कसाई रफीक़ और उसके 2 दोस्तों के साथ चुदाई - भाग 1
हेलो दोस्तो। सभी बड़े लंड वालों को पिंकी का प्यार भरा नमस्कार। आज मैं फिर से एक बार हाजिर हूं अपनी एक नई कहानी को लेकर। जैसा आप सभी को पता है कि पिछली कहानी में मैंने बताया था कि कैसे असलम के 5 दोस्तों ने मिल कर मेरी चुदाई की थी और मेरी जवानी का रस निचोड़ा था। ये कहानी उसके बाद की है। असलम के दोस्तों से ग्रुप में चुदाई करवाई तो जैसे मेरी सेक्स की भूख एक दम से बढ़ ही गई थी। हालाकि असलम मुझे अच्छे से चोदते थे लेकिन उसके बाद भी मै दुसरे मर्दों के लंड का मजा मिस करने लगी थी। फिर मैंने सोचा के किसी दूसरे मर्द के साथ चक्कर चला लू लेकिन मुझे डर था के कहीं असलम को पता ना चल जाए। मैंने ऑनलाइन फर्जी प्रोफाइल बना कर लोगो से चैट किया था लेकिन मुझे कोई ढंग का मर्द नहीं मिला। एक दिन की बात है असलम को अपने किसी काम से दिल्ली से बाहर जाना था। तो मुझे फोन करके 3 दिन के लिए बोला बहार जा रहे हैं। फिर वापस आ जाएंगे और मैं उनके और उनके 2 साथियों के लिए चिकन बना दू। शाम को वो लोग 8 बजे निकल जाएंगे फिर मैं भी कॉल कट करके चिकन बनाने की तयारी में लग गई। तब मुझे पता चला के चिकन तो खतम हो गया है। तो मैंने ऑनलाइन ऑर्डर करने की सोची। लेकिन कुछ समस्या होने की वजह से चिकन डिलीवर नहीं हो रहा था मेरी लोकेशन पर। तब मैंने सोचा के मैं मार्केट से जाकर ले आती हूं क्योंकि 1-2 बार असलम मुझे लेकर गए थे वहा पर अपने साथ। फिर मैंने अपनी नाईटि उतारी और एक बढ़िया सा पीले रंग का सलवार सूट पहन कर तैयार हो गई। मैंने अंदर क्रीम कलर की सैटिन पैंटी और ब्रा पहनी थी। जो सूट मैंने पहना था वो आगे से थोड़ा सा खुला हुआ था और टाइट था जिसके कारण से मेरे स्तन एक दम उभरे हुए थे और सेक्सी सा क्लीवेज बन रहे थे। मेरा सलवार एकदम फिट था जिसमें मेरी गांड का उभार साफ नजर आ रहा था। फिर मैंने थोड़ा सा हल्का मेकअप किया। मांग में सिन्दूर भरा और मै मार्केट के लिए ऑटो लेकर निकल पड़ी। जब मैं ऑटो में बैठी थी तो ऑटो वाला मुझे घूर रहा था अपने मिरर से। फिर 10 मिनट में मैं मार्केट पहुच गई वहा बहुत ज्यादा भीड़ थी और ज्यादा मर्द ही थे। जब मैं असलम की पहचान वाली दुकान की तरफ जा रही थी तो सभी लोग मुझे घूर घूर के देख रहे थे। कुछ कसाई तो अपना लंड भी मसल रहे थे मेरी गांड और चुचियों को देख कर। 2-3 मिनट तक चलने के बाद मैं दुकान पर पहुची। वहा पर जो कसाई था उसका नाम था रफीक। उसने मुझे देखते ही पहचान लिया और नमस्ते किया। रफीक की उम्र 44 साल है और वो अच्छा हटता कट्टा मर्द था। चौड़ी छाती। मजबूत बाज़ू। सवाला सा चेहरा और उसपर उसकी लंबी दाढ़ी थी। रफीक – नमस्ते भाभी जी। आइए आज यहां कैसे आना हुआ? मैं – नमस्ते रफीक भाई। मुझे चिकन लेना था इसीलिए आना पड़ा। रफीक मुझसे बात करते वक्त मुझे एक दम भूखे कुत्ते की तरह देख रहा था जैसा अभी वो मुझे शटर गिरा के चोद देगा। उसकी नजर मेरे मस्त बूब्स पर थी और उसके मुंह से लार टपक रही थी। उसके पजामे से उसका लंड साफ पता चल रहा था। करीब 8 इंच का होगा। रफीक का लंड ऊपर से देख कर मेरा मन मचलने लगेगा। फिर मैंने उसको बोला के मुझे चिकन दे दो 2 किलो। जिसपर रफीक बोला – भाभी जी असल में आज चिकन खत्म हो गया गया है और अभी गाड़ी रास्ते में है थोड़ी देर आती होगी। अगर आपको कोई दिक्कत न हो तो आप मेरे ऑफिस में थोड़े देर इंतजार कर लीजिए। 10 मिनट में गाड़ी आ जाएगी। जिसपर मैंने सोचा के ठीक ही है। कम से कम जान पहचान वाले के यहां से मिल जाएगा चिकन और 10 मिनट रुकने में कोई हर्ज नहीं है। क्या पता इसी बहाने मुझे नया लंड मिल जाए। फिर रफीक मुझे ऑफिस ले गया और वहा पर बैठा दिया। और मुझे चाय ऑफर किया। वो खुद भी चाय लेकर वही बैठ गया और मुझसे बात करने लगा। वो लगातार था मुझे घूर रहा था और मेरी तारीफ कर रहा था जैसे आप बेहद सुंदर हैं। असलम साहब किस्मत वाले हैं ऐसी औरत उनकी जिंदगी में है। फिर मैंने उसको पूछा के उसके घर में कौन कौन है। तब उसने बताया के वो और उसकी 2 बेटियां हैं बाकी का परिवार हरियाणा के एक गांव में रहता है। और उसकी बीवी ने उसे तलाक ले लिया है। तब मैंने उसे तलाक की वजह पूछी तो वो बात टालने लगा। मैं – क्या रफीक भाई तलाक क्यों हुआ आपका? रफीक – रहने दीजिए ना भाभी जी। आपको बता नहीं सकता। अगर बताया तो असलम साहब मुझे जेल में ही डाल देंगे। मैं – क्या रफीक भाई कुछ नहीं होगा बताओ तो सही मैं असलम से नहीं बताने वाली। रफीक- अरे नहीं भाभी जी रहने दो। मैं- तुम बताते हो या मैं दूसरी दुकान चली जाउ? रफीक- अच्छा ठीक है भाभी बताता हूं पर प्लीज आप असलम साहब से ना बोलना। मैं- ठीक है। नहीं बताउंगी। रफीक – भाभी जी मेरी बीवी को मैं सेक्स के टाइम कुछ ज्यादा ही परेशान कर देता था इसलिए उसने मुझे तलाक ले लिया। मैं – क्यों तुम से वो खुश नहीं थी क्या? ये सब बात मै इसलिए कर रही थी क्योंकि मुझे अब रफीक में दिलचस्पी आने लगी थी। रफीक – नहीं खुश तो रखता था बस वो मुझे खुश नहीं कर पाती थी। मैं – ऐसा क्या हो जाता था? रफीक – वो बात ये है के मुझे गांड मारने का शौक है और मेरी बीवी को मेरा सामान ज्यादा ही बड़ा लगता था और उसे गांड मरवाना पसंद नहीं था इसलिए। मैं- अरे बाप रे। क्यूं इतना बड़ा था क्या तुम्हारा सामान। अब रफीक भी समझ गया था के मुर्गी यहां खुद हलाल होना चाहती है। तो वो बोला – हां जी है तो आप चाहो तो देख लो। मैं – अच्छा। और असलम को पता चला तो? रफीक – आपके लिए तो जान भी कुर्बान है। फिर मैं जाकर रफीक की गोद में बैठ गई और हम दोनों ने किस कर लिया। उसने भी मेरी गांड और मेरे स्तनों को ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया। थोड़ी देर किस करने के बाद उसने मेरा सूट उतारना चाहा तो मैंने उसका साथ देना शुरू कर दिया। अपना सूट ऊपर करके एक चुची उसके मुंह में दे दी। रफीक एक चुची चूस रहा था और दूसरे को अपने हाथ से दबा रहा था। वो बिच बिच मी मेरे निपल को अपने अंगुठे और पहली उंगली से जोर से मिंज देता था जिसे मेरी आह निकल जाती। फिर उसने मेरी चूची को छोड़ा और मेरी सलवार का नाडा खोला तो। मैंने उसको बोला – आज नहीं। यहाँ पर कोई भी आ सकता है तुम रात को घर आ जाना वहा पर कोई नहीं होगा। हम आराम से करेंगे सब कुछ। जिसपर वो मान गया लेकिन उसने रिक्वेस्ट की और उसका लंड एक बार चूसने को बोला तो मैंने भी उसको मना नहीं किया। फिर मैंने घुटने पर बैठ गई और उसका लंड चूसने लगी। मैं इधर लंड चूस ही रही थी के अचानक गेट खुला। रफीक के बाजू की दुकान के 2 लोग – आलम और हसन आ गए। मेरे मुंह में रफीक का लंड देख वो दोनों हैरान हो गए और उनको देख कर हम दोनों भी डर गए। फिर जैसा तैसे मैंने अपना आपको संभाला और रफीक का लंड निकाल कर अपने आप को ठीक करने लगी। तब हसन बोला – क्या बात है रफ़ीक भाई असलम साहब के माल पर हाथ डाल दिया तुमने तो। जिसपर रफीक बोला – अरे नहीं हसन मिया ये तो बस ऐसे ही। आलम- ऐसे ही क्या, रफीक? ये तुम्हारा लंड चूस रही थी और तुम बड़े मजा चुसवा रहे थे। मैं- देखो जैसा आप दोनों सोच रहे हो वैसा कुछ नहीं है। हसन- तो कैसा है, मैडम जी? आप असलम साहब की मैडम हो ना? फिर ये सब क्या अच्छा लगता है करते हुए।