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Badi Mushkil Se Biwi Ko Teyar Kiya – Part 11

Story Hindi 6 pages 6 months ago

Badi Mushkil Se Biwi Ko Teyar Kiya – Part 11
Hindi Chudai Kahani
This story is part of the Badi Mushkil Se Biwi Ko Teyar Kiya series कुछ क्षणों बाद उसने मेरे गले में अपनी बाहों की माला डाली और मरे होठों से होंठ मिलाकर बिना बोले उन्हें चूसने लगी। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे इस नए अनुभव करवानेके लिए वह मेरे प्रति अपनी कृतज्ञता दर्शा रही थी। थोड़ी देर बाद मेरी प्यारी पत्नी बैठी और मेरी और अनिल को और देख कर बोली, “राज और अनिल। अब तक तुम दोनों ने मुझे खुश किया, अब मेरी बारी है।” नीना ने यह कह कर हम दोनों को फर्श पर खड़ा किया और खुद अपने घुटनों को मोड़ कर अपने कूल्हों पर बैठ गयी। इस पोज़ में वह एकदम सेक्स की देवी लग रही थी। उसके उन्मत्त उरोज उसकी छाती पर ऐसे फैले थे जैसे गुलाबी रंग के दो गुब्बारे उसकी छाती पर चिपका दिये हों। नीना के स्तन एकदम उन्मत्त और गुब्बारे की तरह फुले हुए थे। जाहिर है की मेरा और अनिल का लण्ड पुरे तनाव में था। नीना ने मेरी और देखा और हम दोनों का लण्ड अपने दोनों हाथों में लेकर धीरे धीरे सहलाने लगी। हालांकि हम दोनों का लण्ड उसके हाथोँ में था, मैं देख रहा था की उसका ध्यान अनिल के मोटे और लंबे लंड पर ज्यादा था। उसका इतना तना हुआ अकड़ा, मोटा और लंबा लंड को हाथ में पकड़ कर मुझसे नजरें बचा कर वह उसे घूर घूर कर देखती रहती थी। थोड़ा सा सहलाने के बाद नीना ने मेरे लण्ड को अपने होठ से चूमा और अपनी जीभ से मेर लण्ड पर फैले हुए मेरे रास को चाटा और धीरे से उसके अग्र भाग को अपने होठों के बिच लिया। मेरे लण्ड के छोटे से हिस्से को मुंह में लेकर वह उसको ऊपर नीचे अपनी जीभ से रगड़ ने लगी। जब मेरी बीबी ज्यादा कामातुर हो जाती थी तो मुझे कभी कभी यह लाभ मिलता था। मेरी सात साल की शादी के जीवन में यह शायद तीसरा या चौथा मौका था जब मेरी बीबी ने मुझे यह सेवा दी। उधर वह दूसरे हाथ से अनिल के लण्ड को आराम से सहलाये जा रही थी। यह कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे हैं। थोड़ी देर मेरा लण्ड चूसने के बाद नीना ने अपना मुंह अनिल के लण्ड की और किया। धीरे से अनिल की और नजर उठाते हुए नीना ने अनिल के लण्ड को भी मेरी ही तरह चाटने लगी। अनिल स्तंभित होकर देखता ही रह गया। उसकी स्वप्न सुंदरी आज उसके लण्ड का चुम्बन कर रही थी और उसे चूस रही थी यह उसके लिए अकल्पनीय सा था। नीना ने धीरे धीरे अनिल को लण्ड को मुंह में डालने की कोशिश की। पर उसका मुंह इतना खुल नहीं पा रहा था। तब नीना ने अनिल के लण्ड के सिर्फ अग्र भाग को थोड़ा सा मुंह में डाला और उसे चूमने एवं चाटने लगी। धीरे धीरे वह उसमें इतनी मग्न हो गयी की अनिल के लण्ड को वह बार बार चूमने लगी और जैसे वह उसे छोड़ना ही नहीं चाह रही थी। अनिल के लिए यह बड़ी मुश्किल की घडी थी। वह उत्तेजना के शिखर और पहुँच रहा था।

उसी उत्तेजना में उसने नीना का सर हाथ में लेकर अपना मोटा और लंबा लण्ड नीना के मुंह में घुसेड़ दिया। नीना ने बरबस ही अपना मुंह और खोला और अनिल के लण्ड को अपने होठों से और अपनी जीभ से जैसे अपने मुंह में चुदवाने लगी। अनिल का बदन एकदम अकड़ गया था। इस हालत में वह अपने आप को रोक नहीं पाया और एक आह्हः… के साथ उसके लण्ड में से फव्वारा छूटा और उसका वीर्य निकल पड़ा और मेरी सुन्दर नग्न पत्नी के मुंह को पूरा भर कर उसके नंगे बदन पर गिरा और फ़ैल गया। तब मैं मेरी बीबी के स्तनों को मेरे दोनों हाथो से दबा रहा था। अनिल का गरमा गरम वीर्य मेरे हाथों को छुआ और मेरी बीबी के स्तनों पर जैसे कोई मलाई फैली हो ऐसे फ़ैल गया। वह मलाई धीरे धीरे और भी नीचे टपकने लगी। पता नहीं कितना माल अनिल ने मेरी बीबी के मुंह में भर डाला था। अनिल के वीर्य स्खलन होने पर मैंने देखा तो नीना थोड़ी सी सकुचायी या निराश सी लग रही थी। उसने मेरी और देखा। मैं समझ गया की शायद उसे इसलिए निराशा हो रही होगी की अब अनिल तो झड़ गया। अब वह उसे चोद नहीं पायेगा। मैं धीरेसे नीना के कान के पास गया और उसके कान में बोला, “डार्लिंग, निराश न हो। वह थोड़े ही अपनी पत्नी को चोद रहा है, जो थक जाएगा या ऊब जाएगा? वह तो उसकी प्रेमिका को चोदने जा रहा है। यही तो अंतर है पत्नी और प्रेमिका में। प्रेमिका के लिए उसका लण्ड हमेशा खड़ा रहेगा। उलटा एक बार झड़ जानेसे उसका स्टैमिना अब बढ़ जायेगा। अनिल अब तुम्हें आसानी से नहीं छोड़ेगा। वह अब तुम्हे दोगुना जोर से चोदेगा।” मेरी इतने खुले से ऐसा कहने पर मेरी शर्मीली बीबी शर्म से लाल हो गयी। अनिल हमारी काना फूसि देखरहा था। वह धीरेसे बोला, “कहीं तुम मियां बीबी मुझे फंसाने को कोई प्रोग्राम तो नहीं बना रहे हो ना?” तब नीना अनायास ही बोल पड़ी, “हम तुम्हे क्या फंसायेंगे? तुम दोनों ने मिलकर तो आज मुझे फंसा दिया। ” पर अब नीना को मेरी और से कोई संकोच नहीं रहा। नीना ने अनिल को अपनी बाँहों में लिया और उसके होठों पर चुबन की एक चुस्की लेकर अपने स्तनों को अनिल के मुंह में डाल दिया। वह उसे अपने मम्मो को चुसवाना चाहती थी। जैसे ही अनिल ने मेरी बीबी के मम्मो को चूसना शुरूकिया तो नीना के बदन में जोश भर गया और उसने अपने मुंह में मेरा लण्ड लिया। वह मुझे यह महसूस नहीं होने देना चाहता थी, की वह मुझे भूलकर अनिल के पीछे लग गयी है। मैं भी नीना का सर पकड़ कर उस के मुंह को चोदने लगा। मुझे आज उसके मुंह को चोदने में बहुत आनंद आ रहा था, क्योंकि आज मैं अपनी पत्नी की मुंह चुदाई मेरे मित्र के सामने कर रहा था। थोड़ी ही देर मैं मैं भी अपने जोश पर नियंत्रण नहीं रख पाया। मेरे मुंह से एक आह सी निकल गयी और मैंने मेरी बीबी के मुंह में अपना सारा वीर्य छोड़ दिया। नीना अनिल के वीर्य का स्वाद तो जानती ही थी।

मेरी पत्नी मेरा वीर्य भी पहले ही की तरह निगल गयी। मेरे इतने सालों के वैवाहिक जीवन में यह पहली बार हुआ की मेरी बीबी मेरे वीर्य को निगल गयी हो। तब तक जब भी कोई ऐसा बिरला मौका होता था जब नीना मेर लण्ड को अपने मुंह में डालती थी तो या तो मैं थोड़ी देर के बाद मेरा लण्ड निकाल लेता था, या फिर मेरी बीबी मुझे मुंह में मेरा वीर्य नहीं छोड़ने की हिदायत देती थी। वह दिन मेरे लिए ऐतिहासिक था। अनिल और मैं हम दोनों ही नीना के इस भाव प्रदर्शन से अभिभूत हो गए थे। मैं मेरी पत्नी को सेक्स का ऐसे उन्मादअनुभव कराना चाहता था जो उसने शायद पहले कभी नहीं किया हो। मैंने अनिल के कानों में बोला, “क्यों न हम नीना को अब सेक्स का ऐसा अनुभव कराएं जो उसने पहले कभी किया ना हो?” अनिल ने मेरी और देखा और मेरा हाथ अपने हाथ में ले कर सख्ती से पकड़ा और बोला, “मैं तुमसे पूरी तरह सहमत हूँ। मेरा भी उसमें एक स्वार्थ है। तुम्हारी अनुमति के बगैर वह पूरा नहीं हो सकता। मैं भी नीना को सेक्स की पराकाष्ठा पर ले जाना चाहता हूँ, जिससे वह मुझसे दुबारा सेक्स करने को इच्छुक हो। पर उसके लिए तुम्हारी अनुमति भी आवश्यक है। ” तब मैंने उसे कहा, “मैं यह मानता हूँ की यदि हम सब साथ में एक दूसरे से कुछ भी न छुपाकर सेक्स करते हैं तो वह आनंद देता है। पर यदि चोरी से या छुपी कर सेक्स करते हैं तो परेशानी और ईर्ष्या का कारण बन जाता है। मैं चाहता हूँ की अनीता भी हमारे साथ शामिल हो। हम सब मिलकर एक दूसरे को एन्जॉय करें और करते रहें। ” नीना ने हमारी और देखा। वह समझ गयी के मैं और अनिल उससे सेक्स करनें के बारे में ही कुछ बात कर रहें होंगे। मैंने उसकी जिज्ञासा को शांत करने के लिए कहा, “अनिल तुम से बार बार सेक्स करने के बारें में पूछ रहा था। मैंने उसे कहा की अगर हम सब राजी हैं तो कोई रुकावट नहीं है।” नीना ने इस पर कोई टिपण्णी नहीं की। पर नीना अब काफी खुल गयी थी। वह उठ खड़ी हुयी और हम दोनों के साथ पलंग पर वापस आ गयी। फिर फुर्ती से वह मेरी गोद मैं बैठ गयी। उसने अपने दोनों पाँव मेरी कमर के दोनों और फैला कर मुझे अपने पाँव में जकड लिया। मेरे होठ से होठ मिलाकर बोली, “मेरे प्राणनाथ, डार्लिंग पूरी दुनिया में तुम शायद गिने चुने लोगों में से हो जो अपनी बीबी को दूसरे के साथ सेक्स करने लिए उकसाता है। पर अगर मुझे इसकी लत पड़ गयी तो तुम क्या करोगे? कहीं ऐसा न हो की मैं रोज किसी और के साथ सोना चाहूँ तो?” ऐसा बोल उसने मुझे पुरे जोश से चूमना शुरू किया। तब अनिल उसके पीछे सरक कर पहुँच गया और मेरे और नीना के बिच में हाथ डालकर नीना की चूँचियों को सहलाने और दबाने लगा। नीना ने अनिल का हाथ पकड़ा और अनिल को अपनी और खिंचा। अनिल नीना के कूल्हों से अपना लण्ड सटाकर बैठ गया।

नीना की गरम चूत का स्पर्श होते ही धीरे धीरे मेरा लण्ड कड़क होने लगा। उसके वीर्य का फौवारा निकलने पर भी अनिल का लण्ड तो ढीला पड़ा ही न था। मैं अनिल की क्षमता देख हैरान रह गया। खैर, उस दिन का माहौल ही कुछ ऐसा था। मेरा लण्ड भी तो एक बार झड़ने के बाद फिर से कड़क हो गया था। थोड़ी देर तक मेरी नंगी बीबी को चूमने के बाद मैंने उसे पलंग के किनारे सुलाया और उसे अपनी टांगें नीचे लटकाने को कहा। अनिल तो जैसे नीना से चिपका हुआ ही था। यह कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे हैं। जब नीना पलंग के किनारे अपनी टाँगे नीचे लटका के पलंग के ऊपर लेट गयी तो अनिल उसकी छाती पर अपना मुंह रख कर लेट गया। मैं झट से पलंग के नीचे उतरा और अपनी बीबी की टांगो को फैला कर उसकी चूत चाटने लगा। मेरी जीभ जैसे ही नीना की चूत में घुसी की नीना छटपटाने लगी। मुझे पता था की नीना की चूत चाटने से या फिर उसको उंगली से चोदने से वह इतनी कामान्ध हो जाती थी की तब वह बार बार मुझे चोदने के लिए गिड़गिड़ाती थी। आज मैं उसे हम दोनों से चुदवाना चाहता था। इसके लिए हमें उसे इतना उत्तेजित करना था की वह शर्म के सारे बंधन तोड़ कर हम दोनों से चुदवाने के लिए बाध्य हो जाए। मेरी पत्नी की छटपटाहट पर ध्यान ना देते हुए मैंने उसकी चूत मैं एक उंगली डाल कर उसे उंगली से बड़ी फुर्ती और जोर से चोदना शुरू किया। नीना के छटपटाहट देखते ही बनती थी। वह अपना पूरा बदन हिलाकर अपने कूल्हों को बेड पर रगड़ रगड़ कर कामाग्नि से कराह रही थी। उसका उसके बदन पर तब कोई नियंत्रण न रहा था। वह मुझे कहने लगी, “राज डार्लिंग, ऐसा मत करो। मुझे चोदो। अरे भाई तुम मुझे अनिल से भी चुदवाना चाहते हो तो चुदवाओ पर यह मत करो। मैं पागल हो जा रही हूँ।” मैं नीना की बात पर ध्यान दिए बगैर, जोर शोर से उसको उंगली से चोद रहा था। तब नीना ने अनिल का मुंह अपने मुंह पर रखा और उसे जोश चूमने लगी। मैंने उसे अनिल को यह कहते हुए सुन लिया, “अनिल अपने दोस्त से कहा, मुझे चोदे। आओ तुम भी आ जाओ आज मैं तुम दोनों से चुदवाऊंगी। तुम मुझे चोदने के लिए बड़े व्याकुल थे न? आज मैं तुमसे चुदवाऊंगी। पर राज को वहां से हटाओ” जब मैं फिर भी ना रुका तो एकदम नीना के मुंह से दबी हुयी चीख सी निकल पड़ी, “आह.. ह.. ह.. राज.. अनिल.. ” ऐसे बोलते ही नीना एकदम ढेर सी शिथिल हो कर झड़ गयी। मैंने आजतक नीना को इतना जबरदस्त ओर्गास्म करते हुए नहीं पाया था। उसकी चूत में से जैसी एक फव्वारा सा छूटा और मेर हाथ और मुंह को उसके रस से भर दिया। वह नीना का उस रात शायद चौथा ओर्गास्म था। मैं हैरान रह गया। मेरी बीबी आज तक के इतने सालों में ज्यादा से ज्यादा मुश्किल से दो बार झड़ी होगी। मैं थम गया। मैंने देखा की नीना थोड़ी सी थकी हुई लग रही थी। मैं उसे ज्यादा परेशान नहीं करना चाहता था।

मुझे तो उसको हम दोनों से चुदवाने के किये बाध्य करना था, सो काम तो हो गया। नीना ने थोड़ी देर बाद अपनी आँखे खोली और मुझे और अनिल को उसके बदन के पास ऊपर से उसको घूरते हुए देखा। वह मुस्कुरायी। उसने हम दोनों के हाथ अपने हाथों में लिए और अपनी पोजीशन बदल कर बिस्तर पर खिसक कर सिरहाने पर सर रख कर लेट गयी। उसने मुझे अपनी टांगों की और धक्का दिया। मैं फिर उसकी चूत के पास पहुँच गया। तब नीना ने मुझे खिंच कर मेरा मुंह उसके मुंह से मिलाकर मेर लण्ड को अपने हाथ में लिया और अपनी टांगो को फिर ऊपर करके मेर लण्ड को अपनी चूत पर रगड़ने लगी। वह मुझसे चुदवाना चाहती थी। तब मैंने अनिल को अपनी और खींचा और मैं वहाँ से हट गया। अब अनिल नीना की टांगो के बिच था। मेरी बीबी समझ गयी की मैं उसे पहले अनिल से चुदवाना चाहता हूँ। अनिल का मुंह मेरी बीबी के मुंह के पास आ गया। दोनों एक दूसरे की आँखों में झांकने लगे। अनिल झुक कर मेरी बीबी को बड़े जोश से चुम्बन करने लगा। अनिल उस वक्त कामाग्नि से जल रहा था। इतने महीनों से जिसको चोदने के वह सपने देख रहा था और सपने में ही वह अपना वीर्य स्खलन कर जाता था वह नीना अब नंगी उसके नीचे लेटी हुयी थी और उससे चुदने वाली थी। नीना समझ गयी की अब क़यामत की घडी आ गयी है। अनिल का लटकता लण्ड नीना की चूत पर टकरा रहा था। नीना ने धीरेसे अनिल का मोटा और लंबा लण्ड अपने हाथों में लिया और उसे प्यार से सहलाने लगी। अचानक वह थोड़ी थम सी गयी और कुछ सोच में पड़ गयी। अनिल ने अपने होंठ नीना के होंठ से हटाये और पूछा, “क्या बात है? क्या सोच रही हो? क्या अब भी तुम शर्मा रही हो?” तब नीना अनिल के कानों में फुसफुसाई, “अरे बाबा, तुम्हारा इतना मोटा और लंबा है। मेरा छेद तो छोटा सा है। उसमें कैसे डालोगे? अगर तुमने डाल भी दिया तो मैं तो मर ही जाऊंगी। ज़रा ध्यान रखना। मुझे मार मत डालना। और फिर नीना ने अनिल को अपनी बाहों में इतना सख्त जकड़ा और इतने जोश से उसे चुबन करने लगी और अनिल की जीभ को चूसने लगी की मैं तो देखता ही रह गया। अनिल ने तब नीना को ढाढस देते हुए कहा, “तुम ज़रा भी चिंता मत करो। मैं ध्यान रखूँगा।“ उस बार मैंने अपनी पत्नी का पर पुरुष गामिनी वाला पहलु पहली बार देखा। तब तक मैं उसे निष्ठावान, पतिव्रता और रूढ़िवादी मानता रहा था। आज उसने मुझे अपने वह पहलु के दर्शन दिए जो मैंने सपने में भी नहीं सोचा था। पर हाँ, उसे यहां तक लाने में मेरा पूरा योगदान था। अनिल ने ध्यान से अपने मोटे और लम्बे लण्ड को नीना के प्रेम छिद्र के केंद्र में रखा। फिर उसे उसकी चूत के होठों पर प्यार से रगड़ने लगा। मेरी पत्नी की नाली में से तो जैसे रस की धार बह रही थी। अनिल का बड़ा घंटा भी तो रस बहा रहा था। अनिल का डंड़ा तब सारे रस से सराबोर लथपथ था।

उसने धीरे से अपने लण्ड को नीना की चूत में थोड़ा घुसाया। नीना ने भी अनिल के लण्ड को थोड़ा अंदर घुसते हुए महसूस किया। उसे कोई भी दर्द महसूस नहीं हुआ। अनिल की आँखे हर वक्त नीना के चेहरे पर टिकी हुयी थीं। कहीं नीना के चहेरे पर थोड़ी सी भी दर्द की शिकन आए तो वह थम जाएगा, यही वह सोच रहा था। अनिल ने अनिल ने थोड़ा और धक्का दे कर अपना लण्ड नीना की चूत में थोड़ा और घुसेड़ा। अब नीना को अनिल के लण्ड की मोटाई महसूस होने लगी। फिर भी उसको ज्यादा दर्द नहीं हो रहा था। अनिल ने जब अपना लण्ड थोड़ा और जोर से नीना की चूत में धकेला तो नीना के मुंह से आह निकल पड़ी। नीना की आह सुनकर अनिल थोड़ी देर थाम गया। उसने धीरे से अपना लण्ड थोड़ा निकाला। नीना को थोड़ी सी राहत हुयी। तब उसकी बात सुन कर मैं तो भौचका ही रह गया। उसने अनिल से कहा, “डालो अंदर। दर्द तो हो रहा है पर यह दर्द भी मीठा है।” अनिल का मोटा लण्ड लगभग आधा अंदर जा चूका था। मेरी बीबी की चूत के दोनों होठ पुरे फुले हुए थे और अनिल के लौड़े को बड़ी सख्ती से अपने में जकड़ा हुआ था। अनिल के लण्ड और नीना की चूत के मिलन सतह पर चारों और उनके रस की मलाई फैली हुई थी, ऐसे लग रहा था जैसे एक पिस्टन सिलिंडर से अंदर बाहर होता है तब चारो और आयल फैला हुआ होता है। पढ़ते रहिये.. क्योकि ये कहानी अभी जारी रहेगी.. और मेरी मेल आई डी है “[email protected]”.

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