को सहलाते हुए उसे खड़ा किया.. लेकिन हर बार की तरह उसकी बाँहों से फिसल कर उसे klpd का अहसास कराते हुए भाग आई.. ताकि उसकी प्यास और उसकी अन्दर जलती हुई आग इसी तरह ही भड़कती रहे और ठंडी ना होने पाए।
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(काजल सूरज का klpd करने के बाद)

अपडेट 29

आपने अभी तक पढ़ा..
हम दोनों ननद-भाभी ने इसे ड्रेस में पूरा दिन घर में अपने जिस्म के नंगेपन की बिजलियाँ गिराते हुए गुजारा। पूरे दिन हम दोनों के नंगे जिस्मों को देख कर सूरज पागल होता रहा। कई बार जब भी उसने मुझे अकेले पाया.. तो अपनी बाँहों में मुझे दबोच लिया और चूमते हुए अपनी प्यास बुझाने लगा।
मैंने भी उसके लण्ड को सहलाते हुए उसे खड़ा किया.. लेकिन हर बार उसकी बाँहों से फिसल कर उसे केएलपीडी का अहसास कराते हुए भाग आई.. ताकि उसकी प्यास और उसकी अन्दर जलती हुई आग इसी तरह ही भड़कती रहे और ठंडी ना होने पाए।
अब आगे..

मैंने महसूस किया कि अब रश्मि भी घर में उस बिल्कुल ही नंगी ड्रेस में फिरने में कोई भी शरम महसूस नहीं कर रही थी और बड़े आराम से उस हाफ शॉर्ट बरमूडा और उस स्लीव लैस नेट शर्ट में बिंदास घूम रही थी.. जिसमें उसका खूबसूरत सीना और चूचियों का ऊपरी हिस्सा तो बिल्कुल ही खुला नज़र आ रहा था।
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अब वो भी अपने भाई की नजरों से बचने की कोशिश नहीं कर रही थी.. बल्कि उसके आस-पास ही डोल रही थी

मैं और रश्मि रसोई में थे.. तो सूरज भी अन्दर ही आ गया।
बोला- हाँ.. भाई क्या पक रहा है?
मैंने बताया- चिकन बना रही हूँ।
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सूरज रश्मि के नंगे जिस्म की तरफ देखते हुए बोला- यार आज मौसम इतना प्यारा हो रहा है.. आज तो साथ में कुछ मीठा भी होना चाहिए..
मैंने मुस्करा कर सूरज की तरफ देखा
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और बोली- बेफिकर रहिए आप.. आज आपका मुँह भी मीठा करवा ही देंगे.. क्यों रश्मि..
जैसे ही आखिरी बात मैंने रश्मि से पूछी.. तो वो मेरे सवाल पर झेंप सी गई और बोली- हाँ हाँ.. भैया बताएं.. क्या बनाना है?

सूरज ने मुस्करा कर अपनी बहन की हिलते हुए चूचियों की तरफ एक नज़र डाली और फिर बाहर निकलते हुए बोला- कुछ भी मस्त सा आइटम बना लो यार..
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क़रीब 5 बजे सूरज के एक दोस्त का फोन आ गया.. उसने उसे अपने घर बुलाया था।

मुझे साफ़ लग रहा था कि घर में घूम रही दो-दो खूबसूरत अधनंगी लड़कियों को छोड़ कर जाने को उसका दिल बिल्कुल भी नहीं कर रहा था.. लेकिन उसे जाना ही पड़ा।
उसका यह दोस्त दो-तीन गली छोड़ कर ही रहता था। सूरज के जाने के बाद मैंने और रश्मि ने जल्दी से रात का खाना तैयार कर लिया और सूरज की फरमाइश के मुताबिक़ मीठा भी बना लिया।

रसोई से निकलते हुए मैंने रश्मि को मासूमियत से छेड़ा- यार पता नहीं तुम्हारे भैया को यह मीठा पसंद आता भी है कि नहीं.. या कुछ और चीज़ से मुँह मीठा करना चाहिए।
मेरी बात सुन कर रश्मि शरमा कर मुस्कराई और अपने कमरे में चली गई।

सूरज के जाने के बाद मैं अपने कमरे में आ गई और अपना लैपटॉप खोल कर बैठ गई।
मैं अक्सर अकेले में नेट पर ट्रिपल एक्स मूवीज देखती थी। ट्रिपल एक्स मूवीज देखने का मुझे और सूरज दोनों को ही बड़ा शौक़ था.. बल्कि सच कहूँ.. तो सूरज ने ही मुझे इसका आदी बनाया था।
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मेरा दिल आज चाहा कि मैं आज लेज़्बीयन मूवी देखूं।
मैंने एक पॉर्न साइट पर जाकर लेज़्बीयन मूवी खोज निकाली और उसको देखने लगी।
मुझे आज पहली बार इन मूवीज में मज़ा आ रहा था.. वरना कभी भी मैंने इस क़दर शौक़ से इस किस्म की मूवीज नहीं देखीं थीं।
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मुझे हमेशा से ही स्ट्रेट सेक्स ही पसंद रहा था। एक मर्द के साथ एक औरत के जिस्म का मिलाप होना ही मुझमें चुदास जगा देता था। लेकिन आज जब से मैंने रश्मि के जिस्म को छुआ और उसे चूमा था.. तो मुझे इसमें भी बहुत मज़ा आ रहा था।

अपने बिस्तर पर बैठ कर अपनी जाँघों पर लैपटॉप रख कर मैं पॉर्न एंजाय कर रही थी।
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कुछ देर गुज़रे.. तो अचानक से रश्मि मेरे कमरे में आ गई, वो अभी भी उसी सुबह वाले ड्रेस में थी।
उसे देखते साथ ही एक बार फिर से मेरी आँखें चमक उठीं।

मैंने जल्दी से उस फिल्म को बन्द कर दिया। रश्मि मेरे पास बिस्तर पर आ गई और मेरे पास बैठती हुई बोली।
रश्मि- भाभी क्या देख रही थी लैपटॉप पर?
मैं- कुछ नहीं यार.. तेरे देखने की चीज़ नहीं है..
रश्मि- क्यों भाभी ऐसी कौन सी चीज़ है.. जो मेरे देखने की नहीं है और क्यूँ नहीं है.. मेरे देखने की?
मैं- वो इसलिए नहीं है.. क्योंकि तू अभी बच्ची है.. हाहह… हहहा..

रश्मि मेरी बाज़ू पर मुक्का मारते हुए बोली- वाह जी वाह.. भाभी जी.. मैं अब बड़ी हो गई हुई हूँ.. कोई बच्ची-वच्ची नहीं हूँ।
मैं हँसते हुए- अच्छा जी.. तो कहाँ से बड़ी हो गई हो.. बताओ मुझे भी रश्मि?
रश्मि अपना सीना तान कर अपनी चूचियों को बाहर को निकालते हुए बोली- देख लो.. कितनी बड़ी हो गई हूँ मैं और सुबह भी तो आपने देखा ही था ना.. कौन सा मैं कोई बच्ची जैसी हूँ?
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मैं हँसने लगी- अच्छा बाबा अच्छा, ठीक है.. आओ तुमको भी देखा देती हूँ.. लेकिन फिर ना कहना कि कैसे चीजें दिखा दी हैं भाभी ने मुझे..

मैं अब रश्मि को थोड़ा और भी ओपन करने का सोच चुकी थी इसलिए मैंने वो ही लेज़्बीयन फिल्म निकाली और चला दी।
रश्मि ने जैसे ही वो फिल्म देखी तो फ़ौरन ही अपने मुँह पर हाथ रख लिया।
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रश्मि- ओह नो भाभी.. मैंने ऐसी मूवीज का सुना था कॉलेज की लड़कियों से.. और देखी भी थी उनके मोबाइल में.. लेकिन भाभी क्या आप भी इस तरह की मूवीज देखती हो?
मैंने मुस्करा कर उसकी तरफ देखा और बोली- हाँ.. क्यों नहीं.. अच्छा लगता है ना..
रश्मि- लेकिन अगर भैया को पता चल जाए आपका.. तो??
मैं हँसते हुए- अरे पगली.. तेरे भैया ने ही तो मुझे इनको देखना सिखाया है..
रश्मि- क्या सच भाभी..??

मैंने ‘हाँ’ में सिर हिलाया और फिर उसे अपने पास खींचते हुए अपना बाज़ू उसके कंधे पर दूसरी तरफ से रखते हुए बोली- चलो अब देखो फिल्म..
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रश्मि मेरे साथ वो लेज़्बीयन फिल्म देखने लगी और थोड़ी ही देर मैं पूरी तरह से फिल्म में मस्त हो गई..
मैं भी आहिस्ता आहिस्ता उसके नंगे कन्धों को सहला रही थी और आहिस्ता आहिस्ता मेरा हाथ नीचे को उसके कन्धों के आगे की ओर उसकी चूची की ऊपरी हिस्से तक आता जा रहा था।
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आहिस्ता आहिस्ता मैंने रश्मि की चूची को उसकी शर्ट की ऊपर से सहलाना शुरू कर दिया।
मेरा चेहरा भी उसके कन्धों पर आ गया और मैं अपने होंठों को उसकी गर्दन और उसके कन्धों पर आहिस्ता आहिस्ता फेरने लगी।
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रश्मि मेरे होंठों से अपनी गर्दन और कन्धों और जिस्म को बचाने की लिए हौले-हौले कसमसा रही थी.. लेकिन ज्यादा कोशिश भी नहीं कर रही थी.. शायद उसे भी अच्छा लग रहा था।

लैपटॉप अब बिस्तर पर रखा हुआ था। मैंने अपनी टाँगें फैलाईं और आहिस्ता से रश्मि को अपनी गोद में खींच लिया। रश्मि भी चुप करके मेरी गोद में लेट गई और मेरे एक साइड पर रखे हुए लैपटॉप पर वही लेज़्बीयन फिल्म देखने लगी।
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इस फिल्म में एक लड़की दूसरी खूबसूरत लड़की की चूचियों को चूस रही थी और उसके निपल्स पर अपनी ज़ुबान फेर रही थी।
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मैंने अपना हाथ रश्मि की चूचियों पर रखा और उनको आहिस्ता आहिस्ता सहलाते हुए रश्मि के कान में धीरे से बोली- रश्मि.. देखो बिल्कुल तुम्हारे जैसे सुडौल और खूबसूरत हैं.. इसकी चूचियों.. कितनी सेक्सी लग रही है।
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इसके साथ ही मैंने अपनी ज़ुबान की नोक रश्मि के कान के अन्दर आहिस्ता से घुमाई.. तो वो चुदास से तड़फ ही उठी..
करश्मि ने मुस्करा कर मेरी तरफ देखा.. तो मुझे उसकी आँखें सुर्ख होती हुई नज़र आईं। मैंने नीचे को झुक कर हिम्मत करते हुए अपने होंठ उसके होंठों पर रखे और एक किस कर लिया।
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रश्मि मुस्कराई और बोली- भाभी क्या है..

आपको लगता है कि आपको भी इनकी तरह ही मज़ा करने का शौक चढ़ रहा है?

मैं आहिस्ता आहिस्ता रश्मि की नंगी जाँघों पर हाथ फेरते हुए उसके गालों को चूमते हुए बोली- हाँ.. तो क्या दिक्कत है इसमें.. यह सब तो लड़कियां करती ही हैं ना?
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अपडेट 30

आपने अभी तक पढ़ा..
रश्मि ने मुस्करा कर मेरी तरफ देखा.. तो मुझे उसकी आँखें सुर्ख होती हुई नज़र आईं। मैंने नीचे को झुक कर हिम्मत करते हुए अपने होंठ उसके होंठों पर रखे और एक बोसा ले लिया।
रश्मि मुस्कराई और बोली- भाभी क्या है.. आपको लगता है कि आपको भी इनकी तरह ही मज़ा करने का शौक चढ़ रहा है?
मैं आहिस्ता आहिस्ता रश्मि की नंगी जाँघों पर हाथ फेरते हुए उसके गालों को चूमते हुए बोली- हाँ.. तो क्या हर्ज है इसमें.. यह सब तो लड़कियां करती ही हैं ना?
अब आगे..

रश्मि- जी भाभी.. मुझे पता है कि यह सब कुछ होता है.. मेरी एक फ्रेंड है जो कि हॉस्टल में रहती है.. तो वो बताती है कि वहाँ गर्ल्स हॉस्टल में यह वाला प्यार बहुत कॉमन है।

रश्मि के सिर के बालों में हाथ फेरते हुए मैंने झुक कर रश्मि के होंठों को चूमा और उसकी निचले होंठ को अपने दाँतों की गिरफ्त में लेते हुए आहिस्ता आहिस्ता काटने लगी.. तो ‘इसस्स.. स्स्स्स्स.. स्स्स्स्स…’ की आवाज़ के साथ ही रश्मि की आँखें भी बंद हो गईं।
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एक हाथ से रश्मि के सिर को कंट्रोल करते हुए उसके होंठों को चूसते हुए.. मैंने अपना हाथ रश्मि की शर्ट के नीचे डाला और उसकी नंगे गोरे पेट को सहलाते हुए अपना हाथ ऊपर को उसकी नंगी चूचियों की तरफ ले जाने लगी।
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रश्मि की साँसें तेज हो रही थीं और उसकी साँसों के साथ उसकी चूचियों भी ऊपर-नीचे हो रही थीं।
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जैसे ही मेरे हाथों ने सीधे रश्मि की नंगी चूचियों को अपनी गिरफ्त में लिया.. तो रश्मि का सीना एकदम से ऊपर को उठ गया, मैं फ़ौरन ही समझ गई कि रश्मि भी मस्ती में आ रही है, मैंने बिल्कुल आहिस्ता आहिस्ता उसके एक निप्पल को अपनी उंगली और अँगूठे के बीच लेकर दबाना और सहलाना शुरू कर दिया।
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रश्मि के मुँह से हल्की हल्की सिसकारियाँ निकलने लगी थीं।
बारी-बारी से मैं उसके दोनों छोटे-छोटे अंगूरों जैसे निप्पलों को सहला रही थी और साथ-साथ रश्मि के होंठों को भी चूम रही थी।
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रश्मि की आँखें बिल्कुल बंद थीं.. बस उसके मुँह से गहरी-गहरी साँसें फूट रही थीं।
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मैं उसकी चूचियों से उसकी शर्ट के नीचे से खोलती हुई उसकी गुलाबी और पतले-पतले रसीले होंठों पर अपनी ज़ुबान फेर रही थी।
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आहिस्ता आहिस्ता मैंने अपनी ज़ुबान को उसके होंठों के दरम्यान में धकेल दिया। अब मेरी ज़ुबान उसके होंठों को अन्दर से चाटने लगी और उसकी दाँतों से टकरा रही थी।

आहिस्ता आहिस्ता रश्मि के दाँतों ने एक-दूसरे से अलग होते हुए मेरी ज़ुबान को अन्दर आने की इजाज़त दी और अगले ही पल मेरी ज़ुबान रश्मि की ज़ुबान से टकराने लगी.. साथ ही रश्मि ने अपने होंठों को बंद किया और मेरी ज़ुबान को अपने होंठों में लेकर चूसने लगी।
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मैंने अपना हाथ रश्मि की उस छोटी सी शर्ट से बाहर निकाला और फिर उसकी शर्ट के ऊपर से उसकी चूचियों पर रख दिया।
अब मैंने उसकी शर्ट के खुले गले के किनारे को पकड़ा और आहिस्ता-आहिस्ता उसको नीचे को खींचते हुए मैंने उसकी चूचियों को नंगा कर लिया।
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एक लम्हे के लिए रश्मि ने अपनी आँखें खोलीं.. लेकिन जैसे ही मैंने उसकी नंगी खुल्ला चूचियों को अपनी मुट्ठी में पकड़ा.. तो एक बार फिर से उसकी आँखें बंद हो गईं।
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रश्मि की खूबसूरत गोरी-गोरी चूचियाँ और उनकी ऊपर सजे हुए गुलाबी-गुलाबी छोटे-छोटे अंगूरी निप्पल मेरी नज़रों के सामने बिल्कुल नंगे हो चुके थे।
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उसकी दाईं तरफ की चूची पर दरम्यान में एक छोटा सा काला तिल था.. जो कि उसकी गोरी स्किन पर बहुत ही प्यारा लग रहा था।
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कुछ समय उसके होंठों को दोबारा चूमने के बाद मैंने अपने होंठों को नीचे लाते हुए उसकी सीने को चूमा और फिर अपने होंठों को उसकी गुलाबी निप्पलों के पास ले आई.. और आहिस्ता आहिस्ता अपने होंठों से गर्म-गर्म साँसें निकाल कर उनको गर्म करने लगी।
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जैसे ही मैंने अपने होंठों के हल्के से टच से उसके निप्पलों को छुआ और रगड़ा.. तो रश्मि की जिस्म में तनाव सा पैदा हो गया और उसके जिस्म ने एक झुरझुरी सी ली।
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धीरे-धीरे मैंने अपनी ज़ुबान को बाहर निकाला और उसकी एक निप्पल को अपनी ज़ुबान से सहलाने लगी। जैसे-जैसे मेरी ज़ुबान उसके नर्म निप्पल को सहला रही थी.. तो रश्मि के जिस्म में बेचैनी सी बढ़ती ही जा रही थी।

ज़ाहिर है कि एक कुँवारी लड़की जिसके लिए यह सब कुछ पहली बार हो रहा हो.. उसका खुद पर कंट्रोल करना बहुत ही मुश्किल होता है।
यही हाल रश्मि का हो रहा था, अपने जिस्म के साथ हो रही इस नई छेड़-छाड़ को वो बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी और उसके हाथ भी मेरी नंगी कमर को सहलाने लगे थे।
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मैंने आहिस्ता से उसके एक निप्पल को अपने होंठों में ले लिया और उसे हौले-हौले चूसने लगी। मैं चूसते हुए उसके निप्पलों को अपनी ज़ुबान से सहला भी रही थी।

मेरा हाथ उसकी जाँघों और नंगी कमर और जिस्म पर रेंग रहे थे.. मुझे लग रहा था कि कुछ ही देर में ही बिना चुदे ही रश्मि अपनी ज़िंदगी में पहली बार रस छोड़ने के मुकाम तक पहुँच जाने वाली है।
मैं भी यही चाह रही थी कि अभी उसकी चूत को ना टच करूँ..

और ऐसे ही उसकी चूत का पहला पानी निकाल दूँ।

मेरे हाथ उसकी नंगी जाँघों पर उसके बरमूडा के अन्दर तक उसकी चूत के इर्द-गिर्द रेंग रहे थे.. लेकिन उसकी चूत को टच नहीं कर रहे थे।
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रश्मि से जब बर्दाश्त ना हो पाया तो उसने अपना हाथ अपनी बरमूडा के ऊपर से अपनी चूत पर रखा और उसे दबाने लगी.. साथ ही मैंने भी उसके निप्पलों पर अपने होंठों का दबाव बढ़ा दिया। बल्कि अब मैं उसके निप्पलों को अपने दाँतों से हौले-हौले काटने भी लगी थी।
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तेज-तेज साँसों के साथ रश्मि के मुँह से तेज-तेज सिसकारियाँ भी निकल रही थीं.. जो कि पूरे कमरे ही क्या.. पूरे घर में गूँज रही थीं।
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कुछ क्षण के बाद ही रश्मि के जिस्म ने जैसे ज़ोरदार झटका सा खाया। उसके चेहरे के हाव-भाव भी चेंज हो गए और पूरे का पूरा जिस्म उसका अकड़ गया।
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मैं समझ गई कि रश्मि की चूत पहली-पहली बार पानी छोड़ रही है। मैंने उसके जिस्म को अपने जिस्म के साथ भींच लिया और थोड़ी ही देर में ही उसका जिस्म मेरी बाँहों की गिरफ्त में बिल्कुल ढीला हो गया।
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मैंने आहिस्ता आहिस्ता उसे चूमते हुए उसे रिलेक्स करना शुरू कर दिया। मैंने अपनी नज़र उसकी चूत पर डाली.. तो उसका बरमूडा उसकी चूत के ऊपर से गीला हो रहा था।
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मैंने उसकी बरमूडा को छुआ और फिर उसकी साइड से हाथ अन्दर ले जाकर उसकी चूत को छुआ.. तो रश्मि की कुँवारी चूत का कुँवारा पहला-पहला पानी मेरे हाथ पर लग गया।
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मैंने अपने हाथ को बाहर निकाला और उसकी चूत की पानी को अपनी नाक के पास ले जाकर सूंघा।

कभी ऐसा किसी के साथ ना करने के बावजूद भी मेरा दिल चाहा कि मैं उसे टेस्ट करके देखूँ.. जब मैं खुद को रोक ना पाई तो मैंने धीरे से अपनी गीली उंगलियों को चाट लिया।
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रश्मि ने अपनी आँखें खोलीं और मुझे अपनी उंगलयों को चाटते हुए देख कर बोली- भाभी.. क्या कर रही हैं यह?
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मैं मुस्कराई और उसकी चूत के पानी से चमकती हुई अपनी उंगलियाँ उसके चेहरे के पास ले जाती हुई बोली- देखो तुम्हारी चूत का पहला-पहला पानी निकला है.. उसे ही टेस्ट कर रही हूँ।
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मेरी बात सुन कर रश्मि के चेहरे पर शर्मीली सी मुस्कराहट फैल गई ।
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मैंने भी आहिस्ता आहिस्ता उसी गीली उंगली से उसके होंठों को सहलाना शुरू कर दिया और रश्मि को खुद उसकी अपनी चूत का पानी टेस्ट करवाने लगी।
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अपडेट 31

आपने अभी तक पढ़ा..
जब मैं खुद को रोक ना पाई तो मैंने धीरे से अपनी गीली उंगलियों को चाट लिया।
रश्मि ने अपनी आँखें खोलीं और मुझे अपनी उंगलयों को चाटते हुए देख कर बोली- भाभी..

क्या कर रही हैं यह?
मैं मुस्कराई और उसकी चूत के पानी से चमकती हुई अपनी उंगलियाँ उसके चेहरे के पास ले जाती हुई बोली- देखो तुम्हारी चूत का पहला-पहला पानी निकला है.. उसे ही टेस्ट कर रही हूँ।
मेरी बात सुन कर रश्मि के चेहरे पर शर्मीली सी मुस्कराहट फैल गई । मैंने भी आहिस्ता-आहिस्ता उसी गीली उंगली से उसके होंठों को सहलाना शुरू कर दिया और रश्मि को खुद उसकी अपनी चूत का पानी टेस्ट करवाने लगी।
अब आगे..

कुछ देर के लिए मैं और रश्मि इसी तरह से निढाल हालत में लेटे रहे। मेरी चूत की प्यास अभी तक नहीं बुझ पाई थी.. लेकिन मैंने खुद पर कंट्रोल कर लिया हुआ था और एक ही वक़्त में मैं रश्मि को बिल्कुल ओपन नहीं कर लेना चाहती थी.. शायद वो भी एक ही बार में सारे हदें को क्रॉस ना कर पाती इसलिए मैं बड़े ही आराम से अपनी बाँहों में लिए हुए उसके जिस्म को सहलाती रही। वो भी आँखें बंद करके मेरी बाँहों में पड़ी रही।
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उसने अपना टॉप भी ठीक करने की कोई कोशिश नहीं की और ना ही मैंने उसे उसकी चूचियों से नीचे किया।
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इस तरह से पड़े हुए उसकी नंगी चूचियों का नजारा बहुत खूबसूरत लग रहा था। उसके जिस्म को सहलाते रहने और ज़िंदगी के पहले ओर्गैज्म की वजह से उसे थोड़ी ही देर में नींद आ गई.. लेकिन मैं सो ही नहीं पाई।
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शाम की क़रीब 7 बजे जब मैं और रश्मि बैठे टीवी देख रहे थे.. तो अचानक से बादलों की गड़गड़ाहट शुरू हो गई और थोड़ी ही देर में झमाझम बारिश होने लगी। मैं और रश्मि दोनों ही पिछले आँगन में भागीं कि बारिश देखते हैं।
देखते ही देखते बारिश तेज होने लगी। मैंने कहा- रश्मि आओ बारिश में नहाते हैं।

रश्मि बोली- लेकिन भाभी यह नई ड्रेस खराब हो जाएगी.. जो हमने कल ही ली है।
मैंने कहा- हाँ.. कह तो तुम ठीक रही हो..
मैंने उसे आँख मारी और बोली- क्यों ना इसे उतार कर नहाते हैं।

रश्मि प्यार से मेरी बाज़ू पर मुक्का मारते हुई बोली- क्या.. भाभी आप पता नहीं कैसी-कैसी बातें करती रहती हो और पता नहीं आपको क्या होता जा रहा है.. अभी कुछ देर पहले भी आपने…!
मैं- लेकिन मेरी जान.. तुमको भी तो मज़ा आया था ना?
रश्मि शर्मा गई।

मैंने कहा- अच्छा चलो अन्दर आओ.. मेरे साथ कुछ सोचते हैं।

अपने कमरे में लाकर मैंने अल्मारी खोली और मेरी नज़र सूरज की स्लीबलैस सफ़ेद बनियान पर पड़ी..। मेरे दिमाग की घंटी बजी और मैंने फ़ौरन से दो बनियाने निकालीं और एक रश्मि की तरफ बढ़ाते हुए बोली- लो एक तुम पहन लो.. और एक मैं पहन लेती हूँ।
रश्मि हैरत से उस बनियान को देखते हुए बोली- भाभी यह कैसे पहनी जा सकती है.. यह तो काफ़ी खुली है और इसका तो गला भी काफ़ी खुला है..
मैंने उससे कहा- अब बातें ना कर और जल्दी से इसको चेंज करो।

मैंने उसकी टॉप को पकड़ कर ऊपर उठाया.. तो खामोशी से रश्मि ने अपने बाज़ू ऊपर कर दिए।

मैंने उसके टॉप को उतार कर बिस्तर पर फैंका और अब रश्मि मेरी नज़रों के सामने अपनी ऊपरी बदन से बिल्कुल नंगी खड़ी थी।
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मैंने जैसे ही उसकी चूचियों को नंगी देखा तो एक बार फिर आहिस्ता-आहिस्ता उसकी चूचियों को सहलाने लगी।
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मैंने उसकी चूचियों को अपनी मुठ्ठी में भर लिया और आहिस्ता-आहिस्ता उनको सहलाते हुए अपने होंठ उसके होंठों की तरफ बढ़ाए.. तो थोड़ा सा हिचकिचाते हुए रश्मि ने अपनी होंठ आगे कर दिए और मैंने उसकी होंठों को चूम लिया।
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फिर रश्मि ने मेरे हाथ से अपने भैया वाली बनियान छीनी और बोली- मैं खुद ही पहन लेती हूँ।
मैंने हँसते हुए उसे छोड़ दिया और रश्मि अपनी बनियान पहनने लगी।

मैंने भी अपनी वो नेट शर्ट उतारी और रश्मि के सामने मैं भी मम्मों की तरफ से नंगी हो गई।
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रश्मि ने पहली बार मेरी चूचियों को खुला देखा.. तो मुझसे दूर ना रह सकी।
रश्मि- वॉव.. भाभिईईई.. आपकी चूचियाँ.. ईस्स्स्स.. कितनी सेक्सीईई.. हैं..।

मैं धीरे से मुस्कराई और उसे अपने सिर और आँख के इशारे से अपनी चूचियों की तरफ आने को कहा।
रश्मि जल्दी से मेरे पास आई और आहिस्ता आहिस्ता मेरी चूचियों को सहलाने लगी।
उसकी उंगलियों ने मेरे निप्पलों को छुआ तो मेरे निप्पलों में भी अकड़न आने लगी।
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फिर खुद को रश्मि से अलग करके मैंने अपने नंगी जिस्म पर सिर्फ़ और सिर्फ़ वो खुली बनियान पहन ली और नीचे तो पेन्टी ही था।

मैंने खुद को आइने में देखा तो सच में मेरा गला काफ़ी खुला हुआ था और मेरी चूचियों भी गहराई तक नज़र आ रही थीं.. बनियान भी कुछ पतली कॉटन की थी.. जिसकी वजह से मेरे निप्पलों की जगह पर डार्क-डार्क हिस्सा दिख रहा था। इससे साफ़ पता चल रहा था कि मेरे निप्पल इस जगह पर हैं।
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रश्मि का भी यही हाल था.. हम दोनों ने जो सूरज की बनियाने पहन रखीं थीं.. वो लंबाई में हमारी हाफ जाँघों तक पहुँच रही थीं।

मैंने जब रश्मि को देखा तो मुझे एक और ख्याल आया। मैंने उसके सामने खड़े होकर अपने पैन्टी को नीचे को खींच दिया।
रश्मि का मुँह खुला का खुला रह गया।
मैंने अपनी एक दूसरी पैन्टी उठाई और उस बनियान की नीचे वो पहन ली।
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रश्मि- भाभी यह क्या कर रही हो आप..? क्या आप बारिश में नहाने ऐसे ही जाओगी..?
मैं- जी हाँ.. और सिर्फ़ मैं ही नहीं.. तुम भी..
यह कहते हुए मैंने रश्मि का बरमूडा भी खींच कर नीचे कर दिया और उससे बोली- चलो तुम भी इसके नीचे से अपनी पैन्टी पहन लो।
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रश्मि ने बेबसी से मेरी तरफ देखा और बोली- लेकिन भाभी ऐसे कैसे?

मैंने मुस्करा कर उसकी तरफ देखा और उसे कोई बात करने का मौका दिए बिना ही खींच कर बाहर लाई और फिर उसके कपड़ों में से एक पैन्टी उसे पहनने को दी और उसे चूत का ढक्कन पहना कर उसे आँगन में ले आई।

यहाँ पर अँधेरा भी हो रहा था और बारिश भी पहली से तेज हो चुकी हुई थी। हम दोनों जैसे ही बारिश में पहुँचे.. तो चंद मिनटों में ही हमारे जिस्म बिल्कुल गीले हो गए और हमारी बनियाने भीग कर हमारे जिस्मों के साथ चिपक गईं।
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अब ऐसा लग रहा था कि जैसे हम दोनों ने सिर्फ़ और सिर्फ़ वो बनियाने ही पहन रखी हैं और कुछ भी नहीं पहना हुआ है।
अब हम दोनों शरारतें कर रहे थे और एक-दूसरे को छेड़ रही थीं।
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मैंने शरारत से रश्मि के निप्पल को चुटकी में पकड़ कर मींजा और बोली- जानेमन तेरी चूचियाँ बड़ी प्यारी लग रही हैं..
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रश्मि ने भी फ़ौरन से ही मेरी चूची को मुठ्ठी में लेकर जोर से दबाया और बोली- भाभी.. आपकी भी तो पूरी नंगी ही नज़र आ रही हैं।
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मैं- सस्स्स.. ऊऊऊऊऊ.. ईईईई.. अरे ज़ालिम दबानी ही हैं चूचियाँ.. तो थोड़ा प्यार से दबा ना.. अपने भैया की तरह..
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रश्मि हंस पड़ी और बोली- भाभी आपको भैया की बड़ी याद आ रही है..
मैं- हाँ यार.. वो भी साथ में नहाते तो और भी मज़ा आ जाता।
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रश्मि बोली- लेकिन भाभी फिर तो मैं नहीं नहा सकती ना.. आप लोगों के साथ..

मैं- क्यों.. तुझे क्या है?
रश्मि- भाभी मेरा तो पूरा ही जिस्म नंगा हो रहा है.. मैं कैसे भैया के सामने??

मैं- अरे पहली बात तो यह है कि वो हैं नहीं यहाँ.. और अगर होते भी.. तो इस अँधेरे में कौन सा कुछ नज़र आ रहा है.. जो तेरे भैया को तेरा जिस्म नज़र आता। वैसे भी वो तेरे भैया ही हैं.. कौन सा कोई गैर मर्द हैं.. जो कि तुझे ऐसी हालत में देखेगा.. और तुझे कुछ नुक़सान पहुँचाने की सोचेगा।

मैं यह बात कहते हुए रश्मि के और क़रीब आ गई और उसकी आँखों में देखते हुए.. मैंने अपनी बनियान को अपने कन्धों से नीचे को सरकाना शुरू कर दिया।
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यूँ मैंने अपनी दोनों चूचियों को नंगा कर दिया.. रश्मि फ़ौरन ही आ गए बढ़ी और एक हात से मेरी चूचियों पर अपने हाथ रख कर और दूसरे हाथ से चुत को इधर-उधर ऊपर की तरफ मसलती हुई बोली- क्या कर रही हो भाभी.. किसी ने देख लिया तो??
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अपडेट 32

आपने अभी तक पढ़ा..

मैं- अरे पहली बात तो यह है कि वो हैं नहीं यहाँ.. और अगर होते भी.. तो इस अँधेरे में कौन सा कुछ नज़र आ रहा है.. जो तेरे भैया को तेरा जिस्म नज़र आता। वैसे भी वो तेरे भैया ही हैं.. कौन सा कोई गैर मर्द हैं.. जो कि तुझे ऐसी हालत में देखेगा.. और तुझे कुछ नुक़सान पहुँचाने की सोचेगा।
मैं यह बात कहते हुए रश्मि के और क़रीब आ गई और उसकी आँखों में देखते हुए..

मैंने अपनी बनियान को अपने कन्धों से नीचे को सरकाना शुरू कर दिया।
यूँ मैंने अपनी दोनों चूचियों को नंगा कर दिया.. रश्मि फ़ौरन ही आ गए बढ़ी और मेरी चूचियों पर अपने हाथ रख कर इधर-उधर ऊपर की तरफ मसलती हुई बोली- क्या कर रही हो भाभीजान.. किसी ने देख लिया तो??
अब आगे..

मैंने उसे खींच कर अपनी बाँहों में भरा और बोली- अरे इतने अँधेरे में कौन देखेगा हमें.. लेट्स एंजाय यार..
यह कहते हुए मैंने उसकी बनियान को भी नीचे को खींचा और उसकी चूचियों भी नंगी कर लीं।

अब जैसे ही मैंने उसके साथ अपने आप को चिपकाया.. तो रश्मि की चूचियों ने मेरी चूचियों के साथ रगड़ना शुरू कर दिया।
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अब हम दोनों खूबसूरत लड़कियों के जिस्म के ऊपरी हिस्से बिल्कुल नंगे हो रहे थे। रश्मि को भी जब मज़ा आने लगा.. तो उसने भी अपनी बाज़ू मेरी कमर के गिर्द कस ली और मुझे अपने सीने से दबा लिया।
धीरे-धीरे मैं उसकी नंगी कमर पर हाथ फेर रही थी और उसके होंठों को चूम रही थी।
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इस बार रश्मि ने पहल की और अपनी ज़ुबान मेरे होंठों के दरम्यान घुसेड़ दी और मुझे अपनी ज़ुबान चूसने का मौका दिया।
मैं भी अपनी कुँवारी ननद की ज़ुबान को अपने होंठों में लेकर चूसने लगी।
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उसकी ज़ुबान को चूसते और उसे किस करते हुए.. मैंने अपना एक हाथ उसकी कमर से हटा कर दोनों के जिस्मों के बीच में लाई और उसकी पैन्टी के अन्दर हाथ डाल दिया।
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फ़ौरन ही मेरे हाथ को रश्मि की चूत के ऊपर के जिस्म के बाल महसूस हुए थे, ये बहुत ही हल्के-हल्के रेशमी से बाल थे, मैं वहाँ से उसे सहलाते हुई आहिस्ता-आहिस्ता अपना हाथ उसकी चूत पर ले आई।

मेरी हाथों की उंगलियाँ मेरी ननद की कुँवारी अनछुई चूत को टकराईं.. तो मुझे बेहद मजा आ गया।
मैंने आहिस्ता आहिस्ता उसकी चूत के लबों और चूत की दाने को सहलाना शुरू कर दिया।
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रश्मि की चूत के दाने को सहलाते हुए मैं अपनी उंगली की नोक को उसकी चूत के सुराख पर रगड़ रही थी और कभी-कभी उंगली की नोक को थोड़ा सा उसकी चूत के अन्दर भी दाखिल कर देती थी।
‘ईसस्स.. स्स्स्मम्म्ह.. भाभिईईई… ईईईईई.. ईईईई.. उफफ.. उफफ्फ़..’ रश्मि की सिसकारियाँ निकल रही थीं।
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मैं उसकी चूत के सुराख के अन्दर अपनी उंगली की नोक को आगे-पीछे करते हुए बोली- ऊऊऊ.. ऊऊऊफ.. उफफ्फ़.. डार्लिंग.. असल मज़ा तो तुम्हें उस वक़्त आएगा.. जब तेरी चूत में लंड जाएगा..
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रश्मि- ऊऊऊ.. ऊऊऊहह… ऊऊ.. भाभिईईई.. ऐसी बातें ना करें.. प्लीज़्ज़्ज़्ज़..
मैं- क्यों.. तेरी चूत में कुछ होने लगता है क्या..

?

मुझे महसूस हो रहा था कि मेरी उंगली की हरकत की वजह से रश्मि की चूत गीली होती जा रही थी और मुझे भी उसकी चूत को सहलाने और उसे किस करने और उसकी ज़ुबान को चूसने में बहुत मज़ा आ रहा था।
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अभी हम यह बातें कर ही रहे थे कि दरवाजे पर घंटी बजी।
मैंने रश्मि की तरफ देखा.. तो वो फ़ौरन ही बोली- ना ना भाभी.. मैं नहीं जाऊँगी दरवाज़ा खोलने.. खुद ही जाओ और मैं अपने कमरे में जा रही हूँ।
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मैं हँसी और बोली- अच्छा बाबा मैं ही खोल आती हूँ..
मैं सहन(मकान के बीच का खुला छोड़ा हुआ भाग) से अन्दर गई और अन्दर जाकर सहन के दरवाजे को अन्दर से बंद कर दिया.. ताकि रश्मि अन्दर आ कर अपने कमरे में ना जा सके।

फिर मैं मुस्कराते हुए गेट खोलने चली गई।

दरवाज़ा खोला तो सूरज था.. जो कि बिल्कुल भीग कर आया हुआ था.. बाइक अन्दर खड़ी करके.. मुझे इस हालत में देखा.. तो फ़ौरन से मुझे अपनी बाँहों में दबोच लिया और मुझे चूमना शुरू कर दिया।
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वो मेरी चूचियों को दबाने और मसलने लगा..
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मैंने भी कोई विरोध नहीं की और उसके लण्ड पर हाथ रख कर उसे दबाने लगी।
मैंने सूरज की शर्ट पकड़ कर ऊपर उठाई और उसकी गले से निकाल दी। फिर उसकी पैन्ट की बेल्ट खोली और उसकी पैन्ट भी उतार दी।
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अब सूरज एक लूज से कॉटन शॉर्ट्स में था.. जो उसने नीचे पहना हुआ था।

मैंने सूरज के शॉर्ट्स के ऊपर से ही उसका लंड पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया.. जो कि पूरा अकड़ चुका हुआ था।
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मैंने नीचे बैठ कर सूरज के शॉर्ट्स को नीचे खींचा और उसका लंड उछाल कर बाहर निकल आया।
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वो फ़ौरन ही मुझे पीछे करते हुए बोला- अरे क्या कर रही हो.. रश्मि आ जाएगी।

मैंने उसके लण्ड के अगली हिस्से को चूमा और बोली- वो इधर नहीं आ सकती।

यह कहते हुए मैंने सूरज के लंड को अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसना शुरू कर दिया।
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मैं सूरज को उसकी बहन के पास ले जाने से पहले अच्छी तरह से गरम कर देना चाहती थी।
कुछ देर तक सूरज के लंड को चूसने के बाद मैंने कहा- आओ सूरज बाहर सहन में चलकर बारिश में नहाते हैं।

सूरज अपने लंड को वापिस अपने शॉर्ट्स में अन्दर करते हुए मेरे साथ चल पड़ा और बोला- रश्मि कहाँ है?
मैंने कहा- वो भी बाहर सहन में ही है।

सूरज एक लम्हे के लिए झिझका और फिर मेरे साथ चल पड़ा। मैंने सहन के दरवाजे की कुण्डी खोली और फिर हम दोनों पीछे सहन में आ गए।

रश्मि ने हमें देखा.. तो अपनी बाज़ू अपने सीने की उभारों पर लपेट लिए।
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बाहर बहुत ही कम रोशनी थी.. सूरज भी हमारी साथ ही नहाने लगा। लेकिन अभी तक कोई भी कुछ भी शरारत नहीं कर रहा था।

सूरज का पूरा जिस्म बिल्कुल ही नंगा था और नीचे जो कॉटन शॉर्ट्स पहने हुए था..

उसमें से उसके लण्ड का शेप भी साफ़ दिख रहा था।
रश्मि का जिस्म भी सूरज की सफ़ेद पतली कॉटन बनियान में से बिल्कुल साफ़ दिख रहा था।
जैसे ही वो दूसरी तरफ मुँह करती और उसकी कमर नज़र आती.. तो उसकी कमर बिल्कुल ही नंगी लगती थी। नीचे उसकी जाँघें भी और मेरी जाँघें भी पूरी नंगी हो रही थीं। लेकिन सामने से वो अपनी चूचियों को नहीं देखा रही थी।
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लेकिन ज़ाहिर है कि मैं ऐसा नहीं कर रही थी और अपना पूरा जोबन उन दोनों बहन-भाई के सामने गीली बनियान में एक्सपोज़ कर रही थी.. जिसकी वजह से भी सूरज को मस्ती आती जा रही थी।

अचानक से ही बारिश की तेज होने की वजह से इलाके की लाइट चली गई.. और बिल्कुल ही घुप्प अँधेरा हो गया।
बस हल्की सी रोशनी हो रही थी।

सूरज की नजरें अपनी बहन की नंगे हो रहे जिस्म पर से नहीं हट पा रही थीं।
अपनी सग़ी बहन की चूचियाँ.. उसके निप्पलों को.. उसका दूधिया क्लीवेज और उसकी नंगी जाँघों का हसीन नजारा उसके सामने था।
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सब कुछ जानते हुए भी वो खुद की नज़रों को रोक नहीं पा रहा था। दूसरी तरफ मैं देख रही थी कि रश्मि की नजरें भी बार-बार सूरज के जिस्म के निचले हिस्से की तरफ उसके शॉर्ट्स पर जा रही थीं। जिसमें उसे अपने भाई का अकड़ा हुआ लंड बिल्कुल साफ़-साफ़ दिख रहा था।

दोनों बहन-भाई के जिस्मों में एक-दूसरे के लिए बढ़ती हुई प्यास को मैं बहुत गौर से देख रही थी। इस सबसे मुझे एक अजीब सी खुशी और उत्तेजना मिल रही थी।

कुछ देर ऐसे ही एंजाय करने के बाद मैंने कहा- सूरज .. आओ कुछ गेम खेलते हैं।
रश्मि बोली- कौन सा गेम भाभी?

मैंने कहा- सूरज की आँखों पर पट्टी बाँधते हैं.. और वो फिर हम दोनों को पकड़ेगा और फिर पहचानने की भी कोशिश करेगा कि दोनों में से जिसे पकड़ा है.. वो कौन है और हम लोग बिना कुछ बोले उससे खुद को छुडाने को कोशिश करेंगे.. अगर ना छुड़ा सके या कोई बोल पड़ा.. तो फिर पकड़ने की उसकी बारी होगी।

ज़ाहिर है कि यह एक बिल्कुल ही चुतियापे सा गेम था.. क्योंकि चाहे आँखें बंद हों.. फिर भी सूरज आसानी के साथ हम दोनों के जिस्मों में फरक़ कर सकता था। लेकिन सूरज फ़ौरन से मान गया.. क्योंकि उसे भी शायद इसमें मिलने वाले मजे का अंदाज़ा हो गया था।

अपडेट 33

आपने अभी तक पढ़ा..

मैंने कहा- सूरज की आँखों पर पट्टी बाँधते हैं.. और वो फिर हम दोनों को पकड़ेगा और फिर पहचानने की भी कोशिश करेगा कि दोनों में से जिसे पकड़ा है.. वो कौन है और हम लोग बिना कुछ बोले उससे खुद को छुड़ाने को कोशिश करेंगे.. अगर ना छुड़ा सके या कोई बोल पड़ा.. तो फिर पकड़ने की उसकी बारी होगी।

ज़ाहिर है कि यह एक बिल्कुल ही चुतियापे सा गेम था.. क्योंकि चाहे आँखें बंद हों.. फिर भी सूरज आसानी के साथ हम दोनों के जिस्मों में फरक़ कर सकता था।

लेकिन सूरज फ़ौरन से मान गया.. क्योंकि उसे भी शायद इसमें मिलने वाले मजे का अंदाज़ा हो गया था।
अब आगे..

वो मेरी बेवक़ूफी पर हंस रहा था कि मैं कैसा बच्चों वाला खेल खेलने को कह रही हूँ। जबकि वो उस बच्चों वाले गेम में भी अडल्ट्स वाला मज़ा लूटने के चक्कर में था।
लेकिन रश्मि थोड़ा झिझक रही थी। मैंने अन्दर से एक दुपट्टा लाकर सूरज की आँखों पर बाँध दिया और बोली- रश्मि, अब हम में से कोई भी कुछ नहीं बोलेगा।
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जैसे ही खेल शुरू हुआ.. तो मैं और रश्मि उस छोटी सी सहन में इधर-उधर भागने लगे और सूरज अपने हाथ फैलाकर हमें पकड़ने की कोशिश कर रहा था।
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मैंने जानबूझ कर खुद को सूरज की गिरफ्त में दे दिया और फिर खुद को उसकी गिरफ्त से निकालने लगी।

सूरज ने बड़े ही एतिहात से मुझे मेरी बाज़ू से पकड़ा हुआ था लेकिन मैं खुद को बचाने के चक्कर में अपनी चूचियों को उसकी सीने से रगड़ रही थी।
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फिर मैंने अपनी साइड चेंज करते हुए अपनी कमर उसकी सीने से लगाई और अपने चूतड़ों को उसके लण्ड पर अपने गाण्ड को रगड़ने लगी और मेरे हिलते चूतड़ कुछ ऐसे दिख रहे थे
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सूरज चिल्ला रहा था- रश्मि.. रश्मि.. है यह.. रश्मि तुम अब पकड़ी गई हो!

लेकिन मैंने उससे खुद को छुड़ाने की कोशिश की..
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तो मेरे पेट पर पड़ा हुआ उसका हाथ मेरी चूचियों पर आ गया।
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मैंने हाथ पीछे ले जाकर उसके लण्ड को उसके शॉर्ट्स के ऊपर से पकड़ लिया और उसका लंड एकदम से खड़ा हो गया।

वो समझ गया कि यह रश्मि नहीं मैं हूँ, उसने भी मेरी चूचियों को दबोच लिया और फिर मसलने लगा।
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मैंने रश्मि की तरफ देखा तो वो पास ही खड़ी हुई हंस रही थी।
मैंने अब अचानक से हमला करते हुए खुद को छुड़ा लिया और सूरज की गिरफ्त से एकदम निकल गई।

अब सूरज आगे को झपटा और बजाए इस कोशिश के कि मैं उसकी पकड़ में आती.. उसकी अपनी बहन रश्मि उसकी पकड़ में आ गई।

सूरज फ़ौरन ही यह समझा कि यह मैं ही हूँ.. जो कि उसकी गिरफ्त से निकलने लगी थी.. तो उसने दोबारा से जोर से पकड़ लिया।

जब कि रश्मि इस अचानक के हमले से घबरा गई.. लेकिन वो बोल भी नहीं सकती थी। बस खुद को अपने भाई की गिरफ्त से छुड़ाने लगी।

सूरज अपने एक हाथ की गिरफ्त से उसके पेट और दूसरे हाथ को उसकी चूची पर जमाते हुए बोला- अब नहीं निकलने दूँगा तुझे.. बड़ी मछली की तरह फिसल कर निकलने लगी थी ना.. मेरी गिरफ्त से.. अब निकल कर दिखा..
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उसने अपने हाथ से अपनी बहन की चूचियों को दबाना शुरू कर दिया।
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रश्मि के मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थीं.. लेकिन वो अपनी आवाज़ को दबा रही थी।
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रश्मि सूरज की बाँहों में मचल रही थी, सूरज ने अपना हाथ रश्मि के पेट पर रखा हुआ हाथ..

उसकी बनियान के नीचे डाला और उसके नंगे पेट पर अपना हाथ ऊपर को फिराता हुआ सीधे उसकी नंगी चूची पर ले गया और अपनी बहन की नंगी चूची को पकड़ लिया।
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रश्मि ने घबरा कर मेरी तरफ देखा तो मैंने उसे उंगली अपने होंठों पर रख कर चुप रहने का इशारा किया।
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उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे।
सूरज.. उसका अपना सगा बड़ा भाई अपनी बीवी के सामने उसकी गीली बनियान के नीचे हाथ डाल कर.. उसकी नंगी चूचियों को दबा रहा था।
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सूरज ने उसे और भी मजबूती से जकड़ते हुए.. उसकी कमर को अपने लौड़े के साथ चिपकाया और उसकी चूचियों को मसलते हुए उसकी गर्दन पर अपने होंठों रख कर चूमते हुए बोला- डार्लिंग पकड़ी गई हो ना.. अब निकल कर दिखाओ। बस अब रश्मि रह गई है अभी.. इसके बाद उसे पकड़ लूँगा तो मैं जीत जाऊँगा।
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सूरज ने आहिस्ता आहिस्ता उसकी गर्दन को चूमना शुरू कर दिया और शायद वो अपनी उंगलियों से रश्मि के निप्पलों को भी मसल रहा था।
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मैं सूरज के पीछे से उसके थोड़ा क़रीब गई.. और बिना उसके जिस्म को छुए हुए.. उसका एक हाथ पकड़ कर नीचे को खींचा.. ऐसा कि रश्मि को अँधेरे में पता ही नहीं चल पाया और सूरज समझा कि यह मैं हूँ.. जो उसकी गिरफ्त में हूँ और हाथ नीचे लौड़े की तरफ लिए जा रही हूँ।

मैंने सूरज का हाथ रश्मि के बरमूडा के ऊपर से उसकी चूत पर रख दिया।
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सूरज बोला- इस बारिश में बड़ी मस्ती सूझ रही है तुझे डार्लिंग..
यह कह कर उसने रश्मि की चूत को उसकी पैन्टी की ऊपर से रगड़ना शुरू कर दिया।
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एक बात थी कि यह तो मुमकिन नहीं था कि सूरज को मेरे और रश्मि की जिस्म के फ़र्क़ का अहसास ना हुआ हो। लेकिन अगर उसे पता चल भी गया था तो अब वो इस अँधेरे में और गेम का फ़ायदा उठाते हुए अपनी बहन के जिस्म के मजे लेना चाह रहा था।
मैं भी उसे रोकना नहीं चाह रही थी।

अब सूरज ने अपना हाथ रश्मि की पैन्टी की इलास्टिक से अन्दर डाला और अपना हाथ उसकी नंगी चूत पर रख दिया और उसे आहिस्ता आहिस्ता दबाने लगा।
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सूरज की इस हरकत की वजह से रश्मि और भी परेशान हो गई.. उसे नहीं पता था कि मैं यह सब देख रही हूँ लेकिन फिर भी उसे डर था कि कहीं मैं ना देख लूँ।

सूरज ने अपनी कुँवारी बहन की चूत को अच्छी तरह से रगड़ा और इसी वजह से उसकी गिरफ्त जरा ढीली हुई.. तो रश्मि फ़ौरन ही उसकी बाँहों से फिसल गई और दूर होकर बोली- बस भाभी अब गेम खत्म।

मैं मुस्कराई और उसकी तरफ बढ़ी.. इतने में लाइट भी आ गई। मैंने देखा कि रश्मि की हालत खराब हो रही थी। उसकी साँस फूल रही थी और उसकी चूचियाँ भी तेज़ी के साथ ऊपर-नीचे हो रही थीं।
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सूरज ने भी अपनी आँखों पर बँधा दुपट्टा खोल दिया और फिर हम दोनों की तरफ हैरत से देखने लगा।

मैंने कहा- सूरज.. अब तो बारिश भी खत्म हो गई है.. चलो अन्दर ही चलते हैं।
रश्मि भी अपने जिस्म को छुपाते हुए अन्दर आ गई।

मैं और सूरज दोनों एक साथ ही बाथरूम में नहाने के लिए घुस गए और ऊँची आवाज़ में मस्तियाँ करते हुए नहाने लगे। सारी आवाजें बाहर रश्मि के कानों तक जा रही थीं।

थोड़ी देर में रश्मि ने नॉक किया और बोली- भाभी आप लोग निकल भी आओ.. मुझे भी नहाना है।
मैंने थोड़ा सा दरवाज़ा खोला और बोली- डार्लिंग आ जाओ तुम भी.. हमारे साथ ही नहा लो।
रश्मि बोली- जी नहीं.. शुक्रिया.. आप लोगों का।

हम दोनों ही अन्दर हँसने लगे।

कुछ देर में रश्मि भी नहा ली और हम दोनों ने फिर से वो ही नेट शर्ट बिना ब्रेजियर के पहन ली और इस बार बिना मेरी कहे ही रश्मि ने वो शर्ट बिना ब्रा के पहनी और बड़े आराम से अपने भाई के सामने आ गई।
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अब वो सूरज के सामने और भी ज्यादा घबरा रही थी.. क्योंकि आज उसका भाई उसकी नंगी चूचियों को और चूत को भी मसल चुका था।

रात का खाने खाते हुए भी सूरज अपनी बहन की चूचियों को भी देखना चाह रहा था। वो उनको अपने भाई की नजरों से छुपा रही थी.. शरम से नहीं.. बल्कि अपने भैया को टीज़ करने के लिए।

अब मुझे रात का इन्तजार था कि रात को क्या होगा।

Update- 34
आपने अभी तक पढ़ा..

कुछ देर में रश्मि भी नहा ली और हम दोनों ने फिर से वो ही नेट शर्ट बिना ब्रेजियर के पहन ली और इस बार बिना मेरी कहे ही रश्मि ने वो शर्ट बिना ब्रा के पहनी और बड़े आराम से अपने भाई के सामने आ गई।
अब वो सूरज के सामने और भी ज्यादा घबरा रही थी.. क्योंकि आज उसका भाई उसकी नंगी चूचियों को और चूत को भी मसल चुका था।

रात का खाने खाते हुए भी सूरज अपनी बहन की चूचियों को भी देखना चाह रहा था। वो उनको अपने भाई की नजरों से छुपा रही थी.. शरम से नहीं.. बल्कि अपने भैया को टीज़ करने के लिए।
अब मुझे रात का इन्तजार था कि रात को क्या होगा।

अब आगे..
क्योंकि अब तो सूरज और भी खुल गया हुआ था और रात भी पूरी बाक़ी थी।
डिनर के बाद अभी सूरज टीवी पर कोई न्यूज़ शो देख रहा था कि मैंने रश्मि का हाथ पकड़ा और उसे बेडरूम में ले आई और बत्तियाँ बुझा कर दोनों बिस्तर पर लेट गए, मैंने रश्मि को बीच में ही लिटाया था।

रश्मि को सूरज की तरफ मुँह करके मैंने उसे अपनी बाँहों में खींचा और उसके होंठों पर चुम्बन करते हुए बोली- आज तो तुझे तेरी भाई ने ही रगड़ दिया यार..
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रश्मि शरमाते हुए- हाँ भाभी.. शायद वो आपके चक्कर में मुझे पकड़ बैठे थे और यही समझे कि यह मैं नहीं.. आप हो।

मैं- वैसे तेरी कुँवारी चूचियों को बड़ी जोर-जोर से मसल रहा था।
मैंने उसकी चूचियों पर उसके टॉप के ऊपर से हाथ फेरते हुए कहा।
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रश्मि शर्मा रही थी- भाभी ना करो ना ऐसी बातें..
मैंने धीरे से रश्मि के टॉप को नीचे सरकाया और उसकी चूची को बाहर निकाल लिया।

रश्मि की खूबसूरत सुडौल चूची मेरी सामने थी। मैंने उसके निप्पल के ऊपर आहिस्ता आहिस्ता उंगली फेरनी शुरू कर दी।
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रश्मि- भाभी ना करो.. अभी भैया आ जायेंगे।

मैंने उसकी बात अनसुनी करते हुए उसके निप्पल को अपने मुँह में ले लिया और आहिस्ता आहिस्ता उसे चूसने लगी। धीरे-धीरे उसके निप्पलों को काटा.. तो रश्मि के होंठों से सिसकारियाँ निकलने लगीं।
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मैंने एक हाथ उसकी जाँघों पर फेरते हुए नीचे उसके शॉर्ट्स में ले जाकर उसकी चूत पर रख दिया। रश्मि ने फ़ौरन ही मेरा हाथ अपनी जाँघों की बीच दबा लिया।
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मैंने रश्मि की चूत के होंठों को आहिस्ता आहिस्ता सहलाना शुरू कर दिया.. जैसे ही मेरी उंगली की नोक उसकी कुँवारी चूत के सुराख से टच हुई तो मुझे उसमें से निकलते हुए चिकने पानी का अहसास हुआ।

मैं समझ चुकी थी कि रश्मि की चूत गीली हो चुकी है और वो पूरी तरह से गर्म हो रही है।
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थोड़ा सा जोर लगाते हुए मैंने अपनी उंगली की नोक रश्मि की चूत के सुराख के अन्दर दाखिल की, तो रश्मि ने एक तेज सिसकारी के साथ अपनी दोनों जाँघों को खोल दिया।

मैंने अपनी उंगली की सिर्फ़ नोक को रश्मि की चूत के अन्दर-बाहर हरकत देनी शुरू कर दी। रश्मि तड़पने लगी और अपने जिस्म को मेरे साथ भींच लिया।
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रश्मि सिसकी- भाभिईईई.. इसस्स्स.. पूरी उंगली अन्दर डालोऊऊ.. न प्लीज़..

मैंने उसके गालों को आहिस्ता आहिस्ता चूमा और उसके गालों पर अपनी ज़ुबान फेरते हुए बोली- मेरी जान तुम्हें इस उंगली की नहीं.. इस चूत में एक मोटे लंड की ज़रूरत है।
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रश्मि बंद आँखों के साथ- इसस्स्स.. नहींईई.. भाभीईईई.. कुछ करो..ऊऊऊ..

रश्मि अपनी चूत को मेरी उंगली पर आगे-पीछे कर रही थी और मेरी उंगली को अपनी चूत में पूरा लेने के लिए तड़फ रही थी। लेकिन मैं अपनी उंगली को आगे नहीं कर रही थी।

मैं- डार्लिंग.. तेरी चूत की प्यास तो सिर्फ़ तेरे भैया का लंड ही बुझा सकता है.. म्म्म्मय… ले ले उसका लंड अपनी चूत में और बुझा ले अपनी कुँवारी चूत की प्यास..।

रश्मि- नहींईईईई.. भाभिईई.. यह कैसे हो सकता हैएएए.. आह.. आअहह…
अभी हम कुछ और भी करते लेकिन बाहर टीवी बंद हुआ और फिर बेडरूम का दरवाज़ा खुल गया और सूरज अन्दर आ गया।
मैंने आहिस्ता से रश्मि से कहा- बस अब मत बोलना और बस तुम सोते रहना।

रश्मि ने एक नज़र मेरी तरफ देखा और फिर अपनी आँखें बंद कर लीं। मैंने उसकी चूची को उसकी शर्ट की अन्दर भी नहीं किया था और वैसे ही उसकी शर्ट से उसकी एक चूची बाहर थी.. जैसे सोते में बाहर निकल आई हो।
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मैंने अपना हाथ उसकी चूत से पीछे ज़रूर कर लिया था.. लेकिन अभी भी मेरा हाथ उसके पेट पर ही था।

दरवाज़ा बंद करके सूरज अन्दर आया तो दोबारा से कमरे में अँधेरा हो गया।

सूरज ने अपनी मोबाइल की छोटी सी टॉर्च ऑन की और बिस्तर की तरफ आने लगा। जैसे ही उसने बिस्तर पर अपने लिए जगह देखने के लिए हमारे जिस्मों पर टॉर्च की रोशनी डाली.. तो उसकी नज़र अपनी बहन की नंगी चूची पर पड़ी.. जो कि उसकी शर्ट से बाहर निकली हुई थी और बिल्कुल साफ़ नज़र आ रही थी।

एक लम्हे के लिए तो सूरज के पैर अपनी जगह पर ही थम गए और फिर उसने मेरे और रश्मि के चेहरे पर नज़र डाली.. ताकि वो देख सके कि हम दोनों सो रही हैं या जाग रही हैं।

सूरज की तरफ मेरी पीठ थी.. जबकि उसकी अपनी बहन का मुंह मेरे और सूरज की तरफ था।

सूरज चलता हुआ बिस्तर के दूसरी तरफ आया और मैंने थोड़ी सी आँखें खोल कर देखा.. तो उसने अपना हाथ अपने लंड पर रखा हुआ था.. जो कि पूरी तरह से सख़्त हो रहा था।
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अपनी मुट्ठी में अपने लंड को लेकर वो आहिस्ता आहिस्ता आगे-पीछे कर रहा था और उसकी नज़र अपनी बहन के ऊपर ही थी।

सूरज- रश्मि.. जान.. तुम दोनों ही इतनी जल्दी सो गईं क्या?
सूरज ने हम दोनों को चैक करने के लिए आवाजें दीं और फिर आहिस्ता से बिस्तर पर रश्मि के पीछे लेट गया।
अपनी सग़ी बहन को इस हालत में नंगी देखने के बाद उसे नींद कहाँ आने वाली थी। अपनी बहन के पीछे लेट कर कोहनी के बल उठा और टॉर्च की रोशनी रश्मि की चूची पर डालने लगा।

कुछ मेरे चूसने से और कुछ अपने भाई के सामने खुल्ला होने के अहसास से रश्मि का निप्पल पूरी तरह से अकड़ा हुआ था।

उस अँधेरे में मैं देख रही थी कि सूरज ने थोड़ा सा झुक कर अपने होंठों को अपनी बहन के नेकेड कन्धों पर रखा और आहिस्ता से उसे चूम लिया।
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रश्मि को चूम कर वो फ़ौरन ही पीछे हट गया। लेकिन जब कुछ देर तक रश्मि की तरफ से कोई हलचल नहीं हुई.. तो उसकी हिम्मत बढ़ी और उसे यक़ीन हो गया कि वो सो रही है।

सूरज ने दोबारा से अपनी प्यासे होंठ रश्मि के नंगे मुलायम कन्धों पर रखे और फिर आहिस्ता-आहिस्ता उसे चूमने लगा। उसकी नज़र अब भी रश्मि की नंगी चूची पर ही टिकी थी। सूरज का एक हाथ उसके बाज़ू को सहला रहा था और फिर वो ही हाथ आहिस्ता आहिस्ता सरकता हुआ नीचे को आकर उसकी नंगी चूची की तरफ बढ़ने लगा।
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फिर मेरी नज़रों ने वो नजारा देख लिया जिसके लिए मैं इतना इन्तजार कर रही थी। सूरज का हाथ अपनी बहन की नंगी चूची पर पहुँच गया।

सूरज ने अपनी बहन की नंगी छाती को आहिस्ता आहिस्ता अपने हाथ से सहलाना शुरू कर दिया। उसकी उंगलियां रश्मि के निप्पल से टच होने लगीं।
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थोड़ा सा आगे को झुक कर सूरज ने अपने होंठ रश्मि के गाल पर रखे और उसे आहिस्ता आहिस्ता चूमने लगा।
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रश्मि के चेहरे की हालत भी मेरी आँखों की सामने थी.. उससे बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था। आख़िर जब उससे कंट्रोल ना हो सका तो उसने बंद आँखों के साथ ही करवट बदली और सीधी हो गई।

सूरज ने फ़ौरन ही अपना हाथ उसकी चूची से हटा लिया और रश्मि ने भी जैसे नींद में ही होते हुए अपने टॉप को ठीक किया और अपनी चूची को अपने टॉप के अन्दर कर लिया।
सूरज सीधा होकर लेट चुका था।

Update- 35
आपने अभी तक पढ़ा..
थोड़ा सा आगे को झुक कर सूरज ने अपने होंठ रश्मि के गाल पर रखे और उसे आहिस्ता-आहिस्ता चूमने लगा। रश्मि के चेहरे की हालत भी मेरी आँखों की सामने थी.. उससे बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था। आख़िर जब उससे कंट्रोल ना हो सका तो उसने बंद आँखों के साथ ही करवट बदली और सीधी हो गई। सूरज ने फ़ौरन ही अपना हाथ उसकी चूची से हटा लिया और रश्मि ने भी जैसे नींद में ही होते हुए अपने टॉप को ठीक किया और अपनी चूची को अपने टॉप के अन्दर कर लिया।

सूरज सीधा होकर लेट चुका था।
अब आगे..

लेकिन ज़ाहिर है कि ज्यादा देर तक रुकने वाला वो भी नहीं था। कुछ समय ही इन्तजार करने के बाद उसने दोबारा से अपना हाथ रश्मि की चूची के ऊपर रख दिया और कुछ पल बाद दोबारा से उसे सहलाने लगा।
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आहिस्ता आहिस्ता उसने दोबारा से अपनी बहन के टॉप को नीचे खींचा और फिर अपनी सग़ी छोटी बहन की कुँवारी चूची को बाहर निकाल लिया।
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उसने रश्मि की तरफ ही करवट ली हुई थी और यक़ीनन उसका लंड अपनी बहन की जाँघों से टकरा रहा था।

रश्मि की चूची एक बार फिर से सूरज की नज़रों के सामने नंगी हो गई थी। सूरज वहीं पर नहीं रुका और फिर दूसरी चूची को भी बाहर निकाल लिया। वो कमरे में हो रहे अँधेरे का पूरा-पूरा फ़ायदा उठा रहा था और अपने मोबाइल की टॉर्च से रश्मि के नंगे जिस्म को देख रहा था।
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दूसरी तरफ रश्मि भी खामोशी से पड़ी हुई थी। उसकी बाज़ू साइड में सीधा था मेरे बिल्कुल पास और उसने मेरा हाथ थाम रखा था।

जैसे-जैसे सूरज रश्मि की नेकेड चूचियों पर हाथ फेर रहा था.. वैसे-वैसे ही रश्मि मेरे हाथ को जोर से दबा रही थी जिससे मुझे उसकी हालत का अंदाज़ा हो रहा था।
मैं भी उसके हाथ को आहिस्ता आहिस्ता दबाते हुए उसे हौसला दे रही थी कि वो चुप रहे।
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सूरज थोड़ा ऊँचा होकर रश्मि के सीने पर झुका और उसकी नेकेड चूची को चूम लिया। रश्मि खामोश रही तो सूरज ने अपनी ज़ुबान बाहर निकाली और सूरज की चूची के गुलाबी निप्पल को अपनी ज़ुबान की नोक से छूने लगा।

सूरज के जिस्म में एक झुरझुरी सी दौड़ गई। सूरज आहिस्ता आहिस्ता अपनी बहन के निप्पल को अपनी ज़ुबान से सहला रहा था और उसे छेड़ रहा था।

कुछ देर तक अपनी ज़ुबान से रश्मि के निप्पल के साथ खेलने के बाद सूरज ने रश्मि के गुलाबी निप्पल को अपने होंठों के बीच ले लिया और आहिस्ता आहिस्ता उसे चूसने लगा।
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उसका दूसरा हाथ रश्मि के नंगे पेट से होता हुआ उसके शॉर्ट्स के ऊपर से उसकी चूत पर आ गया और मुझे उसके हाथों की हरकत नज़र आने लगी।
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इसी के साथ ही रश्मि के हाथ की गिरफ्त मेरे हाथ पर भी सख़्त हो गई। मुझे सूरज का हाथ हरकत करता हुआ नज़र आ रहा था और मुझे यह भी पता था कि जब सूरज मेरी चूत पर इसी तरह से मेरी पैंटी के ऊपर से सहलाता है..
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तो कितना मज़ा आता है।
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मुझे रश्मि की हालत का अंदाज़ा भी हो रहा था कि बेचारी कुँवारी चूत.. कुँवारी लड़की.. कितनी मुश्किल से यह सब बर्दाश्त कर रही होगी।
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सूरज ने अपनी बहन के निप्पल को चूसते हुए आहिस्ता-आहिस्ता अपना हाथ रश्मि के शॉर्ट्स के अन्दर डालने की कोशिश की और उसका हाथ उसके शॉर्ट्स की इलास्टिक के नीचे सरकता हुआ अन्दर दाखिल हुआ।
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जैसे ही उसका हाथ रश्मि की चूत से टच हुआ.. तो रश्मि के बर्दाश्त की हद खत्म हो गई और फ़ौरन ही उसने अपना हाथ उठा कर सूरज के हाथ पर रख दिया और साथ ही सिसक पड़ी- नहीं.. भैया… आआआ.. प्लीज़्ज़्ज़्ज़..

रश्मि ने बहुत ही धीमी आवाज़ से कहा तो सूरज तो जैसे एक सेकंड के लिए चौंक गया कि यह क्या हुआ कि उसकी बहन जाग गई है और उसने अपने भाई के हाथ को अपनी चूत पर पकड़ लिया है।

सूरज के मुँह से रश्मि का निप्पल सरक़ चुका था.. लेकिन उसके होंठ अभी भी उसके निप्पलों से टच कर रहे थे।
सूरज को महसूस हुआ कि अब वापसी का रास्ता नहीं है।
कुछ समय के बाद सूरज ने अपना हाथ रश्मि के हाथ से छुड़ाए बिना ही आहिस्ता आहिस्ता हिलाते हुए रश्मि की चूत को सहलाना शुरू कर दिया।

रश्मि- नहीं भाई.. प्लीज़.. ऐसा नहीं करो… ऊ.. इस्स्स.. आआहह..
सूरज ने दोबारा से अपनी बहन के नंगे निप्पल को अपने होंठों के बीच ले लिया और उसे चूसते हुए धीरे से बोला- श्ह.. चुप रहो.. बसस्स्स..

सूरज के होंठ दोबारा से अपनी बहन के निप्पल को चूसने लगे और उसके हाथ की उंगली शायद उसकी चूत से खेल रही थी। शायद उसकी चूत के सुराख पर भी क़ब्ज़ा जमा चुकी थी.. क्योंकि रश्मि के हाथ की गिरफ्त मेरे हाथ पर सख़्त होती जा रही थी।
मैं भी उसके हाथ को आहिस्ता-आहिस्ता सहलाते हुए उसे हौसला दिए जा रही थी।

सूरज ने जैसे ही अपनी उंगली उसकी चूत के अन्दर सरकाई तो रश्मि तड़फ उठी।
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रश्मि- उफफफ..भाई…आहह.. नहीं..ईईई..प्लीज़्ज़्ज़्ज़… भाभीईईई..।

सूरज- तुम जरा चुप रहो.. तुम्हारी भाभी ना उठ जाए कहीं..

सूरज ने अपनी उंगली रश्मि की चूत से बाहर निकाली और उसे रश्मि के शॉर्ट्स से बाहर निकाल कर अपने मुँह में डाल लिया और अपनी बहन की चूत की पानी को चाटने लगा।
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रश्मि ने अपनी आँखें अभी भी बंद ही की हुई थीं.. लेकिन अब सूरज को इससे कोई घबराहट नहीं थी कि उसकी बहन की आँखें खुली हैं कि बंद.. क्योंकि उसे पता था कि वो जाग रही है।
सूरज- रश्मि.. यू आर सो स्वीट.. बहुत मीठा है तेरा पानी..
‘भाई प्लीज़ छोड़ दें मुझे.. यह ठीक नहीं है..उम्म्म्म स्स्स्साआहह..

’

सूरज ने कुछ कहे बिना ही थोड़ा सा ऊपर होकर अपने होंठ रश्मि के होंठों के ऊपर रख दिए और उसे चूमने लगा।
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रश्मि अपने होंठों को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी और ऐसे करते हुए अपने होंठों को पीछे हटा रही थी। लेकिन सूरज ने अपना एक हाथ रश्मि की नंगी चूची पर रखा और ऊपर रश्मि के होंठ को अपने होंठों में जकड़ लिया और उसे चूसने लगा।
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रश्मि का बुरा हाल हो रहा था.. वो यह भी नहीं चाह रही थी कि उसके भैया पर मेरी हालत खुले और उसके भाई को पता चले कि मैं भी जाग रही हूँ और इस बात से वाक़िफ़ हूँ.. जो कुछ उन दोनों बहन भाई के बीच हो रहा है।

रश्मि ने अपने भाई का हाथ अपनी चूची से हटाया तो सूरज ने फ़ौरन ही अपना हाथ नीचे करते हुए रश्मि के शॉर्ट्स में डाल दिया और अपनी मुठ्ठी में रश्मि की चूत को पकड़ लिया..
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रश्मि अब मछली की तरह से सूरज के हाथों में तड़फ रही थी और अपनी हरकत को कम से कम रखना चाह रही थी.. ताकि मेरा जिस्म ने हिले।

अचानक सूरज ने रश्मि का बाज़ू पकड़ कर अपनी तरफ करवट दिला दी और उसे अपनी बाँहों में ले लिया। उसकी नंगी कमर पर अपने हाथ मज़बूती से जमा कर अपने होंठ उसकी पतले सुराहीदार गले पर रख दिए।
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फिर वो आगे बढ़कर अपनी बहन के होंठों को चूमते हुए उसे चूसने लगा।
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रश्मि का बुरा हाल हो रहा था। नीचे से सूरज का लंड अकड़ कर उसकी चूत पर टक्करें मार रहा था और उसके शॉर्ट्स को फाड़ते हुए उसकी चूत के अन्दर तक घुसने की कोशिश में लग रहा था।

Update- 36
आपने अभी तक पढ़ा..
अचानक सूरज ने रश्मि का बाज़ू पकड़ कर अपनी तरफ करवट दिला दी और उसे अपनी बाँहों में ले लिया। उसकी नंगी कमर पर अपने हाथ मज़बूती से जमा कर अपने होंठ उसकी पतले-पतले गुलाबी होंठों पर रख दिए।
अब वो अपनी बहन के होंठों को चूमते हुए उसे चूसने लगा। रश्मि का बुरा हाल हो रहा था। नीचे से सूरज का लंड अकड़ कर उसकी चूत पर टक्करें मार रहा था और उसके शॉर्ट्स को फाड़ते हुए उसकी चूत के अन्दर तक घुसने की कोशिश में लग रहा था।

अब आगे..

सूरज ने अपने शॉर्ट्स को नीचे करते हुए अपना लंड बाहर निकाल लिया और अब उसका नंगा लंड अपनी बहन की नंगी मुलायम जाँघों से टकरा रहा था। वो अपने लौड़े को रश्मि की दोनों जाँघों के बीच में घुसा रहा था और फिर वो इसमें कामयाब भी हो गया कि उसने अपना लंड रश्मि की दोनों जाँघों के बीच धकेल दिया।
अब आहिस्ता आहिस्ता अपने लंड को उसकी जाँघों के बीच में फंसा कर सूरज रगड़ने लगा।
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मैं फील कर रही थी कि रश्मि की विरोध दम तोड़ती जा रही थी और उसका जिस्म ढीला पड़ता जा रहा था। उसके बदन पर सूरज के हाथों की हरकतें तेज होती जा रही थीं।

कभी उसका हाथ अपनी बहन की नंगी कमर को सहलाने लगता और कभी नीचे को जाकर उसके चूतड़ों को सहलाने लगता।
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सूरज ने अपना हाथ रश्मि के टॉप के नीचे डाला और उसकी नंगी कमर को ऊपर तक सहलाने लगा।

उधर आगे सूरज ने अपनी ज़ुबान को रश्मि के होंठों के बीच में घुसेड़ दिया और उसे अपनी ज़ुबान को चूसने पर मजबूर करने लगा।
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रश्मि जैसी कुँवारी और अनछुई लड़की के लिए यह बहुत ज्यादा हो रहा था। उसका दिमाग बंद होता जा रहा था और साँसें तेज हो चुकी थीं।
उसे समझ नहीं आ रहा था कि इस सबसे खुद को कैसे बचाए। नीचे उसकी चूत गीली होती जा रही थी और पानी छोड़ने वाली थी। सूरज ने पीछे से उसके शॉर्ट्स के अन्दर अपना हाथ डाला और अपना हाथ उसकी नंगे चूतड़ों पर रख दिया और उन्हें सहलाने लगा।
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अचानक से शायद सूरज ने उसके चूतड़ों के बीच उंगली डाल कर उसकी गाण्ड के सुराख को छुआ जिसकी वजह से रश्मि फ़ौरन से उछल सी पड़ी और जोर से चिल्लाई- भैया आ आ आ..
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मेरे लिए भी अब चुप रहना मुश्किल हो गया था। मैंने जैसे नींद से उठने की नाटक करते हुए कहा- हाँ.. बोल.. क्या हो गया है तुझे.. क्यूँ आधी रात को चिल्ला रही हो.. कोई बुरा सपना देख लिया है क्या?
मैंने उठ कर बैठते हुए कहा।

इतनी देर में सूरज अपनी जगह पर लेट कर नॉर्मल हो चुका था।

रश्मि भी उठ कर बैठ गई और मुस्करा कर अपने भाई की तरफ देख कर बोली- हाँ भाई.. सपना ही था शायद.. इसलिए डर गई मैं..
सूरज बोला- लेट जा चुप करके.. और सो जा.. सुबह तुझे कॉलेज भी जाना है।

रश्मि ने एक नज़र अपने भैया पर डाली और फिर मुस्कराते हुई बिस्तर से नीचे उतर कर वॉशरूम में चली गई।
कुछ देर बाद वापिस आई तो उसने मुझे बीच में धकेल दिया और खुद मेरी जगह पर लेट गई।
उसके चेहरे पर एक शरारती सी मुस्कराहट थी।

उसका भाई उसकी तरफ ही देख रहा था और मेरी नज़र बचा कर उसे बीच में आने का इशारा भी किया.. लेकिन मैंने देखा कि जाहिरा ने उसे अपना अंगूठा दिखाया और मुस्कराती हुई नीचे लेट गई।

अब मैं बीच में थी और मेरे दोनों तरफ दोनों बहन-भाई लेटे हुए थे।

सूरज भी अब कुछ उतावला हो गया हुआ था.. लेकिन अब अपना अकड़ा हुआ लंड वो मेरी जाँघों पर घुसा रहा था।

मेरे ऊपर से अपना बाज़ू डाल कर वो रश्मि की चूचियों को छूने की भी कोशिश कर रहा था। इसी तरह थोड़ी देर में हम तीनों को नींद आ गई।

सुबह जब मैं उठी तो मैंने रश्मि को जगाया कि जाओ जाकर चाय बना कर लाओ। रश्मि ने एक जोर की अंगड़ाई ली और फिर उठ कर कमरे से निकल गई।

फिर मैंने लेटे-लेटे ही सूरज को भी ऑफिस के लिए जगाया। वो उठा और बाथरूम में चला गया। मैं वहीं बिस्तर पर ही सुस्ती और नींद में लेटी रही।

जब काफ़ी देर हो गई कि सूरज बाथरूम से बाहर नहीं आया.. तो मैंने उठ कर बाथरूम का डोर नॉक किया.. लेकिन अन्दर से कोई जवाब नहीं आया।

मैं समझ गई कि वो दूसरे दरवाजे से निकल गया होगा। मैंने अपने बेडरूम का दरवाज़ा थोड़ा सा खोला तो सामने ही मेरी नज़र रसोई में गई। जहाँ पर दोनों बहन-भाई मौजूद थे। मैंने फ़ौरन ही दरवाज़ा बंद किया और थोड़ी सी जगह से उन दोनों को देखने लगी।

रश्मि अभी भी उसी छोटे से सेक्सी टॉप में थी.. जिसे नीचे करके रात को उसका भाई उसकी चूचियों को देख रहा था और चूसा भी था।

मैं हैरान थी कि दोनों क्या बातें कर रहे हैं। हमारा घर तो छोटा सा ही है.. तो दोनों की रसोई में बातें करने की आवाजें भी मुझे आने लगीं।

मैंने देखा कि सूरज रश्मि को बाज़ू से पकड़ कर अपनी तरफ खींच रहा है लेकिन वो शरमाते हुए खुद को छुड़ा रही है।
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सूरज- अरे रश्मि.. क्यों शर्मा रही हो.. इधर तो आओ एक मिनट के लिए..
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रश्मि- भैया यह आपको क्या होता जा रहा है.. रात को भी आपने मुझे इतना तंग किया और फिर बारिश में नहाते हुए भी आपने ऐसे ही किया था।

सूरज ने उसे खींच कर अपने सीने से लगाते हुए कहा- तुम भी तो इतने दिनों से घर में इतनी नंगी होकर फिर रही हो.. उसका नहीं पता कि मेरे ऊपर क्या गुज़र रही होगी।
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रश्मि ने अपने भाई की बाजुओं में कसमसाते हुए शरारत से कहा- ऐसे कपड़े पहनने का यह मतलब तो नहीं कि आप अपनी बहन पर ही बुरी नज़र रख लो।

सूरज ने ज़बदस्ती रश्मि के गाल को किस करते हुए कहा- बुरी नज़र कहाँ है.. मैं तो प्यार करना चाह रहा हूँ।
यह कहते हुए सूरज ने रश्मि के टॉप की डोरी को नीचे खींचा और उसकी चूची को नंगा कर लिया।
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रश्मि जल्दी से अपनी चूची को छुपाते हुए तड़फ उठी।

रश्मि- छोड़ दो भैया.. वरना मैं फिर से भाभी को जगा लूँगी.. जैसे रात को उठा लिया था।
सूरज- रात को भी तूने मेरा सारा काम खराब कर दिया था.. मेरे मना करने के बावजूद अपनी भाभी को जगा लिया था।
सूरज ने रश्मि की एक चूची को अपनी मुठ्ठी में लेकर मसलते हुए कहा।

रश्मि अपने भाई की बाँहों में मचलते हुए हंस रही थी और चहक रही थी।
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साफ़ लग रहा था कि एक-दूसरे के सामने ओपन होने के बाद दोनों बहन-भाई बजाए शर्मिंदा होने के.. एक-दूसरे के साथ और भी इन्वॉल्व होने लगे थे।
दोनों बहन-भाई की इस तरह की हरकतों को देखते हुए मुझे भी मज़ा आने लगा था।

मैंने अपने शॉर्ट्स में हाथ डाल कर अपनी चूत को रगड़ना शुरू कर दिया, मुझे फील हुआ कि मेरी चूत भी गीली हो रही है।
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सूरज ने अपने शॉर्ट्स को नीचे खींचा और अपने लंड को बाहर निकालते हुए बोला- देख.. तेरी जवानी को देख कर क्या हालत हो गई है इसकी!

रश्मि एक अदा के साथ बोली- तो मैं क्या करूँ भैया.. जाओ भाभी के पास और उन्हें इसकी यह हालत दिखाओ।

सूरज ने रश्मि का हाथ पकड़ा और उसे अपने लंड पर रखने की कोशिश करने लगा।

सूरज की कोशिशों के वजह से रश्मि का हाथ अपने भाई की अकड़े हुए लंड से छुआ भी.. और एक लम्हे के लिए उसकी मुठ्ठी में उसका लंड आ भी गया।
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रश्मि- भैया यह तो बहुत गरम हो रहा है और सख़्त भी..
सूरज उसका हाथ अपनी लंड पर रगड़ते हुए बोला- हाँ.. तो थोड़ा ठंडा कर दे ना इसे..

Update- 37
आपने अभी तक पढ़ा..
सूरज ने अपने शॉर्ट्स को नीचे खींचा और अपने लंड को बाहर निकालते हुए बोला- देख.. तेरी जवानी को देख कर क्या हालत हो गई है इसकी!

रश्मि एक अदा के साथ बोली- तो मैं क्या करूँ भाई.. जाओ भाभी के पास और उन्हें इसकी यह हालत दिखाओ।

सूरज ने रश्मि का हाथ पकड़ा और उसे अपने लंड पर रखने की कोशिश करने लगा। सूरज की कोशिशों के वजह से रश्मि का हाथ अपने भाई की अकड़े हुए लंड से छुआ भी.. और एक लम्हे के लिए उसकी मुठ्ठी में उसका लंड आ भी गया।
रश्मि- भाई यह तो बहुत गरम हो रहा है और सख़्त भी..
सूरज उसका हाथ अपनी लंड पर रगड़ते हुए बोला- हाँ.. तो थोड़ा ठंडा कर दे ना इसे..
अब आगे..

रश्मि इठलाते हुए बोली- जाओ भाभी से कहो ना.. इसे ठंडा कर दें.. मैं क्यों करूँ..
सूरज- इसमें आग तूने लगाई है.. तो ठंडा भी तो तुझे ही करना होगा ना मेरी जान.. आज तू मेरे साथ कॉलेज चल, फिर रास्ते मैं तुझे बताऊँगा.. देखना तू..

रश्मि जोर-जोर से हँसने लगी, रश्मि की एक चूची अभी तक नंगी थी और अब वो उसे छुपाने की कोशिश भी नहीं कर रही थी। सूरज अब भी बार-बार अपनी बहन को अपने जिस्म के साथ चिपका कर चूम रहा था
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और ऐसे चूमते चूमते उसके चूतड को भी दबाने लगा।
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मैंने अब दोनों को ब्रेक देने का फ़ैसला किया और अन्दर से ही आवाज़ लगाई- अरे रश्मि.. यार कहाँ चली गई हो.. अभी तक चाय ही नहीं बनाई यार तुमने?
रश्मि और सूरज जल्दी से एक-दूसरे से अलग हुए और रश्मि अपने टॉप को ठीक करते हुए बोली- भाभी बस चाय लेकर आ रही हूँ.. आप जल्दी से भाई को उठा दें।

उसके इस झूठ पर मैं हैरान भी हुई और मुस्करा भी दी कि उसका भाई उसके पास खड़ा उसके साथ छेड़छाड़ कर रहा है और वो मुझसे छुपाते हुए शो कर रही है कि उसे पता ही नहीं कि उसका भाई कहाँ है।
यही सोचती हुई मैं बिस्तर पर आ गई और थोड़ी देर में बाथरूम का दरवाज़ा खुला और सूरज अन्दर आ गया।

थोड़ी देर में ही रश्मि भी चाय लेकर आ गई, उसके चेहरे पर एक शरारती और सेक्स से भरी हुई मुस्कान थी।
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मैंने देखा कि वो मेरी नज़र बचा कर बड़ी अदा के साथ अपने भाई की तरफ देख रही थी।

जब वो बिस्तर पर चाय रखने लगी.. तो काफ़ी ज्यादा ही झुक गई.. जिससे उसकी दोनों चूचियों बिल्कुल जैसे बाहर को निकलते हुए उसके भाई को नज़र आने लगीं।
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रश्मि ने एक नज़र उठा कर उसी हालत में ही अपने भाई को देखा और कटीली अदा से मुस्करा कर सीधी होकर बैठ गई।

मैं उन दोनों की हरकतों को नजरंदाज कर रही थी..

जैसे कि मुझे कुछ पता ही ना हो।

चाय पीने के बाद सूरज उठा और बोला- चलो रश्मि.. जल्दी कर लो.. कॉलेज को देर हो जाएगी.. तैयार हो जाओ..
रश्मि ने एक शरारती मुस्कराहट से अपने भाई की तरफ देखा और बोली- नहीं भाई.. आज मैं कॉलेज नहीं जा रही हूँ।

सूरज जो कपबोर्ड के पास खड़ा था.. चौंकते हुए मुड़ कर अपनी बहन की तरफ देखने लगा और बोला- क्यों.. आज क्यों नहीं जाना तूने?
रश्मि मुस्करा कर बोली- बस भाई आज घर पर ही कुछ काम कंप्लीट करना है.. इसलिए..

सूरज ने एक मायूस सी नज़र अपनी बहन पर डाली और अपनी तैयारी करने लगा।

मैं धीरे से मुस्कराई और उठ कर बाथरूम में जाते हुई बोली- चल ठीक है रश्मि.. आज अपने भाई को नाश्ता भी तू ही करवा दे।
रश्मि मुस्करा कर अपने भाई की तरफ देखते हुई बोली- जी भाभी.. वो तो करवा भी दिया।
मैं- क्या कहा.. करवा भी दिया.. कब??
रश्मि घबरा कर बोली- नहीं.. मैंने कहा है कि वो भी करवा देती हूँ।

मैं उसकी बात को अनसुनी करते हुए वॉशरूम में दाखिल हो गई। लेकिन दरवाज़ा लॉक करके भी मैं एक झिरी से बाहर का नजारा देखने लगी।

मेरे अन्दर जाते ही सूरज बिस्तर की तरफ बढ़ा और अपनी बहन पर झपटा और उसे बिस्तर पर गिराते हुए.. उस पर झुक गया और उसके होंठ को चूमते हुए बोला- क्यों नहीं जा रही तू आज.. डर गई है क्या?
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रश्मि हँसते हुए बोली- जी भाई.. अपने भाई की बुरी नज़र से डर गई हूँ.. मेरी इज़्ज़त को आप से ख़तरा पैदा हो गया है।

सूरज अपना हाथ रश्मि के शॉर्ट्स में डाल कर उसकी चूत को अपनी मुठ्ठी में लेकर दबाते हुए
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बोला- घर में रह कर तेरी इस चूत को ख़तरा कम नहीं होगा.. अब तू देखना.. तेरी इस कुँवारी चूत को मैं ही अपने लंड से फाड़ूँगा।
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रश्मि ‘खीखी.. खीखी..’ करते हुए हँसने लगी और अपना हाथ सूरज के हाथ के ऊपर रख तो दिया.. लेकिन उसका हाथ चूत के ऊपर से बाहर नहीं खींचा।

सूरज ने अपने होंठ अपनी बहन के होंठों पर रख दिए और उसके होंठों को चूमने लगा।
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उसने रश्मि का हाथ पकड़ा और अपने शॉर्ट के अन्दर घुसा दिया और अपना लंड पकड़ा दिया।
रश्मि ने भी अपना हाथ अपने भाई के शॉर्ट्स में से बाहर खींचने की कोशिश नहीं की।

अब सूरज अपनी बहन की चूत को सहला रहा था और रश्मि अपने भाई के शॉर्ट्स में हाथ डाले हुए उसके लण्ड से खेल रही थी।
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रश्मि बोली- भाई अब छोड़िए.. भाभी आ जाएंगी।

सूरज ने एक नज़र बाथरूम के दरवाजे पर डाली और फिर एक बार किस करके उठ गया। फिर वहीं उसके पास खड़े होकर अपना शॉर्ट भी उतार दिया।
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रश्मि बोली- भाई कुछ तो शरम करो अपनी बहन की सामने ही नंगे हो गए हो.. अगर भाभी ने देख लिया तो क्या सोचेंगी।

सूरज ने अपना अकड़ा हुआ लंड अपने हाथ में पकड़ा और उसे रश्मि के चेहरे के पास लाते हुए बोला- अपने इन प्यारे प्यारे होंठों से.. एक किस तो कर दो प्लीज़..
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रश्मि सिर हिलाते हुए बोली- नहीं भाई.. मैं नहीं करूँगी।
सूरज बोला- मैं भी फिर तुम्हारे सामने ऐसे ही खड़ा रहूँगा..

रश्मि हँसी और फिर सूरज का लंड अपने हाथ में पकड़ कर उसकी नोक पर अपने होंठ रख कर उसने एक चुम्मी कर दी।
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सूरज- थोड़ा सा मुँह के अन्दर लेकर चूस तो सही यार..
रश्मि ने अपने भाई का लंड झट से थोड़ा सा चूसा और फिर छोड़ दिया और उठते हुए बोली- नहीं.. बस अब और कुछ नहीं होगा भाई..
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और फिर वो अपने भाई को मुस्करा कर अंगूठा दिखाते हुई कमरे से बाहर निकल गई।
सूरज अपने कपड़े पहनने लगा और मैं भी वॉशरूम से बाहर आ गई।
अब मैं दोबारा बिस्तर पर लेट गई ताकि रश्मि ‘अच्छी’ तरह से सूरज को नाश्ता करवा सके।

सूरज ने तैयार होकर मेरे पास आकर मेरे होंठों पर एक किस किया और फिर कमरे से बाहर निकला.. तो मैं भी फ़ौरन ही बाहर को देखने लगी।

रश्मि पहले ही सूरज के लिए नाश्ता टेबल पर लगा चुकी थी। सूरज वहीं बैठ गया और फिर रसोई से रश्मि उसकी लिए चाय लेकर आ गई और उसके पास ही बैठ गई।

अब टेबल पर बैठ हुए वो दोनों मेरे सामने दिख रहे थे।
सूरज- आओ तुम भी नाश्ता कर लो..
रश्मि- नहीं.. आप कर लो.. मैं भाभी के साथ कर लूँगी..
सूरज- अपना यह टॉप तो नीचे करो थोड़ा..

रश्मि- शरम करो भाई.. भाई तो अपनी बहनों के जिस्म ढकने के लिए कहते हैं.. और आप हो कि मुझे अपना जिस्म एक्सपोज़ करने के लिए कह रहे हो?

सूरज मुस्कराया और खुद ही हाथ आगे बढ़ा कर उसके कन्धों से उसके टॉप की डोरी को नीचे खींचते हुए उसकी चूची को नंगा करते हुए बोला- तेरे जैसी गर्म बहन हो.. तो भाई खुद ही बहनचोद बन जाता है डार्लिंग..

रश्मि हँसने लगी और बोली- भाई जल्दी से नाश्ता करो और चाय पी कर निकलो.. आपको बहुत देर हो गई है!
सूरज- लेकिन आज तो मैं चाय नहीं दूध पीऊँगा..
रश्मि- तो जाओ अन्दर जाकर पी आओ.. भाभी अन्दर ही हैं..
सूरज- लेकिन मैं तो आज तेरी इन चूचियों का दूध पीऊँगा..

सूरज ने रश्मि की चूची से खेलते हुए कहा और फिर झुक कर अपनी बहन की चूची के निप्पल को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगा।
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रश्मि ने उसके बालों में हाथ फेरा और फिर बोली- आह्ह.. बस करो.. भाई क्या आपने एक ही दिन में सारे के सारे मजे लूट लेना हैं..

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कहानी खत्म हुई #OR ऐसे खत्म हुई,

Update- 38
आपने अभी तक पढ़ा..
रश्मि हँसने लगी और बोली- भाई जल्दी से नाश्ता करो और चाय पी कर निकलो.. आपको बहुत देर हो गई है!
सूरज- लेकिन आज तो मैं चाय नहीं दूध पीऊँगा..
रश्मि- तो जाओ अन्दर जाकर पी आओ.. भाभी अन्दर ही हैं..
सूरज- लेकिन मैं तो आज तेरी इन चूचियों का दूध पीऊँगा..

सूरज ने रश्मि की चूची से खेलते हुए कहा और फिर झुक कर अपनी बहन की चूची के निप्पल को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगा।
रश्मि ने उसके बालों में हाथ फेरा और फिर बोली- आह्ह.. बस करो..

भाई क्या आपने एक ही दिन में सारे के सारे मजे लूट लेना हैं..
अब आगे..
सूरज मुस्कराया और उठ कर बाहर की तरफ चला गया और रश्मि भी पीछे-पीछे डोर लॉक करने और उसे ‘सी ऑफ’ करने के लिए चली गई।
गेट पर भी सूरज ने रश्मि को अपनी बाँहों में जकड़ा और उसे किस करने लगा, बोला- डार्लिंग थोड़ा सा मुँह में लेकर इसे नर्म तो कर दो.. देखो यह सारा दिन मुझे ऑफिस में तंग करेगा।

रश्मि हँसी और अपना हाथ सूरज की पैन्ट की ऊपर से सूरज के लंड पर रख कर उसे दबाते हुए बोली- भाई तड़फने दो इसे.. इसी तड़फन में तो मज़ा है.. वापिस आओगे.. तो इसका कुछ ना कुछ करूँगी.
सूरज- प्रॉमिस है ना?
रश्मि- नहीं जी.. प्रॉमिस-श्रौमिस कोई नहीं.. अगर मौका मिला तो.. समझे..
यह कहते हुए रश्मि ने उसे बाहर की तरफ धकेला और फिर सूरज घर से निकल गया।

रश्मि अपना ड्रेस ठीक करते हुए वापिस आई और बर्तन समेट कर रसोई में चली गई।
मैं भी दोबारा बिस्तर पर लेट गई।

थोड़ी ही देर मैं रश्मि चाय के दो कप बना कर बेडरूम में आ गई और लाइट जलाते हुए बोली- क्या बात है भाभी.. आज आपने उठना नहीं है क्या?
मैं अंगड़ाई लेती हुई बोली- रात तूने मुझे नींद में डरा ही दिया था.. तो नींद ही खराब हो गई थी.. तुझे रात को क्या हो गया था?

रश्मि दूसरी तरफ बिस्तर की पुश्त से टेक लगा कर बैठते हुए बोली- भाभी लगता है कि रात को सोते में भी भाई ने फिर मुझे तुम्हारी जगह ही समझ लिया था.. वो ही हरकतें कर रहे थे.. इसलिए तो मैं उठ कर दूसरी तरफ आ गई थी।
रश्मि ने मासूमियत से पूरी की पूरी बात छुपाते हुए कहा।
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मैं मुस्करा कर बोली- अरे यार.. तो फिर क्या हुआ.. उसे मजे करने देती और खुद भी मजे करती.. इनकी तो यही आदत है.. सारी रात सोते में भी मुझे तंग करते रहते है। अब तो मैं इस सबकी आदी हो गई हूँ..

रश्मि भी हँसने लगी और फिर हम दोनों चाय पीने लगे। चाय पीते हुए मैं अपने एक हाथ से रश्मि के कन्धों को चूमते हुए बोली
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मैंने उससे पूछा- रश्मि.. जब तुम्हारे भाई तुम्हें छू रहे थे.. तो तुमको कैसा लगा था?
रश्मि का चेहरा शर्म से लाल हो गया और बोली- भाभी लग तो अच्छा रहा था.. लेकिन भाई हैं ना मेरे.. इसलिए अजीब लग रहा था।

मैं रश्मि के और क़रीब हो गई और अपना हाथ उसकी गर्दन पर उसके बालों में रखते हुए आहिस्ता-आहिस्ता अपने होंठ उसके होंठों के पास ले जाने लगी
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और धीरे से बोली- रश्मि.. तुम हो ही इतनी खूबसूरत.. कि कोई भी तुम से दूर कैसे रह सकता है..
ये कहते हुए मैंने उसके होंठों को चूमना शुरू कर दिया।
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रश्मि कसमसाई- भाभी.. आप फिर से शुरू होने लगी हो ना..

लेकिन उसके विरोध को पूरा होने से पहले ही.. मैंने अपने होंठों में उसके लबों को बंद कर लिया और उसके निचले होंठ को.. अपने होंठों में लेकर चूमने और चूसने लगी।
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मेरे हाथ उसके बालों को सहला रहे थे और दूसरा हाथ उसकी कमर पर आ गया था।
अब मैं उसकी कमर को सहलाते हुए उसके होंठों को चूमने लगी।
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आहिस्ता आहिस्ता मैंने अपने होंठ रश्मि के नंगे कन्धों पर लाकर उसके मुलायम और गोरे-गोरे कंधों को चूमना शुरू कर दिया.. रश्मि की आँखें भी बंद होने लगी थीं।
मैंने आहिस्ता से रश्मि को नीचे तकिए पर लिटा दिया और झुक कर उसकी गोरे-गोरे उठे हुए सीने पर किस करने लगी।

फिर मैंने रश्मि के टॉप की डोरियाँ नीचे को करके उसकी चूचियों को बाहर निकाला और उसके चूचों को नंगा कर दिया।

मैंने मुस्करा कर रश्मि की तरफ देखा.. तो उसने एक लम्हे की लिए अपनी आंखें खोल कर मुझे निहारा.. और फिर से बंद कर लीं।
मैंने अपने होंठ रश्मि के एक निप्पल पर रखे और उसे चूम लिया.. साथ ही रश्मि के जिस्म में एक झुरझुरी सी दौड़ गई।
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अब आहिस्ता आहिस्ता मैंने रश्मि के निप्पल को अपनी ज़ुबान से सहलाना शुरू कर दिया और फिर अपने होंठों में लेकर चूसने लगी।
रश्मि के गुलाबी निप्पल को चूसने का मेरा पहला मौका था कि मैं किसी दूसरी लड़की की चूचियों को छू और चूस रही थी.. लेकिन मुझे भी एक अजीब सा मजा आ रहा था..
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मेरा दूसरा हाथ रश्मि की दूसरी चूची को सहलाता हुआ नीचे को जाने लगा और मैंने अपना हाथ रश्मि के शॉर्ट्स के अन्दर डाल दिया।
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अब मेरा हाथ उसकी चूत को पूरी शिद्दत से सहलाने लगा। उसकी चूत गीली होना शुरू हो गई हुई थी।
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मैंने सीधे होकर अपना टॉप उतारा और अपना ऊपरी बदन नंगा कर लिया।
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जब मैंने अपने हाथ और होंठ उसके जिस्म से हटाए.. तो रश्मि ने आँखें खोल कर फ़ौरन ही मेरी तरफ देखा..
उसने जब मेरी ऊपरी गोरे बदन को नंगा देखा.. तो उसकी चेहरे पर भी एक मुस्कराहट फैल गई। इस बार उसने अपनी आँखें बंद नहीं कीं और मेरी चूचियों की तरफ देखती रही।

मैंने उसकी तरफ देखते हुए.. अपनी दोनों चूचियों पर हाथ फेरा और फिर एक चूची को अपने हाथ में पकड़ कर उसके निप्पल को आगे करते हुए रश्मि के होंठों पर रख दिया।
रश्मि मुस्कराई और उसने बहुत ही नजाकत से मेरे निप्पल को चूम लिया।
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पहली बार किसी लड़की ने मेरे निप्पल को चूमा था। मैंने अपनी चूची को उसकी होंठों पर दबा दिया.. रश्मि ने भी अपने होंठों को खोल कर मेरे निप्पल को अपने होंठों में भर लिया.. और उसे चूसने लगी।

रश्मि के कुँवारे होंठों के बीच अपने निप्पल को चुसवाते हुए मुझे एक अजीब सा मज़ा आ रहा था। मैंने अपना हाथ दोबार रश्मि के शॉर्ट्स में डाला और उसकी चूत से खेलने लगी।
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मेरी उंगली उसकी चूत के सुराख को छू रही थी और उसके अन्दर दाखिल होना चाह रही थी। मैं उसकी चूत के दाने को रगड़ रही थी और उसकी वजह से रश्मि के जिस्म में बिजली सी भर रही थी।

उसकी मेरे निप्पल को चूसने की ताक़त में इज़ाफ़ा होता जा रहा था। कभी आहिस्ता से वो मेरी निप्पल को काट भी लेती थी।
कुछ देर तक रश्मि से अपना निप्पल चुसवाने के बाद.. मैं उठी और रश्मि की टाँगों की तरफ आ गई।

मैंने उसके शॉर्ट्स को पकड़ कर खींचा और उतार दिया।
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अब रश्मि का निचला जिस्म बिल्कुल नंगा हो गया। रश्मि ने फ़ौरन ही अपने हाथ अपनी चूत पर रख लिए।
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मैंने झुक कर उसकी दोनों जाँघों को चूमा और आहिस्ता-आहिस्ता अपनी ज़ुबान से चाटते हुए ऊपर को उसकी चूत की तरफ आने लगी।
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फिर मैंने उसकी दोनों हाथों पर किस किया.. जो कि उसकी चूत पर रखे हुए थे।

आहिस्ता से मैंने उसकी हाथों को उसकी चूत पर से हटाया.. तो उसने कोई विरोध नहीं की और अपनी चूत को मेरे सामने पेश कर दिया।

अब मेरी नज़र रश्मि की जाँघों के बीच में थी.. जहाँ रश्मि की कुँवारी चूत थी।
जिसके ऊपर के हिस्से और इर्द-गिर्द एक भी बाल नहीं था।
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रश्मि की चूत के मोटे-मोटे बाहर के फोल्ड्स आपस में जुड़े हुए थे.. बालों के बगैर उसकी कुँवारी चूत किसी बहुत ही छोटी सी बच्ची की चूत का मंज़र पेश कर रही थी।

दोनों बाल रहित फलकों के बीच से गुलाबी रंग की अन्दर की चमड़ी का कुछ हिस्सा नज़र आ रहा था। जिससे यह अंदाज़ा हो सकता था कि दोनों फलकों के अन्दर का भाग किस क़दर गुलाबी और नर्म होगा।
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उसकी चूत के दोनों फलकों के निचले हिस्से में जहाँ पर चूत की लकीर खत्म होती है.. वहाँ पर पानी का एक क़तरा चमक रहा था..
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रश्मि की कुँवारी चूत से निकल रही चूत का रस का क़तरा.. जो कि अपनी गाढ़ेपन की वजह से उस जगह पर जमा हुआ था और आगे नहीं बह रहा था।

रश्मि की कुँवारी चूत के क़तरे की चमक से मेरी आँखें भी चमक उठीं और मैं वो करने पर मजबूर हो गई.. जो कि मैंने आज तक कभी नहीं किया था.. सिर्फ़ मूवी में देखा भर था।

Update- 39
आपने अभी तक पढ़ा..
उसकी चूत के दोनों फलकों के निचले हिस्से में जहाँ पर चूत की लकीर खत्म होती है.. वहाँ पर पानी का एक क़तरा चमक रहा था।
रश्मि की कुँवारी चूत से निकल रही चूत का रस का क़तरा.. जो कि अपनी गाढ़ेपन की वजह से उस जगह पर जमा हुआ था और आगे नहीं बह रहा था।
रश्मि की कुँवारी चूत के क़तरे की चमक से मेरी आँखें भी चमक उठीं और मैं वो करने पर मजबूर हो गई.. जो कि मैंने आज तक कभी नहीं किया था.. सिर्फ़ मूवी में देखा भर था।
अब आगे..

मैंने रश्मि की दोनों जाँघों को खोल कर बीच में जगह बनाई और वहाँ पर बैठ कर नीचे को झुकी.. और अपनी ज़ुबान की नोक को निकाल कर रश्मि की चूत की लकीर के बिल्कुल निचले हिस्से में चमक रही उसकी चूत के रस के क़तरे को अपनी ज़ुबान पर ले लिया।
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मैं ज़िंदगी में पहली बार किसी औरत की चूत के पानी को टेस्ट कर रही थी।

रश्मि की चूत के पानी के इस रस में हल्का मीठा मीठा सा.. अजीब सा स्वाद था।

जैसे ही मेरी ज़ुबान ने रश्मि की चूत को छुआ.. तो रश्मि का जिस्म काँप उठा। उसने आँखें खोल कर मेरी तरफ देखना शुरू कर दिया। मैंने दोबारा से झुक कर रश्मि की चूत के बाहर के मोटे होंठों पर अपनी गुलाबी होंठ रखे और उसे एक चुम्मा दिया।
रश्मि के जिस्म को जैसे झटके से लग रहे थे।
आहिस्ता आहिस्ता मैंने रश्मि की चूत के ऊपर चुम्बन करने शुरू कर दिए।
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फिर मैंने अपनी ज़ुबान की नोक बाहर निकाली और आहिस्ता आहिस्ता ऊपर से नीचे को अपनी ज़ुबान को उसकी चूत की लकीर पर फेरने लगी।
अब रश्मि की चूत ने और भी पानी छोड़ना शुरू कर दिया था।

अपनी दोनों हाथों की एक-एक उंगली रश्मि की चूत के बाहर के फलकों पर रख कर आहिस्ता से उसकी चूत को खोला.. तो आगे उसकी चूत की गुलाबी फलकों की अंदरूनी रंगत नज़र आने लगी।
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बिल्कुल पतले-पतले और छोटे फलकें थीं.. जो कि साफ़ दिखा रही थीं कि यह चूत अभी तक बिल्कुल कुँवारी है और इसके अन्दर अभी तक किसी भी लंड को जाना नसीब नहीं हुआ है।
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मैं दिल ही दिल में मुस्कराई कि खुशक़िस्मत है सूरज.. जो उसे अपनी बहन की कुँवारी चूत को खोलने का मौक़ा मिलेगा।

फिर मैंने नीचे झुक कर रश्मि की चूत के एक गुलाबी फोल्ड को अपने दोनों होंठों के बीच ले लिया और उसे आहिस्ता से चूसने लगी।
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दोनों गुलाबी फलकों के बिल्कुल ऊपर.. जहाँ पर वो मिल रहे थे.. एक छोटा सा.. बिल्कुल छोटा सा.. रश्मि की चूत का दाना नज़र आ रहा था।
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मैंने जैसे ही उसे देखा तो अपनी उंगली से उसे मसलने लगी।
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आहिस्ता आहिस्ता उस पर अपनी उँगलियाँ फेरने के साथ ही रश्मि की चूत से जैसे पानी निकलने की रफ़्तार और भी बढ़ गई।
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धीरे-धीरे मैंने उसकी चूत के दाने को अपनी ज़ुबान से चाटना शुरू कर दिया और फिर जैसे ही अपने दोनों होंठों को उसके ऊपर रख कर जोर से चूसा.. तो रश्मि तो तड़फ ही उठी।

‘भाभीईई… ईईईईई.. ओाआहह.. आआहह.. आहह.. क्य्आआ कर दियाआ.. ऊऊहह..’

मैं मुस्करा दी और फिर अपनी ज़ुबान को नीचे को लाते हुए रश्मि की कुँवारी चूत के बिल्कुल तंग और टाइट सुराख के अन्दर डालने लगी।

बड़ी मुश्किल से मेरी ज़ुबान रश्मि की चूत के अन्दर दाखिल हो रही थी। मैंने आहिस्ता आहिस्ता अपनी ज़ुबान को रश्मि की चूत के अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया।

रश्मि से भी अब बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था.. उसने अपना हाथ मेरे सर पर रखा और मेरे सर को अपनी चूत पर दबाते हुए अपनी चूत को ऊपर उठा कर मेरे मुँह में घुसेड़ने की कोशिश करते हुए एकदम से झड़ने लगी।
रश्मि का निचला जिस्म बुरी तरह से झटके खा रहा था और पानी उसकी चूत से निकल रहा था।
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मेरी ज़ुबान रश्मि की चूत के अन्दर अब भी थी..

और मुझे उसकी टाइट चूत की नसें सुकड़ती और फैलती हुई बिल्कुल महसूस हो रही थीं।
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रश्मि की जाँघों को सहलाते हुए मैं आहिस्ता आहिस्ता उसे रिलेक्स करने लगी। उसकी आँखें बंद थीं और साँस तेज चल रही थीं और उसी के साथ रश्मि मेरी बूब्स भी चूस रही थी
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गोरे-गोरे चूचे.. बड़ी तेज़ी के साथ ऊपर-नीचे को हो रहे थे। मैंने उसके साथ लेटते हुए उसे अपनी बाँहों में समेट लिया।
साथ ही रश्मि ने भी अपना मुँह मेरे सीने में छुपाते हुए अपनी आँखें बंद कर लीं।

अब मैं आहिस्ता आहिस्ता उसकी कमर पर हाथ फेरते हुए उसे शांत कर रही थी।
पहली बार इतना ज्यादा मज़ा लेने के बाद रश्मि एकदम से नींद की आगोश में चली गई। मैंने उस ‘स्लीपिंग ब्यूटी’ की माथे को एक बार चूमा और उठ कर रसोई में आ गई।

दोपहर को रश्मि ने नहा कर एक टी-शर्ट और लाल रंग की टाइट लैगी पहन ली थी.. जिसमें उसका जिस्म बहुत ही सेक्सी नज़र आ रहा था।

जब सूरज घर आया.. गेट मैंने ही खोला। सूरज ने अन्दर आकर जब कपड़े आदि बदल लिए.. तो मैं रसोई में आ गई ताकि खाना गरम करके निकाल सकूँ।

जैसे ही सूरज ने मुझे रसोई में जाते देखा.. तो वो टीवी लाउंज से उठ कर रश्मि के कमरे की तरफ चला गया।
मुझे पता था कि वो यही करेगा।

रसोई से निकल कर मैंने छुप कर रश्मि के कमरे में झाँका.. तो देखा कि रश्मि कमरे में सूरज के आगे-आगे भाग रही है और सूरज उसे पकड़ने की कोशिश कर रहा है।

कमरा कौन सा बहुत बड़ा था.. जो वो उसके हाथ ना आती… जल्द ही सूरज ने उसको हाथ से पकड़ा और खींच कर अपने सीने से लगा लिया।

रश्मि मचलते हुई बोली- छोड़ दो ना भैया.. मुझे वरना मैं जोर से चीखूँगी और फिर भाभी आ जाएंगी।
सूरज- क्या है यार.. तू दो मिनट के लिए चुप नहीं रह सकती.. मैं तुझे खा तो नहीं जाऊँगा ना..
रश्मि हँसते हुए बोली- आप कोशिश तो खाने की ही कर रहे हो ना..!

सूरज अपने होंठों को रश्मि के गालों की तरफ ले जाते हुए उसको सहलाने लगा।

सूरज ने अपनी बहन रश्मि को अपनी बाँहों में समेटा हुआ था और अब अपने होंठों को उसके होंठों पर रखने में कामयाब हो चुका था।
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जैसे-जैसे सूरज रश्मि के होंठों को किस कर रहा था..
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वैसे-वैसे ही रश्मि की दिखावटी विरोध भी ख़त्म होती जा रही थी। वो भी आहिस्ता आहिस्ता खुद के जिस्म को ढीला छोड़ते हुए खुद को अपने भाई के हवाले कर चुकी थी।

सूरज अब आहिस्ता आहिस्ता रश्मि के होंठों को चूम रहा था और फिर उसके निचले होंठ को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा।
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रश्मि की बाज़ू भी अपने भाई की कमर की गिर्द लिपट चुकी थी और वो भी आहिस्ता-आहिस्ता उसके जिस्म को सहला रही थी।

मैंने देखा कि सूरज ने अपनी ज़ुबान को रश्मि के मुँह के अन्दर दाखिल करने की कोशिश करते हुए उसकी टी-शर्ट को ऊपर उठाना शुरू कर दिया था।

रश्मि सूरज के हाथ पर अपना हाथ रखते हुई बोली- भैया.. भाभी आ जाएंगी.. कुछ भी ना करो न.. प्लीज़।
सूरज- नहीं.. वो नहीं आएगी..
रश्मि- भाभी हैं कहाँ पर?

सूरज- वो रसोई में है.. तुम उसकी फिकर मत करो.. बस मैं जल्दी से चला जाऊँगा..

यह कहते हुए सूरज ने रश्मि की टी-शर्ट को ऊपर किया
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और नीचे उसकी गुलाबी रंग की ब्रेजियर में छुपी हुई चूचियाँ उसके भाई की नज़रों के सामने आ गईं।
सूरज ने अपनी बहन की ब्रेजियर के ऊपर से ही उसकी एक चूची को अपनी मुठ्ठी में भर लिया और उसे आहिस्ता आहिस्ता दबाने लगा।
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ऊपर वो अपनी ज़ुबान को रश्मि के मुँह में डाल चुका था और वो आहिस्ता आहिस्ता उसे चूस रही थी।
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सूरज का एक हाथ रश्मि की लेग्गी के ऊपर से ही उसके चूतड़ों को सहला रहा था।
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एक भाई के हाथ अपनी ही सग़ी बहन की गाण्ड पर रेंगते हुए देख कर मेरी तो अपनी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था।
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अब सूरज ने रश्मि का हाथ पकड़ा और अपने लंड के ऊपर रखने लगा।

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Update- 40
पहले तो रश्मि ने अपना हाथ हटाने की कोशिश की.. लेकिन फिर उसने आख़िर अपने भाई का लंड पकड़ ही लिया।
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कुछ देर तक सूरज के लंड को सहलाने के बाद रश्मि बोली- बस भाई.. अब मुझे छोड़ दो प्लीज़.. फिर कर लेना..
सूरज- फिर कब?
रश्मि- जब मौका मिले तब.. आप कौन सा अब मुझे छोड़ने वाले हो.. जब भी मौका मिलेगा.. कुछ ना कुछ तो करोगे ही ना आप..
सूरज ने मुस्कुरा कर रश्मि के होंठों को जोर से चूमा और रश्मि ने भी एक बार जोर से उसके लण्ड को अपनी मुठ्ठी में जोर से दबाया और फिर उससे अलग होने लगी।
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सूरज ने पीछे को हट कर अपने शॉर्ट्स को नीचे खींचा और अपने लंड को बाहर निकाल कर उसके सामने खुद को नंगा कर दिया।
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रश्मि अपनी मुँह पर हाथ रखते हुए बोली- ऊऊऊ.. ऊऊओफफ.. उफफफ्फ़.. भैया.. आप कितने बेशरम हो.. कुछ तो भाभी का ख्याल करो.. किसी ने देख लिया.. तो क्या सोचेगा कि आप अपनी बहन के साथ ही यह सब कर रहे हो?
सूरज अपने लंड को हिलाते हुए बोला- हाँ.. तो क्या है.. मैं अपनी बहन के साथ ही कर रहा हूँ ना.. किसी और की बहन के साथ तो नहीं ना..
रश्मि चुप होकर मुस्कुराने लगी।

सूरज- यार एक किस तो कर दो इस पर..
रश्मि- नहीं भैया.. अभी नहीं करूँगी।
सूरज- प्लीज़्ज़.. मेरी प्यारी सी बहना हो ना.. तो जल्दी से एक बार कर दो..
रश्मि- भैया आप बहुत ही ज़िद्दी और बेसब्र हो।
यह कहते हुई वो नीचे को झुकी और अपने हाथ में अपने भैया का लंड पकड़ कर उसकी मोटी फूली हुई टोपी पर एक किस किया और फिर जल्दी से बाहर की तरफ भागने लगी।
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सूरज ने फ़ौरन ही उसे पकड़ा और बोला- अब एक किस मुझे भी तो दे कर जाओ ना..

रश्मि ने अपने होंठों को उसके आगे कर दिए..

लेकिन सूरज ने नीचे बैठ कर उसकी टाइट लेगिंग के संगम पर उसकी लेग्गी के ऊपर से ही उसकी चूत पर अपनी होंठों रखा और एक जोरदार चुम्बन करके बोला- ठीक है.. अब जाओ.. बल्कि ठहरो.. मैं पहले जाता हूँ.. तुम बाद में आना..
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उनकी बात सुन कर मैं जल्दी से रसोई में आ गई और फिर सूरज बाहर आ कर बैठ गया और उसने वहीं से मुझे आवाज़ दी- डार्लिंग.. क्या बात है इतनी देर लगा दी है.. कहाँ रह गई हो?
मैं मुस्कुराई और फिर खाने की ट्रे लेकर बाहर आ गई और बाहर आते हुए रश्मि को भी आवाज़ दी- आ जाओ जल्दी से खाने के लिए..

खाने के दौरान भी मेरा दिल खाने में नहीं लग रहा था.. बल्कि मैं दोनों बहन-भाई को ही देखने की कोशिश कर रही थी कि मेरे सामने बैठ कर भी वो कैसी हरकतें कर रहे हैं।

अचानक सूरज बोला- डार्लिंग.. क्या बात है.. तुम खाना ठीक से नहीं खा रही हो.. तुम्हारी तबीयत तो ठीक है ना?
मैं- तबीयत.. हाँ हाँ.. ठीक ही है.. कुछ नहीं हुआ मुझे.. मैं ठीक हूँ।
सूरज- लेकिन तुम ठीक लग तो नहीं रही हो।

अचानक से मेरे दिमाग में एक ख्याल कौंधा- हाँ.. बस दोपहर से थोड़ी तबीयत ठीक नहीं है.. मेरा जिस्म थोड़ा गरम हो रहा है.. और मुझे तो बुखार सा महसूस हो रहा है।
सूरज- तो कोई दवा लिया है ना..
मैं- हाँ.. मैं खाना खाकर कोई दवा लेती हूँ।

ऐसी ही बातें करते हुए हमने खाना खत्म किया और रश्मि ने ही बर्तन समेटने शुरू कर दिए।
कुछ बर्तन लेकर रश्मि रसोई में गई तो बाक़ी के बर्तन उठा कर सूरज भी उसके पीछे ही चला गया.. हालांकि कभी उसने पहले ऐसे बर्तन नहीं उठाए थे।

अन्दर रसोई में बर्तन छोड़ कर उसने बाहर आने में काफ़ी देर लगाई। मुझे पता था कि अन्दर क्या हो रहा होगा.. लेकिन मैं सोफे पर लेटी रही और उठ कर देखने नहीं गई।

थोड़ी देर के बाद सूरज बुखार की दवा लाया और मुझे पानी के साथ दी। मैंने वो दवा खा ली और बोली- तुम लोग एसी वाले कमरे में सो जाओ आज.. मैं रश्मि के कमरे में सो जाऊँगी.. एसी में तो ज्यादा सर्दी लगेगी ना..

सूरज के चेहरे पर फैलती हुई ख़ुशी की लहर को मैंने फ़ौरन ही महसूस कर लिया और दिल ही दिल में मुस्कुरा दी।

मैं उठ कर रश्मि वाले कमरे में गई और वहीं बिस्तर पर लेट गई।

कुछ ही देर में रश्मि मेरा हाल पूछने आई और बोली- भाभी मैं भी आपके पास ही सो जाती हूँ.. थोड़ा रेस्ट ही तो करना है ना..

मैं- नहीं नहीं.. तुम उधर एसी में सो जाओ जाकर.. ऐसे हम बातें ही करते रहेंगे.. मैं थोड़ी देर के लिए आँख लगाना चाहती हूँ.. तुम जाओ.. मैं ठीक हूँ।

रश्मि मुस्कुराई और बोली- लगता है कि भाभी सुबह आपकी जिस्म की गर्मी नहीं निकल पाई ना.. इसलिए आपको बुखार हो गया है।
मैं मुस्कुराई और बोली- तुझे बड़ी बातें आने लग गईं हैं ना..
वो हँसने लगी और बोली- भाभी आप कहो तो मैं आपकी कुछ ‘मदद’ करूँ?

मैं मुस्कुराई और बोली- नहीं रहने दे तू.. और करने ही है..

तू जाके अपने भैया की ‘मदद’ कर देना..
रश्मि थोड़ा घबराई और फिर बोली- नहीं भाभी.. अब मैं जाग रही हूँ ना.. तो उनको कोई ऐसा मौका नहीं दूँगी..

पता नहीं क्यों.. वो सब कुछ मुझसे छुपाना चाहती थी और मैं भी अभी इस गेम को इसी तरह से खेलते रहना चाह रही थी।
खैर.. रश्मि चली गई.. तो मैं भी उसके बिस्तर पर लेट कर सोने का इन्तजार करने लगी।

क़रीब 5 मिनट की बाद मैं उठी और बाथरूम के रास्ते जाकर अन्दर झाँकने लगी.. तो अन्दर कमरे की रोशनी में मेरे ही बिस्तर पर दोनों बहन-भाई एक-दूसरे से लिपटे हुए पड़े थे।
रश्मि- प्लीज़ भैया.. भाभी आ जाएंगी..
सूरज- अरे यार.. नहीं आती वो अब दवा लेकर सो गई है।
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सूरज ने रश्मि को सीधा किया और उसकी टी-शर्ट को ऊपर करने लगा। टी-शर्ट को ऊपर तक उसकी गले तक ले जाकर उसे निकालने लगा।
तो रश्मि बोली- नहीं भैया.. यहीं तक रहने दो.. फिर जल्दी में पहनने में दिक्कत होगी।

सूरज ने ‘ओके’ कहा और फिर झुक कर अपनी बहन की ब्रेजियर के ऊपर से उसकी चूची पर किस करके बोला- बहुत खूबसूरत चूचियाँ हैं तुम्हारे. इतने दिन से देख रहा था और दिल ललचा रहा था।
रश्मि- सिर्फ़ दिल ही नहीं ललचा रहा था.. बल्कि मुझे रातों में तंग भी कर रहे थे ना आप.. और आपने पहले से ही इनको छू-छू कर भी चैक कर लिया हुआ है।

सूरज चौंक कर रश्मि के चेहरे की तरफ देखता हुआ बोला- तो क्या तुमको पता था कि मैं ऐसे कर रहा हूँ?
रश्मि- तो भैया यह कैसे हो सकता है कि कोई किसी लड़की की चूचियों को और नीचे ‘उधर’ भी छुए और उसे पता ही ना चल सके?
सूरज मुस्कुराया और उसकी दोनों चूचियों को जोर से अपनी मुठ्ठी में दबाते हुए बोला- बहुत चालाक हो तुम..

सूरज ने अब झुक कर रश्मि की खूबसूरत चूचियों के बीच उसकी गोरी क्लीवेज को चूम लिया और फिर आहिस्ता आहिस्ता उसमें अपनी ज़ुबान को फेरने लगा।

रश्मि की चूचियों की चमड़ी इतनी सफ़ेद और नरम थी कि जैसे ही वो जोर से वहाँ पर किस करता.. तो उसकी चूचियों पर लाल निशान पड़ जाता।
रश्मि- भैया थोड़ा धीरे करो ना.. क्यों इतने उतावले बन रहे हो..
सूरज- तुम्हारी चूचियाँ भी तो इतनी सेक्सी हैं ना.. कि खुद पर कंट्रोल ही नहीं हो रहा।

रश्मि मुस्कुरा दी और अपने भाई की सिर के बालों में अपना हाथ फेरने लगी।
सूरज ने रश्मि की ब्रा के कप्स को ऊपर को उठाया और उसकी दोनों चूचियों को नंगा कर लिया।
उसकी अपनी सग़ी बहन की खुबसूरत छोटी-छोटी साइज़ की गोरी-गोरी चूचियाँ और गुलाबी निप्पल उसकी नजरों के सामने खुले हुए थे।

सूरज ने झुक कर आहिस्ता से अपनी बहन की नंगी चूचियों को चूमा और फिर अपने होंठ उसके गुलाबी छोटे से निप्पल पर रख कर एक किस कर लिया।
रश्मि का जिस्म तड़फ उठा।
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सूरज ने अब आहिस्ता-आहिस्ता उसके निप्पलों को अपने होंठों में भर लिया और चूसने लगा।

कभी अपनी बहन के एक निप्पल को अपने मुँह में डालता और कभी दूसरे निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगता।
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सूरज का एक हाथ फिसलता हुआ नीचे को अपनी बहन की कुँवारी चूत की तरफ आने लगा और फिर अपनी बहन की टाइट लैगी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा।
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कुछ देर तक रश्मि की चूत को सहलाने और उसकी चूचियों को चूसने के बाद सूरज उठ गया और नीचे उसकी टाँगों की तरफ आ गया।

सूरज ने उसकी लेग्गी को पकड़ा और नीचे खींच कर उतारने लगा। रश्मि ने एक बार उसे रोका.. लेकिन फिर खुद से ही अपनी गाण्ड को ऊपर उठा दिया और सूरज ने अपनी बहन की लेग्गी को उसकी टाँगों से निकाल कर बिस्तर पर रख दिया।

अब रश्मि का निचला जिस्म लगभग पूरी तरह से उसके भाई की सामने नंगा था। रश्मि ने फ़ौरन से अपनी चूत को छुपा लिया।
सूरज ने मुस्कुरा कर उसे देखा और फिर उसका हाथ पकड़ कर उसकी चूत से हटा दिया।

रश्मि की बिल्कुल गोरी रूई जैसे नरम बालरहित चूत.. अपने भाई की आँखों की सामने थी।
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सूरज- वाउ.. क्या प्यारी चूत है.. लगता है तुमने आज ही हेयर रिमूविंग की है।

रश्मि ने शर्मा कर कहा- हाँ सुबह आपके जाने के बाद किए थे।
सूरज- यानि कि तुमने मेरे लिए अपनी चूत के बाल साफ़ किए हैं ना?
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रश्मि शर्मा कर बोली- अब ज्यादा भी गलतफहमी में ना रहें आप.. मैंने तो वैसे ही बस रुटीन में साफ़ कर लिए थे। अब मुझे क्या पता था कि आप आकर इसे देखोगे?

सूरज हंसा और अपनी होंठ रश्मि की चूत पर रख दिए और उसकी कुँवारी मुलायम चूत को चूम लिया।
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फिर सूरज ने अपनी कुँवारी बहन की कुँवारी चूत की लबों को खोला और अपनी ज़ुबान से उसे अन्दर से चाटने लगा।
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धीरे-धीरे जैसे-जैसे उसकी ज़ुबान अपनी बहन की चूत को चाट रही थी.. तो उसके साथ-साथ ही रश्मि की हालत खराब होती जा रही थी।
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Update- 41
आपने अभी तक पढ़ा..

रश्मि शर्मा कर बोली- अब ज्यादा भी गलतफहमी में ना रहें आप.. मैंने तो वैसे ही बस रुटीन में साफ़ कर लिए थे। अब मुझे क्या पता था कि आप आकर इसे देखोगे?
सूरज हंसा और अपनी होंठ रश्मि की चूत पर रख दिए और उसकी कुँवारी मुलायम चूत को चूम लिया।
फिर सूरज ने अपनी कुँवारी बहन की कुँवारी चूत की लबों को खोला और अपनी ज़ुबान से उसे अन्दर से चाटने लगा।
धीरे-धीरे जैसे-जैसे उसकी ज़ुबान अपनी बहन की चूत को चाट रही थी.. तो उसके साथ-साथ ही रश्मि की हालत खराब होती जा रही थी।
अब आगे..

वो अपने भाई के सिर पर अपना हाथ रख कर उसे अपने चूत पर दबा रही थी और आँखें बंद करके अपनी गाण्ड को ऊपर उठाते हुए अपनी चूत को उसके मुँह पर रगड़ने की कोशिश कर रही थी।
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कुछ देर तक अपनी बहन की कोरी चूत को चाटने के बाद सूरज खड़ा हुआ और अपनी बहन के सामने अपनी शॉर्ट्स को उतार कर बिल्कुल नंगा हो गया।
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फिर लेटी हुई रश्मि के ही ऊपर आ गया और अपनी मोटे खड़े हुए लंड को अपनी बहन की दोनों चूचियों की बीच में रगड़ने लगा।
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रश्मि मुस्कुरा कर अपने भाई के लंड को देख रही थी।

सूरज ने अपनी बहन की दोनों छोटी-छोटी चूचियों के बीच अपने लंड को दबाया और फिर आगे-पीछे को करते हुए अपना लंड उसकी चूचियों के बीच आगे पीछे करने लगा। आगे को जाता तो उसका लंड रश्मि की ठोड़ी को टकराता था और उसकी गोटियाँ नीचे अपनी बहन के पेट पर रगड़ खा रही थीं।
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थोड़ी देर के बाद सूरज बोला- रश्मि इसे मुँह में लेकर थोड़ा सा चूसो ना..
रश्मि ने अपने भाई के लंड को अपने हाथ में पकड़ा और बोली- नहीं भाई.. यह तो बहुत गंदा होता है.. मैं कैसे इसे मुँह में ले सकती हूँ।
सूरज- अरे यार कुछ भी गंदा नहीं होता.. इसे मुँह में लेकर तुम्हारी भाभी भी तो चूसती हैं ना..
रश्मि इठलाते हुए बोली- वो तो आपकी बीवी हैं.. मैं आपकी क्या लगती हूँ.. बहन ना..

सूरज अपने लंड की टोपी को अपनी बहन के गुलाबी होंठों पर आहिस्ता-आहिस्ता फिराता हुआ बोला- तुम आज से मेरी बहन भी हो और मेरी बीवी भी हो..
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रश्मि- भाई.. अगर मुझे अपनी बीवी बनाना है.. तो फिर कर लो मुझसे भी शादी..
सूरज- झुक कर अपनी बहन के होंठों को चूमते हुए बोला- मेरी जान यह तो दिल की बात होती है.. जिसे भी दिल से अपना बना लो.. वो बीवी ही होती है।
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सूरज ने थोड़ा सा जोर लगाया तो रश्मि ने अपने होंठों को थोड़ा सा खोला और उसके लण्ड को अन्दर दाखिल होने का रास्ता देने लगी।
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सूरज ने भी आहिस्ता से अपनी लंड को उसके होंठों के बीच पुश किया और साथ ही रश्मि ने आहिस्ता आहिस्ता उसके लौड़े के टोपे के ऊपर अपनी ज़ुबान फेरनी शुरू कर दी।

रश्मि ने अपने दोनों होंठों के बीच अपने भाई के लंड के टॉप को पकड़ा और आहिस्ता से दोनों होंठों को बंद करके उसे चुम्बन कर लिया।
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सूरज ने अपना लंड उसके होंठों से निकाला और धीरे-धीरे उसके होंठों के ऊपर टकराने लगा।
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उसके लण्ड से प्रीकम की छोटी-छोटी चमकीली बूँदें निकल रही थीं.. जो कि उसकी बहन के होंठों से लग कर एक तार की तरह से उसके लण्ड से जुड़ रही थीं।

रश्मि ने अपनी ज़ुबान बाहर निकाली और आहिस्ता आहिस्ता उसके लण्ड के अगले हिस्से पर फेरते हुए बोली- भाई अगर भाभी ने देख लिया ना.. तो बहुत बुरा होगा।

सूरज पीछे होकर रश्मि के ऊपर लेट गया और अपने नंगे लंड को अपनी बहन की नंगी चूत पर रगड़ते हुए बोला- कुछ नहीं होगा मेरी जान.. आज तो मैं तुम्हारी यह कुँवारी चूत लेकर ही रहूँगा।
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रश्मि ने अपना हाथ नीचे ले जाकर अपने भाई का लंड अपने कंट्रोल में लिया और आहिस्ता आहिस्ता अपनी चूत के दाने पर रगड़ते हुए बोली- नहीं भाई.. प्लीज़ ऐसा नहीं करो न.. हम कुछ भी नहीं कर सकते.. आप इसे पीछे करो न.. इससे तो आप मुझे और भी पागल कर रहे हैं।

रश्मि ने यह बोला और दूसरे हाथ से अपने भाई के सिर के बालों को पकड़ कर अपनी तरफ खींच कर उसके होंठों को चूसने और उसे चूमने लगी।
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धीरे-धीरे दोनों की सिसकारियां बढ़ती जा रहा था। रश्मि ने अपनी दोनों टाँगें ऊपर कीं और उनको अपने भाई की कमर के गिर्द उसके चूतड़ों पर रख कर उसके जिस्म को जकड़ लिया.. जैसे कि उसका भाई उसे इतना गरम करने के बाद कहीं छोड़ कर भागने लगा हो।

सूरज भी अपनी बहन की चूचियों को दबाते हुए उसके होंठों को चूस रहा था और पीछे से हिलते हुए अपनी लंड को अपनी बहन की चूत पर रगड़ रहा था।
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इधर मेरी हालत भी बहुत ही पतली हो रही थी.. मेरा हाथ मेरी चूत पर था और मेरी चूत बिल्कुल पानी-पानी हो रही थी।
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सूरज उठा और अपनी बहन की दोनों टाँगों के बीच में बैठते हुए अपने लंड को अपने हाथ में पकड़ा और उसकी टोपी को रश्मि की कुँवारी प्यासी चूत पर फिर से रगड़ने लगा।
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अगले ही किसी भी पल में सूरज अपना लंड अपनी कुँवारी बहन की चूत में दाखिल करने वाला था।

मेरा ख्वाब पूरा होने वाला था कि ज़िंदगी में पहली बार किसी भाई को अपनी बहन को चोदते हुए देखूँ.. लेकिन पता नहीं क्यों मैं अभी उन दोनों बहन-भाई को ऐसा करने नहीं देना चाहती थी।
मैं अभी इन दोनों की चूत और लंड की प्यास को बरक़रार रखना चाहती थी ताकि यह दोनों एक-दूसरे के लिए अभी थोड़ा और भी तड़फें..

यही सोच कर मैं अपने कमरे की तरफ गई और सूरज को आवाज़ दी।
दूसरी आवाज़ के साथ ही रश्मि को छोड़ कर सूरज भागता हुआ आया। उसने अपने कपड़े पहन लिए हुए थे।

वो बोला- हाँ क्या बात है.. तुम ठीक तो हो?
मैंने उसे पानी लाने को कहा और वो रसोई में गया.. तो मैं उसके चेहरे की बेबसी और झुँझलाहट देख कर मेरी हँसी छूट गई।
कुछ देर के बाद मैं भी अन्दर उन दोनों के साथ ही जाकर लेट गई।
शाम को मेरी आँख खुली तो रश्मि कमरे से जा चुकी हुई थी और सिर्फ़ मैं और सूरज ही बिस्तर पर थे।

हम कुछ देर तक बातें करते रहे और फिर रश्मि चाय लेकर आ गई लेकिन अपनी चाय यह कहते हुए बाहर ले गई कि उसे कुछ काम करना था।

मैंने और सूरज ने चाय पी और फिर मैं रेस्ट करने का बहाना करके लेट गई और सूरज कमरे से बाहर चला गया।
मैंने फ़ौरन उठ कर देखा तो रश्मि सोफे पर बैठी हुई थी और सूरज उसके पीछे से झुक कर उसकी चूचियों को दबा रहा था।
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रश्मि खुद को उससे छुड़ाते हुए बोली- भाई आपको तो हर वक़्त यही काम सूझता रहता है.. आप न..

भाभी को भी हर वक़्त तंग किए रखते हो.. और अब तो आपको सताने के लिए मैं भी मिल गई हूँ।

सूरज रश्मि के सामने की तरफ आया और अपने शॉर्ट में हाथ डाल कर अपना लंड बाहर निकाल कर बोला- एक किस तो कर दो प्लीज़..
रश्मि मेरे कमरे की तरफ देखते हुए बोली- भाई.. आपको शर्म नहीं आती क्या.. अगर अभी भाभी बाहर आ जाएं तो.. और यह क्या है कि हर वक़्त इसी हालत में ही खड़ा रहता है?

सूरज- बस जब से इसने अपनी प्यारी सी बहना की कुँवारी चूत का दीदार किया है ना.. तो यह बैठता ही नहीं है.. हर वक़्त तुम्हारी चूत को याद कर करके खड़ा हुआ ही रहता है। जब तक अब यह तेरी चूत की अन्दर नहीं चला जाएगा.. इसको सुकून नहीं आने वाला।

रश्मि सूरज के लंड को अपने हाथ में लेकर आहिस्ता आहिस्ता सहलाते हुए बोली- भाई प्लीज़, कोई जगह तो देख लिया करो ना..
सूरज अब नीचे रश्मि के पास ही बैठ गया। अब उन दोनों की पीठ मेरी तरफ थी.. तो मैं नहीं देख सकती थी कि वो दोनों क्या कर रहे हैं। इस हालत में वो दोनों सेफ थे.. लेकिन मैं भी उनको डिस्टर्ब नहीं करना चाहती थी।

सूरज- बस अब तो ठीक है ना.. यहाँ से तेरी भाभी भी हम दोनों को नहीं देख पाएगी.. चल अब जल्दी से नीचे आजा और इसे चूसा लगा दे।
रश्मि हँसी और बोली- भाई आप बाज़ आने वाले नहीं हो.. और ना ही मानने वाले हो..
यह कह कर रश्मि ने एक नज़र मेरे कमरे के दरवाजे की तरफ डाली और फिर झुक कर शायद अपने भाई का लंड चूसने लगी।
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रश्मि- भाई एक ही बार काट कर खा ना लूँ इसको.. जो यह हर वक़्त मुझे तंग करता रहता है।
सूरज अपनी बहन के रेशमी बालों में हाथ फेरते हुए बोला- काट कर खा लोगी तो फिर तुम्हारी चूत की प्यास कौन बुझाएगा मेरी जान?

मैं अपने कमरे के बाथरूम में आई और दूसरे दरवाजे में से बाहर झाँका.. तो अब यह जगह उनको देखने के लिए ठीक थी.. और इधर से दोनों की हरकतें साफ़ नज़र आ रही थीं।

सूरज ने अपना हाथ नीचे झुकी हुई अपनी बहन की शर्ट की के नीचे डाला हुआ था और उसकी नंगी कमर को सहला रहा था और कभी उसकी चुस्त लैगी में फंसे हुए उसके चूतड़ों को सहलाने लगता था।
दूसरी तरफ रश्मि भी अपने भाई के लंड को मुँह में लेकर चूस रही थी और कभी उसे चाट लेती थी।
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सूरज- यार ठीक से चूस ना मेरा लंड..

रश्मि- भाई मैं कौन सा लंड चूसती रहती हूँ.. जो मुझे आता है कि कैसे चूसते हैं.. पहली बार तो चूस रही हूँ। मुझसे तो ऐसे ही चूसा जाएगा.. चुसवाना है तो बोलो.. नहीं तो मैं चली।
सूरज- अच्छा अच्छा.. ठीक है.. जैसे भी चूस ले.. ठीक है, कोई बात नहीं.. आहिस्ता आहिस्ता तुझे मेरा लंड ठीक से चूसना भी आ जाएगा। तेरे पति तक पहुँचने से पहले तुझे बिल्कुल एक्सपर्ट बना दूँगा.. देखना तू..।
जाहिरा- मेरे पति के लिए कुछ बाकी छोड़ोगे.. तभी तो जाऊँगी ना उसके पास बरना फिर जाने का क्या फ़ायदा?

दोनों हँसने लगे..

सूरज- चल अब जल्दी से मेरा पानी निकाल दे ना..

Update- 42
आपने अभी तक पढ़ा..
रश्मि- भाई मैं कौन सा लंड चूसती रहती हूँ.. जो मुझे आता है कि कैसे चूसते हैं.. पहली बार तो चूस रही हूँ। मुझसे तो ऐसे ही चूसा जाएगा.. चुसवाना है तो बोलो.. नहीं तो मैं चली।

सूरज- अच्छा अच्छा.. ठीक है.. जैसे भी चूस ले.. ठीक है, कोई बात नहीं.. आहिस्ता आहिस्ता तुझे मेरा लंड ठीक से चूसना भी आ जाएगा। तेरे पति तक पहुँचने से पहले तुझे बिल्कुल एक्सपर्ट बना दूँगा.. देखना तू..
रश्मि- मेरे पति के लिए कुछ बाकी छोड़ोगे.. तभी तो जाऊँगी ना उसके पास बरना फिर जाने का क्या फ़ायदा?
दोनों हँसने लगे..
सूरज- चल अब जल्दी से मेरा पानी निकाल दे ना..
अब आगे..

रश्मि- नहीं भाई.. यहाँ पर सब कुछ खराब हो जाएगा.. मैं नहीं निकालती।
सूरज- तो मेरा पानी मुँह में ले लेना ना..
रश्मि- छी: छी: कितनी गंदी बातें करते हो ना तुम.. मैं तुम्हारा पानी अपने मुँह में क्यों लूँ?

अपने भाई का लंड रगड़ते-रगड़ते.. जैसे वो छूटने वाला हुआ तो रश्मि ने उसका लंड उसके शॉर्ट्स के अन्दर ही डाल दिया और ऊपर से दबा दिया।

इसी के साथ ही सूरज का पूरे का पूरा पानी उसके शॉर्ट्स के अन्दर ही निकलने लगा।
‘ऊऊऊहह.. आआआ..अह.. सस्स्स्स.. स्सस्स..’ की आवाजों के साथ ही सूरज के लंड ने सारा पानी अपने शॉर्ट्स में ही निकाल दिया।
पूरा पानी निकलने के बाद सूरज बोला- रश्मि तुम बहुत शैतान हो.. देखो तुमने मेरा सारा शॉर्ट्स खराब कर दिया है..
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रश्मि ने उसके शॉर्ट्स को नीचे को खींचा.. और अन्दर हो रही सारी मलाई को फैलते देखा तो हँस कर बोली- अब बहुत अच्छा लग रहा है.. है न?
सूरज बोला- कोई बात नहीं.. आज रात को तेरी चूत से सारा बदला लूँगा।
रश्मि- क्या मतलब?
सूरज- मतलब यह कि मैं आज ही रात को तेरी कुँवारी चूत चोदूंगा।

रश्मि- भाई.. आपको शर्म नहीं आएगी क्या.. अपनी ही सग़ी बहन को चोदते हुए?
सूरज- जब तुझे अपने भाई का लंड चूसते हुए शर्म नहीं आई.. तो मुझे भी तेरी चूत चोदते हुए कोई शरम नहीं आएगी।
रश्मि हँसते हुए बोली- लेकिन भाई भाभी भी तो हैं ना?

सूरज- उसकी फिकर ना कर.. उसे मैं रात को दूध में नींद की गोली मिलाकर दे दूँगा.. तो खुद ही सोई रहेगी।
रश्मि अपने खुले हुए मुँह पर अपना हाथ रखते हुए बोली- भाई कितने गंदे हो तुम?
सूरज- गंदे नहीं.. बेचैन कहो कि कितना बेचैन हूँ तुम्हें चोदने के लिए..

मुझे सूरज के प्लान का पता हो चुका था। मैं मुस्कुरा दी.. क्योंकि मैं भी आज रश्मि को अपने भाई के लंड से चुदवा कर उसका कुँवारापन तुड़वाना चाहती थी.. इसलिए मैंने सूरज के साथ सहयोग करने का फ़ैसला कर लिया।

रात के खाने के बाद मैं कमरे में पहले ही आ गई और लेट गई।
थोड़ी देर के बाद सूरज आया और मुझे दूध का गिलास और दवा दे कर बोला- यह दवा ले लो.. सुबह तक तबीयत ठीक हो जाएगी।

मैंने उसे दोनों चीजें साइड की टेबल पर रखने को कहा।
फिर वो चला गया.. उसकी जाते ही मैंने वो दूध और दवा बाथरूम में गिरा दी और लेट गई।

अब फिर से उठ कर मैंने बाहर झाँका तो दोनों बहन-भाई की मस्तियाँ जारी थीं। टीवी देखते हुए भी वो रश्मि को अपनी बाहों में खींचे हुए था और उसकी चूचियों से खेल रहा था..
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कभी उसको चूम रहा था।
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रश्मि अपनी अदाएं दिखाते हुए उसे तंग कर रही थी ‘भाई.. क्या है ना आपको.. मेरे ही पीछे पड़े रहते हो.. थोड़ा सबर नहीं हो सकता क्या?’
सूरज- नहीं हो रहा ना सबर मुझसे.. मेरा तो दिल कर रहा है कि अभी डाल दूँ तेरी चूत में अपना लंड..
रश्मि- भाई.. मैं आपको कुछ भी ऐसा-वैसा नहीं करने दूँगी.. पता भी है आपका यह कितना मोटा है.. मेरी तो वैसे ही फाड़ देगा..
रश्मि ने सूरज के लंड को छूते हुए कहा।

सूरज- हाय मेरी जान.. मुझे तेरी चूत फाड़नी ही तो है.. आज की रात..
रश्मि- नहीं भाई.. प्लीज़ फिर कभी कर लेना.. आज नहीं.. आज तो भाभी भी हैं ना.. तो ऐसे में ठीक नहीं है ना..
सूरज- अरे कुछ नहीं होता यार.. तेरी खातिर तो उसे नींद की गोलियां दीं हैं.. तू उसकी फिकर ना कर..

चल जा उसे देख कर बता.. सो गई होगी वो.. और फिर थोड़ा मेकअप करके तैयार हो जा.. मैं आता हूँ.. फिर तुझे चोदता हूँ..

रश्मि मुस्कुराते और शरमाते हुई उठी और कमरे की तरफ बढ़ी.. तो मैं जल्दी से बिस्तर पर लेट गई और सोती बन गई।
रश्मि कमरे में आई और मेरे बिस्तर के पास खड़ी होकर मुझे आवाजें देने लगी- भाभी भाभी..

लेकिन ज़ाहिर है कि मैंने कोई जवाब नहीं दिया.. फिर रश्मि ने मेरी चूचियों के ऊपर हाथ रख कर आहिस्ता आहिस्ता सहलाते हुए मुझे उठाना चाहा..
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लेकिन मैंने कोई जवाब नहीं दिया।
रश्मि का हाथ मेरे जिस्म पर से फिसलता हुआ मेरी चूत तक आ गया और मेरे पजामे के ऊपर से ही मेरी चूत को सहलाते हुए बोली।
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रश्मि- मेरी प्यारी भाभी.. आज तो आपके पति मेरे भी पति बनने जा रहे हैं.. आज भाई का लंड मेरी चूत में भी जाने वाला है.. जैसे आपकी चूत में जाता है.. पता नहीं कैसे होगा यह सब.. और कैसा हो पाएगा..रश्मि मुस्कुराते हुए बोली आज से में आपके सौतन बन जाऊंगी...

फिर रश्मि ने झुक कर मेरे गाल को चूमा। फिर जाकर ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठ गई और मेकअप करने लगी।
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मैं थोड़ी सी आँखें खोल कर उसे देख रही थी और वो कुछ गुनगुनाते हुए मेकअप कर रही थी। थोड़ी ही देर में दरवाज़ा खुला और सूरज भी अन्दर कमरे में आ गया।

उसने सीधा रश्मि के पीछे जाकर उसके नंगे कन्धों पर झुक कर चूमा और उसकी गर्दन पर अपनी ज़ुबान फेरने लगा।

रश्मि ने उसे पीछे को धक्का दे दिया- प्लीज़ भाई.. थोड़ा तो सबर करो ना.. और जाओ वहाँ बिस्तर पर जाकर बैठ जाओ..
सूरज मुस्कुराया- जी राजकुमारी जी..
ये कह कर बिस्तर पर मेरे पास आकर बैठ गया।

वो बिस्तर की पुश्त टेक लगा कर अधलेटा सा होकर मेरी तरफ देखने लगा।

फिर उसने अपने लौड़े को मसलते हुए रश्मि को आवाज़ दी- आ भी जा.. जल्दी से अब..
जिस तरह बिस्तर पर लेट कर सूरज अपनी बहन को आइने के सामने तैयार होते हुए देख और उसका इन्तजार कर रहा था.. बिल्कुल ऐसा ही लग रहा था जैसे कि वो उसकी बीवी हो और यह उसका चोदने को बेकरार पति हो..

तभी रश्मि स्टूल से उठी और बिस्तर की तरफ आई और बिस्तर के क़रीब रुक कर बोली- भाई हमें दूसरे कमरे में चले जाना चाहिए.. यहाँ भाभी सो रही हैं।
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सूरज- अरे नहीं यार.. यहाँ एसी चल रहा है.. उधर गर्मी होगी और तुम इसकी फिकर ना करो.. यह तो नींद की दवा लेकर सोई हुई है।
यह कहते हुए सूरज ने रश्मि का हाथ पकड़ा और उसे बिस्तर पर अपने ऊपर घसीट लिया।

रश्मि सूरज के ऊपर आ गिरी और सूरज ने उसे अपने बाँहों में कसते हुए चूमना शुरू कर दिया।
कुछ देर तक दोनों एक-दूसरे को किस करते रहे।
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फिर रश्मि सीधी होकर सूरज के ऊपर ही दोनों तरफ पैर डाल कर बैठ गई
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और अपना हाथ सूरज के नंगी छाती पर उसके सीने के बालों में फेरते हुए
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बोली- भाई क्या सच में आप मेरे साथ यह सब कुछ करना चाहते हैं?
सूरज- हाँ मेरी जान.. मैं तो तुझे चोदने के लिए मरा जा रहा हूँ..
रश्मि- क्या सच में आप मुझे इतना ज्यादा प्यार करते हो?

सूरज उसकी चूचियों से खेलते हुए बोला- हाँ मेरी जान.. इसका सुबूत यह तुम्हारी गाण्ड के नीचे दबा हुआ मेरा लंड भी तो है ना.. जो कि तेरी चूत में घुसने की लिए बेचैन हो रहा है..

सूरज ने रश्मि के टॉप को पकड़ा और आहिस्ता आहिस्ता ऊपर उठाने लगा और फिर अगले ही पल में उसके जिस्म से उतार कर परे फेंक दिया।
रश्मि ने फ़ौरन ही अपने हाथ अपनी चूचियों पर रख लिए तो सूरज बोला- अब मुझसे क्यूँ छुपा रही हो?
रश्मि- भाई वो भाभी की वजह से शरम आ रही है मुझे..

सूरज हँसने लगा और फिर उसे अपने ऊपर थोड़ा झुका कर उसकी खुबसूरत चूचियों के गुलाबी निप्पलों को चूसने लगा।
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फिर उसने एक मम्मे को अपनी मुठ्ठी में भर लिया और अपना दूसरा हाथ मेरी चूची पर रख कर बोला- रश्मि तुम्हारी चूची.. तुम्हारी भाभी से छोटी हैं लेकिन तुम्हारी ज्यादा टाइट हैं..
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रश्मि- अरे अरे.. भाई यह क्या कर रहे हो ना.. छोड़ो उनको.. वो उठ जाएंगी।
सूरज- नहीं उठेंगी यार.. आओ तुमको इसकी चूचियों खोल कर दिखाता हूँ।
यह कहते हुए सूरज ने मेरे टॉप को नीचे खींचा और मेरी चूचियों को भी नंगी कर दिया।
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रश्मि तो पहले भी मेरा सब कुछ देख चुकी हुई थी.. इसलिए उसे हैरत तो नहीं थी.. लेकिन फिर भी वो अपने भाई के आगे ऐसी शो कर रही थी.. जैसे कि पहली बार मुझे नंगी देख रही हो।

सूरज ने रश्मि का एक हाथ मेरी चूची पर रखा तो रश्मि बोली- प्लीज़्ज़्ज़.. भाई ना करो ना.. छोड़ो भाभी को..

आख़िर आप करना क्या चाहते हो?
सूरज- सच पूछा तूने.. तो सुन.. मैं तुम दोनों को एक साथ नंगी देखना चाहता हूँ और तुम दोनों को एक साथ चोदना चाहता हूँ।
रश्मि- नहीं नहीं.. भाई ऐसा नहीं हो सकता..

सूरज ने रश्मि को दोबारा अपनी बाँहों में खींचा और उसे चूमते हुए बोला- हाँ मुझे भी पता है कि ऐसा होना ना मुमकिन है।
यह कहते हुए सूरज ने रश्मि को बिस्तर पर मेरे साथ लिटाया और फिर खुद उसके ऊपर आ गया और ऊपर झुक कर उसके गालों और होंठों को चूमने लगा।

आहिस्ता आहिस्ता उसके जिस्म को चूमते हुए वो नीचे को आने लगा। नीचे आकर उसने रश्मि के पजामे को भी उतार दिया।
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अब पहली बार उसकी बहन पूरी की पूरी उसकी आँखों के सामने नंगी थी।

एक पल के लिए सूरज अपनी बहन के नंगे जिस्म को देखता रहा.. फिर उसका हाथ आगे बढ़ा और अपनी बहन की कुँवारी अनछुई और बिना बालों वाली चूत को सहलाने लगा।
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‘इस्स्स.. ईस्स्स्स.. आआहह.. उम्म्म्म्..’

एक मर्द का अपने भाई का हाथ अपनी चूत पर लगते ही रश्मि की चूत गरम होने लगी और उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं।

अपनी सग़ी बहन की चूत पर अपनी उंगली फेरते हुए आहिस्ता आहिस्ता अपनी उंगली को उसकी चूत की दरार में घुसेड़ रहा था और उसकी उंगली पर उसकी अपनी ही बहन की चूत का पानी लग रहा था।
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सूरज ने अपनी उंगली ऊपर की ओर रश्मि को दिखाते हुए कहा- देख.. तेरी चूत कितना पानी छोड़ रही है.. तेरी चूत मेरे लण्ड से चुदने लिए कितनी प्यासी और चुदासी हो रही है।
रश्मि ने शर्मा कर आँखें बंद कर लीं।

Update- 43
आपने अभी तक पढ़ा..

एक मर्द का अपने भाई का हाथ अपनी चूत पर लगते ही रश्मि की चूत गरम होने लगी और उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं।
अपनी सग़ी बहन की चूत पर अपनी उंगली फेरते हुए आहिस्ता आहिस्ता अपनी उंगली को उसकी चूत की दरार में घुसेड़ रहा था और उसकी उंगली पर उसकी अपनी ही बहन की चूत का पानी लग रहा था।

सूरज ने अपनी उंगली ऊपर की ओर रश्मि को दिखाते हुए कहा- देख.. तेरी चूत कितना पानी छोड़ रही है.. तेरी चूत मेरे लण्ड से चुदने लिए कितनी प्यासी और चुदासी हो रही है।
रश्मि ने शर्मा कर आँखें बंद कर लीं।
अब आगे..

सूरज ने रश्मि की चूत की पानी से गीली हो रही उंगली को उसके लबों से लगाया और गीला पानी उसके होंठों पर मलने लगा।
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रश्मि ने अपने सिर को इधर-उधर हिलाना शुरू कर दिया.. लेकिन सूरज ने अपनी उंगली उसके होंठों के बीच में डाल कर उसके मुँह में डाल ही दी और उसे अपनी ही चूत का पानी चाटने पर मजबूर कर दिया।
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सूरज ने रश्मि की दोनों टाँगों के बीच थोड़ी जगह बनाई और बीच में लेट गया।

अब रश्मि की एक टाँग मेरे ऊपर थी। सूरज ने बीच में बैठ कर अपनी बहन की कुँवारी चूत को एक किस किया
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और फिर अपनी ज़ुबान की नोक को उसकी चूत के लबों की बीच की लकीर पर ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर को फेरने लगा।
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आहिस्ता-आहिस्ता उसके दोनों लबों को खोल कर अपनी बहन की कुँवारी चूत के सुराख को अपने सामने किया और फिर अपनी ज़ुबान की नोक से रश्मि की चूत के सुराख को छूने लगा।
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आहिस्ता आहिस्ता उसकी चूत के सुराख को चाटते हुए सूरज ने अपनी ज़ुबान को अन्दर डालना शुरू कर दिया।
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रश्मि का बुरा हाल हो रहा था.. वो अपने भाई के सिर के बालों को पकड़ कर खींच रही थी और नोंच रही थी। उसकी चूत पानी-पानी हो रही थी और वो अन्दर से बिल्कुल चिकनी हो चुकी हुई थी।
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सूरज ने अपनी एक उंगली उसकी चूत के अन्दर डाली.. तो उसे अपने बहन की चूत के अन्दर का कुँवारा परदा रोड़ा अटकाता महसूस हुआ।
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वो उसे छूते हुए बोला- मेरी जान.. आज तेरी चूत के इस परदे को फाड़ कर तेरी चूत का ‘एंट्री गेट’ खोल दूँगा.. फिर बड़ी आसानी से तेरी चूत में लंड जा सकेगा।
रश्मि अपनी आँखें बंद किए हुए पड़ी लंबी-लंबी साँसें ले रही थी।
थोड़ी देर के बाद सूरज उठा और अपना शॉर्ट्स उतार कर अपने अकड़े हुए लंड को पकड़ कर उसकी चूत के सामने बैठ गया।

सूरज अपने हाथ में लौड़े को पकड़ कर अपनी बहन की चूत की ऊपर रगड़ने लगा।
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उसके लण्ड की टोपी भी रश्मि की चूत के पानी से गीली होती जा रही थी।
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उधर अपने इतने क़रीब बहन-भाई का इस क़दर सेक्सी खेल होता हुआ देख कर मेरी अपनी चूत भी पानी छोड़ रही थी।
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अगर इस वक़्त सूरज मेरी चूत को छू लेता.. तो यक़ीनन मैं पकड़ी जाती कि मैं जाग रही हूँ और यह सब देखते हुए मस्त हो रही हूँ।

सूरज ने अपने दोनों हाथों की उंगलियों से अपनी सग़ी बहन की चूत के दोनों होंठों को खोला और अपनी लंड की मोटी फूली हुई टोपी.. जो कि उसकी बहन की चूत के पानी से ही गीली होकर चमक रही थी.. उसे उसकी चूत के सुराख पर रखा और धीरे-धीरे अपना लंड अन्दर घुसेड़ने लगा।
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रश्मि ने पहले तो आँखें खोल कर डर के मारे अपने भाई की तरफ देखा और अपने दोनों हाथों को उसके सीने पर रखते हुए रोकने की कोशिश की.. लेकिन फिर कुछ कहे बिना ही चुप होकर अपनी आँखें बंद कर लीं।
वो अपनी चूत में दाखिल होने वाले अपने भाई के लंड का इन्तजार करने लगी।

सूरज ने थोड़ा सा जोर लगाया तो उसके लण्ड की मोटी टोपी फिसल कर उसकी बहन की चूत के सुराख के पहले छल्ले के अन्दर दाखिल हो गई..
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इसी के साथ ही रश्मि की एक हल्की सी चीख निकल पड़ी- उई.. मां.. आह…!
सूरज-कुछ नही हुआ.. मेरी जान.. अभी तो कुछ भी नहीं हुआ.. अभी तो मैंने टोपा को थोड़ा सा अन्दर फंसाया ही है।

फिर सूरज ने रश्मि की दोनों टाँगों को पकड़ कर ऊपर किया और उसकी जाँघों को अपने काबू में करते हुए अपने लंड के सुपारे को ही थोड़ा-थोड़ा आगे-पीछे करने लगा।
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इस थोड़ी-थोड़ी सी हरकत से रश्मि भी अपने भाई के लंड से गरम होने लगी और उसे भी मज़ा आने लगा- ईसस्स.. ओह.. इस्स्स.. आआआहह.. ओऊम्मकम.. ऊऊऊहह.. उफफ.. मा..रे..
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जैसे ही रश्मि के मुँह से हल्की-हल्की सी सिसकारियाँ निकलने लगीं..
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तो धीरे-धीरे सूरज ने अपने लंड को और भी अन्दर डालना शुरू कर दिया।
थोड़ी ही देर में उसका लंड अपनी बहन की चूत के परदे से टकराने लगा।

कुछ देर तक रुक कर.. वो उस परदे को अपने लंड की टोपी से सहलाते हुए सूरज ने एक हल्का सा धक्का मारा..
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तो पूरी तरह गरम हो चुकी उसकी बहन की चूत का परदा फटता चला गया और उसका लंड अन्दर दाखिल हो गया।
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रश्मि की एक हल्की सी मगर तेज चीख निकली.. लेकिन इसी के साथ ही सूरज ने उसके ऊपर लेटते हुए उसके होंठों को अपने होंठों में जकड़ लिया और उसे चूसने लगा।
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पीछे से वो बिल्कुल सख्त था.. फिर आहिस्ता आहिस्ता अपने लंड को अन्दर बाहर करते हुए वो अपनी बहन की चूत को चोदने लगा।
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ऐसा लग रहा था कि रश्मि बेसुध सी हो गई थी.. पर तभी उसके हाथों की मुठ्ठियों से चादर को खिंचते देखा तो मैं समझ गई कि रश्मि को अपनी सील टूटने से बेहद दर्द हो रहा था और वो मेरे कारण ही अपनी चीख को बाहर नहीं निकलने दे रही है.. बहुत ही हिम्मत वाली लड़की थी।
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अब धकापेल चुदाई चालू हो चुकी थी
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शायद सूरज के लौड़े ने चूत में अपनी जगह बना ली थी..
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क्योंकि तभी रश्मि ने भी अपने दोनों बाज़ू अपने भाई की कमर की गिर्द डाल लिए थे और वो उससे लिपट गई थी..
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इसका साफ़ मतलब था कि रश्मि को अब चुदने में मजा आने लगा था।

अपने हाथों को रश्मि की कमर के नीचे लाते हुए सूरज ने अपनी बहन के जिस्म को अपनी बाँहों में भर लिया और आहिस्ता आहिस्ता अपने धक्कों की रफ़्तार को बढ़ाते हुए अपनी बहन की चुदाई में तेज़ी लाने लगा।
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पूरा बिस्तर उसके धक्कों की ताक़त से हिल रहा था और मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे उसका लंड मेरी ही चूत में जा रहा हो।

सूरज एक टाइट और कुँवारी चूत को पहली बार चोद रहा था..
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तो कैसे ज्यादा देर तक बर्दाश्त कर सकता था.. इसलिए कुछ ही देर गुज़री कि सूरज ने अपने लंड को पूरा का पूरा अपनी बहन की चूत के अन्दर डालते हुए अपने लंड से पानी निकालना शुरू कर दिया unnamed.gif

और उसके लण्ड से सारी की सारी मलाई निकल कर अपनी बहन की चूत में गिरने लगी।
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इसी के साथ ही सूरज अपनी बहन के ऊपर ही ढेर हो गया।

रात में सूरज ने एक बार दोबारा रश्मि को चोदना चाहा.. लेकिन रश्मि ने यह कह करके इन्कार कर दिया कि अभी उसे नीचे चूत में बहुत ज्यादा तकलीफ़ हो रही है.. तो अभी वो दोबारा उससे नहीं चुदवा सकती है।
मजबूरन सूरज भी अपनी बहन के जिस्म के साथ लिपट कर सो गया।
उनकी सोने के बाद मैं भी सो गई।

सुबह मेरी आँख अपनी बिस्तर पर हो रही कुछ हरकतों की वजह से खुली और हल्की हल्की सिसकारियाँ और आवाजें भी आ रही थीं।

मैंने थोड़ी सी आँख खोल कर देखा तो सूरज दोबारा से अपनी बहन की चूत को चाटने में व्यस्त था और रश्मि के मुँह से कामुक और नशीली सिसकारियाँ निकल रही थीं।
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जैसे ही मैंने थोड़ी सी हरकत की तो सूरज ने जल्दी से रश्मि की जाँघों के बीच में से छलाँग लगाई और बिस्तर से नीचे उतर कर बाथरूम की तरफ चल पड़ा। रश्मि ने भी फ़ौरन से अपनी आँखें बंद कर लीं। मैं मुस्कुराई और फिर आहिस्ता आहिस्ता रश्मि को हिलाकर जगाने लगी- रश्मि.. उठो सुबह हो गई.. जाओ और चाय बना कर ले आओ।
रश्मि नींद से उठने की नाटक करती हुए बेडरूम से बाहर निकल गई।

कुछ देर ही गुज़री.. तो मुझे बाथरूम के अन्दर से कुछ ख़ुसर-फुसर की आवाजें आने लगीं। मैं उठ कर बाथरूम के दरवाजे के पास गई और अन्दर की आवाजें सुनने की कोशिश करने लगी। मेरा शक ठीक था.. बाथरूम में दोनों बहन-भाई मौजूद थे। रश्मि बाथरूम के दूसरे दरवाजे से बाथरूम में अपने भाई के पास आ गई थी।

अन्दर से आवाज़ आ रही थी- भैया प्लीज़.. छोड़ दो ना मुझे.. देखो भाभी भी जाग गई हुई हैं..
सूरज- तुम खुद ही बाथरूम में आई हो.. मैंने तो नहीं बुलाया था ना.. अब क्यों नखरे कर रही हो?
रश्मि ने खिलखिलाते हुए कहा- भैया.. तुम गलत समझ रहे हो.. मैं तो इसलिए आई थी कि आपको कहूँ कि आकर चाय ले लो और आप पता नहीं क्या समझे हो?

सूरज- अब आ ही गई हो.. तो थोड़ा सा इसे चूस ही लो यार..
रश्मि जैसे खुद को छुड़ाते हुए- छोड़ो भैया मुझे.. मैं चूल्हे पर चाय रख कर आई हुई हूँ।
इसी के साथ ही मुझे बाथरूम का दूसरा दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ आई।

रश्मि दूसरी तरफ से निकल गई थी और मैं भी वापिस अपनी बिस्तर पर लेट गई। कुछ ही देर में सूरज भी वॉशरूम से बाहर निकल कर कमरे में आ गया।

इसके साथ ही रश्मि भी चाय लेकर आ गई और मेरे सिर पर हाथ फेर कर मुझे उठाते हुए बोली- भाभी.. उठिए.. अब कैसी तबीयत है आपकी?

मैंने आँखें खोलीं और बोली- हाँ.. अब काफ़ी बेहतर है.. रात में नींद ठीक से आ गई है.. तो इसलिए अब सिर भी भारी नहीं है और तरोताज़ा भी महसूस कर रही हूँ।
सूरज और रश्मि दोनों बैठ कर चाय पीने लगे और मैं उठ कर वॉशरूम में आ गई।
मैं जैसे ही वॉशरूम में आई.. तो बेडरूम से दोबारा आवाजें आने लगीं।

सूरज- यार लो तो सही.. इसे मुँह में थोड़ी देर के लिए ही ले लो न..

रश्मि- भैया क्या है ना.. मैं आपको देख ही नहीं रही हूँ.. मैं चाय पी रही हूँ।
सूरज- मेरी जान चाय के साथ स्नेक्स के तौर पर ही मेरा लंड अपने मुँह ले लो।
रश्मि हँसते हुए- तो फिर ठीक है.. मैं आपका लंड बिस्कट की तरह गर्म-गर्म चाय में डुबो कर ना ले लूँ?

सूरज भी इस बात पर हँसने लगा और उन दोनों की शरारतों और अठखेलियों पर मेरी भी हँसी छूट गई..

नाश्ता करने के बाद सूरज ऑफिस चला गया और रश्मि मेरे पास ही घर पर रुक गई।

रश्मि रसोई समेटने लगी.. तो मैं अपने कमरे में आ गई और अपने पूरे कपड़े उतार कर नंगी होकर लेट गई..
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क्योंकि रात में एक भाई के लंड से एक बहन की चुदाई देख कर मेरी अपनी चूत में आग लगी हुई थी।
कुछ देर में रश्मि चाय बना कर लाई तो मुझे नंगी लेटी देख कर चौंक उठी।

Update- 44
आपने अभी तक पढ़ा..
रश्मि हँसते हुए- तो फिर ठीक है.. मैं आपका लंड बिस्किट की तरह गर्म-गर्म चाय में डुबो कर ना ले लूँ?
सूरज भी इस बात पर हँसने लगा और उन दोनों की शरारतों और अठखेलियों पर मेरी भी हँसी छूट गई..
नाश्ता करने के बाद सूरज ऑफिस चला गया और रश्मि मेरे पास ही घर पर रुक गई।

रश्मि रसोई समेटने लगी.. तो मैं अपने कमरे में आ गई और अपने पूरे कपड़े उतार कर नंगी होकर लेट गई.. क्योंकि रात में एक भाई के लंड से एक बहन की चुदाई देख कर मेरी अपनी चूत में आग लगी हुई थी।
अब आगे..

कुछ देर में रश्मि चाय बना कर लाई तो मुझे नंगी लेटी देख कर चौंक उठी, वो मुस्कुरा कर बोली- भाभी.. लगता है कि आपको बहुत गर्मी लग रही है।

मैं उसके सामने ही बड़ी बेशर्मी से अपनी चूत पर हाथ फेरते हुई बोली- हाँ डार्लिंग.. मेरी चूत में बहुत गर्मी हो रही है.. आ थोड़ा सा इसे प्यार करके ठंडी तो कर दो..
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रश्मि चाय की ट्रे साइड टेबल पर रख कर मेरे पास बैठ गई और मेरी चूत पर अपना हाथ फेरते हुए बोली- भाभी सुबह ही सुबह यह आपको क्या हो गया है?

मैंने रश्मि के हाथ की उंगली को लिया और उसे अपनी चूत के अन्दर डालते हुई बोली- देख तो सही.. मेरी चूत कितनी गीली हो रही है..?

यह कहते हुए मैंने रश्मि को अपने ऊपर खींच लिया और उसके होंठों को चूमने लगी। रश्मि को भी मज़ा आने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी।
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मैंने पीछे हाथ ले जाकर उसके पजामे को नीचे को खींचते हुए उसके चूतड़ों को नंगा कर दिया। रश्मि ने थोड़ा ऊँची होकर मुझे उसका पजामा उतारने दिया और फिर अपनी नंगी चूत को मेरी चूत के ऊपर रगड़ने लगी।
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अचानक से मैंने रश्मि को पलट कर अपने नीचे कर लिया और खुद उसके ऊपर आकर उसके होंठों को चूमने लगी। रश्मि भी बराबर मेरा साथ दे रही थी।

मैंने अपनी ज़ुबान रश्मि के होंठों के अंदर में पुश किया तो वो मेरी ज़ुबान चूसने लगी, रश्मि के टॉप के नीचे से हाथ डाल कर मैंने उसकी गोल चूचियों को पकड़ लिया और उनको जोरों से दबाने लगी।
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आहिस्ता आहिस्ता मैं नीचे को आते हुए रश्मि की दोनों जाँघों की बीच में आ गई और उसकी चूत के ऊपर एक जोर का चूमा किया, फिर मैंने अपनी ज़ुबान की नोक को उसकी चूत के ऊपर-नीचे फेरना शुरू कर दिया।
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धीरे धीरे से उसकी चूत ने दोबारा से पानी छोड़ना शुरू कर दिया।

उसकी चूत के दोनों लबों को खोलते हुए मैं बोली- रश्मि तुम्हारी चूत तो कल से ज्यादा खुली हुई लग रही है.. जैसे किसी ने अपना मोटा लंड तुम्हारी चूत में डाल दिया हो?
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मेरी बात सुनते ही मानो रश्मि के चेहरे का रंग उड़ ही गया, वो फ़ौरन बोली- क्या मतलब भाभी.. ऐसी तो कोई बात नहीं है।
मैं हँसने लगी और बोली- मैं तो मज़ाक़ कर रही हूँ.. बस मुझे तेरी चूत को देख कर ऐसा लग रहा था।

फिर मैंने अपनी एक उंगली को उसकी चूत के अन्दर डाला और उसकी चूत के दाने को चाटते हुए उसकी चूत के अन्दर अपनी उंगली को अन्दर-बाहर करने लगी।
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धीरे-धीरे रश्मि की आँखें बंद होने लगीं, मेरी पूरी उंगली उसकी चूत के अन्दर जा रही थी।

मैंने फिर उससे कहा- रश्मि यह तुम्हारी चूत के अन्दर का परदा भी फटा हुआ है.. कल तो मेरी उंगली आधी भी अन्दर नहीं जा रही थी और आज पूरी की पूरी उंगली तुम्हारी चूत में अन्दर हो गई है.. सच सच बता.. कि कैसे हुआ है यह सब.. और किसने किया है?
रश्मि चुप करके सिर झुकाए हुए रही।

मैं- वैसे कल से तो तुम कहीं भी बाहर नहीं गई.. तो किसी बाहर वाले से कैसे चुदवा सकती हो.. कहीं तुमने अपने ही भाई से ही तो?
रश्मि ने अपनी आँखें बंद कर लीं और उसके चेहरे पर शर्मिंदगी और घबराहट साफ़ दिख रहे थे..

मैं थोड़ी ऊँची हुई और उसके होंठों पर एक किस करती हुई बोली- हायय.. मेरी जानन.. मुझे बताया भी नहीं और तूने मेरे पति से ही चुदवा लिया.. कैसा लगा था तुझे.. जब तेरे भाई का लंड पहली-पहली बार तेरी चूत में उतरा था?
रश्मि- भाभिईईई.. मत करो ना ऐसी बातें..!

मैं- वाह जी वाह.. तू अपने भैया से चुदवाती रहे और मैं तुम से ऐसी बात भी ना करूँ.. यह कैसे हो सकता है मेरी जान.. अब तो तेरी यह प्यारी सी चूत हम दोनों की हो गई है। मेरी भी और तेरे भैया की भी..।
रश्मि- भाभिईईईईई..!
रश्मि ने शरमाते हुए कहा।

मैं रश्मि को चूमते हुए बोली- मेरी जान बता तो सही.. कैसे हुआ यह सब.. कल रात को?
रश्मि- भाभी वो ना.. मुझे लगता है कि.. भैया ने कल रात को आपके चक्कर में ही मुझे पकड़ लिया था.. और फिर उन्होंने.. ‘वो’ सब कर दिया.. जो वो आपके साथ करते हैं..!

रश्मि के चेहरे को अपने दोनों हाथों में लेकर मैं बोली- रश्मि.. सच बताओ.. मज़ा आया था ना तुमको..

या नहीं?
रश्मि- जी भाभी.. लेकिन दर्द भी बहुत हुआ है ना.. अभी भी हो रहा है।
मैं आहिस्ता आहिस्ता रश्मि की चूत को सहलाते हुए बोली- कोई बात नहीं मेरी ननद रानी.. पहली पहली बार तो हर लड़की को ही दर्द होता है.. लेकिन ऐसी कोई-कोई ही खुशक़िस्मत लड़की होती है जो कि सबसे पहले यह दर्द अपने ही भाई से पाए।

रश्मि मेरी तरफ देखते हुए बोली- भाभी आपको इस बात पर कोई गुस्सा नहीं आया कि भैया ने किसी दूसरी लड़की के साथ सेक्स किया है और वो भी अपनी ही सग़ी बहन के साथ?

मैं मुस्कुराई और उसके होंठों को चूम कर बोली- मेरी प्यारी ननद जी.. मुझे क्यों ऐतराज़ होगा.. बल्कि मेरा तो अब दिल चाह रहा है कि मैं भी तुम लोगों के साथ शामिल हो जाऊँ और हम सब मिल कर खूब मजे करें..
यह कहते हुए मैं सरक़ कर रश्मि की दोनों टाँगों के बीच में आ गई और उसकी इसी रात में अपना कुंवारापन खोने वाली प्यारी सी चूत को चूमने लगी।
‘हायय.. मेरी बन्नो.. दिल कर रहा है कि तेरी इस चूत को चूम-चूम कर लाल कर दूँ.. जिसमें कल रात को पहली-पहली बार मेरे पति का लंड गया है और जिस चूत को उसके अपने ही भाई ने फाड़ा है.. इसे एक कुँवारी कली से खिलाकर फूल बना दिया है।’

मेरी बातें सुन कर रश्मि का चेहरा लाल होने लगा।
मुझे साफ़ नज़र आ रहा था कि उसकी चूत से हल्का-हल्का रसीला सा पानी टपकना शुरू हो गया था।
मैंने अपनी ज़ुबान की नोक से जाहिरा की चूत से बह रहे रस को छुआ.. क्या माल था.. और फिर मैंने मजे से उसे चाट लिया।
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अब मैंने अपनी एक उंगली को आहिस्ता-आहिस्ता उसकी चूत के अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया।
मेरी उंगली रश्मि की चूत के अन्दर उसके चिकने पानी की वजह से बहुत आराम से फिसल रही थी।
अन्दर-बाहर.. अन्दर-बाहर..
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रश्मि की चूत के पानी से गीली हो रही हुई अपनी उंगली को मैंने रश्मि के होंठों पर रगड़ा और फिर अपनी उंगली उसकी मुँह के अन्दर डाल दी, उसे अपनी ही चूत का पानी चटवा दिया।

मैं थोड़ा सा घूम कर इस तरह रश्मि के ऊपर आई.. कि अपनी चूत को उसके मुँह के ऊपर ले आई।
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रश्मि ने मेरी साफ़ और मुलायम चूत को देखा तो उस पर अपना हाथ फेरते हुए बोली- भाभी चूत तो आपकी भी बहुत चिकनी और मुलायम है.. इसलिए भैया हर वक़्त आपके पीछे आपको चोदने के लिए पड़े रहते हैं।
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मैं- लेकिन अब तो मुझे लगता है कि वो तेरी ही टाइट चूत के पीछे रहेगा.. वो अब मेरी चूत की कहाँ सोचेंगे?

रश्मि ने भी मेरी चूत के लबों को चूमा और फिर आहिस्ता आहिस्ता अपनी ज़ुबान मेरी चूत के लबों पर फेरने लगी। जैसे ही रश्मि की ज़ुबान मेरी चूत को छूने लगी.. तो मेरी चूत ने भी पानी छोड़ना शुरू कर दिया।
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अब मैं और रश्मि दोनों ही एक-दूसरे की चूत की आग को ठंडा करने में लग गए।

मैं रश्मि की चूत में अपनी उंगली मार रही थी और उसकी उंगली मेरी चूत के अन्दर-बाहर हो रही थी।
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आज रश्मि ने पहली बार मेरी चूत को अपनी ज़ुबान से चाटा था और इसे प्यार किया था.. बल्कि रश्मि क्या किसी भी लड़की से अपनी चूत को चटवाने का मेरा यह पहला मौक़ा था और मुझे इसमें बेहद मज़ा आ रहा था।

मेरी चूत पानी छोड़ती ही जा रही थी कुछ ही देर में मैं और रश्मि दोनों ही अपनी-अपनी मंज़िलों पर पहुँच गईं।
फिर हम दोनों निढाल होकर बिस्तर पर एक-दूसरे की बाँहों में लेट गईं, कब हमारी आँख लग गई.. हमें कुछ पता नहीं चला।

काफ़ी देर बाद जब आँख खुली तो भी बिस्तर से निकलने को दिल नहीं किया।
मैं हौले-हौले रश्मि की चूचियों के निप्पलों पर उंगली फेरने लगी।

रश्मि- भाभी क्या आप सच में ही नाराज़ नहीं हो कि मैंने अपने भैया के साथ में सेक्स कर लिया है।
मैं- अरे यार.. क्यों परेशान होती हो.. मुझे तो यह सुन कर ही बहुत मज़ा आ रहा है.. तो जब तुम दोनों को चुदाई करते हुए देखूंगी.. तो कितना अच्छा लगेगा। प्लीज़ मुझे यह सब तुम दिखाओगी ना?
रश्मि शर्मा गई।

मैं- पता है.. अब मैंने सोचा है कि सूरज को खुद फँसाएंगे.. पहले तो वो तुमको फंसा रहा था और तंग करता था.. अब तुम खुद मेरे साथ मिल कर उसे सताओगी और तंग करोगी.. फिर देखना कितना मज़ा आएगा।

मैंने सारा प्रोग्राम रश्मि को समझाया और फिर हम दोनों रसोई में खाना बनाने के लिए आ गए।

जैसे ही दोपहर में सूरज घर वापिस आया तो सबसे पहले मैंने उसे वेलकम किया मैन गेट पर .. उसने मुझे किस किया.. और फिर मुझे पानी लाने का बोल कर अपने कमरे में चला गया।

मैं रसोई में आ गई और रश्मि को मुस्कुरा कर पानी ले जाने को कहा।
रश्मि ने मुझे एक आँख मारी और फिर ठंडी पानी का गिलास भर कर हमारे बेडरूम की तरफ बढ़ ग

Update- 45
आपने अभी तक पढ़ा..
मैं- पता है.. अब मैंने सोचा है कि सूरज को खुद फँसाएंगे.. पहले तो वो तुमको फंसा रहा था और तंग करता था.. अब तुम खुद मेरे साथ मिल कर उसे सताओगी और तंग करोगी.. फिर देखना कितना मज़ा आएगा।
मैंने सारा प्रोग्राम रश्मि को समझाया और फिर हम दोनों रसोई में खाना बनाने के लिए आ गए।

जैसे ही दोपहर में सूरज घर वापिस आया तो सबसे पहले मैंने उसे वेलकम किया। मैन गेट पर उसने मुझे किस किया.. और फिर मुझे पानी लाने का बोल कर अपने कमरे में चला गया।
मैं रसोई में आ गई और रश्मि को मुस्कुरा कर पानी ले जाने को कहा।
रश्मि ने मुझे एक आँख मारी और फिर ठंडी पानी का गिलास भर कर हमारे बेडरूम की तरफ बढ़ गई।

अब आगे..

मैं भी उसके साथ-साथ ही थी.. मैं बेडरूम के दरवाजे के एक तरफ रुक गई और रश्मि अन्दर कमरे में चली गई।

अन्दर कमरे में सूरज अभी-अभी वॉशरूम से मुँह-हाथ धो कर आया था।

सूरज ने रश्मि को पानी लाते हुए देखा तो वो बहुत खुश हुआ।

रश्मि भी जवाब में मुस्कुराई और एक अदा के साथ पानी का गिलास लेकर अपने भाई की तरफ बढ़ी।

सूरज ने पानी का गिलास लेकर उसमें से एक घूँट लिया और फिर गिलास टेबल पर रख कर रश्मि का हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया।
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रश्मि ने भी कोई विरोध नहीं की और अपने भाई के सीने से लग गई। सूरज ने अपने होंठों को रश्मि के होंठों पर रखा और उनको चूमने लगा।
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सूरज थोड़ी सी चूमा-चाटी करने के बाद रश्मि को छोड़ने का इरादा रखता था.. क्योंकि उसे पता था कि मैं रसोई से किसी भी वक़्त बेडरूम में आ सकती हूँ।

सूरज ने अपनी बहन को किस करने के बाद छोड़ दिया और बोला- चलो अब जाओ.. तुम्हारी भाभी बेडरूम की तरफ आती ही होंगी।

रश्मि- वाह जी वाह.. भाई, अगर इतना ही अपनी बीवी से डरते थे.. तो क्यों मुझ पर डोरे डाले और क्यों मुझे अपने झूठे प्यार में फँसाया था?
यह कहते हुए रश्मि अपने भाई के साथ लिपट गई।

सूरज तो जैसे बौखला सा गया, वो उसे खुद से अलग करते हुए बोला- नहीं नहीं रश्मि.. ऐसी बात नहीं है.. मेरा प्यार झूठा नहीं है, ना मैं तुमसे प्यार से इन्कार कर रहा हूँ.. यह तो मैं इसलिए कह रहा हूँ कि तुम्हारी भाभी को हमारे बारे में पता ना चल सके वरना वो हंगामा खड़ा कर देगी।

रश्मि सूरज की शर्ट के बटन खोलती हुई बोली- भाई भाभी से डर गए हो.. तो दुनिया को कैसे बताओगे कि तुम अपनी बहन से कितना प्यार करते हो? कहीं मैंने तुम जैसे बुज़दिल मर्द से प्यार करके कोई गलती तो नहीं कर ली?

यह कहते हुए रश्मि ने सूरज की शर्ट उतार दी और उसके नंगे सीने पर हाथ फेरने लगी।
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सूरज ने रश्मि को पीछे की तरफ धकेला और घबरा कर बोला- अभी नहीं.. जैसे ही मौक़ा मिलेगा.. मैं खुद तुम्हारे पास आऊँगा मेरी जान।

लेकिन रश्मि तो किसी और ही मूड में थी.. उसने थोड़ा सा पीछे होकर अपनी टी-शर्ट को नीचे से पकड़ा और ऊपर उठा कर अपनी शर्ट को अपने जिस्म से उतार कर बिस्तर पर फेंक दिया।
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अब रश्मि का ऊपरी बदन सिर्फ़ और सिर्फ़ उसकी ब्लैक रंग की ब्रा में था और नीचे उसने टाइट्स पहनी हुई थी।
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रश्मि को इस हालत में देख कर सूरज की तो जैसे फट कर हाथ में आ गई हो.. उसके चेहरे का रंग उड़ गया और माथे पर पसीना बहने लगा।
वो फ़ौरन ही दरवाजे की तरफ भागा, मैं जल्दी से रसोई में चली गई।

सूरज ने बाहर झाँक कर देखा और फिर अन्दर आकर दरवाज़े को लॉक कर लिया और तेज़ी के साथ रश्मि की तरफ बढ़ा।
रश्मि ने अपनी दोनों बाज़ू फैलाए और बोली- आ जा मेरे राजा.. मुझे अपनी बाँहों में ले लो न..

सूरज ने उसकी शर्ट बिस्तर से उठा कर उसकी तरफ बढ़ाते हुए कहा- रश्मि आख़िर आज क्या हो गया हुआ है तेरे को ?
रश्मि- भाई मुझे क्या होना है.. वो ही हुआ है ना.. जो आपने मुझे किया है.. मेरे कुँवारे जिस्म में अपने प्यार की आग लगा दी है.. जो अब हर वक़्त सुलगती रहती है..

अब आप ही बताओ कि मैं अपनी यह प्यास कैसे बुझाऊँ?

सूरज उसकी टी-शर्ट को उसकी गले में डालते हुए बोला- मैं ही बुझाऊँगा तेरी प्यास.. लेकिन थोड़ा टाइम तो आने दे ना मेरी जान.. लेकिन रश्मि थी कि मेरे प्लान के मुताबिक़ सूरज के साथ चिपकती जा रही थी और अपनी चूचियों को उसके सीने के साथ रगड़ रही थी।

इतने में मैंने बाहर दरवाजे पर नॉक किया..
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तो उस वक़्त रश्मि ने अपना हाथ सूरज के लंड पर रख दिया हुआ था।
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सूरज के तो जैसे होश ही उड़ गए, उसने जल्दी से उसे किस किया और उसे बाथरूम की तरफ धकेला।

मैंने आवाज़ दी- सूरज क्या कर रहे हो.. दरवाज़ा खोलो ना.. और यह रश्मि कहाँ चली गई है..?

रश्मि अब भी बाथरूम में जाने का नाम नहीं ले रही थी और सूरज से चिपकी जा रही थी। सूरज ने जल्दी से उसे खुद पर से हटाया और उसे बाथरूम की तरफ धकेलने लगा।

उसे बाथरूम में लगभग फेंकते हुए वो वापिस दरवाजे की तरफ भागा और फिर दरवाजा खोल दिया। मैं अन्दर गई तो सूरज के चेहरे का रंग उड़ा हुआ था.. वो काफ़ी घबराया हुआ लग रहा था।

मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा और बोली- क्या बात है सूरज.. तुम ठीक तो हो ना?
सूरज घबरा कर बोला- हाँ हाँ.. ठीक हूँ मैं.. कुछ नहीं हुआ मुझे..

मैं सूरज की क़रीब आई और आहिस्ता से उसके साथ चिपक गई और बोली- क्या बात है जानू.. नाराज़ हो क्या मुझसे..
मेरी बात सुन कर वो थोड़ा रिलेक्स हुआ और बोला- नहीं नहीं.. नाराज़ तो नहीं हूँ जान.. बस ऐसे ही थोड़ा थका हुआ हूँ।

मैंने उसके गालों पर एक किस की और अपना हाथ उसकी पैन्ट की ऊपर से उसके लण्ड की तरफ ले जाते हुए बोली- आओ फिर मैं तुमको भी थोड़ा रिलेक्स कर दूँ।
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मैंने देखा कि उसका लंड अभी भी अकड़ा हुआ है.. मैं उसके लण्ड को उसकी पैन्ट के ऊपर से ही अपनी मुठ्ठी में लेते हुए बोली- जानू तुम्हारा तो लंड भी फुल टेन्शन में है.. मुझे अभी इसकी टेन्शन तो रिलीव करना ही पड़ेगी..
यह कहते हुए मैं नीचे फर्श पर बैठ गई और उसकी पैन्ट की बेल्ट खोलने लगी।
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सूरज ने थोड़ी सी विरोध की लेकिन फिर खुद से ही अपनी पैन्ट नीचे उतार दी।

मैंने नीचे बैठ कर उसके लण्ड को अपनी मुँह में लिया और चूसने लगी।
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धीरे-धीरे उसके ऊपर के हिस्से को अपनी ज़ुबान से चाटती और फिर उसे मुँह में लेकर चूसने लगाती।
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मेरी कमर दरवाजे की तरफ थी और दरवाज़ा खुला हुआ ही था और मुझे पता था कि अभी थोड़ी देर में रश्मि भी अन्दर देखने लगेगी।

मैंने अपना चेहरा ऊपर किया और सूरज की तरफ देखने लगी.. मुझे उसके चेहरे के हाव-भाव से साफ़ पता चल रहा था कि रश्मि दरवाजे पर आ चुकी है।
मेरी नज़र सूरज के पीछे पड़ी हुई ड्रेसिंग टेबल पर पड़ी.. तो उसके शीशे में मुझे रश्मि का अक्स नज़र आया।
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रश्मि अब सूरज की तरफ देख रही थी और सूरज की नज़र भी उसकी बहन के ऊपर ही थी।

मैंने देखा कि रश्मि ने दरवाजे में खड़े-खड़े अपनी चूचियों को सहलाना शुरू कर दिया और फिर आहिस्ता से अपनी शर्ट को ऊपर करते हुए अपनी चूचियों को एक्सपोज़ कर लिया।
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जैसे ही सूरज की नज़र अपनी बहन की नंगी खूबसूरत चूचियों पर पड़ी तो उसने अपने दोनों हाथ मेरे सिर के दोनों तरफ रखे और मेरे सिर को पकड़ कर धक्के लगाते हुए मेरे मुँह को चोदना शुरू कर दिया।
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मैं भी उसकी गोटियों को सहलाते हुए उसके लण्ड को चूस रही थी और आज मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था।
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सूरज धक्के मारते हुए बोला- और चूस.. मेरी जान और चूस.. जल्दी कर.. जल्दी से निकाल दे मेरा पानी..
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मैंने उसके लण्ड को अपने मुँह से बाहर निकाला और फिर उसे अपने मुठ्ठी में आगे-पीछे करते हुए बोली- लेकिन रश्मि घर पर ही है.. वो किसी भी वक़्त इस तरफ को आ सकती है.. तो हमें देख ना ले..
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सूरज अपनी बहन की तरफ देखता हुआ बोला- कुछ नहीं होगा.. वो नहीं आएगी.. तुम बस जल्दी से मेरे लण्ड का पानी चूसो..

उधर रश्मि अब अपनी टाइट्स के अन्दर हाथ डाल कर अपनी चूत को सहला रही थी और आँखें बंद किए हुए खुद को ओर्गैज्म पर ले जाने की कोशिश कर रही थी।
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यह सब वो अपने भाई के सामने कर रही थी.. ताकि उसके भाई की प्यास और भी बढ़ सके और हो भी ऐसा ही रहा था।

जैसे-जैसे रश्मि की मस्ती बढ़ रही थी.. वैसे-वैसे ही सूरज में भी जोश आता जा रहा था। वो पहले से भी जोर-जोर से धक्के मार रहा था और अपना लंड मेरे मुँह के अन्दर पेल रहा था।
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जैसे ही सूरज झड़ने वाला हुआ.. तो मैंने उसका लंड अपनी मुँह से निकाला और उठ गई कि नहीं.. अब मुझे रसोई में जाना है.. कुछ बाद में करूँगी।
रश्मि भी फुर्ती से दरवाजे से हट गई और सूरज मुझे रोकता ही रह गया लेकिन मैं वहाँ से चली आई।

कुछ ही देर में सूरज भी चेंज करके बाहर आ गया। उसने अपना एक बरमूडा पहन लिया हुआ था। रश्मि ने जैसे ही अपने भाई को देखा तो उसे अपने नज़रों से ही चिढ़ाने लगी। मैं रसोई में ही रही तो वो मुझे बता कर बाहर निकली और आँख मार कर बोली- भाभी, मैं भाई से मिल कर अभी आती हूँ।

हम दोनों हँसने लगे।

रश्मि बाहर गई तो सूरज टीवी लाउंज में बैठ कर ही टीवी देख रहा था.. रश्मि सीधे जाकर उसकी गोद में बैठ गई।
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सूरज एकदम से घबरा गया और रसोई की तरफ देखते हुए.. उसे अपनी गोद से हटाने की कोशिश करने लगा।
लेकिन रश्मि कहाँ मानने वाली थी।
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रश्मि- क्या बात है भाई.. एक ही दिन में आपका दिल मुझसे भर गया है.. अब तो आप मुझसे दूर भाग रहे हो.. और थोड़ी देर पहली कैसे भाभी के साथ मजे कर रहे थे.. क्या अब मैं आपको अच्छी नहीं लगती

Update- 46
आपने अभी तक पढ़ा..

रश्मि बाहर गई तो सूरज टीवी लाउंज में बैठ कर ही टीवी देख रहा था.. रश्मि सीधे जाकर उसकी गोद में बैठ गई।
सूरज एकदम से घबरा गया और रसोई की तरफ देखते हुए.. उसे अपनी गोद से हटाने की कोशिश करने लगा।
लेकिन रश्मि कहाँ मानने वाली थी- क्या बात है भैया.. एक ही दिन में आपका दिल मुझसे भर गया है.. अब तो आप मुझसे दूर भाग रहे हो.. और थोड़ी देर पहली कैसे भाभी के साथ मजे कर रहे थे..। क्या अब मैं आपको अच्छी नहीं लगती हूँ?
अब आगे..

सूरज- नहीं नहीं.. रश्मि.. ऐसी बात नहीं है.. वो बस तुम्हारी भाभी भी क़रीब ही हैं ना.. तो इसलिए डर लगता है। उसे कहीं जाने दो.. फिर देखना मैं तुम को कैसे चोदता हूँ..
यह कहते हुए सूरज ने एक बार तो अपनी बहन की दोनों चूचियों को अपनी हाथों में लेकर दबा ही दिया।
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रश्मि ने भी मस्त होते हुए अपने गर्म-गर्म गुलाबी होंठ आगे बढ़ाए और अपने भाई के होंठों पर रख दिए और उसे चूमने लगी।
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थोड़ी देर के लिए तो सूरज भी अपनी बहन की गरम जवानी में सब कुछ भूल गया और रश्मि के होंठों को चूमने लगा।
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लेकिन साथ ही उसे मेरा ख्याल आ गया और फिर उसने खुद को अपनी बहन के जवान जिस्म से अलग कर लिया।

कुछ ही देर में मैंने और रश्मि ने टेबल पर खाना लगा दिया और फिर हम सब टेबल पर बैठ कर खाना खाने लगे।

खाने के दौरान भी रश्मि मेरे इशारे पर टेबल के नीचे से ही अपने पैर के साथ अपने भाई को टीज़ करती रही और जब भी मौका मिलता तो उसके लण्ड को अपनी पैर से टच कर देती।
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इस सब के दौरान हर बार सूरज खुद को मेरी नजरों से बचाने की भरसक कोशिश कर रहा था।

खाना खाते हुए ही हमने शाम को फिल्म देखने के लिए चलने का प्लान बना लिया.. जिसको सूरज ने भी मान लिया।
फिर खाने के बाद कुछ देर के लिए हम लोग आराम की खातिर लेट गए।
शाम को हम फिल्म देखने जाने के लिए तैयार होने लगे.. तो मैं रश्मि के पास आई और बोली- आज तुमको बहुत ही हॉट और सेक्सी ड्रेस पहनना है।

रश्मि आँख मारते हुए बोली- तो भाभी क्या मैं ब्रा और पैन्टी में ही ना चली चलूं?
मैंने भी करारा जबाव दिया- तुझे मैंने सिर्फ़ तेरी भाई से चुदवाना है.. पूरे शहर से नहीं..
हम दोनों हँसने लगीं।

मैं- देख सिनेमा हॉल में खुल कर उसे तंग करना है और तड़पाना है.. एक तरफ तेरे हुस्न और शरारत की वजह से उसका लंड अकड़ता जाए और दूसरी तरफ मेरे डर से उसकी फटती जाए बस.. वो कुछ करना चाहे.. मगर कुछ भी ना कर सके..
रश्मि- ठीक है भाभी.. ऐसा ही होगा।

फिर मैंने रश्मि के लिए एक ब्लैक टाइट जींस सिलेक्ट की… जो कि उसके जिस्म के साथ बिल्कुल ही चिपकने वाली थी। उसके साथ जो टॉप सिलेक्ट किया.. वो एक टी-शर्ट टाइप की थी.. जो कि नीचे तक लंबी थी और उसके चूतड़ों को कवर करती थी। लेकिन सिर्फ़ हाफ जाँघों तक रहती थी। उसका गला भी थोड़ा सा डीप था..

जिसमें से उसका क्लीवेज साफ़ नज़र आता था।
मैंने उससे कहा- चल.. अब इसे पहन ले मेरे सामने..
रश्मि थोड़ा शर्मा कर बोली- भाभी आपके सामने.. कैसे?

मैं- वाह भई वाह.. अपने भाई से तो नंगी होकर चुदवाती हो.. और अब भी नंगी होने को तैयार हो.. लेकिन मेरे सामने नंगी होते हुए तुमको शर्म आती है। अभी सुबह ही तो मैंने तेरी मलाई खाई है.. वो भूल गई हो किया?

रश्मि भी हँसने लगी और फिर उसने अपनी पहनी हुई शर्ट उतार दी।
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नीचे उसने जो ब्रा पहनी हुई थी..
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वो भी उसने उतारी और फिर उसकी दोनों खुबसूरत चूचियों नंगी हो गईं।
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मैंने झट से आगे बढ़ कर उसकी दोनों चूचियों को पकड़ लिया और उनको दबाते हुए चूमने लगी।
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मैं- उफफ्फ़.. रश्मि.. तेरी चूचियों का शेप कितना सेक्सी है..

रश्मि- मैं तो भाभी आप और भैया से बहुत तंग हूँ.. जब भी जहाँ भी मौका मिलता है.. आप लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए मुझ बेचारी को पकड़ लेते हो.. और इसे चक्कर में मेरी प्यास बढ़ा देते हो।

मैंने हँसते हुए रश्मि को छोड़ दिया और वो अपनी दूसरी ब्रा पहनने लगी.. तो मैंने उसे मना कर दिया कि आज तुम बिना ब्रा के ही चलो।
रश्मि ने एक नज़र मेरी तरफ देखा और फिर अपनी ब्रा वापिस अल्मारी में रख दी और बिना ब्रा के ही वो टी-शर्ट पहन ली। उसकी टी-शर्ट भी बहुत टाइट थी और बिल्कुल उसके जिस्म के साथ चिपक गई हुई थी।
उसकी दोनों चूचियाँ बहुत ही सेक्सी लग रही थीं..
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फिर रश्मि ने अपनी जींस पहनी तो वो भी उसकी जाँघों और चूत के एरिया में उसके जिस्म के साथ बिल्कुल चिपक गई।
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मैंने उसकी जाँघों पर हाथ फेरा.. तो एक लम्हे की लिए मेरी अपनी नियत भी खराब होने लगी.. लेकिन मैंने खुद को कंट्रोल किया। फिर मैंने उसकी चूचियों को सहलाया और उसके निप्पलों पर उंगली फेरीं.. तो उसके निप्पल अकड़ने लगे। कुछ ही पलों बाद उसके निप्पल बिल्कुल साफ़ उसकी शर्ट में से नज़र आ रहे थे।
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उसकी निप्पलों को अपनी उंगलियों के बीच मसलते हुए मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और उसे किस करने लगी। इसी के साथ मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू भी कर दिया।
रश्मि भी मस्ती के हाथों मजबूर होकर मेरा साथ देने लगी।

कुछ लम्हों तक एक-दूसरे को किस करने और एक-दूसरे के होंठों चूसने के बाद मैं अलग हुई और बोली- कुछ देर में तुम भी मेरे कमरे आ जाओ और मेकअप कर लेना।

फिर मैं अपने कमरे मैं चली गई। उधर सूरज बिस्तर पर लेटा हुआ था.. तैयार होकर मैंने भी अपने लिए टाइट्स और एक थोड़ी लूज कमीज़ निकाल ली।
तभी रश्मि भी कमरे में आ गई। जैसे ही सूरज की नज़र रश्मि पर पड़ी.. तो उसकी आँखें चमक उठीं और मुँह एकदम से खुला रह गया।

मैं दोनों बहन-भाई को थोड़ा प्यार करने का मौका देने के लिए अपने कपड़े लेकर बाथरूम में चली गई और फिर अन्दर से झाँकने लगी।

जैसे ही बाथरूम का दरवाज़ा बंद हुआ.. तो सूरज जंप लगा कर उठा और ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी हुई अपनी बहन के पीछे आ गया। उसने पीछे से ही उसे दबोच लिया और उसकी दोनों टाइट चूचियों को पकड़ कर सहलाते हुए उसकी गर्दन को चूमने लगा।
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रश्मि- उफफफ्फ़.. भैया.. क्या हो जाता है आपको.. प्लीज़ छोड़ दो.. अभी भाभी आ जाएंगी.. तो पता नहीं क्या कर देंगी।

सूरज- उफफफ्फ़.. क्या हुस्न है तेरा.. अब तो तुझे छोड़ने को नहीं बल्कि चोदने को दिल करता है। तूने तो आज नीचे से ब्रा भी नहीं पहनी हुई है.. क्यों मुझे तड़पा तड़पा कर मारने का प्रोग्राम बनाया हुआ है तूने..

सूरज ने रश्मि की शर्ट को नीचे से थोड़ा ऊपर उठाया और उसके चूतड़ों को नंगा कर लिया और उसकी जींस के ऊपर से उसकी गाण्ड पर हाथ फेरने लगा।
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फिर अपना हाथ आगे ले जाकर उसकी चूत को सहलाने लगा।
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मैंने अपने कपड़े चेंज किए और फिर थोड़ा सा शोर करके बाहर को निकली.. तो तब तक सूरज वापिस बिस्तर पर लेट चुका था.. लेकिन रश्मि ने अपनी टी-शर्ट को अपनी चूतड़ों से नीचे नहीं किया था और उसकी टाइट जींस में उसके दोनों चूतड़ बहुत ही सेक्सी अंदाज़ में दिख रहे थे।
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मैं भी रश्मि के पास ही आ गई और मेकअप करने लगी।
मैंने थोड़ी ऊँची आवाज़ में कहा ताकि सूरज भी सुन सके- अरे रश्मि.. यह तुमने कैसा ड्रेस पहन लिया है.. क्या यह पहन कर जाओगी बाहर?
रश्मि अपनी आगे-पीछे देखते हुए बोली- क्यों भाभी इसमें क्या बुराई है?
मैंने सूरज को इन्वॉल्व करती हुए कहा- क्यों सूरज यह ड्रेस ठीक है क्या?

सूरज ने एक नज़र अपनी बहन की तरफ देखा और फिर बोला- हाँ ठीक तो है.. बस अब चेंज करने के चक्कर में देर ना कर.. पहले ही शो के लिए बहुत देर हो रही है।

मैंने मुस्कुरा कर रश्मि की तरफ देखा तो उसने भी मुझे एक आँख मारी और फिर हम लोगों ने अपने मेकअप को फाइनल टच दिया.. और फिर बाहर निकल आईं.. जहाँ सूरज अपनी बाइक लिए तैयार खड़ा था।

पहले की तरह ही मैंने रश्मि को सूरज के बिल्कुल पीछे.. सेंटर में बैठाया और खुद उससे पीछे बैठ गई।
उसे आगे को पुश करते हुई बोली- यार थोड़ा सा आगे होकर बैठो न.. मुझे तो थोड़ी सी जगह और दो ना..

सूरज को तो पहले ही पता था कि उसकी बहन ने नीचे से ब्रा नहीं पहनी हुई है और अब जब उसने अपनी चूचियों उसकी पीठ से लगाईं.. तो उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी बहन की दोनों चूचियाँ बिल्कुल ही नंगी होकर उसकी पीठ पर लगी हुई हैं।
रश्मि ने अपना एक हाथ आगे किया और उसे सूरज की जाँघों पर रख दिया और फिर हम चल पड़े।

सड़क पर थोड़ा-थोड़ा अँधेरा हो रहा था..

कुछ ही देर में रश्मि का हाथ फिसलता हो अपने भैया के लौड़े पर आ गया। उसने अपने भाई के लंड पर अपना हाथ रखा और आहिस्ता-आहिस्ता उसको सहलाने लगी।
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पीछे से वो अपने होंठों को सूरज की गर्दन पर टच कर रही थी।
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कभी-कभी मौका देख कर उसे चूम भी लेती थी। रश्मि के सूरज की गर्दन पर चूमने की हल्की सी आवाज़ मेरे कान में भी आई।

‘ना कर.. तेरी भाभी पीछे ही बैठी है..’
तभी मैंने भी सहारा लेने के लिए अपना हाथ आगे किया और सूरज की जांघ पर रख दिया।

एक पल के लिए तो सूरज जैसे घबरा ही गया.. लेकिन फिर खुद को सम्भाल लिया। इसी तरह से मैं और रश्मि सूरज को तंग करते हुए सिनेमा पहुँच गए।

रात का लास्ट शो था.. 10 बज चुके हुए थे और हर तरफ अँधेरा हो रहा था। शो शुरू हो चुका हुआ था.. इसलिए ज्यादा रश नज़र नहीं आ रहा था। सूरज ने गैलरी की तीन टिकट ली और हम ऊपर गैलरी में आ गए। वहाँ गैलरी में भी बहुत कम लोग ही बैठे हुए थे.. बल्कि सिर्फ़ दो कपल्स थे.. वो भी सबसे अलग-अलग होकर दूर-दूर बैठे हुए थे। हमने भी एक कॉर्नर में अपनी जगह बना ली। हॉल में बहुत ही ज्यादा अँधेरा था। सूरज को बीच में बैठा कर मैं और रश्मि उसके दोनों तरफ बैठ गईं।
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अपडेट 47

आपने अभी तक पढ़ा..

रात का लास्ट शो था.. 10 बज चुके हुए थे और हर तरफ अँधेरा हो रहा था। शो शुरू हो चुका हुआ था.. इसलिए ज्यादा रश नज़र नहीं आ रहा था। सूरज ने गैलरी की तीन टिकट ली और हम ऊपर गैलरी में आ गए। वहाँ गैलरी में भी बहुत कम लोग ही बैठे हुए थे.. बल्कि सिर्फ़ दो कपल्स थे.. वो भी सबसे अलग-अलग होकर दूर-दूर बैठे हुए थे। हमने भी एक कॉर्नर में अपनी जगह बना ली। हॉल में बहुत ही ज्यादा अँधेरा था। सूरज को बीच में बैठा कर मैं और रश्मि उसके दोनों तरफ बैठ गईं।

अब आगे..

सूरज थोड़ा घबराया हुआ था.. कुछ ही देर गुज़री कि मैंने अपना सिर सूरज के कन्धों पर रख दिया और अपना एक हाथ सूरज की बाज़ू पर रख कर आहिस्ता आहिस्ता उसकी बाज़ू को सहलाने लगी। सूरज भी मेरी तरफ ध्यान दे रहा था, उसने अपना एक बाज़ू मेरी गर्दन के पीछे से डाला और मेरी दूसरी तरफ के कन्धों पर रख दिया और धीरे-धीरे मेरी बाज़ू को सहलाने लगा।
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मैंने अब अपना हाथ सूरज की जांघ पर रख दिया और आहिस्ता-आहिस्ता उसकी जाँघों को सहलाने लगी। मेरा हाथ उसके लण्ड की तरफ बढ़ रहा था। दूसरी तरफ से रश्मि ने अपना सिर अपने भाई के कंधे पर रखा हुआ था।
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जैसे ही मेरा हाथ सूरज के लंड की तरफ बढ़ा.. तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और बहुत ही आहिस्ता से मेरे कान में बोला- क्या कर रही हो.. रश्मि बिल्कुल साथ में बैठी है.. उसने देख लिया.. तो बहुत बुरा लगेगा।

लेकिन मैंने अपना हाथ आगे बढ़ा कर उसके लण्ड के उभार पर रखा और उसे मुठ्ठी में लेकर हौले-हौले दबाते हुए बोली- बहुत अँधेरा है.. वो नहीं देख पाएगी।
यह कहते हुए मैंने उसके लण्ड को सहलाना शुरू कर दिया, मेरे हाथ के छूने से उसका लण्ड उसकी पैन्ट के अन्दर अकड़ने लगा।
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मैंने उसके चेहरे को अपनी तरफ मोड़ा और फिर अपने होंठ सूरज के होंठों पर रख दिए और आहिस्ता आहिस्ता उसे चूमने लगी।
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सूरज ने अपनी होंठ पीछे हटाने चाहे.. तो मैंने फ़ौरन ही उसके दोनों होंठों को अपने होंठों में जकड़ लिया और अपनी ज़ुबान भी उसके मुँह के अन्दर डाल दी।

सूरज भी मस्त होता जा रहा था और उसकी मस्ती का अंदाज़ा मुझे उसकी पैन्ट के अन्दर उसके अकड़ते हुए लंड से हो रहा था।
मैंने अपना हाथ हटाया और सूरज के सीने पर रख कर उसे सहलाने लगी। उतनी देर में रश्मि ने अपना हाथ सूरज के लंड पर रखा और उसे दबाने लगी।

दो दो खूबसूरत और जवान लड़कियों के साथ मस्ती करते हुए सूरज की तो हालत ही पतली हो रही थी।
सूरज ने अपने हाथ से रश्मि का हाथ पकड़ कर अपने लंड से हटाना चाहा.. तो रश्मि उसके कान में बोली- भैया क्या बात है.. अपनी बीवी को तो मज़ा दे रहे हो.. लेकिन अपनी बहन को निराश कर रहे हो?

जैसे ही मैं अपना हाथ नीचे दोबारा उसके लण्ड पर लेकर गई.. तो फ़ौरन ही रश्मि ने अपना हाथ हटा लिया।
मैंने दोबारा से सूरज के लंड को अपने हाथ में ले लिया और उसे दबाने के बाद उसकी पैन्ट की ज़िप खोलने लगी।

सूरज ने कोई विरोध नहीं की.. क्योंकि उसे पता था कि मैं उसकी बात नहीं मानूँगी।
मैंने उसके लण्ड को उसकी पैन्ट की ज़िप के रास्ते बाहर निकाला और अब सिनेमा हाल में अपनी बीवी और बहन के बीच में बैठे हुए सूरज का लंड बिल्कुल नंगा हो चुका था।

सूरज के नंगे लंड को मैंने अपने हाथ में ले लिया और उसे सहलाने लगी।
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धीरे-धीरे उसका लंड और भी अकड़ता जा रहा था.. दूसरी तरफ से रश्मि ने भी अपने भाई का एक हाथ पकड़ा और उसे अपने मम्मों पर रखवा लिया और सूरज भी आहिस्ता आहिस्ता अपनी बहन की बिल्कुल स्टिफ और सीधी अकड़ी हुए चूचियों को दबाने लगा। रश्मि भी आँखें बंद किए हुए अपने भाई से अपनी चूचियों को दबवाने का मज़ा लिए जा रही थी।
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सूरज का दूसरा हाथ मैंने खींच कर अपनी चूत के ऊपर रख दिया। सूरज ने फ़ौरन ही मेरी चूत को अपनी मुठ्ठी में ले लिया और उसे पहले तो दबाने लगा और फिर आहिस्ता-आहिस्ता सहलाने लगा।

कुछ ही देर में खुद ही से सूरज ने अपना हाथ मेरी पजामी के अन्दर डाला और फिर मेरी नंगी चूत को सहलाना शुरू कर दिया।
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मेरा भी मजे से बुरा हाल होने लगा हुआ था और मेरी आँखें बंद हो रही थीं। मैंने अँधेरे में ही दूसरी तरफ देखा..

तो उधर भी सूरज ने अपना हाथ अपनी बहन की जीन्स के अन्दर डाला हुआ था और उसकी चूत को सहला रहा था।
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हाउ मच लकी सूरज वाज़.. कि एक ही वक़्त में अपनी बीवी और अपनी बहन की चूत को सहला रहा था और उनमें अपनी उंगलियाँ डाल कर दोनों को एक ही वक़्त में एक साथ मजे दे रहा था।

सूरज की उंगलियाँ मेरी चूत के दाने को सहला रही थीं और मेरी आँखें एक बार फिर से बंद हो चुकी हुई थीं। मैं अपनी मंज़िल के क़रीब पहुँचती जा रही थी और किसी भी वक़्त मेरी चूत पानी छोड़ने वाली थी।
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मेरी भी कोशिश थी कि जल्दी से जल्दी मेरी चूत का पानी निकल जाए और मेरा जिस्म रिलेक्स हो जाए। लेकिन अचानक ही कुछ यूँ हुआ कि फिल्म का इंटरवल हो गया और हाल की तमाम लाइट्स जलना शुरू हो गईं।

हम तीनों जल्दी से सीधे होकर बैठ गए। सूरज ने मेरी और रश्मि की चूत पर से अपना हाथ हटा लिया और फिर जल्दी से अपने लंड को अपनी पैन्ट के अन्दर कर लिया।

हम तीनों ही घबराए हुए थे और फिर कुछ ही देर में मैं मुस्कुरा कर सूरज की तरफ देखने लगी और वो भी मुस्कुरा दिया। सूरज की नज़र बचा कर मैंने रश्मि को आँख मार दी और मुस्कुरा भी दी।

सूरज थोड़ा शर्मिंदा शर्मिंदा लग रहा था।

कुछ देर बार मैं उठी और टॉयलेट में जाने का कह कर बाहर आ गई.. लेकिन उन दोनों बहन-भाई में से कोई भी मेरे साथ बाहर नहीं आया। जैसे ही मैं टॉयलेट से बाहर आई और हॉल की तरफ जाने लगी.. तो अचानक से ही किसी ने मुझे पीछे से आवाज़ दी ‘भाभी.. भाभी…’

मैंने चौंक कर पीछे मुड़ कर देखा तो हमारे मोहल्ले का लड़का राजू.. पीछे से मेरी तरफ आ रहा था।
उसे अचानक से देख कर मैं थोड़ा परेशान सी हो गई।

राजू हमारा बिल्कुल लगे हुए मकान में रहता था.. वो हमारा पड़ोसी था। अभी तो वो पूरी तरह से जवान भी नहीं हुआ था और किसी लड़की की तरह ही कम उमर का लगता था। काफ़ी हद तक शर्मीला और सब लोगों से अलग-थलग रहने वाला लड़का था। मोहल्ले में भी कभी उसको किसी के पास खड़े हुए नहीं देखा था और ना कभी उसकी किसी लड़की तो क्या.. किसी दूसरी लड़की के साथ दोस्ती के बारे में भी नहीं सुना था। वो मोहल्ले का एक बहुत ही प्यारा खुबसूरत.. भोला-भाला.. शर्मीला और शरीफ लड़का था।

राजू मेरे पास आया और बोला- भाभी आप यहाँ क्या कर रही हो?

मैंने मुस्कुरा कर उसे देखा और बोली- बस वो हम सब भी फिल्म देखने आए हुए थे.. लेकिन तुम यहाँ सिनेमा में इस वक़्त क्या कर रहे हो.. क्या अपने मम्मी-पापा को बता कर आए हो?
मैंने उसे तंग करने की लिए कहा था.. क्यूँ कि उसको घर में और मोहल्ले में अभी तक बिल्कुल एक बच्चे की तरह से ही ट्रीट किया जाता था और था भी वो कुछ ऐसा ही।

हमारे साथ वाले घर में वो अपनी मम्मी-पापा.. भाई और भाभी के साथ रहता था। उसके भाई की शादी थोड़ा अरसा पहली ही हुई थी।

राजू मुस्कुरा कर बोला- जी भाभी जी.. मैं घर पर सबको बता कर ही आया हूँ कि मैं फिल्म देखने जा रहा हूँ। आइए.. मैं आपको कोल्ड ड्रिंक पिलाता हूँ।
मेरे मना करने के बावजूद वो भाग कर पास ही की कैन्टीन पर गया और दो कोल्ड ड्रिंक ले आया।
फिर बोला- आइए भाभी.. अन्दर चलते हैं.. इंटरवल खत्म हो चुका है और फिल्म भी शुरू हो चुकी है।
मैंने राजू से पूछा- तुम्हारे दोस्त कहाँ बैठे हैं?

वो मुस्कुरा कर बोला- भाभी मेरे तो कोई भी दोस्त नहीं हैं। मैं तो अकेला ही फिल्म देखने आया हूँ.. चलो अब मैं आप लोगों के साथ ही बैठ कर देख लूँगा।

अब मैं और राजू कोल्ड ड्रिंक्स सिप करते हुए अन्दर की तरफ बढ़े.. तो अचानक से मुझे ख्याल आया कि मैं राजू को सूरज और रश्मि के पास कैसे ले जा सकती हूँ.. वो पता नहीं अभी किस हालत में बैठे हों।
तो इस तरह से राजू को सब कुछ पता चल जाएगा और फिर उन दोनों बहन-भाई को भी एंजाय करने का वक़्त नहीं मिलेगा।

हम इतनी देर में हॉल में एंटर हुए थे तो अन्दर फिर से बहुत ही अँधेरा हो गया था।
राजू बोला- भाभी सूरज भाई कहाँ पर बैठे हैं.. उधर ही चलते हैं।
मैंने उससे कहा- नहीं.. बहुत अँधेरा हो रहा है.. हम दोनों एक साइड पर इधर ही बैठ जाते हैं।

वो बोला- ठीक है भाभी.. फिल्म के बाद उनसे मिल लेंगे और फिर एक साथ ही घर चलेंगे।

वहाँ गैलरी तो पूरी की पूरी खाली पड़ी हुई थी.. मैंने राजू को लिया और एक तरफ होकर बैठ गई। राजू भी मेरे साथ बगल वाली कुरसी पर बैठ गया, हम दोनों फिल्म देखते हुए कोल्ड ड्रिंक पीने लगे।

मैंने जो कमीज़ पहनी हुई थी.. वो स्लीबलैस थी और मेरे कन्धों से नीचे से पूरी बाज़ू नंगी थी।

हॉल में स्क्रीन पर चल रही फिल्म की रोशनी में मेरे गोरे-गोरे मुलायम बाज़ू बहुत चमक रहे थे। दूसरी तरफ राजू ने एक हाफ स्लीव टी-शर्ट पहन रखी थी और साथ में जीन्स पहनी हुई थी।

कुछ ही देर में राजू का नंगा बाज़ू मुझे अपनी नंगी मुलायम चिकनी बाज़ू से टच होता हुआ महसूस हुआ। मैंने फ़ौरन से कोई भी रिस्पॉन्स नहीं दिया.. क्योंकि मुझे राजू का नरम सा.. पतला सा.. बाज़ू का टच बहुत अच्छा फील हो रहा था।
अपनी बाज़ू पर उसके जिस्म का टच मुझे सीधे-सीधे मेरे दिमाग पर असर करता हुआ महसूस हो रहा था। मैंने भी अपनी बाज़ू को हटाने की बजाए उसकी बाज़ू की गर्मी को महसूस करना शुरू कर दिया।

राजू को भी शायद अहसास हो गया था कि उसका बाज़ू मेरी बाज़ू से छू रहा है लेकिन मैं हटा नहीं रही हूँ.. तो वो भी चुप करके बैठा रहा और मेरे जिस्म की गर्मी को महसूस करता रहा।

कुछ ही देर के बाद राजू अपने होंठों को मेरे गालों की तरफ लाया तो मैं तो जैसे चौंक ही पड़ी और थोड़ा पीछे को हटी लेकिन उसने आगे होकर कहा- भाभी मेरी बात सुनिए..

वो कुछ ऊँचा बोल रहा था.. लेकिन फिल्म की तेज साउंड में उसकी आवाज़ बहुत ही कम आ रही थी।

मैंने अपना कान उसकी तरफ किया.. तो वो बोला- भाभी सूरज भाई परेशान हो रही होंगे कि आप कहाँ रह गई हो.. हम लोग उनको तो बता देते..
मैं- हाँ यह ठीक कहा तुमने.. मैं उसे कॉल कर देती हूँ।

तभी मुझे अहसास हुआ कि मैं अपना सेल फोन तो अपनी पर्स समेत वहीं रश्मि को दे आई थी।
मैंने राजू की तरफ मुँह किया और अपने होंठ उसके कानों के क़रीब ले जाकर बताया कि मेरे पास फोन नहीं है।

राजू अपने होंठ मेरे कानों के पास लाया और इस बार अपने होंठों को मेरे कानों से छूते हुए बात करने लगा।
‘भाभी.. आप मेरे सेल से कॉल कर लें..’

यह बात करके जैसे ही वो पीछे हटा.. तो मुझे अहसास हुआ कि जैसे उसने मेरी कान को हौले से चूम लिया हो। लेकिन मैं पक्का नहीं थी.. इसलिए चुप रही। राजू ने अपना सेल फोन मेरी तरफ बढ़ा दिया.. मैंने उससे सेल फोन लिया और सूरज को कॉल करके पूरे हालात बता दिये।
वो भी शायद खुश ही था कि उसे रश्मि के साथ एंजाय करने का टाइम मिल गया था।

जिस दौरान मैं सूरज से फोन पर बात कर रही थी.. तो राजू का बाज़ू तब भी मेरी नंगी चिकनी बाज़ू के साथ छू रहा था।

अब मुझे थोड़ा-थोड़ा अहसास हो रहा था कि यह बच्चा अब इतना भी बच्चा नहीं रहा है.. और उसे औरत के जिस्म से मज़ा लेने का शौक़ शुरू हो गया हुआ है।
मैं धीरे-धीरे मुस्कुरा रही थी.. बिना उसे रोके या बिना उससे दूर हटे हुए।

कॉल करने के बाद भी मैंने उसका सेल फोन उसे नहीं दिया था.. बल्कि अपने हाथ में ही लिया हुआ था। फिर मैं उसकी सेल की ब्राउज़िंग करने लगी।

राजू ने मुझे रोकना चाहा और अपने होंठ मेरे कानों से छू कर और अपना हाथ मोबाइल की तरफ बढ़ा कर बोला- भाभी मेरा सेल दे दें.. अन्दर ना देखें.. प्लीज़..
मैंने सेल थोड़ा पीछे किया और बोली- क्यों.. इसमें तुम्हारी गर्ल फ्रेंड्स के नंबर्स हैं क्या?
वो चुप कर गया और फिर बोला- नहीं भाभी.. मेरी तो कोई भी गर्ल फ्रेंड नहीं है।

मैंने उसकी सेल फोन की गैलरी खोली.. तो उसमें पड़ी हुई इमेजिज को देखने लगी। बहुत सारी फोटोज थीं कुछ उसकी.. कुछ घर वालों की थीं। फिर जैसे ही मैंने वीडियो गैलरी खोली.. तो उसने दोबारा फोन लेना चाहा.. लेकिन मैंने हाथ पीछे को कर लिया और उसका हाथ मेरी सीने के आगे से होकर मोबाइल की तरफ बढ़ा.. तो उसकी बाज़ू से मेरी चूचियों दब गईं।

‘ऊवप्प्स.. अरे अरे.. सीधे होकर बैठो.. क्या कर रहे हो.. देखने तो दो तुमने कौन-कौन सी मूवीज इसमें रखी हुई हैं..’
राजू- नहीं नहीं.. भाभी कुछ नहीं है इसमें.. प्लीज़ मुझे मेरा सेल फोन दे दें।

यह कहते हुए उसने मेरी एक नंगी बाज़ू पर पहली बार अपना हाथ रखा और फिर मेरी बाज़ू को पकड़ कर दूसरे हाथ से अपने मोबाइल को पकड़ लिया। इस दौरान एक बार फिर से उसकी बाज़ू ने मेरी खूबसूरत तनी हुए चूचियों को मसल सा दिया.. लेकिन इस बार मैंने उसका सेल फोन उसे दे दिया।

राजू ने अपना सेल फोन अपनी पॉकेट में डाल लिया। मैं भी सीधी होकर फिल्म देखने लगी.. जैसे मैं उसे थोड़ी नाराज़गी दिखा रही हूँ।
राजू ने दोबारा से अपना हाथ मेरी नंगी बाज़ू पर रखा और आहिस्ता आहिस्ता मेरी नंगी बाज़ू को सहलाते हुए बोला- भाभी प्लीज़.. आप नाराज़ हो रही हैं क्या?

यह कहते हुए उसके हाथ की उंगलियों ने मेरी बाज़ू की गिर्द चक्कर पूरा कर लिया। अब उसके हाथ की उंगलियों की बैक साइड मेरी चूचियों को छू रही थीं और जैसे-जैसे वो अपने हाथ को ऊपर-नीचे को मूव करता.. तो उसके हाथ की उंगलियों की बैक मेरी चूचियों को सहलाते जातीं। मुझे भी इसमें मज़ा आ रहा था.. लेकिन मैं अभी भी खामोश बैठी हुई थी।

वो थोड़ा सा मेरी तरफ दोबारा झुका और अपने होंठों को मेरे नंगे कन्धों पर रख कर बोला- प्लीज़ भाभी नाराज़ ना हों.. मैं आपको सेल फोन दिखा दूँगा.. अभी तो फिल्म खत्म होने वाली है.. लेकिन कल मैं आपके घर आकर आपको दिखाऊँगा.. फिर इसमें से जो दिल चाहे.. देख लीजिएगा।

मैंने अपना चेहरा मोड़ कर उसकी तरफ देखा.. तो उसके होंठ मेरे होंठों के बहुत क़रीब थे और उसकी साँसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं। उसकी गरम साँसों की वजह से मेरी चूत में कुछ होने लगा था और मुझे थोड़ा गीलापन महसूस होने लगा था। उसकी पतले गुलाबी होंठों को अपने इतना क़रीब देख कर मेरे होंठों पर भी हल्की सी मुस्कान फैल गई।

अपडेट 48
आपने अभी तक पढ़ा..
वो थोड़ा सा मेरी तरफ दोबारा झुका और अपने होंठों को मेरे नंगे कन्धों पर रख कर बोला- प्लीज़ भाभी नाराज़ ना हों.. मैं आपको सेल फोन दिखा दूँगा.. अभी तो फिल्म खत्म होने वाली है.. लेकिन कल मैं आपके घर आकर आपको दिखाऊँगा.. फिर इसमें से जो दिल चाहे.. देख लीजिएगा।
मैंने अपना चेहरा मोड़ कर उसकी तरफ देखा.. तो उसके होंठ मेरे होंठों के बहुत क़रीब थे और उसकी साँसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं। उसकी गरम साँसों की वजह से मेरी चूत में कुछ होने लगा था और मुझे थोड़ा गीलापन महसूस होने लगा था। उसकी पतले गुलाबी होंठों को अपने इतना क़रीब देख कर मेरे होंठों पर भी हल्की सी मुस्कान फैल गई।
अब आगे..

राजू ने मुझे मुस्कुराते देखा तो एकदम से जैसे उसे पता नहीं.. कितनी खुशी हुई कि उसने आगे बढ़ कर अचानक से मेरे गालों को किस कर लिया और बोला- यह हुई ना बात भाभी.. यू आर माय सो स्वीट भाभी..
यह कहते हुए उसने अपना बाज़ू मेरी दूसरे कंधे की तरफ डाला और मुझे अपनी सीने की तरफ खींच लिया। मैं उस लड़के की हरकत देख-देख कर हैरान हो रही थी।
फिर मैं बोली- अरे.. यह क्या कर रहे हो छोड़ो मुझे.. और तुमने मुझे यह किस क्यों किया?

राजू थोड़ा पीछे हटा.. लेकिन मेरे कन्धों पर से अपना हाथ नहीं हटाया और बोला- आप भी तो मेरी भाभी की तरह ही हो ना.. तो जब मैं उनसे खुश होता हूँ.. तो उनको भी ऐसे ही किस और हग करता हूँ।
मैं उस पर मुस्कुरा दी।

बाक़ी फिल्म के दौरान भी राजू मेरा एक हाथ अपने दोनों हाथों में लेकर बैठा रहा और उसे ना महसूस अंदाज़ में आहिस्ता आहिस्ता सहलाता रहा।

मुझे भी उसकी इस तरह से सहलाने से मज़ा आ रहा था। मुझे हैरत हो रही थी कि इतना मासूम और भोला भाला नज़र आने वाला लड़का किस क़दर तेज है और उसको जवान और खूबसूरत लड़कियों और औरतों को छूने का कितना शौक़ है।

कुछ ही देर में फिल्म खत्म हो गई और फिर हॉल की बत्तियाँ जल पड़ीं.. जो कुछ लोग हॉल में थे.. वो एक-एक करके बाहर निकलने लगे। सामने ही बैठे हुए सूरज और रश्मि पर मेरी नज़र पड़ी तो वो भी खुद को जैसे ठीक कर रहे थे। फिर सूरज ने उठ कर पीछे मुझे तलाश करने की कोशिश की.. तो मैंने फ़ौरन ही हाथ हिलाकर उसे अपनी पोजीशन का अहसास दिलाया और राजू ने भी हाथ हिला दिया।

सूरज और रश्मि उठे और हमारी तरफ बढ़े। जब वो क़रीब आए तो मैंने मुस्कुरा कर राश्म की तरफ देखा तो वो शरम से लाल हो गई और उसके चेहरे पर एक शर्मीली सी मुस्कुराहट फैल गई। सूरज और राजू दोनों मिलने के बाद आगे-आगे चलने लगे और मैं और रश्मि उनकी पीछे हो लिए थे।

मैंने रश्मि से पूछा- तुमने तो आज खूब मज़ा किया होगा अपने भाई के साथ?
रश्मि- नहीं भाभी.. हमने तो कुछ भी नहीं किया..
मैं- अच्छा.. कुछ नहीं किया? तो फिर यह अपने ऊपर वाले होंठ के ऊपर से अपने भाई का रस तो साफ़ कर लो.. सबको दिख रहा है कि तुम क्या-क्या करके आ रही हो..

जैसे ही मैंने यह कहा.. तो फ़ौरन ही रश्मि का हाथ अपने होंठों की तरफ बढ़ा और वो अपने होंठों को साफ करने लगी।

उसकी इस हरकत पर मैं हँसने लगी और बोली- अरी पगली.. कुछ नहीं लगा हुआ हुआ.. सब तो तू चाट गई है.. मैं तो सिर्फ़ यह देखने के लिए ऐसा बोली थी कि मुझे पता चल सके कि वहाँ पर क्या-क्या हुआ है..
रश्मि ने शरमाते हुए कहा- भाभी आप भी ना बस..

फिर हम दोनों भी हँसते हुए चलते हुए उन दोनों की पीछे स्टैंड पर आ गए।

वे दोनों अपनी बाइक्स ले आए.. मैं और रश्मि दोनों ही सूरज की बाइक पर बैठने लगीं.. तो राजू बोला- भाभी आप मेरे साथ आ जाओ.. क्या जरूरी है कि आप सबको एक बाइक पर ही बैठना है? मैं भी तो घर ही जा रहा हूँ ना..
सूरज ने मेरी तरफ देखा और बोला- हाँ ठीक है.. तुम राजू के साथ बैठ जाओ.. मैं रश्मि को बैठा लेता हूँ।

मैंने एक नज़र मुस्कुरा कर रश्मि की तरफ देखा और फिर राजू की तरफ बढ़ी मुझे अपनी तरफ आता हुआ देख कर उसकी भी आँखें चमक उठी थीं।
मैं आगे बढ़ी और फिर राजू के कंधे पर हाथ रख कर उसकी बाइक पर उसके पीछे बैठ गई और हम सब घर की तरफ चल पड़े।

राजू के पीछे मैं जानबूझ कर उससे चिपक कर बैठी थी.. मैंने अपनी चूचियों को भी राजू की बैक के साथ लगा दिया था और जैसे ही मोटर बाइक थोड़ा सा उछलती.. तो मैं अपनी चूचियों को उसकी पीठ के साथ रगड़ देती। इस तरह मुझे इस खूबसूरत और मासूम लड़के को टीज़ करने में बहुत मज़ा आ रहा था।

घर पहुँच कर राजू ने अपने घर का दरवाज़ा नॉक किया.. तो उसके पापा ने दरवाजा खोला.. तो हमें अपनी बेटे के साथ देख कर खुश हुए और बोले- चलो अच्छा हुआ कि यह अकेला नहीं था।
फिर मैंने वहाँ से अपने घर के अन्दर आ गए।

घर में आकर रश्मि अपने कमरे में कपड़े चेंज करने के लिए चली गई और मैं और सूरज अपने बेडरूम में आ गए। अपने कपड़े चेंज करते हुए फैजान मुझे मज़ाक़ करते हुए बोला।
सूरज - उस लड़के के साथ बहुत चिपक-चिपक कर बैठ रही थी।

मैं- नहीं तो.. ऐसी तो कोई बात नहीं है.. तुमको तो पता ही है ना.. कि बाइक पर ऐसे ही बैठा जाता है।

सूरज हँसते हुए- हाहहहहा.. बस करो.. अब मुझे सब कुछ दिख रहा था कि कैसे तुम अपनी यह खूबसूरत चूचियों को उसकी पीठ पर रगड़ रही थी।

मैं- अच्छा जी.. मेरा सब कुछ पता है तुमको.. लेकिन अपना नहीं पता.. जो अपनी ही सग़ी बहन को पटा रहे हो..
सूरज एकदम से घबरा गया और बोला- कक्ककया..क्या मतलब है तुम्हारा?

मैं- हाहहहाहा.. देखा ना.. चोरी पकड़ी गई तुम्हारे. मैं सब देख रही हूँ कि कुछ दिनों से कैसे तुम्हारा अपनी ही सग़ी छोटी बहन पर दिल आ रहा है और कैसे तुम उसके लिए बेचैन हो रहे हो। अगर कोई ऐसी बात है ना.. तो मुझे बता दो.. मैं तुम्हारी हेल्प कर दूँगी.. मेरी जान.. मैं आख़िर तुम्हारी दोस्त भी तो हूँ ना..

सूरज घबरा कर इधर-उधर देख रहा था.. मैं और आगे बढ़ी और उसके क़रीब जाकर उसके होंठों को चूम कर बोली- डोंट वरी डियर.. होता है.. ऐसा भी होता है.. वैसे तुम्हारी बहन है बहुत सेक्सी और खूबसूरत.. मैं अगर लड़का होती ना.. तो कब से उसे चोद चुकी होती और एक बात कान खोल कर सुनलो मेरा पहला और आखिरी प्यार तुम ही हो.. हे हे देखो अपनी शक्ल कैसी हो गई है..
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मेरे होंठ अभी भी उसके होंठों को चूम रहे थे और मेरा एक हाथ नीचे जाकर उसके लण्ड को सहला रहा था.. जो कि उसकी पैन्ट में अकड़ रहा था।

मैंने उसे किस करते हुए उसकी पैन्ट खोल कर नीचे गिरा दी और उसके लण्ड को उसकी अंडरवियर के ऊपर से ही पकड़ लिया।
सूरज का लंड अकड़ा हुआ था और अंडरवियर में कड़क हो रहा था।

मैं उसके लण्ड को सहलाते हुए आहिस्ता आहिस्ता सरगोशियाँ करने लगी- सूरज.. मेरी जान.. रश्मि बहुत हॉट लड़की है.. उफ्फ़.. उसकी जवान और चिकनी बहुत है.. किस क़दर मुलायम और मदहोश कर देने वाली जिस्म पाई है.. इस्स्स.. उसके रसीले होंठ.. उफफ्फ़.. कितने सेक्सी और कितनी रस से भरे हुए हैं.. जैसे सुर्ख गुलाब हों.. मेरा तो दिल करता है.. एक ही बार में उसके होंठों का रस पी लूँ.. आह्ह..
यह कहते हुए मैं सूरज के होंठों को चूस रही थी।
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सूरज मेरी कमर में अपनी बाज़ू डाल कर मुझे अपने साथ दबाते हुए बोला- क्या कह रही हो मेरी जान.. उम्माह.. ऐसा मत बोलो.. वो मेरी बहन है..
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लेकिन उसका लंड उसके बातों का साथ नहीं दे रहा था और अकड़ता ही जा रहा था..

जिसे मैंने अब उसकी अंडरवियर से बाहर निकाल लिया था और अपनी मुठ्ठी में लेकर सहला रही थी।

मैं- उफ्फ्फ.. सूरज अगर तुम एक बार अपना यह लंड उसकी कुँवारी चूत में डाल लो ना.. तो ज़िंदगी भर उसके गुलाम बन जाओगे.. काश.. मेरे पास लंड होता.. तो सबसे पहले मैं तुम्हारी बहन की कुँवारी चूत को चोदती..

मैं अपनी ज़ुबान सूरज के मुँह में डालते हुए बोली- बोलो भरना चाहते हो ना अपनी बहन को.. अपनी बाँहों में.. चूमना चाहते हो ना उसके खूबसूरत गालों को… चूसना चाहते हो ना उसके रसीले होंठों को… चोदना चाहोगे ना.. उसकी कुँवारी चूत को.. अपनी इस मोटे लंड से..तुम्हारे लिए में उसको तैयार कर लूँगी आखिर मेरे जान के लिए इतना भी नहीं कर सकती क्या
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सूरज ने जोर से मुझे अपनी सीने से चिपका लिया और मेरे होंठों को अपने होंठों से मसलता हुआ बोला- बस करो.. डार्लिंग.. बस करो..ऊऊऊओहह.. मेरी जान.. कहीं ऐसा ना हो कि मैं अभी उसे चोदने चला जाऊँ.. आह्ह..

इतने में दरवाजे पर नॉक हुई.. तो हम दोनों एक-दूसरे से अलग हो गए।
रश्मि अन्दर आई तो बोली- हैलो गाइस.. कोई मिल्क शेक लेना चाहेगा कि नहीं.. मैं बनाने जा रही हूँ..
मैंने कहा- हाँ.. बना लो सबके लिए लेकिन तुम्हारे भैया तो शायद आज की रात ‘दूध’ ही पीना पसंद करेंगे..

मेरी बात सुन कर सूरज घबरा गया और बोला- नहीं नहीं.. मेरे लिए भी मिल्क शेक ही बना लाओ।
रश्मि ने मेरी बात समझ ली थी.. वो हँसती हुई वहाँ से चली गई और फिर मैं भी कपड़े चेंज करने लगी।

मैं जानती थी कि सूरज परेशान है कि वो अब मुझे क्या बताए कि वो तो अपनी बहन को पहली ही चोद चुका हुआ है। लेकिन मैं भी अब तीनों के बीच का यह परदा खत्म कर देना चाहती थी।

अपडेट 49
आपने अभी तक पढ़ा..
रश्मि अन्दर आई तो बोली- हैलो गाइस.. कोई मिल्क शेक लेना चाहेगा कि नहीं.. मैं बनाने जा रही हूँ..?
मैंने कहा- हाँ.. बना लो सबके लिए लेकिन तुम्हारे भैया तो शायद आज की रात ‘दूध’ ही पीना पसंद करेंगे।

मेरी बात सुन कर सूरज घबरा गया और बोला- नहीं नहीं.. मेरे लिए भी मिल्क शेक ही बना लाओ।
रश्मि ने मेरी बात समझ ली थी.. वो हँसती हुई वहाँ से चली गई और फिर मैं भी कपड़े चेंज करने लगी।

मैं जानती थी कि सूरज परेशान है कि वो अब मुझे क्या बताए कि वो तो अपनी बहन को पहली ही चोद चुका हुआ है। लेकिन मैं भी अब तीनों के दरम्यान का यह परदा खत्म कर देना चाहती थी।
अब आगे..

सूरज को कमरे में छोड़ कर मैं बाहर रसोई में आई.. तो रश्मि मुझे देख कर मुस्कुराने लगी।
मैंने उसे पीछे से अपनी बाँहों में भरा और बोली- क्यों फिर खूब मजे किए हैं ना.. अपने भैया के साथ सिनेमा में?
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रश्मि मुझे जवाब देती हुई बोली- भाभी आप भी तो उस लड़के के साथ खूब मजे करके आई हो ना?
मैं- अरे नहीं यार.. ऐसी तो कोई बात नहीं है..

रश्मि- भाभी मैंने सब देखा था कि कैसे आप उसकी बैक पर अपनी चूचियों को रगड़ रही थीं।
मैं अब थोड़ी डिफेन्सिव होने लगी- नहीं यार.. वो तो बस बाइक पर बैठने की वजह से ऐसा हो रहा था..
रश्मि- लेकिन भाभी इसमें बुराई तो कोई नहीं है.. वैसे वो है भी खुबसूरत और चिकना लड़का.. मैं तो कहती हूँ कि पटा लो भाभी उसको.. अपनी हुस्न के जादू से..

मैं रश्मि के बाज़ू पर एक हल्का सा थप्पड़ मारते हुई बोली- इतना ही अच्छा लग रहा है.. तो तू खुद पटा ले उसको और कर ले उसके लौड़े के साथ मजे..
रश्मि- ना बाबा ना.. अभी तो मेरे लिए भैया ही काफ़ी हैं.. आप कर लो उसे क़ाबू में..
मैं बात बदलते हुई बोली- अच्छा चल छोड़ इन बातों को.. और चल मिल्क शेक लेकर चलें.. अन्दर तेरा भैया तेरा इन्तजार कर रहा होगा।(मन में अब इसको क्या बोलूँ उस साले भड़वे राजू की नजर तुझ पे थी और कॉलेज के बाथरूम में उसने तेरी नंगी फोटो उठाई थी और तुझ को वो फोटो दिखा के ब्लैक्मैल करना चाहता था और तुम्हें बचाने के लिए बाइक पर उसको धमका रही थी जिसको तुम मेरा उसके साथ मजा करना बोल रही हो,में कैसे बर्दस्त कर लूँ मेरे जान के माल पर कोई आँख डाले, उसके आंखे न नोच लूँ )
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मेरी बात सुन कर रश्मि हँसने लगी मुझे मुसकुराते हुए कुछ सोचते हुए देख कर रश्मि हस्ते हुए बोली
रश्मि- क्या बात है भाभी रास्ते में अपनी चुची रगड़ाई याद कर रही हो क्या.. हे हे हे
मैंने उसको धीरे से चपत लगते हुए,
में- क्या रश्मि तुम भी कैसी बात कर रही हो वो छूई मूई सा लड़का मुझे पटाएगा और वो मेरे को देखते ही पिघल जाएगा,और एक बात कान खोल कर सुन लो मेरा पहेला और आखिरी प्यार तुम्हारे भाई हैं,ये बोल कर में चुप हो गई
मुझे सीरीअस देख कर रश्मि को उसकी गलती का एहसास होने लगा और वो मुझसे माफी मांगते हुए बोली
रश्मि-सॉरी भाभी मुझे माफ कर दो में नहीं जानती थी की आप भैया से कितना प्यार करते हो और मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था में तो बस मजाक कर रही थी,ये बोल कर उसने अपना सिर नीचे कर लिया ,फिर में उसके थोड़ी को पकड़ कर ऊपर उठाया तो उसके आँखों में आँशु थे,में उसे गले लगाया और बोली
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में- अरे पगली रो मत में तो सिर्फ तुझे बता रही थी में तुझ पे नाराज नहीं हु अब रो मत तू तो मेरी गुड़िया है (उसके सिर सहलाते हुए ) और आज रात के लिए तेरे भैया को मैंने तैयार कर लिया है ये सुनते ही रोते हुए रश्मि के लाल होंठ पर स्माइल आ गई
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फिर कुछ पल में शर्म का चादर उसके मुखड़े ने ओढ़ लिया था और मंद मंद मुस्कराती रहती मिल्कशेक बनाने तक फिर हम दोनों रसोई से बेडरूम में आ गए और सबने मिल कर बैठ कर मिल्क शेक पिया। जितनी देर तक हम लोग बैठे.. उतनी देर भी सूरज की नजरें अपनी बहन के जिस्म का ही जायज़ा लेती रहीं।
लेकिन जैसे ही मैं उसे अपने बहन को देखता हुआ पकड़ती.. तो वो शरम से थोड़ा झेंप जाता..

लेकिन मैं उसे शर्मिंदा करने की बजाय मुस्कुरा देती।

मिल्क शेक पीकर मैं और रश्मि बाहर रसोई में आ गए और पीछे ही सूरज भी आ गया और टीवी ऑन करके देखने लगा।

रसोई से काम खतम करके मैंने रश्मि को पहनने को एक नाईटी दी और कहा- तुम आज यह नाईटी पहन कर हमसे पहले ही जाकर सो जाओ..

वो एक ढीली सी सिल्की शॉर्ट नाईटी थी.. जो कि उसके घुटनों तक आती थी और उससे नीचे उसकी दोनों खूबसूरत टाँगें बिल्कुल नंगी हो जाती थीं। इस नाईटी का गला भी काफ़ी खुला और गहरा था.. जिससे उसका क्लीवेज और चूचियों का बहुत सा दूधिया हिस्सा साफ़ नज़र आ रहा था। नाईटी थी भी स्लीबलैस जिससे उसकी दोनों खुबसूरत बाज़ू बिल्कुल नंगे दिख रहे थे।
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मैं सूरज के पास आकर बिल्कुल उससे चिपक कर बैठ कर टीवी देखने लगी.. थोड़ी देर में रश्मि अपने कमरे से निकली तो जैसे ही उसकी सेक्सी ड्रेस पर फैजान की नज़र पड़ी.. तो वो चौंक उठा और उसकी आँखें भी चमक उठीं।
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रश्मि ने हमारी सामने खड़ी होकर एक जोरदार अंगड़ाई ली और बोली- भाभी मुझे तो नींद आ रही है.. मैं जा रही हूँ सोने के लिए.. आप लोगों ने जब भी आना हो आ जाना..
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मैं- हाँ.. ठीक है तुम जाओ.. हम भी थोड़ी देर में आ रहे हैं।
रश्मि ने एक मुस्कुराती हुई नज़र अपने भाई पर डाली और फिर अपने चूतड़ों को ठुमकाते हुए अन्दर चली गई।
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मैं सूरज के साथ चिपक कर बोली- देखा अपनी बहन को.. मेरी नाईटी में कितनी सेक्सी लग रही थी.. इसे अगर कोई भी ऐसी देख ले ना.. तो कभी भी इसे चोदे बिना ना छोड़े..

सूरज- लेकिन तुमने उसे अपने नाईटी क्यों दी है?
मैं- क्यों उस पर अच्छी नहीं लग रही क्या?
सूरज- अच्छी तो लग रही है.. लेकिन..

मैं- अरे इसलिए तो उसे ऐसी ड्रेस पहनाती हूँ.. ताकि तुम देख सको कि तुम्हारी अपनी सग़ी छोटी बहन किस क़दर खूबसूरत और हसीन है और उसका जिस्म कितना सेक्सी है। तुमने चूचियाँ देखी था ना रश्मि की.. उस नाईटी में से झाँकते हुए कितनी खूबसूरत लग रही थीं।
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सूरज- प्लीज़ काजल.. कैसी बातें कर रही हो.. वो बहन है मेरे.
मैं- अरे यार क्या हुआ.. बहन है तो.. तुम मेरा साथ दो ना.. तो मैं उसे तुम्हारे नीचे सुला दूँ..
सूरज चुप कर बैठ गया।

कुछ 15 मिनट के बाद हम दोनों भी उठ कर बेडरूम में आ गए.. तो रश्मि आँखें बंद करके लेटी हुई सो रही थी..
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उसने करवट ली हुई थी और अपनी एक टाँग आगे को करके मोड़ी हुई थी। जिसकी वजह से उसकी टांग जाँघों तक नंगी हो रही थी। उसके खूबसूरत चूतड़ बाहर को निकले हुए थे।
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जैसे ही हम दोनों की नज़र रश्मि पर पड़ी.. तो हमारे क़दम वहीं पर ही रुक गए।
हमारी नजरें रश्मि की नंगी टाँगों और उसके सेक्सी पोज़ पर थीं।

मैंने मुस्कुरा कर सूरज की तरफ देखा और फिर उसका हाथ पकड़ कर आगे बिस्तर की तरफ बढ़ी। मैंने उसे रश्मि की एक साइड पर लेटने को कहा और खुद उसकी दूसरी तरफ बिस्तर की बैक से तकिया लगा कर बैठ गई।

अब मैंने आहिस्ता आहिस्ता अपना हाथ रश्मि की नंगी जांघ पर रखा और उसे सहलाने लगी। मेरा हाथ रश्मि की चिकनी जांघ पर फिसलता जा रहा था।
मैं- लो रश्मि को देखो छू कर.. कितनी चिकनी है तुम्हारी बहन की..

यह कह कर मैंने सूरज का हाथ पकड़ा और उसे रश्मि की जांघ पर रख दिया। सूरज ने अपना हाथ हटाना चाहा.. लेकिन मैंने उसके हाथ को आहिस्ता आहिस्ता रश्मि की जाँघों पर सहलवाना शुरू कर दिया। अपनी आँखों के सामने एक भाई को अपनी ही सग़ी बहन की नंगी जांघ पर इस तरह से हाथ फेरते हुए देख कर मेरी अपनी चूत भी गीली होने लगी।

कुछ ही देर में रश्मि ने करवट ली और बिस्तर पर सीधी होकर लेट गई। जैसे ही रश्मि हिली तो सूरज ने अपना हाथ हटा लिया और इतने में रश्मि अपने भाई को दिखाने के लिए दोबारा गहरी नींद में चली गई।

मैंने रश्मि के पतले-पतले होंठों पर अपनी उंगली फेरनी शुरू की और बोली- सूरज.. देखो तुम्हारी बहन के कितने प्यारे होंठ हैं..
यह कह कर मैं झुकी और अपने होंठ रश्मि के होंठों पर रख दिए और उसको किस करने लगी।
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फिर मैंने सूरज के सिर के पीछे अपना हाथ रखा और उसके सिर को नीचे रश्मि के चेहरे पर झुकाने लगी।

सूरज बिना अपने मुँह से कोई भी शब्द निकाले हल्की सी झिजक कर रहा था.. लेकिन कुछ पल के बाद ही उसके होंठ अपनी बहन के होंठों तक पहुँच चुके थे। सूरज ने एक पल के लिए ऊपर मेरी तरफ देखा और अगले ही लम्हे उसके होंठ अपनी बहन के होंठों पर आ गए..
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सूरज ने मेरी आँखों में देखते हुए आहिस्ता आहिस्ता अपनी बहन को किस करना शुरू कर दिया.. हौले-हौले वो अपनी बहन के होंठों को चूम रहा था और फिर उसने हिम्मत करते हुए रश्मि के एक होंठ को अपने दोनों होंठों की गिरफ्त में लिया और उसे चूसने लगा..
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मेरे हाथ अब रश्मि की छोटी-छोटी चूचियों पर पहुँच चुके थे और मैं उसकी चूचियों को उसकी नाईटी के ऊपर से ही सहला रही थी और हौले-हौले दबा रही थी।
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सूरज अभी भी अपनी बहन के होंठों को चूम रहा था.. तो मैंने उसका एक हाथ पकड़ा और फिर उसे आहिस्ता से रश्मि की चूची पर रख दिया।
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एक पल के लिए तो शायद सूरज को सब कुछ भूल गया और उसने आहिस्ता आहिस्ता अपनी बहन की चूची को दबाना शुरू कर दिया।
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फिर जैसे उसे अचानक से अहसास हुआ तो उसने अपने होंठ और हाथ दोनों ही अपनी बहन के जिस्म से पीछे कर लिए..
मैंने दोबारा से सूरज का हाथ पकड़ कर रश्मि की चूचियों पर रखा और बोली- देखो.. कितनी सॉलिड हैं.. तुम्हारी बहन की चूचियां..

बिना किसी ब्रा के सपोर्ट के भी.. कितनी तनी हुई हैं..
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सूरज ने मेरी तरफ देखा और फिर आहिस्ता आहिस्ता अपनी बहन की चूचियों को दबाने लगा.

अपडेट 50
आपने अभी तक पढ़ा..
एक पल के लिए तो शायद सूरज को सब कुछ भूल गया और उसने आहिस्ता-आहिस्ता अपनी बहन की चूची को दबाना शुरू कर दिया।
फिर जैसे उसे अचानक से अहसास हुआ तो उसने अपने होंठ और हाथ दोनों ही अपनी बहन के जिस्म से पीछे कर लिए..
मैंने दोबारा से सूरज का हाथ पकड़ कर रश्मि की चूचियों पर रखा और बोली- देखो.. कितनी सॉलिड हैं.. तुम्हारी बहन की चूचियाँ.. बिना किसी ब्रा के स्पोर्ट के भी.. कितनी तनी हुई हैं।
सूरज ने मेरी तरफ देखा और फिर आहिस्ता-आहिस्ता अपनी बहन की चूचियों को दबाने लगा।
अब आगे..

मैंने रश्मि की नाईटी के गले को थोड़ा नीचे को खींचा.. तो रश्मि की चूचियों का ऊपरी हिस्सा और उसका क्लीवेज नंगा हो गया।
मैंने सूरज को इशारा किया कि झुक कर उसको चूम ले..
सूरज ने आहिस्ता आहिस्ता अपना सिर नीचे झुकना शुरू किया और फिर उसके होंठ अपनी बहन के सीने के ऊपरी नंगे हिस्से पर आ गए और उसने आहिस्ता से रश्मि के सीने को चूम लिया।
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फिर आहिस्ता आहिस्ता नीचे को जाते हुए वो रश्मि की क्लीवेज को चूमने लगा।
धीरे-धीरे उसकी ज़ुबान बाहर को निकली और उसने अपनी बहन की क्लीवेज को चाटना भी शुरू कर दिया।
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मैंने आहिस्ता आहिस्ता रश्मि की नाईटी को उसकी पेट पर से ऊपर की तरफ सरकाती हुए उसके पेट को नंगा किया और फिर उसकी नाईटी को उसकी चूचियों से ऊपर कर दिया।
रश्मि की दोनों खूबसूरत छोटी.. लेकिन सख़्त और प्यारी गोल-गोल चूचियाँ अपने भाई की नज़रों के सामने नंगी हो गई थीं। उसकी दोनों सफ़ेद चूचियों के ऊपर दोनों गुलाबी रंग के निप्पल बिल्कुल टाइट होकर अकड़े हुए थे।
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सूरज उनको देखता रहा और फिर उसका हाथ आहिस्ता आहिस्ता आगे बढ़ा और उसने अपनी बहन की चूचियों को सहलाना शुरू कर दिया। फिर रश्मि के निप्पलों को अपनी उंगलियों में लेकर सहलाने लगा।
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मैंने सूरज को इशारा किया और फिर खुद भी नीचे को झुक कर रश्मि के एक निप्पल को अपने होंठों में भर लिया और उसे चूसने लगी।
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सूरज भी मुझको देख कर नीचे झुका और अपनी बहन के दूसरे निप्पल को आहिस्ता आहिस्ता अपनी ज़ुबान की नोक से चाटने लगा।
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फिर सूरज ने भी अपने होंठों को खोला और रश्मि के एक गुलाबी निप्पल को अपने होंठों में भर लिया और उसे चूसना शुरू कर दिया।
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एक ही वक़्त में दो-दो लोगों से अपनी चूचियों चुसवाना रश्मि जैसी जवान और कमसिन लड़की बर्दाश्त ना कर सकी..

और एकदम से अपनी आँखें जोर से बंद करते हुए अपने दोनों हाथ मेरे और सूरज के सिर पर रख दिए और हम दोनों के सिर को नीचे अपनी चूचियों पर दबाने लगी और चिल्लाई- उफफ्फ़.. भाभीई.. ईई.. भैया..आआ..हह.. बस कर दो प्लीज़्ज.. यह क्या कर रहे हो.. आह..
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सूरज ने अपनी बहन के चेहरे की तरफ देखा और फिर फ़ौरन से ही मेरे चेहरे की तरफ देखने लगा कि यह क्या हो रहा है।
मैं धीरे से मुस्कुराई और बोली- डोंट वरी डार्लिंग.. तुम्हारी बहन मुझे सब बता चुकी है कि कैसे तुम उसे चोद चुके हो।
सूरज ने शर्मिंदा होते हुए अपना सिर नीचे झुका लिया।
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मैं- अरे यार.. शर्मिंदा होने की कोई बात नहीं.. तुम्हारी जगह अगर मैं होती.. तो मैं भी इस रश्मि जैसी चिकनी और सेक्सी लड़की को कभी भी हाथ से ना जाने देती और इसे चोद ही डालती.. नाउ जस्ट चिल डाउन.. एंड एंजाय यूअर ओअन सिस्टर्स’ हॉट बॉडी..
सूरज मेरी बात सुन कर मुस्कुराया और एकदम मुझे खींच कर अपनी बाँहों में लेकर मेरे होंठों को चूमते हुए बोला- ऊऊऊऊ ऊऊऊओ यू आर सो स्वीट माय डियर वाइफ.. तुम मुझको कितना समझती हो और कितना मेरा ख्याल रखती हो.. आई लव यू हनी..
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मैंने खुद को सूरज की बाँहों में से निकाला और फिर रश्मि को उठा कर उसकी नाईटी उतार दी और उसे अपने भाई की आँखों के सामने बिल्कुल नंगी कर दिया।
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रश्मि हम दोनों के सामने नंगी होने में थोड़ी शरम महसूस कर रही थी। लेकिन फ़ौरन ही सूरज ने उसकी नंगे बदन को अपनी बाँहों में खींचा और अपने होंठ उसके तपते होंठों पर रख दिए और उसे आहिस्ता आहिस्ता चूमने लगा।
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अबकी बार रश्मि भी अपने भाई का पूरा-पूरा खुल कर साथ दे रही थी.. वो उसके होंठों को चूम रही थी और चूस रही थी।
सूरज ने अपनी ज़ुबान रश्मि के मुँह के अन्दर दाखिल की.. तो रश्मि ने उसे चूसना शुरू कर दिया।
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सूरज उसकी चूचियों के साथ खेलते हुए उससे अपनी ज़ुबान चुसवाने लगा।
मैंने सूरज का शॉर्ट्स उतार दिया और उसका लंड नंगा हो गया। उसे मैंने अपने मुँह में ले लिया और चूसना शुरू कर दिया।
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ऊपर सूरज के होंठ अभी भी रश्मि के होंठों से चिपके हुए थे।
मैंने रश्मि को नीचे खींचा और उसके भाई का लंड उसकी तरफ बढ़ाया। रश्मि एक पल के लिए झिझकी.. और फिर अपने भाई के लंड के अगले हिस्से को अपने मुँह में ले लिया और चूसना शुरू कर दिया।
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मैं उसके लण्ड के बाक़ी के हिस्से को अपनी ज़ुबान से चाटने लगी।
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फिर मैंने रश्मि को बिस्तर पर लिटाया और उसकी दोनों टाँगों को खोल दिया और सूरज से बोली- आ जाओ मेरे प्यारे पतिदेव जी.. आज अपनी बहन रश्मि को मेरी नज़रों के सामने चोदो.. और डाल दो इसकी चूत में अपना लंड..

मैंने सूरज का लंड बड़े ही प्यार से अपने हाथ में पकड़ा और उसे उसकी बहन रश्मि की नाज़ुक सी मुलायम गोरी-चिट्टी चिकनी चूत पर रख कर आहिस्ता आहिस्ता सुपारे को चूत की दरार में ऊपर-नीचे रगड़ने लगी।
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रश्मि की चूत से पानी निकल रहा था और वो चूतरस सूरज के लंड के ऊपर लग रहा था।
एक भाई का लंड अपनी ही बहन की चूत पर देख कर मुझे अजीब सा मज़ा आ रहा था।
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फिर सूरज ने अपना लंड रश्मि की चूत के सुराख पर रखा और आहिस्ता आहिस्ता जोर लगाने लगा।
अगले ही पल सूरज के लंड की टोपी फिसलती हुई रश्मि की चूत के अन्दर उतर गई और साथ ही रश्मि के मुँह से एक तेज सिसकारी भी निकल गई।
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आहिस्ता आहिस्ता सूरज ने अपने लंड को रश्मि की सिर्फ़ एक बार चुदी हुई चूत के अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया। इस तरह धीरे-धीरे सूरज का पूरा लंड रश्मि की चूत में उतरने लगा और अन्दर-बाहर होने लगा।
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रश्मि भी शर्म के मारे आँखें बंद करके सिसकारियाँ लिए जा रही थी।
मैंने नीचे झुक कर रश्मि की चूत की दाने पर अपनी ज़ुबान की नोक फेरना शुरू कर दी और उसकी चूत को सहलाने लगी।
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उस बेचारी रश्मि के लिए एक ही वक़्त में दो दो मजे बर्दाश्त करना बहुत ही मुश्किल हो रहा था। इसलिए कुछ समय में ही वो अपनी मंज़िल को पहुँच गई और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।
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सूरज ने कुछ देर के लिए अपने लंड को उसकी चूत में अन्दर-बाहर किया और फिर अपना लंड अपनी बहन की चूत से बाहर निकाल लिया।
अब उसने मुझे रश्मि के ऊपर आने का इशारा किया.. मैं रश्मि के ऊपर आ गई और अपने होंठों को उसके होंठों पर रख दिया।
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अब मेरी चूत उसकी चूत के बिल्कुल ऊपर थी।
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सूरज ने अब पीछे से मेरी चूत में अपना लंड डाला और अपने लंड को आगे-पीछे करते हुए मेरी चूत चोदने लगा।
उसके धक्कों के साथ मेरी चूत रश्मि की चूत के साथ भी रगड़ खा रही थी। जिससे अलग ही मजा मिल रही थी।
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ऊपर मेरे होंठ रश्मि के होंठों के साथ चिपके हुए थे और मैं रश्मि को चूम रही थी। उसके होंठों को चूस रही थी। कभी मेरी ज़ुबान उसके होंठों के अन्दर दाखिल हो जाती और उसे वो चूसने लग जाती।
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कुछ ही देर मुझे चोदने के बाद सूरज ने अपना लंड मेरी चूत से निकाला और थोड़ा नीचे लिए जाकर दोबारा से अपनी बहन की चूत में डाल दिया।
अब मेरी कमर को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर वो रश्मि को चोद रहा था।
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ऐसे ही अब सूरज ने बारी-बारी हम दोनों को चोदना शुरू कर दिया और आख़िरकार अपनी बहन की चूत के अन्दर अपना पानी गिरा कर झाड गया और हम दोनों की ऊपर ही ढेर हो गया।
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काफ़ी देर तक हम तीनों ऐसी ही लेटे रहे..

फिर सूरज हम दोनों के बीच में लेट गया और हम दोनों उसकी नंगे जिस्म के साथ अपने नंगे और गोरे जिस्मों को चिपका कर लेट गईं।
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सूरज हम दोनों की कमर पर हाथ फिराता हुआ बोला- आज से मेरी दो-दो बीवियाँ हैं.. अब तो रश्मि भी मेरी बीवी ही बन गई है।
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मैं हँसते हुए बोली- ठीक है.. अगर तुमने रश्मि को अपनी बीवी बना लिया है.. तो फिर मैं तुम्हारी बहन बन जाती हूँ और आज से तुमको भैया बोला करूंगी।
इस बात पर हम तीनों हँसने लगे और आगे के हसीन और सेक्स से भरपूर ज़िंदगी के सपने देखते हुए नींद के आगोश में चले गए।

Categories Hindi
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