All content free · updated every 5 minutes

RISKI LOVE

Story Hindi 193 pages 7 months ago

भाग ~ 1
​

हॉस्पिटल के आईसीयू में पूरी तरह शांति छाई हुई थी। एक नर्स मरीज़ के बेड के पास बैठी थी। कुछ देर पहले ही मरीज़ को ऑपरेशन थिएटर से आईसीयू में शिफ्ट किया गया था।
आईसीयू के बाहर मरीज़ का करीबी डॉक्टर से बात कर रहा था।
"डॉक्टर मेहरा भाई की हालत अब कैसी है ?"
डॉक्टर मेहरा ने जवाब दिया,
"पंकज भाई.... बड़ा मुश्किल ऑपरेशन था। बहुत समय लग गया। गोली दिल के बहुत करीब लगी थी। ऑपरेशन तो सक्सेसफुल रहा। पर खून बहुत बह गया था। कंडीशन क्रिटिकल है।"
"कितना समय लगेगा भाई को ठीक होने में ?"
"अभी तो अगले 24 घंटे बहुत क्रिटिकल हैं। पहले यह गुज़र जाएं। उसके बाद तो घाव को भरने में जितने भी दिन लगें।"
डॉक्टर मेहरा की बात सुनकर पंकज सोच में पड़ गया। डॉ मेहरा ने कहा,
"वैसे अगर उनके ड्राइवर मुकेश ने बहादुरी ना दिखाई होती और उन्हें लाने में ज़रा भी देर कर दी होती, तो उनका बचना मुश्किल था।"
पंकज ने कहा,
"डॉक्टर मेहरा एक बात का खयाल रखिएगा कि भाई की खबर बाहर ना जाने पाए।"
"पंकज भाई यह हॉस्पिटल भाई की वजह से ही है। कोई खबर बाहर नहीं जाएगी निश्चिंत रहिए।"
"ठीक है मैं चलता हूँ। आप पर भरोसा है कि भाई का इलाज अच्छी तरह होगा। उनकी देखभाल के लिए हर समय कोई ना कोई रहना चाहिए।"
"आप बिल्कुल चिंता ना करें। हमारे लिए भाई को सही सलामत घर भेजना ही सबसे ज़रूरी काम हैं। बस यह 24 घंटे ऊपर वाले के हाथ में हैं।"
पंकज चला गया। डॉक्टर मेहरा ने अपने जूनियर डॉक्टर को हिदायत दी कि मरीज़ पर नज़र रखे।

इस हॉस्पिटल का नाम कावेरी देवी मेमोरियल हॉस्पिटल था। यह शहर का माना हुआ हॉस्पिटल था। इसकी खासियत थी कि यह कावेरी देवी ट्रस्ट द्वारा संचालित था। यहाँ पाँच सितारा हॉस्पिटल की सुविधा आम आदमी को भी उपलब्ध थी।
इस हॅस्पिटल की स्थापना करने वाला अंजन विश्वकर्मा इसी हॉस्पिटल के आईसीयू में ज़िंदगी की लड़ाई लड़ रहा था।

हॉस्पिटल से आठ किलोमीटर की दूरी पर क्राइम रिपोर्टर नफीस रहमान अपने ऑफिस में बैठा अपने सहायक विनोद की खबर पर विचार कर रहा था। उसने विनोद से कहा,
"विनोद खबर पक्की है ना ?"
"सर पिछले चार सालों से आपके साथ काम कर रहा हूँ। बिना पुख्ता यकीन के कोई खबर आप तक नहीं लाऊँगा।"
नफीस अपनी कुर्सी से उठकर पंद्रहवीं मंज़िल के अपने ऑफिस की खिड़की से बाहर देखने लगा। नीचे सड़क पर जगमगाती रौशनी में शहर रोज़ की रफ्तार से ही दौड़ा रहा था। उस बात से बेखबर जो अभी विनोद ने उसे बताई थी।
विनोद ने कहा,
"सर कल रात दस से सवा दस के बीच यह वारदात हुई थी।"
नफीस अपनी जगह पर आकर बैठ गया। कुछ सोचकर वह बोला,
"शिमरिंग स्टार्स बीच हाउस अंजन विश्वकर्मा का है ?"
"जी सर...."
"वहाँ कौन कौन था उसके साथ ?"
"उसका खास आदमी पंकज सुर्वे था। सर सुनने में आया है कि वहाँ एक लड़की भी थी।

"
"लड़की ?? कौन थी वो लड़की ?"

"सर वह पता नहीं चला।"
नफीस एक बार फिर सोचने लगा। वह अपने मन में कुछ हिसाब किताब लगा रहा था। विनोद ने पूँछा,
"क्या सोच रहे हैं सर ?"
"तुमने बताया कि अंजन को उसका ड्राइवर मुकेश बचा कर ले गया था। इसका मतलब यह है कि पंकज वहाँ से चला गया था। ज़रूर वह अंजन के कहने पर उस लड़की को वहाँ से निकाल कर ले गया होगा।"
"सर बात तो आपकी एकदम ठीक है।"
"विनोद वो लड़की अंजन के लिए बहुत खास है। तभी तो उसने अपने सबसे खास आदमी को उसे ले जाने के लिए कहा होगा।"
"सर मैंने तो ऐसे सोचा ही नहीं था।"
"विनोद...दो बातों का पता करो। वह लड़की कौन थी और ड्राइवर अंजन को लेकर कहाँ गया था ?"
"जी सर मैं इन दोनों बातों का पता लगाने की कोशिश करता हूँ।"
विनोद चला गया। नफीस अंजन के बारे में सोचने लगा। क्राइम रिपोर्टर नफीस ने पिछले पंद्रह सालों में अपराध की दुनिया में कई लोगों को चमकते और गायब होते देखा था। लेकिन अंजन विश्वकर्मा की कहानी उसे बड़ी दिलचस्प लगती थी। क्राइम रिपोर्टिंग के साथ साथ नफीस ने लेखन में भी हाथ आजमाया था। अपराध की दुनिया पर लिखी उसकी पहली किताब को लोगों ने बहुत पसंद किया था। इन दिनों वह अंजन के बारे में ही लिख रहा था।

नफीस याद कर रहा था बारह साल पहले के बाइस साल के अंजन को। जब पहली बार पुलिस स्टेशन में उसने अंजन को देखा था। वह अपने दोस्त इंस्पेक्टर नीरज से मिलने गया था। उसे एक केस के बारे में कुछ जानकारियां चाहिए थीं। जब वह पुलिस स्टेशन पहुँचा था तब इंस्पेक्टर नीरज दो जवान लड़कों को हड़का रहा था,
"बहुत गर्मी चढ़ी है तुम दोनों को। धमकी देने गए थे। पुलिस के डंडे पड़ेंगे तो सारी गर्मी उतर जाएगी।"
एक लड़का जो भरे हुए शरीर का था वह इंस्पेक्टर नीरज की बात सुनकर परेशान हो गया। उसने अपने साथी की तरफ देखा। उसके साथी ने आँखों ही आँखों में उसे आश्वासन दिया। उसका साथी बोला,
"इंस्पेक्टर साहब हम दोनों राजन भाई के आदमी हैं। आप हमें अधिक समय अपने पास रख नहीं पाएंगे।"
उसने बहुत आत्मविश्वास के साथ यह बात कही थी। इंस्पेक्टर नीरज ने उसे घूर कर देखा। उसके बाद गाल पर एक झन्नाटेदार झांपड़ रसीद कर दिया। झांपड़ ज़ोरदार था पर उस लड़के के चेहरे पर डर की जगह एक गुस्सा था।
वह सांवले रंग का दुबला पतला लड़का था। देखने से ऐसा हरगिज नहीं लगता था कि उसके भीतर एक आग छिपी हो सकती है।
उस लड़के का विश्वास सही निकला। राजन भाई का एक आदमी दोनों लड़कों की ज़मानत करा कर ले गया। तब नफीस को उन दोनों का नाम पता चला। दुबला पतला सांवला लड़का अंजन विश्वकर्मा था। उसके साथी का नाम पंकज सुर्वे था।
नफीस ने उस दिन उसकी आँखों में जो चिंगारी देखी थी वह इतनी बड़ी आग बन जाएगी उसे नहीं पता था।

नफीस का फोन बजा।

स्क्रीन पर शाहीन का नाम देखकर वह मन ही मन बुदबुदाया,
'मारे गए.... मुझे तो याद ही नहीं रहा था।"

कार में नफीस और शाहीन थे‌। दोनों शाहीन की छोटी बहन नाज़नीन की बर्थडे पार्टी से लौट रहे थे। शाहीन अभी भी नाराज़ थी। नफीस ने कहा,
"अभी भी नाराज़ हो। ज़रूरी काम था इसलिए लेट हो गया था।"
शाहीन ने बाहर सड़क पर देखते हुए कहा,
"मैं कुछ कहूँ उसके अलावा तुम्हारे लिए सबकुछ ज़रूरी है।"
"कैसी बात कर रही हो ? तुमसे बढ़कर मेरे लिए कुछ भी नहीं है।"
"हर बार गलती करने के बाद तुम यही कहते हो।"
नफीस कुछ देर चुप रहा। वह शाहीन का मूड ठीक करने के बारे में सोच रहा था।‌ उसने कहा,
"बहुत दिन हुए कुल्फी नहीं खाई। चलो आज खाते हैं।"
शाहीन ने रुखाई से कहा,
"पार्टी में इतना कुछ खाया है। अब मन नहीं है। वैसे भी तुम मेरी सिचुएशन समझ नहीं पाओगे। अम्मी, अब्बू, भाईजान, भाभीजान, सारा आपा सब बार बार एक ही बात कर रहे थे। नफीस को फैमिली फंक्शन के लिए तो वक्त निकालना ही चाहिए।"
नफीस नाराज़ होते हुए बोला,
"आया तो था ना। तुम्हारी फैमिली के हर फंक्शन में शिरकत करता हूँ। पर मेरी सारी कोशिशों के बाद भी तुम्हारी फैमिली मुझे अपना नहीं पाई है।"
शाहीन ने उसे घूर कर देखा। वह बोली,
"वो सिर्फ मेरी फैमिली है। तुम भी तो उन्हें पूरी तरह अपना नहीं पाए।"
नफीस ने कुछ नहीं कहा। कुछ बोलने का मतलब झगड़ा बढ़ाना था। दोनों सारे रास्ते खामोश रहे।

घर पहुँचकर शाहीन अपने बेडरूम में चली गई। नफीस लिविंग रूम में अपना लैपटॉप लेकर बैठ गया। वह अंजन पर लिखी जा रही अपनी किताब के शुरुआती चैप्टर पढ़ने लगा।

छोटे मोटे अपराध करते हुए अंजन तेज़ी से अपराध की दुनिया में आगे बढ़ रहा था। सिर्फ दो साल में वह एक नाम बन गया था। अंजन के सर पर एक स्थानीय नेता रघुनाथ परिकर का हाथ था।
रघुनाथ का कंस्ट्रक्शन का बिज़नेस था परिकर कंस्ट्रक्शन्स। परिकर कंस्ट्रक्शन्स की निगाह उन पुरानी सोसाइटीज़ पर रहती थी जिनमें रीडेवलपमेंट की आवश्यकता होती थी।
रघुनाथ अपने रसूख और ताकत के बल पर यह निश्चित कर लेता था कि रीडेवलपमेंट का टेंडर गोकुल डेवलेपर्स को मिले जो उसके छोटे भाई यदुनाथ के नाम पर थी। एक बार प्रोजेक्ट हाथ आ जाता था तो फिर असली खेल शुरू होता था।
जानबूझकर रीडेवलपमेंट का काम शुरू करने में देर की जाती‌। इस दौरान लोगों को लालच देकर उनकी जगह खरीद ली जाती। जो नहीं मानता उसे डरा धमका कर काम किया जाता। अंजन रघुनाथ के लिए यही काम करता था।
दूसरी बार नफीस अंजन से एक पार्टी में मिला था।‌ अब उसका शरीर कुछ भर गया था। कपड़े पहनने का ढंग आ गया था। उसने ग्रे जींस और टाइट फिटिंग वाली टी शर्ट पर ब्राउन कलर का लैदर जैकेट पहन रखा था। बहुत आकर्षक लग रहा था।
हाथ में ड्रिंक लिए वह पार्टी में इधर उधर घूम रहा था।

उसकी निगाहें पार्टी में आई लड़कियों पर थीं। वह उन्हें ही देख रहा था। नफीस ने बड़े ध्यान से देखा था। उसकी आँखों में उनके जिस्म के लिए कोई हवस नहीं थी। वह तो बस उनमें से अपने लिए एक गर्लफ्रेंड की तलाश कर रहा था जिसके साथ वह अच्छा वक्त बिता सके।
वह उन्हें दूर से ही देख रहा था। नज़दीक जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। वह जानता था कि भले ही उसने फैशनेबल कपड़े पहने हों पर उसके पास वह क्लास नहीं है।

बेडरूम का दरवाज़ा खुला। शाहीन ने आकर कहा,
"रात भर यहीं बैठोगे ?"
"बस आ रहा था।"
नफीस ने लैपटॉप बंद किया। शाहीन के पास आया। उसे गले लगाकर बोला,
"यू नो हाऊ मछ आई लव यू..."
शाहीन ने भी उसे अपनी बाहों में कस लिया।

भाग ~ 2​

शाहीन नफीस के बगल में सोई हुई थी। उसका हाथ नफीस के सीने पर था। उसने प्यार से उसका हाथ हटाया और आहिस्ता से बेड से उतर गया। बिना आहट किए बेडरूम से बाहर निकल कर दरवाज़ा बंद कर दिया।
उसे नींद नहीं आ रही थी। दिमाग अंजन में ही उलझा हुआ था।
अंजन से अपनी दूसरी मुलाकात के बाद से ही उसकी दिलचस्पी उसमें बढ़ गई थी। इसी बीच एक खबर ऐसी आई जिसने सबको चौंका दिया था। रघुनाथ परिकर ने अपनी बहन मानवी परिकर की सगाई अंजन से कर दी थी। उसे अपने बिज़नेस का हिस्सेदार बना दिया था। रघुनाथ को जानने वाले लोग समझ रहे थे कि इसके पीछे ज़रूर कोई गहरी बात है।
इस खबर ने अंजन में नफीस की दिलचस्पी को बहुत अधिक बढ़ा दिया था। अब उसने अंजन के बारे में पता करना शुरू कर दिया। सबसे पहले उसने इस बात का पता लगाया कि अंजन रघुनाथ परिकर के संपर्क में आया कैसे ?
अंजन राजन नाम के एक गुंडे के गैंग में था। वह आसपास के दुकानदारों को धमका कर उनसे वसूली करता था। रघुनाथ परिकर को अपने काम के लिए कुछ लड़कों की ज़रूरत थी। उसे अंजन के बारे में पता चला तो मिलने के लिए बुलाया। अंजन अपने दोस्त पंकज को साथ लेकर गया।
नफीस को याद है कि इस मुलाकात के बारे में बताते हुए उसके एक खबरी ने कहा था कि अंजन रघुनाथ परिकर के पास बड़े ही आत्मविश्वास के साथ पहुँचा था। जबकी रघुनाथ के सामने आँख उठाकर बात करने की हिम्मत बहुत कम लोग कर पाते थे।
उस खबरी ने जो बताया था उसे नफीस ने कुछ इस तरह से अपने लैपटॉप में दर्ज किया था।

अंजन के पहुंँचने पर रघुनाथ ने उसे सर से पैर तक देखा। कुछ सोचने के बाद बोला,
"मेरे लिए काम करोगे ?"
अंजन ने बिना झिझके कहा,
"अच्छा पैसा मिलेगा तो ज़रूर करूँगा।"
उसका अंदाज़ देखकर रघुनाथ ने एक बार फिर उसके चेहरे को गौर से देखा।
"पैसे उससे अधिक होंगे जितना अभी कमाते हो। लेकिन ईमानदारी से काम करना होगा।"
अंजन ने उसी अंदाज़ में कहा,
"करूँगा...."
रघुनाथ ने हंसकर कहा,
"तुम्हारी ईमानदारी मेरे लिए होगी या पैसों के लिए ?"
अंजन कुछ रुक कर बोला,
"पैसों के लिए।

लेकिन यहाँ आपसे ज्यादा पैसे देने वाला कौन है।"
"सही है.... मुझसे धोखा कर ज़िंदा बच जाए ऐसा भी कोई नहीं है।"
रघुनाथ ने इस धमकी से उसे समझा दिया था कि उसकी ताकत क्या है। अंजन ने साथ खड़े पंकज की तरफ इशारा करके कहा,
"मेरा दोस्त पंकज भी बहुत काम का है। हम हमेशा साथ रहते हैं। इसे भी काम पर रख लीजिए।"

रघुनाथ ने पंकज को भी साथ रखने की इजाज़त दे दी। उस दिन के बाद से ही अंजन रघुनाथ के लिए काम करने लगा। शुरू में वह छोटे-मोटे काम करता था। लेकिन छह महीने के अंदर ही अंजन रघुनाथ का खास आदमी बन गया। अब वह उसकी तरफ से बड़े बड़े काम करता था। कई पेचीदा मामलों में उसने प्रॉपर्टी पर रघुनाथ का कब्जा करवाने में अहम भूमिका निभाई थी।
रघुनाथ अंजन के काम से खुश था। पर यह बात किसी की समझ नहीं आ रही थी कि अंजन ने ऐसा क्या कर दिया था कि रघुनाथ अपनी इकलौती बहन जिसे वह अपनी बेटी की तरह चाहता था की सगाई उसके साथ करने को तैयार हो गया।
नफीस भी यह जानने के लिए उत्सुक था। उसने अपने स्तर पर इस बात का पता लगाया कि कैसे अंजन और मानवी की पहचान हुई। अंजन के एक साथी ने उसे वह बातें बताईं जो उसने अंजन के मुंह से सुनी थीं।

उस दिन रघुनाथ परिकर की पार्टी में अंजन की निगाहें मानवी परिकर और उसकी सहेलियों पर ही टिकी थीं। लेकिन पार्टी के बाद कुछ ऐसा हुआ जिससे अंजन का दिल मानवी पर आ गया।‌

मानवी कुछ समय पहले ही निफ्ट चेन्नई से फैशन डिजाइनिंग का कोर्स पूरा करके लौटी थी। उसने अपना फैशन हाउस खोलने का विचार किया था। लेकिन उससे पहले वह इस क्षेत्र में कुछ अनुभव प्राप्त करना चाहती थी। इसलिए उसने एक फैशन हाउस में काम करना शुरू कर दिया था। मानवी को अपने एक क्लाइंट की बहन की शादी के लिए कुछ ड्रेसेज़ डिज़ाइन करने का काम मिला था। उसने अपना काम पूरा कर लिया था। वह चाहती थी कि क्लाइंट एक बार ट्रायल ले ले। जिससे यदि फिटिंग में कोई बदलाव करना हो तो समय से हो जाए। लेकिन क्लाइंट शहर के बाहर गया हुआ था। वह शादी से दो दिन पहले ही आने वाला था। मानवी यह सोचकर परेशान थी कि यदि उसे फिटिंग में बदलाव करना पड़ा तो इतने कम समय में वह क्या कर पाएगी।
मानवी की नज़र पार्टी में घूम रहे अंजन पर पड़ी। उसे पता था कि यह लड़का उसके भाई के लिए काम करता है। मानवी ने देखा कि अंजन की कद काठी उस क्लाइंट से बिल्कुल मिलती जुलती है जिसके लिए उसने कपड़े तैयार किए थे। पार्टी के बाद उसने अपनी एक सहेली के ज़रिए अंजन को यह संदेश भिजवाया कि वह उससे मिलना चाहती है।
अंजन पार्टी में जिन लड़कियों को बड़ी हसरत भरी निगाहों से देख रहा था उनमें से एक को अपनी ओर आता देखकर वह सकपका गया। उसे लगा कि ज़रूर उसके घूर घूर कर देखने से वह लड़की नाराज़ होगी। इसलिए डांटने के लिए आ रही है।

उसने अपने दोस्त पंकज से कहा,
"यार लगता है अब खैर नहीं है।"
पंकज ने कहा,
"मैं इतनी देर से समझा रहा था कि अपने पर काबू रखो। वह रघुनाथ भाई की बहन और उसकी सहेलियां हैं। पर तुम मान ही नहीं रहे थे।"
मानवी की सहेली ने पास आकर कहा,
"अंजन तुम्हें मानवी ने मिलने के लिए बुलाया है।"
उसकी बात सुनकर अंजन की जान में जान आई। उसने पूँछा,
"मुझे क्यों मिलने के लिए बुलाया है ?"
"कोई ज़रूरी काम है। मेरे साथ चलो।"

अंजन के पहुँचने पर मानवी उसे अपने कमरे में ले गई। उससे कहा कि वह बारी बारी से वह ड्रेसेज़ पहनकर दिखाए जो उसके सामने रखी हैं।
अंजन ने एक एक कर अपने सामने पड़ी चारों ड्रेसेज़ पहनकर दिखाईं। हर बार जब वह ड्रेस पहन कर बाथरूम से बाहर आता तो मानवी उसे बड़े ध्यान से देखती। कभी कंधे से पकड़ कर आगे पीछे घुमाती तो कभी आइने के सामने खड़ा कर देखती थी। उससे अपने हाथ ऊपर नीचे करने को कहती। ड्रेस पहनकर चलने को कहती। अंजन चुपचाप उसके आदेश का पालन कर रहा था।
मानवी हर ड्रेस के ट्रायल के बाद कुछ सोचती थी। उसके बाद एक छोटे से पैड पर कुछ लिख लेती थी। इस सबके बीच अंजन की निगाहें उसके ऊपर थीं। वह उसकी खूबसूरती के जादू में खोया जा रहा था।

अंजन ने अपने साथियों को बताया था कि वह मानवी की खूबसूरती पर लट्टू हो गया है। उसे चाहने लगा है। लेकिन वह इतनी हिम्मत नहीं जुटा पा रहा कि यह सब मानवी से जाकर कह दे।

मानवी अंजन के प्यार में कैसे पड़ी इस बात का खुलासा राजन के गैंग के एक गुंडे पप्पू कोली ने किया। पप्पू पहले अंजन के साथ काम करता था। उसने भी राजन का गैंग छोड़ दिया था लेकिन अंजन की तरह तरक्की नहीं कर पाया था। इस बात से वह मन ही मन उससे चिढ़ता था।
पप्पू ने जो कुछ भी बताया वह किसी फिल्मी कहानी की तरह रोमांचक था।

राजन का गैंग छोड़कर पप्पू नवीन सौरांग के गैंग में शामिल हो गया था। नवीन का धंधा किडनैपिंग का था। कुछ बड़ा करने की चाह में वह रघुनाथ की बहन को किडनैप करना चाहता था। सही मौके की तलाश में था। इसके लिए वह कई दिनों से मानवी पर नज़र रख रहा था।
नवीन को वह मौका मिल गया।

मानवी अपने कुछ दोस्तों के साथ मज़ागाओं नामक आईलैंड पर न्यू ईयर पार्टी मनाने गई थी। यह पार्टी एक यॉट पर थी। पार्टी अपने शबाब पर थी। मानवी और उसके दोस्त मस्ती में तेज़ संगीत पर नाच रहे थे।
इधर नवीन अपने तीन साथियों के साथ बोट से यॉट की तरफ बढ़ रहा था। उसके साथियों में एक पप्पू भी था। सबके पास गन थीं। उनका इरादा मानवी को किडनैप करने का था। नवीन ने सब पता कर लिया था। यॉट पर क्रू मेंबर्स के अलावा मानवी और उसके चार दोस्त थे।
बोट यॉट के पिछले हिस्से की तरफ आकर रुकी। नवीन और उसके साथी एक एक कर सावधानी से रस्सी के सहारे यॉट पर चढ़ गए।

उसके बाद उस तरफ बढ़े जहाँ मानवी और उसके दोस्त इन सबसे बेखबर पार्टी कर रहे थे। नवीन का काम मानवी को अपने कब्ज़े में करना था। उसके साथी दूसरे लोगों को संभालने वाले थे।
अचानक कुछ अजनबियों को गन के साथ यॉट पर देखकर थिरकते कदम थम गए। संगीत भी बंद हो गया। नवीन तेज़ कदमों से आगे बढ़ा और मानवी के सर पर गन लगाकर बोला,
"किसी तरह की होशियारी की ज़रूरत नहीं है। जो हो रहा है होने दो। इसी में सबकी भलाई है।"
नवीन मानवी को गन प्वाइंट पर लेकर कैप्टन के केबिन में गया। उसने कैप्टन को हिदायत दी कि वह यॉट को उसकी बताई जगह पर ले चले।
पप्पू और बाकी के साथियों ने मानवी के दोस्तों और क्रू मेंबर्स को एक साथ कर लिया था। सब डरे सहमे थे। तभी पप्पू की निगाह अंजन पर पड़ी। वह कुछ करता उससे पहले ही अंजन ने गोली चला दी। गोली पप्पू के कंधे को रगड़ती हुई निकल गई। अंजन के पीछे से पंकज और उसका एक और साथी निकल कर बाहर आए। उन दोनों ने पप्पू के बाकी दोनों साथियों को अपने कब्जे में ले लिया।
डरे सहमे खड़े हुए लोगों को तसल्ली मिली।
गोली की आवाज सुनकर नवीन समझ गया कि कोई गड़बड़ है। उसने कैप्टन को धमकाते हुए कहा कि जैसा उसने कहा था यॉट को वहीं ले चले। तब तक अंजन कैप्टन के केबिन में आ चुका था। उसे देखकर नवीन ने कहा,
"तुम्हारी ज़रा सी होशियारी इस लड़की की जान खतरे में डाल देगी।"
अंजन की निगाह डरी सहमी मानवी पर पड़ी। वह जहाँ था वहीं रुक गया।

भाग ~ 3​

नफीस की आदत थी कि अपने इन्वेस्टीगेशन के दौरान उसकी किसी से भी बातचीत होती थी तो वह उसे रिकॉर्ड कर लेता था। उस दिन यॉट पर जो घटा पप्पू ने जैसा बताया था उसे सुनकर नफीस ने अपने लैपटॉप पर लिख लिया था।
नवीन मानवी को उसी तरह गन प्वाइंट पर लिए हुए कैप्टन के केबिन से बाहर आया। उसने पंकज और उसके साथी को धमकाया,
"मेरे आदमियों को छोड़ दो।"
पंकज और उसका साथी कुछ करते उससे पहले ही एक गोली चली। नवीन पप्पू के सामने ही ज़मीन पर गिर गया। पप्पू ने देखा कि वह गोली अंजन ने चलाई थी। मानवी अपनी जगह पर खड़ी डर कर जोर जोर से रो रही थी। अंजन उसके पास गया और उसे चुप कराने का प्रयास करने लगा। घबराई हुई मानवी कस कर उसकी छाती से चिपक गई।
अंजन प्यार से उसके सर पर हाथ फेर रहा था।

पप्पू ने बताया कि अंजन के एक साथी को इस बात की भनक लग गई थी कि नवीन अपने साथियों के साथ मानवी को किडनैप करने जा रहा है।‌ वह फौरन अपने साथियों के साथ उसे बचाने के लिए निकल पड़ा।

यॉट पर जिस तरह से अंजन ने मानवी को बचाया था वह उन दोनों के प्यार का आधार बना था।
नफीस को अब यह जानना था कि रघुनाथ परिकर उनके रिश्ते के लिए कैसे तैयार हो गया ?

उन दिनों नफीस एक मराठी अखबार शहर च्या दर्पण में काम करता था।

क्राइम रिपोर्टिंग करते हुए उसकी बहुत से लोगों से जान पहचान हो गई थी। इनमें से एक था कुशल पालेकर। कुशल परिकर कंस्ट्रक्शन्स में इंजीनियर था। उसका काम के सिलसिले में रघुनाथ परिकर से मिलना जुलना होता रहता था। नफीस जानता था कि कुशल को अंदर की बातें पता करने का शौक है। पहले भी वह कई बार कुछ बातें पैसों के लालच में उसे बता चुका था।
नफीस को उम्मीद थी कि इस बार भी वह उसके काम आ सकता है। उसने कुशल से संपर्क कर उसे मिलने बुलाया।
कुशल उसी ईरानी कैफे में उससे मिला जहाँ पहले भी दोनों मिल चुके थे। नफीस ने उसके सामने अपना सवाल रखा,
"कुशल तुमने पहले भी मुझे रघुनाथ परिकर के बारे में सटीक खबरें दी हैं। इस बार भी मैं तुमसे कुछ जानने के लिए ही आया हूँ। तुम्हें तो पता है कि रघुनाथ ने अपनी इकलौती बहन की इंगेजमेंट अंजन विश्वकर्मा से कर दी है। तुम जानते हो कि अंजन रघुनाथ के लिए क्या काम करता था। फिर रघुनाथ इतनी आसानी से उसे अपना बहनोई बनाने को कैसे तैयार हो गया ? यही नहीं उसे अपने बिज़नेस में पार्टनर भी बना लिया।"
कुशल ने कहा,
"मानवी और अंजन को बहुत से लोगों ने एक साथ देखा था। दोनों के बीच एक रिश्ता है। रघुनाथ ने उसी रिश्ते को नाम देने का काम किया है।"
नफीस जानता था कि उसने टालने वाला जवाब दिया है। वह बोला,
"फिर भी मुझे नहीं लगता है कि रघुनाथ इतनी आसानी से मान गया होगा।"
कुशल ने हंसकर कहा,
"बात तो सही है तुम्हारी। मुझे भी यही लगता है कि इसमें जरूर कोई गहरी बात है। लेकिन मैंने पता करने की कोशिश नहीं की थी। जो भी हो उससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।"
नफीस समझ गया कि कुशल का इशारा किस तरफ है। उसने जेब से वॉलेट निकाल कर कुछ पैसे देते हुए कहा,
"मैंने भी तुमसे बेमतलब काम कब करवाया है। अब तो ठीक है ना।"
कुशल ने पैसे गिने। अपनी जेब में रखने से पहले इधर उधर देखा। उसके बाद बोला,
"यह बहुत अंदर की बात है। यह बात निकालना इतना आसान नहीं होगा। अभी इतने रख लेता हूंँ। लेकिन इस बार काम के बाद कुछ और देना होगा।"
"ठीक है... लेकिन हर बार की तरह खबर एकदम पक्की होनी चाहिए।"
"उसकी फिक्र मत करो। दो दिन बाद मैं तुम्हें फोन करके यहीं बुलाऊँगा।"
कुशल उठकर चला गया। नफीस ने कैफे का बिल चुकाया और वहाँ से निकल गया।
वह अपने अखबार के मालिक गौतम उसगांवकर के घर पहुँचा। गौतम ने कहा,
"नफीस कैसे आना हुआ ? कोई खास खबर ?"
"सर आजकल अपने एरिया में एक बात बहुत चर्चा की है। रघुनाथ परिकर ने अपनी बहन मानवी का रिश्ता अपने एक मामूली से आदमी अंजन से पक्का कर दिया है। सभी जानना चाहते हैं कि आखिर इसके पीछे वजह क्या है। अभी तक किसी के पास भी इस मामले में कोई ठोस जानकारी नहीं है। लेकिन मैं आपको यह जानकारी लाकर दे सकता हूंँ।"
नफीस की बात सुनकर गौतम उसकी बात पर विचार करने लगा।

नफीस ने कहा,
"सर अगर हमारे अखबार में सही बात छप गई तो हमारे अखबार का सरकुलेशन कितना बढ़ जाएगा।"
गौतम ने कहा,
"क्या गारंटी है कि ऐसा हो। फिर जो खबर छपे वह सही ही हो। यह भी कैसे कहा जा सकता है।"
नफीस ने हंसकर कहा,
"क्या सर ? आप तो मुझ से बहुत अधिक अनुभवी हैं। जानते हैं कि लोग वह जानने में ज्यादा इच्छुक होते हैं जो रहस्य की बात हो। आजकल यह बात किसी रहस्य से कम नहीं है। अगर हमारा अखबार इस रहस्य से पर्दा उठाएगा तो लोग हमारा अखबार ही खरीदेंगे। रही बात खबर के पक्के होने की तो आज तक मैंने जो भी खबर लाकर दी है कच्ची नहीं रही।"
गौतम एक बार फिर उसके प्रस्ताव पर विचार करने लगा। नफीस ने अपनी बात जारी रखी,
"सर जो खबर मैं लेकर आऊंँगा एकदम सटीक होगी। लेकिन खबर निकालने में खर्च होगा।"
गौतम ने उसकी ओर देखकर कहा,
"कितना लगेगा ?"
नफीस ने मन ही मन हिसाब लगाकर रकम बता दी। गौतम ने कहा,
"इतने पैसे ज्यादा नहीं हैं ?"
"बिल्कुल नहीं सर। एकदम वाजिब हैं। मेरी गारंटी है कि आप इस खबर को छापने के बाद बहुत खुश होंगे।"
"अगर बात उल्टी हो गई तो ?"
"सर आप जितना ना सही पर अनुभव तो मेरे पास भी है। उसी अनुभव के आधार पर कह रहा हूंँ। अगर मैंने जो कहा है वह ना हुआ तो आप सारी रकम मेरी तनख्वाह से काट लीजिएगा।"
गौतम मुस्कुरा दिया। नफीस समझ गया कि उसका काम हो गया। गौतम ने नफीस की बताई हुई रकम उसे दे दी।

दो दिनों के बाद नफीस उसी ईरानी कैफे में कुशल की राह देख रहा था।‌ करीब दस मिनट इंतज़ार के बाद कुशल कैफे पहुँचा। अपनी कुर्सी पर बैठते हुए बोला,
"सॉरी देर हो गई। पर तुम्हारा काम पुख्ता किया है।"
नफीस ने कहा,
"पहले पूरी बात बताओ। तब तय होगा कि काम पुख्ता हुआ है कि नहीं।"
"ठीक है सब सुनकर ही फैसला करो।"
कुशल ने उसे वह बताया जो उसने पता किया था।‌

मानवी और अंजन एक दूसरे को प्यार करने लगे थे। दोनों अक्सर एक दूसरे से मिलते थे। कई लोगों ने उन्हें एक साथ देखा था। इस बारे में बातें भी होने लगी थीं। सबसे पहले यह बात मानवी के छोटे भाई यदुनाथ के कान में पड़ी। उसने जब यह सुना कि उसकी छोटी बहन उनके यहाँ काम करने वाले अंजन को प्यार करती है। उसके साथ घूमती फिरती है तो वह बहुत गुस्सा हुआ। उसने मानवी को बुलाकर उसे खूब डांट लगाई।
रघुनाथ मानवी का बड़ा भाई था। लेकिन उसकी आई ने मरते समय सात साल की मानवी की ज़िम्मेदारी उसे सौंपी थी। बाइस साल की उम्र में रघुनाथ अपनी बहन का पिता बन गया था। उसने मानवी को अपनी औलाद की तरह ही पाला था। मानवी से बढ़कर उसके लिए दुनिया में कुछ नहीं था।
यदुनाथ मानवी और अंजन की शिकायत लेकर रघुनाथ के पास पहुँचा। सब सुनकर रघुनाथ को गुस्सा तो आया किंतु मानवी की जगह अंजन पर। उसने अपने भाई रघुनाथ से कहा कि मानवी तो बच्ची है। उसे दुनियादारी का अधिक ज्ञान नहीं है।

ज़रूर अंजन ने उसे बरगलाया होगा। उसने यदुनाथ से कहा कि वह अंजन से मिलना चाहता है। लेकिन उससे जो भी कहना होगा वह खुद ही कहेगा। यदुनाथ सिर्फ उसे संदेशा दे कि वह उससे मिलना चाहता है।
खंडाला के पास परिकर कंस्ट्रक्शंस के एक होटल का काम चल रहा था। यदुनाथ ने अंजन को वहीं आने को कहा। सही समय पर अंजन रघुनाथ से मिलने के लिए पहुंँच गया।
रघुनाथ ने अंजन को घूर कर देखा। उसके बाद सख्त लहज़े में कहा,
"जब मैंने तुम्हें काम पर रखने के लिए बुलाया था तब मैंने तुमसे पूँछा था कि तुम्हारी इमानदारी किसके लिए है। तब तुमने कहा था कि पैसों के लिए।"
अंजन ने कहा,
"जी याद है..."
रघुनाथ ने उसी अंदाज़ में कहा,
"तब मैंने भी कहा था कि मुझसे धोखा करने वाला जिंदा बच जाए यह मुमकिन नहीं है।"
अंजन ने निडरता से कहा,
"लेकिन मैंने तो आपके साथ कोई धोखा नहीं किया।"
रघुनाथ गुस्से से चिल्लाया,
"तुम सोचते हो कि मेरी बहन को बहका कर तुम अपने मंसूबों में कामयाब हो जाओगे। मेरी बराबरी पर आ जाओगे। लेकिन याद रखना कि मेरी बहन को सीढ़ी बनाकर ऊपर चढ़ने की कोशिश की तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। इसलिए मानवी की ज़िंदगी से दूर चले जाओ।"
अंजन ने बिना कोई गुस्सा दिखाए बड़े शांत भाव से कहा,
"भाई मैं और मानवी दोनों एक दूसरे को प्यार करते हैं। मेरे लिए मानवी कोई सीढ़ी नहीं है। आपकी बात मानकर मैं उससे दूर चला जाऊँगा। लेकिन आपने मानवी को अपनी बेटी की तरह पाला है। एक बार आप उससे भी पूँछ लीजिए।"
जिस शांत भाव से अंजन ने अपनी बात कही थी उसी तरह शांति से वहाँ से निकल गया।

कहानी बताते हुए कुशल ने कहा,
"उस दिन मेरा एक खास आदमी वहाँ था। उसने बड़ी सावधानी से यह सारी बातें सुनी थीं।"
नफीस ने कहा,
"पर रघुनाथ ने जब अंजन को मानवी से दूर जाने को कहा था। उसने कहा भी था कि वह रघुनाथ के कहे अनुसार दूर चला जाएगा। तो फिर उसकी और मानवी की शादी कैसे पक्की हुई ?"

कुशल ने आगे की कहानी सुनाई। यह कहानी उसने रघुनाथ के एक नौकर से पता की थी।

रिस्की लव - 4

रघुनाथ घर पहुँचा तो वह बहुत परेशान लग रहा था। नौकर उसके पास चाय लेकर पहुँचा तो उसने मानवी को बुला कर लाने का आदेश दिया। नौकर मानवी को बुला लाया। कमरे के बाहर पहुँच कर उसके कान में अंजन का नाम पड़ा तो वह रुक कर सुनने लगा। जो कुछ उसने सुना उसके हिसाब से रघुनाथ ने मानवी को अंजन से दूर रहने के लिए कहा। इस पर मानवी ने कहा कि वह अंजन को बहुत प्यार करती है। वह एक अच्छा इंसान है। इसलिए वह उसे छोड़ नहीं सकती है। नौकर को किसी के कदमों की आहट सुनाई पड़ी तो वह फौरन वहाँ से हट गया। उसने यदुनाथ को कमरे में जाते देखा था।
आधे घंटे तक कमरे में दोनों भाई मानवी को समझाते रहे। नौकर कुछ सुन नहीं पाया। लेकिन उसने मानवी को आँखों में आंसू भरकर कमरे से बाहर निकलते देखा था।

उसके बाद कई दिनों तक मानवी ने खुद को अपने कमरे में कैद कर लिया था। अक्सर जो खाना उसे कमरे में दिया जाता था वह वैसे ही ढका रखा रहता था जैसा नौकर छोड़ कर आता था। इस तरह एक हफ्ता बीत गया था।
एक दिन जब नौकर खाना लेकर गया तो घबराया हुआ वापस आया। मानवी ने अपने हाथ की नस काट ली थी। उसे फौरन अस्पताल पहुँचाया गया। कुछ देर की जद्दोजहद के बाद मानवी की जान बचाई जा सकी।

कुशल कहानी बताते हुए रुक गया। नफीस ने कहा,
"तो मानवी की आत्महत्या की कोशिश के कारण रघुनाथ को झुकना पड़ा।"
नफीस ने देखा कि कुशल कुछ सोच रहा है। उसने पूँछा,
"क्या बात है ? मैंने जो कहा उसके अलावा भी कुछ था क्या ?"
कुशल कुछ देर उसकी तरफ देखता रहा। वह मन में कुछ हिसाब लगा रहा था। जैसे सोच रहा हो कि कहा जाए या नहीं। उसकी उधेड़बुन देखकर नफीस बोला,
"कोई बात तो है। तुम गहरी सोच में हो। बताओ क्या सोच रहे हो ?"
"नफीस जो मैं कह रहा हूँ उसके बारे में पुख्ता तौर पर कुछ नहीं कह सकता। पर मानवी की आत्महत्या की कोशिश ही एक वजह नहीं थी। सुनने में आया था कि अस्पताल में डॉक्टरों ने जब मानवी का इलाज किया तो पाया कि वह प्रैगनेंट है। लेकिन मैं पहले ही कह चुका हूँ कि यह बात मैंने सिर्फ सुनी है। कितनी सच है यह बात कह नहीं सकता हूँ।"
कुशल ने जो बताया वह चौंकाने वाला था। नफीस उस पर विचार करने लगा। कुछ सोचकर उसने पूँछा,
"तुम बता सकते हो कि मानवी को किस अस्पताल में भर्ती कराया गया था ?"
कुशल ने उसे अस्पताल का नाम बता दिया। नफीस ने उसे मांगी गई रकम दे दी। अपने बॉस को उसने आत्महत्या वाली बात ही बताई और उसके हिसाब से रिर्पोट बना कर छाप दी।
नफीस ने अपने स्तर पर पता लगाने की कोशिश की कि क्या मानवी सचमुच प्रैगनेंट थी। लेकिन इस विषय में उसे कुछ भी पक्के तौर पर पता नहीं चल पाया।

बेडरूम से कुछ आहट सुनाई पड़ी तो नफीस को लगा कि शाहीन जाग गई है। वह लैपटॉप बंद करके बेडरूम में गया। शाहीन वॉशरूम में थी। वहाँ से निकल कर बोली,
"क्या बात है नफीस ? तुम्हें नींद नहीं आ रही है। पहले भी लिविंग एरिया में थे। अभी उठी तो फिर नदारद थे। काम के चक्कर में अपनी तबीयत ना बिगाड़ लेना।"
"काम के कारण नहीं बस यूं ही नींद नहीं आ रही थी।"
"रात के ढाई बज रहे हैं। अब सो जाओ।"
शाहीन बेड पर लेट गई और करवट बदल ली। नफीस भी बेड पर लेट गया। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं। पर अभी भी दिमाग में अंजन ही था। वह मन ही मन उसके बारे में सोच रहा था।

मानवी की प्रेग्नेंसी का सच तो सामने नहीं आया पर कुछ ही दिनों में उसकी और अंजन की शादी हो गई। पर शादी के कुछ ही महीनों के बाद रघुनाथ और उसका भाई यदुनाथ एक हादसे में मारे गए। लोगों के बीच कई तरह की कहानियां कही जाने लगीं। बहुत से लोग मानते थे कि वह हादसा करवाया गया था। शक की सुई अंजन पर भी।

लेकिन इन सब से परेशान हुए बिना अंजन अपनी राह पर चलता रहा। जल्दी ही वह कंस्ट्रक्शन्स की दुनिया में छा गया। अब उसके बारे में बातें करने वाले भी चुप हो गए।
अंजन विश्वकर्मा अब एक सफेदपोश बिज़नस मैन था। अपनी छवी को सुधारने के लिए उसने लोगों की भलाई के काम भी शुरू कर दिए थे।
लेकिन बिज़नेस मैन की छवि एक आवरण थी जिसके पीछे काले कारोबार का डॉन अंजन विश्वकर्मा छिपा हुआ था।
शादी के दो साल बाद मानवी कहीं गायब हो गई। उसने किसी भी बच्चे को जन्म नहीं दिया था। अंजन ने सबसे कह दिया था कि उन दोनों की पटी नहीं इसलिए वह उसे छोड़कर विदेश चली गई है।

नफीस ने तब मराठी अखबार छोड़कर एक लोकल न्यूज़ चैनल ज्वाइन कर लिया था। वहाँ वह क्राइम से संबंधित एक प्रोग्राम करता था जो लोगों को बहुत पसंद था। इन सबके बीच अंजन से संबंधित अनसुलझे सवाल जानने की उसकी इच्छा थी। वह इस बारे में जानने की कोशिश भी कर रहा था।
उसी समय उसके व्यक्तिगत जीवन में कई समस्याओं ने दस्तक दी। उसका और शाहीन का डेढ़ बरस का बेटा चल बसा। यह एक बहुत बड़ा धक्का था। आवश्यक था कि शाहीन को उस माहौल से दूर ले जाया जाए।
वह मुंबई छोड़कर दिल्ली चला गया। अभी साल भर पहले ही वह वापस मुंबई आया था। इस बार उसने एक अच्छे न्यूज़ चैनल को ज्वाइन कर लिया था। फिर से एक क्राइम आधारित प्रोग्राम शुरू किया था। एक किताब लिख चुका था जो जुर्म की दुनिया की अंदर की झांकी प्रस्तुत करती थी।
एक बार फिर अंजन विश्वकर्मा ने उसे अपनी तरफ आकर्षित करना शुरू कर दिया था। अब वह पहले से भी अधिक बड़ा और रहस्यमई हो गया था। उसने अपने सहयोगी विनोद के साथ अंजन के बारे में पता करना शुरू किया था।

कुछ समय पहले मुंबई के वन संरक्षित इलाके में 600 करोड़ की ज़मीन के गैरकानूनी तरीके से अधिग्रहण का मामला बहुत ज़ोर से चर्चा में था। यह ज़मीन अंजन विश्वकर्मा की कंस्ट्रक्शन्स कंपनी कावेरी कंस्ट्रक्शन्स को मिली थी। इस ज़मीन को पाने की कोशिश अंजन का प्रतिद्वंदी जगजीत अहलूवालिया भी कर रहा था। उसके बाद उनके बीच की कड़वाहट कई मौकों पर सामने आने लगी। अंजन ने अपने प्रभाव से उस मामले को दबा दिया था।
नफीस इसी सिलसिले में पड़ताल कर रहा था जब अंजन के बीच हाउस शिमरिंग स्टार्स में गोलीबारी की खबर मिली।

जब नफीस सोकर उठा तो सुबह के सवा आठ बजे थे। अपने फोन की घंटी सुनकर उसकी नींद खुली थी। जब तक वह फोन उठाता कॉल कट गई थी। नफीस ने चेक किया। फोन विनोद का था। उसने कॉल बैक किया। फोन लेकर वह बेडरूम की बॉलकनी में आकर खड़ा हो गया। विनोद ने उससे कहा कि उसे एक खबर देनी है। नफीस जल्दी ऑफिस पहुँचे।

विनोद दिल्ली में भी नफीस के साथ काम कर चुका था। जब नफीस मुंबई में इस न्यूज़ चैनल के लिए काम करने आया तो विनोद भी उसके साथ आ गया।

यहाँ वह एक अखबार में काम कर रहा था। साथ ही नफीस की मदद भी करता था। नफीस ने खासतौर पर उसे अंजन के बारे में पता करने का काम सौंपा था।
कल नफीस के ऑफिस से जाने के बाद से ही विनोद ने इस बात का पता करना शुरू कर दिया था कि अंजन का ड्राइवर मुकेश उसे गोली लगने के बाद कहाँ ले गया था। उसे अपने सूत्रों से कुछ बातों का पता चला था। वह उन्हीं के बारे में बताने के लिए नफीस से मिलना चाहता था।
नफीस के सामने बैठा विनोद अपनी पड़ताल की जानकारी दे रहा था।
"सर यह पक्का है कि अंजन को कावेरी देवी मेमोरियल हॉस्पिटल में ही ले जाया गया है। मैंने वहाँ के एक वार्ड ब्वॉय से बात की है।"
नफीस कुछ सोचते हुए बोला,
"पहले ही इस बात पर ध्यान जाना चाहिए था। गोलीबारी के कांड को गुप्त रखने के लिए अपने खुद के अस्पताल से अच्छी जगह क्या होगी। अंजन की सेहत के बारे में कुछ पता चला ?"
"डॉक्टर ने ऑपरेशन के बाद 24 घंटे क्रिटिकल बताए थे। पर अभी तक कोई खबर नहीं है।"
"उस लड़की के बारे में कुछ पता चला ?"
"नहीं सर। उसके बारे में तो कुछ भी पता नहीं चला।"
"उसके बारे में जानने में समय लगेगा। फिलहाल यह पता करो कि गोलीबारी के पीछे कौन है ?"
"सह...कहीं जगजीत अहलूवालिया तो नहीं है ?"
नफीस ने कहा,
"अगर हम उस ज़मीन की बात करें तो उसका अंजन के हाथ लगना जगजीत की हार ज़रूर थी। लेकिन जगजीत इस बात के लिए उस पर जानलेवा हमला नहीं कराएगा। वह जो भी करता है सामने से आकर करता है। अपनी हार का बदला वह भी उससे कोई बिज़नेस का मौका छीन कर लेगा।"
"सर फिर अंजन पर और कौन हमला करवा सकता है ?"
नफीस ने विनोद की तरफ देखा। फिर गंभीर आवाज़ में बोला,
"विनोद यहाँ आते वक्त मैं इसी विषय में सोच रहा था। मुझे तो यह बहुत गहरा मामला लगता है। अंजन की गतिविधियों का पता उसके बहुत नज़दीकियों को ही रहता है। ऐसे में सोचने वाली बात है कि उसके बीच हाउस शिमरिंग स्टार्स में होने की बात उस पर हमला करने वालों तक कैसे पहुँची ? ज़रूर यह काम उसके किसी करीबी का है जिसने अंजन के बारे में खबर दी।"
नफीस की बात सुनकर विनोद भी सोच में पड़ गया। वह बोला,
"अंजन का सबसे करीबी तो उसका दोस्त पंकज सुर्वे है। वही उसके साथ हर जगह साए की तरह रहता है। तो क्या पंकज वह शख्स हो सकता है ?"
"एकदम से किसी फैसले पर पहुंँचना जल्दबाजी होगी। लेकिन ऐसा हो भी सकता है।"
"सर... अगर ऐसा है तो फिर वह लड़की पंकज के साथ ही होगी। लेकिन पंकज अपने दोस्त के साथ ऐसा क्यों करेगा ?"
नफीस ने कहा,
"यही तो पता करना है कि अंजन के बारे में खबर किसने और क्यों दी ?"
कुछ सोचकर नफीस ने कहा,
"मुझे लगता है कि अंजन का ड्राइवर मुकेश इस संबंध में बहुत कुछ जानता है। तुम उसके बारे में पता करो।"
विनोद चला गया। नफीस अंजन के बारे में सोचने लगा।

रिस्की लव - 5

नर्स ने जाकर डॉक्टर मेहरा को बताया कि मरीज़ को होश आ गया है। डॉक्टर मेहरा फौरन अपने जूनियर के साथ अंजन के कमरे में पहुँचे। वहाँ पहुँच कर डॉक्टर मेहरा ने अंजन की जांच की। उसके बाद अपने ‌सहयोगी को कुछ निर्देश दिए।
अंजन इधर उधर देख रहा था। वह अपने आसपास के वातावरण को समझने का प्रयास कर रहा था। उसके दिमाग में कुछ दृश्य तैर रहे थे। उन दृश्यों में वह बहुत खुश था। उसके हाथ में एक अंगूठी थी। वह घुटनों के बल बैठा था।‌ उसने उस लड़की का हाथ पकड़ कर उसे चूमा। उसकी उंगली में अंगूठी पहना रहा था कि तभी एक गोली कमरे में रखे वाज़ पर लगी। वह फौरन चौकन्ना हो गया। उस लड़की का हाथ पकड़ कर सोफे के पीछे ले गया। अपनी गन निकाली और जिधर से गोली चली थी उधर एक गोली चला दी।
अंजन चिल्लाया,
"मीरा....."
डॉक्टर मेहरा ने कहा,
"भाई आप अपने ही हॉस्पिटल में हैं। आपको गोली लगी थी। पर अब खतरे से बाहर हैं। लेकिन स्ट्रेस मत लीजिए।"
अंजन ने कहा,
"पंकज कहाँ है ? पंकज को बुलाओ।"
"पंकज भाई को खबर कर दी है। वह आते ही होंगे। पर आप प्लीज़ आराम कीजिए।"
डॉक्टर मेहरा ने एक इंजेक्शन अंजन को लगा दिया। वह धीरे धीरे शांत होकर सो गया।

पंकज अस्पताल पहुँचा तो डॉक्टर मेहरा ने उसे बताया कि होश में आने पर वह किसी मीरा का नाम ले रहा था। वह अधिक स्ट्रेस ना ले इसलिए इंजेक्शन दिया है जिससे वह अभी सो रहा है।
पंकज कॉरिडोर में आ गया। उसने किसी को फोन लगाया। कुछ देर बात की। उसके बाद डॉक्टर मेहरा को कुछ हिदायतें देकर वह चला गया।

विनोद नफीस के कहे अनुसार अंजन के ड्राइवर मुकेश कांबले के बारे में पता करने केशव चॉल पहुँचा था। वह उस दरवाज़े के सामने रुका जिस पर मुकेश के नाम की तख्ती थी। लेकिन दरवाज़े पर ताला लगा हुआ था। उसने आसपास देखा। बगल वाले घर के बाहर एक बुज़ुर्ग बैठा अखबार पढ़ रहा था। विनोद ने उससे पूँछा,
"ये मुकेश के घर पर ताला लगा है। सब लोग कहीं बाहर गए हैं।"
उस बूढ़े आदमी ने अपने चेहरे के सामने से अखबार हटा कर विनोद को देखा।
"ताला लगा है तो कहीं बाहर ही गए होंगे।"
"जी सही कहा। मेरा मतलब था कि क्या आप जानते हैं कि कहाँ गए हुए हैं ?"
बूढ़े आदमी ने कहा,
"पता नहीं है। शायद सोलापुर अपने गांव चला गया है। जाते समय बड़ी जल्दी में लग रहा था। किसी से कुछ कह कर नहीं गया।"
बूढ़ा फिर से अखबार पढ़ने लगा। विनोद वहाँ खड़े होकर कुछ सोचने लगा। उसने बूढ़े आदमी से पूँछा,
"अच्छा यह तो बता सकते हैं कि कब गए सब लोग ?"
"कल सुबह करीब साढ़े पाँच बजे मुकेश अपनी पत्नी और बेटी को लेकर निकल गया।"
"धन्यवाद..."
कहकर विनोद वहाँ से निकल लिया। अभी वह चॉल से बाहर ही निकला था कि कावेरी हॉस्पिटल के वॉर्ड ब्वॉय ने फोन करके उसे अंजन के होश में आ जाने के बारे में बताया।

उसने यह भी बताया कि अंजन किसी मीरा का नाम ले रहा था।
उस वार्ड ब्वॉय ने एक और बात बताई। पंकज जब हॉस्पिटल के कॉरीडोर में फोन पर बात कर रहा था तो उसने किसी तरुण काला का नाम लिया था। वार्ड ब्वॉय ने जो खबर दी थीं वह काम की थीं। विनोद ने फौरन नफीस को फोन करके कहा कि वह मिलना चाहता है। नफीस ने उसे मिलने के लिए बुला लिया।

नफीस की बिल्डिंग के पास एक छोटा सा रेस्टोरेंट था। विनोद और वह वहीं बैठे थे। नफीस ने अपनी ब्लैक कॉफी का एक सिप लिया। जो कुछ विनोद ने उसे बताया था वह उसके बारे में ही सोच रहा था। उसे ऐसा लग रहा था कि तरुण काला का नाम उसने कहीं सुना था। पर बहुत ज़ोर देने पर भी उसे कुछ याद नहीं आ रहा था। विनोद ने कहा,
"सर आप अचानक इतने खामोश हो गए। क्या सोच रहे हैं ?"
नफीस अभी कुछ कहना नहीं चाहता था। उसने कहा,
"विनोद मुकेश जाते समय बहुत जल्दी में था। इसका मतलब वह किसी खतरे में था। ऐसे में नहीं लगता है कि वह सोलापुर जाएगा। क्योंकी उसे वहाँ आसानी से खोजा जा सकता है।"
"हाँ सर हो सकता है। वैसे सोलापुर का नाम तो उसके पड़ोसी ने अंदाज़े से लिया था। पर अगर वह कहीं और गया है तो उसे खोज पाना मुश्किल होगा।"
"लेकिन सच जानने के लिए उसका पता लगाना ज़रूरी है। तुम अपनी पूरी कोशिश करो।"
नफीस एक बार फिर अपनी कॉफी पीने लगा। वह अभी भी तरुण काला के नाम पर उलझा हुआ था। विनोद अपनी चाय की चुस्की लेते हुए बोला,
"सर पता तो बहुत कुछ लगाना है। अंजन के साथ मीरा नाम की जो लड़की थी वो कौन थी ? पंकज ने जिससे बात की थी उस तरुण काला से उसका क्या संबंध है ?"
"विनोद गांठों को धैर्य से एक एक करके खोलना ही अच्छा होता है। तुम अभी अपना पूरा ध्यान मुकेश का पता करने में लगाओ। यह भी हो सकता है कि एक गांठ खुलते बाकी के सवालों का जवाब भी मिल जाए।"
"ठीक है सर फिर मैं मुकेश वाली गांठ खोलने में जुट जाता हूँ।"
विनोद ने अपनी चाय खत्म की। वह चलने को हुआ तो नफीस ने कहा,
"तुम्हारे पैसे अकांउट में ट्रांसफर कर दिए हैं।"
अपना वॉलेट निकाल कर कुछ पैसे निकाले। विनोद की तरफ बढ़ाकर बोला,
"मुकेश को खोजने में खर्च होगा। ये रख लो। अगर और ज़रूरत पड़े तो बता देना।"
विनोद ने पैसे लेकर अपने बटुए में रख लिए। चलते समय बोला,
"पूरी कोशिश करूँगा कि अगली मुलाकात में आपको कोई खुशखबरी दूँ।"

नफीस और शाहीन डिनर कर रहे थे। डिनर करते हुए भी नफीस तरुण काला के बारे में ही सोच रहा था। शाहीन ने खाना खाते हुए नफीस से कहा,
"आज मैंने मिस्टर जॉर्ज को फोन किया था। उनसे दोबारा काम शुरू करने की बात की। उन्होंने कहा है कि वो मेरे बारे में सोचेंगे।"
शाहीन नफीस की प्रतिक्रिया का इंतजार करने लगी। लेकिन जब कोई जवाब नहीं मिला तो उसने नफीस की तरफ देखा। वह अपने ही खयालों में खोया हुआ था। शाहीन को बहुत बुरा लगा।

उसने जोर से चमचा अपनी प्लेट पर मार दिया। आवाज सुनकर नफीस अपने विचारों से बाहर आया। उसने शहीन की तरफ देखा। उसके चेहरे को देख कर लग रहा था कि वह बहुत ज्यादा अपसेट है। शाहीन ने गुस्से से कहा,
"नफीस तुम्हारे पास मेरे लिए ज़रा सा भी वक्त नहीं है।"
यह कहकर वह खाना छोड़कर जाने लगी। नफीस को अपनी गलती समझ आ गई थी। उसके पास रहते हुए भी वह अपने खयालों में खोया हुआ था। उसने शाहीन का हाथ पकड़ लिया।
"प्लीज़ शाहीन...."
शाहीन ने अपना हाथ छुड़ाते हुए कहा,
"क्या प्लीज़ ? तुम्हें पता है तुम्हारा यह बर्ताव मुझे कितनी तकलीफ देता है। मैं अगर तुमसे कुछ कहना चाहूँ तो कह भी नहीं सकती।"
"ऐसा नहीं है शाहीन।"
"ऐसा ही है। मैं अभी तुमसे कुछ कह रही थी। लेकिन तुमने उसका एक शब्द भी नहीं सुना। बोलो सुना था क्या ?"
नफीस शर्मिंदा था। उसने सचमुच कुछ भी नहीं सुना था। वह तो बस अपने ही विचारों में खोया हुआ था। उसने भी अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा,
"आई एम सॉरी। मैं अपनी गलती मानता हूँ। अब प्लीज़ बैठकर मुझे बताओ क्या कह रही थी।"
शाहीन कुर्सी पर बैठ गई। उसने नफीस को बताया कि उसने दोबारा अपना काम शुरू करने का मन बनाया है। इसके लिए उसने अपने पुराने बॉस से बात की है। उन्होंने कहा है कि वह उसके लिए ज़रूर कुछ करेंगे। शाहीन की बात सुनकर नफीस ने कहा,
"ये तो तुमने अच्छा फैसला लिया है। काम करोगी तो मन लगा रहेगा।"
शाहीन ने उसकी तरफ देखकर कहा,
"सोचती हूँ काम में खुद को इतना डुबो लूँ कि इस बात की तकलीफ ही ना रहे कि तुम मुझे इग्नोर कर रहे हो।"
शाहीन का यह तंज सुनकर नफीस और भी अधिक लज्जित हुआ। उसने कहा,
"शाहीन ऐसा मत कहो।"
"मैं क्या गलत कह रही हूँ। जबसे हम मुंबई दोबारा लौटकर आए हैं तबसे ही देख रही हूँ कि तुम बस अपने में ही खोए रहते हो। मेरे पास रहते हुए भी मुझसे दूर रहते हो। जैसे मेरा कोई वजूद ही ना हो तुम्हारे लिए।"
नफीस जानता था कि शाहीन जो कुछ कह रही है वह सच है। उसे खुद भी इस बात का बुरा लगता था कि वह उसे समय नहीं दे पा रहा है। उसने कुछ नहीं कहा। रोटी का टुकड़ा तोड़ कर निवाला बनाया और शहीन की तरफ बढ़ा दिया। शाहीन ने मुंह घुमा लिया। नफीस बोला,
"नाराज़गी मुझसे है। खाने पर क्यों निकाल रही हो। मैं मानता हूँ कि मैं तुम पर अधिक ध्यान नहीं दे पा रहा हूँ। लेकिन किसी भी सूरत में मैं तुम्हारे वजूद को नकार नहीं सकता। तुम्हारा होना ही मेरी जिंदगी में सबसे बड़ी खुशी है।"
शाहीन ने उसकी तरफ देखा। नफीस की आँखों में नमी थी। शाहीन ने उसके हाथ से निवाला खा लिया। नफीस ने दूसरा निवाला बढ़ाया तो वह बोली,
"अब मैं खा लूँगी। तुम अपना खाना खाओ।"
नफीस खाने लगा। खाते हुए उसे एहसास हो रहा था कि अभी उसने जो कहा वह कितना सच है। शाहीन का उसकी जिंदगी में होना उसके लिए बहुत महत्व रखता है।

उसके बिना वह अपनी जिंदगी की कल्पना भी नहीं कर सकता। इसके बावजूद भी वह पिछले काफी वक्त से उस पर अधिक ध्यान नहीं दे रहा था। उसने तय कर लिया कि वह अपने काम और अपनी निजी जिंदगी के बीच एक लकीर खींचेगा। जो वक्त शाहीन को मिलना चाहिए उसमें अपने काम को नहीं आने देगा।

शहर से दूर पंकज ने अपनी कार एक पुराने से घर के सामने रोकी। कार से उतर कर अपनी आदत के अनुसार चेक किया कि उसकी गन साथ है या नहीं। हर बार की तरह वह गन लेना नहीं भूला था। वह मकान के अंदर चला गया। दरवाज़े की घंटी बजाई। उसके आदमी बसंत ने दरवाज़ा खोला। अंदर घुसते हुए पंकज ने पूँछा,
"सब ठीक है ना ?"
"हाँ भाई..."
पंकज मकान के भीतरी हिस्से में गया। आंगन पार करके उस कमरे में पहुँचा जहाँ एक शख्स उसकी राह देख रहा था।
पंकज को देखकर वह शख्स मुस्कुराते हुए उसकी तरफ बढ़ा।

रिस्की लव - 6

पंकज ने उस शख्स से हाथ मिलाया। फिर बैठने का इशारा किया। उसके बाद बसंत को बुलाकर कुछ निर्देश दिया। उसके साथ जो शख्स बैठा था वह तरुण काला था। तरुण ने कहा,
"पता चला कि अंजन पर किसने हमला करवाया था ?"
पंकज ने कहा,
"अभी तक कुछ भी पता नहीं चला। उस दिन अंजन बीच हाउस जाएगा यह बात किसी को भी पता नहीं थी। फिर इस बात की सूचना उन्हें कैसे मिली समझ नहीं आ रहा है।"
बसंत ने पीने का सामान लाकर मेज़ पर रख दिया। बोतल उठाकर दो पेग बनाए। तरुण और पंकज को देकर वहाँ से चला गया। उसके जाने के बाद तरुण ने कहा,
"मीरा कहाँ है ?"
"उस दिन अंजन ने मुझे मीरा को वहाँ से ले जाने के लिए कहा था। मैं मीरा का हाथ पकड़कर उस गोलीबारी के बीच से बचते हुए बीच हाउस के बाहर आया। तभी पीछे से किसी ने मेरे सर पर किसी चीज़ से वार किया। मैं बेहोश हो गया। जब होश आया तो सुबह हो गई थी। मीरा नहीं थी। गोलीबारी भी बंद हो चुकी थी।"
तरुण ने अपना गिलास उठाकर दो एक घूंट भरे। वह कुछ सोचकर बोला,
"वह जो भी हो लेकिन उसने अंजन की हत्या करने के इरादे से ही हमला किया था। तो फिर उसे ज़िंदा क्यों छोड़ दिया ?"
"अंजन शायद अपनी किस्मत से बच गया। डॉक्टर मेहरा ने बताया था कि गोली उसके दिल के पास लगी थी। मुकेश अगर उसे अस्पताल नहीं ले गया होता तो वह बच नहीं पाता।"
"मुकेश कहाँ गायब हो गया ?"
"मैं जब होश में आया तो मैंने देखा कि अंजन की कार बीच हाउस में नहीं थी। मुझे लगा कि शायद गोलीबारी में बचकर घर चला गया होगा। मैं उसके घर गया। पता चला कि वह घर नहीं आया है। तभी डॉक्टर मेहरा ने फोन करके बताया कि मुकेश देर रात अंजन को लेकर कावेरी हॉस्पिटल आया था। अंजन की हालत गंभीर थी। उसने ऑपरेशन कर दिया है। पर कुछ कहा नहीं जा सकता है। उसके बाद मैंने मुकेश के बारे में पता किया। मेरे आदमी ने बताया कि वह सुबह जल्दी ही अपनी बीवी बच्चे को लेकर कहीं चला गया।

"
"कहाँ चला गया ?"
"अभी तक इतना ही पता चला है कि उसे मुंबई सेंट्रल पर दिल्ली जाने वाली गाड़ी में बैठते हुए देखा गया है।"
बसंत एक बार फिर हाज़िर हुआ। उसके हाथ में एक प्लेट थी जिसमें पॉन कटलेट्स थे। उसने उन दोनों के लिए दूसरा पेग बनाने की पेशकश की। पंकज ने यह कहकर मना कर दिया कि वह बना लेगा। अब जब बुलाया जाए तब आए।
पंकज ने अपने और तरुण के लिए एक और पेग बनाया। उसके बाद एक कटलेट उठाकर खाने लगा। तरुण ने भी एक कटलेट उठाते हुए कहा,
"किसी ने तुम पर वार किया। तुम बेहोश हो गए और मीरा कहीं गायब हो गई। तुम्हें नहीं लगता कि यह सब मीरा के लिए किया गया।"
"क्या मतलब ?"
"मतलब हमला करवाने वाला मीरा का कोई आशिक हो सकता है। उसे मीरा का अंजन के साथ होना अच्छा नहीं लगा हो। अंजन का काम तमाम कर वह मीरा को ले गया। यह अलग बात है कि अंजन अपनी किस्मत से बच गया।"
पंकज इस बात पर विचार करने लगा। उसने अभी तक इस प्रकार नहीं सोचा था। लेकिन उसे तरुण की इस बात में दम लग रहा था। उसे सोच में पड़ा देखकर तरुण ने कहा,
"मीरा और अंजन का चक्कर कैसे शुरू हुआ था ?"
पंकज ने दूसरा कटलेट खत्म किया और अपना गिलास उठाकर उस दिन के बारे में सोचने लगा। उसने कहा,
"अंजन और मीरा लंदन के एक नाइट क्लब में मिले थे। वहीं से उन दोनों के बीच दोस्ती शुरू हो गई। जो प्यार में बदल गई।"
"कुछ और जानते हो मीरा के बारे में। उन दोनों के रिश्ते के बारे में।"
"नहीं.... अंजन ने तरक्की करनी शुरू की तो मैं उसके दोस्त से उसका बॉडीगार्ड बनकर रह गया। अंदर की बातें मुझे पता नहीं चल पाती थीं।"
तरुण हल्के से मुस्कुरा कर बोला,
"अब वही बॉडीगार्ड अंजन को अपने रास्ते से हटाने का इरादा रखता है।"
तरुण की मुस्कान पंकज को अच्छी नहीं लगी।‌ इस मुस्कान ने उसके अंदर जल रही नफरत की आग को भड़का दिया। उसने तरुण को घूरकर देखा।
"हम दोनों लगभग एक ही साथ चले थे। पर उसे मानवी का साथ मिल गया। उसके सहारे मुझसे आगे निकल गया। उसके बाद मैं उसके लिए बस एक दुमछल्ला बनकर रह गया।"
पंकज ने गिलास में बची हुई शराब एक सांस में गटक ली। दोबारा गिलास भरते हुए बोला,
"ऐसा नहीं है कि अंजन को जो सफलता मिली उसमें मेरा हाथ नहीं था। मैं उसके कंधे से कंधा मिलाकर चला था। पर उसने मुझे पीछे ढकेल दिया।"
उसने एक बार फिर अपना गिलास एक सांस में खाली कर दिया। तरुण ने कहा,
"तुम उस दिन मौके का फायदा उठाकर उसे मार सकते थे। फिर अंजन की बात मानकर वहाँ से चले क्यों गए ?"
"उसी बात का पछतावा हो रहा है अब। लेकिन तब मुझे पूरी उम्मीद थी कि अंजन उस हमले में बचेगा नहीं। हमारे दो आदमी शुरू में ही मर गए थे। सिर्फ मैं और अंजन बचे थे। जब अंजन ने मीरा को निकाल कर ले जाने को कहा तो मुझे लगा अच्छा मौका है। अंजन मर जाएगा और कोई मुझ पर शक भी नहीं करेगा। लेकिन उस मुकेश ने सब गड़बड़ कर दी।

"
"पता नहीं वो खुद कैसे बच गया और अंजन को कैसे निकाल कर ले गया ?"
"पता नहीं..."
"क्या अंजन को कावेरी हॉस्पिटल में निपटा देने का कोई चांस है ?"
पंकज अपनी कुर्सी से उठकर खड़ा हो गया। अपने दोनों हाथों की उंगलियां आपस में फंसा कर हाथ ऊपर करके अंगड़ाई ली। फिर कमरे में एक दो कदम चलकर बोला,
"डॉक्टर मेहरा के रहते हुए कोई चांस नहीं है। अभी उसे मुझपर शक नहीं है। इसलिए अंजन की सारी जानकारी मुझे देता है। फिर अंजन को वहाँ कुछ हुआ तो शक मुझ पर आएगा।"
तरुण ने अपना गिलास रखा और उठकर खड़ा हो गया।
"अभी अंजन कमज़ोर है। उसे हटाना आसान होगा। अंजन अगर पूरी तरह से ठीक हो गया तो फिर पहले से भी अधिक मजबूत हो जाएगा।"
पंकज ने कहा,
"अगर हम यह पता कर पाएं कि हमारे अलावा उसका दुश्मन कौन है तो हम उसकी मदद ले सकते हैं।"
"अगर उसका इरादा मीरा को पाने का था तो फिर मीरा उसे मिल चुकी है। पर बात कुछ और भी हो सकती है। इसलिए तुम जो कह रहे हो वह ठीक है। तुम अपनी कोशिश करो मैं अपनी कोशिश करता हूँ।"
तरुण चला गया। पंकज ने अपने लिए एक और पेग बनाया और पीने लगा।

नफीस वीकेंड पर आने वाले अपने क्राइम शो की शूटिंग कर रहा था। उसका काम सच्ची क्राइम स्टोरी को तलाश कर उसे स्क्रीन प्ले में ढालना था। कहानी के नाट्य रूपांतरण के बीच में वह एंकर के तौर पर कहानी को आगे बढ़ाता था। इस वक्त उसी का शूट चल रहा था। आखिरी शॉट था जब उसे उस क्राइम स्टोरी के समाज पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बोलना था। निर्देशक ने एक्शन कहा और नफीस ने एक टेक में शॉट ओके कर दिया।
नफीस आकर अपनी कुर्सी पर बैठ गया। ऑफिस ब्वॉय ने उसे कॉफी लाकर दी। वह सिप करते हुए तरुण के बारे में सोच रहा था। तभी क्राइम सीरीज़ का निर्देशक जॉन पीटर्स उसके पास आकर बैठ गया।
"अगली कहानी किस क्राइम पर है ? हमने इधर मर्डर, रेप, डकैती इन पर काम किया है। इस बार कुछ नया सोचो।"
"मैं भी वही सोच रहा था। पर इधर कोई नई तरह की कहानी नज़र नहीं आ रही है। कोशिश करता हूँ।"
"मेरी मानो तो आर्काइव्ज़ डिपार्टमेंट की हेड शोभना गिल से मिलो। इस बार बीते दौर से कोई कहानी लाते हैं।"
नफीस को जॉन का आइडिया पसंद आया। उसे तरुण के बारे में जानने का एक रास्ता मिल गया था। उसने शोभना से बात की। आर्काइव्ज़ में पुरानी क्राइम स्टोरीज़ में तरुण काला को तलाश करने लगा।

विनोद दिल्ली में था। उसे पता चला था कि मुकेश अपने परिवार के साथ दिल्ली जाने वाली ट्रेन पर चढ़ा था। विनोद फ्लाइट पकड़ कर दिल्ली चला आया। वह बहुत वक्त दिल्ली में बिता चुका था। यहाँ उसके कई खबरी थे। उसे पूरा विश्वास था कि जल्दी ही उसे मुकेश के बारे में पता चल जाएगा।
उसने अपने सबसे अच्छे खबरी से संपर्क कर उसे मुकेश की खोज के काम में लगा दिया था।
विनोद दिल्ली में अपने एक दोस्त के घर में ठहरा था।

नाश्ता करके वह निकलने की तैयारी कर रहा था। तभी उसके खबरी का फोन आया। उसने मिलने के लिए बुलाया। विनोद उसकी बताई हुई जगह पर मिलने के लिए चला गया।
उसके खबरी ने बताया कि अब तक उसने छोटे मोटे होटल, लॉज, गेस्ट हाउस सब देख लिए। कहीं भी मुकेश के ठहरने की सूचना नहीं मिली है। अब या तो मुकेश किसी जानने वाले के घर ठहरा होगा या किसी बड़े होटल में।
विनोद ने उससे कहा कि अभी वह अपनी कोशिश जारी रखे। शायद कोई सुराग मिल जाए। खबरी चला गया। उसके बाद विनोद नई दिल्ली रेलवे स्टेशन चला गया।
विनोद को पता था कि मुकेश दिल्ली के लिए जनता एक्सप्रेस ट्रेन पर चढ़ा था। वह स्टेशन पर तैनात कुलियों से इस विषय में पूँछताछ करने गया था कि किसी ने भी मुकेश का सामान स्टेशन के बाहर पहुँचाया हो। वह मुकेश की तस्वीर दिखाकर उनसे पूँछताछ कर रहा था। पर उसे कोई सफलता नहीं मिली।
स्टेशन के बाहर भी उसने ऑटो रिक्शा चालकों से पूँछताछ की। पर निराशा ही हाथ लगी।
हार कर वह वापस लौट गया। वह समझ नहीं पा रहा था कि आखिर मुकेश दिल्ली में गायब कहाँ हो गया।

दूर मुंबई में कावेरी देवी मेमोरियल हॉस्पिटल में डॉक्टर मेहराअंजन को समझा रहे थे कि अभी वह पूरी तरह ठीक नहीं है। इसलिए अभी आराम करे।
अंजन डॉक्टर मेहरा से कह रहा था कि उसे इसी समय पंकज से मिलना है।

रिस्की लव - 7

अंजन के बहुत ज़िद करने पर डॉक्टर मेहरा ने पंकज को खबर कर दी कि अंजन उससे मिलना चाहता है। खबर मिलने के कुछ ही देर बाद पंकज हॉस्पिटल पहुँच गया। डॉक्टर मेहरा ने हिदायत दी कि सावधानी बरतते हुए बात करे। मरीज को अधिक देर परेशान ना करे।
डॉक्टर मेहरा के जाने के बाद अंजन ने पंकज से पहला सवाल किया कि मीरा कैसी है ? उसके इस सवाल पर पंकज ने उस दिन जो घटा वह बता दिया। उसकी बात सुनकर अंजन परेशान हो गया। उसने पंकज से पूँछा,
"कुछ पता चला कि उस दिन बीच हाउस पर किसने हमला करवाया था ?"
पंकज ने जवाब देने की जगह अपनी नज़रें झुका लीं। अंजन समझ गया कि अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है। उसने कहा,
"अस्पताल में मुझे वक्त का भी पता नहीं चलता है। कितने दिन हो गए उस घटना को ?"
"भाई पाँच दिन हो गए।"
अंजन कुछ गुस्से में बोला,
"इतने दिनों में तुम कुछ भी पता नहीं कर पाए। मैं अभी इस लायक नहीं हूँ। पर तुम तो कुछ कर सकते हो।"
पंकज ने सफाई दी,
"भाई आप परेशान ना हों। मैं कोशिश कर रहा हूँ। जल्दी ही पता चल जाएगा।"
"तो पता करो... मुझे जानना है कि वह कौन है जो मीरा को ले गया।"
"भाई बहुत जल्दी ही पता करता हूँ।"
"मुकेश कहाँ है ?"
"उस दिन के बाद उसका भी कोई पता नहीं है।"
अंजन उत्तेजित होकर ऊँची आवाज़ में बोला,
"तो जाओ पता करो। जल्दी ही आकर मुझे सारी खबर दो।"
उसकी आवाज़ सुनकर बाहर खड़ी नर्स अंदर आ गई।

उसने कहा,
"डॉक्टर मेहरा ने आपसे ज्यादा स्ट्रेस लेने को मना किया है।"
अंजन ने उसे इशारे से बाहर जाने को कहा। नर्स के जाने के बाद वह बोला,
"चाहें जैसे हो इस बात का पता जल्द से जल्द लगाओ। डॉक्टर मेहरा चाहे जो कहें। तुम आकर मुझसे मिलते रहो। मैं खुद भी यहाँ से जल्दी निकलने की कोशिश करता हूँ।"
पंकज चला गया। उसके जाने के बाद नर्स ने आकर उसे दवाएं दीं और आराम करने को कहकर चली गई।
बेड पर लेटा हुआ अंजन मीरा के बारे में सोच रहा था।
करीब एक साल पहले वह किसी काम से लंदन गया था। वह मौज मस्ती के इरादे से लंदन के मशहूर नाइट क्लब में गया था। अपना मनपसंद ड्रिंक पीते हुए वह डांस फ्लोर पर थिरकते लोगों को देखने लगा। वह खुद को एक अच्छा डांसर नहीं मानता था इसलिए डांस फ्लोर से दूर रहता था। लेकिन उस दिन लोगों के बीच डांस करते हुए एक चेहरे ने उसकी निगाहों को अपनी तरफ खींच लिया। ना जाने क्या सोचकर वह भी डांस फ्लोर पर चला गया और अपने अंदाज़ में थिरकने लगा।
नाचते हुए वह उस लड़की के नज़दीक चला गया जिसके चेहरे ने उसे अपनी तरफ आकर्षित किया था। वह अपने ही तरीके से नाच रहा था। तभी उस लड़की की नज़र उस पर पड़ी। वह उसे देखकर मुस्कुरा दी। उसका मुस्कुराना अंजन को अच्छा लगा।
कुछ देर में वह लड़की डांस फ्लोर छोड़कर एक टेबल पर जाकर बैठ गई। अंजन भी डांस छोड़कर उसके पास चला गया। उससे इजाज़त लेकर उसकी टेबल पर बैठ गया। उस लड़की ने एक बार फिर मुस्कुरा कर कहा,
"अच्छा डांस कर लेते हो।"
अंजन ने कहा,
"मुझे पता है कि मैं बहुत खराब डांसर हूँ। इसलिए डांस फ्लोर से दूर रहता हूँ। पर आज आपको डांस करते हुए देखा तो खिंचा चला गया।"
उसकी बात सुनकर वह लड़की ज़ोर से हंस दी। इससे हिम्मत पाकर अंजन ने अपना परिचय देते हुए कहा,
"अंजन विश्वकर्मा.... मुंबई से हूँ। कंस्ट्रक्शन्स बिज़नेस है...कावेरी कंस्ट्रक्शन्स..."
अंजन ने अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ा दिया। उस लड़की ने हाथ मिलाते हुए कहा,
"मीरा आसवानी... यहीं की हूँ। आर्टिस्ट हूँ।"
अंजन ने कुछ संकोच के साथ कहा,
"क्या मैं आपके लिए एक ड्रिंक मंगा सकता हूँ।"
मीरा मुस्कुरा दी। अंजन उसके जवाब का इंतजार कर रहा था। मीरा ने कहा,
"मैं शराब नहीं पीती हूँ।"
अंजन का चेहरा उतर गया। मीरा ने कहा,
"पर इस जगह नॉन एल्कोहलिक ड्रिंक्स भी सर्व होते हैं। आप मेरे लिए मंगा सकते हैं।"
अंजन का चेहरा खिल उठा। उसने कहा,
"ठीक है... मैं हम दोनों के लिए कोई सॉफ्ट ड्रिंक मंगाता हूँ।"

"आप जो चाहे पी सकते हैं।"
"ओके..."
अंजन ने अपने लिए व्हिस्की और मीरा के लिए आइस्ड टी मंगवाई। दोनों चुपचाप अपना ड्रिंक पीने लगे। अंजन बात करना चाहता था पर समझ नहीं पा रहा था कि क्या कहे। वह चाहता था कि मीरा कुछ कहे। लेकिन मीरा अपनी आइस्ड टी पीते हुए ना जाने किन खयालों में खोई हुई थी।

अंजन बात तो नहीं कर पा रहा था लेकिन लगातार मीरा की तरफ देख रहा था।
इस वक्त वह मीरा की खूबसूरती को नज़दीक से देख रहा था। उसकी आँखें काली और बड़ी थीं। अंजन को उसकी आँखों में अजीब सी कशिश नज़र आ रही थी। उनकी ओर देखते हुए वह उनकी तरफ खिंचा जा रहा था।
तभी डांस फ्लोर पर नाचती हुई मीरा की सहेली टेबल के पास आकर बोली,
"मीरा लेट्स गो। देर हो रही है। कल तुम्हारे लिए कितना महत्वपूर्ण दिन है। कल जल्दी उठना है।"
मीरा अपने खयालों से बाहर आ गई। उठते हुए बोली,
"मिस्टर अंजन थैंक्यू फार ड्रिंक।"
अंजन भी उठकर खड़ा हो गया। उसकी बात का जवाब देता उससे पहले ही मीरा वहाँ से चली गई।

मीरा के जाने के कुछ ही देर बाद अंजन भी नाइट क्लब से निकल गया। वह लंदन में अपने एक दोस्त सागर खत्री के बंगले पर ठहरा हुआ था। पंकज भी उसी बंगले के आउट हाउस में था।
अंजन अपने बिस्तर पर लेटा हुआ करवटें बदल रहा था। नींद उससे कोसों दूर थी। उसकी आंखों में बस मीरा का चेहरा बसा हुआ था। वह अजीब सी बेचैनी महसूस कर रहा था।‌ उसका मन कर रहा था कि कोई जादू हो जाए और वो मीरा के पास पहुँच जाए।
वह बिस्तर से उठकर कमरे में टहलने लगा। अब उसे इस बात का पछतावा हो रहा था कि उस समय चुपचाप बैठकर मीरा को निहारते रहने की जगह अगर उसने कुछ और बातचीत की होती तो शायद उसके बारे में और बातें पता चल जाती जिससे उसे खोजना आसान होता। उसे तो उसके नाम के अलावा कुछ भी नहीं पता था।
वह यह सोचकर हैरान था कि एक छोटी सी मुलाकात में मीरा ने उस पर कौन सा जादू कर दिया है। वह एक पल के लिए भी उसके खयाल को अपने मन से नहीं निकाल पा रहा था। वह जाकर अपने बिस्तर पर लेट गया।‌ कोशिश करने लगा कि शायद उसे नींद आ जाए।‌ पर आँखों में मीरा की छवि ऐसी बस गई थी कि नींद उनमें प्रवेश ही नहीं पा रही थी।
अंजन की सारी रात करवटें बदलते ही कट गई।‌ सुबह जब वह नाश्ते के लिए अपने दोस्त सागर के साथ था तो उसकी आँखों से पता चल रहा था कि वह सो नहीं पाया।‌ सागर ने उससे पूँछा,
"क्या बात है ? कोई तकलीफ थी। लगता है कि रात में सोए नहीं हो।"
अंजन ने कहा,
"हाँ तकलीफ तो थी।"
"तो बताना चाहिए था। मैं तुम्हारी तकलीफ दूर कर देता।"
"काश कि तुम कर पाते।"
अंजन ने आह भरकर कहा। सागर को उसकी बात समझ नहीं आई। उसने कहा,
"ऐसा क्या हो गया है तुम्हें ? खुलकर बताओ।"
अंजन ने नाइट क्लब में मीरा से हुई मुलाकात के बारे में बताया। सब सुनकर सागर हंस कर बोला,
"तो इश्क का चक्कर है। तब तो तुम्हारा भगवान ही मालिक है।"
अंजन को लगा था कि सागर उसकी मदद करने की बात करेगा। लेकिन उसने ऐसा कुछ नहीं कहा। अंजन बोला,
"क्या यार.... मुझे लगा था कि तुम मेरी मदद करने की बात कहोगे। तुमने तो भगवान पर डाल दिया।"
"तुम तो बस उसका नाम पता कर पाए। इतने बड़े लंदन में एक मीरा आसवानी को तलाशना आसान है क्या।

"
"पर यह लंदन है। मीरा आसवानी नाम इतना कॉमन नहीं होगा यहाँ। वह कह रही थी कि आर्टिस्ट है। कुछ करो यार।"
सागर ने महसूस किया कि अंजन इस मामले में बहुत गंभीर है। उसने कहा,
"ठीक है... तुम्हारे लिए कोशिश करता हूँ। दौड़ता हूँ अपने आदमियों को। पर तुम देवदास ना बन जाना।"
सागर के आश्वासन से अंजन को तसल्ली हुई। वह नाश्ता करने लगा।

सागर ने अपने आदमी उन इलाकों में भेजे जहाँ भारतीय मूल के लोगों की संख्या अधिक थी। उसके आदमियों के पास तलाश के लिए सिर्फ दो ही आधार थे। एक नाम और दूसरा यह कि मीरा एक आर्टिस्ट ‌थी।
अंजन बहुत बेचैन था। उसका मन मीरा के बारे में जानने के लिए तड़प रहा था। अगले दिन दोपहर को सागर ने अंजन से कहा कि वह उसे कहीं ले जाना चाहता है। अंजन का मन कहीं भी जाने का नहीं हो रहा था। पर वह सागर को मना नहीं कर पा रहा था। वह सागर के साथ चला गया। लेकिन पंकज को साथ नहीं ले गया। क्योंकी सागर के साथ उसके आदमी थे।
सागर अंजन को एक आर्ट गैलरी में ले गया। वहाँ स्कल्पचर्स की एक प्रदर्शनी लगी हुई थी। गैलरी में घूमते हुए अंजन की निगाह मीरा पर पड़ी। वह एक स्कल्पचर के सामने खड़ी थी और लोगों को कुछ समझा रही थी। अंजन का चेहरा चमक उठा। उसने सागर की ओर देखा। वह उसकी तरफ देखकर मुस्कुरा रहा था। सागर ने कहा,
"इसी मीरा की बात कर रहे थे ना तुम ?"
"हाँ यार.... थैंक्यू। पर तुमने कैसे ढूंढ़ा ?"
सागर ने जवाब दिया,
"कल तुमने बताया था कि मीरा की सहेली उससे कह रही थी कि कल तुम्हारे लिए खास दिन है। एक आर्टिस्ट के लिए खास दिन वही होता है जब वह पब्लिक के सामने आए। मैंने पता कराया कि लंदन में मीरा नाम की किसी कलाकार का कोई स्टेज शो या कोई प्रदर्शनी है। पता चला कि निसडन में मीरा आसवानी नाम की एक स्कल्पचरिस्ट की प्रदर्शनी है। मैं तुम्हें यहाँ ले आया। अब मौका तुम्हारे पास है। मीरा से मिलकर बात आगे बढ़ाओ।"
अंजन ने सागर को गले लगाकर धन्यवाद किया और मीरा की तरफ बढ़ गया।

रिस्की लव - 8

उस दिन आर्ट गैलरी में हुई मुलाकात के बाद अंजन और मीरा के बीच मुलाकातों का सिलसिला शुरू हो गया। अंजन के इंडिया लौटने तक दोनों एक दूसरे के अच्छे दोस्त बन चुके थे।
अंजन का मन मीरा को छोड़कर इंडिया आने का नहीं कर रहा था। लेकिन उसका लौटना ज़रूरी था। अंजन के लौटने से एक रात पहले मीरा ने उसे अपने घर पर डिनर के लिए बुलाया। उस दिन डिनर करते हुए उसने बताया कि उसके एक रिश्तेदार भारत में रहते हैं। दो महीने बाद उनके घर शादी है। वह शादी अटेंड करने भारत आएगी। उसकी बात सुनकर अंजन खुश हो गया। उसने मीरा से कहा कि ‌जब वह भारत आए तो उसे मेहमाननवाज़ी करने का मौका दे। मीरा ने खुशी खुशी उसका न्यौता कबूल कर लिया।

अंजन भारत लौट आया था पर मीरा का खयाल हमेशा उसके ज़ेहन में रहता था।

उसका मन किसी काम में नहीं लगता था। हफ्ते में दो बार तो वह मीरा से फोन पर बात कर ही लेता था। दो महीने का इंतज़ार उसके लिए कठिन हो रहा था।
दो महीने बाद मीरा भारत आई। अपने रिश्तेदार के घर शादी के फंक्शन में शामिल होने के बाद वह अपना वादा निभाने के लिए अंजन के घर रहने आई। मीरा करीब एक हफ्ते उसके घर पर रही। उस दौरान अंजन ने उसकी खूब आवभगत की।
मीरा के लंदन लौट कर जाने के बाद अंजन को यकीन हो गया कि वह उसके प्यार में पूरी तरह से डूब चुका है। लेकिन मीरा भी उसे चाहती है या नहीं यह बात वह नहीं समझ पाया था। हालांकि जितने दिन वह अंजन के साथ रही थी उसके साथ खुलकर पेश आती थी। उसकी तारीफ करती थी। पर अंजन असमंजस में था। सही तरह से नहीं कह सकता था कि उसके व्यवहार का खुलापन दोस्ती की निशानी है या प्यार की।
वह मीरा को सच्चे दिल से चाहता था। इसलिए उसके मन में एक डर था कि अगर मीरा उससे प्यार ना करती हो, उसे सिर्फ अपना अच्छा दोस्त मानती हो तो क्या होगा। कैसे वह इस बात को बर्दाश्त कर पाएगा। इसलिए वह सच्चाई जानने से डर भी रहा था।
अंजन उसके बाद जल्दी जल्दी कई बार लंदन गया। हर बार जब वह लौटकर आता तो उसका विश्वास पक्का हो जाता था कि मीरा भी उसे चाहती है।
अंजन ने 600 एकड़ की जमीन हासिल कर ली थी जो वन के लिए संरक्षित थी। उसने उस जमीन पर एक लग्जरी रिज़ार्ट बनाने की योजना बनाई थी। आवश्यक कार्यवाही के बाद उसने रिज़ार्ट का काम शुरू करने से पहले भूमि पूजन का कार्यक्रम रखा था।‌ इस कार्यक्रम के लिए मीरा को खासतौर पर आमंत्रित किया था।
मीरा भी उसके आमंत्रण को स्वीकार कर लंदन से भूमि पूजन में भाग लेने आई थी।‌ मीरा को अगले दिन सुबह जल्दी लंदन के लिए फ्लाइट पकड़नी थी। पर इस बार अंजन सच जाने बिना मीरा को जाने नहीं देना चाहता था।
मीरा अपने कमरे में आराम कर रही थी। अंजन ने उसके कमरे के दरवाज़े पर दस्तक दी। मीरा ने उठकर दरवाज़ा खोल दिया। सामने अंजन को देखकर वह बोली,
"अंजन.... प्लीज़ कम इन।"
अंजन कमरे में जाकर बैठ गया। मीरा उसके पास बैठकर इंतज़ार करने लगी कि वह अपने आने का कारण बताए। लेकिन वह कुछ कहना चाह कर भी कह नहीं पा रहा था। मीरा ने गौर किया कि अंजन अच्छी तरह से ड्रेस अप होकर आया है। जैसे कहीं बाहर जाना हो। उसने कहा,
"क्या बात है अंजन ? कहाँ जाने की तैयारी है ?"
अंजन ने कहा,
"अकेले नहीं.... तुम्हें साथ लेकर जाना चाहता हूँ।"
मीरा को आश्चर्य हुआ। उसने कहा,
"मुझे..?? कहाँ ले जाना है ?"
"तुम्हें पता है मेरा एक बीच हाउस है शिमरिंग स्टार्स। मेरे साथ चलोगी ?"
मीरा ने घड़ी पर नज़र डाली। उसके बाद बोली,
"अंजन तुम जानते हो कि सुबह तड़के मुझे लंदन के लिए फ्लाइट पकड़नी है। आई एम वेरी टायर्ड। बट नेक्स्ट टाइम पक्का चलूँगी।"
उसकी बात सुनकर अंजन के चेहरे पर निराशा का भाव आ गया।

वह शायद मीरा से छिप नहीं सका। उसने कहा,
"बहुत मन है तुम्हारा ?"
अंजन ने एक छोटे बच्चे की तरह उदास होकर कहा,
"था तो....पर कोई बात नहीं। तुम आराम करो।"
उसकी बात सुनकर मीरा हंसकर बोली,
"ठीक है चलती हूँ। मुझे कुछ वक्त दो तैयार होने के लिए।"
यह सुनकर अंजन के चेहरे पर मुस्कान आ गई। वह बोला,
"तुम तैयार हो जाओ। मैं बाहर इंतज़ार कर रहा हूँ।"
यह कहकर वह कमरे से बाहर चला गया।

अंजन और मीरा उस कार में थे जिसे मुकेश चला रहा था। उसके मना करने के बावजूद भी पंकज दो और आदमियों के साथ दूसरी कार में था। जिसे वह खुद ड्राइव कर रहा था। अंजन ने केयर टेकर को पहले ही इंतज़ाम करने को कह दिया था।
वह मीरा के साथ बीच हाउस के हॉल में था। पंकज दोनों आदमियों के साथ बाहर था।
मीरा बहुत खूबसूरत लग रही थी। अंजन ने शैंपेन खोलकर दो गिलासों में डाली। उसने एक गिलास मीरा को पकड़ा दिया। चियर्स करने के बाद ‌दोनों शैंपेन पीने लगे। अंजन बार बार मीरा की ओर देख रहा था। मीरा मुस्कुराई और पूँछा,
"क्या बात है ?"
"कुछ नहीं। तुम पिओ।"
शैंपेन पीते हुए मीरा ने महसूस किया कि गिलास की तली में कुछ है। उसने गौर से देखा तो एक अंगूठी थी। मीरा ने प्रश्न भरी नज़र से अंजन को देखकर कहा,
"यह क्या है अंजन ?"
मीरा ने जिस तरह से पूँछा था अंजन सकपका गया।
"तुम जानते हो कि यह मेरे गले में जाकर अटक सकती थी।"
अंजन घबरा गया। माफी मांगते हुए बोला,
"आई एम सॉरी। वो फिल्मों और टीवी पर देखा था।"
"क्या देखा था ?"
"यही कि प्रपोज़ करने के लिए हीरो गिलास में इसी तरह अंगूठी डाल देता है।"
मीरा ने कुछ गुस्से से कहा,
"तो ये सब करने के लिए तुम यहाँ लाए थे।"
अंजन ने अपनी नज़रें झुका लीं। वह कुछ बोलने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था। तभी मीरा की हंसी उसके कान में पड़ी। उसने नज़रें उठाकर देखा। मीरा बोली,
"लाए थे तो कहो ना।"
अंजन का मन खिल उठा। वह बोला,
"मीरा आई लव यू.... तुम्हें अपनी जान से भी अधिक चाहता हूँ।"
अंजन ने देखा कि मीरा भावुक हो गई है। अपनी पलकों में अपने आंसू रोकने की कोशिश कर रही है। फिर भी आंसू उसके गालों तक लुढ़क कर आ गए थे। अंजन ने उसके दोनों गालों को चूम लिया। मीरा ने कहा,
"आई लव यू टू अंजन...."
यह कहकर वह उसके गले से लग गई। दोनों कुछ देर वैसे ही बैठे रहे। कुछ देर बाद मीरा ने कहा,
"अंगूठी क्या सिर्फ शैंपेन में डालने के लिए लाए थे ?"
अंजन ने गिलास से अंगूठी निकाली। इधर उधर निगाह दौड़ाई। कुछ ना मिलने पर अपने सूट पर रगड़ कर पोंछ दिया। उसकी इस हरकत को देखकर मीरा ने कहा,
"ओ माई बेबी...."
अंजन उसके सामने घुटने के बल बैठ गया। उसका हाथ पकड़ कर चूमा। उसे अंगूठी पहनाने जा रहा था तभी एक गोली आकर वाज़ पर लगी। उसे खतरा भांपते देर नहीं लगी। मीरा का हाथ पकड़कर उसे सोफे के पीछे खींचकर ले गया। अपनी गन निकाली और गोली चलाने लगा।

गोली चलाते हुए उसकी नज़र डरी सहमी मीरा पर पड़ी। वह समझ नहीं पा रही थी कि अचानक यह क्या हुआ। उसकी आँखें अंजन के चेहरे पर टिकी थीं। अंजन समझ गया कि वह उसका यह रूप देखकर सकते में है। लेकिन वह समय कोई सफाई देने का नहीं था। ज़रा सी चूक उसकी और मीरा की जान ले सकती थी।
अंजन ने मीरा से कहा कि वह सोफे के पीछे बैठी रहे। इधर उधर होने की कोशिश ना करे। वह चाहता था कि आगे बढ़कर देखे कि हमला करने वाले कौन और कितने हैं। पंकज और उसके साथी क्या कर रहे हैं। मीरा को वहीं छोड़कर वह सोफे के पीछे से निकला। कुछ कदम आगे आया होगा कि घबराया हुआ पंकज अंदर आया। उसने बताया कि उनके दोनों आदमी मारे गए हैं। वह नहीं जानता कि अचानक किसने हमला किया है। वह उसे बचाने के लिए अंदर आया है।
सब सुनकर अंजन सोच में पड़ गया। उसे मीरा की फिक्र थी। वह उसे यहाँ लेकर आया था। अगर उसे कुछ हो जाता तो वह बर्दाश्त नहीं कर पाता। उसने पंकज से कहा,
"तुम मेरी चिंता मत करो। मैं यहाँ संभालता हूँ। तुम मीरा को सुरक्षित यहाँ से निकाल कर ले जाओ।"
पंकज कुछ कहने जा रहा था। अंजन ने उसे रोक कर कहा,
"मेरी बात मानो। मीरा को लेकर निकलो यहाँ से।"
उसकी बात मानकर पंकज मीरा को लेकर निकल गया।
अंजन उसे कवर देने के लिए बाहर निकल रहा था कि कोई उसके सामने आ गया। चेहरे पर नकाब था। उसने उसकी छाती में गोली मार दी।
उसकी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा। होश खोने से पहले उसने किसी की धुंधली सी झलक देखी थी।

हॉस्पिटल के बेड पर लेटे हुए वह याद करने की कोशिश कर रहा था कि वह कौन हो सकता था। उसे ऐसा लग रहा था कि वह जो कोई भी था जाना पहचाना लग रहा था। वह अपने दिमाग पर ज़ोर डाल रहा था कि कुछ याद आ जाए। लेकिन उसकी हर कोशिश नाकाम हो रही थी।
बहुत देर तक कोशिश करने के बाद भी उसे कुछ याद नहीं आया।
उसका मन उस शख्स के बारे में जानने के लिए तड़प उठा। वह वही शख्स हो सकता था जिसने उस पर हमला किया था।
उसके लिए यह भी जानना ज़रूरी था कि मीरा का अपहरण कर कौन उसे अपने साथ ले गया है ?
इन सवालों का जवाब जानने के लिए आवश्यक था कि वह हॉस्पिटल से निकल कर इस काम की बागडोर अपने हाथ में ले ले।
उसने तय कर लिया कि डॉक्टर मेहरा चाहे कुछ भी कहे पर अब वह और अधिक हॉस्पिटल में नहीं रहेगा।

रिस्की लव - 9

पुरानी खबरों को खंगालते हुए नफीस के हाथ एक छोटी सी खबर लगी।
'शूटिंग में माहाराष्ट्र स्टेट स्तर के खिलाड़ी को गैर इरादतन हत्या के प्रयास में तीन साल की सजा।'
यह खबर 2011 की थी। जिस खिलाड़ी को सजा मिली थी वह तरुण काला था। नफीस को याद आया कि उन दिनों वह मुंबई के मराठी दैनिक शहर च्या दर्पण में ही था। उन दिनों अंजन ने तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ना शुरू किया था।
नफीस ने अब पुराने अखबारों से तरुण काला के बारे में और खबरें खंगालनी शुरू कीं।

काफी खोजने के बाद उसे तरुण से संबंधित एक और खबर मिली।
2015 के एक मराठी अखबार में एक छोटा सा लेख था। इस लेख में बताया गया था कि तरुण काला को अच्छे बर्ताव के कारण डेढ़ साल की जेल के बाद ही छोड़ दिया गया था। उसके बाद तरुण ने एक नई पारी शुरू की। उसने फिश एक्सपोर्ट के बिज़नेस में कदम रखा। कुछ ही समय में इस बिज़नेस में अच्छी सफलता प्राप्त कर ली।
इसके अलावा नफीस को तरुण काला के बारे में कोई और खबर नहीं मिली।

कावेरी हॉस्पिटल के वॉर्ड ब्वॉय ने कहा था कि पंकज किसी तरुण काला के साथ बात कर रहा था। नफीस अब अंजन, पंकज और तरुण काला के बीच की डोर को पहचानने की कोशिश कर रहा था।
बहुत सोचने पर केवल एक बात उसकी समझ में आई। जिस अवधि में तरुण ने फिश एक्सपोर्ट के बिज़नेस में कदम रखा था उसी अवधि में अचानक रघुनाथ परिकर और उसके छोटे भाई यदुनाथ परिकर की रहस्यमय तरीके से हादसे में मौत हो गई थी। नफीस का क्राइम रिपोर्टर वाला दिमाग सक्रिय हो गया। उसने इन दो अलग अलग बातों को जोड़ने वाली डोर का पता लगाने का निश्चय किया।

शाहीन ने जॉर्ज एसोसिएट्स में दोबारा फाइल क्लर्क का जॉब शुरू कर दिया था। वैसे रोज़ सात बजे तक घर आ जाती थी। पर आज उसने फोन करके बता दिया था कि अपने अम्मी अब्बू से मिलने घर जा रही है। कुक खाना बनाकर रख जाएगी। उसे देर हो सकती है इसलिए खाने के लिए उसका इंतज़ार ना करे। खाना खा ले।
कुक टेबल पर खाना रख गई थी। नफीस को भूख लग रही थी। फ्रेश होने के बाद वह खाना खाने लगा। खाते हुए वह शाहीन के बारे में सोच रहा था। जबसे उसने दोबारा काम शुरू किया था नफीस से उसे वक्त ना देने की शिकायत करना बंद कर दिया था। अब वह खुद ही व्यस्त हो गई थी। वैसे बात सिर्फ इतनी नहीं थी। वह खुद भी प्रयास करता था कि समय मिलने पर उसके साथ वक्त बिताए। कहीं घुमाने के लिए ले जाय।‌ वह शाहीन को खुश रखने की कोशिश करता था।
खाना खाकर वह प्लेट रखने किचन में गया था तभी उसका फोन बजा। उसने आकर फोन उठाया तो विनोद का फोन था। विनोद ने बताया कि उसने अपने खबरियों को काम में लगा दिया है। कोशिश कर रहा है कि जल्दी ही मुकेश के बारे में कुछ पता चल जाए।‌
विनोद से बात करने के बाद नफीस अपने स्टोररूम में गया। यहाँ एक कबर्ड था जिसमें उसने अपनी कुछ पुरानी फाइलें रखी हुई थीं।‌ इन फाइलों में पुरानी खबरों के बारे में जानकारियां थीं। उसने वह फाइल निकाली जिसमें रघुनाथ परिकर और उसके भाई की मौत की खबर थी। उसने खबर पढ़नी शुरू की।
'मशहूर उद्योगपति रघुनाथ परिकर और उनके छोटे भाई यदुनाथ परिकर की एक हादसे में मौत हो गई। कंस्ट्रक्शन बिज़नेस में अपना अहम स्थान रखने वाले रघुनाथ परिकर अपने भाई के साथ अपने पैतृक गांव में कुलदेवी की पूजा करके लौट रहे थे।

हाईवे पर अचानक उनकी कार अनियंत्रित होकर सामने से आ रही एक ट्रक से टकरा गई। दोनों भाइयों की घटना स्थल पर ही मौत हो गई। गाड़ी का ड्राइवर भी मारा गया।'
नफीस ने खोजकर देखा। सिर्फ एक और खबर थी। उसमें बताया गया था कि अंजन ने रघुनाथ और यदुनाथ का अंतिम संस्कार किया। अंजन परिकर बंधुओं की छोटी बहन मानवी का पति है। अंजन ने बड़े दुखी स्वर में बताया कि वह बड़े भाई रघुनाथ परिकर को अपने गुरु की तरह मानता था। अभी कुछ ही महीनों पहले उन्होंने अपना आशीर्वाद देकर उसे अपना बहनोई बनाया था। लेकिन अचानक उनके परिवार पर इतना बड़ा दुख आ पड़ा।

नफीस ने उस वक्त को याद करने का प्रयास किया। लगभग हर अखबार और न्यूज़ चैनल में सिर्फ हादसे की बात कही गई थी। हादसे की कोई जांच हुई हो ऐसा नहीं हुआ था। हाँ कुछ लोगों ने दबी जुबान से इस विषय में बात ज़रूर की थी कि दाल में कुछ काला है। पर कोई खुलकर सामने नहीं आया था।
उस समय नफीस ने भी इस बात पर खास ध्यान नहीं दिया था।‌ पर अब उसे भी दाल में कुछ काला नज़र आ रहा था।

दो दिन और बीत गए थे लेकिन पंकज अभी तक कोई नई खबर लेकर नहीं आया था।‌ अंजन के लिए हॉस्पिटल में टिकना मुश्किल हो रहा था।‌ उसने डॉक्टर मेहरा को बुलाकर कहा कि उसे हॉस्पिटल से डिस्चार्ज दे दें। डॉक्टर मेहरा ने समझाना चाहा कि अभी घाव गहरा है। कुछ दिन और हॉस्पिटल में रहना आवश्यक है।‌अंजन ने फैसला सुनाते हुए कहा,
"मेरे लिए अब और अधिक यहाँ रहना कठिन हो रहा है। आप ऐसा इंतजाम करें कि आगे की देखभाल मेरे बंगले पर हो सके।"
डॉक्टर मेहरा ने बहुत कोशिश की लेकिन अंजन नहीं माना। डॉक्टर मेहरा ने उसे डिस्चार्ज दे दिया। लेकिन साथ ही हीदायत दी कि जब तक घाव पूरी तरह भर नहीं जाता है उसे दवाएं लेते रहना पड़ेगा। उसे जो भी करना है अपने घर में रहकर करे। कहीं बाहर ना जाए। यह भी इंतजाम किया गया कि एक नर्स उसकी देखभाल के लिए उसके घर पर रहेगी। एक डॉक्टर आकर उसका चेकअप कर जाया करेगा।
इन सब इंतजामों के साथ अंजन अपने बंगले पर आ गया। आते ही उसने अपना काम संभाल लिया। इधर पंकज का व्यवहार उसे सही नहीं लग रहा था। इस मामले में वह जिस तरह की ढिलाई बरत रहा था वह शक पैदा करने वाली थी। पंकज उसका खास साथी रहा था। अंजन जानता था कि अगर वह चाहे तो कुछ ही समय में सब पता कर सकता था। लेकिन अभी वह पंकज पर किसी तरह का शक जाहिर नहीं करना चाहता था।
पंकज के अलावा भी कई ऐसे लोग थे जो अंजन के लिए काम करते थे। जिन पर वह भरोसा कर सकता था। उनमें से एक था एंथनी जैकब। एंथनी पेशे से एक जासूस था। वह पहले भी कुछ मामलों में उसके लिए जासूसी कर चुका था। अंजन ने एंथनी से संपर्क किया।
एंथनी उसके बंगले पर आकर उससे मिला। अंजन ने उसे सारी बात बताई।

उसने एंथनी से कहा कि जितनी जल्दी हो सके उसे सच का पता लगाकर बताए।

अंजन अपनी बीती हुई ज़िंदगी में झांककर उस शख्स को तलाशने की कोशिश कर रहा था जो उसका दुश्मन हो सकता था।

मानवी से शादी करने के पीछे उसका मकसद रघुनाथ परिकर की बराबरी तक पहुँचना ही था।
लेकिन शुरू से ही वह इस मंसूबे के साथ मानवी की ओर बढ़ा हो ऐसा नहीं था। उस दिन जब पार्टी के बाद मानवी ने उसे मिलने के लिए बुलाया था तब उसके इतने नज़दीक रहते हुए वह उसकी खूबसूरती का दीवाना हो गया था। उस अवसर की तलाश में था जब वह मानवी से नज़दीकी बढ़ा सके।
जब उसे पता चला कि नवीन सौरांग मज़ागाओं में यॉट पर पार्टी कर रही मानवी का अपहरण करना चाहता है तो उसके हाथ अच्छा मौका लगा। फिल्मी हीरो की तरह वहाँ पहुँच कर उसने मानवी को नवीन के चंगुल से बचा लिया।
मानवी उसे दिल दे बैठी। दोनों एक दूसरे से मिलने लगे। अंजन जानता था कि मानवी अपने भाइयों की लाडली है। खासकर रघुनाथ परिकर उसे अपनी बेटी की तरह मानता है। वह कभी भी उसके और मानवी के रिश्ते को कबूल नहीं करेगा। यही हुआ भी। उसके और मानवी की रिश्ते की भनक पड़ते ही रघुनाथ परिकर ने उसे बुलाकर धमकाया और मानवी से दूर रहने को कहा।
अंजन अब तक विपरीत परिस्थितियों से लड़कर ही आगे बढ़ा था। रघुनाथ की इस धमकी से डरने की जगह उसके मन में आया कि मानवी रघुनाथ की कमज़ोरी है। उसके माध्यम से वह रघुनाथ के बिज़नेस और उसकी ज़िंदगी में दखल बना सकता है।
उसने अपनी चाल चलनी शुरू की। मानवी को फोन करके कहा कि वह उसे दिल की गहराई से चाहता है। लेकिन उनका रिश्ता आगे नहीं बढ़ सकता है।‌ मानवी का भाई रघुनाथ ऐसा नहीं होने देगा। इसलिए वह बहुत दूर चला जाएगा। मानवी भी उसे भूल जाए। मानवी ने बताया कि उसके भाई ने उससे भी ऐसी ही बात की थी। लेकिन वह उसे नहीं भूल सकती है।
अंजन समझ गया था कि मानवी उसके प्यार में अपने भाई से बगावत भी कर सकती है। उसने मानवी को अपने प्लान में शामिल कर लिया। उसके कहने पर मानवी ने दबाव बनाने के लिए खुद को कमरे में बंद कर लिया। खाना पीना छोड़ दिया। आखिरी दांव अपने हाथ की नस काट कर खेला। उसने वह वक्त चुना जब नौकर खाना लेकर आता था।
मानवी को बचा लिया गया। अंजन ने डॉक्टर के साथ मिलकर उसके प्रैगनेट होने की बात कही। मानवी ने भी इस बात को स्वीकार कर लिया।
रघुनाथ परिकर के लिए मानवी ही सबकुछ थी। वह झुक गए। अंजन को अपने बिज़नेस में हिस्सेदारी दी और उसकी शादी मानवी से करा दी।
अंजन बड़ी चालाकी से रघुनाथ परिकर का बहनोई बन गया। ना सिर्फ उसके परिवार में बल्कि उसके बिज़नेस में भी उसने अपना दखल बना लिया था। उसे वह सीढ़ी मिल गई थी जिसे चढ़कर वह उस ऊँचाई को छू सकता था जिसके वह सपने देखता था।
उसने मिले हुए अवसर का पूरा लाभ भी उठाया।

रघुनाथ परिकर के सहारे तेज़ी से आगे बढ़ना शुरू कर दिया।
अपनी इस यात्रा में वह मानवी को एकदम भूल गया था। वह उससे शिकायत करने लगी। अपने सपनों को पूरा करने में व्यस्त अंजन को यह अच्छा नहीं लगता था।
उसके और मानवी के बीच झगड़े होने लगे।

रिस्की लव - 10

एक दिन रघुनाथ परिकर ने अंजन को बात करने के लिए बुलाया। अंजन समझ गया था कि वह क्या बात करेगा। इसलिए वह सब सोचकर गया था कि क्या करना है। जब वह रघुनाथ परिकर के पास पहुँचा तो वह बहुत गुस्से में था। उसने अंजन से कहा,
"धोखेबाज़ तूने मेरी बहन को सीढ़ी की तरह इस्तेमाल किया। उसे अपने झूठे प्यार के जाल में फंसाकर मेरे खिलाफ साजिश की। मुझे सब पता चल गया है। मानवी की प्रैगनेंसी की झूठी खबर तुमने मुझ पर दबाव बनाने के लिए गढ़ी थी। मानवी को भी अपने साथ मिला लिया। उससे शादी करके मेरे बिज़नेस तक पहुँच गए।"
रघुनाथ परिकर की बातें सुनकर अंजन ज़रा भी परेशान नहीं हुआ। वह बड़े इत्मीनान से पैर पर पैर रखकर उसके सामने बैठ गया। उसके इस आचरण से रघुनाथ परिकर और नाराज़ हो गया। लेकिन इतनी बात करते हुए ही वह हांफ गया था।‌ कुछ दिनों से उसकी तबीयत ठीक नहीं लग रही थी। वह ऑफिस भी नहीं जा पा रहा था। पर उसे अंजन की कुछ गड़बड़ियों के बारे में पता चला था। उसने खुद को संभालते हुए कहा,
"पहले मेरे सामने नज़रें झुका कर खड़े रहते थे। आज इतनी हिम्मत कि मैं खड़ा हूँ और तुम बैठ गए। ऑफिस में तुम्हारे कारनामों की भी जानकारी मिली है मुझे।‌ मैं बीमार हूँ। यदुनाथ शराब में ही डूबा रहता है। उसका फायदा उठा रहे हो। पर मैं तुम्हें कामयाब नहीं होने दूँगा। मेरे हितैषी हैं ऑफिस में। मैं भी जल्दी ही ठीक होकर काम पर ध्यान दूँगा।"
अंजन अभी भी बड़े इत्मीनान से बैठा था। रघुनाथ ने कहा,
"तुम्हें लगता है कि मेरी बहन के पति होने का फायदा उठा लोगे तो तुम भूल कर रहे हो।‌ अब मानवी भी तुम्हें पहचान चुकी है।"
अब तक चुप बैठा हुआ अंजन उठकर खड़ा हो गया। कुछ पल रघुनाथ को देखता रहा। उसके बाद बोला,
"दूसरों पर पैर रखकर आगे बढ़ने का हुनर आपसे ही सीखा है। एक बार आपने कहा था कि तुम्हारे अंदर आगे बढ़ने की आग है। वही आग अब आपको जला रही है। बच सकें तो बचा लीजिए खुद को।"
यह कहकर वह चला गया।

दरवाज़े पर दस्तक हुई। अंजन ने देखा कि नर्स आई है। उसके साथ अंजन का एक नौकर था। उसके हाथ में एक ट्रे थी जिसमें ड्रेसिंग का सामान था। नर्स ने कहा,
"सर ड्रेसिंग करवा लीजिए।"
अंजन तैयार हो गया। नर्स नौकर की मदद से ड्रेसिंग करने लगी। ड्रेसिंग के बाद नर्स ने उसे दवाइयां खाने को दीं। सब करने के बाद जाते हुए वह कह गई कि कुछ देर में डॉक्टर आकर उसका चेकअप कर जाएगा।
नर्स के जाने के बाद वह फिर सोचने लगा।

अंजन ने अपने सारे मोहरे बहुत सोच समझकर चले थे।

सब उसके प्लान के हिसाब से ही चल रहा था। रघुनाथ परिकर का बीमार पड़ना भी उसके प्लान का हिस्सा था। जो दवाएं वह ले रहा था उनमें मिलावट की जा रही थी।
पहले से ही शराब के आदी यदुनाथ का पूरी तरह उसमें डूब जाना ऐसा था जैसे कि किस्मत खुद उसका साथ देने की ज़िद पकड़े बैठी हो।
यदुनाथ परिकर हमेशा अपने भाई के साए में रहा था। रघुनाथ की बात उसने हुक्म की तरह मानी थी। वह एक औरत से शादी करना चाहता था। रघुनाथ इस बात के लिए राज़ी नहीं था। नतीजा यह हुआ कि यदुनाथ ने किसी से भी शादी नहीं की। लेकिन मानवी के समय रघुनाथ का नरमी बरतना उसे ‌अच्छा नहीं लगा। वह कुछ कह नहीं पाया। उसने अपने आप को शराब की बोतल का गुलाम बना दिया।

उस दिन जब रघुनाथ ने उसे बुलाकर बताया कि वह उसकी चाल समझ रहा है तो उसने अपनी राह के कांटों को हटाने का मन बना लिया।
हर ग्रीष्मकालीन नवरात्रि में रघुनाथ परिकर यदुनाथ और मानवी के साथ अपनी कुलदेवी के दर्शन के लिए जाता था। अंजन के लिए यह मौका हो सकता था। लेकिन समस्या यह थी कि परिवार का दामाद होने के नाते उसे भी जाना पड़ रहा था। यह उसके प्लान के लिए ठीक नहीं था।
अंजन ने सोचकर इसका उपाय निकाल लिया। वह मानवी के साथ अलग घर में रहता था। जिस दिन रघुनाथ को कुलदेवी की पूजा के लिए जाना था अंजन ने जानबूझकर अपने घर पर हवन पूजा रखवा लिया। उसने कहा कि उस हवन में पत्नी होने के नाते मानवी का उसके साथ बैठना ज़रूरी है। रघुनाथ को बुरा लगा पर वह मानवी और उसे छोड़कर यदुनाथ के साथ चला गया।
लौटते समय अंजन ने उनके एक्सीडेंट की व्यवस्था कर रखी थी।

दोनों भाइयों के जाने के बाद अंजन अब उनकी हर एक चीज़ का अकेला मालिक बन चुका था। एक अपराधी से सफेदपोश बिज़नेस मैन। पहले जो काम वह रघुनाथ के लिए किया करता था अब वही काम दूसरों से करवाता था। तेज़ी से वह कंस्ट्रक्शन बिज़नेस में आगे बढ़ने लगा था।
कंस्ट्रक्शन बिज़नेस के अलावा और कई बिज़नेस में उसने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से पैसा लगाया था। उनका प्रयोग समय समय पर अपने लिए करता था।
अपने आप को सफेदपोश बनाए रखने के लिए वह कुछ ऐसे कार्य भी करता था जिनसे समाज का भला हो।

एक बार फिर उसे वर्तमान में लौटना पड़ा। डॉक्टर हॉस्पिटल से उसका चेकअप करने के लिए आया था। चेकअप के लिए ज़रूरी उपकरणों की व्यवस्था घर पर पहले ही हो चुकी थी। वह उठकर उस कमरे में गया जहाँ चेकअप की व्यवस्था थी। डॉक्टर ने उसे टेबल पर लिटा दिया। उसके बाद कुछ देर तक आवश्यक चीज़ॉ की जांच करता रहा।
चेकअप के बाद डॉक्टर ने कहा,
"सबकुछ कंट्रोल में है। कुछ दिन इसी तरह एहतियात बरतिए। दवाइयां वक्त पर लेते रहिए।"
हिदायत देकर डॉक्टर चला गया।‌ उसके जाने के बाद नौकर ने आकर कहा,
"सर खाने का समय हो गया है। कमरे में ही ले आऊँ।

"
अंजन कमरे में बैठे हुए ऊब रहा था। उसने कहा,
"डाइनिंग टेबल पर ही लगाओ। मैं आता हूँ।"
नौकर ने कहा,
"मैं ले चलूँ..."
अंजन ने कहा,
"तुम जाओ....इतनी दूर चल लूँगा।"
नौकर चला गया। अंजन ने पंकज को फोन करके मिलने के लिए बुलाया। कुछ देर बाद अंजन डाइनिंग टेबल पर पहुँच गया।

अंजन खाना खा रहा ‌था जब पंकज उससे मिलने आया। अंजन ने उसे बैठकर साथ खाने के लिए कहा। पंकज टेबल पर बैठ गया। नौकर ने एक प्लेट लगाकर उसे दी। पंकज खाना खाने लगा। अंजन ने कहा,
"क्या बात है पंकज ? मैं हॉस्पिटल से डिस्चार्ज लेकर आया लेकिन तुम मिलने नहीं आए।"
खाते हुए पंकज रुक गया। पानी पिया फिर बोला,
"भाई वो आपके ‌काम में लगा था। इसलिए नहीं ‌आ पाया। पर सोचा था कि ‌शाम तक आऊँगा।"
पंकज बात करते हुए नज़र नहीं मिला रहा था। अंजन ने कहा,
"तो क्या पता चला ? उस दिन बीच हाउस पर किसने हमला किया था ?"
"भाई वो अभी कोशिश कर रहा हूँ...."
अंजन ने बीच में ही टोकते हुए कहा,
"लगता है कि तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं रहती है। कभी इतने ढीले तो नहीं रहे तुम। कोई बात हो तो बताओ। हम दोनों बरसों से एक दूसरे को जानते हैं।"
पंकज ने धीरे से कहा,
"नहीं भाई कोई बात नहीं है। मैं जल्दी ही पता करता हूँ।"
"ठीक है। अब आराम से खाना खाओ।"
पंकज खाना खाने लगा। अंजन चुपचाप उसके चेहरे के भावों को देख रहा था।

अंजन के घर से ‌निकल कर पंकज उस जगह के लिए चल पड़ा जहाँ पहले भी तरुण काला से मुलाकात कर चुका था। कार चलाते हुए रास्ते में वह‌ अंजन के बारे में सोच रहा था। उसे महसूस हो रहा था कि भले ही अंजन ने उससे कुछ कहा ना हो पर उसे उस पर शक हो गया है। खाना खाते हुए उसने लगातार घूरती हुई अंजन की निगाहों को महसूस किया था।

जब वह पहुँचा तो तरुण काला उसकी राह देख रहा था। बसंत ने पीने की व्यवस्था करके रखी थी। पंकज के आने पर उसने उसके और तरुण के लिए पेग बनाया। उसके बाद चुपचाप बाहर चला गया। तरुण ने पंकज से कहा,
"तुम्हारे चेहरे पर परेशानी दिखाई पड़ रही है। क्या बात है ?"
"अंजन हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होकर घर आ गया है। मुझे मिलने के लिए बुलाया था। उसके बात करने के तरीके से लग रहा था कि जैसे उसे मुझ पर शक हो गया है।"
पंकज की बात सुनकर तरुण भी कुछ परेशान हो गया। उसने कहा,
"बात तो परेशान करने वाली है। अंजन बहुत चालाक है।"
अपने ड्रिंक से एक सिप लेकर उसने कहा,
"तो क्या सोचा है तुमने ? हमला किसने किया था यह तो हम भी नहीं जानते हैं। क्या बताओगे उसे ?"
"मुझे नहीं लगता है कि वह मेरे कुछ बताने के इंतज़ार में बैठा होगा। ज़रूर उसने अपनी तरफ से पता लगाना शुरू कर दिया होगा।"
"कोई अंदाजा है कि तुम्हारे अलावा और कौन हो सकता है जिसे अंजन यह काम सौंपे।"
पंकज ने कोई जवाब नहीं दिया। वह किसी सोच में डूबा था। तरुण ने आगे कहा,
"खैर जो भी हो...

हम क्यों परेशान हों ? हमने तो हमला करवाया नहीं है।"
अपनी बात कहकर तरुण ने पंकज के चेहरे पर अपनी निगाहें टिका दीं। उसे ऐसा लगने लगा था कि पंकज उससे पूरी बात नहीं बता रहा है। इसलिए उसने जानबूझकर यह बात की थी। उसे और कुरेदने के लिए उसने पूँछा,
"डरने वाली कोई बात है ??"
पंकज ने अपना गिलास खाली करते हुए कहा,
"बिल्कुल नहीं...हम तो खुद परेशान हैं कि हमला किसने काराया है। मैं तो यह सोच रहा था कि उसे मेरे और तुम्हारे बारे में ना पता चल जाए।"
उसकी बात सुनकर तरुण भी सोच में पड़ गया।
उस टूटे हुए मकान के बाहर पंकज की कार से टेक लगाकर कोई अंजन को फोन कर रहा था।
अपने घर पर बैठा अंजन फोन पर मिली जानकारी के बारे में सोच रहा था। पंकज पर उसे कुछ शक तो था। लेकिन वह समझने की कोशिश कर रहा था कि आखिर तरुण काला और पंकज एक साथ क्यों आए होंगे।
उसके मन में सवाल उठा। कहीं पंकज और तरुण तो उस हमले के पीछे नहीं हैं ?
उसने फोन करके अपने आदमी को दोनों पर नज़र बनाए रखने के लिए कहा।

रिस्की लव - 11

अंजन अपने कमरे में आराम कर रहा था। लेकिन उसके मन में वही एक सवाल घूम रहा था।
क्या पंकज और तरुण उस पर हुए हमले के ज़िम्मेदार हैं ?
अगर ऐसा है तो ऐसी क्या वजह है कि दोनों उस पर हमला कर उसे मारना चाहते थे। अंजन उस वजह के बारे में सोचने लगा।
पंकज सुर्वे को वह तबसे जानता था जब उसकी उम्र केवल सोलह साल थी।
वह उत्तर प्रदेश के अपने गांव से भागकर मुंबई आ गया था। उसकी माँ कावेरी के मरने के बाद उसके पिता ने दूसरी शादी कर ली थी। ना तो उसने अपनी नई माँ को स्वीकार किया और ना ही नई माँ ने उसे। घर में रहना मुश्किल हो गया। वह मुंबई आ गया।
साथ में जो पैसे लेकर आया था वह उसी तरह चुक गए जैसे चिलचिलाती धूप में पत्ते पर पड़ी पानी की चंद बूंदें। घर से भागते हुए उसने कुछ सोचा नहीं था। लेकिन अब उसके सामने पेट पालने की समस्या खड़ी हो गई थी। उसने हाथ पैर मारकर किसी तरह एक ढाबे में नौकरी हासिल कर ली थी।
ढाबे पर उसे दो वक्त का खाना, रात में सोने की जगह और कुछ पैसे मिलने की बात हुई थी। इसके लिए उसे सुबह से देर रात तक काम करना पड़ता था। कोई चारा नहीं था इसलिए वह चुपचाप काम कर रहा था। एक महीना बीतने पर अंजन ने मालिक से अपना पैसा मांगा। पैसे की बात सुनते ही मालिक मुकर गया। उसने कहा कि उसे ढाबे पर दो वक्त खाना मिलता है। रात में सोने की जगह। फिर पैसे किस बात के।
मालिक के इस तरह मुकर जाने पर अंजन भी अकड़ गया कि बात पैसों की भी हुई थी। उसे उसके पैसे चाहिए। उस समय ढाबे में कई लोग मौजूद थे। मालिक को उसका इस तरह अकड़ना अच्छा नहीं लगा। उसने अंजन को थप्पड़ मार दिया। गालियां देते हुए ढाबे से निकल जाने को कहा। यह बात अंजन को बुरी लगी। वह दुबला पतला था। पर उसमें ताकत और हिम्मत की कमी नहीं थी।

उसने भी मालिक पर हाथ उठा दिया।
मामला बढ़ गया। मालिक ने ढाबे पर काम करने वाले अपने आदमियों से अंजन को धक्के मार कर बाहर फिंकवा दिया। अपमान और गुस्से में भरा अंजन ढाबे के बाहर सड़क पर बैठा था। तभी एक लड़के ने उसके पास आकर कहा,
"दम है तुम्हारे अंदर। ढाबे के मालिक को अच्छा झापड़ मारा।"
अंजन ने सर उठाकर देखा। उसने उस लड़के को ढाबे पर खाना खाते हुए देखा था। अंजन उस समय कुछ कहने सुनने के मूड में नहीं था। वह चुप रहा। उस लड़के ने अपना हाथ आगे बढ़ाया। अंजन उसे पकड़ कर खड़ा हो गया। उस लड़के ने कहा,
"पंकज सुर्वे नाम है मेरा। अपना गैंग है। तुम्हारे जैसे हिम्मत वाले लड़के मेरे साथ काम करते हैं। तुम भी काम करोगे ?"
अंजन ने अचरज से उसकी तरफ देखा। पंकज उम्र में उससे साल दो साल ही बड़ा होगा। कुछ मोटा सा था। पंकज उसके मन की बात समझ गया। उसने कहा,
"दो लड़के हैं मेरे साथ। अच्छा कमाते हैं। ऐश करते हैं।"
अंजन ने पूँछा,
"काम क्या करते हो ?"
"बड़े हुनर का काम है। कुछ दिन सीखने में लगते हैं। पर तुम जल्दी सीख लोगे।"
अंजन कुछ समझ नहीं पा रहा था। उसने कहा,
"साफ साफ बताओ।"
"पॉकेट मारने का काम...."
उसकी बात सुनकर अंजन ने पीछे हटते हुए कहा,
"ना...ना.... मैं ईमानदारी से काम करूँगा।"
उसकी बात सुनकर पंकज हंसकर बोला,
"तुम्हारी मर्जी। देख तो लिया ईमानदारी से काम करके। सिर्फ यह ढाबेवाला ही नहीं, दुनिया के ज्यादातर लोग ऐसे ही हैं। फिर भी तुम्हारा मन सड़क पर भटकने का है तो भटको।"
अपनी बात कहकर पंकज चला गया।
अंजन ने दोबारा कोशिश शुरू की। कई जगह काम किया। पर हर जगह सबने दबाने की कोशिश की। अंजन को पंकज की बात याद आई कि इस दुनिया में ज्यादातर लोग उस ढाबे के मालिक जैसे ही हैं। लोगों की ज्यादतियों ने उसके मन में गुस्सा भर दिया। वह सोचने लगा कि उस दिन पंकज की बात मान लेता तो अच्छा होता।
ढाबे वाली घटना को दो महीने बीत चुके थे। किस्मत उसे दोबारा पंकज से मिलवाना चाहती थी। एक दिन वह चौपाटी पर एक ठेले पर खड़ा भेलपुरी खा रहा था। तभी पंकज दो लड़कों के साथ वहाँ आया। बड़े स्टाइल से भेलपुरी वाले से बोला,
"मेरे लड़कों के लिए स्पेशल बनाओ।"
उसे देखकर अंजन उसके पास जाकर बोला,
"पंकज भाई...पहचाना ?"
पंकज ने एक उचटती सी नज़र डालकर कहा,
"कौन हो ?"
अंजन ने याद दिलाया।
"भाई वो ढाबे के मालिक से मेरा झगड़ा हुआ था। मैंने भी उसे थप्पड़ मार दिया था। तब ढाबे के बाहर आप मिले थे। आपने कहा था कि आप मुझे अपने गैंग में मिला लेंगे। तब मैंने मना कर दिया था।"
पंकज ने एक बार फिर उसकी तरफ देखा। फिर बोला,
"तो अब क्या चाहते हो ?"
"भाई उस समय गलती हो गई थी। अब मैं आपके साथ काम करूँगा।"
"तमाशा है क्या ? अपनी मर्जी हुई मना कर दिया। अपनी मर्जी हुई तो हाँ।"
कहकर पंकज अपने लड़कों के पास चला गया।

उनसे कुछ बातें करने लगा। अंजन इससे हतोत्साहित नहीं हुआ। वह उसके पास जाकर बोला,
"भाई सुनिए...."
पंकज ने उसे अनसुना कर दिया। अंजन ने एक बार फिर कहा,
"भाई मन लगाकर काम करूँगा।"
पंकज के साथ बात कर रहा एक लड़का उसकी तरफ घूम कर तैश में बोला,
"भाई को परेशान क्यों कर रहा है बे.."
पंकज ने उस लड़के को रोकते हुए अंजन से कहा,
"ईमानदारी का भूत उतर गया तुम्हारा। लेकिन अब मुश्किल है। काम सीखने में समय लगता है।"
"भाई यकीन मानिए। मैं अधिक समय नहीं लूँगा। बस अपने साथ रख लीजिए। आपने सही कहा था कि दुनिया अच्छी नहीं है। सब फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।"
पंकज कुछ देर सोचकर बोला,
"ठीक है...पर जब तक सीख नहीं जाते अपना खर्च खुद उठाना।"
अंजन कुछ सोचकर बोला,
"मेरे पास इस समय ना पैसे हैं ना काम। पर भाई मैं जल्दी ही सीख लूँगा। इस बीच खाने पर जो खर्च होगा, बाद में कमाई से उतार दूँगा।"
पंकज ने उसे वहीं रुकने को कहा। अपने साथियों को एक तरफ ले जाकर कुछ बात की। उसके बाद आकर बोला,
"ठीक है...कल सुबह यहीं मिलना। कल से तुम्हारी ट्रेनिंग शुरू।"

जल्दी ही अंजन पॉकेट मारने में उस्ताद हो गया। उसकी महारत इतनी थी कि उसने पंकज और दोनों लड़कों को भी इसमें पीछे छोड़ दिया था। लेकिन एक बार उनके साथियों में से एक पॉकेट मारते हुए पकड़ा गया। कुछ दिनों के लिए पॉकेट मारने का काम बंद हो गया।
जुर्म के रास्ते में कदम रख चुका अंजन अब कुछ बड़ा करना चाहता था। ऐसा कुछ जिससे लोगों पर अपना रौब जमा सके। उसकी दोस्ती राजन के गैंग के एक लड़के से हो गईं थी। वह लड़का राजन के लिए रेड़ी खोमचे वालों से वसूली करता था। अंजन ने उसे वसूली करते देखा था। तब सब उसे सलाम करते थे। सत्रह साल के अंजन के लिए यह बड़ी शान की बात थी। उसने अपने दोस्त से कहा कि राजन भाई से उसकी सिफारिश कर दे।
पंकज ने अंजन की मदद की थी इसलिए वह उसे छोड़ना नहीं चाहता था। राजन के गैंग में शामिल होते समय उसने पंकज की भी सिफारिश की। उस समय राजन को नकली शराब की बोतलें एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाने के लिए लड़कों की ज़रूरत थी। अंजन की बातचीत से उसे यकीन हो गया कि वह उसके काम आ सकता है।
धीरे धीरे अंजन ने तरक्की कर ली। अब वह वसूली करने व लोगों को धमकाने का काम करता था। पंकज अब उसके पीछे सपोर्ट के लिए रहता था।
जब अंजन राजन के गैंग को छोड़कर रघुनाथ परिकर के लिए काम करने लगा तो वह पंकज को भी अपने साथ ले आया था। अब स्थिति पलट चुकी थी। उन दोनों में अंजन लीडर की भूमिका में था। पंकज उसे भाई कहने लगा था।
मानवी से शादी करने के बाद अंजन जब रघुनाथ परिकर के बिज़नेस का मालिक बन गया तो उसने भी सफेदपोश बिज़नेस मैन का चोला पहन लिया। पंकज को सिक्योरिटी के नाम पर अपने साथ रखता था। पर उससे अपने काले धंधों के काम लेता था।

समय के साथ वह पंकज पर कम भरोसा करने लगा था। बहुत से काम ऐसे थे जिनसे उसने उसे दूर रखा था।

चाहे वह रघुनाथ परिकर और उसके भाई का एक्सीडेंट कराने का काम हो या फिर मानवी को रास्ते से हटाने का काम।
इन दोनों कामों में उसने तरुण काला की सहायता ली थी।

पंकज को दूर रखने के पीछे कारण यह था अंजन अपने सारे राज़ एक ही आदमी को नहीं बताना चाहता था। वह समझ चुका था कि ऐसा करना उसके लिए मुश्किल पैदा कर सकता है। पंकज ने उसके साथ ही सफर शुरू किया था। लेकिन अपनी सूझबूझ से वह तो आगे बढ़ गया था जबकी पंकज वहीं रह गया था।
अंजन को लगता था कि पंकज को अपने मामलों से दूर रखकर वह अपने लिए पैदा होने वाले खतरे को दूर कर रहा है।
पर अब उसे लग रहा था कि उससे चूक हो गई। उसे पंकज को अपने मामलों से दूर रखना चाहिए था पर अपनी नज़रों से दूर नहीं होने देना चाहिए था। अपनी जीत के नशे में डूबा हुआ वह लापरवाह हो गया। उसने पंकज पर ध्यान देना ही छोड़ दिया।
अब उसका ध्यान इस बात पर जा रहा था। उस दिन शिमरिंग स्टार्स जाते हुए अंजन ने पंकज को मना किया था कि वह अकेला चला जाएगा। पर पंकज ने कहा कि वह अपने दो आदमियों के साथ दूसरी गाड़ी में साथ साथ चलेगा। उसके साथ उसकी गाड़ी में नहीं बैठेगा। उसने कहा था कि वह उसे और मीरा को अकेले रहने देना चाहता है।
अंजन सोच रहा था कि क्या उसने ही हमलावर को बताया होगा कि वह अपने बीच हाउस जा रहा है। वह उसके साथ केवल इसलिए गया होगा ताकी बाद में कोई उस पर उंगली ना उठाए।
अंजन सही बात जानने के लिए परेशान हो उठा।

रिस्की लव - 12

तरुण काला फिश एक्सपोर्ट के बिज़नेस में इस समय एक माना हुआ नाम बन गया था। बिज़नेस तरुण काला के नाम पर था लेकिन उसमें पैसा अंजन ने लगाया था।
रघुनाथ परिकर की तरह अंजन भी उन लोगों पर नज़र रखता था जो उसके काम आ सकते थे। जब उसने तरुण के बारे में सुना तो उसे अपने लिए इस्तेमाल करने की योजना बनाई।
एक पार्टी में तरुण की किसी से बहस हो गई थी। बहस इतनी बढ़ गई कि गुस्से में तरुण ने एक ज़ोरदार मुक्का उसकी नाक पर मार दिया। वह लड़का गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस केस बन गया। उस पर गैर इरादतन हत्या के प्रयास का मामला दर्ज़ किया गया। तीन सालों की सजा हो गई।
तरुण जेल से तो जल्दी छूट गया पर उसका शूटिंग का करियर रुक गया। जब वह हादसा हुआ था उसका चयन राष्ट्रीय टीम के लिए होने की पूरी संभावना थी। लेकिन उसके जेल चले जाने से यह मौका उससे छिन गया। केस के दौरान उसके वकील ने कई बार दलील दी थी कि झगड़ा बढ़ाने में तरुण से अधिक उस दूसरे लड़के का हाथ था। वही तरुण को उकसा रहा था। पर तरुण ने जिस पर वार किया था वह एक ‌अमीर और रसूखदार घर का लड़का था। तरुण के वकील की बात नहीं सुनी गई। तरुण को सजा हो गई।
जेल से बाहर आने के बाद उसका सबकुछ बदल चुका था।

रिश्तेदार और दोस्तों ने मुंह फेर लिया था। जो कुछ उसके साथ हुआ उससे उसे समझ आ गया था कि पैसों की क्या अहमियत है। उस समय वह बहुत हताश था।
अंजन ने शुरू से ही उसके केस को फॉलो किया था। उसके जेल से छूटने के बाद उस पर निगरानी रखनी शुरू कर दी। तरुण की हताशा का फायदा उठाकर उसे एक मोहरे की तरह इस्तेमाल किया। उसने उसे मिलने के लिए बुलाया। पैसों के लिए तरुण उसके हाथ की कठपुतली बन गया।
हाईवे पर रघुनाथ परिकर की कार को रोककर पहले दोनों भाइयों और ड्राइवर को गोली मारी। उसके बाद खड़ी हुई कार को ट्रक से कुचल दिया।
अंजन चाहता था कि रघुनाथ परिकर और उसके भाई का बचना नामुमकिन हो जाए। इसलिए गोलियों से मरवाने के बाद हादसे का रूप देने के लिए ट्रक से कुचलवा दिया। अंजन ने अपनी पैठ दूर तक बना रखी थी। इसलिए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट उसके अनुकूल आई। सबकुछ जल्दी जल्दी हुआ और दोनों भाइयों और ड्राइवर का दाह संस्कार भी कर दिया गया।

तरुण ने बड़ी सफाई से अंजन का काम किया था। उसकी काबिलियत समझकर अंजन ने उसका दूसरा उपयोग भी सोच लिया।
अंजन ने उसके नाम पर फिश एक्सपोर्ट बिज़नेस में पैसा लगाया। फिश एक्सपोर्ट बिज़नेस के पीछे मानव तस्करी का कारोबार चल रहा था। मछलियों के साथ इंसानों को खाड़ी देशों में पहुँचाया जाता था।

तरुण को अंजन ने एक और महत्वपूर्ण कार्य सौंपा। मानवी को रास्ते से हटाने का।

अपने दोनों भाइयों की मौत के सदमे से मानवी एकदम चुप हो गई थी। कहीं आना जाना छोड़कर उसने अपने आप को घर में कैद कर लिया था। पहले अंजन से अक्सर झगड़ा करती थी। लेकिन अब ‌अंजन को पता भी नहीं चलता था कि वह उसके साथ उसी घर में रहती है। अंजन इस स्थिति से बहुत खुश था।
पैसा आ गया था। उसके साथ साथ एक क्लास भी आ गया था। अब वह मंहगे डिज़ाइनर कपड़े पहनता था। बड़ी बड़ी पार्टियों में जाता था। जहाँ कई लड़कियां उसका साथ पाने के लिए उसके आगे पीछे तितली की तरह मंडराती थीं। अंजन का कई लड़कियों के साथ अफेयर था। पर किसी के साथ भी रिश्ते को लेकर वह गंभीर नहीं था।
मानवी तो अब उसके लिए घर में पड़े सामान से अधिक हैसियत नहीं रखती थी।

मानवी का स्कूल के समय का एक दोस्त था निर्भय वाधवा। अपना कॉलेज पूरा करने के बाद उसने अपने फैमिली बिज़नेस की एक ब्रांच सिंगापुर में खोली थी। लेकिन वहाँ खास सफलता नहीं मिल पाई थी। इसलिए वह सब समेट कर वापस भारत आ गया था। भारत में मुंबई में उसने एक नई शुरुआत की।
निर्भय का स्कूल के समय मानवी पर क्रश था। पर जल्दी ही समझ गया कि उसकी दाल नहीं गलने वाली है। वह पीछे हट गया। बहुत समय तक वह मानवी के संपर्क में रहा। फिर उसके साथ टच छूट गया।
भारत आने के बाद उसने मानवी की खोज खबर ली। उसके बारे में पता करके उससे मिला।

निर्भय के मन में अभी भी मानवी के लिए भावना थी। मानवी को उस हाल में देखकर उसे दुख हुआ। उसने उसे दुख से बाहर निकालने की कोशिश शुरू कर दी।
अंजन से मिले धोखे, अपने भाइयों के अचानक चले जाने से मानवी एक तरह के अवसाद में चली गई थी। वह प्यार और अपनेपन के लिए तरस रही थी। निर्भय की दोस्ती में उसे वह सब मिला। धीरे धीरे वह खुलने लगी। उसके साथ घूमने जाती, पार्टी करती थी। वह फिर खुश रहने लगी थी।
अपनी ज़िंदगी में वापस आने के बाद मानवी ने अंजन की हरकतों पर ध्यान देना शुरू किया। उसे गुस्सा आता था कि जो कुछ उसके भाइयों के बाद उसे मिलना था उस पर अंजन ने कब्ज़ा कर लिया है। अब उसकी उपेक्षा करके उसकी दौलत पर ऐश कर रहा है।
मानवी अपना हक पाने के लिए बेचैन हो उठी।
अंजन ने सोचा था कि बिना कोशिश किए ही मानवी नाम का कांटा उसकी राह से हट गया है। मानवी अब सारी ज़िंदगी अपने दुख में घुलती रहेगी और एक दिन इस दुनिया से चली जाएगी। लेकिन मानवी ना सिर्फ अपने दुख से बाहर निकल कर आई बल्की नागिन की तरह फुंफकार कर उससे अपना हक मांग रही थी।
वह रघुनाथ परिकर की वसीयत को आधार बनाकर उससे अपना अधिकार वापस मांग रही थी। वसीयत के अनुसार अगर रघुनाथ परिकर की मृत्यु हो जाती है तो उसकी सारी संपत्ति उसके छोटे भाई यदुनाथ परिकर और बहन मानवी परिकर को बराबरी से मिलेगी। यदुनाथ परिकर की मृत्यु होने पर उसका हिस्सा भी मानवी को ही मिलेगा।
एक क्लॉज़ यह भी था कि यदि मानवी शादी कर लेती है और अगर वह जायदाद की ज़िम्मेदारी अपने पति को देना चाहे तो वह ऐसा कर सकती है।

अंजन को अंतिम बात अपने फायदे की लगी। उसने मानवी की स्थिति का लाभ उठाकर उन कागज़ों पर दस्तखत ले लिए थे जिनके मुताबिक उसने सबकुछ अंजन की देखरेख में छोड़ दिया था।
अब अंजन ने मानवी को भी राह से हटाने का फैसला कर लिया।

मानवी और निर्भय घूमने के लिए लोनावला गए थे। वहाँ उनका कैंपिंग का कार्यक्रम था। उनके पीछे पीछे तरुण भी लोनावला पहुँच गया। तरुण ने सही मौका देखकर दोनों की हत्या कर दी और उनकी लाश इंद्रायणी नदी में बहा दी।
लोगों के पूँछने पर उसने बता दिया कि उन दोनों की पटी नहीं इसलिए वह सबकुछ छोड़कर चली गई।

तरुण के साथ काम करते हुए अंजन समझ गया था कि उसमें इतनी हिम्मत नहीं है कि उसके राज़ का फायदा उठाने की कोशिश करे। उसने अपने तरीके से कई बार तरुण को एहसास दिला दिया था कि उसने अगर कभी भी कोई हिमाकत की तो अंजाम ठीक नहीं होगा।
लेकिन पंकज और तरुण के एकसाथ आने की खबर ने उसे परेशान कर दिया था।

तरुण काला को अब पूरा यकीन हो गया था कि पंकज उसके साथ होने की बात तो कर रहा है, लेकिन वह अपनी एक अलग खिचड़ी पका रहा है। उस दिन बीच हाउस में जो घटा उसके बारे में वह उसे पूरी बात नहीं बता रहा है।

अंजन के खिलाफ साजिश रचने के लिए पंकज‌ खुद तरूण के पास आया था। उसका कहना था कि अंजन ‌ने उसका इस्तेमाल किया है। अब काम निकल जाने पर उसे पीछे ढकेल दिया है। वह इस ज्यादिती का बदला लेना चाहता है।
पंकज यह भी जानता था कि तरुण भी अंजन से नाखुश है। अंजन उसके ज़रिए कबूतरबाज़ी करवा रहा था। सारा खतरा केवल तरुण का था क्योंकी कागज़ों पर कहीं भी अंजन का नाम नहीं था। लेकिन जो भी आमदनी होती थी उसका बहुत छोटा सा हिस्सा ही तरुण को मिल पाता था।
तरुण नाखुश तो था पर अंजन से सीधे टकराने की हिम्मत उसके भीतर नहीं थी। वह अंजन की ताकत को जानता था। इसलिए जब पंकज आकर उससे मिला तो उसे इस बात का हौसला मिला कि दोनों मिलकर अंजन से बदला ले सकते हैं।
पंकज और तरुण आपस में मिल गए। दोनों अभी इस बात पर विचार कर रहे थे कि क्या करें तभी अंजन के बीच हाउस शिमरिंग स्टार्स में किसी ने उस पर हमला कर दिया।
हमले के बाद पंकज और तरुण उस टूटे से मकान में मिले। दोनों को ही आश्चर्य हो रहा था कि उन दोनों के अलावा अंजन का तीसरा दुश्मन कौन हो सकता है।
तरुण को पंकज की उस बात पर यकीन नहीं हुआ था कि जब वह मीरा को लेकर जा रहा था तो किसी ने उस पर हमला कर उसे बेहोश कर दिया। वह मीरा को लेकर कहीं चला गया।
आज पंकज के चेहरे के भाव देखकर उसे पूरा यकीन हो गया था कि कुछ ऐसा है जो पंकज उससे छुपाकर कर रहा है।
तरुण ने शुरू से ही पंकज पर पूरा भरोसा नहीं किया था। इसलिए अंजन के जो राज़ उसके पास थे उसे नहीं बताए थे। वह देखना चाहता था कि पंकज अंजन को रास्ते से हटाने की क्या योजना बनाता है। उसका प्लान था कि पहले पंकज के साथ मिलकर अंजन को कमज़ोर करे। उसके बाद उसके राज़ के ज़रिए ब्लैकमेल करे।
तरुण सोच रहा था कि जिसने भी अंजन पर हमला किया है उसने उसका काम आसान कर दिया है। अंजन हमले में बच तो गया है लेकिन कमज़ोर हो गया है। तरुण अब अपना खेल शुरू कर सकता है।
तरुण के पास अंजन के दो महत्वपूर्ण राज़ थे। उसकी इस कमज़ोर हालत का फायदा उठाकर वह अपने सारे नुकसान को पूरा कर सकता है।
वह योजना बनाने लगा कि किस तरह से अंजन को ब्लैकमेल किया जाए।

रिस्की लव - 13

विनोद के सारे खबरी कुछ भी पता लगाने में नाकाम रहे थे। नफीस ने उससे कहा था कि वह दिल्ली से वापस आ जाए। कल रात ही वह दिल्ली से लौटकर आया था।
इस समय वह नफीस के ऑफिस में बैठा था।‌ उसने नफीस को अपने दिल्ली के अनुभव के बारे में बताते हुए कहा,
"सर मुकेश का कुछ भी पता नहीं चला। मेरे सबसे अच्छे खबरी भी कुछ पता नहीं लगा पाए। ना जाने मुकेश दिल्ली में कहाँ खो गया ?"
नफीस भी इसी प्रश्न पर विचार कर रहा था। उसके मन में एक बात आ रही थी। उसने विनोद से कहा,
"विनोद....अब मुझे लग रहा है कि शायद मुकेश दिल्ली गया ही नहीं।

"
उसकी बात सुनकर विनोद ने कहा,
"आपका मतलब है कि उसके दिल्ली की ट्रेन में चढ़ने की बात गलत थी।"
"नहीं... मुझे लगता है कि वह अपने परिवार के साथ मुंबई से दिल्ली के रास्ते में ही कहीं उतर गया।"
विनोद को उसकी बात में दम तो लगा पर उसके मन में एक सवाल था। उसने पूँछा,
"एक बात समझ नहीं आ रही है सर कि अगर वह दिल्ली आने वाली ट्रेन में चढ़ा था तो बीच रास्ते में क्यों उतर गया ?"
नफीस ने सोचकर कहा,
"मुझे लगता है कि उसे इस बात का पता चल गया था कि दिल्ली की ट्रेन में चढ़ते हुए उसे देख लिया गया है। ऐसे में उसे पूरी उम्मीद थी कि दिल्ली में उसे खतरा हो सकता है। इसलिए बीच में ही उतर गया।"
"हाँ सर यह हो सकता है।"
नफीस ने एक और संभावना जताई,
"ऐसा भी हो सकता है कि पहले भागने की जल्दी में दिल्ली की ट्रेन में चढ़ गया हो। पर जब ट्रेन में इत्मीनान से सोचा हो तो दिल्ली जाना ठीक ना लगा हो। इसलिए रास्ते में किसी स्टेशन पर उतर कर कहीं और चला गया हो।"
विनोद नफीस की बात पर विचार करने लगा। उसे दोनों ही बातें सही समझ आ रही थीं। उसने कहा,
"सर मुकेश किसी बड़ी मुश्किल में है। तभी अचानक अपने परिवार को लेकर भागा है।"
"इसमें तो किसी तरह के शक की बात ही नहीं है विनोद। लेकिन मैं सोच रहा हूँ कि अचानक उस पर इतना बड़ा खतरा कैसे आ गया। वह अंजन को हॉस्पिटल ले गया था। तब तक किसी ने उसे कुछ नहीं कहा। तो फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि उसे अपनी और अपने परिवार की जान बचाने के लिए भागना पड़ा। अंजन के ऊपर हुआ हमला बहुत उलझा हुआ है। ना जाने क्यों अब मुझे पंकज पर शक हो रहा है।"
"सर किस बात का शक हो रहा है आपको ?"
नफीस कुछ देर बड़ी गंभीरता से सोचता रहा। विनोद उत्सुक था कि वह क्या कहना चाहता है। नफीस ने कहा,
"यही कि हमला करवाने में पंकज‌ का हाथ ही है ? सोचो उस दिन हमलावरों को कैसे पता चला होगा कि अंजन मीरा को लेकर अपने बीच हाउस गया है। हम अंदाजा लगा रहे थे कि अंजन के कहने पर पंकज मीरा को लेकर वहाँ से भाग गया। पर ऐसा भी हो सकता है कि मीरा को हमलावर ले गया हो। पंकज पहले ही वहाँ से भाग गया हो।"
"हाँ....सर या फिर जैसा हमने सोचा था मीरा पंकज के पास हो। किसी खास मकसद से उसने मीरा को अपने कब्जे में रखा हो।"
"हो सकता है विनोद। मुझे तो लगता है कि दिल्ली तक की दौड़ बेकार ही की। हमें पंकज पर नज़र रखनी चाहिए थी।"
नफीस एक बार फिर रुका। कुछ देर मन में सोचने के बाद बोला,
"जो हुआ उसे भूलकर अब ऐसा करो कि पंकज के बारे में पता करो। दूसरी बात उस वार्ड ब्वॉय के ज़रिए पता करो कि अब अंजन का क्या हाल है ?"
"ठीक है सर। आपको पता चला कि तरुण कौन है ?"
नफीस ने तरुण के बारे में जो पता किया था सब विनोद को बता दिया। उसने आगे कहा,
"अगर पंकज के बारे में पता चलेगा तो उसके और तरुण के संबंध के बारे में भी पता चल जाएगा।

तुम अब पंकज के बारे में पता करो। यह भी पता करो कि अंजन क्या अभी भी हॉस्पिटल में है।"
विनोद यह कहकर चला गया कि जल्दी ही सब पता करके मिलता है।

नर्स ने अंजन की ड्रेसिंग करने के बाद उसे दवा खिलाते हुए कहा,
"सर आपका घाव अब बहुत हद तक भर गया है। दो चार दिन में पूरी तरह से ठीक हो जाएगा। डॉक्टर भी कह रहे थे कि आपकी सारी रिपोर्ट्स नॉर्मल हैं।"
दवा खिलाकर नर्स चली गई। अंजन भी अब अच्छा महसूस कर रहा था। इसलिए वह जल्दी ही पहले जैसे अपने काम पर जाने को बेताब था। उस पर किसने हमला किया था यह जानने के लिए वह छटपटा रहा था।
इससे भी ऊपर एक सवाल उसके मन को अशांत किए हुए था।
'मीरा को कौन ले गया ?'
मीरा को लेकर उसका मन व्याकुल था। मानवी को उसने सिर्फ सीढ़ी की तरह इस्तेमाल किया था। लेकिन मीरा से उसने सच्चा प्यार किया था।
अंजन ने अफेयर्स तो कई किए थे लेकिन किसी के साथ भी वह रिश्ते को आगे बढ़ाने में दिलचस्पी नहीं रखता था। अपने मन बहलाव तक ही उसका हर अफेयर सीमित था। जैसे ही उसका मन भर जाता वह आगे बढ़ जाता था। पिछले कई सालों से यही चल रहा था। पर अब अंजन को महसूस होने लगा था कि उसे रिश्ते में एक ठहराव चाहिए।
मीरा की तरफ भी वह महज़ उसकी खूबसूरती देखकर आकर्षित हुआ था। धीरे धीरे जब उसने मीरा को जानना शुरू किया तो पाया कि जिस ठहराव के बारे में वह सोच रहा था वह मीरा में ही मिल सकता है। मीरा के साथ अपने रिश्ते को लेकर वह गंभीर हो गया। उसने मीरा से अपने दिल की बात भी कह दी। वह राज़ी भी हो गई थी।‌
वह अपने रिश्ते को पक्का करने के लिए उसे अंगूठी पहना रहा था उसी समय गोली चली और फिर सब गड़बड़ हो गया।

पंकज अपनी कार में नेशनल हाईवे 17 पर था। वह मुंबई से कोलाड की तरफ जा रहा था। अब उसे अंजन से डर लगने लगा था। अगर उसे उसकी साजिश का पता चल गया तो दिक्कत हो जाएगी। अंजन की हर एक चीज़ पर कब्ज़ा कर लेने की उसकी चाहत धूल में मिल जाएगी। वह बर्बाद हो जाएगा।
अंजन को लेकर उसके मन में गुस्से का एक ज्वालामुखी दहक रहा था। जिस तरह से अंजन उसे पीछे छोड़कर आगे बढ़ गया था उसके कारण वह मन ही मन उससे जलने लगा था। उसे लगता था कि वही था जिसके कारण ढाबे पर काम करने वाला अंजन आज मुंबई का सफेदपोश बिज़नेस मैन बनकर बैठा था। सब उसकी इज्ज़त करते थे। यह बात उसकी बर्दाश्त की सीमा से बाहर होती जा रही थी।
उसने तय कर लिया था कि अब और नहीं सहेगा।‌ जो कुछ अंजन ने पाया है उसमें उसकी भी मेहनत है। उसे भी उसका हिस्सा मिलना चाहिए था। लेकिन अगर अंजन ने उसे उसका हक नहीं दिया तो अब वह उससे उसका हक भी छीन लेगा। उसकी हर एक चीज़ पर कब्ज़ा कर लेगा।
वह बिना यह जाने आगे बढ़ रहा था कि कोई मुंबई से ही उसके पीछे लगा है।

अंजन के हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने की खबर नफीस को मिल गई थी।

अंजन पर हुए हमले की खबर मीडिया तक नहीं पहुँची थी। यह भी अपने आप में एक आश्चर्यजनक बात थी। नफीस सोच रहा था कि आखिर ऐसा हुआ कैसे और क्यों ?
हमला अचानक हुआ था। अंजन ज़िंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहा था। फिर कौन था जिसने इस खबर को बाहर जाने से रोका ?
आज मीडिया में सनसनीखेज न्यूज़ ब्रेक करने की होड़ है। फिर ऐसा कैसे संभव हुआ कि यह खबर किसी मीडिया हाउस के पास नहीं पहुँच पाई। जबकी ऐसी खबरों के लिए कई रिपोर्टर अपने आँख कान हमेशा खोलकर रखते हैं। उसे खुग इस हमले की खबर मिल गई थी। लेकिन उसका इरादा इस खबर को ब्रेक करने का नहीं था।
इसका एक ही कारण हो सकता था कि मीडिया को यह खबर ब्रेक करने से रोका गया। ऐसा करने वाला कौन था और उसने ऐसा क्यों किया ?
ऐसा करने वाले की पहुँच अच्छी खासी हो सकती थी।‌ पंकज इस स्थिति में हो ऐसा संभव नहीं था।
अंजन के चरित्र ने अब तक नफीस को बहुत आश्चर्यचकित किया था। एक मामूली से गुंडे से मुंबई की मानी हुई हस्तियों में से एक होने का सफर किसी फिल्मी कहानी सा दिलचस्प था।
पर उस पर हुए इस हमले ने तो उसे उलझा कर रख दिया था। उसे लग रहा था कि अंजन की कहानी के कुछ और दिलचस्प पन्ने हैं जो उसकी नज़र में नहीं आए थे।
उन पन्नों को पलटने की उसकी इच्छा तीव्र हो उठी।

पंकज की कार एक मकान के सामने जाकर रुकी। कार से उतर कर उसने इधर उधर देखा। गली में कोई दिखाई नहीं पड़ा। उसने मकान का दरवाज़ा खटखटाया।‌ दरवाज़ा खुला और पंकज अंदर चला गया। उसके अंदर जाते ही दरवाज़ा बंद हो गया।
पंकज आंगन में खड़ा किसी से कुछ बात कर रहा था। कुछ देर बात करने के बाद वह आदमी आंगन में बनी सीढ़ियों से उसे ऊपर ले गया। एक कमरे के दरवाज़े पर ताला लगा था। उस आदमी ने ताला खोल दिया। उसके बाद ताला चाभी लेकर सीढ़ियों से नीचे उतर गया।
पंकज ने दरवाज़े की कुंडी खोली और दरवाज़ा खोलकर अंदर चला गया।
पंकज का पीछा करने वाले ने अपनी कार एक गली पहले ही छोड़ दी थी। उसके बाद ढूंढ़ते हुए उस गली में आ गया था जहाँ पंकज की कार खड़ी थी। उसने एक बार उस मकान को ध्यान से देखा उसके बाद अपना फोन निकाल कर अंजन को फोन किया।

विनोद गली के मोड़ पर खड़ा उस पीछा करने वाले को देख रहा था। पंकज के पीछे उस आदमी के अलावा विनोद भी आया था। विनोद ने नफीस को फोन करके बताया कि पंकज का पीछा कोई और भी कर रहा है। उसने संभावना जताई कि शायद वह यह काम अंजन के लिए कर रहा है।

रिस्की लव - 14

पंकज जिस कमरे में घुसा था उसमें मीरा कैद थी। उसे देखते ही मीरा गुस्से से उबलने लगी। लेकिन वह कुछ कर नहीं सकती थी। वह फर्श पर बैठी हुई थी। उसके हाथ पैर बंधे हुए थे। मुंह पर भी पट्टी बंधी हुई थी। वह बस अपनी विवशता में छटपटा रही थी।
पंकज अंदर गया। एक कुर्सी लेकर मीरा के सामने बैठ गया।

उसने मीरा के चेहरे पर हाथ फेरा। मीरा ने गुस्से से अपना सर झटका और कुछ पीछे खिसक गई। उसकी इस दशा पर पंकज हंसने लगा। वह उठकर खड़ा हो गया। कमरे में इधर से उधर टहलने लगा। उसके बाद आकर फिर कुर्सी पर बैठ गया। इस बार मीरा के बाल पकड़ कर बोला,
"अंजन जिसे भी अपना समझता है उस पर मैं अपना अधिकार कर लूँगा। शुरुआत तुम्हें उससे छीनकर कर दी है। कुछ दिनों में तुम्हें अपना भी बना लूँगा।"
उसकी बात सुनकर मीरा ने उसकी तरफ गुस्से से देखा। पंकज एक बार फिर उसकी विवशता को देखकर हंसा। वह उठा और कमरे से बाहर आ गया। पहले की तरह दरवाज़ा बंद करके कुंडी लगा दी।
नीचे आंगन में आकर उस आदमी से बोला,
"इसे यहाँ से हटाने का इंतज़ाम जल्दी करो। अंजन हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होकर अपने घर आ गया है। मैं उससे मिला था। मुझे लगता है कि उसे मुझ पर कुछ शक है।"
उसके साथी ने कहा,
"इंतज़ाम हो गया है। आज रात को ही पूना के लिए रवाना कर दूँगा। आप फिक्र ना करें।"
"मैं तब तक यहीं ठहरूँगा। खाने की व्यवस्था करो।"
"ठीक है भाई...."
यह कहकर वह कमरे के दरवाज़े पर ताला लगाने चला गया।

खाना खाकर पंकज उसी मकान के एक कमरे में आराम करने लगा। यह मकान पंकज का ही था। अंजन इस मकान के बारे में जानता था। इसलिए पंकज मीरा को पूना के एक मकान में भिजवा रहा था। वह मकान उसने कुछ ही दिनों पहले खरीदा था। इसकी जानकारी अंजन को नहीं थी।
पंकज लेटे हुए हमले वाले दिन को याद करने लगा। उस दिन अंजन ने दिन में अपने रिज़ार्ट की ज़मीन का भूमिपूजन किया था। बहुत से लोगों को बुलाया था। मीरा को खासतौर पर लंदन से बुलवाया था। उन लोगों को भी बुलवाया था जो बस कुछ दिनों पहले ही अंजन से जुड़े थे। लेकिन जिसके साथ वह फुटपाथ से उठकर महल तक पहुँचा था उसे नज़रअंदाज़ कर दिया था।
अंजन के लिए पंकज की गिनती अब उसके लिए काम करने वाले आदमियों में होती थी। उस दिन पंकज को बहुत बुरा लगा था। रिज़ार्ट की ज़मीन हासिल करने में उसकी भी मेहनत थी। उस दिन भूमिपूजन के समय वह नौकरों की तरह आने वाले मेहमानों की आवभगत कर रहा था।
शाम को अंजन ने उसे आदेश दिया कि वह मीरा को शिमरिंग स्टार्स ले जाना चाहता है। केयर टेकर से कहकर वहाँ कुछ इंतजाम करा दे। मीरा शराब नहीं पीती है। इसलिए उसके लिए नॉन अल्कोहॉलिक शैंपेन की व्यवस्था करवा दे।
पंकज सारी व्यवस्था करते हुए अंदर ही अंदर सुलग रहा था। वह जानता था कि मीरा को लेकर अंजन गंभीर है। वह उसे प्यार करता है। मीरा के उसके जीवन में आने के बाद से वह बहुत खुश रहने लगा था। पंकज के मन में कई बार आया था कि वह मीरा को उससे अलग कर दे।
उस दिन अंजन ने मीरा से कहा था कि वह वहीं से उसे एयरपोर्ट छोड़ देगा। इसलिए मीरा ने अपना बैग अंजन की गाड़ी में रखवा दिया था।

अंजन का प्लान था कि वह और मीरा बीच हाउस में देर रात तक बातें करेंगे। फ्लाइट का समय होने से पहले वह उसे एयरपोर्ट ले जाकर फ्लाइट में बैठा देगा।
पंकज ने वो सारे इंतज़ाम तो किए ही थे जो अंजन ने कहे थे पर उसने अपनी तरफ से भी कुछ इंतज़ाम किया था। वह बहुत दिनों से ऐसे मौके की तलाश में था जब अंजन को नुक्सान पहुँचाया जा सके। इसलिए वह तरुण से भी मिला था। लेकिन उस दिन अचानक एक अच्छा मौका उसे मिल गया।
अंजन मीरा को लेकर अपने बीच हाउस जा रहा था। इस बात की जानकारी किसी को नहीं थी सिवाय पंकज के। उसने अपना दिमाग दौड़ाना शुरू किया। अपने दो खास आदमियों के साथ वह यह सोचकर बीच हाउस गया था कि अंजन तो मीरा के साथ मस्त रहेगा। वह लापरवाह होगा। बीच हाउस पर उसके दोनों साथियों के अलावा केयर टेकर और मुकेश होंगे।
उसने सोचा था कि बारह बजे के आसपास जब अंजन और मीरा निश्चिंत होकर आराम कर रहे होंगे तो वह केयर टेकर और मुकेश को ठिकाने लगा देगा। उसके बाद अपने दोनों साथियों के साथ अंजन को खत्म कर देगा।
मीरा को खत्म करने का उसका इरादा नहीं था। वह अंजन की बाकी चीज़ों की तरह मीरा पर भी अपना हक जमाना चाहता था।
इस योजना के अन्तर्गत वह अपने दोनों साथियों के साथ बाहर बैठा शराब पी रहा था। तीनों इस बात का इंतज़ार कर रहे थे कि कुछ देर में जब अंजन और मीरा आराम करने लगेंगे तो अपनी कार्यवाही शुरू करेंगे।
लेकिन अभी दस बजकर बीस मिनट हुए थे कि किसी ने अचानक बीच हाउस पर हमला कर दिया। उसके दोनों साथी तो मारे गए पर पंकज भागकर बीच हाउस के पिछले हिस्से में चला गया। वह किसी भी कीमत पर मीरा को पाना चाहता था। उसने सोचा कि अंदर जाकर वह अंजन को मारकर मीरा को पिछले हिस्से से निकाल कर ले जाएगा।
पिछले हिस्से में अंदर जाने के लिए एक दरवाज़ा था। वहाँ पहुँच कर उसने गोली चलाकर उसका लॉक तोड़ दिया। दरवाज़ा तोड़कर जब वह अंदर आया तो केयर टेकर एक कोने में दुबका हुआ था। जाते हुए उसने केयर टेकर को गोली मार दी। वह अंजन के पास गया। अंजन ने उसे मीरा को सुरक्षित ले जाने को कहा।
पंकज को लगा कि इस हालत में अंजन का मरना तो तय है। वह मीरा को उसे सौंप रहा है। इसलिए अंजन को छोड़कर वह मीरा का हाथ पकड़कर पिछले हिस्से की तरफ भागा।
दोनों कारें बीच हाउस के पिछले हिस्से में खड़ी थीं। मीरा को अपनी कार में बैठा दिया। उसने अंजन की कार में झांककर देखा पर मुकेश नहीं था। जल्दबाजी में उसने मुकेश पर अधिक ध्यान नहीं दिया। मीरा को लेकर निकल गया।
वह निश्चिंत था कि अंजन अब बचेगा नहीं। मीरा को लेकर वह कोलाड आ गया। उसे इसी मकान में छिपा दिया। किसी को शक ना हो इसलिए फौरन वापस मुंबई लौट गया। मुंबई पहुँच कर वह यह देखने के लिए अंजन के बंगले पर गया कि कहीं बचकर वह वहाँ तो नहीं पहुँच गया।

अंजन बंगले पर नहीं था। लेकिन डॉक्टर मेहरा ने फोन कर उसे बताया कि मुकेश सही समय पर अंजन को हॉस्पिटल ले आया था। अंजन का ऑपरेशन सफल हो गया है।
उस वक्त पंकज को लगा कि मुकेश को भी खोजकर मार देना चाहिए था।

अचानक किसी ने मकान के दरवाज़े पर दस्तक दी। पंकज फौरन उठकर अपने कमरे से बाहर आ गया। उसका साथी भी आंगन में था। पंकज ने उससे पूँछा,
"कौन हो सकता है ?"
"भाई पता नहीं। यहाँ तो कोई आता नहीं है।"
उसके साथी ने अचरज से कहा। एक और बार दरवाज़े पर दस्तक हुई। पंकज और उसका साथी समझ नहीं पा रहे थे कि क्या करें। पंकज के साथी ने उसकी तरफ देखा। पंकज ने अपनी गन निकाल ली। उसने कहा,
"मैं तैयार हूँ। तुम जाकर देखो। जो भी हो उसे टालने की कोशिश करो।"
उसका साथी सहमता हुआ दरवाज़े तक गया। उसने एक बार पंकज की तरफ देखा। पंकज ने इशारे से उसे आश्वस्त कर दिया। उसने दरवाज़ा थोड़ा सा खोलकर बाहर झांका। उसे कोई नहीं दिखा। उसने दरवाज़ा खोला और बाहर गली में झांकने लगा। किसी ने फुर्ती से उसकी कनपटी पर गन रख दी। एक दूसरा आदमी दरवाज़े से अंदर दाखिल हुआ।
पंकज ने गोली चलाई पर उसने फुर्ती से खुद को अलग कर लिया। गोली उसे नहीं लगी। उसने एक गोली चलाई जो पंकज के हाथ में लगी। उसकी गन छूटकर गिर गई। उस आदमी ने दौड़कर पंकज की गर्दन दबोच ली।
बाहर खड़े आदमी ने पंकज के साथी को मार दिया। फिर वह अंदर आया। उसे देखते ही पंकज पहचान गया। वह अंजन का आदमी था। उस आदमी ने कहा,
"मीरा कहाँ है ?"
पंकज कुछ नहीं बोला। जिसने उसकी गर्दन दबोच रखी थी वह बोला,
"नहीं बताओगे तो मीरा को तो हम ढूंढ़ ही लेंगे पर तुम जान से हाथ धो बैठोगे।"
पंकज ने अपने हाथ से सीढ़ी की तरफ इशारा किया। दूसरा आदमी भागकर ऊपर चला गया। उसने देखा कि ऊपर कमरे के दरवाज़े पर ताला लगा है। उसने गोली से ताला तोड़ दिया। दरवाज़ा खोलकर अंदर चला गया।
गोली की आवाज़ सुनकर मीरा डर से कांप रही थी। उस आदमी ने आगे बढ़कर उसका मुंह खोल दिया। मीरा चिल्लाई,
"कौन हो तुम ? क्या चाहते हो ?"
"घबराइए नहीं... मैं अंजन सर का आदमी हूँ। आपको छुड़ाने आया हूँ।"
उस आदमी ने मीरा के बंधन खोले और उसे लेकर नीचे आ गया। नीचे पंकज को देखते ही वह चिल्ला उठी,
"धोखेबाज़, मक्कार उस दिन मैं तुम्हारे साथ यह सोचकर चली आई थी कि तुम मेरी हिफाज़त के लिए यहाँ ला रहे हो। पर तुमने मुझे यहाँ लाकर कैद कर दिया। अब तुम्हारी खैर नहीं है।"

मकान के बाहर एक वैन खड़ी थी। मीरा और पंकज को उसमें बैठाकर दोनों लोग वहाँ से चल दिए।
पंकज समझ गया था कि अब उसके बचने की कोई उम्मीद नहीं है। अंजन कभी भी उसे उसकी गुस्ताखी के लिए माफ नहीं करेगा। उसके सपने बस कुछ ही देर में खत्म हो जाएंगे।
मीरा अंजन के उस रूप को याद कर रही थी जिसे उसने पहली बार बीच हाउस पर देखा था।

उस दिन वह समझ गई थी कि कंस्ट्रक्शन बिज़नेस महज़ एक पर्दा है। अंजन की असलियत कुछ और ही है। वह अंजन से नाराज़ थी कि उसने अपना सच छिपाया था।
एक बात उस दिन से ही उसके मन में थी। जो उस दिन से लगातार अंजन को लेकर उठ रही थी।
हमले में अंजन का क्या हुआ ?
लेकिन अब उसे विश्वास हो गया था कि अंजन ठीक है। उसने अपने आदमियों को उसे छुड़ाने के लिए भेजा है।

रिस्की लव - 15

विनोद ने मुंबई लौट कर नफीस को सारी बात बताई। विनोद को लग रहा था कि सारा खेल पंकज का रचाया हुआ था। लेकिन नफीस को अभी भी लग रहा था कि अंजन पर हमला पंकज ने नहीं करवाया था। उसने अपना तर्क देते हुए कहा,
"विनोद अगर हमला पंकज ने करवाया होता तो वह बिना इस बात की पूरी तसल्ली किए कि अंजन मर गया है बीच हाउस से ना जाता। यह हमला किसी और ने करवाया है। उसकी अंजन से बहुत गहरी दुश्मनी है। उसने अंजन पर हमला करवाया और इसकी खबर भी बाहर नहीं आने दी।"
विनोद ने अपना तर्क रखा,
"सर फिर उसने बिना तसल्ली किए अंजन को क्यों छोड़ दिया ?"
"उसने अपना काम पक्का किया था। अंजन का बच जाना सिर्फ उसकी किस्मत है। उस हमलावर को नहीं पता था कि अंजन का ड्राइवर मुकेश भी वहाँ है। उसने अंजन के सीने पर गोली चलाई। उसका बचना असंभव जानकर चला गया।‌ बाद में मुकेश ने अंजन को हॉस्पिटल पहुँचा दिया। सोचो अगर पंकज ने हमला कराया होता तो वह मुकेश को छोड़ता नहीं। इसका मतलब हमला अचानक हुआ। वह मीरा को लेकर भाग गया। शायद वह मीरा को अपना बनाना चाहता होगा। इसलिए उसे कैद करके रखा होगा।"
विनोद को उसका तर्क ठीक लगा। वह कुछ सोचकर बोला,
"सर घूम फिरकर बात फिर मुकेश पर आ गई है। ज़रूर वह हमलावर के डर से ही भागा है। वह जानता होगा कि अंजन पर हमला किसने काराया था।"
नफीस भी किसी विचार में मग्न था। वह सोच रहा था कि मुकेश आखिर दिल्ली ना जाकर कहाँ चला गया होगा।

वैन अंजन के नए बन रहे रिज़ार्ट पर आकर रुकी। पंकज और मीरा को एक आधी बनी हुई बिल्डिंग में ले जाया गया। एक बहुत बड़ा सा हॉल था। उसके एक कोने में अंजन एक कुर्सी पर बैठा था। उसे देखते ही मीरा भागकर उसके पास गई। उसकी आँखों में आंसू थे।‌
अंजन ने एक ढीली सी शर्ट पहन रखी थी। उसकी छाती का घाव अभी पूरी तरह से नहीं भरा था। मीरा ने आगे बढ़कर धीरे से उस जगह हाथ रखा जहाँ घाव था। वह बोली,
"मुझे तुम्हारे आदमी ने बताया कि दिल के पास गोली लगी थी। अब कैसे हो ?"
अंजन ने उसके हाथ को चूमते हुए कहा,
"मैं ठीक हूँ.... तुम बताओ इस हरामखोर ने तुम्हारे साथ कोई ज्यादती तो नहीं की।"
अंजन पंकज की तरफ खूनी निगाहों से घूर रहा था। मीरा ने कहा,
"मंसूबे तो इसने बहुत पाल रखे थे। लेकिन तुमने होने नहीं दिया।"
कहकर वह उसके कंधे पर सर रखकर रोने लगी। अंजन ने प्यार से उसके सर पर हाथ फेरकर कहा,
"तुम बंगले पर जाकर आराम करो।

मैं इससे निपट कर आता हूँ।"
अंजन ने अपने आदमी को इशारा किया। वह मीरा को लेकर चला गया। उसके जाने के बाद अंजन अपनी कुर्सी पर वापस बैठ गया। उसके आदमी ने पंकज को धक्का दिया तो वह उसके कदमों पर जाकर गिरा। वह गिड़गिड़ाते हुए बोला,
"भाई मुझे माफ कर दो। कितने सालों का साथ है हमारा। मुझसे गलती हो गई।"
अंजन कुछ देर तक उसे गुस्से से घूरता रहा। उसके बाद उसे एक लात खींचकर मारी। इससे उसके ज़ख्म पर भी दर्द हुआ। पर उसे सहते हुए उसने कहा,
"इतने सालों का साथ अब याद आ रहा है। जब मीरा पर गंदी नज़र डाली तब याद नहीं था। जब मुझ पर हमला करवाया तब याद नहीं था।"
पंकज ने रोते हुए कहा,
"भाई भाभी पर बुरी नज़र डालकर पाप किया है लेकिन आप पर हमला नहीं करवाया है।"
"तुमने नहीं तो किसने करवाया है ?"
पंकज ने उसे उस दिन के अपने प्लान और जो कुछ घटा उसके बारे में सब बताया। उसे सुनने के बाद अंजन ने कहा,
"मुकेश कहाँ है ?"
"मुझे नहीं पता है भाई। मुझे बस इतना पता चला था कि वह मुंबई से दिल्ली जाने वाली ट्रेन पर चढ़ा था।‌ इसलिए मैंने अपने आदमी यह सोचकर दिल्ली भेजे थे कि उसे ढूंढ़कर असली हमलावर के बारे में पूँछूँगा। शायद उसे कुछ पता हो। पर मेरे आदमियों को वह दिल्ली में बहुत तलाशने पर भी नहीं मिला।"
अंजन ने पूँछा,
"मुकेश को दिल्ली की ट्रेन में चढ़ते तुम्हारे आदमियों ने देखा था।"
"नहीं भाई उन्होंने मुकेश के एक साथी से सुना था कि जब वह किसी को दिल्ली की गाड़ी में बैठाने के लिए गया था, तो उसने मुकेश को अपने परिवार के साथ गाड़ी पर चढ़ते देखा था। लेकिन जब तक वह कुछ कहता ट्रेन चलने लगी। इसलिए उसने आवाज़ नहीं दी।"
"मुकेश के किस साथी ने यह सूचना दी थी ?"
पंकज ने दिमाग पर ज़ोर डालते हुए कहा,
"यह तो मैंने पूँछा नहीं था।"
अंजन के चेहरे पर तंज़ भरी मुस्कान खिल गई। उसने कहा,
"तुम सोचते हो कि तुम मेरी बराबरी कर सकते हो। इसलिए मुझे रास्ते से हटाना चाहते थे। पर देख लो तुम कितने होशियार हो। जो खबर तुम्हें मिली उसकी सच्चाई भी नहीं परख पाए। यह भी नहीं पता कि खबर देने वाला था कौन।"
पंकज चुपचाप सिर झुकाए बैठा था। इस समय वह कुछ कहने की स्थिति में नहीं था। अंजन ने अपनी गन उसकी ओर तान दी। पंकज समझ गया कि अब उसका अंत आ गया। वह कुछ नहीं बोला।
एक गोली ने उसके माथे के बीच सुराख बना दिया।‌
अंजन ने एक बार फर्श पर पड़ी पंकज की लाश को देखा। फिर अपने साथी को निर्देश दिया कि ‌लाश को ठिकाने लगा दे।
अपने बंगले की तरफ जाते हुए अंजन ने एंथनी जैकब से बात की। उसे मुकेश का पता लगाने को कहा।

मीरा कई दिनों के बाद नहाई थी। उसे बहुत अच्छा लग रहा था। इसलिए बाथरोब में ही अपने बेड पर लेट गई। आँखें बंद कर वह कुछ सोच रही थी। तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई। नौकर ने बाहर से कहा,
"मैम आपके लिए खाना लगा दिया है।"
"ठीक है जाओ....

मैं आती हूँ।"
मीरा उठी। वार्डरोब में उसके लिए कुछ नए कपड़े सही तरह से लगाए गए थे। वह यह सोचकर मुस्कुराई कि अंजन को उसका इंतज़ार था। तभी उसके लिए कपड़े मंगाकर करीने से वार्डरोब में सजा दिए थे। उसने उनमें से एक ड्रेस चुनी। उसे पहन कर डाइनिंग टेबल पर आई। नौकर उसके लिए प्लेट लगा रहा था तभी अंजन भी आ गया। उसने मीरा को देखा तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई। मीरा भी मुस्कुरा दी। वह उसके पास बैठने जा रहा था कि तभी डॉक्टर मेहरा का फोन आ गया। उसने फोन उठा लिया। डॉक्टर मेहरा ने बताया कि नर्स का फोन आया था। उसने बताया कि वह मना करने के बावजूद भी बाहर चला गया है। उन्होंने कुछ सख्त लहज़े में उसे समझाया कि अभी वह पूरी तरह ठीक नहीं है। अतः उसे सावधानी बरतनी होगी।
अंजन के ज़ख्म में लात मारते समय खिंचाव आ गया था। इसलिए दर्द हो रहा था। उसने मीरा से कहा कि वह खाना खाकर अपने कमरे में आराम करे। वह कुछ देर में उसके पास आएगा।

मीरा के मिल जाने से अंजन बहुत खुश था। वह उसके बारे में ही सोच रहा था। नर्स अंजन की ड्रेसिंग कर रही थी। इतने दिनों में वह कुछ खुल गई थी। इसलिए बोली,
"सर आपने मेरी बात नहीं मानी। बाहर चले गए। अभी घाव भरने में कुछ समय और है।"
कोई और समय होता तो शायद अंजन उसे घूर कर देखता। पर आज उसका मूड अच्छा था। उसने कहा,
"ज़रूरी ना होता तो बात मान लेता।"
नर्स ने ड्रेसिंग पूरी की और उससे कहा कि वह खाना खा ले। उसके बाद वह उसे दवा खिलाएगी। अंजन ने उससे कहा कि वह घर जाए। दवा उसे दे दे। वह अपने आप खा लेगा।

अंजन ने मीरा के कमरे का दरवाज़ा खटखटाया। मीरा ने उठकर दरवाज़ा खोल दिया। अंजन अंदर जाकर बैठ गया। मीरा ने कहा,
"थैंक्यू...."
अंजन ने कहा,
"किस बात के लिए ?"
मीरा ने बैठते हुए कहा,
"मेरे आराम का खयाल रखने के लिए। बहुत खूबसूरत ड्रेसेज़ हैं।"
अंजन उठकर उसके पास आ गया। उसका हाथ पकड़ कर बोला,
"मुझे मौका दो। मैं तुम्हें दुनिया की हर खुशी दूँगा।"
मीरा ने अपना हाथ छुड़ा लिया। उसके इस व्यवहार पर अंजन ने कहा,
"क्या बात है ? नाराज़ हो मुझसे ?"
मीरा ने बेरुखी दिखाते हुए कहा,
"क्यों... नहीं होना चाहिए क्या ?"
अंजन वापस अपनी जगह पर जाकर बैठ गया। मीरा ने कहा,
"मुझसे छिपाया क्यों ?"
अंजन ने कहा,
"क्या छिपाया है मैंने ?"
"अपनी असलियत।"
उसकी बात पर अंजन चुप हो गया। मीरा ने कहा,
"तुम्हारा कंस्ट्रक्शन्स का बिज़नेस महज़ एक पर्दा है। तुम उसके पीछे क्या क्या करते हो बताओ।"
अंजन अभी भी कुछ नहीं बोला। मीरा उस पर बताने के लिए ज़ोर डालने लगी। अंजन को अच्छा नहीं लग रहा था। वह खीझकर बोला,
"कितने मन से तुम्हारे पास आया था कि उस दिन जो नहीं कह सका वह आज कहूँगा। तुम यह सब लेकर बैठ गईं।"
मीरा ने भी गुस्से से कहा,
"मेरे साथ ज़िंदगी बिताने की बात करते हो। लेकिन सच नहीं बोल सकते हो।

जहाँ इतना किया है एक काम और कर दो। मेरे लंदन जाने का इंतज़ाम कर दो।"
उसकी बात सुनकर अंजन कुछ देर चुप बैठा रहा। उसके बाद उठकर दरवाज़े तक गया। बाहर जाने से पहले मीरा से बोला,
"इंतज़ाम होते ही खबर कर दूँगा।"
दरवाज़ा खोलकर वह चला गया। मीरा कुछ पल खड़ी रही। उसके बाद अपने बिस्तर पर लेट गई।
अंजन गुस्से में भरा अपने कमरे में पहुँचा। इतने दिनों के बाद मीरा उसे मिली थी। वह उसके साथ प्यार भरी बातें करना चाहता था। लेकिन मीरा ने उसके काम के बारे में पूँछकर उसका मूड खराब कर दिया था।
वह गुस्से से भरा हुआ था। उसकी कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। उसने अपनी अलमारी खोली। उसमें पीने का सामान रखा था। उसने बोतल उठाई और मुंह लगाकर पीने लगा।

रिस्की लव - 16

तरुण पंकज से संपर्क करने का प्रयास कर रहा था। लेकिन उसकी कोई खबर नहीं लग रही थी। उसका माथा ठनक रहा था। एक खौफ उसके मन को परेशान कर रहा था। कहीं अंजन को पंकज और उसके संबंध का पता तो नहीं चल गया। अंजन ने पंकज को मार तो नहीं दिया।
यह बात मन में आते ही वह भय से कांप उठा। वह जानता था कि अगला नंबर उसका होगा। उसने अंजन को ब्लैकमेल करने का प्लान बनाया था। लेकिन अब डर कर उसे स्थगित कर दिया। वह एक ऐसा रास्ता तलाश करने लगा जिससे वह अंजन के राज़ का फायदा उठा सके।

मीरा लंदन वापस चली गई थी। उसके चले जाने से अंजन को बहुत दुख हुआ था। कुछ दिनों तक तो वह अपने दुख में डूबा रहा। लेकिन कठिनाइयों से लड़ने के आदी अंजन ने खुद को उस दुख में डूबने नहीं दिया। धीरे धीरे दुख ने गुस्से का रूप धारण कर लिया। यह गुस्सा मीरा पर नहीं था। गुस्सा उस हमला करने वाले के लिए था। उसकी वजह से ही उस दिन बनती हुई बात बिगड़ गई थी।
अंजन अब हर हाल में उस आदमी का पता लगाना चाहता था जो उस पर हमला करवा सकता था। उसने बहुत सोचा था। उसके मन में नाम तो कई ऐसे आए जो उसे पसंद नहीं करते थे। लेकिन उनमें से कोई भी ऐसा नहीं लग रहा था जो इतनी हिम्मत कर पाता।
उस दिन होश खोने से पहले उसने किसी की झलक देखी थी। वह पंकज को कवर देने के लिए मेन डोर की तरफ बढ़ रहा था। तभी एक नकाबपोश सामने आया। उसने उसके सीने पर गोली चलाई। वह फर्श पर गिर पड़ा। उसकी आँखों के आगे अंधेरा छाने लगा। वह होश खो रहा था। उसी समय उसने किसी की धुंधली सी आकृति देखी थी।
बहुत याद करने पर भी वह पहचान नहीं पा रहा था कि वह कौन था। इससे उसकी छटपटाहट और बढ़ रही थी।

महाराष्ट्र और गुजरात के बार्डर पर स्थित नवापुर में मुकेश अपने परिवार के साथ ठहरा हुआ था। उसकी पत्नी राजेश्वरी बहुत परेशान थी। जो थोड़े बहुत पैसे लेकर वह लोग जान बचाने के लिए भागे थे वह खत्म हो गए थे।‌ अभी कितने दिन और इस तरह छिप कर रहना है बताना कठिन था।
नवापुर में राजेश्वरी का ममेरा भाई ललित रहता था।

अपनी जान बचाने के लिए मुकेश अपनी पत्नी राजेश्वरी और बेटी माधवी को लेकर यहाँ आ गया था।
उसका प्लान दिल्ली जाने का था। वहाँ मुकेश का एक रिश्तेदार रहता था। वह वहाँ किसी बिज़नेस मैन का ड्राइवर था। उसकी दिल्ली में जान पहचान भी थी। मुकेश ने सोचा था कि वह अपने रिश्तेदार की मदद से कोई काम तलाश लेगा। लेकिन जब वह दिल्ली की ट्रेन में चढ़ रहा था तब उसके एक साथी ने उसे ट्रेन पर चढ़ते देख लिया था।
मुकेश बहुत घबराया हुआ था। ट्रेन में बैठकर उसने सोचा कि अब दिल्ली में रहना उसके लिए खतरनाक हो सकता है। इसलिए ट्रेन जब जलगांव स्टेशन पर रुकी तो वह राजेश्वरी और माधवी के साथ उतर गया। वहाँ एक दिन एक छोटे से होटल में ठहरने के बाद उन्होंने नवापुर आने का फैसला किया।
राजेश्वरी बेचैनी से बार बार दरवाज़े पर देख रही थी। मुकेश उसके भाई ललित के साथ गया हुआ था। ललित एक ठेकेदार के साथ काम करता था। मुकेश कुछ पढ़ा लिखा था। ललित उसे कोई काम मिल जाए इस उम्मीद से ठेकेदार के पास ले गया था। राजेश्वरी मुकेश को लेकर चिंतित रहती थी। पर मजबूरी थी। पेट पालने के लिए कुछ करना था। इसलिए मुकेश ने उसे समझाया कि उसे जाने दे।

खाना खाने के बाद मुकेश और राजेश्वरी लेटे हुए थे। उन दोनों के बीच माधवी लेटी थी। मुकेश ने सोती हुई माधवी के सर पर हाथ फेरा। वह बार बार उससे पूँछती थी कि हम लोग घर कब जाएंगे। वह अपने स्कूल जाना चाहती थी। चॉल के दोस्तों के साथ खेलना चाहती थी। राजेश्वरी ने मुकेश से कहा,
"क्या अब हम मुंबई वापस नहीं जाएंगे‌ ?"
मुकेश ने कहा,
"तुम भी माधवी की तरह बात कर रही हो। मैं क्या बताऊँ तुम्हें ?'"
"मैं माधवी की तरह नहीं माधवी के लिए बात कर रही हूँ। क्या माधवी की पढ़ाई छुड़वा दोगे। हम लोग तो कहीं के नहीं रहे। कब तक ऐसे चलेगा ?"
"राजेश्वरी तुमको क्या लगता है कि मुझे माधवी की चिंता नहीं है। पर क्या करूँ। अभी कुछ समझ ही नहीं आ रहा है। लेकिन मैं कोई ना कोई व्यवस्था करूँगा। कहीं ऐसी जगह चलकर बस जाएंगे जहाँ चैन से रह सकें। फिलहाल तो यहाँ ठेकेदार की गाड़ी चलाने का काम मिल गया है।"
राजेश्वरी ने कहा,
"यहीं क्यों नहीं बस जाते हैं ? माधवी का कहीं एडमीशन करवा देते हैं।"
"राजेश्वरी मैं खुद बहुत परेशान हूँ। मुझे कुछ समय दो। सब ठीक कर दूँगा।"
राजेश्वरी ने करवट बदल ली। मुकेश उसके गुस्से को समझ रहा था। वह अपनी तकलीफों की वजह से गुस्से में नहीं थी। वह परेशान थी माधवी के भाविष्य को लेकर। उसे मुकेश की चिंता थी। उन लोगों ने मेहनत करके मुंबई में जो कुछ भी बनाया था सब छूट गया था। अब एक नई जगह पर दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था। ‌
राजेश्वरी कई बार उससे कह चुकी थी कि तुमने अपने मालिक की मदद करके अपने लिए मुसीबत मोल ले ली।

लेकिन उस दिन वह उस शख्स को मरते हुए नहीं छोड़ सकता था जिसके कारण इतने सालों से उसकी रोज़ी रोटी चल रही थी।
वह बीच हाउस की उस रात को याद करने लगा।

अंजन और मीरा को लेकर वह बीच हाउस पहुँचा।‌ अंदर जाते हुए अंजन ने उससे कहा कि मीरा को यहीं से एयरपोर्ट जाना है। तड़के सुबह फ्लाइट है। निकलने से पहले वह फोन करेगा तब वह चलने के लिए तैयार हो जाए। तब तक जाकर आराम करे।‌
अंजन और मीरा अंदर चले गए। वह बीच पर टहलने के लिए चला गया। बहुत देर तक वह चट्टान पर बैठ कर समुद्र की लहरों को देखता रहा।‌ वहाँ बैठे हुए वह राजेश्वरी को याद कर रहा था। बहुत दिनों से वह उससे कह रही थी कि उसे और माधवी को कहीं घुमाने ले चले। उसने सोचा था कि मीरा को एयरपोर्ट छोड़कर लौटते हुए वह अंजन से कुछ दिनों की छुट्टी के लिए बात करेगा।
कुछ वक्त बीच पर बिताने के बाद वह आराम करने के इरादे से लौटकर आ गया। पंकज अपने दोनों साथियों के साथ बाहर महफिल जमाए बैठा था। मुकेश बीच हाउस के पिछले हिस्से में चला गया। वहाँ दोनों कार खड़ी थीं। यहीं पर केयर टेकर का क्वार्टर था। वह अक्सर अंजन के साथ यहाँ आता था। बीच हाउस के केयर टेकर से उसकी अच्छी दोस्ती थी। वह उसके क्वार्टर में चला गया। केयर टेकर तब अंजन और मीरा की सेवा के लिए उनके पास जा रहा था। उसने कहा कि मुकेश उसके क्वार्टर में आराम से सो जाए। केयर टेकर के जाने के बाद मुकेश लेट गया। उसे नींद आ गई।
गोलियां चलने की आवाज़ सुनकर उसकी नींद टूटी। वह कुछ समझ नहीं पा रहा था कि अचानक गोलियां क्यों चलने लगीं ? किसने बीच हाउस पर हमला कर दिया है ?

डर कर वह अपने बेड के नीचे छिप गया। कुछ देर बाद गोलीबारी की आवाज़ आना बंद हो गई। तब वह धीरे से बेड के नीचे से निकला। क्वार्टर के बाहर आया। पंकज की गाड़ी गायब थी। वह सावधानी से पाम के पेड़ों के पीछे छिपता हुआ आगे आया। उसने देखा कि पंकज के दोनों आदमी मरे पड़े थे। वह भागकर बीच पर पहुँचा तो देखा कि दो लोग एक मोटरबोट की तरफ भाग रहे हैं। उनमें से एक ने मुड़कर उसकी तरफ देखा। उसके चेहरे पर मास्क था। मुकेश डर कर रुक गया। उस आदमी ने अपनी उंगली उसकी तरफ उठाई। उसके बाद भागकर मोटरबोट पर चढ़ गया। मोटरबोट दोनों लोगों को लेकर चली गई।
वह वापस बीच हाउस आया। भागकर अंदर गया। अंजन फर्श पर पड़ा था। उसके सीने में गोली लगी थी। मीरा वहाँ नहीं थी। वह डर गया। उसने भागने के लिए कदम बढ़ाए पर उसके मन से आवाज़ आई कि अंजन को ऐसे छोड़कर ना जाए। वह फौरन कार बीच हाउस के अगले हिस्से में लेकर आया। खून से लथपथ अंजन को बड़ी मुश्किल से उठाकर कार तक लाया। उसे पिछली सीट पर लिटाया और कावेरी हॉस्पिटल की तरफ चल दिया।
एक बार माधवी जब बीमार पड़ी थी तब उसका इलाज कावेरी हॉस्पिटल में हुआ था। मुकेश के पास डॉक्टर मेहरा का नंबर था।

उसने रास्ते से ही फोन करके उन्हें सारी बात बता दी। जब वह अंजन को लेकर अस्पताल पहुंँचा तो डॉक्टर मेहरा सारी तैयारी कर चुके थे। उसके पहुँचते ही अंजन को ऑपरेशन के लिए ले जाया गया।
ऑपरेशन के लिए ले जाते हुए डॉक्टर मेहरा ने बताया कि वह अंजन का ऑपरेशन कर उसकी जान बचाने की पूरी कोशिश करेंगे। लेकिन अभी वह कुछ कह नहीं सकते हैं। उसने अंजन को हॉस्पिटल लाकर अच्छा काम किया है। अगर वह उसे सही समय पर लेकर ना आया होता तो अंजन का बचना नामुमकिन था।
डॉक्टर ऑपरेशन कर रहे थे। मुकेश को हॉस्पिटल में रुकने का कोई मतलब समझ नहीं आया।‌ रात के डेढ़ बज रहे थे। वह अपने घर चला गया।
घर पहुँच कर उसने राजेश्वरी को सारी बात बताई। सब सुनकर राजेश्वरी चिंतित हो गई। उसने आशंका जताई कि कहीं हमला करने वाले उसकी जान के पीछे ना पड़ जाएं। उसे खुद भी इस बात का डर था। पर उसने राजेश्वरी को समझाया कि वह बेकार की चिंता कर रही है। हमला करने वालों को क्या पता चलेगा कि अंजन को किसने हॉस्पिटल पहुँचाया।
राजेश्वरी को तसल्ली देकर वह आराम करने के लिए लेटा था। राजेश्वरी की चिंता उसे परेशान कर रही थी। उस आदमी ने भागते हुए रुक कर उसे देखा था। उसकी तरफ उंगली उठाकर इशारा भी किया था। उसका मतलब यह भी हो सकता था कि वह उसे पहचान गया है।
वह हॉस्पिटल से इसी लिए चला आया था। अब वह सोच रहा था कि क्या करे। उसने तय किया कि सुबह पुलिस स्टेशन जाकर सारी बात की जानकारी दे देगा।
वह आँखें बंद करके सोने की कोशिश कर रहा था कि उसे एक फोन आया। कॉल अंजान नंबर से था। उसने फोन उठा लिया। दूसरी तरफ से एक आदमी ने धमकी भरे अंदाज में कहा कि उसने अंजन को हॉस्पिटल पहुँचा कर ठीक नहीं किया है। अब उसकी खैर नहीं है।
मुकेश घबरा गया।

Jan 8, 2022

#19

रिस्की लव - 17

फोन आने के बाद मुकेश की नींद उड़ गई। वह डर गया था। उसे अपने से अधिक राजेश्वरी और माधवी की फ़िक्र थी। उसके मन में पहली बात यही आई कि उसे मुंबई से कहीं दूर चले जाना चाहिए। वह सोचने लगा कि कहाँ जा सकता है। उसे दिल्ली में रहने वाले अपने रिश्ते के चाचा की याद आई। उस समय घबराहट में और अधिक सोच नहीं पा रहा था। उसने भागकर दिल्ली जाने का फैसला कर लिया।‌
उसने राजेश्वरी को उठाकर सारी बात बताई। उससे कहा कि जितनी जल्दी हो सके निकलने की तैयारी करे। राजेश्वरी ने तीनों के कुछ कपड़े और कुछ पैसे रख लिए। मुकेश ने एटीएम कार्ड और ज़रूरी दस्तावेज़ रख लिए। माधवी को उठाकर तैयार किया और तीनों घर से निकल गए।
ट्रेन में बैठकर मुकेश को लगा कि उसके दोस्त ने दिल्ली की ट्रेन पर चढ़ते हुए देख लिया था। इसलिए वहाँ जाना ठीक नहीं है। उसने जलगांव में उतर कर एक सस्ते से होटल में रहकर सोचा कि कहाँ जाना है।

कोई उसका पता ना कर सके इसके लिए उसने अपने मोबाइल से ज़रूरी चीज़ें डिलीट कर दीं। सिम कार्ड निकाल कर तोड़ दिया। मोबाइल को तोड़ कर फेंक दिया।
राजेश्वरी ने सुझाव दिया कि वो लोग नवापुर चलें।‌ वह दोनों को लेकर यहाँ आ गया। ललित ने उन्हें एक छोटा सा घर रहने के लिए दिलवा दिया। घर से तो बहुत कम पैसे लेकर चले थे। जिस अकाउंट का एटीएम था उसमें भी अधिक पैसे नहीं थे।‌ मकान लेने और ज़रुरी सामान खरीदने में बहुत सा पैसा लग गया। मुकेश को एक फोन और सिम कार्ड भी लेना पड़ा।
इसलिए आज वह ललित के साथ उसके ठेकेदार से मिलने गया था। उसे ठेकेदार की गाड़ी चलाने का काम मिल गया। कुछ हद तक मुकेश को तसल्ली मिली थी। लेकिन वह भी उन सवालों से परेशान था जो राजेश्वरी उठा रही थी।
उसने इतने सालों की मेहनत से अपनी गृहस्थी बनाई थी। केशव चॉल में अपनी खोली ले ली थी। अपनी बेटी माधवी को वह बहुत चाहता था। उसको लेकर उसके मन में कई सपने थे। वह चाहता था कि माधवी खूब पढ़े। पढ़ लिख कर उसका और राजेश्वरी का नाम रौशन करे। इसलिए उसे पढ़ा रहा था। लेकिन अब माधवी की पढ़ाई भी छूट गई थी। इस बात का उसे सबसे अधिक दुख था।
वह सोच रहा था कि आखिर कब तक ऐसे चलेगा। उसे कुछ तो करना ही पड़ेगा। मुंबई की उसे कोई खबर नहीं थी। वह नहीं जानता था कि अंजन की जान बची या नहीं। उसने डर की वजह से मुंबई में किसी से संपर्क नहीं किया था।
वह यह भी नहीं जानता था कि अंजन पर हमला करने वाला कौन था। वह यह सोचकर डर गया था कि उसे फोन करने वाले को यह पता था कि वह अंजन को हॉस्पिटल ले गया था। उसके पास उसका नंबर भी था। इसलिए घबराहट में मुकेश ने जल्दी से मुंबई छोड़ दी थी।

मुकेश ने एक बार फिर माधवी के सर पर हाथ फेरा। उसे नींद नहीं आ रही थी। वह धीरे से उठा और दरवाज़ा खोलकर बाहर आ गया। मकान के बाहर एक नीम का पेड़ था। वह उसके नीचे जाकर बैठ गया।
वह पेड़ के नीचे बैठा था। उसके सामने कुछ कदम पर एक टूटी सी दीवार थी। अचानक उसे लगा जैसे कि दीवार के उस तरफ से कोई उसे घूर रहा है। उसने ध्यान से देखा तो सचमुच कोई था। वह बुरी तरह डर गया। उठकर अंदर की तरफ भागने लगा। उस आदमी ने चिल्लाकर कहा,
"रुको मुकेश..."
मुकेश डर कर वहीं रुक गया। वह आदमी उसके पास आकर बोला,
"मेरा नाम एंथनी जैकब है। अंजन सर ने तुम्हें तलाशने के लिए कहा था।"
अंजन का नाम सुनकर मुकेश कुछ शांत हुआ। उसने पूँछा,
"अंजन साहब बच गए ?"
"हाँ... तभी तो उन्होंने तुम्हें ढूंढ़ने के लिए कहा।"
मुकेश ने एंथनी की तरफ देखकर कहा,
"तुम्हें सचमुच अंजन साहब ने भेजा है। मैं कैसे यकीन करूँ ?"
एंथनी ने कहा,
"तुमको लगता है कि मैं उनका आदमी हो सकता हूँ जिनसे डर कर तुम भागे थे।"
मुकेश ने धीरे से कहा,
"हाँ....

"
एंथनी ने जवाब देते हुए इधर उधर देखकर कहा,
"अगर ऐसा होता तो मैं इतनी देर तुमसे बात क्यों करता। तुम्हें मार देता। अंदर जाकर तुम्हारी बीवी और बेटी को भी मार देता।"
मुकेश को उसकी बात में दम लगा। एंथनी ने कहा,
"अंजन सर के कहने पर ही मैं तुम्हें ढूंढ़ता हुआ यहाँ आया हूँ।"
मुकेश ने आश्चर्य से कहा,
"तुम्हें मेरे यहाँ होने का पता कैसे चला ?"
एंथनी ने उसे घूर कर देखा। वह बोला,
"बताया ना एंथनी जैकब नाम है मेरा। माना हुआ जासूस हूँ।"
मुकेश ने भी उसे अच्छी तरह से देखा। उसके बाद बोला,
"फिर भी कुछ तो होगा जिसके सहारे तुम यहाँ तक आ गए।"
अपने सर की तरफ उंगली दिखाते हुए एंथनी बोला,
"अपने दिमाग के सहारे। कैसे वह बाद में बताऊँगा। मुझे प्यास लगी है। पानी पिला दो।"
मुकेश ने उससे कहा कि वह ठहरे। वह अंदर से पानी लेकर आता है। वह दरवाज़े की तरफ बढ़ा ही था कि राजेश्वरी दरवाज़ा खोलकर बाहर आई। वह उससे कुछ कहने ही जा रही थी कि एंथनी को देखकर रुक गई। उसके चेहरे पर डर देखकर मुकेश ने आगे बढ़कर उसे सारी बात बताई। कुछ देर तक वह अविश्वास के साथ एंथनी की तरफ देखती रही। एंथनी ने कहा,
"आपके पति सही कह रहे हैं। मैं आप लोगों को नुकसान पहुँचाने नहीं बल्कि आप लोगों की मदद करने आया हूँ। मुझे प्यास लगी है। थोड़ा पानी पिला दीजिए।"
राजेश्वरी अंदर गई और एक गिलास पानी लेकर आई। एंथनी ने पानी पीकर उसे धन्यवाद दिया। मुकेश को एंथनी पर पूरा यकीन हो गया था। उसने राजेश्वरी से कहा कि वह एंथनी के लिए चाय बना दे। वह मान गई। उसने अंदर से बैठने के लिए प्लास्टिक के दो मोंढे़ लाकर दिए। एंथनी और मुकेश बैठ गए। मुकेश ने कहा,
"अब बताओ कि मुझे कैसे ढूंढ़ा ?"
एंथनी ने समझाया,
"तुम दिल्ली की ट्रेन पर चढ़े थे लेकिन दिल्ली नहीं पहुँचे। इसका मतलब था कि ट्रेन में चढ़ने के बाद तुमने इरादा बदल दिया था। मैंने अंदाजा लगाया कि तुम बीच में ही कहीं उतर गए होगे। ट्रेन स्टेशन से चलकर जलगांव में रुकती है। मैंने दिमाग लगाया कि अगर उतरे होंगे तो यहीं उतरे होगे। उसके बाद मैंने सोचा कि यहाँ उतर कर आगे क्या करना है सोचा होगा। इसके लिए आसपास ही किसी होटल में ठहरे होगे। मैंने तुम्हारी तस्वीर के साथ आसपास के होटलों में पूँछताछ की तो पता चला कि एक होटल में तुम परिवार के साथ ठहरे थे लेकिन अगले ही दिन चले गए।"
मुकेश एंथनी को ध्यान से देख रहा था। वह वैसा बिल्कुल भी नहीं था जैसा फिल्मों और टीवी में जासूस को दिखाया जाता था। वह बहुत ही साधारण सा दिखने वाला आदमी था। लेकिन जो वह बता रहा था उससे मुकेश उसकी बुद्धी का कायल हो गया था। उसने कहा,
"अब तक तो तुमने सब ठीक ही बताया है।

लेकिन यह बताओ कि तुम्हें कैसे पता चला कि मैं अपने परिवार के साथ नवापुर आया हूँ ? मैं यहाँ रह रहा हूँ यह कैसे पता चला ?"
राजेश्वरी चाय बनाकर ले आई थी। साथ में कुछ बिस्कुट थे। एंथनी ने बिस्कुट की प्लेट और अपनी चाय पकड़ ली। एक बिस्कुट को चाय में डुबोकर खाया। फिर एक घूंट चाय पीकर बोला,
"बहुत अच्छी चाय बनाई है। बहुत मन था चाय पीने का।"
उसने राजेश्वरी की तरफ देखकर कहा,
"थैंक्यू....."
उसके बाद एक और बिस्कुट चाय में डुबोते हुए बोला,
"तुम होटल से चले गए तो मैंने अंदाजा लगाया कि ज़रूर जलगांव छोड़कर बाहर गए होगे। कहाँ और कैसे इस बात पर दिमाग लगाना शुरू किया। दिमाग में आया कि कहीं जाने के लिए ट्रेन ही पकड़ी होगी। स्टेशन पर आकर फिर पूँछताछ की। किस्मत अच्छी थी एक कुली ने तुम्हें नवापुर की गाड़ी में चढ़ते देखा था।"
एंथनी रुका उसने दो बिस्कुट चाय में डुबोकर खाए। फिर दो चार घूंट चाय पी। मुकेश अपनी चाय पीते हुए उसे बड़े ध्यान से देख रहा था। वह सोच रहा था कि एंथनी को इस तरह बिस्कुट खाते देखकर कौन उसे जासूस कह सकता है। लेकिन अंजन ऐसे वैसे को नहीं चुनता है। यह जैसी भी हरकत कर रहा हो पर दिमाग का तेज़ है। एंथनी ने पहले इत्मीनान से सारे बिस्कुट और चाय खत्म की। प्लेट और कप राजेश्वरी की तरफ बढ़ाते हुए उसे एक बार फिर धन्यवाद दिया। मुकेश ने भी अपना कप पकड़ाते हुए कहा,
"अब तुम जाकर आराम करो। मुझे कुछ बात करनी है।"
राजेश्वरी अंदर चली गई। मुकेश ने एंथनी की तरफ देखा। एंथनी बोला,
"नवापुर आने के बाद तुम्हें फिर तलाशना शुरू किया। कुछ पता नहीं चल रहा था। आज एक बार फिर किस्मत काम कर गई। एक चाय की दुकान पर खड़ा चाय पी रहा था। तभी तुम एक ठेकेदार के दफ्तर से किसी के साथ निकलते दिखे। जब तक कुछ समझकर तुम तक पहुँचता तुम उस आदमी की मोटरसाइकिल पर बैठ कर निकल गए थे। एक बार फिर दिमाग लगाया। घुस गया ठेकेदार के दफ्तर में। अपने आप को तुम्हारा रिश्तेदार बता कर पूँछताछ की। पता चला कि तुम किसी ललित के साथ काम मांगने आए थे।‌ ललित का पता लिया। यहाँ आया तुम्हारे बारे में पूँछा तो तुम्हारे घर का पता चल गया। मैं सोच रहा था कि तुम्हारे घर का दरवाज़ा खटखटाऊँ कि तुम खुद ही बाहर आकर पेड़ के नीचे बैठ गए।"

मुकेश को यह तो पता चल गया था कि एंथनी उस तक कैसे पहुँचा। पर अब उसके दिमाग में दूसरा सवाल था। अंजन ने उसे तलाशने के लिए एंथनी को क्यों भेजा। अंजन उससे क्या चाहता है। मुकेश ने अपने मन में उठ रहे सवाल का जवाब एंथनी से मांगा।
एंथनी ने जवाब के बदले उससे सवाल कर दिया,
"क्या तुम अंजन सर पर हमला करने वाले को जानते हो ?"
अब मुकेश को समझ आ गया था कि क्यों अंजन ने एंथनी को उसे ढूंढ़ने के लिए कहा था। उसने ना में सर हिला दिया।

रिस्की लव - 18

मुकेश ने सर हिलाकर मना कर दिया कि उसे ‌अंजन के ऊपर हमला करने वालों के बारे में कुछ भी नहीं पता है। एंथनी बड़े आश्चर्य से उसकी तरफ देख रहा था। उसे इस तरह घूरते देखकर मुकेश ने कहा,
"मैं सचमुच नहीं जानता हूँ कि अंजन साहब पर हमला किसने किया था।"
एंथनी ने उसी तरह अविश्वास से कहा,
"तो फिर किससे डर कर भाग रहे थे ?"
मुकेश ने समझाया,
"मैं हमला करने वाले के डर से ही भाग रहा था पर वह कौन है मै नहीं जानता हूँ।"

उसकी बात सुनकर एंथनी ने हंसकर कहा,
"कैसी बहकी बहकी बातें कर रहे हो। तुम उसे जानते नहीं हो फिर भी उससे डर कर भाग रहे हो।"
मुकेश को भी लगा कि वह अपनी बात ठीक से कह नहीं पाया है। उसने एंथनी को वह सब बता दिया जो उसके साथ हुआ। सब बताने के बाद वह बोला,
"अब समझ आया। भागते हुए उनमें से एक ने मेरी तरफ देखा था और अपनी उंगली मेरी तरफ दिखाई थी। फिर जब फोन आया तो मैं डर गया। मुंबई छोड़कर भाग आया।"
एंथनी अपने मोढ़े से उठा। उसने दोनों हाथ उठाकर अंगड़ाई ली। उसके बाद अपने पांव खोलने के लिए चहलकदमी करने लगा। टहलते हुए वह कुछ सोच रहा था। मुकेश समझ नहीं पा रहा था कि आखिर वह क्या सोच रहा है। एंथनी वापस आकर अपने मोढ़े पर बैठ गया। उसने कहा,
"तुमने जिसे देखा था उसके चेहरे पर नकाब था। इसके अलावा कुछ और देखा था।"
"नहीं.... जो हुआ बस कुछ सेकेंड्स में हुआ। उस समय वैसे भी रात का समय था। चांदनी में जो दिखाई पड़ा वह बता दिया। दूसरे वाले की तो बस छाया जैसी दिखी थी।"
एंथनी एक बार फिर कुछ सोचकर बोला,
"जिसने फोन किया था उसकी आवाज़ से कुछ बता सकते हो।"
मुकेश ने आश्चर्य से कहा,
"भला आवाज़ से कैसे कुछ बता सकता हूँ। हाँ धमकी देने वाला एक मर्द था इतना कह सकता हूँ।"
एंथनी ने कहा,
"चलो... वो नंबर ही दे दो जिससे कॉल आई थी।"
मुकेश ने धीरे से कहा,
"बताया तो था कि डर की वजह से सिम और फोन तोड़कर फेंक दिया था।"
एंथनी एक बार फिर उठकर खड़ा हो गया। हवा में हाथ फेंकते हुए बोला,
"हाँ.... बताया था। मतलब उन लोगों तक पहुँचने की कोई राह नहीं है।"
मुकेश ने कहा,
"पर तुम तो जासूस हो। पता कर लोगे उनके बारे में।"
एंथनी ने उसकी तरफ देखकर कहा,
"बिल्कुल.... मैं तलाश भी कर लूँगा। इस समय अंजन सर को तुम्हारे बारे में नहीं बता सकता हूँ। बहुत रात हो गई है। कल सुबह उनसे बात करूँगा। फिलहाल मेरे सोने का कोई इंतजाम हो सकता है। नींद आ रही है।"
मुकेश सोच में पड़ गया। वह तो अपने परिवार के साथ फर्श पर दरी डाल कर सोता था। वह दरी भी ललित ने दी थी। एंथनी उसकी दुविधा समझ गया। उसने कहा,
"कोई बात नहीं है। इस पेड़ के नीचे लेट जाता हूँ।‌ वैसे भी सवेरा होने में वक्त ही कितना बचा है।"
मुकेश उठते हुए बोला,
"एक चटाई है लाकर दे देता हूँ।"

चटाई बिछाकर एंथनी पेड़ के नीचे लेट गया। लेकिन उसे नींद नहीं आ रही थी।

पहली बार था जब वह इस प्रकार पेड़ के नीचे लेटा हो। उसे आराम महसूस नहीं हो रहा था। उसने अपना दिमाग दूसरी तरफ लगा दिया। वह अब अंजन पर हमला करने वालों के बारे में सोच रहा था। उसने सोचा था कि शायद मुकेश उन्हें जानता होगा। नहीं तो कुछ ऐसा अवश्य बता देगा जिससे हमला करने वालों तक पहुँचने की राह मिल जाएगी। लेकिन मुकेश कुछ भी नहीं बता पाया। अब उसे खुद ही कोई सूत्र तलाश करना पड़ेगा। जिसे पकड़ कर वह आगे बढ़ सके।
एंथनी उसी विषय में सोच रहा था। लेकिन थकावट उस पर हावी हो गई। वह चटाई पर ही सो गया।

मुकेश अंदर पहुँचा तो राजेश्वरी जागी हुई थी। उसने मुकेश से कहा,
"इतनी देर तक क्या बातें कर रहे थे ?"
मुकेश दरी पर लेटते हुए बोला,
"एंथनी बता रहा था कि वह हमें खोजते हुए किस तरह यहाँ आया।"
राजेश्वरी को यह टालने वाला जवाब लगा। उसने कहा,
"वह तो कह रहा था कि जासूस है। उसने अंजन साहब पर हमला करने वाले के बारे में कुछ पता किया।"
"नहीं... उसे तो लग रहा था कि शायद मैं हमला करने वाले को जानता हूंँ।"
राजेश्वरी चिंतित हो गई। उसे लगा था कि एंथनी ने हमला करने वाले के बारे में कुछ बताया होगा। पर उसे तो कुछ पता ही नहीं था। वह बोली,
"अब जाने क्या होगा ? कब तक हम लोगों को अपने घर से दूर रहना पड़ेगा ?"
मुकेश को भी नींद आ रही थी। उसने कहा,
"परेशान ना हो। सुबह एंथनी अंजन साहब से बात करेगा। हो सकता है वह हमारे लिए कोई रास्ता निकाल दें। अब कुछ देर के लिए तुम भी सो जाओ।"
यह कहकर मुकेश ने करवट बदल ली।

सुबह एंथनी ने अंजन को फोन किया। उसने उसे मुकेश के बारे में बता दिया। यह भी बता दिया कि उसे अंजन पर हमला करने वालों के बारे में कुछ नहीं पता है। अंजन ने मुकेश से बात की। मुकेश ने उसे अपनी समस्या के बारे में बताया। उसकी समस्या सुनकर अंजन ने उसे गुजरात के संजन जाकर किसी दामोदर पारिख से मिलने को कहा। उसने कहा कि वह वहाँ तक जाने के लिए पैसे एंथनी से ले ले। वह एंथनी को वापस कर देगा। दामोदर पारिख से मिले वह उसके लिए उचित व्यवस्था कर देंगे।

एंथनी मछुआरों की बस्ती में था। वह अंजन पर हुए हमले के बारे में पूँछताछ करने के लिए गया था। मुकेश ने बताया था कि उसने हमलावरों को मोटरबोट पर जाते हुए देखा था। एंथनी ने अंदाजा लगाया कि ज़रूर वह मोटरबोट उन्होंने मछुआरों की बस्ती से ली होगी। इसलिए यहाँ आया था। वह बस्ती के मुखिया से मिलने गया था।
उसने बस्ती के मुखिया जनार्दन से कहा कि वह अपने लोगों से पूँछकर बताएं कि उनमें से किसी ने हमले वाले दिन अपनी मोटरबोट किसी को दी थी। जनार्दन ने उसे आश्वासन दिया कि उसे कुछ समय दे। वह इस बारे में जानकारी प्राप्त कर उसे बताता है।
एंथनी जनार्दन के घर पर इंतज़ार करने लगा। करीब एक घंटे बाद जनार्दन एक मछुआरे को लेकर उसके पास आया।

उस मछुआरे का नाम विक्टर था। उसने बताया कि उस दिन एक आदमी उसके पास आया था। उसने कहा था कि कुछ समय के लिए उसकी मोटरबोट चाहिए। उसने उसके लिए अच्छे पैसे दिए थे। पैसों के लालच में उसने अपनी बोट दे दी।
विक्टर ने उस आदमी का हुलिया बताया। एंथनी एक अच्छा स्केच आर्टिस्ट भी था। वह जब भी किसी केस की पड़ताल के लिए जाता था तो अपने साथ अपनी स्केचबुक और पेंसिल लेकर जाता था। आवश्यकता पड़ने पर वह स्केच बना लेता था। विक्टर के बताए हुलिए के आधार पर उसने उस आदमी का स्केच बना लिया।
स्केच बनने के बाद उसने विक्टर को दिखाया। उसने स्केच को देखकर कहा कि वह आदमी ऐसा ही दिखता था। एंथनी ने उस स्केच को ध्यान से देखा। वह उस तस्वीर को अपनी आँखों में बसा लेना चाहता था।
स्केच के अनुसार उस आदमी का चेहरा लंबा था। लंबी नुकीली नाक थी। कंधे तक लंबे घुंघराले बाल थे। उसकी मूंछें और ठुड्ढी पर ट्रिम की गई दाढ़ी मिलकर एक गोला बना रही थीं।
विक्टर ने बताया था कि उसकी आँखें भूरे रंग की थीं। वह हिंदी बोल रहा था लेकिन बोलने के अंदाज़ से लगता था कि विदेश से आया है।

स्केच लेकर एंथनी अंजन से मिला। उसे स्केच दिखाकर वो बातें बताईं जो विक्टर ने बताई थीं। अंजन उस स्केच को ध्यान से देख रहा था। एंथनी उसके चेहरे पर आते हुए भावों को परखने का प्रयास कर रहा था। कुछ देर स्केच को देखने के बाद अंजन ने कहा,
"मुझे ऐसा तो नहीं लगता है कि मैं इसे जानता हूँ। मैं अभी अपने आदमी से कहता हूंँ कि इसकी एक कॉपी निकाल कर मुझे दे दे।"
"उसकी आवश्यकता नहीं है। आप इसे रख लीजिए।"
"फिर तुम इसे ढूंढ़ोगे कैसे ?"
अंजन ने अचरज से पूँछा। एंथनी हंसकर बोला,
"मेरी आँखों ने इसे स्कैन करके दिमाग में सेव कर दिया है। मैं तो इसे सिर्फ आपको दिखाने लाया था।"
एंथनी उठकर खड़ा हो गया। चलते हुए बोला,
"आप आराम से इस स्केच को देखकर याद करने की कोशिश करिएगा। शायद कुछ याद आ जाए।"
एंथनी चला गया। अंजन सोच रहा था कि यह आदमी भी कुछ अलग है। ऊपर से देखने में बेवकूफ जैसा लगता है। लेकिन इसमें कमाल की खूबियां हैं। सबसे बड़ी खूबी यह थी कि इस पर यकीन किया जा सकता था। तभी तो अंजन अपने सीक्रेट काम उससे करवाता था। उसे पूरा यकीन था कि वह उस पर हमला करवाने वाले का पता कर लेगा।
उसने अपना ध्यान एंथनी से हटाकर स्केच पर लगा दिया।

जब अंजन स्केच देख रहा था तब एंथनी ने महसूस किया था कि जैसे कुछ है जिसे वह याद करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन उसे याद नहीं आ रहा था। वह स्केच उसके पास छोड़ आया था। उसे स्केच की आवश्यकता भी नहीं थी। जब भी वह चाहता तो अपने दिमाग के मॉनीटर पर उस तस्वीर को देख सकता था।
विक्टर ने बताया था कि उस आदमी के बोलने के तरीके से लग रहा था कि वह विदेश से आया है। एंथनी ने इस सूत्र को पकड़ कर आगे बढ़ने के बारे में सोचा।

उसने सोचा कि वह जो भी होगा किसी होटल में ठहरा होगा। बीच हाउस से कुछ दूर एक फाइव स्टार होटल था। एंथनी ने अपनी जाँच की शुरुआत के लिए उसे ही चुना।

अंजन स्केच को ध्यान से देख रहा था। वह उलझन में था। कभी उसे लगता था कि वह इस आदमी को नहीं जानता है। पर जब वह इस बात के लिए अपना मन पक्का करने की कोशिश करता तो मन में आता कि एक बार और स्केच को देख ले।
कुछ था जिसके कारण उसे लगता था कि यह आदमी पहचाना हुआ है। पर उसे ऐसा क्यों लग रहा था वह बात वो पकड़ नहीं पा रहा था।
वह बहुत परेशान हो गया था। अभी तक वह होश खोने से पहले देखे गए व्यक्ति की झलक को लेकर उलझन में था। अब एक नई उलझन पैदा हो गई थी।

रिस्की लव - 19

नफीस किसी काम से होटल सी शोर में गया था। होटल की लॉबी में उसने एंथनी को देखा। उसे पता था कि एंथनी एक जासूस है। एक बार एक केस में वह उसकी मदद ले चुका था। उसने एंथनी को रोका। उसे देखकर एंथनी बोला,
"नफीस भाई... कैसे हो ?"
"मैं ठीक हूँ। तुम्हारा काम आजकल बहुत अच्छा चल रहा है। तभी इस होटल में आए हो।"
नफीस ने मज़ाक किया। एंथनी बोला,
"मुझे तो इतने ऐशो आराम पसंद नहीं आते। मैं तो ढाबे में जाना पसंद करता हूँ। वैसे तुम्हारा क्राइम शो तो धूम मचा रहा है।"
"ऊपरवाले का शुक्र है। तुम बताओ यहाँ क्या करने आए थे ?"
"एक काम के सिलसिले में आया था। तुम बताओ क्या किसी के साथ लंच करने आए हो।"
"मिलना था किसी से। अब चलता हूँ वह वेट कर रहा होगा।"
"ठीक है फिर कभी ऐसे ही मिल जाएंगे।"
नफीस होटल के अंदर चला गया। एंथनी कुछ देर लॉबी में खड़ा कुछ सोचता रहा फिर बाहर निकल गया।
एंथनी होटल के सिक्योरिटी इंचार्ज को जानता था। उसने उस आदमी का हुलिया बताकर कहा था कि वह सीसीटीवी फुटेज देखकर बताए कि अंजन पर हमले की तारीख के आसपास वैसा कोई आदमी होटल में था। उसने उस आदमी का रूम नंबर भी पता करने को कहा था।
उसे पूरी उम्मीद थी कि कोई ना कोई सफलता अवश्य मिलेगी।

दो दिनों के बाद सिक्योरिटी इंचार्ज ने उसे फोन करके बताया कि जिसके बारे में वह जानना चाहता है उसका पता चल गया है‌। अगर डीटेल चाहिए तो पाँच लाख रुपयों के साथ उसकी बताई जगह पर मिले।
एंथनी ने सारी बात अंजन को बताई। अंजन ने कहा कि वह उसकी मुंहमांगी रकम देने को तैयार है। लेकिन उसे उस आदमी की सारी फुटेज के साथ उसके बंगले पर आना होगा।

अंजन के बंगले में बने मीटिंग रूम में उसके सामने एंथनी और सिक्योरिटी इंचार्ज दर्शन वशिष्ठ बैठे थे। अंजन ने कहा,
"तुमने जो रकम मांगी है वह मिल जाएगी। पहले उस आदमी की सीसीटीवी फुटेज दिखाओ। जो भी उसके बारे में पता किया है सब बताओ।"
दर्शन ने अपने मोबाइल फोन को स्क्रीन प्रोजेक्टर से कनेक्ट किया। सामने स्क्रीन पर सीसीटीवी फुटेज चलने लगी।

उस फुटेज में लंबे बालों वाला वैसा ही आदमी दिखाई पड़ रहा था जैसा स्केच में था। फुटेज को रोककर दर्शन ने कहा,
"यह फुटेज उस दिन की है जब इस आदमी ने होटल में चेक इन किया था। मैंने पता किया है इस आदमी का नाम नीतीश सक्सेना है। लंदन से आया था।"
अंजन स्क्रीन पर फ्रीज़ हो चुकी नीतीश की तस्वीर को ध्यान से देख रहा था। उस नाम ने तो कोई हलचल नहीं पैदा की थी पर तस्वीर अभी भी उसे जानी पहचानी लग रही थी। उसने कहा,
"आगे भी कोई फुटेज है। उसे दिखाओ।"
दर्शन ने फुटेज आगे प्ले की। यह लिफ्ट की थी। नीतीश ने बारहवीं मंज़िल पर जाने का बटन दबाया। कुछ देर बाद लिफ्ट से निकलता दिखाई पड़ा। यह कॉरिडोर का सीसीटीवी था। नीतीश एक कमरे के पास गया कार्ड से दरवाज़ा खोलकर अंदर चला गया।
उसके बाद कुछ और सीसीटीवी फुटेज थीं। उनमें कुछ खास नहीं था।
दर्शन ने हमले वाले दिन सुबह की सीसीटीवी फुटेज दिखाई। उस फुटेज में नीतीश एक औरत के साथ होटल की लॉबी में दिखाई पड़ता है। लेकिन उस औरत की शक्ल दिखाई नहीं पड़ रही थी। अंजन को उस औरत की चालढाल और देह की बनावट जानी पहचानी सी लगी।
अगली फुटेज लिफ्ट से निकलने की थी। इस फुटेज में उस औरत का चेहरा दिखाई पड़ रहा था। उसे देखते ही अंजन ने कहा,
"थोड़ा पीछे करके औरत के चेहरे पर रोको।"
दर्शन ने उसके कहे अनुसार औरत के चेहरे पर फ्रेम को रोक दिया। स्क्रीन पर चेहरे को देखकर अंजन की आँखें फटी की फटी रह गईं। उसने अपने आप पर काबू किया। दर्शन से बोला,
"मुझे सारी सीसीटीवी फुटेज दे दो। अपना पैसा लो और जाओ।"
दर्शन ने सीसीटीवी फुटेज दे दी। अपने वादे के मुताबिक अंजन ने उसे पैसे दे दिए। दर्शन पैसे लेकर चला गया।
एंथनी समझ गया था कि अंजन का उस औरत से कोई संबंध है। वह इस बात की प्रतीक्षा कर रहा था कि अंजन उससे कुछ कहे। अंजन अभी एंथनी से कोई बात नहीं करना चाहता था। उसने एंथनी से कहा कि अभी वह जाए। वह बाद में उसे बुलाकर बात करेगा। एंथनी बिना कुछ बोले चुपचाप चला गया।

नफीस अपने ऑफिस में बैठा था। वह अंजन के केस के बारे में ही सोच रहा था। अभी तक उसे इस केस में कोई भी सुराग नहीं मिल पाया था। उसे लगता था कि मुकेश इस केस की गुत्थी सुलझा सकता है। पर उसका कोई पता नहीं चल पाया था।
उसके केबिन के दरवाज़े पर नॉक हुई। उसके क्राइम शो का डायरेक्टर जॉन पीटर्स अंदर आया। नफीस ने अपनी कुर्सी से उठकर उसका स्वागत किया। जॉन ने बैठते हुए कहा,
"इस बार एक लेडी सुपारी किलर पर एपीसोड बनाने की सोच रहा था। यूपी की ललिता देवी पहले एक साधारण सी औरत थी। आज कॉन्ट्रैक्ट किलिंग में उसका नाम सफलता का दूसरा नाम बना हुआ है।"
नफीस ने अपना ध्यान अंजन से हटाकर जॉन की बात पर लगा दिया। उसने भी ललिता के बारे में बहुत कुछ सुना था।

उनकी क्राइम सीरीज़ में अब तक किसी महिला अपराधी की कहानी नहीं दिखाई गई थी। उसे जॉन का आइडिया अच्छा लगा। उसने कहा,
"जॉन बहुत अच्छा सुझाव है तुम्हारा। मैं आज ही ललिता की कहानी पर काम करना शुरू कर देता हूँ।"
"मैं भी यही कहने आया था। अगला एपीसोड टेलिकास्ट के लिए तैयार है। उसके बाद वाले एपीसोड की थोड़ी सी शूटिंग बाकी रह गई है। तब तक तुम इस पर काम शुरू कर दो।"
जॉन उठकर चला गया। उसके जाने के कुछ ही क्षणों बाद विनोद नफीस के पास आया। उसकी शक्ल बता रही थी कि उसके पास बताने लायक कोई बात है। नफीस ने कहा,
"क्या बात है विनोद चेहरे पर चमक है तुम्हारे ?"
विनोद ने कहा,
"एक बात है। मुझे लगता है कि काम की साबित हो सकती है।"
नफीस अब जानने के लिए उत्सुक हो चुका था। उसने कहा,
"जो भी है बताओ। फिर देखते हैं कि बात काम की है या नहीं।"
"सर... आपको वह जासूस याद है। कुछ अजीब सा था। आपने एक केस में उसकी मदद ली थी।"
"एंथनी....उसका अंजन से क्या संबंध है ?"
"सर संबंध तो है। मैंने उसे एक आदमी के साथ अंजन के बंगले में घुसते देखा था।"
"जो आदमी उसके साथ था तुम उसे जानते हो ?"
"नहीं सर मैं उसे नहीं पहचानता हूँ। पर वह लंबा और तगड़े शरीर का था।"
विनोद की बात सुनकर नफीस अपना दिमाग दौड़ाने लगा। उसे सी शोर होटल में एंथनी के साथ हुई मुलाकात याद आई। उस दिन तो उसने ध्यान नहीं दिया। लेकिन आज उसे ऐसा लग रहा था जैसे एंथनी उस होटल में अंजन के किसी केस के सिलसिले में ही गया था। उसे लगा कि अंजन पर हमले से बड़ा कौन सा केस हो सकता है। कुछ सोचकर वह बोला,
"विनोद होटल सी शोर अंजन के बीच हाउस शिमरिंग स्टार्स के पास ही है ना ?"
"हाँ सर... यही कोई 2 किलोमीटर दूर होगा। पर आप यह क्यों पूछ रहे हैं ?"
नफीस ने उसे एंथनी के साथ होटल सी शोर में हुई मुलाकात के बारे में बताया।
"विनोद अगर एंथनी अंजन के लिए काम कर रहा है तो ज़रूर उस पर हमला किसने किया है इस बात की जांँच कर रहा होगा। उसी जांँच के सिलसिले में वह होटल गया होगा। इसका मतलब अंजन पर हमला करने वाला उसी होटल में ठहरा होगा।‌ हमला करने वाले आदमी से संबंधित कोई विशेष जानकारी देने के लिए ही एंथनी उस दूसरे आदमी को लेकर अंजन के बंगले पर गया होगा।"
नफीस की कही बात विनोद को एकदम सही लगी। उसने कहा,
"आप तो जीनियस हैं सर। मैंने एक बात बताई और आपने इतनी सारी बातों का अंदाज़ा लगा लिया।"
"क्राइम रिपोर्टर हूंँ विनोद। कई सारे केस इन्वेस्टिगेट किए हैं। इसी तरह कड़ी से कड़ी जोड़कर आगे बढ़ना पड़ता है।"
नफीस कुछ सोचकर बोला,
"होटल सी शोर में अपने कांटेक्ट से पता करके देखो कि अंजन के बंगले पर जाने वाले आदमी का जो हुलिया तुम बता रहे थे उससे मिलता जुलता कौन है जो होटल में काम करता है। अगर उसका पता चल जाए तो हम बहुत कुछ जान सकते हैं।

"
"ठीक है सर फिर मैं जाकर पता करने की कोशिश करता हूँ।"
विनोद अपने काम के लिए निकल गया। नफीस एक बार फिर अंजन के केस के बारे में सोचने लगा।

एंथनी के जाने के बाद अंजन ने एक बार फिर वह सीसीटीवी फुटेज चलाई। उस औरत के चेहरे को स्क्रीन पर फ्रीज़ कर दिया। पिछले कुछ मिनटों से वह उसे ताक रहा था। सीसीटीवी फुटेज में जो चेहरा दिख रहा था उसे देखने के बाद कुछ समय तक तो उसे यकीन ही नहीं हुआ कि ऐसा सच हो सकता है। पर सच उसके सामने था।
उस चेहरे को देखकर उसे समझ आ गया था कि स्केच वाले आदमी का चेहरा जाना पहचाना क्यों लग रहा था। अब उसका नाम और चेहरा पूरी तरह उसे याद आ चुका था। हलांकी उस आदमी ने अपना नाम गलत बताया था और हुलिया बहुत हद तक बदल लिया था। खासकर नाक जो पहले इतनी नुकीली नहीं थी। किसी प्लास्टिक सर्जन का कमाल था।
उसने अपने दिमाग पर ज़ोर डाला और उस झलक को याद करने की कोशिश करने लगा जो होश खोने से पहले उसने देखी थी। अब उसे समझ आ रहा था कि शक्ल ना दिखने के बावजूद वह क्या था जो उसे पहचाना हुआ लग रहा था। वह थीं नकाब के पीछे से झांकती आँखें।

सब जानने के बाद अंजन गुस्से से उबलने लगा। उसने अपना फोन उठाया। फोन पर किसी को कुछ निर्देश दिए।
कुछ देर बाद वह अपने निर्माणाधीन रिज़ॉर्ट की तरफ जा रहा था।

रिस्की लव - 20

अंजन अपने निर्माणाधीन रिज़ॉर्ट के उसी हॉल में बैठा था जहाँ उसने पंकज की हत्या की थी। उसकी आँखों से चिंगारियां निकल रही थीं।
तरुण काला उसके सामने खड़ा डरकर कांप रहा था। उसके हाथ पीछे की तरफ बंधे हुए थे। वह सर झुकाए हुए था। अंजन उठा और उसके बाल पकड़ कर उसका चेहरा अपनी तरफ करके बोला,
"हरामखोर मेरे साथ धोखा किया तूने।"
तरुण को लग रहा था कि शायद उसके और पंकज के बीच जो दोस्ती हुई थी उसी के कारण अंजन के आदमी उसे उठाकर यहाँ ले आए हैं। अंजन के गुस्से को देखकर वह थर थर कांप रहा था। उसने कहा,
"मैंने कोई धोखा नहीं दिया है। वह पंकज खुद मेरे पास आया था। पर मैंने कभी आपका कोई राज़ उसे नहीं बताया।"
अंजन ने उसके पेट में ज़ोर से अपना घुटना मारा। तरुण बिलबिलाता हुआ ज़मीन पर गिर गया। अंजन ने उसे बाल पकड़कर उठाया। तरुण दर्द से तड़प रहा था। अंजन ने उसकी आँखों में देखकर कहा,
"पता है... क्योंकी ऐसा करने के बाद तू अब तक ज़िंदा ना होता।"
"तो आप किस धोखे की बात कर रहे हैं ?"
तरुण ने दर्द से कराहते हुए कहा। अंजन ने उसके बालों पर अपनी पकड़ कस दी। तरुण चीख पड़ा। अंजन ने कहा,
"सच सच बताना नहीं तो मारने से पहले इससे बहुत ज्यादा दर्द दूँगा।"
तरुण को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अंजन किस विषय में बात कर रहा है। पर वह मजबूर था। उसने गिड़गिड़ा कर कहा,
"बताइए तो बात क्या है ? मैंने क्या धोखा किया है आपके साथ ?"
अंजन वापस जाकर कुर्सी पर बैठ गया।

उसकी तरफ गुस्से से देखकर बोला,
"मानवी और उसके यार का क्या किया था तूने ?"
यह सवाल सुनते ही तरुण दहशत में आ गया। उस दहशत में सारा दर्द भूल गया। बरसों से कब्र में दफ़न बात अचानक सामने आ गई थी।
अंजन उसके चेहरे के भावों को पढ़ रहा था। उसने कहा,
"अब सिर्फ सच बाहर निकलना चाहिए। नहीं तो तुम्हारी चीखें देर तक गूंजती रहेंगी। सच तो मैं तुम्हारे मुर्दा जिस्म से भी निकलवा लूँगा।"
अंजन की आँखों में जो हैवानियत दिख रही थी उससे तरुण की रुह कांप गई थी। वह जानता था कि उसकी मौत अब तय है। सच बता देने से शायद कम तकलीफदेह हो। कांपते हुए उसके मुंह से निकला,
"दोनों बचकर भाग गए थे।"
अंजन के सामने सीसीटीवी फुटेज का वह चेहरा घूम गया। वह मानवी का था। लंबे बालों वाला आदमी उसका प्रेमी निर्भय वाधवा था। वह एक बार फिर उठा। गुस्से से तरुण के मुंह पर मुक्का मार दिया। उसके मुंह से खून का फव्वारा फूट पड़ा। वह ज़मीन में पड़ा तड़प रहा था। अंजन अपने आदमियों पर चीखा,
"उठाओ इसे...."
उसके आदमियों ने तरुण को उठाया। वह खड़ा नहीं हो पा रहा था। पैर से कुर्सी खिसकाते हुए अंजन बोला,
"इस पर बैठा दो।"
अंजन के आदमियों ने तरुण को कुर्सी पर बैठा दिया। तरुण बेहोशी की हालत में था‌। अंजन ने कहा,
"पानी डालो इस पर और होश में लाओ।"
तरुण पर पानी डालकर उसे होश में लाया गया। अंजन दूसरी कुर्सी खींचकर उसके सामने बैठ गया। तरुण खौफज़दा उसकी तरफ देख रहा था। अंजन उसे जिस तरह से घूर रहा था ऐसा लग रहा था कि उसकी आँखों से आग निकल कर तरुण को जला रही है। अंजन ने कहा,
"उस दिन जो हुआ सबकुछ सच सच बता दो। वरना ना मरने दूँगा और ना चैन से ज़िंदा रहने दूँगा।"
तरुण ने उस दिन जो घटा सब विस्तार से बताया।

तरुण, मानवी और उसके दोस्त निर्भय को मारने के इरादे से लोनावला पहुँचा। इंद्रयाणी नदी के किनारे कैंपिंग कर रहे मानवी और उसके दोस्त पर सारा दिन नज़र रखे रहा। उस समय वहाँ आसपास कुछ लोग थे। वह अंधेरा होने की राह देख रहा था।
शाम ढलने के बाद मानवी और निर्भय आग जलाकर उसके पास बैठे थे। दोनों शराब पी रहे थे। एक पेड़ के पीछे छिपा हुआ तरुण मानवी के सर पर निशाना लगाए हुए था। सही मौका देखकर तरुण ने ट्रिगर दबाया ही था कि ठीक उसी समय मानवी खड़ी हो गई। वह निर्भय की तरफ घूम गई। गोली उसके बाज़ू को छूकर निकल गई।
पहली बार तरुण की गोली निशाने पर नहीं लगी थी। दोबारा गोली चलाने से पहले ही निर्भय ने फुर्ती से मानवी का हाथ पकड़ा और जंगल में गायब हो गया। तरुण उनके पीछे भागा। जिस अंधेरे को वह अपना हथियार बनाना चाहता था वह अब उन दोनों के लिए सहायक हो रहा था। पर तरुण जानता था कि मानवी का एक बाज़ू घायल है। उससे खून निकल रहा है। उसका खून ही उसे खोजने में मदद करेगा।
टार्च की रौशनी में खून के निशान देखता वह आगे बढ़ रहा था।

घायल मानवी के लिए बहुत दूर तक भाग पाना संभव नहीं था। खून के निशान देखते हुए वह एक जगह पहुँचा जहाँ मिट्टी का एक ढेर सा था। उसे लगा कि दोनों इसके पीछे ही छिपे होंगे। गन तानकर वह उस तरफ बढ़ा। तभी निर्भय ने पेड़ की टहनी से उस पर वार किया। वह गिर पड़ा। उसके हाथ से गन छिटक गई। निर्भय और वह दोनों गुत्थमगुत्था हो गए। दोनों ही गन उठाने की कोशिश कर रहे थे।
मानवी अपना घायल बाज़ू पकड़े हुए वहाँ आई। उसने वह गन उठा ली। पर उसके हाथ कांप रहे थे।
तरुण ने निर्भय को दूर ढकेला और तेज़ी से उठकर गन मानवी से छीन ली। अब दोनों तरुण की गन के निशाने पर थे। मानवी ने उससे पूँछा,
"तुम हमें क्यों मारना चाहते हो ?"
तरुण ने कहा,
"तुम्हारे पति अंजन का हुक्म है। उसके हुक्म पर ही मैंने तुम्हारे भाइयों को मारा था। अब तुम दोनों को मारूँगा।"
तरुण को लगा कि मानवी तो घायल है। कुछ कर नहीं पाएगी। लेकिन निर्भय अधिक खतरनाक है। उसने पहले निर्भय को मारने का निर्णय लिया।
पर वह गलत था। मानवी ने पास पड़ी टहनी उठाई और उस पर वार किया। हाथ हिल जाने से इस बार भी निशाना चूक गया। गोली निर्भय के कंधे पर लगी। गन दूर गिर गई। तरुण गन उठाने के लिए लपका।
अपना दर्द भूलकर निर्भय ने फिर मानवी का हाथ पकड़ा। दोनों फिर भाग निकले। तरुण गन छोड़कर उनके पीछे भागा। कुछ दूर जाने पर मानवी और निर्भय ऐसी जगह पहुँचे जहाँ नीचे इंद्रयाणी नदी बह रही थी। तरुण के सामने दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़ कर नदी में कूद गए।

कुछ देर तक तरुण गुस्से में हाथ मलता रहा। उसके शिकार उससे बचकर भाग गए थे। बहुत देर तक वहीं बैठा वह सोचता रहा कि अंजन से क्या कहेगा। उसे लगा कि दोनों ही घायल थे। नदी के तेज़ बहाव में उनका बचना कठिन है।
तरुण ने आकर अंजन से कह दिया कि उसने दोनों को मारकर शव इंद्रयाणी नदी में बहा दिए। कुछ दिनों तक वह डरता रहा कि कहीं उन दोनों में से कोई ज़िंदा ना बच गया हो। लेकिन जब कोई नहीं आया तो उसे पूरा यकीन हो गया कि दोनों नदी में डूबकर मर गए।

सारी सच्चाई बताने के बाद तरुण अब उस पल के इंतज़ार में था जब अंजन झूठ बोलने के लिए उसे मार देगा। वह कल्पना कर डर रहा था कि उसकी मौत ना जाने कितनी दर्दनाक होगी।
सच्चाई जानकर अंजन कुछ दूर जाकर खड़ा हो गया। वह गुस्से से पागल हो रहा था। उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी नसों में लावा बह रहा हो। वह वापस तरुण के पास आया। कुछ देर तक उसे घूरता रहा। तरुण को वह साक्षात यमराज नज़र आ रहा था।
अंजन ने तरुण का सर अपने हाथों में पकड़ लिया। ज़ोर से चिल्लाया और उसकी गर्दन तोड़ दी।
तरुण के मुर्दा जिस्म को घसीटते हुए अंजन के आदमी ठिकाने लगाने ले गए।

अपने घर के बार में बैठा अंजन शराब के नशे में चूर था। गुस्से में उसने आज बहुत अधिक पी ली थी।

मानवी और उसके प्रेमी ने मिलकर उस पर हमला किया। यह सोचकर वह अपने आप पर काबू नहीं रख पा रहा था। उसे यह अपनी हार की तरह लग रहा था। हाथ में पकड़ा गिलास गुस्से में ज़मीन पर फेंकते हुए बोला,
"छोडू़ँगा नहीं तुम दोनों को। तुमने मुझसे टकराने की कोशिश की है। मुझे मारना चाहते थे। अब तुम दोनों को भागने के लिए दुनिया छोटी पड़ेगी।"
वह उठा और लड़खड़ाता हुआ अपने कमरे में जाकर बिस्तर पर लेट गया। वह सोच रहा था कि उस दिन अगर मुकेश ने उसे सही समय पर हॉस्पिटल ना पहुँचाया तो उसका बचना मुश्किल हो जाता। वह मन ही मन मुकेश के लिए कृतज्ञता का भाव महसूस करने लगा।
मुकेश के बारे में सोचते हुए उसके मन में एक सवाल उठा। उस दिन उसके शिमरिंग स्टार्स जाने का प्रोग्राम पहले से तय नहीं था। वह तो उसने शाम को बनाया था। ऐसे में उसके बीच हाउस पर होने की खबर मानवी और निर्भय तक कैसे पहुँची थी ? कौन था जिसने यह खबर उन दोनों तक पहुंँचाई ?
यह सवाल उसके मन को परेशान करने लगे। पंकज ने मरने से पहले कहा था कि उसने हमला नहीं करवाया। पर ऐसा हो सकता था कि उसने तरुण को बताया हो कि वह बीच हाउस जा रहा है। तरुण ने इसकी सूचना दी हो।
पर मानवी और निर्भय के जीवित रहने की बात सुनकर जिस तरह वह चौंका था उससे नहीं लगता था कि उसे पहले से उनके जीवित होने के बारे में पता था। इस स्थिति में वह उन्हें सूचना कैसे दे सकता था।
वह व्यक्ति कौन था जिसने उसके बीच हाउस जाने की सूचना मानवी और निर्भय को दी होगी। यह प्रश्न अब उसके मन को मथ रहा था। वह जो भी था उसके आसपास रहकर उसके साथ गद्दारी कर रहा था।
यह सोचकर कि उसके आसपास पंकज, तरुण और मुखबिरी करने वाले उस शख्स जैसे गद्दार थे उसका खून खौल उठा। पंकज और तरुण को तो उसने उनके किए की सजा दे दी थी। अब वह उस मुखबिर को सजा देना चाहता था।
वह परेशान था। तभी उसके दिमाग में एक विचार आया। यदि वह मानवी और निर्भय तक पहुंँच जाए तो वह गद्दार अपने आप ही उसके सामने आ जाएगा।
उसने तय कर लिया कि वह जल्दी से जल्दी उन दोनों तक पहुँचेगा।

रिस्की लव - 21

अंजन ने लंदन में रहने वाले अपने दोस्त सागर खत्री को फोन किया। सागर को बताया कि उस पर हुए हमले में दो लोगों पर शक है। हमला करने वाला लंदन से आया था। उसने अपना नाम नीतीश सक्सेना बताया था। उसके साथ एक औरत भी थी।
उसने उन दोनों का हुलिया बताने के बाद कहा कि उसके पास उन दोनों का सीसीटीवी फुटेज है। ‌वह फुटेज उसे ईमेल पर भेज रहा है। अपने आदमियों को काम पर लगा दो। जो भी खर्च हो वह देने को तैयार है। लेकिन इन दोनों का पता जितनी जल्दी हो सके लगाकर उसे बताए।
सागर खत्री ने आश्वासन दिया कि वह अंजन पर हमला करने वालों को ढूंढ़ने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। जितनी जल्दी हो सके वह सारी डिटेल्स भेज दे।

अंजन ने सारे डीटेल्स सागर खत्री को ईमेल पर भेज दिए।

अंजन ने डीटेल्स सागर खत्री को भेज दिए थे। लेकिन अब उसका मन भारत में नहीं लग रहा था। वह चाहता था कि खुद लंदन जाकर मानवी और निर्भय को खोजे। उन्हें उनके किए की सज़ा दे। इसके अलावा उसका मन मीरा से मिलने के लिए भी तड़प रहा था। वह उसे मनाना चाहता था।
उसका घाव पूरी तरह भर चुका था। अब लंदन जाने में कोई दिक्कत नहीं थी। उसने अपने ट्रैवल एजेंट से लंदन के लिए टिकट करवाने को कहा।
लंदन जाने से पहले उसने एंथनी को अपने बंगले पर बुलवाया। उसने एंथनी से कहा कि हमलावरों की पहचान सामने लाने में उसने बहुत मदद की है। उसका काम हर बार की तरह लाजवाब है। अभी उसे उसकी सेवाओं की ज़रूरत नहीं है। इसलिए अब तक उसने जो भी किया उसका हिसाब कर ले। भविष्य में जब भी उसकी ज़रूरत होगी अंजन उससे संपर्क कर लेगा।
अंजन ने एंथनी का हिसाब पूरा कर दिया।

विनोद नफीस का उसके घर के पास वाले रेस्टोरेंट में इंतज़ार कर रहा था। नफीस को आने में कुछ देर हो गई थी। करीब पंद्रह मिनट से विनोद उसकी राह देख रहा था। नफीस की बिल्डिंग से इस रेस्टोरेंट तक का रास्ता बमुश्किल पाँच मिनट का था। विनोद ने तो अपने घर से निकलते समय नफीस को फोन कर दिया था। उसे लगा था कि जब वह रेस्टोरेंट में पहुँचेगा तो नफीस पहले से ही मौजूद होगा। लेकिन उसके आने के पंद्रह मिनट बाद भी नफीस नहीं आया था।
उसने सोचा कि पाँच मिनट और इंतज़ार कर ले उसके बाद फोन करके पूँछेगा। इंतज़ार करते हुए पांँच की जगह दस मिनट बीत गए। लेकिन नफीस का कोई पता नहीं था। विनोद ने अपना फोन उठाया और नफीस का नंबर मिलाया। दो बार पूरी घंटी जाने के बाद भी नफीस ने फोन नहीं उठाया। इस पर विनोद को बहुत चिंता होने लगी।
वह रेस्टोरेंट से निकलकर नफीस की बिल्डिंग की तरफ चल दिया। नफीस के घर पहुँचने पर पड़ोसी से पता चला कि शाहीन का ऑफिस से लौटते हुए एक्सीडेंट हो गया था। उसे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। नफीस वहीं गया है। विनोद हॉस्पिटल का नाम पूँछकर वहीं चला गया।
वह हॉस्पिटल पहुँचा ही था कि नफीस का फोन आया। उसने बता दिया कि उसे सब पता चल गया है। वह शाहीन को देखने हॉस्पिटल आया है।
अंदर जाकर वह नफीस से मिला। शाहीन का हालचाल पूँछा। नफीस ने बताया कि सर पर कोई चोट नहीं है। डॉक्टर एक्सरे के लिए ले गए हैं। शायद बाएं पैर में फ्रैक्चर है।
वेटिंग एरिया में बैठे हुए नफीस ने विनोद से पूँछा,
"क्या बात थी जो बताने के लिए तुमने मुझे रेस्टोरेंट में बुलाया था ?"
"सर दो बातें हैं। एक तो उस आदमी के बारे में पता चल गया जो एंथनी के साथ अंजन के बंगले पर गया था। वह होटल का सिक्योरिटी इंचार्ज दर्शन वशिष्ठ है।"
नफीस कुछ सोचकर बोला,
"फिर तो ज़रूर उसके पास हमला करने वाले का कोई सुराग रहा होगा।

"
"बिल्कुल सर तभी एंथनी उसको अंजन के पास ले गया होगा।"
"दूसरी क्या बात है ?"
"सर यह बात कुछ अजीब और चौंकाने वाली है।"
नफीस ने आश्चर्य से उसकी तरफ देखा। विनोद बोला,
"अंजन लंदन चला गया है।"
यह सुनकर नफीस को सचमुच आश्चर्य हुआ। उसने कहा,
"लंदन ? सचमुच यह बड़ी अजीब बात है। कुछ समय पहले उस पर जानलेवा हमला हुआ था। वह उसकी तहकीकात करवा रहा था। अब अचानक लंदन चला गया।"
"सर मुझे तो लगता है कि उस पर हमला करने वाले का संबंध लंदन से है। यही जानकारी पाने के बाद वह लंदन चला गया।"
नफीस ने खुश होकर कहा,
"वाह विनोद.... बात तो पते की करी है तुमने। यही बात होगी। इसलिए तो वह इतनी जल्दी लंदन चला गया।"
तभी नर्स ने आकर कहा कि डॉक्टर नफीस को बुला रहे हैैं। विनोद ने उससे कहा कि वह शाहीन का ध्यान रखे। अगर कोई और सूचना मिलेगी तो वह बता देगा। विनोद वहाँ से चला गया।
डॉक्टर ने नफीस को बताया कि शाहीन के बाएं पैर में फ्रैक्चर है। उसे प्लास्टर चढ़ाया जाएगा। आज रात शाहीन अस्पताल में ही रहेगी। कल सुबह उसका प्लास्टर होने के बाद डिस्चार्ज मिल जाएगा।

नफीस शीरीन के पास गया। वह दर्द में थी। उसने नफीस से कहा,
"इतने दिनों के बाद तो दोबारा जॉब शुरू किया था। अब यह हो गया। फिर घर में बंद रहना पड़ेगा।"
"शीरीन ऐसी बातें मत करो। ज़िंदगी में उतार चढ़ाव आते ही रहते हैं।"
शीरीन की मनोदशा अच्छी नहीं थी। नफीस की बात सुनकर गुस्से से बोली,
"मेरी जिंदगी में तो सिर्फ उतार ही उतार है। अच्छा वक्त तो बस झलक दिखाकर चला जाता है।"
नफीस उसे परेशान नहीं करना चाहता था। वह चुप हो गया। उसके सर पर प्यार से हाथ फेरने लगा। तभी शाहीन के अम्मी, अब्बा और उसकी छोटी बहन नाज़नीन आ गए। अपने घरवालों को देखकर शाहीन भावुक हो गई।‌ नफीस बाहर चला गया ताकी वह अपने अम्मी और अब्बू से बात कर सके।
वह शाहीन की मानसिक स्थिति को समझ रहा था। अपने बच्चे को खो देने का दुख वह भूल नहीं पाई थी। वही कहाँ उस दर्द को भूला था। बस अपने दर्द को सीने में छिपा लिया था। वह कमज़ोर पड़ता तो शाहीन और भी अधिक टूट जाती।
अभी भी उसे अपने बच्चे की नन्हीं उंगलियों का स्पर्श महसूस होता था। वह बोलना सीख रहा था। शाहीन ने उसे अम्मी अब्बा बोलना सिखाया था। उसे देखकर अपनी तोतली जुबान से अब्बा अब्बा कहकर उसकी गोद में आकर बैठ जाता था। ठुमक ठुमक कर चलता था और खिलखिला कर हंसता था।
अपने बच्चे को याद करके उसकी आँखों में आंसू आ गए।
नाज़नीन उसके बगल में आकर बैठ गई।‌ नफीस ने अपने आप को काबू कर लिया।‌ नाज़नीन ने पूँछा,
"आपा का एक्सीडेंट कैसे हुआ ?"
"ऑफिस से निकल कर ऑटो स्टैंड की तरफ बढ़ रही थी। एक बाइक तेज़ी से आकर टकरा गई।‌ शाहीन गिर पड़ी। सर पर तो चोट नहीं आई है। पर बाएं पैर में फ्रैक्चर है। कल प्लास्टर चढ़ेगा। फिर छुट्टी मिल जाएगी।

"
"अम्मी कह रही थीं कि आपा को अपने साथ ले जाएंगी।"
"क्यों ? मैं उसकी देखभाल कर लूँगा।"
नाज़नीन ने प्यार से कहा,
"मुझे पता है आप आपा को बहुत चाहते हैं।‌ लेकिन आप अकेले कैसे संभालेंगे ? वहाँ हम सब हैं। भाईजान भी पास ही रहते हैं।"
"मैं संभाल लूँगा। ज़रूरत पड़ी तो तुम लोगों को बुला लूँगा।"
नफीस रूम में गया। शाहीन अपनी अम्मी से बात कर रही थी।‌ नफीस ने उससे पूँछा,
"तुमको लगता है कि मैं तुम्हारी देखभाल नहीं कर पाऊँगा।"
उसके इस सवाल पर शाहीन चौंक गई। वह कुछ बोलती उससे पहले उसकी अम्मी ने कहा,
"हमारे साथ जाएगी तो इसमें बुरा क्या है ?"
नफीस ने उनकी बात को अनसुना करके फिर पूँछा,
"शाहीन तुम बताओ। तुम क्या चाहती हो ?"
शहीन ने उसे समझाना चाहा। पर उसकी बात को काटकर उसकी अम्मी ने कहा,
"उस पर ज़ोर मत डालो। इस मुश्किल वक्त में उसे अपनों की ज़रूरत है। एक बार देख चुके हैं कि तुम कैसे ज़िम्मेदारी निभाते हो।"
अपनी अम्मी की यह बात सुनकर शाहीन दंग रह गई। वह जानती थी कि इस बात ने नफीस को बहुत तकलीफ दी होगी। वह नफीस से कुछ कहने जा रही थी कि वह खुद बोला,
"सही है शीरीन। इस वक्त तुम्हारे अपने ही तुम्हारी मदद कर पाएंगे। मैं तुम पर कोई दबाव नहीं डाल रहा।‌"
कहकर वह रुम से चला गया।‌ गुस्से में हॉस्पिटल से निकल गया।
नफीस हॉस्पिटल के बाहर आकर एक बेंच पर बैठ गया। शीरीन की अम्मी की बात उसे नश्तर की तरह चुभी थी। उस दिन की घटना उसके दिमाग में ताज़ा हो गई।
शीरीन किसी ज़रूरी काम से अपने भाई के घर गई हुई थी। नफीस की छुट्टी थी इसलिए बच्चे को उसके पास छोड़ गई थी। नफीस खुश था कि आज अपने बेटे के साथ खेलेगा। बच्चे के साथ खेलने के बाद वह उसे नहलाने की तैयारी करने लगा। उसके लिए एक बाथ टब लेकर आया था। उसने उसमें पानी भरा। बच्चे के कपड़े उतार कर नहलाने जा रहा था कि तभी किसी का फोन आ गया। वह बात करने के लिए बालकनी में चला गया। उस वक्त वह अपनी एक क्राइम स्टोरी पर काम कर रहा था। फोन उसी सिलसिले में था। बात करते हुए देर हो गई।
जब वह लौटकर आया तो जो मंजर उसके सामने था उसे देखकर दहल गया। बच्चा मुंह के बल टब में गिरा हुआ था। हिल डुल भी नहीं रहा था।
उस दिन उससे सचमुच लापरवाही हुई थी। उस लापरवाही की जितनी बड़ी सजा उसे चुकानी पड़ी थी वह ही जानता था। जैसे जिस्म पर दाग कर कोई निशान बना देता है वैसे ही उसके दिल पर निशान बन गया था।
वह निशान रह रहकर दर्द देता था। पर आज शीरीन की अम्मी ने उसे खरोंच कर घाव कर दिया था।

Jan 8, 2022

#24

रिस्की लव - 22

निर्भय अपने कमरे की खिड़की से समुद्र की बहती हुई लहरों को देख रहा था। अभी उसे खबर मिली थी कि अंजन उसकी और मानवी की तलाश करते हुए लंदन पहुंँच गया है।

जैसे समुद्र की लहरें किनारे पर आकर टकरा रही थीं वैसे ही उसके मन में यादों की लहरें शोर मचा रही थीं।

उसके पैर में गोली लगी थी। बहुत दूर तक भाग सकना संभव नहीं था। घायल मानवी का भी यही हाल था। अंजन का भेजा हुआ आदमी यमदूत की तरह उन दोनों के पीछे लगा हुआ था। उसके हाथों मौत पक्की थी। भागते हुए निर्भय ने नीचे बहती इंद्रयाणी नदी को देखा। उसकी गोद में जीवन बचाने की कोई उम्मीद थी। उसने मानवी की तरफ देखा। वह उसका इशारा समझ गई। दोनों ने एक दूसरे का हाथ पकड़ा और नीचे बहती नदी में कूद गए।

उसे जब होश आया तो वह अस्पताल में था। उसे होश में आया देखकर नर्स ने फौरन डॉक्टर को सूचना दी। डॉक्टर ने आकर उसे चेक किया। निर्भय ने उनसे पूँछा,
"डॉक्टर मैं किस अस्पताल में हूँ ? कितने समय से यहाँ पर हूँ ?"
डॉक्टर ने जवाब दिया,
"यह जिला अस्पताल है। परसों देर रात कुछ गांव वाले आपको यहाँ लेकर आए थे। आपके पैर में गोली लगी थी। हमने ऑपरेशन करके गोली निकाल दी। पैर को कोई नुक्सान नहीं हुआ है। घाव भरने में कुछ दिन लगेंगे। आप आसानी से चल फिर सकेंगे। किस्मत अच्छी थी कि उस रात एक गांव वाले को आप नदी के किनारे मिल गए। वो लोग आपको सही समय पर अस्पताल ले आए।"
निर्भय को उस दिन की घटनाएं याद आईं। उसे मानवी की याद आई। उसने पूँछा,
"मानवी कहाँ है ?"
डॉक्टर ने आश्चर्य से कहा,
"कौन मानवी ?"
निर्भय ने समझाया,
"उस दिन मेरे साथ एक औरत भी मिली होगी। हम दोनों एक साथ ही नदी में गिरे थे।"
"जी नहीं....गांव वाले सिर्फ आपको लेकर आए थे। आपके साथ कोई नहीं था। अब आप आराम कीजिए।"
कहकर डॉक्टर चला गया। निर्भय सोच में पड़ गया। दोनों एक साथ हाथ पकड़कर नदी में कूदे थे। उसे याद था कि दोनों एक साथ ही पानी से टकराए थे। कुछ देर एक साथ बहे भी थे। उसके बाद क्या हुआ उसे कुछ याद नहीं आ रहा था। वह मानवी को लेकर परेशान हो गया।
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उस गांव में गया जहाँ लोगों ने उसे नदी के किनारे पाया था। उसने गांव वालों का शुक्रिया अदा किया। गांव वालों से पूँछा कि उन्हें आसपास किसी औरत के पाए जाने की कोई सूचना मिली है। पर आस पास के गांव से ऐसी कोई सूचना नहीं मिली थी।
उसने अपनी तरफ से मानवी को तलाश करने की कोशिश की थी। पर कोई सफलता नहीं मिली। उसे लगा कि शायद मानवी बच नहीं पाई। वह मुंबई वापस नहीं जाना चाहता था। इसलिए वहाँ से अपने एक दोस्त के पास औरंगाबाद चला गया। वहाँ उससे मदद लेकर सिंगापुर चला गया। वहाँ उसकी बहुत जान पहचान थी। उनकी सहायता से उसने वहाँ एक छोटा सा बिज़नेस शुरू कर दिया। इस बार उसे सफलता भी मिली।

मानवी ने आकर उसके कंधे पर हाथ रखा। यादों की उठती हुई लहरें शांत हो गईं। निर्भय वर्तमान में लौट आया। मानवी ने कहा,
"यहाँ खड़े क्या कर रहे हो ?"
"यादों के समंदर में गोते लगा रहा था।

"
कहकर वह जाकर कुर्सी पर बैठ गया। मानवी उसके पास बैठते हुए बोली,
"अंजन छटपटा रहा है। जो हम चाह रहे थे वही हुआ।"
निर्भय के चेहरे पर कठोरता आ गई। उसकी आँखों में गुस्सा था। वह बोला,
"अभी तो बहुत छटपटाना है उसे। वह जितना छटपटाएगा उतना ही मेरे दिल को तसल्ली मिलेगी।"
मानवी की आँखों में भी चिंगारियां थीं। अंजन ने उसे धोखा दिया था। उसके प्यार को छला था। उसका सबकुछ हड़प लेने के बाद उसने उसे और निर्भय को जान से मारने की कोशिश भी की थी। उसने कहा,
"तड़पेगा वह। अभी तो उस पर बहुत चोट करनी है।"
"करेंगे.... उसकी वजह से हमने बहुत कुछ सहा है।"
मानवी ने उसका हाथ पकड़कर कहा,
"अगर तुम्हारा साथ ना होता तो मैं कुछ ना कर पाती।"
"किस्मत हमारे साथ है तभी तो हम एक दूसरे से दोबारा मिल पाए।"
निर्भय उठते हुए बोला,
"सोच रहा हूँ कि बीच पर टहल आऊँ। चलोगी।"
"नहीं... तुम जाओ।"
निर्भय चला गया। मानवी बाहर गार्डन में जाकर बैठ गई। उसके मन में भी वह सारी घटनाएं चल रही थीं जो उस दिन जंगल में उसके साथ घटी थीं।

वह निर्भय के साथ जान बचाकर भाग तो रही थी पर कुछ दूर चलने के बाद हिम्मत जवाब देने लगी थी। वह हिम्मत हारने वाली थी तभी निर्भय ने उसकी तरफ देखा। उसने अपना हाथ बढ़ाकर नदी की तरफ इशारा किया। वह समझ गई। कोई और रास्ता नहीं था। उसने निर्भय का हाथ पकड़ लिया और दोनों ने इंद्रयाणी नदी में छलांग लगा दी।
नदी में गिरने के बाद उसने होश खो दिया।
बहती हुई वह रामोशीवाडी पहुँच गई थी। नदी में स्नान करने गए पास के एक मंदिर के पुजारी ने उसे बेहोशी की हालत में नदी के किनारे पड़े देखा। कुछ लोगों की मदद से वह उसे अपने घर ले गया। उसने और उसकी पत्नी ने मानवी की सेवा की।
जब वह ठीक हुई तो उन्होंने मानवी से उसके बारे में पूँछा। मानवी समझ नहीं पा रही थी कि क्या कहे। वह उन्हें अपनी सच्चाई बताना नहीं चाहती थी। क्योंकी उससे उसे कोई फायदा नहीं होने वाला था। इसलिए उसने ऐसा दिखाया जैसे उसकी याददाश्त चली गई हो।
बुजुर्ग पुजारी और उसकी पत्नी की कोई संतान नहीं थी। वह उसे अपनी बेटी की तरह रख रहे थे। लेकिन मानवी को इस तरह रहने की आदत नहीं थी। वह बहुत ऐशो आराम में पली थी। पुजारी ने उसे दो जोड़ी साधारण से कपड़े लाकर दिए थे। दोनों वक्त खाना भी बहुत सादा ही मिलता था। एक छोटे से कमरे में पुजारी, उसकी पत्नी और मानवी रहते थे।
एक महीने का समय बीत गया था। मानवी के लिए उन हालातों में रहना संभव नहीं था। पर वह मजबूर थी। पुजारी ने दया करके उसे अपने पास रखा था। अगर वह आसरा ना देता तो सड़क पर मारे मारे फिरने के अलावा कोई चारा ना रह जाता। अपनी इस हालत में यह सोचकर कि अंजन उसकी ही दौलत पर ऐश कर रहा है उसका खून खौल उठता था।
एक दो बार उसने सोचा कि पुलिस के पास जाकर सारी बात बता दे।

पर तरुण के मुंह से उसने सुना था कि उसके भाइयों की मौत के पीछे अंजन का ही हाथ था। फिर भी वह सारी पुलिस जांच से बाहर निकल आया था। इसका मतलब था कि पुलिस में उसकी गहरी जान पहचान है। यह सोचकर उसने इरादा बदल दिया।
पर वह मन ही मन सुलग रही थी। चाहती थी कि कुछ भी करके अंजन से बदला ले। यह आसान नहीं था‌। अंजन से बदला लेने के लिए उसे किसी के साथ की ज़रूरत थी। अभी तो उसका अपना ही कोई ठिकाना नहीं था। उसका साथ कौन देता। निर्भय के बारे में उसे कुछ नहीं पता था। वह नहीं जानती थी कि वह ज़िंदा है या मर गया। ना ही वह पता करने की स्थिति में थी। अभी तो उसके लिए इस स्थिति से निकालना बहुत ज़रूरी था। लेकिन उसकी कोई सूरत उसे नज़र नहीं आ रही थी। इस विषय में सोच सोच कर वह परेशान थी।
अंजन के प्यार ने उसे बर्बाद कर दिया था। उसके प्यार में पड़कर उसने फैशन हाउस खोलने का अपना सपना तक छोड़ दिया था। उसके लिए अपने पिता समान भाई से झूठ बोली थी। बदले में उसे सिर्फ दगा मिला। अभी वह किसी भी लायक नहीं रह गई थी। उसके पास कुछ भी ऐसा नहीं था कि वह नए सिरे से अपना जीवन शुरू कर सके।
मन ऊबने पर वह नदी के किनारे आकर बैठ जाती थी। इस समय भी वह वहीं बैठी थी। उसका मन इस कदर परेशान था कि वह सोच रही थी आगर जल्दी ही कोई रास्ता नहीं मिला तो वह पागल हो जाएगी। उसे यहाँ से आगे बढ़ना होगा। अपने जीवन निर्वहन के लिए कुछ करना होगा। तभी वह अंजन से बदला लेने के विषय में कुछ कर पाएगी। पर वह रास्ता उसकी समझ नहीं आ रहा था।
वह बहती हुई नदी को ताक रही थी। तभी पीछे से पुजारी की आवाज़ आई,
"क्या अपने बीते हुए जीवन को याद करने की कोशिश कर रही हो। कुछ याद आया ?"
मानवी ने हर बार की तरह ऐसे देखा जैसे कि कुछ याद ना आने के कारण बड़ी परेशान हो। पुजारी ने तसल्ली देते हुए कहा,
"विठ्ठल सब ठीक कर देंगे। परेशान ना हो।"
पुजारी उसके पास बैठते हुए बोला,
"मैं और तुम्हारी काकी हर साल देहू संत तुकाराम जी के दर्शन करने गाथा मंदिर जाते हैं। वहीं जाने की सोच रहे थे।"
मानवी पुजारी की मनोदशा समझ रही थी। उसे लगा था कि शायद कुछ दिनों में उसे उसकी पुरानी ज़िंदगी के बारे में याद आ जाएगा और वह उसे उसके घर छोड़कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाएगा। पर मानवी को सबकुछ याद था। लेकिन उसे क्या बताती। वह खुद भी वहाँ से निकलने का कोई रास्ता ढूंढ़ रही थी। वह बोली,
"कोशिश कर रही थी कि कुछ याद आ जाए। वैसे आप दोनों को कब जाना है ?"
"अगले हफ्ते निकलने की सोच रहे थे। कोई बात नहीं है। तुम भी हमारे साथ चलना।"
मानवी हल्के से मुस्कुरा दी। पुजारी ने उठते हुए कहा,
"अब घर चलो। शाम ढल रही है।"
मानवी उठी और उसके साथ चल दी। रास्ते में वह सोच रही थी कि अब जल्द ही कोई ना कोई राह निकालनी होगी। वह भी अब इस तरह और नहीं रह सकती है।

पर उसके दिमाग में कुछ भी नहीं आ रहा था। वह हताश हो रही थी।

रिस्की लव - 23

बहुत सोचने पर मानवी को अंधेरे में एक छोटी सी किरण नज़र आई। यह किरण थी अंजली स्वामीनाथन।‌ वह उसके साथ चेन्नई निफ्ट में थी।‌ कोई आठ महीने पहले उसकी अंजली से बात हुई थी। तब उसने बताया था कि वह गोवा में है। उसका अपना फैशन स्टोर है। जहाँ वह अपने डिज़ाइन किए हुए कपड़े रखती थी।
निफ्ट में मानवी ने अंजली की सहायता की थी। उसके एक साल की फीस अपनी तरफ से जमा की थी। वह उसी मदद के बदले में अब मदद की उम्मीद कर रही थी। हालांकि उसके मन में संदेह था कि इस हालत में अंजली उसकी मदद करेगी। उसे लग रहा था कि जब अंजन ने उसके प्यार और उसके भाई के अहसानों को नज़रंदाज़ कर दिया तो वह गैर से क्या उम्मीद रखे। लेकिन इसके अलावा उसके पास कोई और राह नहीं थी। इसलिए उसने अंजली के पास जाने का फैसला किया।
फैसला तो उसने कर लिया लेकिन अभी भी कुछ सवाल थे। वह गोवा जाएगी कैसे ? पुजारी को क्या बताएगी ? गोवा पहुँचने पर अपनी इस हालत के बारे में क्या बताएगी ? वह अब इन सवालों के बारे में सोच रही थी। उसने सोचा कि अगर किसी तरह गोवा तक पहुँचने के लिए पैसों का इंतज़ाम हो जाए तो वह पुजारी को बिना बताए ही चली जाएगी।
वह नदी के किनारे से लौटी थी। दरवाज़े पर ही थी कि उसे पुजारी की पत्नी की आवाज़ सुनाई पड़ी। वह चुपचाप खड़ी होकर सुनने लगी। पुजारी की पत्नी चिंता व्यक्त करते हुए कह रही थी,
"अब कब तक इस जवान लड़की मानवी को घर पर रख पाएंगे। जमाना ठीक नहीं है। कोई ऊंँच नीच हो गई तो सब हमको ही कहेंगे। कोई यह नहीं देखेगा कि इतने दिनों तक रखकर सेवा की।"
पुजारी की आवाज़ आई,
"तुम ठीक कह रही हो। पर क्या करें। अब ऐसे ही तो घर से निकाल नहीं सकते। सोचा था कि कुछ दिनों में अपने घरवालों के बारे में याद कर बता देगी। पर उसे तो कुछ याद ही नहीं है सिवा अपने नाम के। क्या करें ?"
"मुझे तो कभी कभी लगता है कि लड़की हमसे कुछ छुपा रही है। वह सब कुछ जानती है। शायद प्रेमी के साथ भागी होगी। उसने धोखा दे दिया होगा तो मरने के लिए नदी में कूद गई होगी। हमने बचा लिया। अब हमसे क्या बताए। यहाँ आराम से रहने खाने को मिल रहा है। इतना खर्च कर चुके हम दोनों उस पर।"
मानवी वहाँ से हटकर पास एक पेड़ के नीचे जाकर बैठ गई। वह सोच रही थी कि अब तो यह दोनों भी उससे ऊब रहे हैं। जाना तो उसे होगा ही। अब यहाँ रुकने का कोई मतलब नहीं। उसने उन दोनों को सुनाने के लिए उसने मन ही मन एक कहानी बनाई। वह उसे सुनाने के लिए उन दोनों के पास गई।
मानवी को देखकर पुजारी की पत्नी ने कहा,
"कहाँ रहती हो ? माना याददाश्त चली गई है पर दुनियादारी तो समझती हो। इतना तो जानती हो कि इस समय जवान लड़की का घर से बाहर रहना ठीक नहीं। अभी तो तुम्हारी ज़िम्मेदारी हम पर है।

कुछ हो गया तो हम किसको किसको जवाब देंगे।"
मानवी फर्श पर बिछी चटाई पर बैठ गई। उसने इशारे से उन दोनों को भी बैठने के लिए कहा। पुजारी और उसकी पत्नी बैठ गए। मानवी ने अपनी बात कही,
"आप लोगों ने मेरी बड़ी मदद की है। कभी मौका मिला तो आप लोगों की भी मदद करूंँगी। मैं आज आप लोगों को अपने बारे में बताना चाहती हूंँ।"
पुजारी ने कहा,
"तुमको अपने बारे में याद आ गया।"
मानवी ने कहा,
"मुझे सब याद था। पर आप लोगों से डर के मारे छुपाया। मेरा पति मुंबई पुलिस में काम करता है। बहुत जल्लाद है। हर समय मारता पीटता रहता था। तंग आकर मैं घर से भाग निकली। कोई आसरा ना देखकर नदी में कूदकर जान देनी चाहिए। लेकिन बच गई। पर आज मैंने देखा कि मेरे पति के आदमी मुझे ढूंढ़ते हुए यहाँ तक आ गए हैं। मैं यहाँ रहकर आप लोगों को मुसीबत में नहीं डालना चाहती। अगर आप मुझे कुछ पैसे दे दें तो मैं यहांँ से चली जाऊँ।"
यह सुनकर पुजारी की पत्नी गुस्से में बोली,
"हम क्यों दें भागने के पैसे ? तुम्हारा पति आया है तो तुमको यहांँ से ले जाएगा।"

मानवी ने बात बनाते हुए कहा,
"आप लोगों ने मेरी इतनी मदद की है इसलिए मुसीबत में नहीं डालना चाहती हूँ। मेरा पति सनकी दिमाग का है। उसे लगेगा कि आप लोगों ने मुझे यहाँ छुपा कर रखा था। ऐसे में मेरे साथ साथ आप लोगों के लिए भी मुसीबत आ जाएगी। इसलिए कह रही थी। गोवा में मेरी एक सहेली रहती है। उसके बारे में मेरे पति को नहीं मालूम। मुझे इतने पैसे दे दीजिए कि गोवा पहुँच सकूँ।"
पुजारी की पत्नी कुछ कहने जा रही थी। उसे रोककर पुजारी ने कहा,
"जाना चाहती है तो जाने दो। कुछ पैसे दे देते हैं। इसके पति ने कोई बवाल किया तो इस उमर में क्या-क्या झेलेंगे।"
पुजारी की पत्नी ने कहा,
"हमारे पास पैसे हैं कहाँ ?"
मानवी ने कहा,
"बस उतने पैसे दे दीजिए जितने से मैं गोवा पहुंँच जाऊंँ।"

अगले दिन तड़के ही मानवी पैसे लेकर पुजारी के घर से निकल गई। उनका घर छोड़ते हुए उसके मन में आ रहा था कि जैसे भी थे उन दोनों ने उसकी मदद की थी। उसकी जान बचाई थी। अगर कभी उनके लिए कुछ कर पाई तो ज़रूर करेगी।

मानवी पणजी में अंजली स्वामीनाथन के फैशन स्टोर में खड़ी थी। फैशन स्टोर की रिसेप्शनिस्ट उसे अजीब निगाहों से देख रही थी। मानवी के हुलिए से ऐसा नहीं लग रहा था कि वह कुछ भी खरीदने की हैसियत रखती है। रिसेप्शनिस्ट ने रुखाई से पूँछा,
"क्या काम है तुम्हें ? यहाँ क्यों आई हो ?"
मानवी जानती थी कि उसका हुलिया देखकर वह ऐसे बोल रही है। मानवी ने बड़ी नम्रता से अंग्रेजी में कहा,
"मुझे अंजली स्वामीनाथन से मिलना है।"
जिस लहज़े में वह अंग्रेजी बोल रही थी उसे सुनकर रिसेप्शनिस्ट कुछ चौंक गई। कुछ नरम पड़कर वह बोली,
"आप कौन हैं ?"
"मैं उनकी पुरानी दोस्त हूंँ। किसी काम के सिलसिले में उनसे मिलना है।

मेरी मुलाकात उनसे करवा दीजिए।"
"सॉरी पर अंजली मैडम तो अभी हैं नहीं। किसी ज़रूरी काम से गई हुई हैं। कुछ समय लगेगा आने में।"
मानवी ने उसी तरह नम्रता से पूँछा,
"क्या मैं यहांँ बैठकर अंजली का इंतज़ार कर सकती हूंँ ?"
मानवी का हुलिया भले ही कुछ और कह रहा हो पर उसके बोलने का लहज़ा रिसेप्शनिस्ट को यकीन दिला रहा था कि वह अंजली की दोस्त हो सकती है। फिर भी वह हिचक रही थी। मानवी ने कहा,
"अगर आपको समस्या है तो मैं बाहर इंतज़ार करती हूँ।"
यह कहकर वह बाहर जाने लगी। रिसेप्शनिस्ट ने उसे रोकते हुए कहा,
"आप अंदर बैठकर मैडम के आने की राह देख सकती हैं।"
मानवी वहीं एक प्लास्टिक स्टूल पर बैठ कर इंतज़ार करने लगी।

अंजली लौटकर आई। मानवी को देखते ही पहचान गई। उसे मानवी के द्वारा की गई मदद याद थी। मानवी को उस हालत में देखकर वह बहुत दुखी हुई। बातचीत करने के लिए उसे स्टोर के ऊपर बने अपने घर में ले गई। यह एक स्टूडियो अपार्टमेंट था।
उसने सबसे पहले मानवी को पीने के लिए जूस दिया। उसके बाद बोली,
"तुमको भूख लगी होगी। ऐसा करो तुम फ्रेश हो जाओ। मैं खाने के लिए कुछ आर्डर कर देती हूंँ। तब तक नीचे जाकर स्टोर देखती हूँ। फिर खाते हुए बातें करेंगे।"
उसने अपनी कबर्ड से उसके लिए एक ड्रेस निकाल कर रख दी। वह नीचे चली गई।
फ्रेश होने के बाद मानवी अंजली के ऊपर आने की राह देखने लगी। वह खुश थी कि अंजली को उसका किया हुआ अहसान याद था। उसके मन में आ रहा था कि बस अब अंजली उसकी मदद के लिए भी तैयार हो जाए। अंजली को अपनी इस हालत के बारे में क्या बताना है यह उसने सोच लिया था।
कुछ समय के बाद अंजली खाने का एक पैकेट लेकर ऊपर आई। खाना सर्व करने के बाद दोनों बालकनी में बैठकर खाने लगीं। यहांँ आकर मानवी को बहुत अच्छा लग रहा था। लेकिन उसके मन में अभी भी एक बात की चिंता थी। अंजली उसकी मदद करेगी कि नहीं। खाना खाते हुए अंजली ने कहा,
"तुम्हें देखकर यह यकीन से कह सकती हूंँ कि तुम किसी मुसीबत में पड़ी हो। क्या बात है ?"
"जब बुरा वक्त आता है तो कुछ भी सही नहीं रहता है।"
"ऐसा क्या हो गया ? कुछ महीनों पहले हमारी फोन पर बात हुई थी। तब तुमने बताया था कि तुम्हारी शादी हो गई है। तुम्हारे पति अंजन ने तुम्हारे भाइयों का बिज़नेस अच्छी तरह से संभाल लिया है। क्या तुम्हारे पति को बिज़नेस में नुकसान हो गया ?"
मानवी ने जो कहानी सोची थी वही बताई,
"अंजन धोखेबाज़ निकला। मुझे पता चला कि मेरे भाइयों की मौत के पीछे भी उसका हाथ था। उसने उनकी सारी प्रॉपर्टी और बिज़नेस हड़प लिया। मुझ पर बहुत अत्याचार करता था। मैं बड़ी मुश्किल से सब सह रही थी। लेकिन एक दिन मुझे पता चला कि वह मुझे मारना चाहता है। मैं मौका देखकर भाग निकली। पुलिस के पास जा नहीं सकती थी। उसके ऊपर तक कनेक्शन हैं। उसका आदमी मेरा पीछा कर रहा था।

उसकी गोली मेरे हाथ में लगी। मैं घायल होकर नदी में गिर गई। एक बुजुर्ग दंपति ने मुझे बचाया, मेरी सेवा की। लेकिन वह मेरी मदद नहीं कर सकते थे। मुझे तुम्हारी याद आई। इसलिए बड़ी उम्मीद के साथ तुमसे मदद मांगने आई हूँ। प्लीज़ अंजली मेरी मदद कर दो।"
अंजली कुछ देर सोचकर बोली,
"मानवी मैं तुम्हारी क्या मदद कर सकती हूँ। मेरी तो सलाह है कि तुम उस अंजन के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करो। अपना सबकुछ वापस ले लो उससे।"
"मैं जानती हूंँ कि इससे कुछ नहीं होगा। उसने अपनी पहुंँच दूर तक बना रखी है। वैसे भी इस समय मेरी मानसिक दशा उससे लड़ने की नहीं है। तुम बस मुझे अपने स्टोर में काम दे दो। तुम जानती हो कि मैं एक अच्छी डिज़ाइनर हूंँ।"
अंजली सोचने लगी। मानवी ने कहा,
"प्लीज़ अंजली हेल्प मी। तुम्हें याद है ना मैंने भी तुम्हारी मदद की थी।"
"मुझे सब याद है मानवी। तुम्हारी मदद मैं कभी नहीं भूली। मैं तो बस यह सोच रही थी कि मेरे स्टोर में तुम्हारे लायक कोई काम नहीं है।"
मानवी को लगा कि अंजली उसकी मदद करने से इंकार कर रही है। उसे बुरा लगा। वह कुछ कहती उससे पहले अंजली ने कहा,
"पर कोई बात नहीं। तुम मेरे साथ रहो। मैं देखती हूंँ कि क्या कर सकती हूंँ।"
उसकी बात सुनकर मानवी का मन खुश हो गया।

रिस्की लव - 24

अंजली ने मानवी को एक नाइट क्लब में वेटरेस का काम दिलवा दिया था। उस क्लब में कोई ना कोई पार्टी होती रहती थी। मानवी पार्टी में मेहमानों को शराब सर्व करती थी।‌ अक्सर उसके मन में हूक उठती थी। कभी वह भी ऐसी ही रंगीन पार्टियां दिया करती थी। आज उसे पार्टी में वेटरेस का काम करना पड़ता था। पर वह अपने आप को समझाती थी कि पुजारी के घर वह जैसी ज़िंदगी जी रही थी उससे यह ज़िंदगी बहुत अच्छी है। कम से कम यहाँ वह उस चमक दमक के नज़दीक तो थी जिसकी वह आदी रही थी।
उसने अपने रहने की अलग व्यवस्था कर ली थी। ज़िंदगी कुछ आगे बढ़ी थी। पर अभी वह राह नहीं मिली थी जिस पर चलकर अंजन से बदला ले सकती। अक्सर वह निर्भय के बारे में सोचती थी। उस दिन दोनों साथ में कूदे थे। लेकिन वह बहकर ना जाने कहाँ चला गया था। कभी कभी उसे लगता था कि कहीं वह डूब तो नहीं गया। पर उसका मन यह मानने के लिए तैयार नहीं था। उसे लगता था कि वह भी कहीं अपने जीवन की नई शुरुआत कर रहा होगा।
वेटरेस का काम करते हुए भी चार महीने बीत गए। अभी तक कोई रास्ता नहीं मिला था। एक बार फिर मानवी को हताशा होने लगी थी।

निर्भय बीच पर टहल कर आया तो देखा कि मानवी गार्डन में बैठी है। वह कुछ सोच रही थी। निर्भय ने उसके कंधे पर हाथ रखा। मानवी ने उसे देखकर कहा,
"बहुत देर तक बीच पर टहलते रहे।"
"हाँ आज मन बार बार पीछे की तरफ भाग रहा है। बीच पर बैठकर वही सोच रहा था।

"
"मैं भी अभी उन दिनों के बारे में सोच रही थी जब एक बार फिर नए सिरे से जीवन शुरू करने की राह निकाल रही थी।"
निर्भय कुछ सोचते हुए बोला,
"अंजन हमें तलाशने के लिए लंदन की गलियां छान रहा होगा। पर हमें नहीं खोज पाएगा।"
मानवी के चेहरे पर मुस्कान आ गई। निर्भय ने आगे कहा,
"उसके ड्राइवर ने उसे बचा लिया। उस दिन भागते समय मैंने उंगली दिखाकर चेतावनी भी दी थी। पर वह स्वामीभक्त निकला। अंजन को हॉस्पिटल पहुँचाकर मौत के मुंह से बाहर ले आया।"
मानवी ने कहा,
"हमने उसे धमकाया तो डरकर भाग गया। ना जाने कहाँ है ?"
"कहीं भी हो। हमें उससे कोई खतरा नहीं है। उसके पास हमारी कोई पहचान नहीं है। तभी तो अंजन ने उस जासूस के ज़रिए हमारी जानकारी हासिल की थी।"
"पर हम जैसा चाहते थे अंजन वैसे ही गुमराह हो गया।"
निर्भय के चेहरे पर एक ज़हरीली मुस्कान थी।‌ वह बोला,
"मुझे लगता है कि उसके ड्राइवर ने उसे बचाकर अच्छा ही किया। अब उसे तड़पते देखने में ज्यादा मज़ा आ रहा है। अगर उस दिन मर गया होता तो यह मज़ा ना मिल पाता।"
"यह बात तो है। मुझे भी अब बहुत अच्छा लग रहा है। अब वह बच ही गया है तो हम इसी तरह उसे तड़पाएंगे।"
दोनों एक दूसरे की तरफ देखकर मुस्कुराए और हाई फाइव दिया।

मानवी अपने कमरे में बैठी सोच रही थी कि अंजन का बच जाना बुरा नहीं हुआ। अगर वह उस दिन के हमले में मर जाता तो शायद उसके दिल को इतनी ठंडक ना मिल पाती। मज़ा तो उसे तड़पाने में है। यह जानकर वह कितना छटपटा रहा है कि उस पर हमला कराने वाले वही हैं जिन्हें उसने अपने आदमी के माध्यम से मरवाने की कोशिश की थी।
निर्भय ने उसे समझाया भी था कि अंजन को जान से मारने की जगह तिल तिल मरने को मजबूर करते हैं। उसका सबकुछ छीनकर उसे नंगा कर देते हैं। तब अधिक मज़ा आएगा। लेकिन तब बदले की आग में जलती हुई मानवी को लग रहा था कि जैसे अंजन ने उसके भाइयों को मरवाया। उसे जान से मारने की कोशिश की। उसी तरह उसे मार दिया जाए।
मानवी एक बार फिर पुराने समय को याद करने लगी।

मानवी वेटरेस का काम करते हुए ऊबने लगी थी। हर पल उसके दिल में नफरत के शोले उठते रहते थे। ‌ अंजन से बदला लेकर वह अपने दिल को ठंडक पहुंँचाना चाहती थी। इसलिए हर पल छटपटाहट महसूस करती थी।
क्लब में एक टूरिस्ट ने रोज़ रोज़ आना शुरू किया था। अधेड़ उम्र का मार्वल डिसूज़ा गोवा में ही पला बढ़ा था। पर पिछले पच्चीस साल से लंदन में रह रहा था। मानवी की खूबसूरती पर वह फिदा हो गया था। उसकी इस दीवानगी में मानवी को आगे बढ़ने की राह दिखाई दी।
मार्वल का लंदन में बिज़नेस था। काफी पैसे वाला था। गोवा अपने किसी रिश्तेदार की शादी में आया था। पर उसने कुछ दिन गोवा में गुजारने का निर्णय लिया। वह मानवी को ऐसे इशारे देता था जैसे कि उसके साथ रिश्ता बनाना चाहता हो।

मानवी तो बस वह सीढ़ी तलाश रही थी जिस पर पैर रखकर वह ऊपर जा सके। उसने मार्वल के इशारों का जवाब देना शुरू कर दिया।
एक दिन मार्वल को शराब देते समय उसने एक चिट भी पकड़ा दी। इशारे से कहा कि उसे फोन करे। क्लब बंद होने पर सुबह करीब साढ़े तीन बजे मार्वल ने मानवी को फोन किया। उससे कहा कि वह उसे उसके घर पर आकर मिले।
उस दिन के बाद अक्सर ही मानवी उसके घर जाने लगी। उसने भी अपने रूप का जादू उस पर चलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अपने ऑफ डे में वह पूरा दिन ही मार्वल के साथ बिताती थी। मार्वल उसका दीवाना बन गया था।
लंदन से बार बार उसके बिज़नेस पार्टनर का फोन आ रहा था कि वह अब लौट आए। मार्वल जब भी वापस जाने की सोचता था मानवी की कशिश उसे रोक लेती थी। उसे मानवी की लत लग गई थी। एक दिन उसने मानवी के सामने प्रस्ताव रखा कि वह उसके साथ लंदन चले। मानवी तो कई दिनों से उसकी तरफ से इस प्रस्ताव के आने का इंतज़ार कर रही थी। प्रस्ताव पाकर वह मन ही मन खुश थी। लेकिन एकदम से मार्वल की बात ना मानकर उसने ऐसा दिखाया जैसे कि यहाँ सबकुछ छोड़कर चले जाना उसके लिए आसान नहीं होगा। वह जानती थी कि उसका इस तरह एकदम से ना मानना उसके लिए ही फायदेमंद होगा।
मार्वल किसी भी कीमत पर उसे ले जाना चाहता था। उसने कहा कि वह उसके साथ शादी करने को भी तैयार है। मानवी के लिए उसकी दौलत की मालकिन बनने का यह अच्छा अवसर था। मार्वल ने उसके साथ चर्च में शादी कर ली। मानवी ने अपना नाम बदलकर जेनिफर रख लिया।
नई पहचान के साथ वह लंदन चली गई।
नई पहचान के साथ मानवी को वह सबकुछ वापस मिल गया था जिसके लिए वह तरस रही थी। उसने एक बार फिर उसी तरह का जीवन जीना शुरु कर दिया जैसा वह मुंबई में जीती थी। दिल खोलकर खर्च करती थी। पार्टियां करती थी।
मार्वल को उसका यह बदला हुआ रूप अच्छा नहीं लगा। पहले वह उसके इशारों पर काम करती थी। अब उसकी तरफ ध्यान भी नहीं देती थी। अक्सर उसकी कही बात को अनसुना कर देती थी। दोनों के बीच झगड़े होने लगे। मार्वल उसे तलाक देने की धमकी देने लगा। पर वह कुछ करता उससे पहले ही बीमारी ने उसे आकर घेर लिया। कुछ महीनों तक बीमारी से जूझने के बाद वह अपनी सारी दौलत जेनिफर उर्फ मानवी के लिए छोड़कर चला गया।
मानवी अब पूरी तरह से आज़ाद हो गई थी। वह मार्वल की दौलत पर ऐश करने लगी। वह कुछ समय के लिए अंजन से बदला लेने की बात भी भूल गई थी। एक दिन वह एक नाइट क्लब में गई थी। अचानक उसकी नज़र वहाँ अंजन पर पड़ी। वह डांस फ्लोर पर उछल कूद कर एक लड़की को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था। कुछ देर बाद वह उस लड़की के साथ बात करने लगा।
मानवी के अंदर बदले की आग पूरी तरह नहीं बुझी थी। इस घटना ने उसे कुरेद कर भड़का दिया था।

निर्भय ने उसके कमरे का दरवाज़ा खटखटाया। मानवी ने उसे अंदर आने के लिए कहा।

निर्भय ने उसे कुछ बताया। सुनकर मानवी खुश हो गई।

अंजन के अचानक लंदन आने से उसका दोस्त सागर खत्री भी अचरज में पड़ गया था। अंजन ने उसे बताया कि उसके लिए उन दोनों हमला करने वालों का पता लगाना बहुत ज़रूरी है। इसलिए उससे भारत में रुका नहीं गया। वह खुद ही यहाँ चला आया।
सागर ने बताया कि उसका ईमेल मिलने के बाद ही उसने अपने आदमियों को काम पर लगा दिया था। अभी तक कुछ पता तो नहीं चला है। पर उसे उम्मीद है कि जल्दी ही सफलता मिलेगी।
अंजन मानवी और निर्भय को तलाश करने के प्रयास में खुद भी लग गया। पर एक हफ्ता बीतने के बाद भी उसे कोई सफलता नहीं मिली थी। उसने मीरा से मिलने की कोशिश की तो पता चला कि वह लंदन में नहीं है। उसने एक आदमी को इस निर्देश के साथ मीरा के घर पर नज़र रखने के लिए नियुक्त कर दिया था कि जैसे ही मीरा लंदन आए उसे सूचना दे दी जाए।

सागर खत्री और अंजन बैठकर शराब पी रहे थे। दोनों इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि आखिर इतनी कोशिश करने के बाद भी दोनों मिले क्यों नहीं। सागर ने कहा,
"लंदन क्या उसके आसपास के इलाकों में भी तलाश किया। पर दोनों का कोई पता नहीं चला। फिर भी मैंने अपने आदमियों को कह दिया है कि कोशिश ना छोड़ें।"
उसने अंजन की तरफ देखकर कहा,
"पर मुझे लगता है कि तुमने मुझे जो जानकारी दी है वह पूरी नहीं है। जो मुझे बताया है उसके अलावा भी बहुत कुछ है जो तुम बता नहीं रहे हो। सही यही होगा कि तुम मुझे सारी बात बताओ।"
अंजन ने मानवी के बारे में उसे कुछ नहीं बताया था। लेकिन अब सागर ने जब पूँछा था तो उसे लग रहा था कि सब बता देना चाहिए। उसने सागर को मानवी और निर्भय की सारी सच्चाई बता दी।

रिस्की लव - 25

अंजन ने सागर को सबकुछ बता दिया। कैसे उसने मानवी को अपने प्यार के जाल में फंसा कर शादी की थी। उसके ज़रिए उसके भाई की दौलत और बिज़नेस पर कब्ज़ा किया। पहले दोनों भाइयों को मरवाया और फिर मानवी को उसके प्रेमी निर्भय के साथ मरवाने का प्रयास किया। पर दोनों बच गए। उन दोनों ने मिलकर ही उस पर हमला किया था।
अंजन ने सागर से कहा,
"एक बात और मुझे परेशान करती है। आखिर वह कौन है जिसने ‌मेरे शिमरिंग स्टार्स में होने की खबर उन दोनों को दी होगी।"
सागर अपनी सीट से उठकर खड़ा हो गया। वह कमरे में इधर उधर टहलने लगा। वह एकदम शांत था।‌ अंजन समझ रहा था कि उसका दिमाग किसी एक दिशा में काम कर रहा है। इसलिए वह उसे डिस्टर्ब नहीं कर रहा था।‌ करीब दस मिनट तक सागर अपने मन में कुछ हिसाब किताब लगाता रहा।‌ उसके बाद वापस आकर अपनी कुर्सी पर बैठ गया। उसने अंजन की तरफ देखकर कहा,
"मुझे ऐसा लगता है कि लंदन वाली बात हमें गुमराह करने के लिए की गई है। मानवी और निर्भय कहीं और ही हैं। जिसने तुम्हारे बीच हाउस में होने की खबर दी वह भी उनके साथ मिला हुआ है।

"
अंजन ने कुछ सोचकर कहा,
"तुम्हारा अंदाज़ा सही है। तभी इतना तलाशने पर भी दोनों लंदन में नहीं मिले। मेरी खबर पहुँचाने वाले ने ही यह सब किया होगा।"
सागर ने गंभीर आवाज़ में कहा,
"तुमको क्या लगता है कि तुम्हारे बीच हाउस में होने की खबर किसने दी होगी ?"
सागर ने जिस गंभीरता से यह बात कही थी उसे सुनकर अंजन परेशान हो गया। वह बोला,
"यही तो समझ नहीं आ रहा है। मुझे पंकज और तरुण पर शक था। लेकिन वह शक बेकार था।"
"हाँ.... क्योंकी दोनों ही अब इस दुनिया में नहीं हैं। जबकी अभी भी तुम्हारा मुखबिर उन लोगों के साथ है।"
"हाँ यह बात तो है। वैसे मैंने सोचा था कि मानवी और निर्भय का पता चल जाएगा तो वह आदमी भी पकड़ा जाएगा।"
सागर ने फिर कुछ सोचकर कहा,
"सही है। ऐसा करो कि तुम उस जासूस एंथनी से कहो कि वह होटल के सिक्योरिटी इंचार्ज दर्शन वशिष्ठ पर निगाह रखे। मुझे लगता है कि वह उन दोनों के इशारे पर काम कर रहा है।"
"ठीक है मैं अभी उसे फोन करता हूंँ।"
"अंजन... मेरी मानो तो तुम भी इंडिया लौट जाओ। वहाँ रहकर तुम अपनी कोशिश करो। मैं यहाँ से अपनी कोशिश करता हूँ।"
अंजन को सागर की बात में दम लगा। उसने कहा,
"बात तुम्हारी सही है। पर मैं सोच रहा था कि एक बार मीरा से मुलाकात हो जाती। उससे बात करना ज़रूरी है। सागर मैं उसे बहुत चाहता हूँ।"
सागर ने अंजन को गौर से देखा। उसके बाद बोला,
"मीरा के आते ही मैं तुम्हें खबर कर दूँगा। लेकिन तुम्हारा इंडिया जाकर पता करना ही ठीक होगा।"
अंजन को लगा कि जिस तरह उसने उसकी तरफ देखकर यह बात कही है उसके कुछ मायने हैं। उसने कहा,
"कोई खास बात है सागर ?"
"जो भी है अब जल्दी ही सामने आ जाएगा।"
"ठीक है तो फिर मैं इंडिया के लिए निकलता हूँ।"
अगली फ्लाइट से ही अंजन इंडिया लौट गया।

मानवी और ‌निर्भय डिनर कर रहे थे।‌ तभी निर्भय का फोन बजा। सही सिग्नल ना आने के कारण वह बाहर जाकर बात करने लगा। मानवी का मन भी खाने में नहीं लगा। वह भी उठकर निर्भय के पीछे चली गई। जो आवाज़ें उसके कानों में पड़ रही थीं उससे मानवी को अंदाज़ा लग गया था कि किसका फोन है। वह आदमी अपने पैसों के लिए तकाज़ा कर रहा था। निर्भय समझा रहा था कि जो ‌थोड़े से पैसे बचे हैं वह भी जल्दी ही मिल जाएंगे।
बात समाप्त कर निर्भय मुड़ा तो पीछे मानवी को खड़ा हुआ पाया। मानवी ने कहा,
"अभी कितना देना है उसे ?"
"अधिक नहीं है। पर वह फिर भी पीछे पड़ा है।"
मानवी परेशान हो गई। निर्भय ने कहा,
"परेशान ना हो। वह कुछ बिगाड़ नहीं पाएगा। उसे नहीं पता है कि हम यहाँ हैं। वैसे भी मैंने उसके पैसों का इंतज़ाम सोच लिया है।"
निर्भय ने मानवी का हाथ पकड़ा और उसे ‌अंदर ले गया। दोनों दोबारा खाना खाने लगे। पर दोनों का ही मन अब खाने में नहीं लग रहा था। दोनों ने ही थोड़ा सा खाना खाया फिर उठ गए। निर्भय ने एक एक ड्रिंक बनाया।

एक ड्रिंक मानवी को देते हुए बोला,
"तुम चिंता मत करो। मैं सब संभाल लूँगा। अंजन को चैन से नहीं बैठने देंगे। उस पर हमला करने वाले हम दोनों हैं यह जानने के बाद वह बहुत तड़प रहा है।"
मानवी ने अपना ड्रिंक सिप करते हुए कहा,
"अभी तो जब उसे पता चलेगा कि हमारा साथ देने वाला कौन है तो उसका और भी बुरा हाल होगा। हम अब उसे इसी तरह झटके देकर कमज़ोर कर देंगे।"
"तुम चाहती थी ना उससे अपना सबकुछ छीनना। अब हम उसे मानसिक रूप से कमज़ोर कर तोड़ देंगे।"
दोनों कुछ देर ड्रिंक पीते हुए इसी तरह बातें करते रहे।‌ ड्रिंक खत्म करके निर्भय बेडरूम में चला गया। लेकिन मानवी ने कहा कि वह कुछ देर बाहर गार्डन में टहलेगी।
गार्डन में टहलते हुए मानवी एक बार फिर बीते वक्त को याद करने लगी।

नाइट क्लब में अंजन को उस लड़की के साथ देखने के बाद से ही मानवी का मन बदला लेने के लिए तड़पने लगा। पर अकेली वह कुछ करने की स्थिति में नहीं थी। उस समय उसे लग रहा था कि काश निर्भय उसके साथ होता। उसी समय एक बहुत ही सुखद इत्तेफाक उसके साथ घटा।
लंदन में वह लोगों के लिए मार्वल डिसूज़ा की विधवा जेनिफर थी। ऐसे में मार्वल के कुछ नज़दीकी लोगों के फंक्शन्स में उसे जाना पड़ता था। वह मार्वल के एक नज़दीकी दोस्त की शादी की बीसवीं सालगिरह की पार्टी में गई थी। वहाँ उसकी मुलाकात निर्भय से हो गई।
पार्टी के होस्ट ने जब मानवी का परिचय मार्वल की विधवा जेनिफर के रूप में कराया तो निर्भय ने अपने मन का अचरज छिपाते हुए उससे उसी रूप में मुलाकात की। पर मानवी और निर्भय दोनों ही एक दूसरे से अकेले में मिलकर एक दूसरे पर बीती सुनना चाहते थे। मौका देखकर निर्भय ने उसे अपनी कॉटेज का पता दे दिया जहाँ वह ठहरा हुआ था।
अगले दिन मानवी निर्भय से मिलने कॉटेज पहुँच गई। मानवी ने अपने पर बीती हर एक बात विस्तार से बता दी। उसे बताया कि किस तरह मार्वल की पत्नी बनकर वह लंदन आई।‌
निर्भय ने उसे बताया कि अपने एक दोस्त की मदद से वह सिंगापुर चला गया। वहाँ अपनी जान पहचान के कुछ लोगों से ‌सहायता लेकर अपना व्यापार शुरू किया। जल्दी ही उसमें सफल हो गया। लंदन वह किसी काम से आया था। कल की पार्टी के होस्ट से परिचय था। उसके बुलाने पर पार्टी में गया था।
उसने मानवी को बताया कि व्यापार में उसकी सफलता का कारण अंजन के लिए उसकी नफरत है। वह अंजन से बदला लेना चाहता था। अंजन की वजह से उसका सबकुछ बर्बाद हो गया। उसे मृत समझकर उसके माता पिता उसके गम में चल बसे। वह अंजन से बदला लेने के लिए तड़प रहा है।
मानवी ने उसे नाइट क्लब वाली बात बताई। उसे बताया कि अंजन शायद लंदन में ही है। यह खबर सुनकर निर्भय ने कहा कि मानवी अगर उसका साथ दे तो दोनों मिलकर अपने दुश्मन को सबक सिखा सकते हैं। मानवी तो खुद यही चाहती थी।

निर्भय ने मानवी के बताए हुए हुलिए के हिसाब से नाइट क्लब में उस लड़की के बारे में पता करवाया। उसे पता चला कि उस लड़की का नाम मीरा आसवानी है। वह एक स्कल्पचरिस्ट है। निर्भय ने ‌मीरा पर नज़र रखना शुरू कर दिया। उसने देखा कि अंजन दिन पर दिन मीरा के करीब आ रहा है। वह भारत लौटने से पहले उसके घर भी गया था।
उसने सारी बात मानवी को बताई। मानवी ने कहा कि अंजन एक दिलफेंक आशिक है। कुछ दिनों तक वह किसी लड़की के पीछे दीवाना बना फिरता है।‌ जब मन भर जाता है तो उसे अपनी ज़िंदगी से निकाल कर फेंक देता है। वह मीरा के साथ भी ऐसा ही करेगा। निर्भय को इस बात में एक अवसर नज़र आया। उसने मानवी से कहा कि वो दोनों मीरा को अपनी ओर करके अंजन के विरुद्ध इस्तेमाल कर सकते हैं। मानवी को उसकी बात समझ आ गई।
मानवी और निर्भय मीरा से मिले। मानवी ने उसे अंजन और अपनी कहानी सुनाई। उसे बताया कि कैसे अंजन ने उसके पिता समान भाइयों की हत्या कर उसका सबकुछ हड़प लिया। निर्भय अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने में उसकी मदद कर रहा था। अंजन ने उसे और निर्भय को जान से मरवाने का प्रयास किया। किस्मत अच्छी थी कि दोनों बच गए। अब दोनों उस अंजन से बदला लेना चाहते हैं। मानवी ने मीरा से कहा,
"अंजन भरोसे के लायक नहीं है। तुम उस पर भरोसा ना करके हमारा साथ दो।"
उसकी बात सुनकर मीरा कुछ देर तक सोचती रही। उसके बाद बोली,
"आप दोनों की बात पर मैं भरोसा क्यों करूँ ? आप लोगों का साथ देने में मेरा क्या फायदा है ?"
मीरा ने अपनी बात कहकर अपनी आँखें मानवी और निर्भय पर जमा दीं। उसके कहने का अंदाज़ बता रहा था कि वह उनकी मदद में अपना फायदा तलाश रही है। निर्भय ने कहा,
"तुम बताओ हमारी मदद करने के बदले में क्या चाहती हो ?"
निर्भय के इस सीधे प्रस्ताव पर मीरा मुस्कुरा दी। उसने बेझिझक कहा,
"मुझ पर कुछ कर्ज़ है। मैं पैसों के लिए अंजन के साथ नज़दीकी बढ़ा रही थी। आप लोग मेरे काम आइए और मैं आप लोगों के काम आ जाऊँगी।"
मानवी और निर्भय मीरा के काम आने को तैयार हो गए। उन्होंने उसका कर्ज़ उतार दिया। इसके अलावा भी पैसों से उसकी मदद करने की बात कही।
मीरा उनके साथ हो गई। उसने मानवी और निर्भय के कहने पर अंजन को अपना दीवाना बना लिया।

रिस्की लव - 26

नफीस सहारा देकर शाहीन को वॉशरूम तक ले गया। उसके बाद बाहर खड़ा होकर इंतज़ार करने लगा। वह शाहीन को हॉस्पिटल से अपने घर ले आया था। उसकी अम्मी ने जो कहा था उसके बाद शाहीन भी यही चाहती थी।‌ नफीस उसकी पूरे मन से देखभाल कर रहा था। शाहीन ने अंदर से आवाज़ दी। नफीस सहारा देकर उसे बाहर ले आया।
शीरीन को हॉल में सोफे पर बैठाने के बाद वह चाय बनाने के लिए किचन में चला गया। चाय बनाते हुए उसका ध्यान विनोद की बताई हुई बात पर था। विनोद ने उसे बताया था कि अंजन भारत लौट आया है।

उसने एंथनी से मुलाकात भी की थी। विनोद ने इसी सिलसिले में उसे फोन करके घर के पास वाले रेस्टोरेंट में मिलने की इच्छा जताई थी। वह सोच रहा था कि जब कुक खाना बनाने आएगी तब जाकर मिल लेगा।
नफीस चाय कप में डालकर हॉल में आया तभी कॉलबेल बजी। उसने जाकर दरवाज़ा खोला तो नाज़नीन थी। वह अक्सर हालचाल लेने के लिए आती थी। नाज़नीन ने अंदर आकर शाहीन का हालचाल पूछा। नफीस ने अपनी चाय उसे दे दी। दोनों बहनें बातें कर रही थीं। नफीस को ‌विनोद से मिलने का यही सही मौका लगा। उसने नाज़नीन से कहा,
"मुझे ज़रूरी काम से कुछ देर के लिए बाहर जाना है। क्या तुम कुछ देर रुक सकती हो ? मैं जल्दी ही लौट आऊँगा।"
"आप निश्चिंत रहिए। मैं आपके आने के बाद ही जाऊँगी।"
नाज़नीन से आश्वासन पाकर नफीस ने फौरन विनोद को फोन करके रेस्टोरेंट आने के लिए कहा। कुछ ही देर में तैयार होकर वह भी निकल गया।

कुछ ही देर में विनोद रेस्टोरेंट पहुँच गया। उसने अपने लिए एक कोल्ड ड्रिंक मंगाया। एक सिप लेने के बाद बोला,
"सर...एक बात पता चली है जो हमारे काम की हो सकती है।"
"क्या पता चला है ?"
"सर... दर्शन वशिष्ठ छुट्टी पर कहीं चला गया है। मुझे लगता है कि इसका कारण अंजन का केस है। शायद वह उसके डर से ही कहीं चला गया है।"
यह खबर सुनकर नफीस कुछ सोच में पड़ गया। कुछ पलों के बाद बोला,
"हो सकता है कि दर्शन अंजन पर हमला करने वालों के इशारे पर काम कर रहा हो। इसलिए अंजन ने एंथनी को दोबारा उसके पीछे लगाया होगा।‌ इसी सिलसिले में अंजन एंथनी से मिला होगा। तुम्हें कुछ पता चला कि एंथनी और अंजन के बीच क्या बातें हुई थीं ?"
"नहीं सर..…"
"मैं भी इन दिनों अपनी उलझनों में फंसा हूँ। उसके बाद चैनल का काम। इस केस पर जो भी जानकारी मिल रही है तुम्हारे ज़रिए ही मिल रही है।‌ तुम ‌कोशिश करो कि एंथनी से मुलाकात कर कुछ पता कर सको।"

विनोद ने अपना कोल्ड ड्रिंक समाप्त करते हुए कहा,
"सर पूरी कोशिश करूँगा।"
"हालांकि एंथनी बहुत चालाक है। जल्दी सही बात नहीं बताएगा। तुम उस पर नज़र रखो। अपने हिसाब से बातें पता करने की कोशिश करो।"
"ओके सर। मैं अपने हिसाब से एंथनी पर नज़र रखूँगा। वैसे भाभी जी कैसी हैं ?"
"ठीक है। पैर में प्लास्टर है। अभी उसे उसकी बहन के साथ छोड़कर आया हूँ। अब चलता हूँ। आगे कुछ भी पता चले तो बताना।"
नफीस और विनोद एक साथ ही रेस्टोरेंट से निकल गए।

अंजन अपने कमरे में बैठा शराब पी रहा था। वह बहुत गुस्से में था। दर्शन वशिष्ठ ने उसके साथ धोखा किया था। वह दिखावे के लिए उसकी मदद कर रहा था। पर वास्तव में मानवी और निर्भय के साथ मिलकर उसे बेवकूफ बना रहा था। आज तक किसी की भी हिम्मत अंजन के साथ ऐसा करने की नहीं हुई थी। इसलिए दर्शन की यह हिमाकत उससे बर्दाश्त नहीं हो रही थी। उसने ‌अपने आदमियों को दर्शन की खोज में लगा दिया था।

वह चाहता था कि दर्शन को उसके किए की उसी तरह सज़ा दे जैसे तरुण काला को दी थी।‌ यह बात उसे नश्तर की तरह चुभ रही थी कि दर्शन ने उससे पैसे ऐंठकर उसे धोखा दिया।
दर्शन के अलावा मीरा का कोई पता ना चलना भी उसे परेशान किए हुए था। इतने दिनों से मीरा का कोई पता नहीं चला था।‌ सागर ने उससे बात करते ‌समय मीरा का ज़िक्र आने पर जिस तरह रिएक्ट किया था अंजन को अजीब लगा था।‌ तब‌ उसे लगा था कि सागर की उस प्रतिक्रिया के कुछ मायने हैं।‌ उसने सागर से पूँछा भी था। पर उसने बात टाल दी थी। पर अब उसके अपने दिमाग में मीरा को लेकर बहुत कुछ चल रहा था।
उस दिन उसके शिमरिंग स्टार्स जाने की बात पंकज के अलावा उसे भी ‌मालूम थी। पर उसका दिल ‌इस बात पर यकीन करने को तैयार नहीं था ‌कि मीरा ने उसके दुश्मनों को उसके वहाँ होने की बात बताई होगी। वह अपने दिल को समझाता था कि ऐसा नहीं ‌है। मीरा भी उसे वैसे ही चाहती है जैसे वह उसे चाहता है। वह उसके प्यार को छल नहीं सकती है।‌
वह अपने दिल को तर्क देता था कि अगर मीरा को उस पर हमला करवाना होता तो वह खुद वहाँ क्यों होती। हमला होने पर वह भी घबराई हुई थी। अगर उसे पहले से पता होता तो वह खुद को बचाकर वहाँ से भाग गई होती। पर उस हमले से वह खुद हतप्रभ थी।
वह अपने मन को समझाता तो था पर दूसरी ओर उसका दिल मीरा को गुनहगार बताने के लिए अपने तर्क रख रहा था। पंकज की कैद से जब वह उसे छुड़वा कर लाया था तब मीरा का अचानक उस पर ‌धोखा देने का इल्ज़ाम लगाकर चले जाना उसे समझ नहीं आया था। इस समय वही बात उसके मन में शक पैदा कर रही थी।‌ मीरा की तरह मानवी और ‌निर्भय‌ का लंदन से संबंध होना और उसका लंदन में ना होना भी शक पैदा कर रहा था।
मीरा ही वह लड़की थी जिसे अंजन ने सच्चे दिल से प्यार किया था। इसलिए अपने मन में उठने वाले सारे शकों को वह नकारने की पूरी कोशिश करता था। अपने दिल को समझाता था कि मीरा बिल्कुल भी वैसी नहीं है जैसा उसका दिल कह रहा है।
लेकिन हर बीतते दिन के साथ उसका मन घबरा रहा था कि कहीं उसका शक सच ना हो जाए।

मीरा बाहर बरामदे में हंग चेयर पर बैठी थी।‌ उसका चेहरा मुर्झाया हुआ था।‌ उसके मन में एक डर था। वह जानती थी कि सच्चाई पता चलने पर अंजन को बहुत धक्का लगेगा। पर वह धक्का उसे तोड़ने की जगह उसके गुस्से को और बढ़ा देगा। अंजन के अपने लिए प्यार की गहराई को उसने महसूस किया था। अंजन के स्वभाव से भी वह परिचित थी। जानती थी कि उसे शिद्दत से चाहने वाला अंजन उसके धोखे को बर्दाश्त नहीं कर पाएगा। पर दूसरे आशिकों की तरह वह खुद को नुकसान नहीं पहुँचाएगा। बल्की हर एक बात का सूद समेत बदला लेगा।
अचानक ही उसका मन घबराने लगा। वह उठकर भीतर अपने कमरे में जाकर लेट गई। उस दिन अंजन से झगड़ा करने के बाद वह लंदन ना जाकर यहाँ आ गई थी।

जब पंकज की कैद से छूटने के बाद वह उसके बंगले पर पहुंँची थी तब अंजन ने उसकी सुविधा का जिस तरह खयाल रखा था उसे देखकर वह समझ गई थी कि अंजन उसे कितनी गहराई से चाहता है। उसे बहुत अच्छा लगा था। उस पल उसके मन में आया था कि वह सबकुछ भूलकर अंजन की हो जाए।
पर जिस तरह अंजन ने अपने पुराने साथी पंकज को उसके धोखे के लिए सज़ा दी थी वह घबरा गई थी। धोखा तो उसने भी अंजन को दिया था। उस पर बीच हाउस में हुए हमले का कारण वही थी। यह बात मन में आते ही वह डर गई थी। उसे यही सही लगा कि वह अंजन से दूरी बना ले। वह बातें छिपाने का बहाना करके उसके घर से चली आई। लेकिन वह जानती थी कि असलियत तक पहुँचने में अंजन को अधिक समय नहीं लगेगा। इसलिए वह वापस लंदन नहीं गई।
उसने लालच में मानवी और निर्भय की मदद की थी। तब वह अंजन के अपने लिए प्यार को सही तरह से समझ नहीं पाई थी। अब वह अपने उस फैसले पर पछता रही थी। उसे लगता था कि मानवी और निर्भय का साथ देने की जगह अंजन का साथ देना उसके लिए सही होता।
मानवी और निर्भय के कहने पर उसने अंजन से दोस्ती बढ़ाई। भारत जाकर कुछ दिन उसके घर पर रही। वह मानवी और निर्भय को अंजन की हर बात की खबर देती थी। जब अंजन ने रिज़ॉर्ट की भूमि पूजा के लिए मीरा को भारत बुलाया था तब मानवी और निर्भय भी भारत आए थे। वह चाहते थे कि अंजन से बदला लेने का मौका तलाश रहे थे।‌ अंजन मीरा को पहले भी कई बार अपने बीच हाउस शिमरिंग स्टार्स पर ले जाने की बात कर चुका था।‌
उस शाम जब मीरा बीच हाउस में जाने के लिए तैयार हो रही थी तब मानवी का उसके पास फोन आया था। मीरा ने मानवी को बताया कि वह अंजन के साथ उसके बीच हाउस पर जा रही है।
मीरा को इस बात का अंदाज़ा नहीं था कि मानवी और निर्भय अपना बदला लेने के लिए बीच हाउस पर हमला कर देंगे।‌ वह तो बड़े इत्मीनान के साथ अंजन के साथ थी। जब अंजन ने उसके सामने अपने प्यार का इज़हार किया तो वह कुछ देर के लिए भावनाओं में बह गई थी। उस समय उसके दिमाग में विचार आया था कि वह अंजन को मानवी और निर्भय के बारे में बता देगी। लेकिन जब अंजन उसे अंगूठी पहना रहा था तब अचानक गोली चली। उस समय उसे खयाल आया कि यह हमला मानवी और निर्भय ने कराया होगा। वह घबरा गई थी। अंजन ने उसे हिफाज़त में लेकर आत्मरक्षा में गोलियां चलानी शुरू कर दीं।
पंकज के आने पर अंजन ने अपनी परवाह ना करके उससे कहा कि वह मीरा को अपने साथ ले जाए। तब मीरा को अपने लिए उसकी फिक्र का अंदाज़ा लगा था। उसे इस बात का बुरा लगा था कि उसकी वजह से ही अंजन मुश्किल में है। लेकिन तब किसी भी बात के लिए समय नहीं था। पंकज उसे लेकर वहाँ से चला गया। उसने सोचा था कि उसे सुरक्षित कहीं पहुँचाने के बाद पंकज अंजन की मदद के लिए जाएगा। पर उसके इरादे ही अलग थे। वह मीरा को किडनैप करके ले गया।

तब मीरा के मन में आया था कि शायद हमला पंकज ने ही करवाया हो। पंकज की कैद से छूटने के बाद साफ हो गया कि हमला मानवी और निर्भय ने किया था। पंकज का हश्र देखकर वह घबरा गई थी।
अंजन से बचकर यहाँ आ गई थी।

रिस्की लव - 27

एंथनी गोवा जाने वाली बस पर बैठा था। उससे कुछ सीट पहले बैठा विनोद नफीस को फोन पर बता रहा था कि वह एंथनी का पीछा करते हुए गोवा जा रहा है।‌ उसने अपना रूप हिप्पी की तरह ‌बना रखा था।‌ नफीस ने उससे सावधान रहने को कहा। सारे रास्ते विनोद की नज़र एंथनी पर बनी हुई थी। दो एक बार एंथनी की नज़र भी उस पर पड़ी थी। विनोद को लगा था कि उसने उसे नहीं पहचाना है।
गोवा पहुँचकर एंथनी बस से नीचे उतरा। विनोद भी हिप्पी के भेष में उस पर नज़र बनाए हुए नीचे उतरा। एंथनी बस से उतरकर सीधा वॉशरूम की तरफ बढ़ गया। विनोद बाहर खड़े होकर उसका इंतज़ार करने ‌लगा। करीब आधा घंटा बीत जाने ‌के बाद भी जब एंथनी बाहर नहीं आया तो विनोद ने अंदर जाकर देखा। लेकिन एंथनी दिखाई नहीं पड़ा। उसने देखा कि शायद कहीं और से भी बाहर जाने का रास्ता हो। पर बाहर जाने का कोई और रास्ता नहीं था। विनोद परेशान हो गया कि उसने एंथनी को बाहर निकलते नहीं देखा तो वह कहाँ गया।
बस स्टैंड से बाहर निकल कर भी विनोद ने एंथनी को तलाशने की कोशिश की। पर वह कहीं नहीं मिला। विनोद ध्यान से सोचने लगा।‌ एंथनी उसके देखते हुए वॉशरूम के अंदर गया था। वह खड़ा होकर उसके बाहर आने की राह देखने लगा। उसके बाद कई लोग बाहर निकले। पर एंथनी नहीं निकला।‌ अचानक उसे याद आया कि एंथनी के वॉशरूम जाने के कुछ मिनटों के बाद ही एक आदमी पठानी सूट में बाहर आया था। उसके चेहरे पर दाढ़ी थी। कद-काठी के हिसाब से वह एंथनी की तरह ही था। विनोद समझ गया कि उसे ना पहचानने का दिखावा करने वाला एंथनी उसे पहचान गया था। बड़ी चालाकी से उससे पीछा छुड़ाकर चला गया। विनोद ने फौरन नफीस को फोन पर सब बता दिया।

पठानी सूट पहने एंथनी डिसूजा विला के गेट पर खड़ा था। गेट पर बैठा सिक्योरिटी गार्ड उससे पूछताछ कर रहा था। एंथनी ने हवा में तीर छोड़ते हुए कहा,
"भाई तुम यहाँ नए आए हो। इसलिए पीर मोहम्मद अली को नहीं जानते हो। डिसूज़ा साहब का पसंदीदा कुक था। कोई भी पार्टी हो। खाने की सारी ज़िम्मेदारी मेरी होती थी।"
सिक्योरिटी गार्ड सचमुच नया था। उसे बस इतना पता था कि यह विला मार्वल डिसूज़ा का है जो अब इस दुनिया में नहीं है। उसकी पत्नी जेनिफर अपने दोस्त के साथ यहाँ रह रही है। एंथनी जिस तरह से बात कर रहा था उससे उसे उसकी कही हर बात पर यकीन हो रहा था। फिर भी उसने कड़क कर कहा,
"हो सकता है। पर मार्वल डिसूज़ा सर अब जीवित नहीं हैं। उनकी पत्नी यहाँ रह रही हैं।

"
एंथनी ने आँखों में नमी और आवाज़ में दुख लाकर कहा,
"पता चला कि हमारे प्यारे डिसूज़ा साहब नहीं रहे। अल्लाह उनकी रूह को सुकून दें। दरअसल जब वह बाहर चले गए थे तो मैंने भी नौकरी छोड़ दी थी।‌ अपने घर महाराष्ट्र चला गया था। किसी काम से गोवा आया था तो आ गया।"
सिक्योरिटी गार्ड को उसकी बात पर पूरा भरोसा हो गया था। उसने कहा,
"उनकी पत्नी जेनिफर मैडम से मिलना है। वो घर में ही हैं।"
"एक बार सलाम कर लेता तो अच्छा था। हालांकि वह मुझे जानती नहीं हैं। उनके आने से कुछ साल पहले ही मैंने नौकरी छोड़ दी थी। लेकिन अगर कोई तकलीफ हो तो रहने दो।"
सिक्योरिटी गार्ड कुछ कहता उसी समय एक कार गेट पर आई। जब कार अंदर जा रही थी तब एंथनी ने देखा कि कार में वही आदमी है जो सीसीटीवी फुटेज में था। सिक्योरिटी गार्ड गेट खोलकर कार अंदर कराने में व्यस्त था। एंथनी चुपचाप वहाँ से चला गया।
निर्भय ने कार अंदर करते समय गेट पर पठानी सूट में किसी को देखा था। कार पार्क कर उसने सिक्योरिटी गार्ड से पूछा,
"गेट पर पठानी सूट पहने कौन था ?"
सिक्योरिटी गार्ड एंथनी के अचानक गायब हो जाने से परेशान था। उसने कहा,
"सर कह रहा था कि डिसूज़ा सर का पुराना कुक था। पीर मोहम्मद नाम बता रहा था।‌ मैंने कहा कि जेनिफर मैडम से मिलना दूँ। पहले तो हाँ बोला। फिर आप आ गए। मैं गेट खोलने लगा। तब तक कहीं चला गया।"
निर्भय कुछ परेशान हो गया। पर उसे छिपाकर बोला,
"कोई ‌अजनबी आए तो उससे अधिक बात ना किया करो।"
सिक्योरिटी गार्ड डर रहा था कि बहुत डांट पड़ेगी। पर निर्भय ने इतना कहकर छोड़ दिया। उसने कहा कि वह ध्यान रखेगा।

निर्भय अंदर गया तो मानवी सोफे पर बैठी एक फैशन मैगज़ीन देख रही थी। वह सोचती थी कि जब सबकुछ ठीक हो जाएगा तो वह अपना फैशन हाउस खोलने का सपना पूरा करेगी। निर्भय को देखकर उसने मैगज़ीन बंद करके रख दी। वह उससे पूँछने वाली थी कि जिस काम से गया था वह हुआ कि नहीं। पर उसके चेहरे पर परेशानी देखकर बोली,
"क्या बात है ? परेशान लग रहे हो ‌?"
निर्भय ने उसे गेट पर सिक्योरिटी गार्ड से बात करने वाले पीर मोहम्मद के बारे में बताया। सब सुनकर मानवी भी परेशान हो गई। निर्भय ने कहा,
"तुमने कभी मार्वल के मुंह से पीर मोहम्मद का नाम सुना था।"
"नहीं.... बल्की उसने बताया था कि वह कई सालों बाद लंदन से यहाँ आया था। उसके बाद मुझसे शादी करके यहाँ से चला गया। फिर तो वहीं उसकी मौत हो गई।"
अपनी बात कहकर मानवी बहुत डर गई। निर्भय ने समझाते हुए कहा,
"डरने की बात नहीं है। हो सकता है कि तुम्हारे आने से पहले वह यहाँ कुक रहा हो। वह सच कह रहा हो।"
"तो फिर अचानक चला क्यों गया ? मुझे तो लगता है कि वह अंजन का भेजा हुआ आदमी होगा। हमारे बारे में पता करने आया था।"
निर्भय के मन में भी यही डर था। लेकिन वह नहीं चाहता था कि मानवी डर जाए।

ऐसा होने पर उसे संभालना मुश्किल होता। उसने कहा,
"अंजन को अगर हमारे बारे में पता चला गया होता तो वह किसी को भेजने की जगह खुद हमसे बदला लेने के लिए आता। तुम बेकार में डरो नहीं। हम सावधान रहेंगे और जल्दी यहाँ से चले जाएंगे।"
निर्भय ने किसी तरह मानवी को शांत करा दिया। पर उसके अपने मन में बहुत कुछ चल रहा था।

विनोद एंथनी के हाथ मिली अपनी हार से बहुत दुखी था। नफीस ने तो उससे कहा था कि वह वापस मुंबई चला आए। लेकिन विनोद ने तय किया था कि वह भी एंथनी का पता किए बिना वापस नहीं जाएगा। बस स्टैंड से बाहर निकल कर उसने अपने हिसाब से पठानी सूट वाले आदमी के बारे में पूँछना शुरू किया।‌ उसे ‌एक टैक्सी ड्राइवर ने बताया कि उसने इसी तरह के हुलिए वाले व्यक्ति को एक विला के पास छोड़ा था। विनोद ने उस टैक्सी ड्राइवर से कहा कि उसे भी वहीं पहुँचा दे।
विनोद भी डिसूज़ा विला के सामने खड़ा था। वह समझ नहीं पा रहा था कि आखिर एंथनी यहाँ क्यों आया होगा। उसने वहीं से खड़े होकर नफीस को फोन पर सारी बात बताई। नफीस ने उससे कहा कि अगर एंथनी वहाँ गया था तो ज़रूर कोई खास बात रही होगी। इसलिए वह उस विला पर नज़र रखने की कोशिश करे।

निर्भय ने तय कर लिया था कि वह मानवी को लेकर सिंगापुर चला जाएगा। वहाँ जाकर सोचेगा कि आगे क्या करना है। मीरा सिंगापुर में उसके घर पर ही थी। उसने अपना फैसला मानवी को बता दिया।

विनोद डिसूज़ा विला पर नज़र बनाए हुए खड़ा था। डिसूज़ा विला बीच के पास था। उसके सामने नारियल के कुछ पेड़ थे। विनोद उन्हीं की आड़ में खड़ा था। अंधेरा हो गया था। उसे भूख लग रही थी। अभी तक सब ठीक था। उसने सोचा कि आसपास जाकर देखता है कि शायद खाने को कुछ मिल जाए। वह खाने के लिए कुछ तलाशने के लिए चला गया।
कुछ दूर जाने के बाद उसे सड़क पर सी फूड का एक कार्ट दिखाई पड़ा। वहाँ उसने पॉन कटलेट खाए। पेट भरने के बाद वह वापस विला के पास जाकर खड़ा हो गया।
वह सोच रहा था कि ना जाने कब तक इस विला पर नज़र रखेगा। तभी अचानक दो जीप आकर डिसूज़ा विला के सामने रुकीं। उसमें से कुछ लोग उतरे। विनोद को वो लोग ठीक नहीं लगे। उनके पास हथियार थे। वो सब जबरदस्ती विला के अंदर घुस गए।
विनोद अचानक हुए इस हमले से घबरा गया। वह समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे। वह अकेला था। उसके पास कोई हथियार भी नहीं था। जब उसे कुछ नहीं सूझा तो उसने पुलिस कंट्रोल रूम में फोन कर हमले की जानकारी दे दी।
वह विला के गेट पर नज़र रखे हुए था। कुछ समय बाद उसने देखा कि अंदर गए हुए लोग एक आदमी और एक औरत को लेकर बाहर आए। उन्हें जीप में बैठाकर ले गए। विनोद ने एक जीप का नंबर नोट कर लिया था।
कुछ देर बाद पुलिस विला पर पहुँची। विनोद ने उन्हें सारी बात बताई। उन्हें उस जीप का नंबर भी दे दिया जो उसने नोट किया था।

एंथनी ने अंजन को सूचना दी कि डिसूज़ा विला में उसने सीसीटीवी में दिख रहे आदमी को देखा है। अंजन ने उसकी सूचना के आधार पर अपने एक दोस्त से संपर्क किया। वह भी अपराध की दुनिया से संबंध रखता था। उसने उसे सारी बात बताकर मानवी और निर्भय को अगवा करने का आदेश दिया।
अंजन के उसी दोस्त के आदमी मानवी और निर्भय को लेकर गए थे।

रिस्की लव - 28

पुलिस को आश्चर्य था क्योंकी डिसूज़ा विला में गेट पर एक सिक्योरिटी गार्ड के अलावा कोई और सिक्योरिटी नहीं थी। कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था जिसकी फुटेज के आधार पर किसी की पहचान की जा सकती।
हमसे में घायल सिक्योरिटी गार्ड ने बताया कि कोई आठ लोग अचानक दो जीपों में भरकर आए। उनके पास हथियार थे। सबने चेहरे ढके हुए थे। उनमें से एक ने उसे गन प्वाइंट पर धमका कर गेट खुलवा लिया। फिर किसी चीज़ से उसके सर के पिछले हिस्से पर हमला किया। वह बेहोश हो गया।
सिक्योरिटी गार्ड ने बताया कि विला में मार्वल डिसूज़ा की विधवा जेनिफर और उसका एक साथी निर्भय ‌रह रहे थे। हमला करने वालों ने उन्हीं का अपहरण किया था।
विनोद ने भी अपने बयान में आठ लोगों के होने की बात कही थी। उसने बताया कि सभी ने नकाब से अपने चेहरे ढक रखे थे। वह अचानक हुए इस हमले से घबरा गया। उसने फौरन पुलिस को फोन किया।‌
इस केस को देख रहे इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने विनोद से पूँछा कि हमले के समय वह वहाँ क्या कर रहा था। विनोद ने उसे बताया कि वह एक टूरिस्ट है। टहलते हुए उधर चला गया। ठीक उसी समय हमला हुआ। उसने अच्छे नागरिक के तौर पर पुलिस को इसकी सूचना दे दी। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने विनोद द्वारा बताए गए जीप के नंबर की खोज करने का आदेश दे दिया।

विनोद ने सारी बात की जानकारी फोन पर नफीस को दे दी। नफीस ने उससे कहा कि वह अभी कुछ दिन गोवा में रहे और इस केस से संबंधित हर एक जानकारी उसे देता रहे। विनोद ने एक सस्ते से होटल में खुद के रहने की व्यवस्था कर ली।

नफीस अपने घर पर बैठा डिसूज़ा विला में जो हुआ उसे समझने का प्रयास कर रहा था।‌ उसे अंदाज़ा लग गया था कि डिसूज़ा विला में जो लोग थे उनका संबंध ज़रूर अंजन पर बीच हाउस में हुए हमले से है। लेकिन विला में रहने वाले लोगों के जो नाम सामने आए थे वह नए थे। वह समझ नहीं पा रहा था कि आखिर मार्वल डिसूज़ा की विधवा जेनिफर का अंजन से क्या संबंध हो सकता है ? या फिर जैसा वह सोच रहा है यह सब अंजन ने करवाया ही नहीं। यह काम किसी और का है। जिसका मार्वल डिसूज़ा की विधवा जेनिफर से कोई झगड़ा हो।‌
यह बात उसे तसल्ली नहीं दे रही थी। कारण था एंथनी का डिसूज़ा विला जाना। एंथनी के डिसूज़ा विला जाने के कुछ ही घंटों के बाद हमला होना। जिसमें जेनिफर और उसके दोस्त निर्भय का अपहरण हो गया।

निर्भय इस नाम के बारे में जब भी नफीस सोचता था तो उसे लगता था कि जैसे उसने यह नाम पहले कहीं सुना है। वह अपने दिमाग पर ज़ोर डालने लगा। बहुत सोचने पर उसे याद आया। मानवी के अचानक गायब हो जाने की खबर जब शहर में चर्चा का विषय बनी थी तब एक अखबार में उसके साथ एक नाम जोड़ा गया था। वह नाम था निर्भय वाधवा।
यह याद आते ही नफीस का दिमाग तेज़ी से काम करने लगा। वह तारों को जोड़ने की कोशिश करने लगा। उसे यकीन हो गया था कि जेनिफर और कोई नहीं मानवी है। इसका मतलब था कि मानवी अपनी मर्ज़ी से निर्भय के साथ नहीं भागी थी। कुछ हुआ था जिसका बदला लेने के लिए मानवी ने ही अंजन पर हमला करवाया था।‌ अपनी इस बात पर उसे पूरा यकीन था।
मानवी के साथ अंजन ने क्या किया था ? वह मानवी से जेनिफर डिसूज़ा कैसे बनी ? निर्भय ने अंजन पर हमले में उसका साथ क्यों दिया ? यह सारे सवाल अब उसे और अधिक परेशान कर रहे थे। उन सवालों के जवाब तभी मिल सकते थे जब गोवा पुलिस सही समय पर अपहरणकर्ताओं को पकड़ सके। देर होने पर इस बात की पूरी संभावना थी कि अंजन जेनिफर उर्फ मानवी और उसके साथी निर्भय को मार देता।
नफीस ने विनोद को फोन किया। उसे अपने मन में उठी सारी बातें बताईं। उसने विनोद से कहा कि वह इस केस पर पूरी मुस्तैदी से नज़र बनाकर रखे।

इंस्पेक्टर कौशल सावंत को फोन पर खबर मिली कि ‌एक दुकान के सीसीटीवी फुटेज में एक जीप दिखाई पड़ी है। उस पर पूरा नंबर तो दिखाई नहीं पड़ रहा है पर जो नंबर अपरण करने वालों की जीप का दिया गया है उसकी दो डिज़िट सीसीटीवी फुटेज में दिखाई पड़ रही हैं। जीप में केवल एक ड्राइवर था जिसकी शक्ल दिखाई नहीं पड़ रही थी।‌
सूचना मिलने पर इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने खुद वह सीसीटीवी फुटेज देखी। उसने आदेश दिया कि दुकान के आसपास के इलाके में जीप को तलाश करने की कोशिश की जाए।
पुलिस के खबरी ने बताया कि जिस दुकान में सीसीटीवी कैमरा लगा था उसके आगे कुछ ही दूर पर माइकल का गैराज है। माइकल दिखावे के लिए गैराज चलाता है। असलियत में वह अपराध से जुड़ा है। उसने वैसी ही जीप गैराज में देखी है। इस खबर के आधार पर इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने अपना प्लान बनाया।

अंजन को खबर मिली कि मानवी और निर्भय को अगवा कर लिया गया है तो उसने उन्हें मुंबई लेकर आने का आदेश दिया। मानवी और निर्भय के अपहरण का काम अंजन के दोस्त समर ने अपने आदमी माइकल से करवाया था। समर ने माइकल को आदेश दिया कि वह उन दोनों को सही सलामत मुंबई अंजन के पास पहुँचा दे।

मानवी और निर्भय माइकल की गैराज के पिछले हिस्से में कैद थे। वह दोनों एक दूसरे के आमने सामने ही थे। उनके हाथ पैर और मुंह बंधे हुए थे।‌ दोनों चुपचाप बस आसपास की गतिविधियों को देख रहे थे। मानवी को यकीन हो गया था कि अब उसकी ज़िंदगी का बहुत कम वक्त बचा है।

उसकी आँखों में आंसू थे। उसने आंसू भरी आँखों से निर्भय की तरफ देखा। निर्भय की निगाहें उससे मिलीं। पर वह मजबूर था। उसे किसी तरह की तसल्ली नहीं दे सकता था।
वैसे यदि वह दे सकता तो भी मानवी को कोई तसल्ली ना दे पाता। उसके मन की हालत भी मानवी की तरह थी। उसे भी यकीन था कि अब वह इस धरती पर कुछ समय का ही मेहमान है। वह अपने और मानवी के जीवन के अंत की बड़ी वीभत्स कल्पनाएं कर रहा था। उनके बारे में सोच सोच कर उसका खून सूख रहा था।
वह पछता रहा था कि समय रहते ही वह सचेत क्यों नहीं हो गया। यह बात तो उसकी समझ में आ गई थी कि पीर मोहम्मद बनकर आया आदमी उन लोगों की टोह लेने ही आया था।‌ जब उसने मानवी से सिंगापुर जाने की बात कही थी तब उसने सुझाव दिया था कि दोनों अभी ही विला छोड़कर किसी होटल में चले जाते हैं। उसके बाद वहीं से सिंगापुर निकल जाएंगे। पर तब निर्भय ने कह दिया कि वो दोनों कल सुबह यहाँ से दिल्ली चले जाएंगे। वहाँ से सिंगापुर निकल जाएंगे।‌
वह मानवी को समझाकर लेटा ही था कि उसके कुछ ही मिनटों में डिसूज़ा विला में कुछ अज्ञात‌ लोग घुस आए।‌ हलचल सुनकर वह और मानवी डर गए।‌ दोनों ही यह सोच रहे थे कि क्या करें तभी कुछ लोग बेडरूम में घुस आए। गन प्वाइंट पर उन दोनों को अगवा कर यहाँ ले आए।
निर्भय ने आंसू बहाती हुई ‌मानवी की तरफ देखा। उसका मन पसीज गया। उसने कोशिश की कि वह सरक कर मानवी के पास तक जा सके। वह कुछ ही आगे खिसका होगा कि वहाँ मौजूद माइकल के आदमी ने ज़ोर से डांटा। निर्भय जहाँ था वहीं रुक गया। उसने मानवी की तरफ देखा। वह डरकर ज़ोर ज़ोर से रो रही थी। उसका भी डर की वजह से बुरा हाल था।

माइकल उस जगह पर आया जहाँ मानवी और निर्भय कैद थे।‌ उसने अपने ‌आदमी से कहा,
"इन दोनों सामानों को पूरी हिफाज़त के साथ मुंबई ले जाना है। इनके पैकिंग की तैयारी करो।"
उसकी बात सुनकर निर्भय डर गया। वह समझ नहीं पा रहा था कि पैकिंग किए जाने का क्या मतलब है। उसके मन में आया कि क्या इनका इरादा उन दोनों को मारकर उनकी लाश मुंबई ले जाना है ? पर अंजन उनकी लाशों का क्या करेगा ? ज़रूर ये लोग उनको किसी चीज़ में बंद करके अंजन के पास ले जाने वाले हैं। उसने एक बार फिर मानवी की तरफ देखा। वह सहमी और डरी हुई थी।

अंजन को बड़ी बेसब्री से मानवी और निर्भय का इंतज़ार था। मानवी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर उसके साथ जो कुछ किया था उसका बदला लेने के लिए वह बुरी तरह तड़प रहा था। साथ ही वह यह जानने के लिए परेशान था कि उसके बीच हाउस में होने की सूचना क्या मीरा ने उन्हें दी थी।
वह अपने अब तक के जीवन के बारे में सोच रहा था।‌ अपनी ज़िंदगी का रास्ता उसने खुद बनाया था। भागकर वह मुंबई जैसी महानगरी में आ गया था। लोग यहाँ सपने लेकर आते हैं। उसने यहाँ आने के बाद सपना देखा था। ऊँचाइयां छूने का सपना।

अपनी धाक जमाने का सपना। एक गरीब लड़का जिसका इस बड़े शहर में कोई नहीं था, उसके लिए ऐसा सपना देखना बड़ी हिम्मत की बात थी। पर हिम्मत की उसमें कोई कमी नहीं रही थी। उसी हिम्मत के दम पर उसने अपनी सफलता की तरफ कदम बढ़ाने शुरू कर दिए।
हिम्मत के अलावा एक और चीज़ थी जो उसकी सफलता में सहायक बनी। लोगों को अपने लाभ के लिए इस्तेमाल करने की क्षमता। उसने अपनी इस क्षमता का भरपूर प्रयोग किया। उसके सारे दांव सही बैठे। उसके चलते ही वह इस ऊँचाई तक पहुँच पाया था।
पर तरुण की गलती आज उस पर भारी पड़ रही थी। अगर उसने मानवी और उसके प्रेमी निर्भय को ठिकाने लगा दिया होता तो यह दिन ना देखना पड़ता।
अब उसने तय कर लिया था कि ‌मानवी और ‌निर्भय पर कोई दया नहीं दिखाएगा।

रिस्की लव - 29

माइकल ने मानवी और निर्भय को मुंबई ले जाने की सारी तैयारी कर ली थी। वह दोनों को एक यॉट में गोवा से मुंबई ले जाने वाला था। इस समय वह और उसके साथी दोनों को यॉट तक ले जाने की तैयारी कर रहे थे।
इंस्पेक्टर कौशल सावंत अपनी टीम के साथ गैराज के पास था। उसकी टीम में उसके अलावा सब इंस्पेक्टर रोवॉन और दो कांस्टेबल थे। वह कोई जल्दबाज़ी नहीं करना चाहता था जिससे अगवा किए गए लोगों पर कोई खतरा हो। उसे पूरा यकीन था कि वह दोनों इसी गैराज में हैं। वह और उसके साथी सही मौके की तलाश में थे जब गैराज में अचानक धावा बोल सकें।
सब इंस्पेक्टर रोवॉन सावधानी से गैराज की तरफ आया। उसने देखा कि अगवा किए गए लोगों को किसी गाड़ी में बैठाया जा रहा है। वह समझ गया कि अब एक्शन का समय हो गया है। अब देर करने से उन दोनों की जान को खतरा हो सकता है। उसने फौरन इंस्पेक्टर कौशल सावंत को सूचना दी। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने अपनी टीम के साथ गैराज पर धावा बोल दिया। उन्होंने ताबड़तोड़ गोलियां चलाईंं। माइकल के तीन साथियों में से दो मारे गए। बचा हुआ साथी डर गया।
माइकल एक खराब कार के पीछे छिपा था। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने दोनों कांस्टेबल से कहा कि वह उस गाड़ी की तरफ बढ़ें जिसमें मानवी और निर्भय थे। दोनों सावधानी से गाड़ी की तरफ बढ़ने लगे। खराब कार के पीछे छिपे माइकल ने गोली मारकर एक कांस्टेबल को घायल कर दिया। वह भागकर आया और गाड़ी में घुस गया। उसने धमकाते हुए कहा,
"हमें इस गाड़ी के साथ जाने दो। नहीं तो इन दोनों की जान बेवजह चली जाएगी।"
माइकल ने अपने बचे हुए साथी से कहा कि वह जाकर ड्राइविंग सीट पर बैठ जाए। जब वह कहे तो गाड़ी को लेकर वहाँ से निकल ले।
इंस्पेक्टर कौशल सावंत जानता था कि इस समय माइकल का पलड़ा भारी है। वह उन दोनों के साथ कुछ भी करने की स्थिति में है। वह उनकी जान को कोई खतरा नहीं होने देना चाहता था। पर अपने हथियार भी नहीं डाल सकता था। उसने कहा,
"चुपचाप आत्मसमर्पण कर दो।

यहाँ से निकल भी गए तो बच नहीं पाओगे।"
मानवी और निर्भय पुलिस के आने से खुश थे। पर माइकल के गाड़ी में घुस आने से डर गए। दोनों भगवान से अपनी जान की सलामती के लिए प्रार्थना कर रहे थे। माइकल ने फिर से धमकी दी,
"हमें छोड़ो। इन दोनों की सोचो। अगर तुम नहीं माने तो इनका जीवन खतरे में पड़ जाएगा।"
इंस्पेक्टर कौशल सावंत समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे। उसने अपने आसपास देखा। उसके दो कांस्टेबल थे जिनमें से एक घायल था। पर सब इंस्पेक्टर रोवॉन उसे दिखाई नहीं दिया। वह परेशान हो गया।
इन सबके बीच इंस्पेक्टर रोवॉन धीरे धीरे ज़मीन पर रेंगता हुआ उस गाड़ी के पिछले हिस्से की तरफ पहुँच गया जिसमें माइकल घुसा था। वह रेंगता हुआ गाड़ी के नीचे गया। फिर वह बाहर निकल कर उस दरवाज़े पर आया जिससे माइकल गाड़ी में घुसा था।‌ बाहर निकल कर वह सावधानी से खड़ा ‌हुआ और फुर्ती से दरवाज़ा खोल दिया।
माइकल इंस्पेक्टर कौशल सावंत को धमकी देने में व्यस्त था। वह असावधान था। सब इंस्पेक्टर रोवॉन ने उस पर गोली चला दी। गोली उसके सर पर लगी और वह ढेर हो गया। माइकल के मारे जाने से उसका साथी घबरा गया। वह गाड़ी से कूद कर भागने लगा। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने उसकी टांग पर गोली मारी। वह गिर पड़ा।
सब इंस्पेक्टर रोवॉन ने मानवी और निर्भय को गाड़ी से बाहर निकाल लिया। मानवी और निर्भय को पुलिस स्टेशन में लाकर उनसे पूछताछ की गई।

विनोद अपनी नज़र इस केस पर बनाए हुए था। उसे खबर मिली कि डिसूज़ा विला से अगवा किए गए लोगों को छुड़ा लिया गया। वह फौरन पुलिस स्टेशन पहुँचा। वहाँ से जो भी जानकारी मिली सब नफीस को बता दी। नफीस को यकीन था कि जेनिफर ही मानवी है। उसका यह यकीन और पक्का हो गया जब मीडिया में डिसूज़ा विला से अगवा लोगों की तस्वीर छपी।
मानवी और निर्भय ने अपने बयान में कहा कि उन्हें नहीं पता कि उनका अपहरण किसने और क्यों किया था। उनका सोचना था कि यदि वो दोनों अंजन का नाम लेंगे तो उस पर हुए हमले की बात खुल जाएगी। इसलिए उन्होंने सोच समझकर यह बयान दिया था।
नफीस को उनका यह बयान अजीब लग रहा था। यह यकीन करना उसके लिए कठिन था कि उन दोनों को इस बात का अंदेशा ना हुआ हो कि उन्हें अगवा करने वाला अंजन है। वह समझ गया कि दोनों अपने को बचाने के लिए ऐसा कह रहे हैं। उसने विनोद से कहा कि वह कोशिश करे कि कुछ और दिन गोवा में रहकर उन पर नज़र रखे।

अंजन को जब पता चला कि गोवा पुलिस ने मानवी और निर्भय को माइकल की गैराज से छुड़ा लिया तो उसे अपने ऊपर खतरा महसूस होने लगा। अपने आप को बचाने के लिए वह फौरन लंदन के लिए निकल गया। लंदन पहुँच कर वह अपने दोस्त ‌सागर के पास भी नहीं रुका। लंदन में उसका एक फ्लैट था। यहाँ वह बहुत ठहरता था। वह उसी फ्लैट में रहने लगा।
सागर उससे वहीं मिलने आया हुआ था।

अंजन बहुत परेशान था। उसने कहा,
"ना जाने क्या हो गया है ? इस समय कुछ भी सही नहीं चल रहा है। मानवी और निर्भय हाथ आकर निकल गए। उनसे बदला नहीं ले पाया। ऊपर से पुलिस का डर हो गया। वो दोनों पुलिस को मेरे बारे में बताएंगे।"
सागर ने उसे समझाया,
"अंजन....अब तुम बहुत जल्दी परेशान होने लगे हो। इसलिए पूरी बात जाने बिना यहाँ भाग आए। उन दोनों ने पुलिस को अपने अपहरण करने वाले के बारे में कुछ नहीं बताया है।"
"तुम्हें कैसे मालूम ?"
"मैं यहाँ बैठकर भी मैं उस केस पर नज़र रखे हूँ। गोवा की लोकल मीडिया ने इस केस को कवर किया है। उसके हिसाब से उन दोनों ने कहा है कि उन्हें नहीं पता कि किसने और क्यों उनका अपहरण किया।"
यह सुनकर अंजन को आश्चर्य हुआ। उसे लगा था कि मानवी और निर्भय समझ गए होंगे कि यह उसका काम है। वह बोला,
"इसका मतलब उन्हें पता ही नहीं चला कि उन्हें अगवा करवाने में मेरा हाथ था।"
सागर ने उसकी तरफ देखकर कहा,
"अपने ऊपर हुए हमले के बाद तुम पहले जैसे नहीं रहे हो। उन्हें पता था कि यह काम तुम्हारा है। पर वो दोनों भी नहीं चाहते थे कि बात तुम तक पहुँचे और तुम पर हुए हमले की बात खुले। क्योंकी फिर उनके गिरेबान भी पुलिस के हाथ में होते।"
सागर की बात सही थी। अंजन को भी लग रहा था कि वह ना जाने क्यों इतना अधिक घबरा गया। बिना अधिक सोचे भागकर यहाँ आ गया। सागर ने उससे कहा,
"पर एक तरह से तुमने ठीक ही किया कि यहाँ आ गए। क्योंकी इंस्पेक्टर कौशल सावंत अपनी तरफ से जांच करेगा। मैंने उसका ट्रैक रिकॉर्ड पता किया है। वह जिस केस में घुसता है उसे पूरा सॉल्व करने के बाद ही क्लोज़ करता है।"
सागर की बात सुनकर अंजन को तसल्ली हुई। सागर ने कहा,
"लेकिन अब तुम बहुत जल्दी घबरा जाते हो। मैंने पहले भी तुम्हें मुश्किल स्थितियों में देखा है। पर कभी तुमने इस तरह से परेशान होकर काम नहीं किया।"
अंजन को भी अपनी गलती का एहसास हो रहा था। सचमुच उसने कई कठिनाइयां झेली थीं। पर कभी भी अपने आपको तनाव में नहीं आने दिया था। इधर वह बहुत जल्दी तनाव में आ जाता था। अपनी गलती मानते हुए वह बोला,
"तुम ठीक कह रहे हो सागर। जबसे मुझे पता चला है कि मुझ पर हमला मानवी और उसके प्रेमी ने करना है मैं तनाव में रहने लगा हूँ। इससे पहले भी मैं बिना सोचे समझे सीधा लंदन आ गया था।‌ पर मैं क्या करूँ। जिन्होंने मेरा सब कुछ छीनने की कोशिश की है उनसे बदला लेने के लिए मैं मन ही मन छटपटा रहा हूँ। मैं उन सपोलों के फन कुचल देना चाहता हूँ।"
सागर ने उसे समझाते हुए कहा,
"तुमने अब तक अपने सारे दुश्मनों को सज़ा दी है। इस बार भी दोगे। बस जल्दबाज़ी में कोई गलती मत करना जो इस बार की।"
"इस बार भी मैंने सब पूरे प्लान के साथ किया था। कोई गलती नहीं की मैंने।"
"तुमने गलती की है अंजन।

"
अंजन समझ नहीं पा रहा था कि सागर का इशारा किस तरफ है। उसने पूँछा,
"तुम ही बताओ मैंने क्या गलती की ?"
"जब तुम्हारे दुश्मन गिरफ्त में आ गए थे तो तुम्हें चाहिए था कि खुद गोवा जाकर उनसे बदला लेते। उन्हें मुंबई बुलाने का रिस्क क्यों लिया।"
अंजन कुछ देर सोचकर बोला,
"मुझे लगा था कि मुंबई बुलाकर उनसे मनचाहे तरीके से हिसाब चुका सकता हूँ। गलती मेरी नहीं थी। उस बेवकूफ माइकल की थी। मैंने अपने दोस्त समर की वजह से उस पर भरोसा किया था। पर उसने सब गड़बड़ कर दी।"
"पर अब तुम बहुत सोच समझकर काम लेना। इस बार मौका मत गंवाना।"
"क्या दोबारा मौका मिलेगा ?"
"बिल्कुल.... मैंने अपना आदमी मानवी और निर्भय पर नज़र रखने के लिए लगा दिया है। वह उनकी हर गतिविधि की सूचना देता रहेगा।"
अंजन ने उठकर सागर को गले लगाकर कहा,
"तुम मेरे लिए बहुत कुछ कर रहे हो।"
"क्योंकि मैं अपने ऊपर किए गए एहसान कभी नहीं भूलता हूँ।"

सागर उससे एहतियात बरतने को कहकर चला गया। अंजन उसकी और अपनी दोस्ती की शुरुआत के बारे में सोचने

रिस्की लव - 30

जिन दिनों अंजन रघुनाथ परिकर के कंस्ट्रक्शन बिज़नेस में उसके लिए अवैध रूप से ज़मीन और प्रॉपर्टी हथियाने का काम करता था उन्हीं दिनों उसकी लव चढ्ढा से दोस्ती की शुरुआत हुई थी।‌
एक पार्टी में वह लव से मिला था। उस दिन दोनों को ही ऐसा लगा जैसे उनमें कई बातें ऐसी हैं जो एक जैसी हैं। उसके बाद दोनों कई बार एक दूसरे से मिले। हर बार दोनों की दोस्ती और मज़बूत होती जाती थी। वैसे लव उससे उम्र में बड़ा था। पर उम्र का यह अंतर दोनों की दोस्ती के आड़े नहीं आया। लव और अंजन एक दूसरे के पक्के दोस्त बन गए।
लव उन दिनों प्रतिबंधित स्टेरॉइड्स का धंधा करने वाले एक गैंग से जुड़ा था। अंजन की तरह वह भी आसमान छूना चाहता था। ऊँचा उड़ने की चाह दोनों की दोस्ती का मुख्य आधार थी। दोनों अपने अपने तरीके से अपने सपने पूरे कर भी लिए।
लव जिस गैंग के साथ काम कर रहा था अपनी हिम्मत और सूझबूझ से उसका बॉस बन गया। उसके बाद उसने तेज़ी से सफलता की तरफ कदम बढ़ाने शुरू कर दिए। अंजन रघुनाथ परिकर का विश्वास जीतकर मानवी को सीढ़ी बनाकर वहाँ पहुँच गया जहाँ जाना चाहता था। दोनों दोस्तों ने ‌अपना सपना पूरा कर लिया था। अपनी सफलता को सेलीब्रेट करने के लिए ‌दोनों लंदन गए थे।
अंजन ने परिकर भाइयों को मरवा कर उनके बिज़नेस और जायदाद पर कब्ज़ा कर लिया था। लव ने भी अपने कारोबार को और बढ़ाना शुरू कर दिया था। वह अब ड्रग्स के धंधे में आगे बढ़ रहा था। पर उसका एक दुश्मन भी पनप गया था।
जिस गैंग का वह बॉस बन गया था वह प्रवीण शिंदे का था। लव उसका विश्वास जीतकर उसका सबसे नज़दीकी आदमी बन गया था। जिसका फायदा उठाकर ही उसने धोखे से प्रवीण को मारकर उसका सबकुछ हड़प लिया था।

लव अपने धंधे में बड़ी तेज़ी के साथ आगे बढ़ रहा था। यह बात उस कारोबार में शामिल और लोगों को बुरी लग रही थी। लव के कारण कारोबार में उनका हिस्सा गिरता जा रहा था। लव एक तरह से उस क्षेत्र का राजा ही बनता जा रहा था।
प्रवीण शिंदे भी इस क्षेत्र में अच्छा नाम रखता था। लेकिन वह दूसरों का भी खयाल रखना था। उसके साथ आफताब रहमान भी इस कारोबार में एक बड़ा नाम था। प्रवीण और आफताब एक दूसरे के क्षेत्र में दखल नहीं देते थे।
लव ने जबसे कारोबार में कदम रखा था उस पर कब्ज़ा करना शुरू कर दिया था। उसका मकसद सिर्फ खुद को स्थापित करना था। इसलिए वह किसी सीमा का पालन नहीं कर रहा था।‌ यह बात आफताब को सबसे ज्यादा खराब लग रही थी। उसने अपने कारोबार के एक अन्य साथी तारकेश को अपने साथ मिलाकर लव को रास्ते से हटाने का मन बनाया।
प्रवीण शिंदे के गैंग के अधिकांश लोग लव के साथ हो गए थे। लव उन पर भरोसा भी करता था। उनके साथ से ही वह दिनोंदिन आगे बढ़ रहा था। इनमें एक था लॉरेंस गोम्स। लव उस पर सबसे अधिक भरोसा करता था। वह लव की सिक्योरिटी करता था और हमेशा लव के साथ रहता था।
लॉरेंस भी बहुत महत्वाकांक्षी था। आफताब और तारकेश ने उसे एक मोहरे की तरह इस्तेमाल करने की योजना बनाई। उन दोनों ने लॉरेंस से संपर्क करके उसे मिलने बुलाया। उन्होंने लॉरेंस को सारी बात बताते हुए कहा कि लव ने उसके बॉस नवीन के साथ छल करके उसकी जगह ले ली। अब वह कारोबार में सबके हिस्से पर अपना कब्ज़ा करना चाहता है। यदि लॉरेंस साथ दे तो तो वह दोनों लव को रास्ते से हटाकर उसकी जगह उसे बैठा सकते हैं। पर उसे सबके साथ मिलकर रहना पड़ेगा।
लॉरेंस को उनका प्रस्ताव अच्छा लगा। वह जानता था कि अपने दम पर लव की जगह हासिल कर पाना उसके लिए कठिन होगा‌। यह उसके लिए एक अच्छा अवसर है। वह उन दोनों की मदद के लिए तैयार हो गया।
जल्द ही उन्हें एक अच्छा मौका मिल गया।
लव सोफिया नाम की एक बार डांसर के इश्क़ में गिरफ्तार था। सोफिया का जन्मदिन था। वह चाहती थी कि उसके जन्मदिन पर लव उसके साथ रात भर पार्टी करे। लेकिन उन दोनों के अलावा कोई और ना हो। उसकी इच्छा पूरी करने के लिए लव उसे बीच पर बने अपने छोटे से कॉटेज में ले जाने वाला था। उसने लॉरेंस से अपने कुछ साथियों के साथ सिक्योरिटी पर रहने को कहा था।
लॉरेंस ने आफताब और तारकेश के साथ मिलकर एक प्लान बनाया। प्लान के हिसाब से आफताब और तारकेश अपने आदमियों के साथ आधी रात के करीब हमला किया। लॉरेंस ने अपने साथियों को शराब पिलाकर नशे में धुत कर दिया था। वो लोग कुछ कर नहीं पाए मारे गए। गोलीबारी की आवाज़ सुनकर लव सावधान हो गया। उसने सोफिया को हिदायत दी कि वह कमरे से बाहर ना निकले। उसका फोन उठाकर उसके दोस्त अंजन को मदद के लिए आने को कहे।

यह हिदायत देकर वह अपनी गन के साथ बाहर की तरफ भागा।
वह कमरे से बाहर निकला ही था कि सामने आफताब और तारकेश दिख गए। उनके ठीक पीछे लॉरेंस मुस्कुराता हुआ खड़ा था। लव समझ गया कि उसने गद्दारी की है। पर अब वह कुछ करने की स्थिति में नहीं था। आफताब, तारकेश और लॉरेंस ने उसे एक एक गोली मारी। उसके बाद तीनों कमरे में घुसे। उन्होंने सोफिया को भी मार दिया। पर तब तक वह अंजन को खबर दे चुकी थी।
अंजन को मालूम था कि लव सोफिया के साथ कहाँ गया है। अपने साथियों के साथ वह फौरन मदद के लिए निकल गया। जब वह कॉटेज में पहुँचा तो वहाँ चारों तरफ खून बिखरा था। अंदर खून में लथपथ लव पड़ा था। अंजन ने महसूस किया कि अभी नब्ज़ चल रही है। वह फौरन उसे अस्पताल ले गया।
डॉक्टरों की कोशिश से वह बच गया पर ठीक होने में समय लग गया। लव इस हमले से टूट गया था। अंजन ने उसे हौसला दिया। फिर से शुरुआत करने की ताकत दी। अंजन की मदद से लव ने अपने दुश्मनों से बदला लिया। अपना सबकुछ वापस ले लिया। पर उसका मन अब यहाँ नहीं लग रहा था। वह कहीं दूर जाना चाहता था।
अंजन ने इस मामले में भी उसकी मदद की। लव अपना सबकुछ समेट कर लंदन चला गया। एक नए नाम सागर खत्री के साथ नई शुरुआत की। उसने एक कसीनो खरीद लिया। यहाँ कसीनो की आड़ में गैरकानूनी सट्टा भी लगता था।
धीरे धीरे सागर खत्री ने अपनी एक जगह बना ली।
अंजन ने उसकी इतनी मदद की थी। उस एहसान को वह भूला नहीं था। अब अंजन की मदद करके एहसान चुकाना चाहता था।

सागर खत्री ने अपना एक खास आदमी मीरा के बारे में पता लगाने के लिए लगाया था। अंजन से मिलकर जब वह अपने घर पहुँचा तो वह कुछ महत्वपूर्ण जानकारियों के साथ उसका इंतज़ार कर रहा था। उसने बताया कि मीरा लंदन लौटी ही नहीं थी। वह पहले गोवा गई थी। उसके बाद वहाँ से उसने सिंगापुर की फ्लाइट पकड़ी थी। अभी सिंगापुर में वह कहाँ है पता नहीं चला। पर वह जल्दी खोज लेगा। सागर खत्री समझ गया कि गोवा वह निर्भय और मानवी से मिलने ही गई होगी। उसने अपने आदमी से कहा कि वह सिंगापुर में निर्भय वाधवा के जितने घर या होटल हैं उनमें मीरा को खोजने की कोशिश करे।

दर्शन वशिष्ठ को जब सूचना मिली कि मानवी और निर्भय का अपहरण हुआ था लेकिन पुलिस ने उन्हें बचा लिया तो वह घबरा गया। वह जानता था कि अंजन उन तक पहुँच चुका है। एक मौका भले ही वह चूक गया हो पर दोबारा ऐसी गलती नहीं करेगा। वह जानता था कि उसकी जान भी खतरे में है। उसने अंजन को डबल क्रॉस किया है। अब उसकी खैर नहीं है।
शिमला के अपने घर में छिपा हुआ वह अब पछता रहा था कि पैसों के लिए उसने मानवी और निर्भय का साथ क्यों दिया। पैसे भी पूरे नहीं मिले अब जान पर आ बनी है।
वह हर पल डर के साए में जी रहा था। घर से बाहर तभी निकलता था जब बहुत ही आवश्यक हो।

इस समय उसे कुछ ज़रूरी चीजें खरीदने के लिए बाज़ार आना पड़ा था। वह मॉल में जल्दी जल्दी ज़रूरी सामान से अपनी ट्रॉली भर रहा था। सामान का पेमेंट कर जब वह बाहर अपनी कार के पास पहुँचा तो दो लोग उसके पास आए। उन्हें देखकर लग रहा था कि उनका इरादा ठीक नहीं है।‌ दर्शन घबरा गया। सामान का बैग उसके हाथ से छूटकर गिर गया। एक वैन आई उसे जबरदस्ती उसमें ढकेल दिया गया।

अंजन के पास उसके आदमी का फोन आया। उसने बताया कि दर्शन उसकी कैद में है। वह जानना चाहता था कि आगे क्या करना है। अंजन को दर्शन की कोई ज़रूरत नहीं थी। उसे पास लाने को कहकर वह कोई खतरा नहीं लेना चाहता था। उसने अपने आदमी से वह उसे खत्म कर दे।

इंस्पेक्टर कौशल सावंत को मानवी और निर्भय के इस बयान से तसल्ली नहीं हुई थी कि उन्हें किसने और क्यों किडनैप करने की कोशिश की। अपने अनुभव से वह यह जानता था कि दोनों जानबूझकर कुछ छिपा रहे हैं या डरे हुए हैं। उसने उनसे सख्ती करने की जगह खुद पता करने के बारे में सोचा।
माइकल का वह आदमी जिसके पैर में गोली लगी थी वह इस मामले में सहायक हो सकता था। लेकिन खून अधिक बह जाने से वह बयान देने की हालत में नहीं था। कुछ देर पहले ही इंस्पेक्टर कौशल सावंत को खबर मिली थी कि वह अब ठीक है। वह उससे बात करने के लिए निकल रहा था जब एक और अच्छी खबर मिली। राज्य सरकार ने सब इंस्पेक्टर रोवॉन को उसकी बहादुरी के लिए सम्मानित करने का फैसला किया है। इस खबर से पुलिस स्टेशन में खुशी की लहर दौड़ गई। सब सब इंस्पेक्टर रोवॉन को बधाई देने लगे। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने भी उसे बधाई दी।
जब इंस्पेक्टर कौशल सावंत माइकल के आदमी से मिलने के लिए जा रहा था तब सब इंस्पेक्टर रोवॉन ने भी उसके साथ जाने की इच्छा जताई।‌ इंस्पेक्टर कौशल सावंत उसे भी अपने साथ ले गया।

रिस्की लव - 31

भारत लौटने के बाद अंजन उस आदमी से संपर्क बनाए हुए था जिसे सागर ने मानव और निर्भय पर निगरानी के लिए लगाया हुआ था।‌ वह उस आदमी से उनकी हर गतिविधि के बारे में पता करता रहता था।
अंजन इस बार बहुत सोच समझकर अपनी चाल चलना चाहता था। इसलिए कोई जल्दबाज़ी नहीं कर रहा था। इस समय वह सब कुछ भूल गया था। अपना बिज़नेस, अपना रिज़ॉर्ट वाला प्रोजेक्ट। उसके ‌जीवन का उद्देश्य केवल मानवी और निर्भय से बदला लेना रह गया था।
लेकिन जब मीरा का खयाल मन में आता था तो वह कमज़ोर पड़ जाता था। उसके पास कोई सबूत नहीं था पर उसे लगने लगा था कि ‌मीरा भी उसके साथ धोखा कर रही थी। उसी ने मानवी और निर्भय को उसके बीच हाउस में जाने की सूचना दी थी। यह बात उसे बहुत परेशान कर देती थी।
एक तरफ तो मीरा की इस बेवफाई पर उसे गुस्सा आता था तो दूसरी तरफ उसे सज़ा देने की बात पर वह कमज़ोर पड़ जाता था।

जीवन में पहली बार उसने किसी से मोहब्बत की थी और उसे धोखा मिला था। यह बात हर पल उसके दिमाग में एक हथौड़े की तरह चोट करती थी।
यही कारण था कि उसका मन अब बाकी चीज़ों से उचट गया था। उसे अपने कारोबार की भी फिक्र नहीं थी। बुलाए जाने पर किसी पार्टी में नहीं जाता था। बस सारा दिन घर में शराब पीता रहता था और गुस्से की आग में जलता रहता था।

मानवी और निर्भय दोनों ही परेशान थे। दोनों अब गोवा छोड़कर जाना चाहते थे। पर पुलिस ‌ने कहा था कि जब तक उनकी जांच पूरी नहीं हो जाती है तब तक वह गोवा में ही रहें।‌ लेकिन यहाँ अधिक समय ठहरना उन्हें खतरनाक लग रहा था। लेकिन ‌उससे भी बड़ी ‌बात यह थी कि उन्हें एहसास हो गया था कि उन पर नज़र रखी जा रही है। यह समझना कठिन नहीं था कि यह काम अंजन करवा रहा है।
दोनों हर पल एक डर के साए में रहते थे। उन्हें लगता था कि अगर उन्होंने यहाँ से भागने की कोशिश भी की तो और भी बड़े खतरे में पड़ सकते हैं। यहाँ तो फिर भी वह सुरक्षित हैं। अपहरण का मामला अभी जांच के दायरे में है। अभी अंजन उनके साथ कुछ करने का जोखिम नहीं लेगा। पर अगर दोनों ने गोवा छोड़ दिया तो उसके खबरी उसे बता देंगे। दोनों की जान खतरे में पड़ जाएगी।
डर की वजह से दोनों घर में ही कैद होकर रह गए थे। मानवी तो गार्डन में जाने से भी डरती थी। घर का ज़रूरी सामान ऑनलाइन मंगा लेते थे। बाकी चीज़ों के लिए नौकर को ही बाहर भेजते थे। पुलिस के दो गार्ड तैनात रहते थे पर उन्होंने अपने गार्ड भी रख लिए थे।‌
मानवी कमरे में ही टहल रही थी। उसे ऐसा करते देखकर निर्भय ने कहा,
"गार्डन में जाकर क्यों नहीं टहलती। हमने सिक्योरिटी गार्ड्स रखे हैं। अब क्यों डर रही हो।"
मानवी उसके पास आकर बैठ गई,
"मुझे तो बहुत डर लगता है। सच कहूँ तो अब लगता है कि अंजन पर हमला किया ही क्यों ? जो भी हुआ था पर अपनी ज़िंदगी में सैटल हो गए थे हम दोनों।"
उसकी बात से निर्भय भी सहमत था। उसे भी अब लगता था कि अंजन से बदला लेने के चक्कर में ‌पड़कर उसने अपना ही नुकसान किया। वह गोवा में छिपकर बैठा है। अपने बिज़नेस पर ध्यान नहीं दे पा रहा है। इस सबके चक्कर में इतना खर्च भी हो गया। वह बोला,
"अब पछतावा होता है कि कुछ और गोलियां मारी होतीं तो अच्छा होता। इतना सबकुछ करके भी नतीजा कुछ नहीं निकला। उल्टा वह हमारी जान के पीछे पड़ गया। जोश में खुद ही उसे सबक सिखाने निकल पड़े। किसी को सुपारी देकर भी काम चला सकते थे। इस सबके चक्कर में मेरा बिज़नेस भी चौपट हो रहा है।"
निर्भय यह सोचकर परेशान था कि अब ना जाने क्या होगा। वह आगे बोला,
"अब तो उस मीरा ने भी धमकी देनी शुरू कर दी है। फोन पर कह रही थी कि उसके रहने का इंतज़ाम कहीं और कर दूँ। उसे वहाँ डर लगता है।

समझ नहीं आ रहा क्या करूँ ?"
मानवी ने गहरी सांस लेकर कहा,
"एक बार इस मुसीबत से निकल जाएं तो दोनों मिलकर सब ठीक कर लेंगे। मार्वल बहुत कुछ छोड़कर गया है। हम दोनों उसके सहारे अच्छी ज़िंदगी जी सकते हैं।"
निर्भय उठकर खड़ा हो गया। वह कुछ सोचते हुए कमरे में इधर उधर टहलने लगा। कुछ देर में अपनी जगह पर आकर बोला,
"मानवी बिना अंजन को रास्ते से हटाए हम कहीं भी और कभी भी चैन से नहीं रह सकते हैं। अपने ज़िंदा होते हुए वह हमें कहीं चैन से नहीं रहने देगा‌। अब तो वह घायल शेर की तरह हो गया है।"
उसकी बात सुनकर मानवी और घबरा गई। वह बोली,
"पर क्या उसे रास्ते से हटाना आसान होगा ?"
"मुश्किल ही सही पर अगर हमें चैन से ज़िंदा रहना है तो उसे मारना ही होगा। वरना इस तरह डर डर कर छिपते फिरेंगे।"
"अब क्या करोगे ?"
"अभी तो फिलहाल दिमाग काम ही नहीं कर रहा है। दिमाग शांत हो तो कुछ सोचूं।"
मानवी और निर्भय दोनों ही अपनी स्थिति के बारे में सोचकर परेशान हो गए। मन ही मन प्रार्थना करने लगे कि किसी तरह इस झंझट से मुक्ति मिले।

मीरा किसी काम से बाहर गई थी। लौटते हुए उसे सारे रास्ते यही लगता रहा जैसे कोई है जो उसका पीछा कर रहा है। वह बहुत घबरा गई थी। जबसे उसे पता चला था कि मानवी और निर्भय का अपहरण हुआ था पर पुलिस ने उन्हें बचा लिया तबसे वह ‌डरी हुई रहने लगी थी। वह जानती थी कि उन दोनों के अपहरण के पीछे अंजन ही होगा।
लौटकर आने पर उसने डरकर निर्भय को फोन कर दिया। वह चाहती थी कि वह उसे वहाँ से कहीं और शिफ्ट होने में मदद करे। निर्भय ने उससे कहा था कि वह अभी खुद परेशान है। उसकी मदद करने की स्थिति में नहीं है। वह अभी शांति से वहीं रहे। उसे कुछ नहीं होगा।
निर्भय से बात करने के बाद मीरा समझ गई थी कि वह उसकी कोई मदद नहीं करेगा। उसके पास भी ऐसी कोई जगह नहीं थी जहाँ वह जा सके। वह अपने आपको मुसीबत में जकड़ा हुआ महसूस कर रही थी।
वह समझ नहीं पा रही थी कि अब क्या करे ? कहाँ जाए ? वह वापस लंदन नहीं जा सकती थी। वह जानती थी कि अंजन का दोस्त सागर खत्री वहाँ उसके लिए जाल बिछाए हुए बैठा होगा। अब यहाँ रहना भी ‌उसके लिए मुश्किल था।
मीरा के घर की घंटी बजी। उसने सिक्योरिटी कैमरा में देखा। कुरियर ब्वॉय था। उसे याद आया कि उसने कुछ सामान मंगवाया था। उसने दरवाज़ा खोल दिया। अपना पार्सल लेकर वह अंदर जा रही थी तभी दो लोग उसे धक्का देकर अंदर घुस गए। उन्होंने दरवाज़ा बंद कर दिया। उनके हाथों में गन थीं। जो उन्होंने उस पर तान रखी थीं। मीरा के हाथ से पार्सल गिर गया। वह घबराई हुई थी। उन दोनों में से एक आदमी ने कहा,
"मीरा आसवानी.... तुम्हें हमारे साथ चलना है।"
मीरा ने डरते हुए पूँछा,
"तुम लोग कौन हो ? मुझे कहाँ ले जाना चाहते हो ?"
उस आदमी ने कहा,
"चुपचाप हमारे साथ चलो। बाद में सब पता चल जाएगा।

"
"पर बिना कुछ जाने....."
मीरा की बात बीच में ही काटकर दूसरे आदमी ने डांटते हुए कहा,
"तुम्हारे पास हमारी बात मानने के अलावा कोई और चारा नहीं है। समय बर्बाद मत करो। चुपचाप चलो।"
मीरा समझ नहीं पा रही थी कि क्या करे। वह किसी को मदद के लिए बुला भी नहीं सकती थी। उस आदमी ने फिर कहा,
"सीधे सीधे नहीं चलोगी तो हम जबरदस्ती ले जाएंगे। इसलिए चलो।"
मीरा के पास कोई चारा नहीं था। वह जानती थी कि इनकी बात मानकर ही वह बच सकती है। वह उनके साथ चली गई।

विनोद समय समय पर मानवी और निर्भय के केस के बारे में पता करता रहता था। उसने अभय नाम के एक कांस्टेबल से दोस्ती कर ली थी। वह उसे फोन करके केस में क्या हो रहा है बताता रहता था। अभय ने उसे बताया था कि माइकल का जो आदमी घायल हो गया था और अस्पताल में था वह अब बयान देने की स्थिति में है। इंस्पेक्टर कौशल सावंत और सब इंस्पेक्टर रोवॉन उसका बयान लेने गए हैं। विनोद ने उससे कहा कि जब वह लौटकर आएं तो उसे बताए कि माइकल के आदमी ने क्या बयान दिया है।
इंस्पेक्टर कौशल सावंत और सब इंस्पेक्टर रोवॉन अस्पताल पहुँचे। उन्होंने माइकल के आदमी से सारी घटना के बारे ‌में पूँछताछ की। माइकल के आदमी ने बताया कि उन दोनों को किडनैप करके मुंबई ले जाने का आदेश उन्हें समर से मिला था। उसी आदेश का पालन कर माइकल ने अपने आदमियों ने उन लोगों का अपहरण किया। जब वो लोग उन्हें मुंबई ले जा रहे थे तब पुलिस ने आकर उन दोनों को छुड़ा लिया। माइकल मारा गया और वह भागते हुए वह घायल हो गया।
इस केस में समर का नाम पुलिस के सामने आया था। समर का नाम अब सीधे अपराध जगत से नहीं जुड़ा था। गोवा और मुंबई हाईवे में उसका एक मोटेल था।‌ पर वह माइकल के ज़रिए अपहरण का काम करवाता था। उसकी नज़र उन लोगों पर होती थी जिनसे फिरौती में मोटी रकम वसूल की जा सके। फिर उन्हें या उनके करीबियों का अपहरण माइकल के ज़रिए करवा कर फिरौती वसूल करता था। उसका एक हिस्सा माइकल को दे देता था। अब तक यह काम वह बहुत सावधानी से करता था।
लेकिन मानवी और निर्भय के केस में गड़बड़ी हो गई थी। उसके बाद वह भी फरार हो गया था।

रिस्की लव - 32

शाहीन अब स्टिक के सहारे घर में इधर उधर चलती थी। प्लास्टर के कारण बिस्तर में बैठे बैठे वह ऊब जाती थी। इसलिए ‌कभी कभी बालकनी में जाकर बैठ जाती थी। इस समय भी वह बालकनी में बैठी थी। वह नफीस के बारे में सोच रही थी। नफीस ने उसकी खूब तिमारदारी की थी। कोशिश करता था कि जितना हो सके उसके साथ वक्त बिताए। बहुत ज़रूरी होने पर ही बाहर जाता था।‌ उसके क्राइम शो के शूट के लिए उसका जाना ज़रूरी था। नाज़नीन आ नहीं सकती थी। इसलिए मेड को उसके पास रहने को कहकर गया था।
वह जानती थी कि उसकी अम्मी की कही बात नफीस को बहुत बुरी तरह से चुभ गई है।

उसने कुछ कहा नहीं पर वह उसकी आँखों में वह तकलीफ देख सकती थी। एक माँ होने के नाते बच्चे की मौत का ग़म उसे भी था। पर उसने अपने इस दुख को सीने में दबाकर रखा हुआ था। वह जानती थी कि यदि वह अपना दुख नफीस के सामने लाएगी तो वह और भी टूट जाएगा। उससे जो गलती हुई थी उसके लिए पहले से ही उसका मन पछतावे से भरा हुआ है।
शुरुआत में उसके मन में ज़रूर नफीस के लिए गुस्सा था। वह उसे छोड़कर अपने अम्मी अब्बू के घर चली गई थी। उसने नफीस से अलग होने का मन बना लिया था। अम्मी उसके इस फैसले से खुश थीं। उन्होंने तो नफीस के साथ उसकी शादी के फैसले का पुरज़ोर विरोध किया था। उनकी इच्छा दुबई में कारोबार कर रहे अपनी बहन के बेटे से उसकी शादी करवाने की थी। पर शीरीन नफीस से मोहब्बत करने लगी। उनके समझाने पर भी ज़िद पर अड़ी रही। उससे शादी करके ही मानी।
जब शीरीन ने नफीस से अलग होने की बात कही तो उन्हें बड़ी तसल्ली मिली थी। वह उसके लिए दूसरा रिश्ता खोजने लगी थीं। पर नफीस इतनी आसानी से अपने प्यार को खोना नहीं चाहता था। उसने रिश्ता कायम रखने की कोशिशें शुरू कर दीं। फोन करके उससे गुज़ारिश करता रहता था कि एक बार उससे मिलकर अपनी बात कह लेने दे। फिर वह जो फैसला चाहे कर ले।
शीरीन गुस्से में नफीस को छोड़कर चली आई थी। उस समय अपने बच्चे को खोने का जख्म ताज़ा था। पर उसने नफीस की हालत भी देखी थी। वह अपने आप को कुसूरवार मानकर पछता रहा था। जब नफीस ने उसे फोन करके मिलने के लिए बुलाया तो वह इस बारे में विचार करने लगी। तब उसने महसूस किया कि उसके मन में अभी भी नफीस के लिए प्यार है। कम से कम उसे अपनी बात कहने का मौका देना चाहिए। वह उससे मिलने को तैयार हो गई।
दोनों खुलकर बात कर सकें इसलिए वह नफीस के घर पर जाकर उससे मिली। नफीस ने उससे जो हुआ उसके लिए माफी मांगी। उसे यकीन दिलाया कि वह बहुत पछता रहा है। अगर ऐसे में वह भी उसे छोड़ देगी तो वह सह नहीं पाएगा। टूट जाएगा। शीरीन उससे प्यार तो करती ही थी। उसके पछतावे को देखकर पिघल गई। उसने अपना फैसला बदल दिया।
उसकी अम्मी को यह बात अच्छी नहीं लगी। उनका कहना था कि नफीस लापरवाह ही नहीं ख़ुदग़र्ज़ भी है। बस अपने बारे में सोचता है। वह बहुत पछताएगी। पर शीरीन नफीस के पास वापस आ गई।
नफीस ने फैसला किया कि मुंबई में रहेंगे तो अपना दुख भूल नहीं पाएंगे। दोनों दिल्ली चले गए। अपना दुख भुलाने के लिए नफीस ने अपने आप को काम में डुबो दिया। पर शीरीन वह भी नहीं कर पाई। वह चाहती थी कि नफीस उसे वक्त दे। नफीस चाहकर भी ऐसा नहीं कर पाता था। शीरीन ने मुंबई वापस चलने की ज़िद की। उसके अपने यहीं थे। नफीस वापस मुंबई आ गया।
कॉलबेल बजी। मेड ने दरवाज़ा खोला। नफीस वापस आ गया था। वह सीधा बालकनी में बैठी शीरीन के पास गया।

उसने कहा,
"कोई दिक्कत तो नहीं हुई ?"
शीरीन ने मुस्कुरा कर कहा,
"दिक्कत कैसी होनी थी ? सबकुछ तो तुम करके गए थे। तुम बताओ कैसा रहा शूट।"
"अच्छा रहा। वैसे चैनल वाले चाहते हैं कि मैं किसी नए कांसेप्ट पर काम करूँ। शो की टीआरपी कम हो रही है।"
"कोई नया कांसेप्ट है तुम्हारे दिमाग में।"
"मैं भी महसूस कर रहा था कि क्राइम पर आधारित कई प्रोग्राम चल रहे हैं। मैंने एक नया कांसेप्ट सोचा था। राजनीति और अपराध जगत की सांठ गांठ पर। प्रपोज़ल दे दिया है। अब चैनल वाले सोचकर बताएंगे।"
"अच्छा कांसेप्ट है। यह शो भी लोग पसंद करेंगे। वैसे तुम अपनी नई किताब लिख रहे थे उसका क्या हुआ ? क्या नाम था उसका ? शायद कोई विश्वकर्मा था।"
"अंजन विश्वकर्मा.... अभी तो उसकी ज़िंदगी के कुछ राज़ जानने हैं। तब किताब पूरी होगी। वैसे बड़ा दिलचस्प कैरेक्टर है।"
शीरीन ने एक बार फिर मुस्कुराते हुए कहा,
"अगर तुम मोहब्बत भरी कहानियां लिखते तो मैं पढ़ती भी। पर अपराधियों की कहानियां मुझे अच्छी नहीं लगती हैं।"
नफीस ने भी हंसते हुए जवाब दिया,
"तुमने भी तो एक क्राइम रिपोर्टर से शादी की है। कोई शायराना मिज़ाज का तलाशा होता तो वह तुम्हारे लिए रोमांटिक कहानियां या शायरी लिखता।"
"अब क्या करूँ....दिल तुम पर ही आ गया।"
आज शीरीन का उससे इस तरह बातें करना नफीस को बहुत अच्छा लगा। वह हंस दिया। तभी मेड ने आकर कहा कि खाना टेबल पर लगा दिया है। अब वह जा रही है।

नफीस फ्रेश होने चला गया। उसके दिमाग में समर का नाम घूम रहा था। शूट के बीच में विनोद का फोन आया था। उसने मानवी और निर्भय के केस में मिली नई जानकारी उसे दे दी थी। उसने यह भी कहा था कि अब अखबार वाले उसे मुंबई वापस आने को कह रहे हैं। नफीस ने उसे लौट आने के लिए कह दिया था।
उसे लग रहा था कि समर नाम के इस शख्स से शायद वह कहीं मिला है। शायद किसी पार्टी में। वह याद करने की कोशिश कर रहा था। उसे एक पार्टी के कुछ दृश्य याद आ रहे थे। अंजन के साथ उस पार्टी में एक आदमी था। गोल चेहरा, छोटी छोटी आँखें और टुड्डी पर गोटी। रंग गोरा था और कद कोई पाँच फीट। अंजन ने उसे किसी से मिलाते हुए यह नाम लिया था। पर उसे याद नहीं आ रहा था कि वह किसकी पार्टी थी। अंजन उसका परिचय किससे करवा रहा था।
कुछ देर सोचने के बाद नफीस को याद आया कि उसने समर को कहाँ देखा था। परिकर बंधुओं की मौत के एक महीने बाद की ही बात थी। एक टीवी प्रोड्यूसर ने अपने नए सीरियल की लांच पार्टी रखी थी। सीरियल एक क्राइम स्टोरी पर था इसलिए उसे भी निमंत्रण आया था। वहीं अंजन के साथ उसके दो दोस्त लव चढ्ढा और समर सिंह पहुँचे थे। लव चढ्ढा को पार्टी में बहुत से लोग पहचानते थे। ‌वह उन सब लोगों से मिल रहा था। लेकिन समर नया था। इसलिए अंजन उसे पार्टी में सबसे मिलवा रहा था।

उसी समय सीरियल की हिरोइन से उसने समर का परिचय करवाते हुए कहा था कि यह मेरा दोस्त समर है। मुंबई गोवा हाइवे पर इसका मोटेल है। उस समय नफीस पास ही था। उसने सबकुछ सुन लिया था। उसके बाद समर कभी अंजन के साथ किसी पार्टी में नहीं दिखा। नफीस को वह याद रह गया क्योंकी हिरोइन से हाथ मिलाते हुए वह बड़ी अजीब निगाहों से उसे देख रहा था।‌ उसके देखने का तरीका ऐसा था जैसे वह उसे निगाहों में ही नाप तौल रहा था। वह हिरोइन भी नर्वस हो गई थी और धीरे से वहाँ से चली गई थी। नफीस की खासियत थी कि उसे आकर्षित करने वाली कोई चीज़ या व्यक्ति उसके दिमाग में उसी तरह सेव हो जाते थे जैसे किसी डिवाइस की मेमोरी में। थोड़ी सी कोशिश के बाद वह उसे रीकॉल कर लेता था।
आज कई सालों बाद उसका नाम मानवी और निर्भय के अपहरण के केस में सुनाई पड़ा था।‌
शीरीन ने आवाज़ लगाई कि जल्दी करो। उसे भूख लगी है। नफीस तैयार होकर खाने के लिए चला गया।

कार मीरा को लेकर जा रही थी। दोनों आदमी उसके अगल बगल इस तरह से बैठे थे कि वह अधिक हिल डुल भी नहीं पा रही थी। वह यह सोचकर डर रही थी कि अंजन ने उसका पता लगा लिया है। ये लोग उसे अंजन के पास ही ले जा रहे हैं। वहाँ पहुँचने पर अंजन उसे मार देगा। उसकी आँखों में आंसू थे। वह उस पल को कोस रही थी जब मानवी और निर्भय उससे मिले थे।
एक घंटे की यात्रा के बाद कार एक खूबसूरत बंगले के गेट पर रुकी। मीरा के बाईं तरफ वाले आदमी ने सिक्योरिटी से कुछ कहा। बंगले का गेट खुल गया। कार अंदर चली गई।
दोनों आदमी मीरा को लेकर बंगले के अंदर गए। एक और आदमी वहाँ उनकी राह देख रहा था। उसने मीरा के साथ आए आदमियों को वहीं रोक दिया। मीरा को अपने पीछे आने को कहा। डरते हुए मीरा उसके पीछे चल रही थी। लॉबी में लगी लिफ्ट से वह दोनों तीसरी मंजिल पर पहुँचे। लिफ्ट से निकल कर कॉरीडोर के अंत में बने कमरे के सामने जाकर उस आदमी ने नॉक किया। अंदर से आवाज़ आई,
"सेंड हर इन...."
मीरा ने यह आवाज़ पहले सुनी थी। यह अंजन नहीं था। उस आदमी ने मीरा को अंदर जाने के लिए कहा। मीरा अंदर पहुँची तो सामने सागर खत्री था। उसके लिए वह भी ‌यमदूत ही था। मीरा घबराई हुई उसके सामने खड़ी थी।
सागर खत्री उसे गुस्से से घूर रहा था।

रिस्की लव - 33

सागर खत्री की घूरती हुई निगाहें ‌मीरा के शरीर में ‌सिहरन पैदा कर रही थीं।‌ वह उन निगाहों की ज़द से दूर भाग जाना चाहती थी। लेकिन वह ऐसा कर नहीं सकती थी। कुछ देर तक घूरने के बाद सागर खत्री ‌ने सवाल किया,
"अंजन को धोखा क्यों दिया ?"
उसने बिना तेज़ आवाज़ किए यह सवाल किया था। पर उसकी आवाज़ में जो गुस्सा था उसने मीरा के मन में खौफ पैदा कर दिया। वह कांपते हुए बोली,
"मैंने कोई धोखा नहीं दिया।"
"तुमने ही मानवी और निर्भय को उसके बीच हाउस जाने की खबर दी थी।

"
मीरा ने खुद को बचाने के लिए कहा,
"मैं किसी मानवी और निर्भय को नहीं जानती हूँ।"
सागर ने एक बार फिर उसे घूरकर देखा। फिर कड़क कर बोला,
"तुम जिस घर में रह रही थी वह निर्भय का है। अगर जानती नहीं हो तो उसके घर में क्या कर रही थी।"
मीरा इतनी घबराई हुई थी कि उसे यह भी ध्यान नहीं रहा था कि उसका अपहरण निर्भय के घर से ही हुआ था। सागर खत्री की इस बात पर वह चुप हो गई। उसे पूरा यकीन था कि अब वह उसे मार देगा। उसने गिड़गिड़ा कर कहा,
"प्लीज़ मुझे छोड़ दो। गलती हो गई मुझसे।"
"जानता हूँ तुम्हारी कुंडली खंगाली है मैंने। पहली बार नहीं है कि तुमने किसी को धोखा दिया है। इससे पहले भी कई मर्दों को इसी तरह धोखा दे चुकी हो तुम। लेकिन हर बार सिर्फ तुम इस्तेमाल करके छोड़ देती थी। इस बार जान लेने की कोशिश की।"
मीरा का चेहरा सफेद पड़ गया था। सागर खत्री उसके बारे में बहुत कुछ जानता था। सागर खत्री ने आगे कहा,
"लेकिन इस बार तुमने अंजन को धोखा दिया है। तुम बेवकूफ हो। इतने दिन उसके साथ रिश्ता रखा। फिर भी उसकी ताकत नहीं पहचान पाई। तुम्हें पैसा ही चाहिए था ना। आखिर मानव और निर्भय ने कितना पैसा दिया होगा। अंजन से धोखा ना करती तो रानी बनाकर रखता। अब तुम्हारे साथ क्या करना है यह वही तय करेगा। तब तक तुम मेरे इस बंगले में रहोगी।"
उसने इंटरकॉम पर किसी से बात की। एक लड़की आई। सागर खत्री ने उससे कहा,
"ये हमारी खास मेहमान है। इसे ले जाओ। खास खयाल रखना इसका।"
उसके बाद उसने मीरा से कहा,
"यहाँ से निकल जाओ यह मुमकिन नहीं है। इसलिए कोई ऐसी हरकत मत करना कि हमें मेहमान नवाज़ी भूलकर तुम्हारे साथ सख्ती करनी पड़े।"
वह लड़की मीरा को लेकर चली गई। लिफ्ट से वो लोग चौथे फ्लोर पर गए। यहाँ एक पूरा सुइट था। मीरा को छोड़कर जाते समय उस लड़की ने कहा,
"यहाँ ज़रूरत की हर चीज़ है। खाना नाश्ता समय पर यहीं मिल जाएगा। किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो इंटरकॉम पर बता दीजिएगा।"
वह लड़की चली गई। मीरा अपने खूबसूरत कैदखाने को देख रही थी।

अंजन को खबर मिली कि माइकल के आदमी ने अपना बयान दे दिया है। अपने बयान में उसने समर का नाम लिया है। यह सुनते ही अंजन सतर्क हो गया। उसने अपने दोस्त सागर खत्री को फोन करके बताया कि अगर पुलिस समर तक पहुँच गई तो फिर उस तक पहुँचने में देर नहीं लगेगी। वह लंदन आना चाहता है। सागर खत्री ने उससे कहा कि वह लंदन ना आए। वहाँ अक्सर उसका आना जाना लगा रहता है। पुलिस उसे वहाँ भी तलाश कर सकती है। वह सिंगापुर आ जाए।
समर ने उससे संपर्क करने की कोशिश की। उसने कोई जवाब नहीं दिया। अपना सिमकार्ड निकाल कर फेंक दिया।‌ एक दूसरा सिम इस्तेमाल करने लगा।
सागर खत्री की बात अंजन को ठीक लगी थी। वह सिंगापुर के लिए निकल गया।

मीरा खाना खाने के बाद अपने बेड पर लेटी थी।

खाना खाने में उसका मन नहीं लगा था। उसने बहुत थोड़ा सा खाना खाया था। इस समय उसकी स्थिति उस कैदी की तरह थी जिसे कुछ ही समय में फांसी मिलनी हो। बेड पर लेटे हुए उसके मन में सागर खत्री की बात घूम रही थी।
'आखिर मानव और निर्भय ने कितना पैसा दिया होगा। अंजन से धोखा ना करती तो रानी बनाकर रखता।'
मीरा सोच रही थी कि पैसा तो उसे मुंह मांगा मिला था। लेकिन अगर उसकी बुद्धि समय पर काम कर गई होती तो अंजन से शादी करके आराम से रह सकती थी। उसने अंजन से पहले भी तीन लोगों के साथ प्रेम संबंध रखा था। पर उसका मकसद उनकी दौलत और रसूख का फायदा उठाकर आगे बढ़ जाना था। उसने वैसा ही किया भी।
अंजन के साथ भी वह इसी नियत से जुड़ी थी। यहाँ उसका दोहरा फायदा था। अंजन तो उस पर पैसे खर्च ही करता था।‌ मानवी और निर्भय ने भी उसे पैसे देने की बात कही थी।
मीरा अंजन का खूब फायदा उठा चुकी थी। वह जानती थी कि अंजन उससे अपने प्यार का इज़हार करने के लिए बीच हाउस ले जा रहा है। वह अब उसके साथ रिश्ता खत्म करना चाहती थी।
अंजन ने उससे कई बार अपने बीच हाउस शिमरिंग स्टार्स चलने की बात कही थी। मानवी और निर्भय अंजन से बदला लेने के लिए भारत आए हुए हैं यह उसे पता था। उन्होंने उससे कहा था कि वह ‌उसे बीच हाउस लेकर आए। पर अंजन ने खुद ही बीच हाउस जाने की बात कही। तैयार होने के समय वह यही सोच रही थी कि अच्छा मौका है। अगर वह मानवी और निर्भय को उसके बीच हाउस जाने की बात बता दे तो वह उससे अपना बदला ले लेंगे। वह मुक्त हो जाएगी। वह फोन करने की सोच रही थी कि मानवी का फोन आ गया। उसने उसे सबकुछ बता दिया।
उसने सोचा था कि अंजन का खात्मा होने के बाद वह वहाँ से निकल जाएगी। पर अंजन ने उसे पंकज के साथ जाने को कहा। उसने सोचा था कि पंकज उसे अंजन के घर ले जाएगा। कुछ दिन अफसोस करके वह चुपचाप लंदन चली जाएगी। किसी को उस पर शक नहीं होगा। पर पंकज उसे किडनैप करके ले गया और कैद कर दिया।
आज वह अंजन के दोस्त सागर खत्री की कैद में थी। सागर खत्री ने कहा था कि अंजन आकर फैसला करेगा कि उसका क्या करना है।
वह डर के साए में अंजन के आने की राह देख रही थी।

समर को मीडिया से खबर मिली कि माइकल मारा गया और उसका एक साथी घायल हो गया है। वह पुलिस की गिरफ्त में है। पर अधिक घायल हो जाने के कारण अस्पताल में भर्ती है। यह खबर सुनते ही समर गोवा छोड़कर पुड्डूचेरी भाग गया। उसने अपना एक आदमी वहाँ स्थितियों पर नज़र बनाए रखने के लिए लगा दिया था।
उसे उम्मीद थी कि शायद माइकल का घायल साथी अधिक गंभीर होगा और बच नहीं पाएगा। पर उसकी उम्मीद से ठीक उल्टा हुआ।‌ माइकल का साथी बच गया। उसने पुलिस को बयान दे दिया। उसने क्या बयान दिया यह तो समर को नहीं पता चला। लेकिन वह जानता था कि उसका नाम अवश्य सामने आ गया होगा। उसने ‌फौरन अंजन को फोन किया।

पहले तो उसने फोन उठाया नहीं। उसके बाद जब समर ने दोबारा फोन मिलाया तो नंबर स्विच्ड ऑफ बता रहा था।
समर समझ गया कि अंजन उससे संपर्क नहीं रखना चाहता है। वह खुद अपने आप को बचाने की कोशिश कर रहा होगा। समर भी पुलिस की गिरप्त में नहीं आना चाहता था। उसने भी विदेश भागने का फैसला किया।
उसका एक ठिकाना दुबई में भी था। उसने तय किया कि वह ट्रेन से चेन्नई जाएगा। फिर वहाँ से दुबई की फ्लाइट पकड़ेगा।

इंस्पेक्टर कौशल सावंत के सामने समर का नाम आया तो उसने उसके बारे में पता किया। उसे उसके मोटेल के बारे में पता चला। अपनी टीम के साथ वहाँ पहुँचा। उसने वहाँ के मैनेजर और कर्मचारियों से उसके बारे में पूँछताछ की। पर किसी को भी उसके बारे में कुछ पता नहीं चला। कर्मचारियों का कहना था कि वह अक्सर ही कुछ दिनों के लिए बिना बताए चले जाते हैं। इसलिए कहना कठिन है कि वह कहाँ गए हैं। मोटेल से इंस्पेक्टर कौशल सावंत समर के घर गया। समर अकेला रहता था। उसके नौकर ने बताया कि अचानक ही वो कुछ सामान पैक कर कहीं चले गए।
समर की खोज करना इंस्पेक्टर कौशल सावंत के लिए ज़रूरी था। उसने गोवा के आसपास के राज्यों में समर की डीटेल्स भिजवाकर वहाँ की पुलिस से सहायता मांगी।

सागर खत्री बंगले के दूसरे फ्लोर पर रहता था। इस फ्लोर पर उसका खूबसूरत सुइट था। उसके साथ यहाँ उसकी गर्लफ्रेंड अलीशिया भी रहती थी। लंदन के बाद यह उसका ऐसा ठिकाना था जहाँ वह साल के कम से कम दो महीने बिताता था।
इस समय वह बेड पर लेटा था। अलीशिया उसकी बाहों में थी। लेकिन उसके मन में मीरा का खयाल घूम रहा था। यह सोचकर कि उसने उसके दोस्त को धोखा दिया उसका मन गुस्से से भरा हुआ था। उसने अलीशिया की बाहों से खुद को निकाला और बेडरूम से बाहर निकल गया। वह बार काउंटर में गया। अपने लिए एक ड्रिंक बनाया और पीने लगा। कुछ देर बाद अलीशिया कमरे से बाहर आई। वह समझ नहीं पा रही थी कि सागर खत्री के इस व्यवहार का क्या मतलब है। सागर खत्री ने उससे कहा कि अभी वह कुछ ना पूँछे। जाकर सो जाए। उसका खराब मूड देखकर अलीशिया चुपचाप बेडरूम में चली गई।
सागर खत्री ने अंजन को मीरा के बारे में कुछ नहीं बताया था। वह चाहता था कि जब वह आ जाए तो इत्मीनान से उसे सारी बात बताएगा। फिर मीरा का क्या करना है यह फैसला वह लेगा।

रिस्की लव - 34

सागर खत्री की कार अंजन को एयरपोर्ट से लेकर उसके बंगले पर पहुँची। अपने दोस्त सागर खत्री को देखकर अंजन उसके गले लग गया। सागर खत्री ने उससे पूँछा कि पुलिस की तरफ से कोई दिक्कत तो नहीं आई। अंजन ने कहा,
"जैसे ही मुझे पता चला कि माइकल के आदमी ने बयान में समर का नाम लिया है मैंने तुम्हें फोन पर दिया। तुमने यहाँ आने को कह दिया। मैं यहाँ आ गया। पुलिस अभी समर तक ही नहीं पहुँच पाई होगी।

"
"सावधानी बरती थी ना ?"
"पूरी रमन सिंह के पासपोर्ट पर आया हूँ।"
सागर खत्री ने उससे कहा कि पहले वह फ्रेश होकर नाश्ता कर ले फिर दोनों बातें करेंगे। अंजन गेस्ट रूम में फ्रेश होने चला गया। सागर ने मीरा को सूचित कर दिया था कि अंजन आ गया है। जिससे वह अपने आप को मानसिक रूप से तैयार रखे।
नाश्ते के बाद अंजन और सागर खत्री बार में बैठकर पीने लगे। सागर खत्री सोच रहा था कि वह मीरा वाली बात कैसे छेड़े। तभी अंजन ने कहा,
"मानवी और निर्भय डिसूज़ा विला में चूहे की तरह छिपकर बैठे हैं। उन पर मेरी नज़र बनी हुई थी। पर कुछ कर नहीं पाया। मामला ताज़ा है। गड़बड़ हो सकती थी।"
"बहुत अच्छा किया तुमने। वो दोनों भी जानते हैं कि अभी उनका वहाँ रहना ही ठीक है। अगर वो कहीं जाते भी हैं तो हमारे आदमी उनकी एक एक हरकत पर नज़र रखेंगे।"
"यही तो मैंने भी सोचा। इसलिए शांत बैठा रहा। लेकिन अब जब भी मौका मिलेगा इन दोनों को छोड़ना नहीं है। ऐसी सज़ा दूंँगा कि इनकी रूह भी कांपेगी।"
"तुम्हें पता चला कि इन दोनों को तुम्हारे बीच हाउस में होने की खबर किसने दी थी।"
"अभी तक तो नहीं।"
सागर खत्री के लिए मीरा की बात छेड़ना आसान हो गया था। उसने अंजन से कहा,
"तुमको सचमुच किसी पर शक नहीं है ? या फिर जिस पर शक जा रहा है उस पर ध्यान नहीं देना चाहते हो।"
अपने दोस्त की इस बात पर अंजन गंभीर हो गया। उसने कहा,
"क्या कहना चाहते हो तुम ?"
"मेरा इशारा मीरा की तरफ है। तुम बीच हाउस जा रहे हो यह बात या तो पंकज को पता थी या फिर मीरा को। पंकज ने यह खबर नहीं दी। तो फिर बचा कौन ?"
अंजन उसकी बात पर चुप हो गया। सागर खत्री ने कहा,
"सचमुच तुम्हारे मन में मीरा का नाम नहीं आया ?"
अंजन ने अपना गिलास बार टॉप पर रख दिया। उसके बाद गहरी सांस लेकर बोला,
"जबसे मीरा अचानक गायब हो गई है तबसे मेरे मन में यही आता है कि मेरे बारे में मानवी और निर्भय को खबर देने वाली वही हो सकती है। अब तो इस बात पर पूरा यकीन भी हो चला है। लेकिन जब यह बात मन में आती है तो दिल में टीस सी उठती है। यकीन होते हुए भी मन उसे झुठलाने में लगा रहता है।"
सागर खत्री कुछ देर चुप रहने के बाद बोला,
"तुम चाहते हो कि मीरा से मिलकर असलियत का पता करो।"
अंजन को ऐसा लगने लगा था जैसे कि सागर खत्री को मीरा के बारे में कुछ पता चला है। उसने कहा,
"यार पहेलियां मत बुझाओ। तुम्हें मीरा के बारे में क्या पता चला है ? कहाँ है वो ?"
सागर खत्री उठा। अंजन के दोनों कंधे पकड़ कर बोला,
"इसी बंगले में है। मिलोगे उससे ?"
अंजन आश्चर्य से उसकी तरफ देखने लगा। सागर खत्री ने उसे पूरी बात बताई। सब जानने के बाद अंजन ने कहा,
"अभी मिलना है उससे। मुझे उसके पास ले चलो।"
सागर खत्री ने उसी लड़की को बुलाया जो मीरा को लेकर गई थी। उसे हिदायत दी कि अंजन को मीरा के पास ले जाए।

मीरा परेशान इधर उधर टहल रही थी। जानती थी कि अंजन कभी भी उससे मिलने आ सकता है।‌ वह समझ नहीं पा रही थी कि उसका सामना कैसे करेगी। यहाँ से भाग निकलने की भी कोई तरकीब नहीं थी। अब तो वह मन ही मन मना रही थी कि अंजन के आने से पहले ही उसका हार्ट फेल हो जाए। वह जानती थी कि मौत तो तय है। पर अंजन उसे आसान मौत नहीं देगा। मारने से पहले अपने सवालों से उसे परेशान करेगा।
डोरबेल की आवाज़ सुनते ही मीरा की टांगें कांपने लगीं। वह कुछ देर बुत बनी खड़ी रही। पर जानती थी कि अगर उसने दरवाज़ा नहीं खोला तो वो लड़की अपने कार्ड से दरवाज़ा खोल देगी। वह कांपती हुई आगे बढ़ी। दरवाज़ा खोला और दूसरी तरफ मुंह घुमाकर खड़ी हो गई।
अंजन अंदर आया। कुछ देर तक वह भी चुप खड़ा रहा। उसके दिल में भी अजीब सी हलचल थी। उसके मन के गुस्से और मीरा के लिए प्यार के बीच रस्साकसी चल रही थी। पर उसने अपने प्यार को पीछे ढकेल दिया। गुस्से से बोला,
"मेरी तरफ देखो।"
मीरा और अधिक कांपने लगी। उसे अपनी तरफ मुड़ते ना देखकर अंजन आगे बढ़ा। उसे कंधे से पकड़ कर अपनी तरफ घुमाया। उसने देखा कि मीरा का चेहरा सफेद पड़ गया है। वह बुरी तरह डरी हुई है। उसके देखते ही देखते वह बेहोश होकर गिर पड़ी।
अंजन घबरा गया। उसने मीरा को उठाया और बेडरूम में ले जाकर बिस्तर पर लिटा दिया। उसके बाद भागकर किचन में गया। फ्रिज से पानी की एक बोतल निकाली। ठंडे पानी के छींटे मारे। मीरा होश में आ गई। होश में आते ही गिड़गिड़ा कर बोली,
"प्लीज़ अंजन मुझे माफ कर दो..."
उसके गिड़गिड़ाने से अंजन का गुस्सा और बढ़ गया। उसने पानी की बोतल को फर्श पर पटक दिया। कुछ देर खुद को शांत करने की कोशिश करता रहा। पर सफल नहीं हुआ। गुस्से में मीरा के पास आकर बैठ गया। उसके बाल पकड़कर चेहरा अपनी तरफ घुमाकर बोला,
"अब गिड़गिड़ा रही हो। पर मेरे साथ धोखा करते हुए एक बार भी नहीं सोचा। मेरे दुश्मनों को मेरे बारे में खबर दे दी।"
मीरा की आँखों में डर साफ दिखाई पड़ रहा था। अंजन ने उसे छोड़ दिया। बिस्तर से उठकर खड़ा हो गया। इस समय उसकी लड़ाई अपने ही मन के दो हिस्सों से चल रही थी। कभी गुस्सा हावी हो रहा था कभी प्यार। एक बार फिर वह मीरा के पास जाकर बैठ गया। उसने मीरा के चेहरे पर अपनी नज़रें गड़ाकर पूँछा,
"जब तुमने मुझे धोखा देने के बारे में सोचा तो एक बार भी तुम्हारे मन में नहीं रोका। आखिर क्यों तुमने मुझे धोखा दिया ? तुम मेरे प्यार को बिल्कुल भी नहीं पहचान पाई थी।"
मीरा ने उसके सवालों का जवाब नहीं दिया। वह घबराहट में बार बार बस एक ही बात कहती जा रही थी कि मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई है। मुझे माफ कर दो। अंजन समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे। कुछ समझ ना आने पर वह उठा और वहाँ से चला गया।

नीचे आया तो सागर खत्री उसकी ही राह देख रहा था।

अंजन बिना कुछ बोले सीधे बार में गया। अपना लिए एक बड़ा पेग बनाया और वहीं स्टूल पर बैठकर पीने लगा। उसकी शक्ल से पता चल रहा था कि उसकी मानसिक स्थिति अच्छी नहीं है। सागर खत्री अभी कुछ पूँछकर उसे परेशान नहीं करना चाहता था। वह चुपचाप उसे देखता रहा।
अंजन के मन में बहुत कुछ था। वह सागर खत्री के साथ बात करना चाहता था। वह अपना गिलास लेकर उसके पास जाकर बैठ गया। सागर खत्री समझ गया कि वह उससे बात करना चाहता है। उसने कहा,
"मीरा से बात की ?"
"बात क्या करता। वह तो बस तोते की तरह एक बात रट रही थी। मुझसे गलती हो गई। मुझे माफ कर दो। वैसे भी इसके अलावा कह क्या सकती है वो।"
सागर खत्री ने पूँछा,
"फिर क्या फैसला लिया तुमने ?"
अंजन इस विषय में कोई फैसला नहीं ले पाया था। सागर खत्री के इस सवाल पर बोला,
"फैसला क्या करूँ ? मेरा दिल इस समय जैसे लड़ाई का मैदान बना हुआ है। अजीब स्थिति है। मीरा के लिए गुस्सा भी है और प्यार भी।"
सागर खत्री ने मुस्कुरा कर कहा,
"मुझे तो लगता है कि गुस्से पर प्यार भारी है। तुम अभी भी इस बात को झुठला देना चाहते हो कि मीरा ने गलत किया है। लेकिन ऐसा कर नहीं पा रहे हो। इसी बात का गुस्सा है।"
सागर खत्री ने जो बात कही वह सही थी। अंजन ने कहा,
"तुम ठीक कह रहे हो। मैंने मीरा से दिल की गहराई से प्यार किया था।‌ पर शायद प्यार मेरी किस्मत में नहीं है। बचपन में अपनी माँ को बहुत चाहता था। पर वह छोटी उम्र में ही छोड़कर भगवान के पास चली गई। पिता ने कभी मुझे प्यार नहीं दिया था। दूसरी शादी के बाद तो मेरी तरफ ध्यान देना ही बंद कर दिया। इसलिए मैं घर छोड़कर भाग आया।"
अंजन रुका। अपने गिलास में बची हुई शराब को खत्म किया। फिर आगे बोला,
"मानवी से मैंने कभी प्यार नहीं किया था। वह मेरे लिए एक सीढ़ी की तरह थी। उसके सहारे मैं उसके भाई की दौलत पर कब्ज़ा कर पाया। ‌ उसे अपने रास्ते से हटाने की कोशिश की। इसलिए उसने अपने प्रेमी के साथ उस बात का बदला लेने के लिए मुझ पर हमला किया। फिर भी मेरा मन करता है कि एक बार यदि मानवी मेरे सामने आ जाए तो अपने हाथों से उसकी गर्दन तोड़ दूंँ। लेकिन मेरा को तो मैंने सच्चे दिल से चाहा था। उसके बावजूद उसने मुझे धोखा दिया। पर आज वह मेरे सामने थी फिर भी मैं कुछ नहीं कर पाया। मैं अपने प्यार के हाथों इतना मजबूर कैसे हो गया। मैंने तो अपने बचपन के साथी पंकज को भी नहीं छोड़ा था। इस समय मैं समझ नहीं पा रहा कि क्या करूंँ।"
"अपने आप पर कोई दबाव मत डालो। कोई जल्दी नहीं है। शांत मन से सोचकर फैसला लो।"
अंजन को अपने दोस्त की बात सही लगी।

रिस्की लव - 35

मीरा बिस्तर पर एकदम चुपचाप बैठी थी। वह एक तरफ देख रही थी जैसे उसकी आँखें जैसे किसी चीज़ पर टिकी हों। इस समय उसके मन में गंभीर विचार चल रहा था।

उसे लगा था कि अंजन जब उसके सामने आएगा तो उसे ज़िंदा नहीं छोड़ेगा। इसलिए भय के कारण वह बेहोश हो गई थी। अंजन उस पर चीखा चिल्लाया पर उसे कोई नुकसान नहीं पहुँचाया। यह इस बात का प्रमाण था कि अभी भी उसके दिल में मीरा के लिए भावनाएं थीं। यही बात मीरा को छू गई थी।
अभी तक तो वह डर की वजह से इस बात के लिए पछताती थी कि उसने अंजन के साथ धोखा किया। पर इस समय उसके मन में पछतावा था कि उसने सच्चे प्यार को खो दिया। आज तक किसी ने भी उसे इस तरह नहीं चाहा था। उसके पापा और मम्मी अपनी अपनी दुनिया में खोए हुए रहते थे। उन्हें लगता था कि उसकी ज़रूरतें पूरी कर देना और मांगें मान लेना ही माँ बाप होने के नाते उनका कर्तव्य है। उसने भी इसे ही उनका प्यार मान लिया। पर मन में प्यार पाने की ललक थी।
मीरा जब सोलह साल की थी तब पहली बार वह अपने से पंद्रह साल बड़े पर्सी की तरफ आकर्षित हुई थी। वह उसका डांस टीचर था। बहुत खूबसूरत था। वह उसके घर डांस सिखाने आता था। पर्सी अपने लिए उसके आकर्षण को समझ रहा था। पर उसे समझाने की बजाय उसने उसे उकसाया। मीरा को लगता था कि वह उसे प्यार करता है। पर वह उसका फायदा उठा रहा था।
एक दिन उसे पता चला कि वह प्रैगनैंट है। उसने यह बात पर्सी को बताई। उसने कहा कि घबराने की बात नहीं है। वह उसे छुटकारा दिला देगा।‌ पर्सी ने चुपचाप उसका अबॉर्शन करवा दिया। उसके बाद वह उससे खिंचा खिंचा रहने लगा। अचानक ही उसने मीरा को डांस सिखाने आना बंद कर दिया था। अब तक यही समझती थी कि वह उससे प्यार करता है। लेकिन उसका दूर भागना उससे सहा नहीं जा रहा था। उसने इस विषय में बात करने की सोची।
जब वह उसके घर पहुँची तो पता चला कि वह ऑस्ट्रेलिया चला गया है। मीरा का दिल टूट गया। प्यार से उसका भरोसा उठ गया। पहले प्यार में ही उसे धोखा मिला था। उसने भी लोगों को धोखा देना शुरू कर दिया। बीस साल की उम्र आने तक वह दिल से खेलने की कला में माहिर हो गई थी।
अब तक वह लोगों के दिल से खेलकर उनका फायदा उठा चुकी थी। उसे ऐसा करते हुए ज़रा भी बुरा नहीं लगता था।‌ पर आज पहली बार उसे अंजन के बारे में सोचकर बुरा लग रहा था।
बहुत देर तक वह उसी तरह से चुपचाप बिस्तर पर बैठी रही। डोर बेल बजने से वह अपने खयालों से बाहर आई। उसने समय देखा। दोपहर के दो बजने वाले थे। वह समझ गई कि उसके लिए लंच आया होगा। उसका मन खाने का नहीं था। पर दरवाज़ा तो खोलना ही था। वह उठी और जाकर दरवाज़ा खोल दिया। खाने की ट्रे लेकर वही लड़की अंदर आई जो उसे यहाँ लेकर आई थी। ट्रे डाइनिंग टेबल पर रखकर वह प्लेट लगाने लगी। मीरा ने उससे कहा,
"अभी मेरा मन नहीं है। जब मन होगा तब मैं खुद सर्व कर लूँगी।"
उसकी बात सुनकर वह लड़की प्लेट लगाना छोड़कर चली गई। मीरा किचन में गई। अपने लिए कॉफी बनाई। मग लेकर वह बालकनी में जाकर बैठ गई।

वह सोच रही थी कि उसने कभी भी अंजन के प्यार को महसूस करने की कोशिश ही नहीं की थी। यदि उसने पहले ही उसके प्यार को समझ लिया होता तो वह कभी भी मानवी और निर्भय की मदद नहीं करती।
कॉफी पीते हुए वह मन ही मन एक कल्पना कर रही थी।‌ उस दिन अंजन उसके कमरे में आकर उसे बीच हाउस ले जाने की बात कर रहा है। पहले वह कहती है कि बहुत थक गई है। कल सुबह फ्लाइट भी पकड़नी है। फिर अंजन को उदास देखकर हाँ कर देती है। वह तैयार हो रही होती है तभी मानवी का फोन आता है। वह फोन रिसीव नहीं करती है। कॉल कटने के बाद फोन स्विच ऑफ कर देती है। बीच हाउस में अंजन उसे प्रपोज़ करता है। वह स्वीकार कर लेती है। उसके बाद दोनों शादी करके ख़ुशी से रह रहे हैं।
मीरा के मुर्झाए चेहरे पर यह सोचकर मुस्कान आ गई। तभी अचानक वह फिर उदास हो गई। जैसे राजकुमार और राजकुमारी की कहानी में कोई राक्षस आ जाता है वैसे ही अचानक उसकी कल्पना में मानवी और निर्भय आ जाते हैं। दोनों के हाथ में गन है। वह अंजन से कहते हैं कि मीरा उसे फंसाने के लिए एक मोहरा भर है। यह सुनते ही अंजन मीरा की तरफ नफरत से देखता है। मानवी और निर्भय उस पर गोलियां चलाते हैं। वह मर जाता है।
कॉफी का मग फर्श पर रखकर मीरा दोनों हाथों में चेहरा छिपाकर रोने लगी। वह सोच रही थी कि अच्छा होता कि मानवी और निर्भय जब पहली बार उससे मिले थे तभी उन्हें भगा देती। उनकी वजह से आज वह कहीं की नहीं रही। वह उठकर बेडरूम में गई और बिस्तर पर लेटकर रोने लगी।

अंजन अपने कमरे में बैठा हुआ था। उसका मन बहुत अशांत था। अनिश्चय की स्थिति उसे परेशान कर रही थी। वह समझ नहीं पा रहा था कि मीरा के लिए मन में गुस्सा होते हुए भी क्यों वह उसे ‌उसके किए की सज़ा नहीं दे पाया। मीरा ने उसके साथ धोखा किया। उसके दुश्मनों को उसकी खबर देकर उसकी जान जोखिम में डाली। फिर भी वह उससे नफरत नहीं कर पा रहा है।
उसे अपने आप पर ही गुस्सा आ रहा था। आज तक उसने अपने साथ धोखा करने वाले किसी को भी छोड़ा नहीं था। फिर मीरा को बेहोश देखकर क्यों उसके दिल में दर्द हुआ था। वह भी उस दिन को याद कर रहा ‌था जब उसने पहली बार मीरा को लंदन के उस नाइट क्लब में ‌डांस फ्लोर पर देखा था। वह समझने की कोशिश कर रहा था कि ‌आखिर क्यों वह पहली ही नज़र ‌में मीरा की तरफ आकर्षित हो गया था।‌
पहली बार नहीं था कि उसने किसी खूबसूरत लड़की को देखा था। कई खूबसूरत लड़कियां उससे नज़दीकी बढ़ाने के लिए उसके इर्द गिर्द चक्कर लगाती थीं। पर वह उन्हें उतना ही नज़दीक आने देता था जितना वह चाहता था। किसी के भी साथ उसने रिश्ता बनाने की बात सोची भी नहीं थी। पर मीरा को देखते ही उसे लगा था कि वह जैसे इतने दिनों से उसकी ही तलाश कर रहा था। मीरा का उसके नज़दीक आना, उससे दोस्ती बढ़ाना उसके लिए बड़ी उपलब्धि था।

वह अपने आप को खुशकिस्मत समझने लगा था। उसे लगता था कि मीरा उसके लिए खुशियों का पिटारा बनकर आई है। उसके आते ही उसे अपने ड्रीम प्रोजेक्ट लग्ज़री रिज़ॉर्ट के लिए जमीन मिल गई। वह कई दिनों से अपने प्यार का इज़हार उससे करना चाहता था। इसलिए उसने रिज़ॉर्ट के भूमि पूजन के लिए उसे न्यौता दिया था। पहले तो मीरा ने आने में असमर्थता जताई थी। लेकिन उसके ज़ोर देने पर वह यह कहकर तैयार हो गई कि सेरेमनी के अगले दिन ही फ्लाइट पकड़ कर लौट जाएगी। अंजन ने उसके आने और जाने के लिए टिकट बुक करा दिया था।
बड़े मन से उसने शिमरिंग स्टार्स में उसे प्रपोज़ करने की तैयारी की थी। लेकिन एक बार फिर मीरा ने मना कर दिया था। वह उदास हो गया। लेकिन जब मीरा मान गई तो उसे लगा कि जैसे किस्मत उस पर मेहरबान हो गई।
आज यह सब सोचते हुए उसे लग रहा था कि वह कितना बेवकूफ था। मीरा के बुने जाल में फंस रहा था। जिसे वह खुशी समझ रहा था वह उसकी मौत की आहट थी।
उसके मन में फिर गुस्सा उठा। पर इस बार उसके साथ ही अपने लिए एक बेचारगी वाली भावना भी पैदा हुई। वह खुद को मजबूर आशिक की तरह महसूस कर रहा था। अचानक ही उसकी आँखें भर आईं। वह सोचने लगा कि उसका किया ही उसके सामने आ गया। उसने मानवी को धोखा दिया था। मानवी ने मीरा के ज़रिए उसे धोखा दे दिया। वह अपने आप को कोस रहा था कि वह प्यार जैसी चीज़ के चक्कर में पड़ा ही क्यों। कुछ देर तक वह अपनी हालत पर आंसू बहाता रहा।
लेकिन कुछ ही देर में उसके दिल ने उसे एक नाकाम आशिक की तरह रोने पर धिक्कारा।‌ उसे याद दिलाया कि वह अंजन विश्वकर्मा है। जिसने एक ढाबे से मुंबई शहर की मानी हुई कंस्ट्रक्शन कंपनी तक का सफर तय किया है। उसने अपनी हिम्मत से अपने सपने पूरे किए। इस तरह से टूट जाना उसे शोभा नहीं देता।
वह उठा। वॉशरूम में जाकर मुंह धोया। उसने तय कर लिया कि वह भावनाओं में बहकर कमज़ोर नहीं पड़ेगा। उसने अब तक अपनी सारी कमज़ोरियों पर काबू पाया है। मीरां उसकी कमज़ोरी बन रही है। वह ऐसा नहीं होने देगा। वह मीरा के बारे में सख्त फैसला लेगा। जो भी हो उसने उसके साथ विश्वासघात किया है। उसे विश्वासघात की सज़ा मिलनी ही चाहिए। अब उसके मन में कोई दुविधा नहीं रह गई थी। वह एक आशिक के तौर पर नहीं बल्कि उस अंजन की तरह सोच रहा था जिसने आज तक अपने साथ धोखा करने वालों को छोड़ा नहीं था।
दरवाज़े पर दस्तक हुई। उसने दरवाज़ा खोला। एक नौकर सागर खत्री का संदेश लेकर आया था कि वह लंच के लिए उसकी राह देख रहा है।‌ अंजन ने कहा कि वह कुछ ही देर में खाने के लिए आ रहा है।

रिस्की लव - 36

गोवा की मीडिया में एक बात चर्चा का विषय थी कि सब इंस्पेक्टर रोवॉन ने किडनैपिंग केस में बहुत बहादुरी दिखाई थी।

लेकिन साथ में एक और सवाल भी पूँछा जा रहा था कि जब माइकल के आदमी ने बयान में समर का नाम लिया है तो अब तक वह पकड़ा क्यों नहीं गया है ? इंस्पेक्टर कौशल सावंत जो हर केस को अंत तक ले जाने के लिए जाने जाते हैं इस केस में सुस्त क्यों हैं ? अपने बारे में उठ रहे सवालों को सुनकर इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने कमर कस ली थी कि जैसे भी हो वह समर को पकड़ कर रहेगा।
समर अपने विश्वासपात्र आदमी से हर एक बात की सूचना ले रहा था। इंस्पेक्टर कौशल सावंत पर उठ रहे सवालों से वह समझ गया था कि मामला गंभीर हो गया है। इंस्पेक्टर कौशल सावंत अब बिल्कुल भी शांत नहीं बैठेगा। उसे जितनी जल्दी हो सके दुबई जाने की कोशिश करनी चाहिए।
लेकिन मीडिया में उसका नाम बहुत उछल चुका था। उसकी तस्वीर भी लोगों के सामने आ गई थी। उसके लिए मुश्किल बहुत बढ़ गई थी। इस समय बाहर जाने की कोशिश उसे मुश्किल में डाल सकती थी। उसके लिए सावधानी बरतना बेहद ज़रूरी था।
इंस्पेक्टर कौशल ने जिन राज्यों में समर की डीटेल्स भिजवाई थीं उनसे संपर्क किया। पर अभी तक कोई सफलता नहीं मिल पाई थी। समर को तलाशने में मिली नाकामी उसे परेशान कर रही थी। वह समझने की कोशिश कर रहा था कि उससे कहाँ गलती हो रही है। मीडिया में जब मानवी और निर्भय के छुड़ाए जाने की खबर आई थी उसके बाद से ही वह गायब हो गया था। अभी तक वह आया नहीं। ज़रूर कोई ऐसा है जो उसे यहाँ के हालात के बारे में खबर दे रहा है। वह जो भी है उसके मोटेल से ही संबंधित है। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने अपना दिमाग दौड़ाना शुरू किया।

नफीस अभी शाहीन का प्लास्टर कटवा कर हॉस्पिटल से लौटा था। विनोद भी उसकी मदद के लिए गया था। शाहीन आराम करने लगी तो नफीस और विनोद हॉल में बैठकर बातें करने लगे। दोनों अंजन के बारे में ही बात कर रहे थे। विनोद ने कहा,
"सर मैंने पता किया है। अंजन कहीं बाहर गया हुआ है। पर इस बार किसी को नहीं मालूम की वह कहाँ गया है ?"
नफीस ने कहा,
"मुझे लगता है कि इस बार वह लंदन नहीं गया होगा।"
"क्यों सर ?"
"देखो मानवी और निर्भय की किडनैपिंग उसके कहने पर ही हुई थी यह बात तो पक्की है। जिस समर का नाम सामने आया है वह अंजन का दोस्त है। अंजन जानता है कि समर की गिरफ्तारी होते ही पुलिस उसके गिरेबान तक पहुँचेगी। वह अक्सर लंदन जाता है इसलिए पुलिस पहले वहीं तलाश करेगी।"
"हाँ सर...यह बात तो ठीक है। तो वह कहाँ जा सकता है ?"
"अंजन के और भी ठिकाने होंगे। वह कहीं भी जा सकता है।"
विनोद के मन में एक बात आ रही थी। कुछ सोचकर उसने कहा,
"सर आपने एक बार बताया था कि लंदन में उसका एक दोस्त सागर खत्री है। क्या वह उसकी कोई मदद कर सकता है ?"
नफीस के दिमाग में सागर खत्री का नाम आया ही नहीं था। विनोद के याद दिलाने पर उसे लगा कि ऐसा हो सकता है। उसने कहा,
"विनोद तुमने बात तो सही कही है।

जहाँ तक मुझे पता है कि लंदन में अंजन अक्सर उसके घर पर ही रुकता था। वह उसकी मदद कर सकता है।"
विनोद ने कुछ सोचकर कहा,

"आप इस सागर खत्री के बारे में और भी कुछ जानते हैं।"
"नहीं... मैं उससे कभी मिला भी नहीं हूँ। लंदन में कुछ लोग हैं जिनके मुंह से यह सुना था कि अंजन का वहाँ एक दोस्त सागर खत्री है।"
उसके बाद दोनों चुप हो गए। नफीस ने उठते हुए कहा,
"देखूँ शाहीन को किसी चीज़ की ज़रूरत तो नहीं। फिर तुम्हारे लिए चाय बनाता हूँ।"
"सर आप भाभी जी को देख लीजिए। चाय मैं बना लूँगा।"
विनोद का यह प्रस्ताव सुनकर नफीस ने आश्चर्य से कहा,
"आर यू श्योर...."
विनोद ने कहा,
"बिल्कुल....आप भाभी जी के पास जाकर बैठिए। चाय बनते ही मैं ‌आपको बुला लूँगा।"
नफीस शाहीन के पास चला गया। वह बेड पर बैठी एक किताब पढ़ रही थी। नफीस ने उससे पूँछा,
"कोई तकलीफ तो नहीं है शाहीन।"
शाहीन ने बुकमार्क लगाकर किताब बंद कर दी। वह बोली,
"तकलीफ क्या होनी है। मैं ठीक हूंँ। विनोद चला गया क्या ?"
"नहीं....किचन में चाय बना रहा है।"
"अरे उसे क्यों तकलीफ दी। कुछ देर में कुक आ रही होगी। वह बना देती।"
"मैंने तो खुद बनाने की पेशकश की थी। पर वह बोला कि उसे चाय बनाने में कोई दिक्कत नहीं है।"
शाहीन ने अपनी छड़ी उठाई और उठकर खड़ी हो गई। नफीस ने टोका,
"उठ क्यों गई ?"
"जाकर देखती हूँ कि उसे कोई दिक्कत तो नहीं हो रही है।"
नफीस ने उसे रोकना चाहा तो वह बोली,
"सारा दिन कमरे में ही तो बंद नहीं रहूंँगी ना। बाहर चलकर बैठती हूँ।"
नफीस ने उसे सहारा देना चाहा तो उसने मना कर दिया। छड़ी के सहारे वह धीरे धीरे बाहर आ गई। उसके बाद किचन के दरवाज़े तक गई। विनोद चाय बना रहा था। उसे देखकर बोला,
"भाभी जी आप बाहर आ गईं।"
"मैंने सुना तुम चाय बना रहे हो। इसलिए पीने आ गई।"
"तो जाकर बैठिए। मैं लेकर आता हूँ।"
शाहीन ने नफीस से कहा कि वह विनोद की मदद करे। वह जाकर बैठती है।

तीनों लोग चुपचाप बैठे चाय पी रहे थे। नफीस के ‌मन में सागर खत्री वाली बात घूम रही थी। विनोद यह सोच रहा था कि ‌अंजन मुंबई से भागकर कहाँ गया होगा। शाहीन को लग रहा था कि शायद उसके आ जाने से दोनों खुलकर बात नहीं कर पा रहे हैं। उसने कहा,
"मेरी वजह से तुम लोगों की बातचीत में रुकावट पैदा हो गई।"
नफीस ने सफाई दी,
"ऐसा कुछ नहीं है। हम लोग बात कर चुके थे।"
शाहीन ने कहा,
"तुम लोगों की बात का मुद्दा वही अंजन होगा। जब भी फोन पर विनोद से बात करते हो तो बातचीत में उसका नाम सुनाई पड़ता है।"
नफीस मुस्कुरा दिया। शाहीन ने कहा,
"सिर्फ अपनी किताब के लिए उसमें इतनी दिलचस्पी दिखा रहे हो ? ऐसा क्या है उसमें कि तुम विनोद से उसके बारे में पता करने को कहते हो ?"
शाहीन का यह सवाल अप्रत्याशित था। इस तरह से नफीस ने कभी सोचा नहीं था। उसके लिए एकदम से जवाब दे पाना मुश्किल था।

शाहीन जवाब के लिए उसकी तरफ देख रही थी। नफीस ने कहा,
"अंजन की ज़िंदगी का सबसे बड़ा ‌आकर्षण यही है कि वह गलत तरीके से ऊपर उठकर आया पर समाज में प्रतिष्ठित बन गया। गैरकानूनी काम भी वह इतनी सफाई से करता है कि सफेदपोश बना हुआ है।"
विनोद बोला,
"सर उसने गरीब लोगों की भलाई के लिए भी बहुत से काम किए हैं। कावेरी हॉस्पिटल का एक विंग सिर्फ आम लोगों के लिए है। जहाँ उन्हें सामान्य कीमतों पर अच्छा इलाज मिलता है। दो स्कूल हैं जहाँ कम कीमत पर अच्छी शिक्षा मिलती है।"

शाहीन सब बड़े ध्यान से सुन रही थी। उसने कहा,
"यह तो वही बात हुई कि पहले पाप करो फिर गंगा नहा लो। जो भी हो मेरे हिसाब से तो वह एक क्रिमिनल है।"
विनोद ने कहा,
"हाँ भाभी....पर कहा जाता है ना कि जो पकड़ा गया वह चोर है, जो बच गया वह सयाना। अंजन ने अब तक अपनी गोटियां इस तरह से चली हैं कि वह बचा हुआ है।"
शाहीन ने कहा,
"लेकिन ऊपरवाला सबका हिसाब करता है। अंजन का भी करेगा।"
डोरबेल बजी। विनोद ने दरवाज़ा खोला। कुक लंच बनाने के लिए आई थी। शाहीन ने विनोद से लंच के लिए रुकने को कहा। पर उसने कहा कि वह कभी और उनके साथ खाना खाएगा। आज उसे ज़रूरी काम है। वह चला गया।

शाहीन इधर कुछ समय से वर्क फ्राम होम कर रही थी। अगले हफ्ते से उसे अपना ऑफिस ज्वाइन करना था। नफीस भी इधर नियमित रूप से काम पर ध्यान नहीं दे पा रहा था। उसने भी कल से नियमित काम पर जाने का फैसला किया था।
लंच के बाद शाहीन अपना लैपटॉप लेकर ऑफिस का काम करने लगी। नफीस बहुत दिनों के बाद अंजन पर लिखी जा रही अपनी किताब के आगे का चैप्टर लिखने बैठा था। वह इस समय उस हिस्से के बारे में लिख रहा था जब अंजन ने परिकर भाइयों की हत्या करवा कर उनका सबकुछ अपने नाम कर लिया था।

अंजन के अचानक उस मुकाम पर पहुंँच जाने पर बहुत से लोग उसकी तरक्की से जल रहे थे। वह उसके बारे में कई तरीके की बातें कर रहे थे। परिकर बंधुओं की दुर्घटना पर सवाल उठा रहे थे। उन्हें लगता था कि अंजन उनकी इन सारी बातों से बौखला जाएगा। अपना आपा खोकर कुछ ऐसा करेगा कि उन्हें उसे पीछे ढकेलने में आसानी हो जाएगी।
लेकिन अंजन ने ऐसा कुछ नहीं किया। उन लोगों की बातों का जवाब देने की जगह ऐसे काम करने शुरू किए जिनसे लोगों का ध्यान उस तरफ आकर्षित हो सके। मीडिया में उसके उन कामों की चर्चा होने लगी। लोगों की नज़रों में उसकी प्रतिष्ठा बढ़ने लगी।
लिखते हुए नफीस को शाहीन की बात याद आई। जो आज उसने कही थी कि यह तो वही बात हुई कि पहले पाप करो फिर गंगा नहा लो। अंजन ने अपने कई पापों को ऐसी डुबकियां लगाकर धोने का प्रयास किया था। वह उसमें कामयाब भी रहा था।
नफीस सोच रहा था कि मानवी के साथ उसने बहुत अत्याचार किया। उसके सहारे पहले उसके भाइयों का सबकुछ हड़प लिया। उन्हें रास्ते से हटा दिया।

मानवी को इस तरह अपने जीवन से दूर कर दिया जैसे दूध में से मक्खी। उस पर जानलेवा हमला करवाया। उसके बाद मानवी के अचानक गायब हो जाने को भी बड़ी चालाकी से अपने फायदे में मोड़ लिया।
अब ऊपरवाले का इंसाफ शुरू हो गया था। अंजन अपना सबकुछ छोड़कर भागा फिर रहा था।

रिस्की लव - 37

अंजन एक बार फिर ‌मीरा के सामने खड़ा था। मीरा सर झुकाए बैठी ‌थी। जब अंजन मीरा के पास आया था तो ‌उसने फिर उससे यही कहा कि ‌उससे बहुत बड़ी गलती हो गई। उसे माफ कर दे। इस पर अंजन ने उससे सवाल किया था कि तुमने मेरे प्यार की कीमत लेकर उसका सौदा मेरे दुश्मनों से किया। मुझे धोखा दिया।‌ इसके बावजूद भी तुम मुझसे माफी की उम्मीद कैसे रख सकती हो।‌ उसके इस सवाल पर ही मीरा नज़रें झुकाए बैठी थी।
अंजन उसके चेहरे को घूर रहा था। मीरा के पास उसके सवाल का कोई जवाब नहीं था। जवाब वह देती भी क्या। सब कुछ तो उसने जानते बूझते किया था। अंजन ने उससे कहा,
"तुमने जो गुनाह किया है वह माफ नहीं किया जा सकता है। तुम्हें सज़ा तो भुगतनी ही होगी।"
अंजन की यह बात सुनकर मीरा के मन में भी एक विचार आया। उसने नज़रें उठाकर सीधा संबंध अंजन की आंँखों में देखा। अचानक उसमें आए इस परिवर्तन से अंजन भी अचंभित था। मीरा ने कहा,
"अंजन मैं तुम्हारी गुनहगार हूंँ। तुम्हारे हिसाब से गुनाह करने वाले को सजा मिलनी ही चाहिए। मैं भी तुम्हारी हर सज़ा भुगतने को तैयार हूँ। बस एक बात का जवाब दो।"
मीरा के चेहरे पर अब डर का भाव नहीं था। उसने स्वीकार कर लिया था कि उसकी मौत पक्की है। पर अब वह जान की भीख नहीं मांगना चाहती थी। उसने आगे कहा,
"मैं तुम्हारी गुनहगार हूंँ। इसलिए तुम मुझे सज़ा देना चाहते हो। पर तुम भी तो मानवी और निर्भय के गुनाहगार हो। इसलिए उन्होंने तुम्हें सज़ा दी थी। फिर अब तुम उनके पीछे क्यों पड़े हो ? तुमने गुनाह किया और उन्होंने उसकी सज़ा दी। हिसाब बराबर हो गया। अब छोड़ दो उन्हें।"
अंजन को तनिक भी उम्मीद नहीं थी कि मीरा उससे ऐसा सवाल करेगी। मीरा का सवाल सुनकर वह भी उसी तरह चुप हो गया जैसे कुछ समय पहले मीरा चुप थी। वह उसके सामने से हटकर बालकनी में जाकर खड़ा हो गया। खुद उसके मन में भी तो यही बात आई थी कि उसका किया हुआ ही अब उसके सामने आया है। पर मीरा को कोई जवाब तो देना ही था। वापस आकर उसने कहा,
"मानवी भी उस निर्भय के लिए मुझे धोखा दे रही थी।‌ तुमने भी मुझे धोखा दिया। दोनों ही धोखेबाज़ हो।"
मीरा अब चुप रहने के मूड में नहीं थी। वह उसकी हर चोट पर बराबरी की चोट करने को तैयार थी। उसने अंजन को घूर कर देखा। वह बोली,
"तुम हमें धोखेबाज़ कह रहे हो। ज़रा खुद के गिरेबान में झांक कर देखो। तुमसे बड़ा धोखेबाज़ कौन है। तुमने मानवी को अपने प्यार में फंसकर धोखा दिया। उसका सब कुछ छीन लिया।

उसकी दौलत पर राज करते रहे। उसे उसके ही घर में किनारे कर दिया। इतने पर भी चैन नहीं पड़ा तो उसे और निर्भय को मारने के लिए आदमी भेजा। यह तो उनकी किस्मत थी कि दोनों बच गए।"
मीरा ने अंजन के गुनाह उसके सामने ला दिए थे। उसकी इस हरकत पर वह तिलमिला उठा। गुस्से में बोला,
"तुम अपनी मौत को दावत दे रही हो। संभल जाओ।"
मीरा ने भी उसी तेवर में कहा,
"मैं समझ गई हूँ कि तुम मुझे छोड़ोगे नहीं। इसलिए मौत का डर छोड़कर तुम्हारे सामने गिड़गिड़ाना बंद कर दिया। पर तुम जो दूसरों को उनके किए की सज़ा देने की बात करते हो उसे आइना दिखाना भी ज़रूरी है। अगर मैं गुनहगार हूँ तो तुम भी हो।"
मीरा ने अंजन के सामने आइना रख दिया था। उसमें वह अपने किए गए गुनाहों का अक्स देख रहा था। उसकी इस हरकत पर अंजन को बहुत गुस्सा आ रहा था। वह मीरा की तरफ बढ़ा। उसके हाथ उसकी गर्दन तक पहुँचकर रुक गए। वह उसका गला घोंटने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। खिसिया कर वह पैर पटकता हुआ चला गया।
जब वह नीचे आया तो सागर खत्री ने उसे अपने पास बुलाया। उसके लिए एक ड्रिंक बनाया। उसे पकड़ाते हुए बोला,
"मीरा को लेकर तुम बहुत उलझन में हो। कोई फैसला नहीं कर पा रहे हो। मुझे कोई जल्दी नहीं है। जब तक तुम कोई फैसला नहीं लेते तब तक मीरा आराम से यहाँ रहेगी। उसकी कोई फिक्र नहीं है। मुझे फिक्र है तो इस बात की कि जब तक तुम उसके बारे में कोई फैसला नहीं करोगे तब तक तुम इसी तरह परेशान रहोगे। खुद को मीरा में उलझाए रखना तुम्हारे लिए ठीक नहीं है।"
अंजन ने आधे से अधिक ड्रिंक एक सांस में गटक ली। वह सचमुच बहुत उलझन में था। उसने कहा,
"क्या बात है समझ नहीं आता ? वो मुझे ना जाने क्या क्या सुनाती रही। मेरे किए गुनाहों की गिनती करती रही। कोई और होता तो मैं उसकी गर्दन तोड़ देता‌। पर उसकी गर्दन तक जाकर मेरे हाथ रुक गए। आज तो मैंने सोच लिया था कि उसका हिसाब कर दूँगा। लेकिन कुछ नहीं कर पाया।"
सागर खत्री समझ गया कि मीरा अंजन को कमज़ोर कर रही है। इससे पहले उसने कभी भी अपने गुनाहों के बारे में बात नहीं की थी। उसका कमज़ोर पड़ना उसके जी ठीक नहीं था। सागर खत्री ने कहा,
"अंजन मैं और तुम जिस दुनिया में हैं अगर अपने गुनाहों के बारे में सोचेंगे तो उनके बोझ तले दबकर मर जाएंगे। यह लड़की मीरा तुम्हें कमज़ोर बना रही है। कमज़ोर पड़ना ठीक नहीं है। तुम्हें बहुत कुछ करना है।"
सागर खत्री ने जो कुछ कहा वह अंजन को एकदम ठीक लगा। जबसे मीरा ने उसे उसके गुनाहों के बारे में बताया था वह उनके बारे में सोचकर एक बोझ सा महसूस कर रहा था। उसने बचा हुआ ड्रिंक खत्म करके कहा,
"ठीक है.... मैं अपनी कमज़ोरी को खत्म ही कर देता हूँ।"
यह कहकर वह मीरा के पास जाने के लिए उठा। सागर खत्री ने उसे रोककर कहा,
"रुको....जल्दबाज़ी नहीं करते हैं। पहले अपना मूड बदलते हैं।

उसके बाद मीरा को रास्ते से हटाने का अच्छा सा रास्ता निकाल लेंगे।"
अंजन ने बैठते हुए कहा,
"मेरा मूड तो ठीक होने वाला नहीं है।"
"ज़रूर होगा। तुम मेरे साथ चलो। ऐसी जगह ले जाऊँगा कि सब भूल जाओगे।"
"ठीक है, ले चलो। मैं सबकुछ भूल जाना चाहता हूँ।"
सागर खत्री अंजन को लेकर चला गया।

अंजन के खिसिया कर चले जाने के बाद मीरा उठी और फ्रिज से जूस निकाल कर गिलास में डाला। जूस पीते हुए वह अच्छा महसूस कर रही थी। उसने अंजन को यह एहसास करा दिया था कि वह भी गलत है। बल्कि वह उससे भी बड़ा गुनाहगार है। उसने सिर्फ मानवी को ही नहीं बल्कि उसके भाइयों के साथ भी दगा किया था।
वह अपने आप को गुनहगार मान रही थी। मौत के डर से अंजन के सामने खुद को माफ करने के लिए गिड़गिड़ा रही थी। लेकिन अंजन उसे माफ करने के मूड में नहीं था। वह उसे गुनहगार बता कर उसे सज़ा देना चाहता था। मीरा को लग गया था कि अब उसके बचने की कोई उम्मीद नहीं है। उसी समय उसके मन में आया कि मरना तो तुम्हें है ही। फिर क्यों इसके सामने गिड़गिड़ा रही हो। इतने गुनाह करके भी यह तुम्हें तुम्हारी गलती की सज़ा देना चाहता है। डरो मत इसे भी इसके गुनाहों का एहसास कराओ। मीरा के मन का डर गायब हो गया। उसने भी अंजन को उसके किए कर्मों की याद दिला दी।
मीरा समझ रही थी कि उसकी इस बात का कुछ असर तो हुआ था। गुस्से में उसकी गर्दन की तरफ बढ़े हाथ रुक गए थे। अंजन को अपने गुनाहों का एहसास हो गया था। वह जानती थी कि इतना होने के बाद भी अंजन उसे छोड़ेगा नहीं। पर अब उसके अपने मन में ना तो डर था ना कोई बोझ।

अंजन अपने कमरे में लेटा हुआ था। उसका मन शांत होने की जगह और अशांत हो गया था। सागर खत्री उसे ऐसी जगह ले गया था जहाँ शबाब का मेला था। अलग अलग जगहों से लाई गई खूबसूरत औरतें लोगों के मन बहलाव के लिए उनके सामने इस तरह पेश की जा रही थीं जैसे किसी दुकान पर सामान का प्रदर्शन किया जाता है। उसने भी अपने लिए एक औरत चुन ली थी। कुछ समब उसके साथ बिताने के बाद वह अच्छा महसूस कर रहा था।
जब वह और सागर खत्री उस जगह से लौट रहे थे तब सागर खत्री ने पूँछा,
"कैसा लगा ?"
"बहुत अच्छा.... उसके साथ अपनी परेशानियां भूल गया था।"
"मेरा भी मूड फ्रेश हो गया। मैंने कहा था ना कि जब मूड अच्छा होगा तब मीरा को रास्ते से हटाने का आइडिया सोचेंगे। देखो वहाँ से चलते समय मेरे दिमाग में एक आइडिया आ भी गया।"
उसकी बात सुनकर अंजन जानने को उत्सुक हो गया कि उसने क्या सोचा है। सागर खत्री ने कहा,
"मीरा को मारने से अच्छा है कि वह हम दोनों का मन बहलाए। जब तक मन करेगा रखेंगे। नहीं तो उसे ऐसी ही किसी जगह पहुँचा देंगे।"
सागर खत्री का यह सुझाव सुनते ही अचानक अंजन के मन में गुस्से का ज्वालामुखी फूट पड़ा। उसने सागर खत्री का गिरेबान पकड़ लिया।

सागर ने अपना गिरेबान छुड़ाकर कहा,
"होश में रहो अंजन। इस तरह की हरकत आज पहली और आखिरी बार माफ कर रहा हूँ। मत भूलो कि तुम पुलिस के डर से यहाँ मेरे घर पर रह रहे हो।"
अंजन कुछ ढीला पड़ा। उसे भी एहसास हुआ कि उसने उस दोस्त का गिरेबान पकड़ लिया था जिसने उसकी मदद की है। इन दिनों उसका बुरा समय चल रहा है। ऐसे में इस तरह की हरकत उसके लिए ठीक नहीं है। वह शांत होकर बैठ गया। सागर खत्री ने कहा,
"मैं कह रहा था ना कि वह लड़की तुम्हारी कमज़ोरी बन गई है। तुम्हारे मन में उसके लिए प्यार है। पर यह प्यार तुम्हारे किसी काम का नहीं है। मीरा तुमसे प्यार नहीं करती। यह बात कभी मत भूलना कि उसने तुम्हें धोखा देकर तुम्हारे दुश्मनों की मदद की थी।"
लौटकर आने के बाद से ही अंजन बहुत परेशान था। वह समझ नहीं पा रहा था कि उसका दिल चाहता क्या है।

रिस्की लव - 38

समर बहुत परेशान था। इस समय उसे पुड्डूचेरी से निकलने की कोई राह नज़र नहीं आ रही थी। वह बेचैन था। किसी भी कीमत पर देश छोड़कर भागना चाहता था। उसके पास रवि शेखर के नाम से एक दूसरा पासपोर्ट भी था। वह पासपोर्ट मंगाना चाहता था। उसने मोटेल के मैनेजर श्रीकांत को फोन किया। उससे उसका पासपोर्ट लेकर पुड्डूचेरी आने के लिए कहा। श्रीकांत ही था जो अब तक उसकी सहायता कर रहा था।
इंस्पेक्टर कौशल सावंत को श्रीकांत पर शक था कि वही ऐसा शख्स है जो समर के साथ संपर्क में है। उसने उसके फोन रिकॉर्ड्स चेक करवाए। पर कुछ संदिग्ध नहीं मिला। श्रीकांत के पास एक दूसरा नंबर था। वह उसी नंबर से समर के साथ संपर्क में था। लेकिन इंस्पेक्टर कौशल सावंत को पक्का यकीन था कि श्रीकांत की समर से बातचीत होती है। कोई जल्दबाजी करने की बजाए उसने श्रीकांत पर नज़र रखनी शुरू कर दी।
असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर नोएल समर के गोवा वाले घर के बाहर था। अभी कुछ समय पहले ही श्रीकांत घर में दाखिल हुआ था। असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर नोएल ने इंस्पेक्टर कौशल सावंत को फोन पर सूचना दी। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने उससे कहा कि वह उस पर नज़र रखे। वह कुछ देर में वहाँ पहुँच रहा है।

श्रीकांत समर के निर्देश के अनुसार उसके कमरे में गया। उसकी कबर्ड खोली। समर ने जो जगह बताई थी वहाँ से रवि शेखर के नाम का पासपोर्ट लिया। एक बैग में समर का कुछ और सामान रखा। सब लेकर वह बाहर निकला। अपनी कार की तरफ बढ़ ही रहा था कि अचानक इंस्पेक्टर कौशल सावंत उसके सामने आ गया। उसे देखते ही श्रीकांत घबरा गया। बैग उसके हाथ से छूटकर गिर गया। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने कहा,
"यह तो समर का घर है। तुम यहाँ क्या कर रहे हो ? वह तो कहीं गायब है।"
यह सवाल सुनकर श्रीकांत और अधिक डर गया। हकलाते हुए बोला,
"वो... देखने आया था कि सब ठीक है कि नहीं।"
"क्यों ? तुम तो मोटेल के मैनेजर हो।

समर के घर की इतनी चिंता क्यों ? या फिर समर ने यहाँ आने को कहा था।"
श्रीकांत घबराहट के कारण पसीना पसीना हो रहा था। तभी असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर नोएल ने बैग से पासपोर्ट निकाला। उसे इंस्पेक्टर कौशल सावंत को देते हुए बोला,
"सर....यह पासपोर्ट देखिए।"
इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने पासपोर्ट देखा। फिर श्रीकांत को दिखाते हुए पूँछा,
"यह किसका है ?"
श्रीकांत नज़रें झुकाए खड़ा था। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने उसे पुलिस जीप में बैठने के लिए कहा। श्रीकांत जानता था कि उसे पुलिस के सवालों के जवाब देने पड़ेंगे। वह चुपचाप जाकर जीप में बैठ गया।

पुलिस स्टेशन पहुँचकर श्रीकांत ने सारी बात सच सच बता दी। उसने बताया कि समर विदेश जाना चाहता है। क्योंकी मीडिया में उसका नाम आ चुका है इसलिए उसने उससे रवि शेखर के नाम से उसका दूसरा पासपोर्ट पुड्डूचेरी लेकर आने को कहा था। वह वहीं जा रहा था। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने उससे पुड्डूचेरी में समर का पता लिया। उसके बाद अपनी टीम के साथ फौरन पुड्डूचेरी के लिए रवाना हो गया।

समर सोच रहा था कि श्रीकांत के पासपोर्ट लेकर आने के बाद उसे क्या करना है। उसने प्लान बनाया था कि वह पहले बस पकड़ कर चेन्नई जाएगा। उसके बाद वहाँ से फ्लाइट पकड़ कर दुबई चला जाएगा।‌ वहाँ जाकर इत्मीनान से सोचेगा कि क्या करना है। इस बीच उसने अपनी दाढ़ी मूंछ बढ़ा ली थी। इससे उसकी शक्ल आसानी से नहीं पहचानी जा सकती थी। उसे अब बस श्रीकांत का इंतज़ार था जो उसका पासपोर्ट लेकर आने वाला था।
सब तय कर लेने के बाद भी वह टेंशन में था। वह जानता था कि उसे बहुत सावधानी बरतनी पड़ेगी। छोटी सी चूक भी उसे मुश्किल में डाल सकती है। वह इसी टेंशन में बैठा शराब पी रहा था। तभी कॉलबेल बजी। उसने घड़ी देखी। मेड के आने का समय था। उसने उठकर दरवाज़े के होल से झांककर देखा। मेड ही थी। उसने दरवाज़ा खोल दिया।
दरवाज़ा खुलते ही मेड को पीछे हटाकर इंस्पेक्टर कौशल सावंत और सब इंस्पेक्टर रोवॉन अंदर आ गए। पुलिस को देखकर समर के होश उड़ गए।
इंस्पेक्टर कौशल सावंत उसे गिरफ्तार कर गोवा ले गया।

पहले तो समर ने मानवी और निर्भय की किडनैपिंग में अपना हाथ होने से इंकार कर दिया। उसने कहा कि या तो माइकल झूठ बोल रहा था नहीं तो उसने जिस समर का नाम लिया था वह कोई और है। लेकिन पुलिस की सख्ती के बाद उसने सबकुछ कुबूल कर लिया। उसने पुलिस को बताया कि उन दोनों का अपहरण उसने अंजन के कहने पर करवाया था। उसने यह भी बता दिया कि मानवी और निर्भय की अंजन से दुश्मनी थी। उन दोनों ने उस पर जानलेवा हमला किया था। लेकिन उस हमले में वह बच गया। इसी बात का बदला लेने के लिए अंजन ने उन्हें किडनैप कर मुंबई लाने को कहा था।

निर्भय अब उकता चुका था।

‌ वह अब इस सबसे अलग होकर अपनी पुरानी ज़िंदगी में जाना चाहता था। अपने बिज़नेस पर ध्यान देना चाहता था।‌ मानवी भी अब किसी तरह इस झंझट से निकलना चाहती थी। दोनों बैठे इसी विषय में बात कर रहे थे। निर्भय ने कहा,
"अब और कितने दिन इंतज़ार करेंगे। मुझे तो लगता है कि हम दोनों को अब यहाँ से चले जाना चाहिए। माइकल के आदमी ने समर का नाम लिया था। ऐसा हो सकता है कि वह अंजन का नाम ले और फिर बात हम तक आ जाए। अभी पुलिस समर तक नहीं पहुँच पाई है। अच्छा होगा कि उसकी गिरफ्तारी से पहले हम यहाँ से चले जाएं।"
जाना तो मानवी भी चाहती थी। उसे भी वही लग रहा था जिसके बारे में निर्भय बात कर रहा था। पर उसके मन में अंजन का डर था। उसने कहा,
"निर्भय तुम सही कह रहे हो। पर अंजन के आदमी हम पर नज़र रखे हुए हैं। जहाँ भी जाएंगे अंजन को पता चल जाएगा।"
"तो अंजन के डर से कब तक बैठे रहेंगे। बिना कुछ किए काम नहीं चलेगा।"
"ठीक है...पर जाएंगे कहाँ ?"
"सिंगापुर चलेंगे। जब तक सब शांत नहीं होता हम वहीं रहेंगे। उसके बाद देखेंगे।"
मानवी उसके सुझाव के बारे में सोचने लगी। मार्वल की अधिकांश प्रॉपर्टी लंदन में थी। गोवा में सिर्फ डिसूज़ा विला और कुछ दूसरी प्रॉपर्टी थी। वह गोवा की प्रॉपर्टी बेचना चाहती थी। पर अभी सही समय नहीं था। उसे लगा कि निर्भय की बात सही है। उसने कहा,
"जैसा तुम ठीक समझो। तुम जैसा कहोगे मैं तैयारी कर लूँगी।"
"तो फिर तुम तैयारी कर लो। मैं यहाँ से चलने का इंतज़ाम करता हूँ।"
मानवी उठकर जाने लगी तभी नौकर ने आकर कहा कि इंस्पेक्टर कौशल सावंत मिलने के लिए आए हैं। मानवी और निर्भय एक दूसरे को देखने लगे। उन्हें लग रहा था कि जिस बात के लिए वह चिंतित थे वही हो गई। पर इंस्पेक्टर कौशल सावंत से मिलना तो था ही। उन्होंने नौकर से कहा कि इंस्पेक्टर कौशल सावंत को हॉल में बैठाए।
नौकर के जाने के बाद दोनों ने आपस में तय किया कि इंस्पेक्टर कौशल सावंत के सामने दोनों अंजन से अपनी पहचान के बारे में कुछ नहीं कहेंगे।

इंस्पेक्टर कौशल सावंत हॉल में बैठा उनका इंतज़ार कर रहा था। मानवी और निर्भय हॉल में पहुँचे। दोनों एकदम सामान्य दिखने की कोशिश कर रहे थे। निर्भय ने बैठते हुए कहा,
"इंस्पेक्टर कौशल कहिए कैसे आना हुआ ? केस में कोर्इ नई प्रोग्रेस हुई है ?"
इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने कहा,
"आपको जानकर खुशी होगी कि ‌माइकल के साथी ने जिस समर का नाम लिया था वह हमारी गिरफ्त में आ गया है।‌ उसने आप दोनों के अपहरण की बात स्वीकार भी कर ली है।"
मानवी और निर्भय खबर सुनकर मुस्कुराए। निर्भय ने कहा,
"बहुत अच्छी बात है। चलिए अब केस सॉल्व हो गया। अब हम भी गोवा से जा सकते हैं।"
इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने गंभीरता से कहा,
"चले जाइएगा। पर कुछ बातें साफ कर दीजिए।

"
निर्भय ने कहा,
"कैसी बातें ?"
"आप दोनों अंजन को जानते हैं ?"
निर्भय ने मानवी की तरफ देखा। जैसा तय किया था उसके अनुसार दोनों ने अभिनय किया जैसे अंजन का नाम पहली बार सुन रहे हैं। निर्भय ने कहा,
"हम लोग किसी अंजन को नहीं जानते हैं।"
इंस्पेक्टर कौशल सावंत की नज़रें मानवी पर टिकी थीं। समर ने उसे बताया था कि मानवी अंजन की पत्नी थी। उसने निर्भय के साथ मिलकर उसे धोखा दिया था। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने भी मानवी के बारे में पता किया। उसने कहा,
"मानवी जी आप सच में अंजन को नहीं जानती हैं।"
मानवी पहले ही नर्वस थी। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने सीधा उससे सवाल कर दिया। वह घबरा गई। घबरा कर उसने निर्भय की तरफ देखा। निर्भय सचेत हो गया। उसने कहा,
"कहा ना हम किसी अंजन को नहीं जानते हैं।"
इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने कुछ सख्त लहज़े में कहा,
"मेरा सवाल मानवी जी से है।"
मानवी ने अपने आप को संभाल कर कहा,
"मैं किसी अंजन को नहीं जानती हूँ।"
इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने तेज़ आवाज़ में कहा,
"आप जिसकी पत्नी रह चुकी हैं उसे नहीं जानती हैं। आपके भाइयों रघुनाथ और यदुनाथ परिकर की मौत के बाद अंजन ने ‌उनके कारोबार पर कब्ज़ा कर लिया था। आपने निर्भय के साथ मिलकर उसे धोखा दिया था। आप इनके साथ गायब हो गई थीं। कुछ महीनों पहले आप लोगों ने अंजन पर जानलेवा हमला किया था।"
यह सब सुनकर मानवी बुरी तरह घबरा गई थी। निर्भय को लगा कि अब उसे अकेले ही बात संभालनी पड़ेगी। उसने कहा,
"मानवी उस बदमाश अंजन की पत्नी थी। पर उससे अलग होकर इसने उसकी तरफ मुड़कर नहीं देखा। इसने मार्वल डिसूज़ा से शादी कर ली थी। अब उसकी विधवा की तरह रह रही थी। यह हमले वाली बात तो सरासर झूठ है। आपके पास क्या सबूत है कि हमने अंजन पर हमला किया था।"
इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने उठते हुए कहा,
"निर्भय जी बहुत जल्दी इस बात का सबूत लेकर आऊँगा। तब तक आप दोनों पुलिस की निगरानी में यहीं रहेंगे। समर ने अपने बयान में कहा है कि आप दोनों ने अंजन पर जानलेवा हमला किया था।"
वह उन दोनों को चेतावनी देकर चला गया। मानवी अपने ऊपर काबू नहीं रख सकी। वह ज़ोर ज़ोर से रोने लगी।

रिस्की लव - 39

अंजन इतना तो समझ गया था कि मीरा के धोखा देने के बावजूद भी वह उससे प्यार करता है। तभी इतने मौके मिलने पर भी उसे उसके किए की सज़ा नहीं दे पाया। जिस दोस्त ने उसकी इतनी मदद की उसने मीरा के लिए उसके ही गिरेबान में हाथ डाल दिया। सागर खत्री का प्रस्ताव सुनते ही उसके तन बदन में आग लग गई थी। वह अपने पर काबू नहीं रख पाया। गुस्से में उसका गिरेबान पकड़ लिया।
अंजन ने अपने आप को कभी भी इतना मजबूर नहीं पाया था। जितना इस समय मजबूर था। इस समय वह बहुत अधिक दुविधा में था। वह कुछ समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे।

एक तरफ मीरा थी जिसे वह बहुत अधिक चाहता था लेकिन उसने उसे धोखा दिया था। दूसरी तरफ उसका दोस्त था। जिसने कठिन समय में उसकी बहुत सहायता की थी। लेकिन वह मीरा के बारे में ऐसी बात कर रहा था जो उसे पसंद नहीं थी। इस समय उसकी मजबूरी यह थी कि वह अपने दोस्त सागर खत्री की मेहरबानी पर था।‌ उसका अपना सबकुछ मुंबई में छूट गया था। उस पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी। उसके लिए अपने आपको बचाना ज़रूरी था। ऐसे में अपने दोस्त सागर खत्री को खुश रखना ही अक्लमंदी थी।
उसने सागर खत्री का गिरेबान पकड़ कर उसे नाराज़ कर दिया था। उसे खुश करने का एक ही रास्ता था। उसके प्रस्ताव को स्वीकार कर ले। पर ऐसा करना उसके लिए कठिन था।
वह परेशान सा अपने कमरे में टहल रहा था कि उसके फोन की घंटी बजी। गोवा में स्थित पर नज़र बनाए हुए उसके आदमी का फोन था। उसने खबर दी कि समर गिरफ्तार हो गया है। इंस्पेक्टर कौशल सावंत निर्भय और मानवी से डिसूज़ा विला मिलने गया था।
यह जानकारी मिलने के बाद अंजन ने दिमाग लगाना शुरू किया।‌ समर ने ज़रूर उसका नाम लिया होगा। उसने यह भी बताया होगा कि मानवी और निर्भय से उसकी दुश्मनी है। इसलिए ही वह दोनों को किडनैप कर मुंबई बुला रहा था।‌ इन सारी बातों का एक ही मतलब था कि अब पुलिस ने उसके बारे में पता कर उसकी तलाश शुरू कर दी होगी।
अंजन परेशान होकर बिस्तर पर गिर गया। अगर पुलिस ने एक मामला उखाड़ना शुरू किया तो कई सारे मामले बाहर आ जाएंगे। अब तक वह जो भी कर रहा था पुलिस की नज़र में नहीं आया था। पर इस एक मामले से वह पुलिस की निगाह में चढ़ गया है। अब तो उसके लिए कोई चांस नहीं बचा है।‌ वह पूरी तरह बर्बाद हो गया है।
यह खयाल आते ही वह हताशा में ज़ोर से चिल्लाया। उसने कितनी मुश्किल से सबकुछ खड़ा किया था। पर अब सबकुछ रेत की तरह उसकी मुठ्ठी से फिसलने वाला है।
कुछ देर वह हताशा में छटपटाता रहा। फिर उसने सोचा कि इस तरह हताश होने से कुछ हासिल नहीं होगा।‌ वह तो मौत को मात देकर वापस आया है। फिर इतनी आसानी से सबकुछ कैसे छोड़ सकता है।‌ भावनाओं में बहने की जगह उसे होशियारी से काम लेना होगा। कुछ ऐसा करना होगा जिससे वह अपना खोया हुआ सबकुछ दोबारा पा ले।
इस समय उसकी सहायता केवल सागर खत्री कर सकता था। उसके ज़रिए ही वह मुंबई में उन लोगों से सहायता मांग सकता है जिनकी उसने यह सोचकर सहायता की थी कि आड़े वक्त में काम आएंगे।

अंजन सागर खत्री के पास गया।‌ वह उस समय कहीं जाने की तैयारी कर रहा था। अंजन को देखकर उसने कहा,
"उम्मीद है नशा और गर्मी दोनों उतर चुके होंगे। तुम्हें भी खबर तो मिल ही चुकी होगी। समर पुलिस के हाथ आ गया है। अब पुलिस तुम्हारी खोज में है।"
अंजन ने उसके सामने हाथ जोड़ दिए। अपनी आवाज़ में पछतावा लाकर बोला,
"मुझे माफ कर दो।

सचमुच उस समय मैं होश में नहीं था। उस लड़की के लिए तुम्हारे गिरेबान में हाथ डाल दिया।‌ मैं उस हरक़त के लिए बहुत पछता रहा हूँ।"
"अच्छा है कि यह बात समझ जाओ कि वह लड़की तुम्हारे लिए सिर्फ मुसीबत पैदा कर सकती हैं। फिलहाल तो मुझे किसी ज़रूरी काम से बाहर जाना है। जब लौट कर आऊंँगा तब इस बारे में बात करेंगे।"
यह कहकर सागर खत्री चला गया। अंजन यह सोचकर खुश था कि उसने अपने पछतावे का यकीन दिला दिया।

इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने मुंबई में मानवी के बारे में तफ्तीश की। इस बात के साक्ष्य मिल गए कि जिस वक्त अंजन पर जानलेवा हमला हुआ था वह मुंबई में ही थी। इस आधार पर इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने मानवी और निर्भय को ‌पुलिस स्टेशन पूँछताछ के लिए बुलाया था। निर्भय ने मानवी को बहुत ‌समझाया था कि वह परेशान होकर कुछ ऐसा ना कहे जो उनके लिए मुश्किल खड़ी कर दे। पर इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने उससे और मानवी से अलग अलग कमरों में पूँछताछ की। मानवी पूँछताछ का दबाव सह नहीं पाई। उसने सबकुछ बता दिया। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने मानवी और निर्भय को ‌अंजन पर जानलेवा हमला करने के लिए गिरफ्तार कर लिया।
अब अंजन को कानून के शिकंजे में लाना था। मानवी ने उसके बारे में बहुत कुछ बताया था। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने मुंबई पुलिस से संपर्क कर उन्हें सारे मामले की जानकारी दी।
मुंबई का असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर सत्यपाल वागले भी अंजन के काले कारनामों की जांच पड़ताल कर रहा था। इंस्पेक्टर कौशल सावंत से इस नए केस की जानकारी मिलने पर उसने फौरन अंजन के नाम पर वारंट जारी करवा दिया।‌ अब मुंबई पुलिस अंजन की खोज में जुट गई। इसी बीच एसीपी सत्यपाल वागले ने अंजन के दूसरे कारनामों का चिठ्ठा खोलना शुरू कर दिया। वन विभाग की जिस ज़मीन पर उसके रिज़ॉर्ट का निर्माण हो रहा था वहाँ से पुलिस को दो नर कंकाल मिले। जांच से पता चला कि उनकी हत्या कुछ महीनों पहले ही हुई थी।
एसीपी सत्यपाल वागले ने तरुण काला की फिशिंग कंपनी की आड़ में चल रहे अंजन के मानव तस्करी के धंधे का भी पता लगा लिया। अंजन को लंबी सज़ा दिलाने के लिए बहुत सारे सबूत एकत्र हो गए थे। अब इंतज़ार था उसे कानून की गिरफ्त में लेने का।

अखबारों में अंजन के गैर कानूनी धंधों में लिप्त होने की खबरें छप रही थीं। टीवी चैनलों के प्राइम टाइम में ‌उसके ऊपर चर्चा हो रही थी। सफेदपोश के काले धंधे, पापी मसीहा, दानी डॉन जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे थे। इन पर लोग अपनी राय रख रहे थे। बहुत से लोगों का कहना था कि अंजन को जल्दी से जल्दी गिरफ्तार कर उसे कड़ी सज़ा दी जाए। वहीं ऐसे लोगों की भी कमी नहीं थी जो अंजन को बेगुनाह मान रहे थे। उसके अच्छे कामों की फेहरिस्त गिना रहे थे। उनका कहना था कि यह एक साज़िश है।

एसीपी सत्यपाल वागले अपनी व्यक्तिगत दुश्मनी निकाल रहे हैं।
एक साल पहले भी एसीपी सत्यपाल वागले ने अंजन पर कुछ सवाल उठाए थे। तब भी मीडिया में खूब हल्ला उठा था। पर तब अंजन ने अपनी पहुँच का इस्तेमाल कर मामले को दबा दिया था। तब एसीपी सत्यपाल वागले को अपने आला अधिकारियों की डांट खानी पड़ी थी। सोशल मीडिया पर उसका खूब मज़ाक बना था। लोगों का कहना था कि एसीपी सत्यपाल वागले ने अंजन की गैर मौजूदगी में उसके खिलाफ षड्यंत्र रचा है।
सोशल मीडिया पर अंजन के विरोधी और समर्थकों के बीच खूब नोंकझोंक चल रही थी। विरोधियों की दलील थी कि अगर अंजन निर्दोष है तो वह मुंबई से भागकर क्यों चला गया। इतना सबकुछ होने पर अपने आप को निर्दोष साबित करने के लिए सामने क्यों नहीं आ रहा है। लेकिन अंजन के समर्थक कुछ सुनने को तैयार नहीं थे।
अंजन के कुछ समर्थकों ने एसीपी सत्यपाल वागले के खिलाफ प्रदर्शन भी किया था।

नफीस और शाहीन डिनर कर रहे थे। टीवी पर अंजन के बारे में एक बहस चल रही थी। उसका समर्थन करने वाला एक शख्स बहुत भावुक होकर बता रहा था कि किस तरह उसके बीमार बच्चे के इलाज में अंजन ने उसकी मदद की थी। उसने कावेरी देवी मेमोरियल हॉस्पिटल में उसका अच्छा इलाज कराया था। वैसे इलाज का खर्च तो वह अपना सबकुछ बेचकर भी नहीं उठा सकता था। वह बार बार यही कह रहा था कि उस देवता ने मेरे बच्चे की ज़िंदगी बचा ली। आज उसके नाम पर कीचड़ उछाला जा रहा है।
टीवी पर उस आदमी की बात सुनकर शाहीन ने कहा,
"इस गरीब आदमी को क्या कहूँ। पर अंजन जैसे लोग कितनी चालाकी से इनकी भावनाओं का लाभ उठाते हैं। कुछ पैसे खर्च कर इनका समर्थन पा लेते हैं। अंजन जितने संगीन गुनाह कर रहा था उनकी माफी नहीं हो सकती है।"
नफीस भी उस आदमी की बात सुनकर यही सोच रहा था। उसने कहा,
"हमारे देश में लोगों का हीरो बनना बहुत आसान है। लोगों की ज़िंदगी में इतनी मजबूरियां हैं कि अगर कोई थोड़ी सी भी मदद करता है तो उनके लिए देवता बन जाता है। फिर लोग उस आदमी के गलत कामों पर भी ध्यान नहीं देते हैंं। पर जैसा तुमने कहा था किए गए गुनाहों की सज़ा तो मिलेगी ही।"
शाहीन ने उसकी बात का समर्थन किया। खाने के बाद नफीस स्टडी में बैठकर अंजन के समाज सेवा के कामों के बारे में अलग अलग अखबारों और पत्रिकाओं में पढ़ने लगा।

रिस्की लव - 40

मीरा अब इस कैद में रहते हुए ऊब चुकी थी। यहाँ से भागना नामुमकिन था। अगर वह सुइट का दरवाज़ा खोलकर कॉरीडोर में कदम भी रखती तो फौरन सीसीटीवी कैमरे की पकड़ में आ जाती। सिक्योरिटी अलर्ट मोड पर आ जाती। जब पहले दिन उसे यहाँ लाकर रखा गया था तो उसने ऐसी कोशिश की थी। तब फौरन ही सिक्योरिटी गार्ड ने आकर उसे अपनी गन प्वाइंट पर ले लिया था।

इस कैद में वह उस परिंदे की तरह फड़फड़ा रही थी जो आसमान में उड़ने का आदी रहा हो और उसे अचानक पिंजड़े में रहना पड़ रहा हो। सबसे बड़ी उलझन इस बात की थी कि वह यह नहीं जानती थी कि उसके साथ क्या होने वाला है। पहले तो उसे लगा था कि अंजन उसकी जान ले लेगा‌। पर इधर कई बार मौका होने पर भी उसने ऐसा नहीं किया। पिछली बार जब उसने अंजन को इतना भला बुरा कहा था तब भी उसका हाथ उसकी गर्दन तक आकर रुक गया था। जिस तरह से बेबस होकर वह यहाँ से गया था उससे मीरा समझ गई थी कि वह उससे प्यार करता है।
अंजन उससे अभी भी प्यार करता है जानने के बाद मीरा और भी अधिक उलझन में पड़ गई थी। वह जानती थी कि अंजन इस समय मुश्किल दौर से गुज़र रहा है।‌ उसका अपना भविष्य खुद ही खतरे में है। पूरी संभावना है कि पुलिस उसे गिरफ्तार कर ले। ऐसे में उसके साथ वह अपना भविष्य कैसे जोड़ सकती थी। वह सोच रही थी कि जिस नाव का डूबना तय हो उस पर सवार होना बेवकूफी ही कहलाएगा।
वह अंजन के साथ अपना भविष्य नहीं जोड़ना चाहती थी। पर समस्या यह थी कि इस समय वह कोई भी फैसला लेने के लिए आज़ाद नहीं थी। उसके साथ क्या होने वाला है यह वक्त को तय करना था। ऐसे में वक्त काटना उसके लिए कठिन हो रहा था।

डोरबेल बजी। मीरा को लगा कि यह समय खाना लेकर आने का तो है नहीं। इसका मतलब यह अंजन होगा। वह परेशान हो गई कि अब वह क्या करने आया है। उसने दरवाज़ा खोला तो सामने सागर खत्री खड़ा था। सागर खत्री अंदर आते हुए बोला,
"उम्मीद है सब समय पर मिल जाता होगा। कोई दिक्कत नहीं होगी तुमको।"
मीरा ने व्यंग्य भरी मुस्कान के साथ कहा,
"नहीं इस आरामदायक पिंजड़े में सबकुछ मिल जाता है। बस पंख फैलाने को नहीं मिलते हैं।"
उसका तंज़ सुनकर सागर खत्री हंस दिया।‌ उसके बाद गंभीर होकर बोला,
"बात तो है तुम्हारे अंदर। अभी भी तेवर बाकी हैं।"
मीरा ने भी उसी अंदाज़ में उत्तर दिया,
"यह यकीन हो गया है कि जान नहीं बचनी है। इसलिए डर छोड़कर तेवर अपना लिया।"
"अच्छा किया। अब अगर तेवर की जगह समझदारी से काम लोगी तो ऐश से रहोगी।"
अपनी बात कहकर सागर खत्री अजीब तरह से मुस्कुराया। उसकी आँखों में हवस थी। मीरा समझ गई कि उसका इशारा क्या है। उसने गुस्से में कहा,
"मुझे इस तेवर के साथ मरना अधिक पसंद है।"
उसका यह जवाब सुनकर सागर खत्री का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। दांत पीसते हुए बोला,
"बेवकूफ हो तुम। अभी खुद ही कह रही थी कि पिंजड़े में हो। पंख नहीं फ़ैला सकती हो। तो यह क्यों नहीं समझ रही हो कि मैं चाहूँ तो कुछ भी कर सकता हूँ। मेरे इस किले के बाहर तुम्हारी चीख पुकार नहीं पहुँच सकती है। इसी के भीतर तुम घुट कर रह जाओगी। फिर भी मैंने तुम्हें ऑफर दिया।"
वह रुका। मीरा का हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा।

बालों से पकड़ कर उसका चेहरा अपनी तरफ करके बोला,
"तेवर नहीं समझदारी तुम्हारे काम आएगी।"
उसकी धमकी से मीरा डर गई थी। पर अंतिम हथियार के तौर पर उसने कहा,
"तुम्हें पता है ना कि अंजन मुझे कितना चाहता है।‌ वह तुम्हें छोड़ेगा नहीं।"
उसकी यह बात सुनकर सागर खत्री पागल की तरह हंसने लगा। उसकी यह हंसी मीरा को और डरा रही थी। कुछ देर जी भरकर हंसने के बाद वह चुप हो गया। अचानक उसकी आँखों में हैवानियत उतर आई थी। वह बोला,
"जिसकी तुम बात कर रही हो आजकल वह मेरी दया पर जी रहा है। उसकी हालत ऐसी है कि अगर मैं उसे अपने जूते चाटने को कहूँ तो वह भी कर देगा।"
उसने मीरा को परे ढकेल दिया। वह लड़खड़ा कर फर्श पर गिर पड़ी। सागर खत्री ने उसी हैवानियत से कहा,
"तुमको एक मौका देकर जा रहा हूँ। अच्छी तरह सोच लो। मेरी बात मान लोगी तो आराम में रहोगी।"
यह कहकर वह चला गया।
सागर खत्री के जाने के बाद मीरा फर्श पर पड़ी अपनी मजबूरी पर रोने लगी। सागर खत्री उसे जिस तरह की ज़िंदगी देना चाहता था वह तो अंजन के साथ रहने से भी अधिक भयानक थी। वह मजबूर थी। इस समय वह कुछ भी कर सकने की स्थिति में नहीं थी। अपनी मजबूरी में वह ऊपरवाले से खुद के लिए मौत मांगने लगी।

मुंबई में जो कुछ भी हो रहा था उसकी खबर अंजन को लग चुकी थी। उसने सागर खत्री से रिक्वेस्ट की थी कि वह उसकी मदद करे। वह मुंबई में अपनी पहचान के कुछ लोगों से बात करके इस स्थिति से निकलने की कोशिश करना चाहता है।‌ सागर खत्री ने उसकी मदद करने के बदले में शर्त रखी थी कि वह मीरा के बारे ‌में उसके प्रस्ताव को स्वीकार कर ले। अंजन के पास कोई और रास्ता नहीं था। अपने आप को इस मुसीबत से बचाना उसके लिए बहुत ज़रूरी था। उसने उसकी बात मान ली।
सागर खत्री की इस हरकत पर अंजन के मन में उसके लिए नफरत ने जन्म ले लिया था। अभी तो उसके लिए सब सहना मजबूरी थी। पर उसने मन ही मन निश्चय कर लिया था कि जैसे ही वह अपनी ‌पुरानी स्थिति में लौटेगा, इस बात का बदला ज़रूर लेगा।
इस समय वह बहुत छटपटा रहा था। वह चाहता था कि जल्दी से जल्दी उसका मुंबई में बैठे उन लोगों से संपर्क हो जाए जिनसे उसे सहायता की उम्मीद थी। पर सागर खत्री ने अभी तक इस सिलसिले में कुछ नहीं किया था। वह बहुत परेशान था। समझ नहीं पा रहा था कि सागर खत्री कुछ करना भी चाहता है या उसे बेवकूफ बना रहा है।‌ उसने सागर खत्री से बात करने का मन बनाया।

सागर खत्री अपने बिस्तर पर लेटा मीरा के बारे में सोच रहा था। वह अपने और मीरा के विषय में बहुत रंगीन कल्पनाएं कर रहा था। उसके पास लेटी अलीशिया उसका ध्यान अपनी तरफ खींचने के लिए कभी उसके बालों को सहला रही थी तो कभी उसे चूम रही थी। मीरा के खयालों में खोए हुए सागर खत्री को उसका यह सब करना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था।

उसने एक दो बार उसे रोकने की कोशिश की। पर अलीशिया नहीं मानी। इससे चिढ़ कर सागर खत्री ने उसे धक्का देकर बिस्तर से नीचे गिरा दिया।
ज़मीन पर गिरी अलीशिया स्तब्ध सी उसकी ओर देख रही थी। सागर खत्री ने अपनी उंगली उसकी तरफ करके गुस्से में कहा,
"खबरदार जो आज के बाद मेरी बात को नज़रंदाज़ किया। उठाकर उसी गंदगी में फेंक आऊँगा जहाँ से आई हो।"
यह कहकर वह गुस्से में कमरे से बाहर चला गया।‌

इधर कई दिनों से अलीशिया महसूस कर रही थी कि सागर खत्री का मन उससे हट गया है। सागर खत्री के कारण ही उसे यह ऐशो आराम मिला था। वह नहीं चाहती थी कि वह उसके आकर्षण से बाहर जाए। इसलिए उसे रिझाने की हर कोशिश करती थी। पर सागर खत्री उसकी तरफ ध्यान ही नहीं देता था।
जाते समय वह उसे धमकी दे गया था कि जिस जगह से उसे उठाकर लाया है वहीं छोड़ आएगा। अलीशिया उसके बटलर की बेटी थी। बहुत आकर्षक थी। पर एक बहुत बुरी शादी में फंस गई थी। वहाँ मार पिटाई, गाली गलौज और पैसों की तंगी थी। सागर खत्री ने उसे उस नर्क जैसी ज़िंदगी से निजात दिलाई थी। वह वापस उसी ज़िंदगी में नहीं जाना चाहती थी। उसकी धमकी से वह डर गई थी।
अलीशिया को भी अंदाज़ा हो गया था कि सागर खत्री में आए इस बदलाव का कारण वह लड़की है जो तीसरी मंजिल के सुइट में कैद करके रखी गई है। उसे यह भी पता था कि वह अंजन की प्रेमिका है जिसने उसे धोखा दिया था। पर अंजन उसे उसके किए की सज़ा नहीं दे रहा है।
मीरा के कारण उसकी ज़िंदगी में यह मुश्किल वक्त आया था। अलीशिया के मन में मीरा के लिए नफरत पैदा हो गई थी। वह उस लड़की को सबक सिखाना चाहती थी जो उसकी तबाही का कारण बन रही थी।
अलीशिया फर्श पर बैठी थी। अचानक उसे लगा कि मीरा बिस्तर पर आराम से लेटी है। उसकी तरफ देखकर हंस रही है। फिर वह बिस्तर पर उठकर बैठ गई। अलीशिया की तरफ उसी अंदाज़ में उंगली उठाई जैसे सागर खत्री ने उठाई थी। फिर उसी के अंदाज़ में बोली,
"यह बिस्तर मेरा है। तुम उसी फर्श के लायक हो। कभी सागर के नज़दीक आने की कोशिश मत करना।"
अपनी कल्पना में अलीशिया ने जो कुछ देखा उससे वह गुस्से से पागल हो गई। वह उठी। पागलों की तरह बिस्तर से चादर, तकिए निकाल कर ज़मीन पर फेंक दिए। ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी कि वह मीरा को कामयाब नहीं होने देगी।

Never wait for a

रिस्की लव - 41

अलीशिया गुस्से में भरी बैठी थी। वह मीरा को किसी भी तरह अपने रास्ते से हटाने के बारे में सोच रही थी। वह मीरा से मिलकर उसे ‌धमकाना चाहती थी। वह अपने कमरे से बाहर निकली। सागर खत्री के बारे में पता किया। वह कहीं गया हुआ था। वह सीधा सिक्योरिटी रूम में गई। उसने सिक्योरिटी रूम में तैनात इंचार्ज से कहा कि उसे सागर खत्री का एक बहुत ज़रूरी मैसेज लेकर मीरा के पास जाना है। सिक्योरिटी इंचार्ज को पहले उस पर यकीन नहीं हुआ।

अलीशिया ने गुस्सा ‌दिखाते हुए कहा कि वह सागर खत्री के आने पर उसे बता देगी कि उसे ‌मीरा के पास नहीं जाने दिया गया। कुछ सोचने के बाद ‌सिक्योरिटी इंचार्ज ने उसे जाने की इजाज़त दे दी।‌

मीरा बहुत परेशान थी। सागर खत्री उसे अपनी रखैल बनाना चाहता था। वह सोच रही थी कि ‌अगर उसने गलती ना की होती तो अंजन उसे अपनी पत्नी बनाता। पर अब तो वह खुद इतना मजबूर है। उसके लिए कुछ भी नहीं कर पाएगा। उसे घुट घुट कर सागर खत्री की कैद में रहना पड़ेगा।
डोरबेल बजी तो मीरा यह सोचकर सिहर गई कि सागर खत्री होगा। उसने डरते हुए दरवाज़ा खोला। सामने एक अंजान औरत खड़ी थी। अलीशिया उसे ढकेल कर अंदर चली गई। दरवाज़ा बंद कर दिया। बिना कुछ बोले मीरा को एक ज़ोरदार थप्पड़ लगा दिया। मीरा उसके इस व्यवहार से चकित थी। वह गुस्से में बोली,
"क्या बदतमीजी है ? कौन हो तुम ?"
अलीशिया ने उसके बाल पकड़कर कहा,
"मेरे सागर पर डोरे डाल रही हो। मुझे ‌बदतमीज़ कहती हो। तुमने अगर उसका पीछा नहीं छोड़ा तो तुम्हें ज़िंदा नहीं छोड़ूँगी।"
मीरा ने अपने आप को छुड़ाया। फिर गुस्से में बोली,
"कौन हो तुम ? यह क्या बकवास कर रही हो ?"
अलीशिया ने कहा,
"मेरा नाम अलीशिया है। सागर मेरा है। अभी तक वह मुझसे बहुत प्यार करता था। पर जबसे तुम आई हो उसने मेरी तरफ ध्यान देना ही छोड़ दिया। तुमने ‌उसे अपने जाल में फंसाकर मुझसे दूर कर दिया ‌है।"
मीरा समझ गई कि यह सागर खत्री की प्रेमिका होगी। सागर खत्री के उसकी तरफ आकर्षित होने के कारण अपने अाप को असुरक्षित महसूस कर रही है। उसने सोचा कि शायद वह उसके काम आ सके। उसने बड़ी शांति के साथ कहा,
"तुमको गलतफहमी हो रही है। मुझे सागर से कोई लेना देना नहीं है। मैं तो उसकी कैद में हूँ। मजबूर हूँ। वह मुझे अपनी रखैल बनाना चाहता है। मैं तो यहाँ से भाग जाना चाहती हूँ।"
अलीशिया ने गुस्से में कहा,
"झूठ बोल रही हो तुम। सागर मुझे बहुत चाहता है। तुम उसे अपनी ओर खींचना चाहती हो।"
मीरा ने बिना उत्तेजित हुए उसी तरह शांति से कहा,
"ज़रा सोचो.... मैं तो यहाँ से निकल नहीं पाती हूँ। फिर उसे अपने जाल में कैसे फंसाऊँगी। वही है जो मेरे पास आया था। उसने मेरे सामने प्रस्ताव रखा कि मैं उसकी बन जाऊँ। पर मैं ऐसा नहीं चाहती। मैं मजबूर ना होती तो पहले ही यहाँ से भाग गई होती। मेरा दम घुटता है यहाँ।"
अलीशिया पर मीरा की बात का कुछ असर हुआ। वह कुछ शांत पड़ी। मीरा ने मौके का फायदा उठाते हुए कहा,
"मेरी और तुम्हारी दोनों की किस्मत दांव पर लगी है। मैं तो मजबूर हूँ। सागर की कैद में हूंँ। तुम ही कुछ करो। मैं सागर की रखैल बनकर नहीं रहना चाहती हूँ।"
अलीशिया को अब इस बात का यकीन हो गया था कि मीरा सचमुच सागर खत्री से दूर भागना चाहती है। मीरा का यहाँ से चले जाना ही उसके लिए फायदेमंद था। पर वह भी मजबूर थी।

उसने कहा,
"मेरी भी स्थिति तुम्हारे जैसी ही है। बड़ी मुश्किल से सिक्योरिटी इंचार्ज को झूठ बोलकर यहाँ आई हूँ। मैं क्या कर सकती हूँ।"
मीरा समझ गई कि इस समय अलीशिया जिस स्थिति में है उसका फायदा उठाकर यहाँ से निकला जा सकता है। उसने कहा,
"मुझे मजबूरी में ना चाहते हुए भी सागर की बात माननी पड़ेगी। फिर वो तुम्हारे ऊपर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देगा। फिर हम दोनों ही एक आदमी के कारण दुख भोगेंगे। मेरे लिए ना सही अपने लिए कुछ करो। फिलहाल तुम्हारी स्थिति ‌मुझसे अच्छी है।"
मीरा की यह बात अलीशिया को सही लगी। अगर उसे सागर खत्री के जीवन में जगह बनाए रखनी थी तो मीरा को यहाँ से भगाना ज़रूरी था। लेकिन इस काम में खतरा था। उसने कहा,
"मैं क्या कर सकती हूँ। तुम्हारे पास आने के लिए ही मुझे कितनी कठिनाई हुई। अगर सागर को पता चल गया तो मुझे मार डालेगा।"
मीरा ने कहा,
"वो तो तब भी नाराज़ होगा जब उसे पता चलेगा कि तुम यहाँ मेरे पास आई थी। अगर मुझे कोई रास्ता नहीं मिलेगा तो मुझे उसकी बात माननी पड़ेगी। हो सकता है कि बाद में उसकी रखैल बनकर मुझे इस सबकी आदत पड़ जाए। पर यह तय है कि तुम उसकी नज़रों से हट जाओगी। तब वह तुम्हें यहांँ से निकाल भी सकता है।"
यह सुनकर अलीशिया गुस्से में बोली,
"उससे पहले मैं तुम्हें मार दूँगी।"
मीरा ने सख्त लहज़े में कहा,
"बेवकूफी की बात मत करो। मुझे मार देना तुम्हारे लिए आसान नहीं होगा। मुझे मार देने से तुम्हारी समस्या हल नहीं होगी। सागर तुम्हें मार देगा। लेकिन अगर तुम भागने में मेरी मदद करो तो हो सकता है कि वह फिर से तुम्हारे नज़दीक आ जाए। मैंने तो अपने आप को भाग्य के हवाले कर दिया है। अब जो भी होगा सह लूँगी। तुम सोचकर देख लो।"
अलीशिया को मीरा की बात समझ आ रही थी। पर अभी इतनी जल्दी कुछ तय नहीं कर पा रही थी। उसे जल्दी जाना भी था। डर रही थी कि सागर खत्री ना आ जाए। उसने मीरा को कोई जवाब नहीं दिया। चुपचाप वहांँ से चली गई।
अलीशिया ने जाते समय कुछ कहा नहीं था। लेकिन मीरा समझ रही थी कि जो कुछ भी उसने कहा था उसका असर उस पर हुआ था। अब बस वह भगवान से मना सकती थी कि अलीशिया उसे भगाने का रिस्क लेने को तैयार हो जाए। एक बार वह यहाँ से निकल जाए तो फिर एक नई ज़िंदगी शुरू करने के बारे में सोचेगी।

अंजन सागर खत्री की राह देख रहा था। उसने तय कर लिया था कि वह बिना किसी संकोच के सीधी सीधी बात करेगा। सागर खत्री से पूँछेगा कि वह उसकी मदद करेगा या नहीं। लेकिन बहुत देर हो गई थी सागर खत्री अभी तक लौटकर नहीं आया‌ था। हार कर वह अपने कमरे में जा रहा था कि तभी अलीशिया आ गई। अंजन को देखकर उससे बोली,
"वह लड़की जो ऊपर है तुम्हारी गर्लफ्रेंड है ?"
अंजन समझ नहीं आया कि अचानक वह यह क्यों पूँछ रही है। उसने कहा,
"तुम्हारा मतलब मीरा से है। वो मेरी गर्लफ्रेंड थी।

लेकिन उसने मुझे धोखा दिया।"
"जानती हूंँ। लेकिन अब उसकी वजह से मेरी जिंदगी पर असर आ रहा है।"
अंजन समझ गया कि वह ऐसा क्यों कह रही है। फिर भी उसने कहा,
"उसका तुम्हारी ज़िंदगी से क्या लेना देना ?"
अलीशिया चिढ़कर बोली,
"उसकी वजह से सागर मुझसे दूर हो रहा है। वह उसे अपनी रखैल बनाना चाहता है। तुम्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है ?"
यह सुनकर अंजन के दिल में दर्द हुआ। लेकिन उसे छिपाकर बोला,
"जिसने मुझे धोखा दिया उसके साथ कुछ भी हो। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।"
अलीशिया ने कहा,
"लेकिन मुझे फर्क पड़ रहा है। उसकी वजह से सागर के दिल में मेरे लिए कोई जगह नहीं रह जाएगी।"
अंजन यह समझ नहीं पा रहा था कि यह सारी बातें करके अलीशिया उससे चाहती क्या है। उसने कहा,
"साफ साफ बताओ। तुम मुझसे क्या चाहती हो ?"
"मैं चाहती हूँ कि तुम मीरा को यहाँ से ले जाओ। जिससे सागर का मन उसकी तरफ से हट जाए।"
एक क्षण के लिए अंजन ने उसकी बात पर विचार किया। फिर बोला,
"मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि तुम्हारे साथ या उस मीरा के साथ क्या होता है। मैं सागर से ‌दुश्मनी क्यों लूँ।"
अपनी ‌बात कहकर अंजन कमरे में चला गया।‌ अलीशिया को उम्मीद थी कि मीरा की खातिर शायद अंजन उसकी मदद करे। पर उसकी बात सुनकर वह निराश हो गई।

अपने कमरे में लौटकर अंजन अलीशिया की बात पर विचार करने लगा। सागर खत्री मीरा के साथ जो करना चाहता था वह उसे अच्छा नहीं लग रहा था।‌ उसे ऐसा लगता था कि यह उसकी हार है। पर वह कुछ नहीं कर पा रहा था। इस समय उसके लिए खुद को उस मुसीबत से निकालना ज़रूरी था जिसमें वह फंसा था। अभी उसे सागर खत्री की बहुत ज़रूरत थी। वह उसके खिलाफ नहीं जा सकता था।
हालांकि जब अलीशिया ने कहा कि ‌सागर खत्री मीरा को रखैल बनाना चाहता है तो उसे ऐसा लगा था कि जैसे सागर खत्री उसके आत्मसम्मान को पैरों तले कुचलना चाहता है। वह अंदर ही अंदर तड़प उठा था। पर अलीशिया के सामने उसने अपने दिल की बात उजागर नहीं की। उसने ऐसा दिखाया कि जैसे उसे कोई फर्क नहीं पड़ता है।
अपने कमरे में आने के बाद ‌उसका मन उसे धिक्कार रहा था। उसके मन में आ रहा था कि ‌क्या वह वही अंजन है जो कभी शेर की तरह जीवन जीता था। किसी की मजाल नहीं होती थी कि उसके साथ कुछ गलत बात कर सके। आज वह गीदड़ बना हुआ है। सागर खत्री उसके आत्मसम्मान को चुनौती दे रहा है। पर उसमें विरोध करने की हिम्मत नहीं है।
उसे लग रहा था कि भले ही मीरा उसकी ना हो। लेकिन उसके सामने ही अगर सागर खत्री उसे अपनी रखैल बना लेता है तो वह उसकी मर्दानगी पर एक गाली की तरह होगा।
यह विचार आते ही वह तड़प उठा।

रिस्की लव - 42

सागर खत्री सोफे पर पैर के ‌ऊपर पैर चढ़ाकर बैठा था। अंजन ‌उसके सामने खड़ा था। सागर खत्री ने उसे घूरकर देखा।

फिर बोला,
"अंजन तुम मुझसे पूँछ रहे हो कि मैं तुम्हारा संपर्क उनसे करवाऊँगा कि नहीं जिनसे तुम मदद मांगना चाहते हो। पर तुम एक बार दिल में सोचकर देखो कि जिनसे तुम उम्मीद लगाकर बैठे हो क्या वह तुम्हारी मदद करेंगे ?"
अंजन ने पूरे विश्वास के साथ कहा,
"बिल्कुल करेंगे। मैंने उन्हें खुश रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।"
सागर खत्री के चेहरे पर मुस्कान आ गई। वह बोला,
"ठीक है....बताओ पहले ‌किससे संपर्क करूँ।"
अंजन ने सबसे पहले अपने क्षेत्र के विधायक से संपर्क करने को कहा। सागर खत्री ने नंबर मिलाया। फोन लाउड स्पीकर पर डालकर अंजन से बात करने को कहा। कुछ देर घंटी बजने के ‌बाद फोन ‌उठा। उधर से आवाज़ आई,
"आर डी कांबले बोल रहा हूँ। कहिए क्या काम है आपको ?"
"कांबले साहब नमस्कार। मैं अंजन बोल रहा हूँ।"
"कौन अंजन ?"
सागर खत्री की निगाहें अंजन के चेहरे पर टिकी थीं। यह सवाल सुनते ही उसके चेहरे पर परेशानी आ गई। सागर खत्री पर नज़र पड़ी तो वह खिसिया गया। बात बनाते हुए मुस्कुरा कर बोला,
"क्या कांबले साहब..…अंजन विश्वकर्मा हूँ। विश्वकर्मा कंस्ट्रक्शन्स का मालिक।"
"ओह.... अंजन। भाई तुम्हारे लिए तो यहाँ फिजा अच्छी नहीं है। जहाँ भी हो वहीं रहो।"
अंजन के कुछ कहने से पहले ‌ही कांबले ने अपने हाथ खड़े कर दिए। वह एक बार फिर खिसिया गया। उसने कहा,
"कांबले साहब कुछ करिए। भला कब तक यहाँ पड़ा रहूँगा। उस एसीपी सत्यपाल वागले पर दबाव डलवाइए कि ठीक से रहे। बहुत उछल रहा है।"
"ऐसा है अंजन एसीपी यूं ही नहीं उछल रहा है। तुम्हारे खिलाफ बहुत सारे सबूत हैं उसके पास। इसलिए चुप तुम बैठो।"
उसके बाद उधर से कॉल काट दी गई। अंजन को बहुत धक्का लगा। कांबले से उसे सबसे अधिक उम्मीद थी। वह चुपचाप खड़ा रहा। सागर खत्री ने कहा,
"कोई बात नहीं। तुम्हारे पास तो बहुत सारे लोग हैं। बताओ अब किससे बात करनी है।"
अंजन ने पुलिस विभाग में कुछ लोगों से बात करी। किसी ने भी उसकी मदद करने की बात नहीं कही। सागर खत्री व्यंग भरी मुस्कान के साथ उसे देख रहा था। अंजन के लिए वहाँ खड़ा रहना कठिन हो रहा था। वह वहाँ से चलने को हुआ तो सागर खत्री ने कहा,
"मुझसे बहुत ताव दिखा रहे थे। अब बताओ। किसने की तुम्हारी मदद। तुम बर्बाद हो चुके हो। जैसे रेस में लंगड़े घोड़े पर दांव नहीं लगाया जाता है वैसे ही कोई तुम्हारी मदद नहीं करना चाहता है। मैंने तुम्हारी मदद की पर तुमने मेरा गिरेबान पकड़ने की हिमाकत की। आज ऊँची आवाज़ में मुझसे बात की। अब मैं भी तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता हूँ। जितनी जल्दी हो सके यहाँ से दफा हो जाओ। ज्यादा से ज्यादा तरस खाकर मैं तुम्हें कुछ पैसे दे सकता हूँ।"
सागर खत्री की बात अंजन को चुभ रही थी। पर वह कुछ कह सकने की स्थिति में नहीं था। वह चुपचाप वहाँ से चला गया।

अंजन अपने कमरे में आ गया। इस समय वह जिस मनःस्थिति में था उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे हर कोई उसका दुश्मन हो गया है। उसका मज़ाक उड़ा रहा है।
उसे उन लोगों पर गुस्सा आ रहा था जिन्हें वह हर तरह से खुश रखने की कोशिश करता था। ताकी आड़े समय में उनसे मदद मांग सके। आज वही बड़ी आसानी से ‌उससे किनारा कर गए। कांबले जिसे चुनाव में जीत दिलाने के लिए उसने पानी की तरह पैसा बहाया था उसने यह कहकर फोन काट दिया कि वह चुपचाप जहाँ है बैठा रहे। उसने मुंबई के अपने महंगे टावर में उसे एक लग्जरी फ्लैट दिया था। आज वह पूँछ रहा था कौन अंजन ? आज सबने ही उसे अंगूठा दिखा दिया।
उसे अपनी माँ कावेरी की याद आ रही थी। वह अक्सर उसे समझाती रहती थीं कि बुरे समय में साया भी साथ नहीं देता है। इसलिए किसी के भरोसे मत रहना। अपनी क्षमता पर यकीन रखना। उसी से नैया पार लगेगी। आज उसे अपनी माँ की बात समझ आ रही थी।‌ पहले ‌उसे लगता था कि उसने सबको अपने तरीके से तोहफे देकर दबा रखा है। ऐसे में वो मुश्किल समय में उसकी मदद ज़रूर करेंगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।‌
उसका मन बहुत अशांत था। आज वह ‌एकदम अकेला था। उसकी आँखों में बेबसी के आंसू थे। उसे अपने आप से गुस्सा आ रहा था। वह जो अपने आप को बहुत काबिल समझता था। जिसे घमंड था कि वह परिस्थितियों को अपने अनुसार मोड़ सकता है। आज परिस्थितियों के आगे लाचार है। बिस्तर पर पड़ा आंसू बहा रहा है। सागर खत्री के एहसान के नीचे दबा है।‌
वह यह सब सोच रहा था तभी उसके मन ने उसे धिक्कारा। क्यों वह इस तरह घुटने टेक कर बैठा है। वह वही अंजन है जिसने मुंबई में अनाथ घूमते हुए लड़के से विश्वकर्मा कंस्ट्रक्शन्स के मालिक तक का सफर तय किया था। उसे अपनी माँ की सीख याद आई। मुश्किल समय में अपनी क्षमता पर यकीन रखना। वह सोचने लगा कि वह लाचार इसलिए है क्योंकी आज वह अपनी क्षमता को भूलकर दूसरों से उम्मीद लगाकर बैठा है। लेकिन अब वह अपने दम पर इस स्थिति से निकलने का प्रयास करेगा।
उसने सोच लिया कि बर्बाद होना ही है तो लड़कर होगा। सर पर कफ़न बांध लेगा और फिर रण में उतर जाएगा। फिर परिणाम जो भी हो। पर लाचारी में खुद को हालात के हवाले नहीं करेगा।
मन में यह विचार आते ही लाचारगी की भावना दूर हो गई। वह ऐसा महसूस कर रहा था जैसे कोई निडर योद्धा हो।

मीरा ‌ईश्वर से मना रही थी कि उसकी बात अलीशिया को समझ आ गई हो। वह अपने लिए उसे यहाँ से मुक्त कराने के लिए तैयार हो गई हो। वह बिस्तर पर लेटी यही सब सोच रही थी कि डोरबेल बजी। उसे लगा कि शायद अलीशिया होगी। उसने उठकर दरवाज़ा खोला तो सामने सागर खत्री खड़ा था। वह शराब के नशे में धुत था। उसकी लाल आँखों में वासना दिखाई पड़ रही थी।‌ उसका यह रूप देखकर मीरा डर गई।

अंजन के कमरे के दरवाज़े पर ज़ोर से दस्तक हुई।

अलीशिया ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी,
"अंजन जल्दी दरवाज़ा खोलो।"
उसकी आवाज़ में घबराहट थी। अंजन फौरन उठा और दरवाज़ा खोल दिया। अलीशिया की हालत बहुत खराब थी। उसके चेहरे पर चोट के निशान थे। दरवाज़ा खुलते ही वह बोली,
"सागर ने मुझे बुरी तरह पीटा है। वह मीरा के पास गया है। उसे बचा लो।"

सागर खत्री की इस हरकत पर अंजन को बहुत गुस्सा आया। वह फौरन ऊपर जाने के लिए लिफ्ट की तरफ भागा। अलीशिया ने उसे रोका,
"अंजन रुको....."
अंजन रुक गया। अलीशिया ने उसे एक गन देते हुए कहा,
"सागर की है। काम आएगी।"
उसके बाद उसने मीरा के सुइट की चाभी पकड़ा दी।

सागर खत्री मीरा को धक्का देकर अंदर आ गया। उसने दरवाज़ा बंद कर दिया। मीरा डरकर कांप रही थी। वह उसे घसीटते हुए बेडरूम में ले गया। वहशी दरिंदे की तरह वह मीरा पर टूट पड़ा। मीरा इस तरह से छटपटा रही थी जैसे शेर के पंजों में फंसी हिरनी छटपटाती है। वह चीख चिल्ला रही थी। खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी।

अंजन लिफ्ट से ऊपर पहुँचा। वहाँ सिक्योरिटी का एक आदमी पहरे पर था। उसने अंजन को रोकने की कोशिश की। अंजन ने उस पर गोली चला दी। उसने जल्दी से दरवाज़ा खोला और अंदर चला गया। उसे बेडरूम से मीरा की आती चीखें सुनाई पड़ीं। वह बेडरूम में चला गया।
सागर खत्री के शिकंजे में मीरा छटपटा रही थी। अंजन के सर पर खून सवार हो गया। वह तेज़ी से आगे बढ़ा। फुर्ती से सागर खत्री को मीरा से अलग किया। उसके बाद उस पर घूसों की बौछार शुरू कर दी। नशे में चूर सागर खत्री संभल नहीं पाया। मीरा फौरन बिस्तर से उठकर एक कोने में खड़ी हो गई।
अंजन इतने गुस्से में था कि सागर खत्री को ताबड़तोड़ घूंसे मार रहा था। तभी सिक्योरिटी के और लोग वहाँ आ गए। उनके इंचार्ज ने अंजन पर गन तानकर कहा,
"लीव हिम....अदरवाइज़ आई विल शूट यू।"
सिक्योरिटी इंचार्ज की बात सुनकर अंजन शांत हुआ। लेकिन मौका देखते ही उसने सागर खत्री को अपनी गन के निशाने पर ले लिया। उसने गरज कर कहा,
"नाऊ यू मूव बैंक। लेट मी एंड मीरा गो।"
उसने मीरा की तरफ देखा। वह भागकर उसके बगल में आकर खड़ी हो गई। सागर खत्री अब कुछ संभल गया था। उसने कहा,
"कमीने.... अहसानफरामोश.... मैंने तेरी इतनी मदद की। तू मेरे साथ यह कर रहा है।"
अंजन ने गन उसकी कनपटी पर सटाते हुए कहा,
"तुमसे बड़ा अहसानफरामोश कौन होगा। याद है ना मैंने तुम्हारी जान बचाई थी। मैं मदद के लिए ना आया होता तो उस दिन तुम्हारा अंतिम दिन होता। लव चढ्ढा से सागर खत्री बनने में मदद की थी। नहीं तो तुम्हारे दुश्मन तुम्हें जीने ना देते। उस सबके बदले तुमने मीरा के बारे में इतनी गंदी बात कही थी। आज तुमने उस पर हाथ डालने की जुर्रत की।"
"तुम बेवकूफ हो। इस लड़की के लिए मेरी दुश्मनी मोल ले रहे हो जिसने तुम्हें धोखा दिया था। अभी भी इसका क्या भरोसा।

ना जाने कब तुम्हें धोखा दे दे।"
"मैं मीरा को इसलिए नहीं बचा रहा हूँ कि मुझे उसके साथ रिश्ता कायम करना है। मैंने उसे प्यार किया था। उसे अपनी पत्नी बनाना चाहता था। अब उसे तुम्हारे जैसे दरिंदे के हाथों लुटने नहीं दे सकता।"
सागर खत्री ने कहा,
"तुम्हें लगता है कि इसे यहाँ से ले जा पाओगे। नहीं कुछ ही देर में पकड़े जाओगे। फिर तुम्हारी आँखों के सामने ही इसकी इज़्ज़त तार तार कर दूँगा।"
"मैं भी तुम्हें बता रहा हूँ कि मेरे जीते जी तुम मीरा को छू भी नहीं पाओगे।"

रिस्की लव - 43

अंजन ने गौर किया। सिक्योरिटी इंचार्ज के अलावा दो लोग और थे। उसने अपनी गन सागर खत्री के सर से सटाकर कहा,
"मुझे मीरा को लेकर यहाँ से जाने दो नहीं तो इसका सर उड़ा दूँगा।"
सागर खत्री पहले ही नशे में था। मार खाने के बाद उसमें अंजन का विरोध करने की क्षमता नहीं बची थी।‌ पर उसका दिमाग चल रहा था। उसने सोचा कि अगर अंजन को रोकने की कोशिश करेगा तो वह उसे जान से मार सकता है। उसे जाने देना ही अक्लमंदी है। अंजन यहाँ किसी को जानता भी नहीं है। उसके पास साधन भी नहीं हैं। यहाँ से निकल भी गया तो कहाँ जाएगा। उसने सिक्योरिटी इंचार्ज से कहा,
"इसे इस लड़की के साथ जाने दो।"
सिक्योरिटी इंचार्ज और उसके साथी पीछे हट गए। अंजन ने उनसे कहा कि वह अपनी गन ज़मीन में रखकर पीछे दीवार की तरफ मुंह करके खड़े हो जाएं। उन्होंने अंजन की बात मान ली। उसके बाद अंजन ने मीरा से कहा कि वह एक गन उठा ले। अंजन ने उसे गन सागर खत्री के सर पर लगाने को कहा।
मीरा ने गन सागर खत्री के सर पर लगा दी। अंजन ने फुर्ती दिखाते हुए अपनी गन से सिक्योरिटी इंचार्ज और उसके साथियों को मार दिया। उसके बाद उसने गन सागर खत्री पर तान दी। वह घबरा गया। उसने कहा,
"ये क्या है ? मैंने तुम्हें जाने की इजाज़त दे दी थी। इन लोगों को क्यों मारा‌ ?"
"इन्हें छोड़ देता तो ये लोग मेरे पीछे आते। मैं अपने रास्ते में कोई खतरा नहीं छोड़ना चाहता हूँ।"
"अंजन.... तुम पहले ही मुसीबत से घिरे हुए थे। यह सब करके तुमने बड़ी गलती की है। तुमको क्या लगता है कि अब तुम्हारा रास्ता आसान हो गया। गोलियों की आवाज़ सुनकर सिक्योरिटी के दूसरे लोग ऊपर आते होंगे।"
अंजन ने कहा,
"सिक्योरिटी में पाँच लोग थे। एक को यहाँ आते समय मार दिया था। तीन अब मर गए। एक बचा है। निपट लूँगा। फिर तुम तो हो मेरी ढाल बनने के लिए।"
अंजन ने मीरा से कहा कि वह गन लेकर सावधान रहे। अंजन सागर खत्री को अपनी गन प्वाइंट पर लेकर दरवाज़े की तरफ बढ़ा। उसने मीरा से कहा कि वह सावधानी से दरवाज़ा खोले। मीरा ने दरवाज़ा खोला और उसकी आड़ में छिप गई। अंजन ने कहा,
"सागर ‌मेरे निशाने पर है। इसलिए अगर कोई घात लगाए बैठा है और उसने कोई हरकत की, तो समझ ले कि ‌सागर की मौत का ज़िम्मेदार वह होगा।

"
अंजन ने मीरा को तैयार रहने के लिए कहा। वह सागर खत्री को लेकर दरवाज़े की तरफ बढ़ा। सागर खत्री को आगे किए हुए वह बाहर निकला। लॉबी में बचा हुआ सिक्योरिटी का आदमी था। वह अपनी गन उसकी तरफ तान कर बोला,
"सर को छोड़ दो।"
अंजन ने हंसकर कहा,
"छोड़ने के लिए नहीं पकड़ा है। लेकिन तुमने अगर कोई हिमाकत‌ की तो इसके लिए अच्छा नहीं होगा।"
इसी बीच मीरा ने बाहर आकर उस आदमी पर गोली चला दी। लेकिन गोली उसके बाजू पर लगी। गन उसके हाथ से छूटकर गिर गई। अंजन ने अपनी गन से उसे मार दिया। लेकिन इस बीच में मौका देखकर सागर खत्री ने अंजन को धक्का दिया। वह लड़खड़ा गया। सागर खत्री ने ज़मीन पर गिरी गन उठाकर उस पर तान दी।
सागर खत्री की तरफ मीरा और अंजन दोनों की गन्स का निशाना था। सागर खत्री अंजन पर निशाना लगाए खड़ा था। अंजन की निगाह सागर खत्री पर टिकी हुई थी। वह उस पल की राह देख रहा था जब सागर खत्री कुछ गलती करे। मीरा समझ रही थी कि अंजन बस एक मौके की तलाश में है। वह जानबूझकर सागर खत्री की तरफ बढ़ी। सागर खत्री की निगाह उसकी तरफ गई। अंजन ने कोई चूक नहीं की। सागर खत्री ज़मीन पर गिरा था। गोली उसके सर पर लगी थी।

अंजन मीरा के साथ नीचे आया। अलीशिया उसकी राह देख रही ‌थी। सागर खत्री के मारे जाने की बात सुनकर वह बहुत खुश हुई।

सागर खत्री मारा गया था। लेकिन अंजन जानता था कि उसके लिए यहाँ रहना उचित नहीं होगा। सागर खत्री के वफादार उसे नुकसान पहुँचा सकते हैं। इसलिए उसने जल्दी से जल्दी वहाँ से निकलने के बारे में सोचा। पर समझ नहीं पा रहा था कि कहाँ जाए। मीरा ने उसे बताया कि किडनैप होने से पहले वह निर्भय के दिए घर में रह रही थी।‌ वहाँ उसका सामान और कुछ पैसे हैं। वो लोग वहाँ जा सकते हैं।
अंजन उसकी बात पर राजी हो गया। वह सागर खत्री के कमरे में गया। अलीशिया की मदद से उसकी अलमारी से कुछ पैसे निकाले। उसने अलीशिया को भी अपना कुछ ज़रूरी सामान रखने के लिए कह दिया। उसके बाद वह मीरा और अलीशिया के साथ निर्भय के घर के लिए निकल गया।

एसीपी सत्यपाल वागले ने हर उस व्यक्ति पर नज़र बना रखी थी जो अंजन से जुड़ा हुआ था। इनमें विधायक दिनेश कांबले भी था। एसीपी सत्यपाल वागले को विधायक दिनेश कांबले और अंजन के बीच हुई कॉल के डीटेल मिल गए। उस डीटेल के बल पर एसीपी सत्यपाल वागले ने विधायक दिनेश कांबले को पूँछताछ के लिए बुलाया।
विधायक दिनेश कांबले ने स्वीकार कर लिया कि ‌अंजन ने उससे मदद मांगने के लिए फोन किया था। लेकिन उसने मदद करने से इंकार कर दिया।
पुलिस ने उस नंबर के ज़रिए पता कर लिया कि कॉल सिंगापुर से आई थी। मुंबई पुलिस ने फौरन अंजन के डीटेल्स सिंगापुर भिजवाए ताकी अंजन को पकड़ने में मदद मिल सके।

सिंगापुर पुलिस की तरफ से मदद का आश्वासन मिलने पर मुंबई पुलिस अपना एक दल सिंगापुर भेजने के लिए तैयार हो गई। एसीपी सत्यपाल वागले अपने कुछ चुने हुए लोगों के साथ सिंगापुर जाने की तैयारी करने लगा।

निर्भय के घर पहुँचने के बाद अंजन को एक ठिकाना मिल गया था। पर वह जानता था कि उसके लिए चैन से बैठने का समय नहीं है। उसे जल्द ही कुछ भी करके यहाँ से निकलना होगा। ताकी अपना सबकुछ फिर से पा सके। लेकिन उससे पहले उसे मीरा को सुरक्षित करना था। वह नहीं चाहता था कि उसके कारण मीरा पर कोई मुश्किल आए। उसका एक ही तरीका था। मीरा लंदन वापस चली जाए।

मीरा अपने कमरे में बैठी थी। उसके दिमाग में अंजन ही घूम रहा था। जिस बहादुरी के साथ उसने उसे सागर खत्री के जुल्म से बचाया था। उससे वह बहुत प्रभावित हुई थी। अंजन का यह कहना उसके दिल को छू गया था कि मीरा को वह इसलिए बचाना चाहता है क्योंकी उसने उससे प्यार किया था। उसे अपनी पत्नी बनाना चाहता था। इसलिए उसके रहते सागर खत्री उसे हाथ भी नहीं लगा सकता है।
उस पल के बाद से ही जैसे मीरा ने खुद को अंजन के लिए समर्पित कर दिया था। अब वह बाकी की ज़िन्दगी उसके साथ बिताना चाहती थी। उसे पता था कि अंजन इस वक्त मुश्किल दौर से गुजर रहा है। लेकिन उसे इस बात का पूरा यकीन था कि एक दिन वह अपना सबकुछ दोबारा पा लेगा। वह उसके साथ आने वाले जीवन के सपने देखने लगी थी।
उसके कमरे के दरवाज़े पर नॉक हुई। उसने दरवाज़ा खोला तो अंजन था। अंजन ने उससे कहा,
"मुझे तुमसे कुछ बात करनी थी।"
"तो अंदर आ जाओ।"
कहकर मीरा दरवाज़ा छोड़कर खड़ी हो गई। अंजन भीतर जाकर बैठ गया। मीरा उसके ‌पास बैठते हुए बोली,
"कहो क्या बात करनी है।"
अंजन सोचकर आया था कि उसे अपनी बात कैसे कहनी है। उसने सीधे सीधे कहा,
"मैं सोच रहा था कि अब तुम अलीशिया के साथ लंदन वापस चली जाओ। वहांँ तुम सुरक्षित रहोगी और अपना जीवन फिर से शुरू कर सकती हो। इसलिए जाने की तैयारी करो।"
उसकी बात सुनकर मीरा ने कहा,
"अंजन मानती हूँ कि मैंने तुम्हारे साथ धोखा किया था। लेकिन मुझे उस बात का बहुत पछतावा है। अब मैं तुम्हारे साथ अपना जीवन बिताना चाहती हूंँ। क्या तुम मुझे माफ नहीं कर सकते ?"
अंजन गंभीर हो गया। कुछ सोचकर बोला,
"इस वक्त मैं यह सब सोच सकने की स्थिति में नहीं हूंँ। अभी तो मुझे अपने लिए ज़मीन तलाश करनी है। मेरा सबकुछ छिन गया है। जब तक उसे दोबारा पा ना लूँ इन सब बातों के बारे में सोचना ही नहीं है। इसलिए तुम यह सब छोड़कर चुपचाप लंदन जाने की तैयारी करो।"
मीरा को अच्छा नहीं लगा। उसने कुछ कहना चाहा तो अंजन ने उसे रोककर कहा,
"मीरा बात को समझो। अगर अभी भावनाओं में पड़ गया तो अपना कुछ भी वापस नहीं ले पाऊंँगा। ना खुद खुश रहूँगा और ना तुमको रख पाऊँगा।"
यह‌ कहकर अंजन उसके कमरे से चला गया।

मीरा उसकी इस बात पर विचार करने लगी। ढंग से सोचने पर उसे इस बात में अपने लिए एक उम्मीद नज़र आई। वह सोचने लगी कि अगर उसे अंजन का साथ चाहिए तो उसकी कमज़ोरी बनने की बजाय उसकई सहायता करनी चाहिए। वह उसे निश्चिंत छोड़ दे अभी यही उसके लिए सबसे बड़ी सहायता होगी।
वह लंदन वापस जाने को तैयार हो गई।

अलीशिया भी अब अपने आगे के जीवन के बारे ‌में सोच रही थी। वह सागर खत्री के साथ यह सोचकर आई थी कि वह उसे प्यार करता है। लेकिन सच तो यह था कि वह बस उसके शरीर को खिलौना मान कर खेलता था। अब वह एक नए सिरे से अपनी ज़िंदगी शुरू करना चाहती थी। अंजन ने जब उसे मीरा के साथ लंदन जाने को कहा तो वह मान गई।

रिस्की लव - 44

मीरा और अलीशिया लंदन वापस चली गई थीं। अंजन का मन मीरा के लिए दुखी था। विदा लेते समय मीरा ने उससे कहा था कि वह जा रही है, लेकिन उसे इस बात का इंतज़ार रहेगा कि कब वह अपना सबकुछ वापस हासिल कर उसके पास आएगा।
अंजन के दिल में मीरा के प्रति जो गुस्सा था वह खत्म हो गया था। अब वह भी जल्दी अपना पुराना रुतबा वापस हासिल कर मीरा के पास जाना चाहता था। वह उसके साथ एक नया जीवन शुरू करना चाहता था।
अंजन निर्भय के मकान में ही रह रहा था। मीरा यह कह गई थी कि अंजन उसका खास दोस्त है। निर्भय से बात हो गई है। वह कुछ दिन यहीं रहेगा।
अब अंजन किसी तरह से सिंगापुर से थाईलैंड जाने के बारे में सोच रहा था। वहाँ उसे कुछ सहायता मिलने की उम्मीद थी। पर वह यहाँ रमन सिंह के नाम से आया था। अब उसे लग रहा था कि इस पासपोर्ट पर यात्रा करना खतरनाक हो सकता है। उसे एक नए पासपोर्ट की आवश्यकता थी।
इस सिलसिले में उसके दिमाग में एक नाम अश्विन राहाणे था। कुछ साल पहले अश्विन राहाणे एक मुसीबत में फंस गया था। जिसके कारण वह बहुत परेशान था। अश्विन राहाणे एक लॉज में मैनेजर था। उस पर अपने दोस्त को अगवा करने का आरोप था। तब उसकी माँ के कहने पर अंजन ने अपनी जान पहचान के ज़रिए उसे मुसीबत से निकालने में मदद की थी। उसे कुछ पैसे भी दिए थे। बाद में उसने उसे सूचित किया था कि वह सिंगापुर के एक भारतीय रेस्टोरेंट में काम कर रहा है।
अंजन को उस भारतीय रेस्टोरेंट का नाम याद था। उसने इस कठिन समय में अश्विन राहाणे से मदद लेने का फैसला किया। वह रेस्टोरेंट लिटिल इंडिया नाम की जगह पर था। अंजन कार लेकर उस रेस्टोरेंट के लिए निकल गया।
रेस्टोरेंट के लिए जाते समय अंजन को डर था कि कहीं अश्विन राहाणे ने वह नौकरी छोड़ ना दी हो। ऐसे में यहाँ उसकी मदद करने वाला कोई नहीं होगा। लेकिन उसकी किस्मत ने उसका साथ दिया। अश्विन राहाणे से उसकी मुलाकात हो गई। अंजन ने उसे अपनी सारी बात बताई। उससे कहा,
"आज मेरा बुरा समय चल रहा है।

लेकिन मुझे पूरी उम्मीद है कि अगर तुम मेरी मदद कर दो तो मैं जल्दी ही अपना सबकुछ वापस पा सकता हूँ। तब मैं एहसान चुकाने में कोई कसर नहीं छोड़ूंगा।"
अंजन ने आड़े वक्त में उसकी जो मदद की थी अश्विन राहाणे उसे अच्छी तरह से समझता था। उसने कहा,
"आपने मेरी जो मदद की थी उसे मैं भूला नहीं हूँ। अगर उस समय आपका साथ ना मिला होता तो मैं उस केस में फंस गया होता। इसलिए मैं आपकी मदद ज़रूर करूँगा। लेकिन मेरे जैसा छोटा आदमी आपकी क्या मदद कर सकता है।"
"अश्विन इस समय छोटी सी मदद भी बहुत बड़ी होगी। मैं किसी भी तरह से सिंगापुर से बाहर निकलना चाहता हूँ।"
"पर आप सिंगापुर से निकल कर कहाँ जाना चाहते हैं ? इंडिया वापस जाना तो खतरनाक होगा।"
"मुझे थाईलैंड जाना है। पर मुझे एक नया पासपोर्ट चाहिए। क्या तुम इस विषय में मेरी मदद कर सकते हो।"
उसकी बात सुनकर अश्विन ने कहा,
"मुश्किल काम है। पर मैं एक आदमी को जानता हूँ जो ऐसा कर सकता है।"
"तुम उससे मेरी मुलाकात करवा दो।"
अश्विन राहाणे ने कुछ सोचकर कहा,
"आप कुछ देर इंतज़ार कीजिए। मैं अपने मैनेजर से इजाज़त लेकर आता हूँ।"
कुछ देर के बाद अश्विन उसे उस आदमी से मिलने के लिए ले गया जो अंजन को नया पासपोर्ट बनवा कर दे सकता था। अंजन ने उस आदमी से कहा कि उसे एक नया पासपोर्ट बनवाना है। उस आदमी ने कहा कि पासपोर्ट बन जाएगा। लेकिन अच्छे पैसे लगेंगे। अंजन राज़ी हो गया। उस आदमी ने दो दिनों के बाद उसे आने के लिए कहा।
सागर खत्री के घर से निकलते समय अंजन को पैसों के साथ एक महंगा ब्रेसलेट, हीरे जड़े कफलिंक और दो अंगूठियां मिली थीं। उन्हें बेंचकर वह मतलब भर का पैसा एकत्र कर सकता था।
अंजन ‌अब आगे के बारे ‌में सोच रहा था। थाईलैंड में काम बन जाने की उसे कुछ उम्मीद थी। हालांकि जिनकी भी उसने मदद की थी उन्होंने उसे समय आने पर धोखा ही दिया था। सिवा अश्विन राहाणे के। जो उसकी मदद करने को तैयार हो गया था। लेकिन थाईलैंड वह एहसान मांगने के लिए नहीं जा रहा था। बल्की अपना हिस्सा लेने जा रहा था
सोम आर्य का थाईलैंड में होटल बिज़नेस था। उसमें अंजन की भी तीस फीसदी हिस्सेदारी थी। वह उसके आधार पर सोम आर्य से कुछ रकम लेना चाहता था। जिससे अपने लिए कुछ नया काम शुरू कर सके।
अंजन जानता था कि उसे अब एक नए सिरे से सबकुछ करना होगा। यह आसान नहीं होगा। उसने सोचा था कि सागर खत्री की तरह एक नए नाम के साथ कहीं दोबारा अपना नया अस्तित्व तलाश करेगा। एक बार अपनी नई पहचान बनाने के बाद कोशिश करेगा कि भारत में उसने जो कुछ भी खोया है दोबारा पा सके। फिलहाल तो उसे फिर से शुरुआत करने के लिए कमर कसनी थी। वह मन ही मन अपने आप को एक नए संघर्ष ‌के लिए तैयार कर रहा था।

मुंबई पुलिस से अंजन के डीटेल्स मिलने के बाद से ही सिंगापुर पुलिस भी एक्टिव हो गई थी।

उन्होंने पता कर लिया कि अंजन रमन सिंह के नाम से सिंगापुर आया था। उन्होंने उसकी तलाश तेज़ कर दी थी।
भारतीय मूल का सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज इस केस को देख रहा था। उसने अंजन की तस्वीर के साथ अपने कुछ साथियों को अलग अलग हिस्सों में भेजा था। वह अंजन के बारे में पूँछताछ कर रहे थे।

एसीपी सत्यपाल वागले चार लोगों की अपनी टीम के साथ सिंगापुर पहुँचा। उसने अंजन के केस के संबंध में सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज से मुलाकात की। सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने उसे बताया कि उसकी टीम अलग अलग इलाकों में नज़र बनाए हुई है। जल्दी ही अंजन का पता ‌लग जाएगा।‌
एसीपी सत्यपाल वागले पर उनके डिपार्टमेंट का दबाव था कि जल्दी ही अंजन को गिरफ्तार करके लाए। सिंगापुर आते समय अंजन का समर्थन कर रहे कुछ लोगों ‌ने एयरपोर्ट पर एसीपी सत्यपाल वागले और उसकी टीम के साथ बद्तमीजी की थी।‌ एसीपी सत्यपाल वागले के लिए यह ज़रूरी हो गया था कि किसी भी कीमत पर अंजन को कानून के शिकंजे में लाए।
वह जानता था कि उसके अपने डिपार्टमेंट के ही कुछ लोग हैं ‌जो नहीं चाहते हैं कि अंजन गिरफ्तार हो। उन्हें डर था कि अंजन के गिरफ्तार होने पर उनके और अंजन के बीच के रिश्तों का खुलासा हो जाएगा। एसीपी सत्यपाल वागले यह भी जानता था कि राज्य सरकार के कुछ मंत्रियों का भी अंजन के काले कारनामों में हिस्सा है। सारे लोग मिलकर यही चाहते थे कि अंजन या तो कानून की गिरफ्त से दूर रहे या मारा जाए। एसीपी सत्यपाल वागले उन सबको भी बेनकाब करना चाहता था। लेकिन यह तभी संभव हो सकता था जब अंजन उसकी पकड़ में आए।
सिंगापुर के एक फ्लैट के कमरे में नागेश गुप्ता नाम का एक आदमी शराब पी रहा था। उसका फोन बजा। उसने सामने रखी ऐशट्रे में सिगरेट बुझाई। फोन रिसीव कर स्पीकर पर डाल दिया। उधर से आवाज़ ‌आई,
"नागेश.... एसीपी सत्यपाल वागले भी सिंगापुर में है। कोई चूक ना करना। अंजन उसके हाथ नहीं लगना चाहिए।"
नागेश ने शराब का एक बड़ा घूंट भरा। उसके बाद बोला,
"मैं अपने काम में माहिर हूँ। चूक शब्द मेरी डिक्शनरी में नहीं है। उस एसीपी से पहले यहाँ आ गया था। शिकार पर मेरी नज़र है। एसीपी की नज़र पड़ने से पहले शिकार का शिकार हो जाएगा।"
कहकर नागेश ने फोन काट दिया।
उसने अपने लिए एक और पैग बनाया और बड़े इत्मीनान के साथ पीने लगा।‌ कुछ देर में कमरे के दरवाज़े की घंटी बजी। वह मुस्कराया।‌ दो आदमी खड़े थे। इनमें से एक अश्विन राहाणे था। दूसरा आदमी उसे अंदर ले आया। नागेश दरवाज़ा बंद करके वापस सोफे पर बैठ गया। उसने अपने आदमी से कहा,
"पॉल बता दिया इसे क्या करना है।"
"हाँ सर.... यह भी बता दिया है कि बात मान ली तो तुम्हारा फायदा। नहीं तो जान से हाथ धोना पड़ेगा।"
अश्विन राहाणे घबराया सा खड़ा था।

नागेश ने उससे कहा,
"क्या चाहते हो ? पैसा या गोली।"
अश्विन राहाणे ने कहा,
"मुझे अपनी जान प्यारी है। वही करूँगा जो कहा है।"
नागेश मुस्कुरा कर बोला,
"समझदार हो....अब वही करो जो कहा गया है।"
अश्विन राहाणे ने अपना फोन निकाला और अंजन को कॉल किया। फिर एक कोने में जाकर बात करने लगा।
नागेश ने पॉल को इशारा किया। वह उसके इशारे को समझ ‌गया। अश्विन राहाणे बात करके लौटा तो नागेश ने कहा,
"उसे अच्छी तरह से समझा दिया था।"
"हाँ सब समझा दिया।"
"तुम्हारी बात मानेगा ना ?"
"बिल्कुल मानेगा। उसने कहा था कि वह फौरन निकल रहा है।"
नागेश एक बार फिर मुस्कुराया। उसने कहा,
"जाओ.... जो तय हुआ था पॉल तुमको दे देगा।"
पॉल ने उसे अपने साथ आने का इशारा किया। वह अश्विन राहाणे को एक एकांत स्थान पर ले गया। पॉल वहाँ से चला गया। अश्विन राहाणे की लाश वहीं पड़ी थी।

रिस्की लव - 45

अश्विन राहाणे का फोन आने के बाद अंजन उसकी बताई गई जगह पर जाने की तैयारी करने लगा। अश्विन राहाणे ने उससे कहा था कि पासपोर्ट बनाने वाले ने उसे मिलने के लिए बुलाया है। उसने एक जगह बताई थी जहाँ पहुँचना था। अंजन को आश्चर्य हो रहा था कि उस आदमी ने उसे इस समय मिलने क्यों बुलाया था। वह भी किसी दूसरी जगह। उसने अश्विन राहाणे से इस बारे में पड़ताल की भी थी। अश्विन राहाणे ने उसे बताया था कि वह आदमी उस जगह ही अपना काम करता है। उसे काम करने की जल्दी है। इसलिए इस समय बुलाया है। वहाँ पासपोर्ट के लिए कुछ कार्यवाही करनी है।
अंजन उस जगह के लिए निकल रहा था तभी उसके मन में खयाल आया कि उसे अपनी सुरक्षा के लिए साथ में गन रखनी चाहिए। उसने अपनी जैकेट के अंदर वाली पॉकेट में गन रख ली। गाड़ी की चाभी ली और निकल गया।
जीपीएस की मदद से वह उस जगह पर पहुँच गया।‌ यह एक सुनसान जगह थी। वह गाड़ी से उतरा और सामने बने एक पुराने से मकान की तरफ चल दिया। मकान के चारों तरफ कई पेड़ लगे हुए थे। मकान के सामने पहुँच कर उसने अश्विन राहाणे को फोन किया। तीन बार रिंग बजने के बाद फोन कट गया। अंजन को आश्चर्य हुआ। वह दोबारा फोन मिलाने जा रहा था तभी अश्विन राहाणे के नंबर से मैसेज आया 'कम इन'। अंजन को बात करने की जगह मैसेज भेजना अजीब लगा।
उसका माथा ठनका कि ज़रूर कोई गड़बड़ है। उसने अपनी गन निकाल ली। वह भागकर पास की झाड़ियों में छिप गया। कुछ देर बाद उसने देखा कि एक आदमी बाहर आया। उसने इधर उधर देखा। फिर मैसेज टाइप करने लगा।‌ अंजन के फोन पर अश्विन राहाणे का मैसेज था। उसने पूँछा था कि वह कहाँ है ? अंदर क्यों नहीं आया ? अंजन‌ समझ गया कि यह उसके लिए एक जाल है। उसने मैसेज करके कहा कि वह अपनी कार में बैठा है। उससे मिलना है तो वहीं आए।
वह आदमी अंजन की कार की तरफ बढ़ने लगा।‌ अंजन ने देखा कि चलते हुए उसका हाथ कोट की पॉकेट में था।

वह समझ गया कि गन है। उस आदमी ने कार के पास पहुँच कर शीशे पर नॉक किया। अंजन फुर्ती से झाड़ियों के पीछे से निकल कर कार की तरफ भागा। कदमों की आहट पाकर वह आदमी जैसे ही घूमा अंजन ने उसके हाथ पर गोली चला दी। फिर उसे गन प्वाइंट पर लेकर घुटनों पर बैठने को कहा। वह घुटनों पर बैठ गया। उसके हाथ से तेज़ खून निकल रहा था। वह गन नहीं निकाल सकता था। अंजन ने उससे कहा,
"अपनी जान की सलामती चाहते हो तो सच सच बताओ कि तुमने मुझे यहाँ क्यों बुलाया ? अश्विन कहाँ है ?
"मेरा नाम पॉल है। अश्विन को मार दिया है। उसके फोन से तुम्हें मैसेज कर रहा था।"
"वो तो मैं समझ गया। यह बताओ कि मुझे धोखे से यहांँ बुलाने का क्या कारण है ? मुझसे क्या चाहते हो ?"
पॉल बहुत तकलीफ में था। अंजन ने उससे कहा,
"सच सच बताओ। नहीं तो इससे भी बुरी हालत कर दूँगा।"
पॉल ने कहा,
"मुझे मेरे बॉस ने तुम्हें जान से मारने के लिए कहा था।"
"क्यों ? तुम्हारा बॉस है कौन ?"
"मुझे नहीं पता कि तुम्हें क्यों मारना था। मेरे बॉस नागेश गुप्ता को किसी ने तुम्हें मारने की सुपारी दी थी। मैं कई दिनों से तुम्हारी तलाश कर रहा था। मैंने तुम्हें अश्विन राहाणे के रेस्टोरेंट में देखा था। उसके बाद तुम उसके साथ एक आदमी से मिलने गए थे। पर वहाँ तुम्हें मारना ठीक नहीं था। इसलिए बाद में अश्विन राहाणे को अगवा कर उसे हमारी बात मानने के लिए धमकाया और लालच दिया। वह मान गया। तुम्हें यहाँ बुला लिया। फिर मैंने उसे यहाँ लाकर मार दिया।"
सारी बात जानने के बाद अंजन के लिए उसका कोई उपयोग नहीं था। उसने पॉल को मार दिया। उसकी जेब से दो फोन मिले। एक अश्विन राहाणे का था और दूसरा उसका। उसने उसका फोन निकाला। उसमें एक नंबर बॉस के नाम से था। उसने वह नंबर अपने मोबाइल पर फीड कर लिया। पॉल का फोन वहीं फेंककर वह अपनी कार में बैठकर निकल गया।
कार चलाते हुए वह सोच रहा था कि आखिर उसे कौन मरवाना चाहता है। वह समझ गया कि मुंबई में बैठे कुछ लोग जिनके तार उससे जुड़े हैं उनमें से ही किसी ने उसकी सुपारी दी होगी। वह सोचने लगा कि उसके गिरफ्तार होने से सबसे अधिक नुकसान किसे होगा ? कौन इतना पावरफुल है कि वहाँ से बैठे हुए उसकी सुपारी दे सकता है।
उसके दिमाग में एक नाम उभरा। वन मंत्री अजय मोहते का। उसने ही उसे वन विभाग की ज़मीन रिज़ार्ट के लिए दिलवाई थी। बदले में अच्छी खासी रकम ली थी। उससे पहले भी कई मामलों में वह अंजन की मदद कर चुका था। जब एक पत्रकार ने ज़मीन को लेकर आवाज़ उठाई थी तो उसका भी नाम लिया था। तब अजय मोहते ने अपने रसूख से सारा मामला दबवा दिया था।‌ अजय ही हो सकता है जिसने उसे मरवाने की सुपारी दी होगी। क्योंकी उसके पकड़े जाने पर अजय का नाम सामने आ सकता था।

वह सोचने लगा कि अभी तक उसे पुलिस से खतरा था अब उसके दोस्त भी दुश्मन बनकर उसकी जान के पीछे पड़े हैं। आज उससे कितनी बड़ी गलती हो गई थी। वह अश्विन राहाणे के झांसे में आ गया था। अगर समय रहते उसका दिमाग ना चला होता तो वह उसी जंगल में पॉल की जगह पर पड़ा होता।
वह नागेश गुप्ता के बारे में सोचने लगा। उसकी नज़र उस पर है। जब उसे पता चलेगा कि वह बच गया है तो दोबारा कोशिश करेगा। अब उसे सावधान रहना पड़ेगा। जल्द से जल्द सिंगापुर से निकलना होगा। पर उससे पहले निर्भय का मकान छोड़ना होगा। क्योंकी हो सकता है कि नागेश गुप्ता वहाँ भी पहुँच जाए।

नागेश गुप्ता बार बार पॉल का नंबर मिला रहा था। लेकिन पॉल फोन नहीं उठा रहा था। चौथी बार भी जब उसने फोन नहीं उठाया तो नागेश गुप्ता को लगा कि ज़रूर पॉल ने कुछ गडबड कर दी है। तभी फोन नहीं उठा रहा है।
वह गुस्से से आग बबूला हो उठा। मन ही मन पॉल को गालियां देने लगा कि इतना सा काम भी नहीं कर सका। अब वह अपने ऊपर खीज रहा था कि उसने पॉल को यह काम दिया ही क्यों ? अब उसके लिए अपने क्लाइंट को जवाब देना कठिन हो जाएगा। उसने कार की चाभी उठाई और यह देखने के लिए निकल गया कि पॉल ने क्या गड़बड़ कर दी। जब वह उस जगह पहुँचा तो उसे पॉल की लाश मिली। शिकार उसके चंगुल से निकल गया था। अपनी बेवकूफी पर उसे बहुत गुस्सा आया। वह यह सोचकर लापरवाह हो गया था कि अब उसका शिकार किसी भी कीमत पर नहीं बचेगा। पर वह बहुत चालाक निकला।

एसीपी सत्यपाल वागले और सिंगापुर पुलिस के सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज आमने सामने बैठे थे। दोनों अंजन की गिरफ्तारी को लेकर ही बात कर रहे थे। राजेंद्र सेल्वाराज ने कहा,
"अंजन विश्वकर्मा हमारे देश में गलत पहचान और पास्पोर्ट के साथ आया था। उसके पकड़े जाने पर हमारे देश के कानून के हिसाब से उसे सज़ा दी जाएगी।"
एसीपी सत्यपाल वागले ने कहा,
"हमारे देश में भी उसने बहुत से गलत काम किए हैं। हम कोशिश करेंगे कि आपकी सरकार से इजाज़त लेकर उसे भारत ले जाएं।"
राजेंद्र सेल्वाराज उठकर खड़ा हो गया। उसने कहा,
"हम हमारे देश में अनाधिकृत रूप से घुसने के लिए उसे सजा ज़रूर देंगे। पर उससे पहले उसका पकड़ा जाना ज़रूरी है।"
"सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज आमने एकदम ठीक कहा। उसका पकड़ा जाना बहुत ज़रूरी है। हमें ऐसी खबर मिली है कि कुछ लोग नहीं चाहते हैं कि वह ज़िंदा पकड़ा जाए। उन्होंने उसकी हत्या के लिए किसी को पैसे दिए हैं। अगर वह मारा गया तो आपकी और हमारी पुलिस फोर्स की बदनामी होगी।"
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने एसीपी सत्यपाल वागले को घूरकर देखा। वह बोला,
"हम उसे गिरफ्तार करेंगे और अपने कानून के हिसाब से सजा देंगे।"
यह कहकर वह चला गया।

एसीपी सत्यपाल वागले को लग रहा था कि अंजन पकड़ा गया तो उसे यहाँ से ले जाना आसान नहीं होगा।

अंजन का शक सही था। राज्य सरकार में वन मंत्री अजय मोहते ने ही अपने एक खास आदमी के ज़रिए नागेश गुप्ता को उसकी सुपारी दिलाई थी। इस समय अजय मोहते का वह आदमी उसके सामने सर झुकाए खड़ा था। अजय मोहते उसे गुस्से से घूर रहा था। उसने कहा,
"उम्मीद करते हो कि मैं तुम्हें किसी बड़े काम में लगा दूँ। लेकिन एक छोटा सा काम नहीं कर पाए।"
उस आदमी ने कहा,
"भाऊ.... नागेश गुप्ता अपने काम में माहिर है। इस बार ना जाने....."
अजय मोहते ने डांटते हुए कहा,
"किसी काम के नहीं हो तुम। अंजन सावधान हो गया होगा। अब उसे मारना इतना आसान नहीं होगा। अगर वह पुलिस के हाथ लग गया तो ठीक नहीं होगा। उस बेवकूफ नागेश गुप्ता से कहो कि जल्दी उसे ढूंढ़ कर उसका काम तमाम कर दे।"
वह आदमी चला गया। अजय मोहते चिंता में अपना सर पकड़े बैठा था। अंजन का मारा जाना उसके लिए बहुत ज़रूरी था।

रिस्की लव - 46

निर्भय के मकान में पहुँच‌कर अंजन सोचने लगा कि अब आगे क्या करे। पुलिस ही नहीं अब उसके पुराने दोस्त भी उसके पीछे पड़ गए थे। वह और अधिक परेशान हो गया था। उसे किसी भी तरह से इस स्थिति से निकलना था। लेकिन कोई राह नहीं दिख रही थी।
अपने लिए पेग बनाकर वह पीने लगा। शराब के कुछ घूंट अंदर जाने के बाद उसे अच्छा महसूस हुआ। अब उसने दिमाग दौड़ाना शुरू किया। उसके दो दुश्मन पैदा हो गए थे। एक पुलिस और दूसरा अजय मोहते। उसे उन दोनों से बचना था। पुलिस उसे किसी भी कीमत पर गिरफ्तार करना चाहती थी। अजय अपने स्वार्थ के लिए यह चाहता था कि वह पुलिस के हाथ ना लगे। इसलिए उसे मरवाने की सुपारी दी थी।
यह सोचते हुए एक बात उसके दिमाग में आई। उसके एक तरफ कुआं है दूसरी तरफ खाई। खाई यानी पुलिस के चंगुल में फंसकर वह निकल नहीं सकता। कुएं में कूदने पर एक उम्मीद हो सकती है। अजय उसे सिर्फ इसलिए मारना चाहता है कि उसके गिरफ्तार होने से उसके भी फंसने का खतरा है। उसे अपना डर छोड़कर उसके साथ सौदा करना होगा। उससे कहना होगा कि वह उसे सुरक्षित भागने में मदद करे। अगर वह पुलिस के हाथ आ गया तो पहला नाम उसका ही लेगा।‌
पर इसके लिए अजय मोहते को यह यकीन दिलाना ज़रूरी था कि दूर से बैठकर उसे मरवा देना आसान नहीं है।‌ अंजन सोचने लगा कि यह काम कैसे करे। बहुत सोचने पर उसने तय किया कि वह नागेश गुप्ता को मारकर अजय मोहते को संदेश देगा कि वह कमज़ोर नहीं पड़ा है।
अंजन अपना प्लान बनाने लगा।

नागेश गुप्ता बहुत गुस्से में था। अजय मोहते के आदमी ने उसे फोन करके बहुत कुछ सुनाया था। अपनी बेइज्जती उससे बर्दाश्त नहीं हो रही थी। अब उसे किसी भी कीमत पर अंजन को मारना था।‌ वह नहीं जानता था कि सिंगापुर में अंजन कहाँ रह रहा है।

यह बात अश्विन राहाणे को भी नहीं पता थी। उसके पास केवल अंजन का फोन नंबर था।
नागेश गुप्ता ‌वह जगह जानता था जहाँ अंजन पासपोर्ट के चक्कर में गया था। वह उस आदमी से मिला और कहा कि जब अंजन उसके पास आए तो उसे किसी तरह उलझा कर रखे। उसे फौरन फोन कर दे।‌
जो समय अंजन को दिया था वह उसमें उस आदमी से मिलने नहीं गया। नागेश अब और समय नहीं लगाना चाहता था। उसने उस आदमी से कहा कि वह फोन करके अंजन को मिलने बुलाए। उस आदमी ने खोजा पर उसे अंजन का नंबर नहीं ‌मिला। उसने नागेश से कहा कि शायद उससे नंबर खो गया ‌है।
पॉल की लाश के पास नागेश गुप्ता को अश्विन का फोन मिला था। उसमें से उसने भी अंजन का नंबर नोट कर लिया था।‌ उसने वह नंबर दे दिया।‌

अंजन के फोन की घंटी बजी। उसने फोन उठाया। उधर से उसी आदमी का फोन था जिससे वह पासपोर्ट के लिए मिला था। वह समझ गया कि कोई उससे फोन करवा रहा है। वह नागेश गुप्ता ही हो सकता है। क्योंकी उस आदमी को अंजन ने अपना नंबर दिया ही नहीं था। उसके पास तो अश्विन का नंबर था। अंजन ने उससे कहा,
"मैं इस समय खतरे में हूँ। इसलिए तुम्हारे पास नहीं आ सकता हूँ। लेकिन मेरे लिए पासपोर्ट बनवाना भी बहुत ज़रूरी है। मैं तुम्हें कुछ देर में फोन करके वह जगह बताऊँगा जहाँ तुम मुझसे आकर मिल सकते हो।"
अंजन जानता था कि उस आदमी की जगह नागेश गुप्ता ही आएगा। उसने ऐसी जगह के बारे ‌में सोचना शुरू कर दिया जहाँ वह नागेश गुप्ता का सामना कर सके। सागर खत्री उसे अपने एक जगह ले गया था। उसके आसपास जंगल था। वहाँ पास में एक बंद पड़ी फैक्ट्री थी। सागर ने वह जगह खरीद ली थी। उसका प्लान वहाँ एक गेस्टहाऊस बनाने का था।
अंजन ने उस आदमी को फोन करके उसी जगह आने को कहा। वह दिए गए समय से बहुत पहले ही वहाँ पहुँच गया और नागेश गुप्ता के आने की राह देखने लगा।

अंजन उस फैक्ट्री की छत पर चढ़कर बैठा था। यहाँ से वह कच्चा रास्ता दिखाई पड़ रहा था जो मुख्य सड़क से फैक्ट्री की तरफ आता था। गाड़ी फैक्ट्री के सामने नहीं आ सकती थी। जो भी आता उसे अपनी कार कोई सौ मीटर पहले ही छोड़कर पैदल आना पड़ता।
समय होने के कोई दस मिनट बाद अंजन को एक कार मुख्य सड़क से उतरकर कच्चे रास्ते पर आगे बढ़ती हुई दिखाई पड़ी। वह सौ मीटर पहले ही उस कांटेदार बाड़ के पास रुक गई जहाँ से पैदल आना था। कार से वही आदमी उतरा जिससे वह पासपोर्ट के लिए मिला था। उस आदमी ने इधर उधर देखा। फिर फैक्ट्री की तरफ निगाह डाली। कुछ देर रुक कर वह फैक्ट्री की तरफ बढ़ गया।
अंजन को आश्चर्य हो रहा था कि नागेश गुप्ता की जगह वह क्यों आया है। लेकिन कार से कोई और नहीं उतरा था। अंजन को लगा कि वह अकेला ही आया है। पर उसे इस बात पर यकीन नहीं हो रहा था। तेज़ी से छत से उतरकर नीचे आ गया। एक दीवार के पीछे छिप गया।

कुछ ही समय में वह आदमी फैक्ट्री के आहते में था। उसने अपना फोन निकाला और अंजन को कॉल किया।
फोन उठाकर अंजन ने उससे बात की। उसे फैक्ट्री के पिछले हिस्से में आने को कहा। उसे लग रहा था कि यह एक चाल है। वह आदमी ‌अकेला नहीं आया है। उससे बात करके वह आदमी पिछले हिस्से की तरफ चला गया। अंजन भागकर फिर छत पर चढ़ गया। उसने देखा कि कार का पिछला दरवाज़ा खुला। एक अधेड़ आदमी नीचे उतरा। वह फोन पर किसी से बात कर रहा था। फोन काटकर वह फैक्ट्री की तरफ बढ़ा। उसे सारा मामला समझ आ गया। वह नागेश गुप्ता था। वह उसी आदमी से बात कर रहा था। वह तेज़ी से अपना दिमाग दौड़ाने लगा।
वह भागकर छत के दूसरी तरफ गया। यहाँ पत्थर के कुछ स्लैब एक के ऊपर एक रखे हुए थे। उसने अंदाज़ लगाया कि वह यहाँ से सबसे ऊपर वाले स्लैब पर कूद सकता है। ऐसा करके वह जल्दी फैक्ट्री के पिछले हिस्से में पहुँच जाएगा। वह ऊपर से उस स्लैब पर कूदा। उसके बाद स्लैब के नीचे उतरा और भागकर फैक्ट्री के पीछे पहुँच गया।
वह उस आदमी के पास पहुँचा। उसे आया देखकर वह आदमी इधर उधर देखने लगा। अंजन ने कहा,
"किसे देख रहे हो ?"
यह सुनकर वह आदमी घबरा गया। अंजन चीते की फुर्ती से उस पर लपका। उसे गर्दन से पकड़ लिया। उसके पास एक छोटा सा चाकू था। उससे उस आदमी का गला काट दिया। उसके बाद उसकी लाश झाड़ियों में छिपाकर खुद भी छिप गया।
कुछ ही देर में नागेश गुप्ता वहाँ पहुँच गया। उसके हाथ में गन थी। लेकिन उसे वहाँ ना तो अपना आदमी दिखाई पड़ा और ना ही अंजन। गन लेकर वह सीधे कदमों से आगे बढ़ा। उसे झाड़ियों के पीछे से खून की धार निकलती हुई दिखाई दी। वह समझ गया कि खतरा है। जैसे ही वह भागने के लिए घूमा अंजन की ज़ोरदार लात उसे पड़ी। वह गिर पड़ा। गन भी छिटक कर दूर गिर गई। जब तक वह कुछ समझता अंजन उसकी छाती पर चढ़कर बैठ गया। उसने उसके सर पर गन लगा दी। अंजन ने उससे कहा,
"मुझे मारना चाहते हो। पहले अश्विन राहाणे के ज़रिए मुझे फंसाकर पॉल को मुझे मारने भेजा था। अब उस आदमी के ज़रिए मुझे फंसाना चाहते थे। लेकिन तुम्हारा खेल मैं समझ गया था। मैं तुम्हारे जाल में नहीं फंसा। लेकिन तुम मेरे जाल में फंस गए।"
अंजन ने बिना देर किए माथे के बीच में गोली मार दी। नागेश गुप्ता मर गया। अंजन ने नागेश की जेब से उसका फोन निकाला।‌ उससे उसकी लाश का एक वीडियो बनाया। फिर उसका फोन लेकर वहाँ से चला गया। वह तेज़ी से भागते हुए फैक्ट्री के अगले हिस्से में आया। वह एक पत्थर पर बैठकर नागेश गुप्ता का फोन बजने का इंतज़ार करने लगा। उसे पता था कि अजय मोहते यह जानने की कोशिश करेगा कि नागेश गुप्ता ने उसे मारा या नहीं।‌
उसका अंदाज़ा सही था। करीब पंद्रह मिनट के बाद ही नागेश गुप्ता का फोन बजा। अंजन ने कॉल रिसीव कर ली। उधर से अजय मोहते के आदमी की आवाज़ आई।

वह पूँछ रहा था कि अंजन का काम तमाम हुआ कि नहीं। अंजन ने कहा,
"अपने आका अजय मोहते को कह देना कि अंजन को मारना आसान नहीं है।"
बदली हुई आवाज़ सुनकर उस आदमी ने कहा,
"कौन हो तुम ? नागेश कहाँ है ?"
"अभी एक वीडियो आएगा। साथ में एक मैसेज भी। अपने आका को दिखा देना।"
अंजन ने फोन काट दिया। नागेश गुप्ता की लाश का वीडियो एक मैसेज के साथ भेज दिया। उसके बाद उसने नागेश गुप्ता के फोन का सिम निकाल कर बर्बाद कर दिया। फोन को पत्थर से कुचल कर तोड़ दिया।
अपना काम करने के बाद अंजन भागकर मुख्य सड़क पर उस जगह आया जहाँ उसकी कार खड़ी थी। वह उसमें बैठकर चला गया।

अजय मोहते के आदमी ने अंजन का भेजा हुआ वीडियो और मैसेज उसे दिखाया। नागेश गुप्ता की लाश देखकर अजय मोहते के माथे पर पसीना आ गया। उसने अंजन का मैसेज पढ़ा।
'वन मंत्री श्रीमान अजय मोहते नमस्कार....आप इतने दिनों में मुझे पहचान नहीं पाए....किन लोगों को भेजा था मुझे मारने के लिए....खैर अब इतना जान लीजिए कि मुझे मारना आसान नहीं है..... इसलिए मेरी बात सुनिए....दिए हुए नंबर पर बात कीजिएगा....'
अजय मोहते ने मैसेज में लिखा नंबर अपने मोबाइल पर फीड कर लिया। उसके बाद सामने सर झुकाए खड़े अपने आदमी को घूरकर देखा। फिर उसका फोन उसके मुंह पर फेंक दिया।

रिस्की लव - 47

एसीपी सत्यपाल वागले चाहता था कि अंजन सिंगापुर पुलिस की जगह उसके हाथ लगे। इसके लिए उसने अपनी कोशिशें तेज़ कर दी थीं। उसने अपनी टीम को कहा था कि सिंगापुर के अलग अलग हिस्सों में जाकर अंजन के बारे में पता करें।
इंस्पेक्टर नदीम अंसारी उसकी टीम में शामिल था। वह सिंगापुर के विभिन्न डिस्को, पब्स, रेस्टोरेंट्स में अंजन के बारे में पता करते हुए घूम रहा था। लेकिन कहीं से भी कुछ पता नहीं चला था। उसने दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर भी अंजन के बारे में पता करने की कोशिश की। एक ज्वैलरी शॉप से उसे अच्छी खबर मिली। उस ज्वैलरी शॉप के एक कर्मचारी ने अंजन की तस्वीर देखकर बताया कि उसे ऐसा लगता है कि शायद वह आदमी उस ज्वैलरी शॉप में आया था। उसके पास कुछ सामान था जिसे वह बेचना चाहता था। उस कर्मचारी ने नदीम अंसारी से कहा कि वह उसके मैनेजर से बात करे। वह सही तरह से बता सकते हैं। क्योंकी जब कोई कुछ बेचने आता है तो बिना मैनेजर की अनुमति के हम उसका सामान नहीं खरीदते हैं।
नदीम अंसारी फौरन मैनेजर से मिला। उसे अंजन की तस्वीर दिखाते हुए उससे कहा,
"यह आदमी आपकी ज्वैलरी शॉप में कुछ कीमती सामान बेचने आया था। क्या आप उसके बारे में कुछ बता सकते हैं ?"
मैनेजर ने ध्यान से अंजन की तस्वीर को देखा।

पर नदीम की बात का जवाब देने की जगह उसने कहा,
"आप कौन हैं ? यह सारी पूँछताछ क्यों कर रहे हैं ?"
नदीम अंसारी ने उसे अपना आईडी कार्ड दिखाते हुए कहा,
"मैं मुंबई पुलिस में इंस्पेक्टर नदीम अंसारी हूँ। यहाँ हमारी टीम अंजन विश्वकर्मा नाम के एक अपराधी को तलाश कर रही है। जिसकी तस्वीर मैंने आपको दिखाई है।"
मैनेजर ने एक बार फिर तस्वीर को ध्यान से देखकर कहा,
"यह आदमी हमारी शॉप पर आया था। लेकिन इसने अपना नाम जेम्स फर्नांडिस बताया था।"
"मैंने आपको बताया था कि वह अपराधी है। इसलिए नाम बदल लेना कोई बड़ी बात नहीं है। आपने उसका सामान खरीदा था।"
"हाँ.... हमने जांच करके देखा था। खरा माल था।‌ हमने उसकी उचित कीमत दे दी।"
"उसके पास सामान की रसीद थी।"

इस सवाल पर मैनेजर चुप हो गया। नदीम अंसारी ने कहा,
"आप मुझे उसकी सीसीटीवी फुटेज दिला सकते हैं।"
मैनेजर तैयार हो गया। सीसीटीवी फुटेज लेकर नदीम अंसारी एसीपी सत्यपाल वागले के सामने हाजिर हुआ।
एसीपी सत्यपाल वागले ने सीसीटीवी फुटेज देखी। उसके बाद नदीम अंसारी की तारीफ करते हुए कहा,
"वेलडन..…यह ज्वैलरी शॉप किस इलाके में है ?"
"सर सिंगापुर सिटी में ही है।"
"तो फिर अंजन को इस इलाके में ही खोजो।"
"ठीक है सर.... लेकिन हमें सिंगापुर पुलिस की मदद भी लेनी पड़ेगी।"
"अभी अपने स्तर पर काम करो। जब ज़रूरत होगी तो उनकी मदद भी लेंगे।"
इंस्पेक्टर नदीम अंसारी चला गया। एसीपी सत्यपाल वागले को उसके सूत्रों से पता चला था कि किसी नागेश गुप्ता को अंजन को मारने की सुपारी दी गई है। इस खबर के बाद उसने अपने आदमी से नागेश गुप्ता के बारे में पता करने को कहा था। उसके आदमी ने ईमेल के ज़रिए उसे नागेश गुप्ता के बारे में कुछ अहम जानकारियां भेजी थीं। इंस्पेक्टर नदीम अंसारी के जाने के बाद एसीपी सत्यपाल वागले ईमेल देखने लगा।
ईमेल में नागेश गुप्ता की एक तस्वीर के साथ कुछ बातें लिखी हुई थीं। नागेश गुप्ता उत्तर प्रदेश का रहने वाला था।‌ छोटी उम्र में ही उसने अपराध करने शुरू कर दिए थे। लेकिन बीस साल की उम्र में अपने पहले कत्ल के बाद उसने पैसे लेकर कत्ल करने को अपना रोज़गार बना लिया। इस काम में इतनी महारत हासिल की कि उत्तर प्रदेश से निकल कर मुंबई आ गया। अपनी लाइफ स्टाइल के कारण उसका बड़ी बड़ी पार्टियों ‌में आना जाना था।

पुरानी फैक्ट्री के पास पुलिस की गाड़ी आकर रुकी। एक आदमी भागकर उसके पास गया। उसने पुलिस को सूचना दी थी कि फैक्ट्री में दो लाशें पड़ी हैं। इंस्पेक्टर चेंग ली उसके साथ ‌उस जगह पर पहुँचा जहाँ दोनों लाशें थीं। कुछ देर में फौरेंसिक टीम भी वहाँ पहुँच गई। वह अपना काम करने लगे। इंस्पेक्टर चैंग ली उस आदमी को एक तरफ ले जाकर पूँछताछ करने लगा।
उस आदमी ने बताया कि वह कहीं जा रहा था। इस रास्ते में नेचर कॉल के लिए रुका।

फिर कुछ देर यहाँ चहलकदमी करने लगा। टहलते हुए फैक्ट्री तक आया। पुरानी को देखने लगा। जब पिछले हिस्से में पहुँचा तो एक लाश दिखाई दी। कुछ दूर झाड़ियों के पास खून दिखा। वहाँ जाकर देखा तो उसके पीछे भी लाश थी। पहले तो वह घबरा गया और भागने के बारे में सोचने लगा। फिर बाद में उसे लगा कि पुलिस को खबर देना ठीक रहेगा।
उस आदमी के जाने के बाद इंस्पेक्टर चैंग ली ने दोनों लाशों को ध्यान से देखा। उनमें से एक भारतीय था। उसे सूचना मिली थी कि भारत से पुलिस की एक टीम किसी अपराधी को तलाश करने आई है। उसे लगा कि इस आदमी का संबंध उस अपराधी से हो सकता है।‌
उसे पता था कि उस अपराधी का केस की जांच सिंगापुर पुलिस की तरफ से सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज को सौंपी गई है। उसने राजेंद्र सेल्वाराज को फोन मिलाया। उसे सारी बात की खबर दी। राजेंद्र सेल्वाराज ने उसे सारे डीटेल्स भेजने को कहा।

अंजन का मोबाइल उसके सामने रखा था। वह अजय मोहते के फोन ‌का इंतज़ार कर रहा था।‌ वह जानता था कि नागेश गुप्ता की लाश का वीडियो देखकर अजय मोहते परेशान हो गया होगा। मैसेज में लिखे उसके नंबर पर फोन ज़रूर करेगा।
उसने भी सोच लिया था कि उसे कैसे और क्या बात करनी है। वह अजय मोहते से इस तरह बात करना चाहता था कि उसे यह लगे कि अंजन बेखौफ है। इसलिए उसने बिना डरे नागेश गुप्ता का भी कत्ल कर दिया।
उसके फोन की घंटी बजी। वह समझ गया कि यह फोन अजय मोहते का ही है। फोन उठाकर उसने कहा,
"नमस्कार वन मंत्री जी....."
अजय मोहते ने इधर उधर किए बिना सीधा सवाल किया,
"क्या बात करनी है तुम्हें।"
अंजन ने पहले जैसे स्वर में ही जवाब दिया,
"यही वन मंत्री जी कि आप मुझे मरवाने के लिए बेकार की मेहनत मत कीजिए। वीडियो देखा होगा आपने। आपके उस नागेश मेहता का क्या हाल हुआ। इसलिए यह सब छोड़कर वह कीजिए जो आपके फायदे में हो।"
दूसरी तरफ कुछ सेकेंड्स ‌के लिए शांति रही। फिर अजय मोहते ने कहा,
"मेरा फायदा किस चीज़ में है ?"
"मेरा साथ देने में आपका फायदा है।"
"अगर साथ ना दिया तो।"
अजय मोहते बड़े शांत तरीके से बात कर रहा था। वह दिखाना चाहता था कि जैसे अपने आदमी के मारे जाने से उसे कोई फर्क ही ना पड़ा हो। अंजन जानता था कि अजय मोहते भले ही कुछ भी दिखाने का प्रयास करे लेकिन अंदर से वह डरा हुआ है। उसने अपना वही अंदाज़ बरकरार रखते हुए कहा,
"वन मंत्री महोदय आप अच्छी तरह से जानते हैं कि ऐसा होने पर मैं भी कोई लिहाज़ नहीं करूँगा। मेरा भी मुंह खुलेगा।"
दूसरी तरफ से अजय मोहते इस बार कुछ कड़क स्वर में बोला,
"धमकी दे रहे हो....मत भूलो कि मैं अभी भी सरकार में मंत्री हूँ और तुम अब कुछ नहीं रह गए हो।"
अंजन पहले तो ज़ोर से हंसा। उसके बाद ‌बोला,
"वन मंत्री जी इसे धमकी समझिए या चेतावनी।

लेकिन मेरे पास आपके बारे में पुलिस से बातचीत करने के लिए बहुत कुछ है। आपने सही कहा मैं कुछ नहीं बचा। पर डूबते हुए अगर मैंने आपका कॉलर पकड़ लिया तो आपका भी सबकुछ डूब जाएगा।"
अजय मोहते ने गुस्से से कहा,
"दो कौड़ी का गुंडा मुझे धमकी दे रहा है।"
इस बार अंजन ने भी गुस्से से कहा,
"अजय मोहते....इस दो कौड़ी के गुंडे के साथ कई शामें शराब पीते हुए बिताई हैं। मेरे दम पर बहुत ऐश भी किया है। माल भी बनाया है। अगर बात निकलेगी तो बहुत दूर तक जाएगी।"
कुछ क्षण दोनों लोग चुप रहे। अंजन ने कहा,
"अजय मोहते मेरी तुमसे कोई दुश्मनी नहीं है। बस मुझे सिंगापुर से निकलने में मदद कर दो। फिर मैं कभी तुम्हारे रास्ते में नहीं आऊंँगा। तुम भी निश्चिंत रहना।"
अजय मोहते कुछ नरमी के साथ बोला,
"कहाँ जाना चाहते ‌हो ?"
"थाईलैंड जाना ‌है मुझे। अगर सिंगापुर से सुरक्षित निकल गया तो पुलिस के हाथ नहीं आऊँगा।"
कुछ रुक कर अजय मोहते ने कहा,
"ठीक है देखता हूँ...."
"वन मंत्री जी मुझे मरवाने के लिए आदमी भेजने की जगह मेरी यह मदद कर दीजिए।"
अजय मोहते ने उस तरफ से फोन काट दिया।

फोन काटने के बाद अजय मोहते का चेहरा एकदम लाल हो गया था। अंजन ने उसे खुले शब्दों में धमकी दी थी। वह उसे धमका कर अपना काम करवाना चाहता था। यह बात अजय मोहते से बर्दाश्त नहीं हो रही थी।
लेकिन वह भी उसके सामने हार नहीं मानना चाहता था। उसने अपना दिमाग दौड़ाना शुरू किया। वह कुछ ऐसा करना चाहता था कि अंजन पुलिस के हाथ ना आए पर वह उसे उसकी उद्दंडता की सज़ा दे सके।
वह उठकर कमरे में इधर से उधर चक्कर लगाने लगा। कुछ देर में उसके दिमाग में एक बात आई। उसके चेहरे पर मुस्कान खिल गई। उसने कहा,
"अंजन विश्वकर्मा तुम मुझे अपने इशारों पर नचाना चाहते हो। अब मैं तुम्हें ऐसी मात दूँगा कि याद रखोगे।"
उसने अपना फोन उठाया और एक नंबर मिलाया।

रिस्की लव - 48

सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज इंस्पेक्टर चैंग ली द्वारा भेजी गई जानकारी लेकर एसीपी सत्यपाल वागले के पास गया। उसे तस्वीरें दिखाकर बोला,
"इन दोनों की लाश शहर के बाहरी हिस्से में एक पुरानी फैक्ट्री के पिछले हिस्से में मिली हैं। एक तो नेटिव है। लेकिन दूसरा भारतीय लग रहा है। क्या आप इसे जानते हैं ?"
नागेश की लाश की तस्वीर देखने के बाद एसीपी सत्यपाल वागले ईमेल में मिली तस्वीर को याद करने लगा। ईमेल से मिली तस्वीर कुछ साल पुरानी थी। लेकिन लाश की शक्ल से मिल रही थी। एसीपी सत्यपाल वागले ने कहा,
"मुझे खबर मिली थी कि भारत में कुछ लोग नहीं चाहते हैं कि अंजन पुलिस के हाथ लगे। उन्होंने अंजन को मरवाने की सुपारी दी थी। जिस आदमी को सुपारी दी गई थी उसका नाम नागेश गुप्ता है। मुझे ऐसा लगता है कि यह लाश नागेश गुप्ता की है।

"
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज को एसीपी सत्यपाल वागले का यह दोस्ताना व्यवहार अच्छा लगा। उसने कहा,
"थैंक्यू एसीपी सत्यपाल वागले। आपने हमारी मदद की। आपको भी जिस तरह की मदद की ज़रूरत हो हम करने को तैयार हैं। अंजन हम दोनों ही मुल्क का अपराधी है।"
कुछ सोचकर एसीपी सत्यपाल वागले ने कहा,
"सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज एक और मदद की है हमने आपकी। मेरी टीम के इंस्पेक्टर नदीम अंसारी ने अंजन के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई हैं।"
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने कहा,
"यह तो बहुत अच्छी बात है। आप जानकारी हमारे साथ साझा कीजिए। हम अंजन को पकड़ने में मदद करेंगे।"
एसीपी सत्यपाल वागले ने सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज को वह सारी बात बता दी जो इंस्पेक्टर नदीम अंसारी ने पता की थीं। उसके बाद उसने कहा,
"सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज जिस ज्वैलरी शॉप में अंजन गया था वह सिंगापुर सिटी में बही है। आपके हिसाब से फैक्ट्री के बाहरी हिस्से में है। इसका मतलब अंजन भी सिंगापुर सिटी के आसपास ही है।"
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने कहा,
"एसीपी सत्यपाल वागले नागेश का कत्ल अंजन ने ही किया होगा। इसका मतलब है कि उसे खबर मिल गई है कि कुछ लोग उसे जान से मारना चाहते हैं।"
"बिल्कुल सही अनुमान लगाया आपने। वह कीमती सामान बेचकर पैसे जुटा रहा है। इसका मतलब है कि वह सिंगापुर से बाहर निकलने की तैयारी कर रहा है।"
"अंजन जो भी करे एसीपी सत्यपाल वागले पर हमारे हाथों से बचकर भाग नहीं पाएगा।"
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने एसीपी सत्यपाल वागले से हाथ मिलाते हुए कहा,
"थैंक्यू फॉर कोऑपरेशन। हम एक दूसरे की मदद करेंगे तब ही उसे पकड़ पाएंगे।"
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज चला गया। एसीपी सत्यपाल वागले कमरे में टहलते हुए कुछ सोचने लगा।

अंजन आश्वस्त था कि अजय मोहते उसकी सहायता ज़रूर करेगा। वह जल्द से जल्द थाईलैंड जाना चाहता था ताकी उसकी ज़िंदगी आगे बढ़ सके। उसने सोम आर्य से अब तक कोई संपर्क नहीं किया था। वह सीधा थाईलैंड पहुँचकर उससे मिलना चाहता था। इसलिए अब उससे और इंतज़ार नहीं हो रहा था।
सबकुछ खोकर उसके सीने में एक आग जल रही थी। यह आग तभी बुझ सकती थी जब वह फिर से वही मुकाम हासिल कर ले जो उसने खोया है। उसे अपने ऊपर यकीन था कि अगर उसे थोड़ी सी भी मदद मिल गई तो वह अपना मुकाम हासिल कर लेगा। उसकी मदद केवल सोम आर्य ही कर सकता था।
वह खुश था कि उसने सोम आर्य के साथ पार्टनरशिप की थी। उसका यह फैसला आज अंधेरे में उसके लिए उजाले की एक किरण था। कुछ एहसान भी थे जो उसने सोम आर्य पर किए थे। अब वह उन्हीं एहसानों का बदला चाहता था।

उसने तय कर लिया था कि सोम आर्य से मदद मिलने के बाद वह कौन सा रास्ता होगा जिस पर चलकर वह अपना मुकाम हासिल करेगा। सही गलत का भेद उसके लिए कभी रहा ही नहीं था। उसे बस तेज़ क़दमों से चलकर अपनी मंज़िल तक पहुँचना था।
वह तरुण काला के फिशिंग बिज़नेस की आड़ में मानव तस्करी करता था। उसने अपना खोया हुआ मुकाम पाने के लिए यही राह चुनी थी। इस बिज़नेस के बारे में उसके पास अनुभव और जान पहचान दोनों थी। वह उसका प्रयोग करके खूब पैसा कमाना चाहता था।
उसने तय कर लिया था कि अपना सबकुछ पा लेने के बाद उन लोगों से हिसाब चुकता करेगा जिन्होंने इस समय में उसे धोखा दिया था।
उसने अपने लिए एक बड़ा सा पेग बनाया और इत्मीनान से बैठकर पीने लगा। इस समय वह अच्छे मूड में था। शराब पीते हुए उसे मीरा की याद आई। उसके साथ जब वह पहली बार मिला था तो उसके लिए एक आइस टी ऑर्डर की थी। मीरा अपनी आइस टी पी रही थी और वह उसे निहार रहा था।

उसका मन हुआ कि वह मीरा से बात करे। जबसे वह लंदन वापस गई थी सिर्फ एक बार ही उससे बात हुई थी। उसके बाद ना तो मीरा ने उसे फोन किया और ना ही वह उसे फोन कर पाया। उसने अपना फोन उठाकर लंदन मीरा को कॉल लगाई। कुछ देर रिंग होने के बाद मीरा ने फोन उठाया। उसने बहुत धीमे स्वर में हैलो कहा। अंजन को उसका इस तरह बात करना ठीक नहीं लगा। उसने मीरा से पूँछा की क्या उसकी तबीयत ठीक नहीं है। मीरा ने उसे बताया कि उसे बुखार है। लेकिन घबराने की बात नहीं है। उसने डॉक्टर को दिखा लिया है।‌ दवाएं ले रही है। बाकी सब ठीक है। वह उस दिन का इंतज़ार कर रही है जब वह उसके पास लंदन आएगा।
मीरा ने फोन रख दिया। उसने बार बार यह बात तो की थी कि उसे बस बुखार है जो ठीक हो जाएगा। लेकिन अंजन को कुछ ठीक नहीं लग रहा था। वह परेशान हो गया था। मीरा से मिलने के लिए तड़प उठा था। पर इस समय वह उसके पास जाने की स्थिति में नहींं था।

अजय मोहते ने अपने एक आदमी को फोन मिलाया था। वह आदमी उसके कहने पर छोटे छोटे काम करता था। अजय मोहते जो काम उससे करवाना चाहता था वह अच्छी ‌तरह से कर सकता था।
उसके आदमी ने फोन उठाया तो उसने आदेश दिया कि वह अंजन के जासूस एंथनी को उठाकर लाए। उसने अंजन के मुंह से कई बार उसका नाम सुना था। अंजन ने उसे बताया था कि जब भी उसे किसी की जासूसी करवानी होती है तो वह एंथनी को ही यह काम सौंपता है।
अजय मोहते को यह पता था कि अपने ऊपर हमला होने के बाद अंजन ने एंथनी को ही हमलावर के बारे में पता करने के लिए बुलाया था। अब अजय मोहते चाहता था कि एंथनी से उस हमले के बारे में पता कर अंजन के दुश्मनों को अपने साथ मिला लिया जाए।

निर्भय और मानवी का पता अंजन को बताने के बाद एंथनी अपने पैसे लेकर कुछ दिनों के लिए हिमाचल प्रदेश अपने घर चला गया था।

वहाँ कुछ दिन ठहर कर वह वापस लौटा तो उसे अंजन के बारे में पता चला। वह मुंबई से फरार था और पुलिस उसके पीछे थी।
एंथनी जब तक किसी के लिए काम करता था तब तक ही उससे मतलब रखता था। उसका काम खत्म हो जाने के बाद उस शख्स के साथ क्या होता है उससे उसे कोई फर्क नहीं पड़ता था। इसलिए अंजन के बारे में जानकर भी उसे कोई फर्क नहीं पड़ा था।
इस समय वह एक नए क्लाइंट के केस पर काम कर रहा था। वह अपने काम के लिए अपने घर से निकल ही रहा था कि कुछ लोग जबरन उसके घर में घुस गए। एक ने उसके सर पर गन रखकर कहा,
"हमारे साथ चलो।"
एंथनी ने बिना घबराहट दिखाए बड़ी शांति के साथ कहा,
"कौन हो तुम लोग ? कहाँ ले जाना चाहते हो ?"
जिस आदमी ने गन तान रखी थी वह बोला,
"चुपचाप चलो। अपने आप पता चल जाएगा।"
एंथनी को उनके साथ जाना ही ठीक लगा। वह बिना किसी प्रतिरोध के उनके साथ चला गया।
उसे एक वैन में बैठा कर ले जाया जा रहा था। उसने एक दो बार जानने की कोशिश भी की पर किसी ने उसे कुछ नहीं बताया।

वैन कुछ देर बाद अजय मोहते के फार्म हाउस में घुसी। अजय मोहते एंथनी के आने की राह देख रहा था। उसके आदमी ने फोन करके उसे बता दिया था कि वह एंथनी को लेकर आ रहे हैं।
एंथनी को वैन से उतारा गया। उसने आसपास देखा और मुस्कुरा दिया। वह पहचान गया कि यह अजय मोहते का फार्म हाउस है। एक बार वह अंजन से मिलने यहाँ आ चुका था।
उसे अजय मोहते के पास ले जाया गया। अजय मोहते को देखकर एंथनी ने मुस्कुरा कर कहा,
"अब मंत्रियों को भी मेरे जैसे अदना इंसान की आवश्यकता पड़ने लगी।"
अजय मोहते ने उसे घूरकर देखा। फिर कहा,
"तुम अंजन के लिए जासूसी करते थे।"
"तो आपको मुझसे जासूसी करवानी है। इसके लिए इन आदमियों को भेजकर अगवा कराने की क्या ज़रूरत थी। वैसे मैं एक बार में एक ही केस लेता हूँ। इस समय मैं एक केस पर काम कर रहा हूँ।"
अजय मोहते ने डांटते हुए कहा,
"चुप करो... बहुत बोलते हो तुम। मुझे तुमसे अंजन के बारे में जानना है।"
फार्म हाउस में आते ही एंथनी जान गया था कि उसे अंजन के बारे में जानने के लिए बुलाया गया है। वह जानबूझकर इधर उधर की बातें कर रहा था।
अजय मोहते की बात सुनकर वह मुस्करा दिया।

रिस्की लव - 49

एंथनी अजय मोहते की बात सुनकर मुस्कुरा रहा था। उसे इस तरह मुस्कुराते हुए देखकर अजय मोहते को गुस्सा आ रहा था। वह सोच रहा था कि किस जोकर को अंजन ने अपना जासूस बनाया था। उसने गुस्से में कहा,
"दांत क्या निकाल रहे हो ?"
एंथनी ने उसी तरह मुस्कुराते हुए कहा,
"सोच रहा था कि राज्य सरकार में इतने बड़े मंत्री को आज मुझसे पूँछताछ करने की जरूरत पड़ गई। वैसे किस अंजन की बात कर रहे हैं आप ? मैं जासूस हूँ। कई लोगों के लिए काम करता हूँ। कई लोगों से मुलाकात होती है। सबके नाम याद नहीं रहते हैं।"
अजय मोहते ने उसे घूरकर देखा।

फिर गुस्से में कहा,
"मेरे आदमी याद दिला देंगे। अच्छा होगा कि तुम ही याद कर लो।"
"सर क्यों अपने आदमियों को परेशान करेंगे। वैसे मैं सोच रहा था कि अंजन से आप जैसे बड़े आदमी को क्या खतरा हो सकता है। मेरे जैसे अदना जासूस को बुलवा कर आप उसके बारे में जानना चाहते हैं।"
एंथनी की इस बात ने अजय मोहते के गुस्से की आग को और अधिक भड़का दिया। वह उठकर खड़ा हुआ और एंथनी को एक थप्पड़ जड़ कर बोला,
"बकवास मत करो। मुझे बताओ कि अंजन विश्वकर्मा पर जो हमला हुआ था वह किसने करवाया था ?"
एंथनी ने उसी तरह से जवाब दिया,
"थप्पड़ से यह तो समझ आ गया कि आप बहुत परेशान हैं। लेकिन मैं नहीं जानता हूँ कि अंजन विश्वकर्मा पर हमला किसने करवाया।"
"झूठ मत बोलो। अंजन ने यह पता करने का काम तुम्हें सौंपा था।"
"मैं अपने क्लाइंट की जानकारी किसी और को नहीं देता हूँ।"
अजय मोहते को समझ आ गया था जिसे वह जोकर समझ रहा था वह बहुत ही घाघ है। उससे आसानी से कुछ पता नहीं किया जा सकता है। उसने नरमी के साथ कहा,
"देखो यह जानना बहुत ज़रूरी है। मेरे लिए भी और अंजन के लिए भी। तुम्हें पता है कि अंजन मुश्किल में है। मैं उसकी मदद करना चाहता हूँ।"
एंथनी एक बार फिर मुस्कुराने लगा। वह बड़ी अजीब तरह से अजय मोहते को देख रहा था। उसने कहा,
"आप अंजन विश्वकर्मा की मदद करेंगे ?"
"हाँ...."
"कैसे ? आपको पता है कि वह कहाँ है ?"
अजय मोहते इस सवाल पर कुछ सकपका गया। उसने कहा,
"हाँ मेरी बात अंजन से हुई थी।"
एंथनी हंसा। अजय मोहते उसकी इस हंसी का कारण नहीं समझ पाया। उसने कहा,
"हंसने की क्या बात है ?"
"मैं सोच रहा था कि जब आप अंजन के संपर्क में हैं तो फिर मुझे यहाँ बुलाने की तकलीफ क्यों की। मैं जब कोई केस पूरा करता हूँ तो फईनल रिपोर्ट देकर ही अपनी फीस लेता हूँ। अंजन को मैंने फाइनल रिपोर्ट दे दी थी। आप उससे पूँछ सकते हैं कि हमला करवाने वाला कौन था।"
अजय मोहते कुछ देर तक उसके चेहरे को देखता रहा। वह सोच रहा था कि एंथनी बहुत ही चालाक इंसान है। वह आसानी से हाथ आ गया है। पर बात इतनी आसानी से नहीं मानेगा। अजय मोहते को अपनी तरफ घूरते देखकर एंथनी ने कहा,
"मतलब यह है कि ज़रूरत आपकी है। मैं फीस लेकर अपने क्लाइंट्स के लिए काम करता हूँ। आप मेरी फीस देकर मेरे क्लाइंट बन सकते हैं।"
अजय मोहते ने कहा,
"मुझसे सौदेबाज़ी करना चाहते हो।"
"नहीं सीधा सीधा लेनदेन। मेरी जानकारी की कीमत चुका दीजिए। मैं जानकारी आपको दे दूँगा।"
इस बार अजय मोहते हंसते हुए बोला,
"मैं अपने आदमियों पर छोड़ दूँ तो सारी जानकारी बिल्कुल मुफ्त मिल जाएगी।"
"आप तो धमकी देने लगे। पर क्यों कुछ पैसों के लिए अपनी मुसीबत बढ़ाना चाहते हैं। आपके आदमियों के हाथों अगर मैं मारा गया तो मेरी लाश को ठिकाने लगाने का झंझट। फिर जब मेरी तलाश शुरू होगी तो तार आपसे जुड़ेंगे।

वैसे भी वन विभाग की जमीन अंजन को दिलवाने के मामले में भी आपका नाम जुड़ रहा है। इतना पैसा कमाया है आपने। थोड़ा मेरी जानकारी के बदले में दे दीजिए।"
उसका इस तरह धमकी देना अजय मोहते को बहुत बुरा लगा। उसने कहा,
"यह फार्म हाउस और इसके आसपास का बड़ा हिस्सा मेरी संपत्ति है। एक गोली तुम्हारे भेजे में जाएगी और उसके बाद तुम मेरी प्रॉपर्टी के किसी हिस्से में ज़मीन के नीचे दबे होंगे। कोई नहीं जान पाएगा।"
"आपको लगता है कि इतने बड़े और चालाक मंत्री को मैं खेल खेल में धमकी दूँगा। आप मुझे मारकर गाड़ सकते हैं लेकिन अपने आप को बचाना मुश्किल हो जाएगा। आपके आदमी मुझे लेकर जब घर से निकले थे तो उनकी तस्वीर सामने की बिल्डिंग में लगे सीसीटीवी कैमरे में आ गई होगी। फिर जब मैं फार्म हाउस के अंदर आ रहा था तो मैंने चुपचाप लास्ट कॉल वाले नंबर पर मिस कॉल दिया था। वह नंबर उस क्लाइंट का है जिसका बहुत ज़रूरी केस मेरे पास है‌। उस मिस्ड कॉल की लोकेशन का पता आपका फार्म हाउस ही होगा।"
अजय मोहते ने कहा,
"देखने में बेवकूफ लगते हो। पर अक्लमंद हो। क्या चाहिए तुम्हें।"
"सर आप जैसे समझदार इंसान से मुझे यही उम्मीद थी। पाँच लाख रुपए। आप पैसे दीजिएगा और मैं जानकारी।"
अजय मोहते ने कुछ सोचा। उसके बाद बोला,
"तुम्हारी जानकारी गलत हुई तो ?"
"अभी आपने ही मुझे समझदार कहा। फिर मैं ऐसी बेवकूफी क्यों करूँगा जो मेरे लिए घातक हो।"
अजय मोहते ने कहा,
"ठीक है..... पैसे मिल जाएंगे। अब बताओ।"
"ऐसे नहीं। लेन देन एक साथ होगा। मैं पैसे लूँगा और उसी समय जानकारी दूँगा।"
"ठीक है....ठहरो मैं कुछ देर में आता हूँ।"

अजय मोहते सीढियां चढ़कर ऊपर चला गया।‌ ऊपर एक कमरे में जाकर उसने दरवाज़ा बंद कर लिया। उसके बाद एक कबर्ड ‌खोलकर उसमें एक बटन दबाया। बटन दबाते ही कबर्ड के बगल की दीवार कुछ खिसक गई। वह एक गुप्त कमरे में चला गया। वहाँ भी एक अलमारी थी। उसे खोलकर दो हज़ार के नोटों की कुछ गड्डियां एक बैग में डालीं। फिर गुप्त कमरे के बाहर निकल कर दरवाज़ा बंद कर दिया।‌ पैसे लेकर एंथनी के पास चला गया।
एंथनी ने पैसे लेकर अजय मोहते को मानवी और निर्भय के बारे में सबकुछ बता दिया।

इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने मानवी और निर्भय पर अंजन विश्वकर्मा के ऊपर जानलेवा हमला करने के आरोप में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। उसके बाद मानवी ने अपने और निर्भय की बेल के लिए अपील की थी। बड़ी मुश्किल से उनकी बेल को मंजूरी मिल पाई थी।
उनका केस मार्वल डिसूज़ा के परिचित बैकुंठ आगरकर ने लड़ा था। बैकुंठ आगरकर के पिता पहले डिसूज़ा परिवार के घर पर काम करते थे। उसकी लॉ की पढ़ाई का खर्च डिसूज़ा परिवार ने ही उठाया था। मानवी और निर्भय के अगवा होने से पहले बैकुंठ मानवी से आकर मिला था।

उसने कहा था कि अगर उसे किसी भी तरह की ज़रूरत पड़ेगी तो वह मदद के लिए तैयार है।
मानवी ने अपने और निर्भय की बेल के लिए उसे वकील चुना था।

बेल मिलने के बाद मानवी और निर्भय डिसूज़ा विला वापस आ गए थे। अब दोनों इस बात के लिए परेशान थे कि आगे क्या करें। किस तरह केस लड़ें और साबित करें कि उन पर झूठे इल्ज़ाम लगाए गए हैं। उन दोनों ने अंजन विश्वकर्मा पर हमला नहीं किया था।
निर्भय बहुत परेशान था। उसे लग रहा था कि उसका सबकुछ लुट गया। उन पर यह केस चल रहा है। अंजन इसके बावजूद भी पुलिस की गिरफ्त से बचकर बाहर भाग गया है। वह और मानवी परेशान हैं और अंजन किसी दूसरे देश में मौज कर रहा है यह सोचकर उसे बहुत तकलीफ हो रही थी।
बेल पर बाहर आने के बाद निर्भय ने सबसे पहले मीरा को फोन किया। लेकिन उसका नंबर नहीं लगा। उसे मैसेज मिला कि यह नंबर मौजूद नहीं है। मीरा की आखिरी बार जब बातचीत हुई थी तब वह उससे कह रही थी कि उसका इंतज़ाम कहीं और कर दे। उसे वहाँ डर लग रहा है। निर्भय के मन में आया कि कहीं ऐसा तो नहीं है कि वह किसी मुसीबत में हो।
उसने मीरा का इंतज़ाम अपने एक छोटे से घर में करवा दिया था। वह उस घर का इस्तेमाल नहीं करता था। अपने मैनेजर को उसने निर्देश दिया था कि मीरा को ज़रूरत पड़ने पर कुछ पैसे दे दे। उसने अपने मैनेजर को फोन किया कि शायद उसे मीरा की कोई खबर हो। मैनेजर से पता चला कि मीरा कुछ दिन पहले उससे कुछ पैसे लेकर लंदन वापस चली गई। जब निर्भय ने पूँछा कि घर की चाभी किसके पास है तो मैनेजर ने बताया कि उसने ही तो मीरा के दोस्त रमन सिंह को घर में रहने की इजाज़त दी थी।
उसके घर में मीरा का कोई दोस्त रह रहा है यह जानकर निर्भय को बहुत गुस्सा आया। पर उसने मैनेजर से कुछ कहा नहीं। बस इतना निर्देश दिया कि ना तो मीरा को और ना ही उसके दोस्त को पैसे दे। साथ में कुछ पैसे गोवा भिजवाने का भी निर्देश दिया।
वह सोच रहा था कि मीरा आखिर किस रमन सिंह को उसके घर पर ठहरा कर गई है। उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे मीरा ने उसे भी धोखा दिया है जैसे उसने अंजन को दिया था। अंजन का नाम याद आते ही एक बात उसके मन में आई। लेकिन वह उस पर यकीन नहीं कर पा रहा था।
मानवी भी परेशान थी। अभी तो उसने अपनी कुछ ज्वैलरी बेचकर बेल के लिए पैसे इकट्ठे किए थे। अब वह सोच रही थी कि आगे के लिए पैसों का इंतज़ाम कैसे किया जाए।
तभी निर्भय ने आकर उसे अपने मन की बात बताई। उसे सुनकर उसे भी यकीन नहीं हो रहा था।

रिस्की लव - 50

निर्भय के मन में जो बात आई थी उसके बारे में सुनकर मानवी सोच में पड़ गई थी। कुछ देर तक वह भी उस पर विचार करती रही। उसके बाद बोली,
"तुमको लगता है कि यह रमन सिंह अंजन है। लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है। मीरा ने उसके ऊपर हुए हमले में हमारी मदद की थी। अब वह उसकी मदद क्यों करेगी।

"
"यह बात मेरे मन में भी आई थी। मैंने इस पर बहुत सोचा। मुझे ऐसा लगता है कि अंजन ने बड़ी चालाकी से उसे इस बात का यकीन दिलाया होगा कि वह उसे अभी भी प्यार करता है। मीरा पिघल गई होगी। उसकी मदद करने को तैयार हो गई होगी।"
मानवी कुछ सोचकर बोली,
"मीरा को अपने प्यार का यकीन दिलाने के लिए अंजन उससे मिला होगा। पर उसे कैसे पता चला कि मीरा सिंगापुर में है। दूसरी बात कि वह खुद लंदन क्यों चली गई।"
"अंजन को कैसे पता चला कि मीरा सिंगापुर में है कहना कठिन है। जहाँ तक मीरा के लंदन जाने की बात है तो हो सकता है कि वह अंजन के कहने पर किसी खास काम से वहाँ गई हो।"
मानवी को निर्भय की बातों पर यकीन नहीं हो पा रहा था। निर्भय उसका संशय समझ रहा था। उसने कहा,
"मानवी मैं अभी कुछ भी यकीन से नहीं कह पा रहा हूँ। पर एक बात पर मेरे मन को पूरा यकीन है।‌ रमन सिंह कोई और नहीं अंजन है।"
मानवी एक बार फिर सोचने लगी। कुछ क्षणों के बाद वह बोली,
"चलो मैं भी तुम्हारे इस यकीन पर भरोसा कर लेती हूँ। अब यह बताओ कि तुम क्या करना चाहते हो।"
"यह सोचकर मुझे बहुत गुस्सा आ रहा है कि हमारा दुश्मन मेरे घर में मज़े से छिप कर बैठा है।"
"निर्भय गुस्से से काम नहीं चलेगा। एक बार वह हमारे हाथों बचकर निकल चुका है। उसका खामियाज़ा हमको भुगतना पड़ रहा है। इस बार एकदम सटीक वार करना है।"
"मैं ऐसा करता हूँ कि पहले यह पक्का कर लेता हूँ कि रमन सिंह ही अंजन है। मैंने सोचा है कि सिक्योरिटी गार्ड से कहूँ कि वह चुपके से रमन सिंह की तस्वीर खींच कर भेज दे। पक्का होने के बाद हम सिंगापुर पुलिस को सूचना दे देंगे।"
"जो भी करना है जल्दी करो। ऐसा ना हो कि अंजन वहाँ से निकल जाए।"
निर्भय को मानवी की बात सही लगी। तभी नौकर ने आकर सूचना दी कि कोई लोकेश कुमार उन लोगों से मिलने के लिए आया है। निर्भय और मानवी किसी लोकेश कुमार को नहीं जानते थे। उन्हें आश्चर्य हुआ कि यह कौन शख्स है जो उनसे मिलने आया है।

लोकेश कुमार अजय मोहते का विश्वासपात्र आदमी था। एंथनी से निर्भय और मानवी के बारे में पता चलते ही अजय मोहते ने गोवा में रहने वाले लोकेश कुमार से संपर्क किया। लोकेश ने मानवी और निर्भय के बारे ‌में पता किया। उसे खबर मिली की दोनों ही बेल पर छूटकर आए हैं। वह फौरन डिसूज़ा विला आ गया।
निर्भय और मानवी जब हॉल में पहुँचे तो लोकेश ने खड़े होकर उन्हें नमस्ते किया। फिर अपना परिचय दिया,
"मैं लोकेश कुमार हूँ। मैं काजू की खेती करता हूँ। उन्हें रोस्ट करके अलग स्वाद में देश और विदेश में भेजने का करोबार भी करता हूँ। इसके अलावा इंडिया पब्लिक राजनैतिक दल का सेवक भी हूँ।"
निर्भय ने उससे हाथ मिलाया और उसे बैठने को कहा। वह लोकेश कुमार के आने का कारण समझ नहीं पाया था।

लोकेश कुमार बैठने के बाद बोला,
"आप हैरान हैं कि जो कुछ मैंने बताया उससे आपका क्या लेना देना। मैं आपके पास क्यों आया हूँ।"
निर्भय ने मानवी की तरफ देखकर कहा,
"सही कहा आपने....अब आप यह बताइए कि आप यहाँ क्यों आए हैं ?"
"मुझे महाराष्ट्र सरकार के वन मंत्री अजय मोहते जी ने भेजा है।"
यह बात मानवी और निर्भय के लिए और अधिक चौंकाने वाली थी। लोकेश कुमार ने कहा,
"आप दोनों का और मंत्री जी का एक ही दुश्मन है।"
मानवी ने कहा,
"हमारा कोई दुश्मन नहीं है।"
"मानवी उर्फ जेनिफर जी अंजन विश्वकर्मा की बात कर रहा हूँ मैं।‌ वही अंजन विश्वकर्मा जिस पर जानलेवा हमला कराने का इल्ज़ाम आप लोगों पर लगा है।"
निर्भय ने बात आगे बढ़ाई,
"पहली बात तो वह केस झूठ है। फिर यदि अंजन मंत्री जी का दुश्मन है तो हम क्या कर सकते हैं।"
"बात आपके भले की है। आप अगर मंत्री जी की मदद करेंगे तो वह भी आपकी मदद करेंगे।"
निर्भय ने कहा,
"हम उनकी क्या मदद कर सकते हैं।"
लोकेश कुमार ने मुस्कुरा कर कहा,
"अब बातचीत सही राह पर आई है। अंजन विश्वकर्मा पुलिस से भागा हुआ है। उसके पास मंत्री जी की कुछ गोपनीय बातें हैं।‌ वह नहीं चाहते हैं कि अंजन विश्वकर्मा पुलिस के हाथ लगे और उनके राज़ पुलिस को बताए। अंजन विश्वकर्मा सिंगापुर में है। आप अगर उसकी किसी कमज़ोरी या किसी खास व्यक्ति के बारे में बता दें तो हम उसके ज़रिए अंजन विश्वकर्मा तक पहुँच कर उसे शांत कर सकते हैं। बदले में आपका केस हम संभल लेंगे।"
अंजन सिंगापुर में है यह सुनकर मानवी और निर्भय का शक यकीन में बदल गया था कि रमन सिंह ही अंजन है। कौशल कुमार की बात मान लेने पर उनके दो लाभ थे। एक तरफ उनके दुश्मन से बदला लेने का अच्छा मौका मिलता। दूसरा केस से बाहर निकलने का अवसर मिलता। निर्भय ने मानवी की तरफ देखा। उसने इशारे से सहमति दे दी। लेकिन निर्भय एकदम से बात आगे नहीं बढ़ाना चाहता था। उसने कहा,
"हमें यह यकीन कैसे हो कि आप अपना मतलब निकलने के बाद हमारी मदद करेंगे।"
लोकेश कुमार कुछ देर चुप रहा। उसके बाद बोला,
"विश्वास तो एक दूसरे पर करना ही पड़ेगा। आप हमारी मदद करके अपने दुश्मन से बदला ले सकेंगे। एक फायदा तो यही हो गया। मंत्री जी अपना वादा अवश्य निभाएंगे।"
निर्भय ने लोकेश कुमार को रमन सिंह और मीरा वाली बात बता दी। उसके बाद बोला,
"अब तो पूरा यकीन है कि रमन सिंह ही अंजन है। मीरा उसकी गर्लफ्रेंड है। उसने ही उसे सिंगापुर बुलाया होगा।"
लोकेश कुमार कुछ सोचकर बोला,
"आप अपनी तरफ से अंजन को इस बात की भनक ना लगने दीजिएगा कि उसके ठिकाने की भनक हमें है। हम उसे सबक सिखाएंगे। आपकी तसल्ली के लिए मैं आपकी बात मंत्री जी से करवा देता हूँ।"
लोकेश कुमार ने निर्भय की बात अजय मोहते ‌से करा दी।

अजय मोहते ने भी उससे कहा कि अंजन को किसी भी तरह से भनक ना लगने दे। साथ ही आश्वासन दिया कि वह उसकी पूरी मदद करेगा।

अंजन यह सोचकर निर्भय के घर पर रुक गया था क्योंकी उसे जानकारी थी कि उन दोनों को उस पर जानलेवा हमला करने के इल्ज़ाम में हिरासत में लिया गया है। उसे लगा था कि कुछ दिनों तक तो निर्भय केस में ही फंसा रहेगा। उसे कुछ पता नहीं चलेगा। तब तक वह यहाँ से निकल कर थाईलैंड चला जाएगा।
लेकिन अब वह परेशान हो रहा था। उसके अपने प्रयास बेकार गए थे। अजय मोहते पर उसने दबाव ज़रूर बनाया था पर वह उसकी मदद करेगा या नहीं इस बात की उम्मीद अब धूमिल पड़ रही थी।‌ वह अब चाहता था कि किसी भी तरह से सिंगापुर से निकल कर आगे की ज़िंदगी के बारे ‌में सोचे। वह छटपटा रहा था पर उसके पास कोई चारा नहीं था। उसे निर्भय के मकान में छिप कर रहना पड़ रहा था।
इसके अलावा एक और चीज़ उसे परेशान किए हुए थी। मीरा से कल फिर बात हुई थी। उसकी आवाज़ से ऐसा लग रहा था कि जैसे वह बहुत बीमार हो। उसके बार बार पूँछने पर भी वह यही कह रही थी कि कुछ खास नहीं है। थोड़ा बुखार रहता है। जल्दी ठीक हो जाएगी। अंजन ने जब वीडियो कॉल की तो उसने कॉल नहीं उठाई। स्पष्ट था कि बात गंभीर थी।
इस बात ने इंजन की परेशानी को और बढ़ा दिया था। वह बहुत बेचैन हो गया था।‌ उसका आत्मविश्वास डोलने लगा था। कुछ ना कर पाने की विवशता के चलते उसके मन में अपने लिए गुस्सा भर रहा था।

यह एक सुनसान सा इलाका था। एंथनी यहाँ अपने केस के सिलसिले में किसी से मिलने आया था। जिससे उसे मिलना था वह अभी तक नहीं आया था।
अजय मोहते से पैसे मिलने के बाद वह बहुत खुश था। जब वह अपने घर गया था तो अपनी छोटी बहन की हालत देखकर बहुत दुखी हुआ था।‌ अपने पति की मौत के बाद वह अपने दो बच्चों की परवरिश के विषय चिंतित थी। उसे पैसों की ज़रूरत थी। जिससे वह कोई कारोबार कर सके। जो पैसे उसे मिले थे उसमें से आधे उसने अपनी बहन को देने का मन बनाया था।
उसे इंतज़ार करते हुए देर हो गई थी। पर अभी तक वह आदमी नहीं आया था। उसने घड़ी देखी। दिए गए समय से बीस मिनट अधिक हो गए थे। उसे लोगों की यह बात पसंद नहीं थी। लोग समय का खयाल नहीं रखते थे। वह मन ही मन भुनभुनाया। उसने पाँच मिनट और इंतज़ार करने का फैसला किया।
एक मोटरसाइकिल एंथनी के पास आकर रुकी। जब तक वह कुछ समझता पीछे की सीट पर बैठे आदमी ने दो गोलियां चलाईंं। गोली चलाने वाले व्यक्ति ने किसी को फोन कर काम हो जाने की सूचना दी। मोटरसाइकिल तेज़ी से चली गई। एंथनी ज़मीन पर गिरा हुआ था। उसके प्राण निकल चुके थे।
अजय मोहते की आँखों में अजीब सी चमक थी। पैसे जाने का उसे उतना अफसोस नहीं था। लेकिन एंथनी ने उससे सौदेबाज़ी की थी यह बात वह सब नहीं पा रहा था।

रिस्की लव - 51

अंजन ने एक बार फिर मीरा को वीडियो कॉल की। उसने सोचा था कि जब तक मीरा कॉल उठाएगी नहीं वह फोन करता रहेगा। इससे पहले दो बार वह कॉल कर चुका था। पर मीरा ने फोन नहीं उठाया था। इस बार भी घंटी जाते देर हो गई थी। अंजन मन ही मन मना रहा था कि मीरा कॉल उठा ले। समय के साथ अंजन निराश हो रहा था। लेकिन इस बार मीरा ने कॉल उठा ली।
मीरा का चेहरा स्क्रीन पर दिखाई पड़ा। चेहरा देखकर स्पष्ट था कि मीरा की हालत बहुत गंभीर थी। कुछ देर अंजन मीरा के मुर्झाए हुए चेहरे को देखता रहा। उसकी यह हालत देखकर उसका कलेजा धक से रह गया था। बड़ी मुश्किल से खुद को संभाल कर उसने कहा,
"क्या हो गया है तुम्हें मीरा ? मुझसे कह रही थी कि मामूली बुखार है। पर तुम्हारी हालत देखकर लगता है कि बहुत सीरियस बात है। मुझे सही सही बताओ क्या हुआ है ?"
मीरा भावुक हो गई। उसकी आँखों से आंसू बहने लगे। उसे रोता हुआ देखकर अंजन को बुरा लगा। उसने कहा,
"रो मत.... मुझे बताओ क्या बात है ? मैं तुम्हारी मदद करने की कोशिश करूँगा।"
मीरा ने रोते हुए कहा,
"कोई मेरी मदद नहीं कर सकता है। बस कुछ ही दिन बचे हैं मेरे पास।"
अंजन जानने को अधीर हो उठा कि बात क्या है। उसने कहा,
"प्लीज़ मीरा बताओ कि क्या हुआ है तुम्हें ? तुम क्यों कह रही हो कि कुछ ही दिन बचे हैं।"
"मुझे पैंक्रियाज़ कैंसर है। लास्ट स्टेज है। अब मैं नहीं बचूँगी।"
यह कहते हुए वह फिर रोने लगी।‌ उसकी बात सुनकर अंजन को भी धक्का लगा। कुछ देर तक वह कुछ बोलने की स्थिति में नहीं था। मीरा ने रोते हुए कहा,
"अंजन मैंने तुम्हें धोखा दिया था। इसी बात की सज़ा भगवान ने मुझे दी है।"
उसकी बात सुनकर अंजन ने कहा,
"ऐसा मत कहो मीरा। मैं कुछ करता हूँ। तुम परेशान मत हो।"
यह कहकर अंजन ने खुद ही कॉल काट दी। उससे मीरा की तकलीफ देखी नहीं जा रही थी। इस समय वह बहुत बेबस महसूस कर रहा था। ना तो वह खुद अपनी मदद करने की स्थिति में था और ना ही मीरा का साथ दे सकता था। फिर भी फोन पर उसे झूठी तसल्ली दे रहा था कि वह उसके लिए कुछ करने का प्रयास करेगा।
आजकल ‌हताशा में उसका एक ही सहारा था शराब। वह बार काउंटर पर गया। लेकिन यहाँ भी निराशा ही हाथ लगी। उसने वहाँ मौजूद सारी बोतलें खाली कर दी थीं। लेकिन इस समय उसे शराब पीने की तीव्र इच्छा हो रही थी। वह शराब के नशे में अपनी नाकामी को डुबो देना चाहता था। लेकिन घर में शराब की एक बूंद भी नहीं बची थी।
अंजन को घर से कुछ दूर पर ‌एक बार के बारे में पता था। उस समय उसके दिमाग में बहुत सारी बातें चल रही थीं। जो उसे परेशान कर रही थीं। शराब के ज़रिए ही वह परेशानी को दूर भगा सकता था। उसने कार की चाभी उठाई। वॉलेट और फोन उठाया और घर से बाहर निकल गया।

लोकेश कुमार ने अजय मोहते को वह सबकुछ बता दिया था जो उसने निर्भय से सुना था।

‌ सब सुनकर अजय मोहते के चेहरे ‌पर मुस्कान आ गई थी। अंजन कहाँ रह रहा है जानने के बाद उसे रास्ते ‌से हटाना आसान हो गया था। लेकिन इस बार वह किसी और पर भरोसा नहीं कर सकता था। उसने मामला अपने हाथ में ले लिया था। इस बार उसने अपने काम के लिए एक ऐसे आदमी को चुना था जिससे गलती होने की संभावना नहीं थी।

एसीपी सत्यपाल वागले और सिंगापुर पुलिस के सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज गंभीरतापूर्वक इस बात पर विचार कर रहे थे कि अभी तक अंजन के बारे ‌में कुछ भी पता नहीं चला है। उन्हें डर था कि अगर कहीं अंजन सिंगापुर से बाहर निकल गया तो उसे पकड़ना कठिन हो जाएगा। ऐसे में दोनों देशों की पुलिस की बदनामी होगी। सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने कहा,
"एसीपी सत्यपाल वागले अब हम दोनों की ही इज्ज़त का सवाल है। अंजन विश्वकर्मा सिंगापुर सिटी में ही कहीं है। हम उसे पकड़ नहीं पा रहे हैं।"
एसीपी सत्यपाल वागले ने कहा,
"सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज हमसे अधिक यह आपकी नाकामी है। हम तो बस एक छोटी सी टीम हैं। आपके इस शहर के बारे में अधिक नहीं जानते हैं। लेकिन आपके लोग यहाँ की हर गली से वाकिफ हैं। फिर भी अंजन विश्वकर्मा का पता नहीं लगा पाए।"
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज को यह बात अच्छी नहीं लगी। उसने कहा,
"बेहतर होगा कि हम एक दूसरे की नाकामी गिनाने की जगह सहयोग की बात करें। अगर आप भी अंजन ‌विश्वकर्मा को गिरफ्तार नहीं कर पाए तो आपके देश में भी सवाल पूँछे जाएंगे।"
एसीपी सत्यपाल वागले चुप हो गया। वह जानता था कि जो कुछ सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने कहा है वह सच है। उसने कहा,
"आपकी बात ठीक है। बताइए हम किस तरह आपका सहयोग कर सकते हैं ?"
"सबसे अच्छा तरीका है कि हम पर यकीन रखिए। हमें हमारा काम करने दीजिए।"
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने तंज़ करते हुए कहा। एसीपी सत्यपाल वागले कुछ कहना चाह रहा था कि तभी उसका फोन बज गया। वह एक तरफ जाकर बात करने लगा।

शराब की तलब में अंजन बार में जाकर बैठ गया था। इस समय उसका दिमाग बिल्कुल काम नहीं कर रहा था। बार बार एक ही बात हथौड़े की तरह उसके दिमाग में वार कर रही थी कि वह अब किसी काम का नहीं रहा। वह अपने ही काम नहीं आ पा रहा है। भारत में उसका इतना कुछ है। दौलत की कमी नहीं है उसके पास। पर वह उसमें से एक पैसा नहीं खर्च कर सकता है। उसे पता था कि पुलिस की निगाह उसके हर बैंक अकाउंट, हर प्रॉपर्टी पर होगी।
एक बार फिर मीरा का चेहरा उसकी आँखों में घूम गया। उसका दिल दर्द से भर उठा। उसने बोतल से और शराब अपने गिलास में डाली। एक ही बार में गिलास को खाली कर दिया। वह आधे से अधिक बोतल खत्म कर चुका था। लेकिन अपनी तकलीफ को नशे में नहीं डुबो पापा था।

अपनी बेबसी पर उसकी आँखों से आंसू बहने लगे।
उससे कुछ दूर एक टेबल पर कोई बैठा था। वह उसे बहुत ध्यान से देख रहा था। अपने मन को पक्का कर लेने के बाद वह उठा और बार के एक कोने में जाकर किसी को फोन किया।

खबर सुनकर एसीपी सत्यपाल वागले के चेहरे पर मुस्कान आ गई। फोन करने वाला उसकी टीम का एक इन्फार्मर था। उसने बार में अंजन को पहचान लिया था। एसीपी सत्यपाल वागले फौरन सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज के पास आकर बोला,
"सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज आपने कहा था कि हम चुपचाप बैठें। पर हमारी पुलिस जो काम हाथ में लेती है उसे पूरा किए बिना शांत नहीं होती है। अंजन विश्वकर्मा इस समय एक बार में बैठा शराब पी रहा है। अब आप इतना सहयोग तो कर सकते हैं कि अपनी टीम के साथ चलकर उसे गिरफ्तार कर लें।"
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज जानता था कि यहाँ उसे मात खानी पड़ी है। पर अंजन विश्वकर्मा की गिरफ्तारी ज़रूरी थी। वह फौरन अपनी टीम और सत्यपाल वागले के साथ उस बार की तरफ चल दिया।

अंजन ने खुद को संभाला। उसने इधर उधर निगाह दौड़ाई। उसने देखा कि उसके पास की टेबल पर बैठा आदमी उसकी तरफ देखते हुए अपनी घड़ी देख रहा है। वह नर्वस लग रहा है। अचानक उसका दिमाग खुल गया। उसे याद आया कि वह बड़ी देर से उसकी तरफ घूर रहा था। उसे किसी गड़बड़ी की आशंका हुई। आदत के अनुसार उसने जैकेट की इनर पॉकेट को हाथ से टटोला। वह बिना गन के आया था।
अब उसे एहसास हो रहा था कि उसने कितनी बड़ी गलती कर दी है। वह बार में बैठा है। अपने दुश्मन और पुलिस का आसान शिकार है। उसका नशा उतर गया। वह अपना दुख भूल गया। इस समय बस एक ही बात उसके दिमाग में थी। किसी तरह यहाँ से भाग जाए। तभी वह आदमी दोबारा उठकर एक तरफ गया। किसी को फोन करके वापस अपनी टेबल पर आकर बैठ गया। अंजन सचेत हो गया। उसने वेटर को इशारा किया। बिल चुकाया और तेज़ी से दरवाज़े की तरफ बढ़ गया।
उसे बाहर निकलते देख वह आदमी भी हरकत में आया। वह उसके पीछे लपका। पर वेटर ने उसे बिल के लिए टोंका। उसने जल्दी से अपना वॉलेट निकाला और पैसे चुका कर बाहर की तरफ भागा।
अंजन अपनी कार की तरफ बढ़ रहा था। तभी उसे पुलिस की गाड़ी का सायरन सुनाई पड़ा। उसने फौरन अपनी दिशा बदल ली। वह तेज़ कदमों से आगे बढ़ते हुए एक गली में मुड़ गया। वह रास्ते से अंजान था। लेकिन पुलिस से खुद को बचाने के लिए भाग रहा था।

वह आदमी बार के बाहर आया। उसने इधर उधर देखा। अंजन कहीं नहीं दिखाई पड़ा। तभी पुलिस की गाड़ी बार के सामने आकर रुकी। उसमें से सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज और एसीपी सत्यपाल वागले उतरे। वह आदमी भाग कर एसीपी सत्यपाल वागले के पास गया। उन्हें सारी बात बताई।

सब जानकर सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने फौरन फोन पर पूरे एरिया को घेर लेने का आदेश दिया।
अंजन गली में भाग रहा था। तभी अचानक एक आदमी उसके सामने आ गया। उसे देखकर अंजन को तसल्ली हुई।

रिस्की लव - 52

पुलिस के हाथ निराशा लगी। इस बात से सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज को अपने डिपार्टमेंट के आला अधिकारियों से खूब फटकार पड़ी। एसीपी सत्यपाल वागले को भी लग रहा था कि सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज को कुछ और फुर्ती दिखानी चाहिए थी। उनके बार में पहुँचने और अंजन के भागने के बीच बहुत कम समय का फर्क था।
एसीपी सत्यपाल वागले ने अपने इन्फार्मर को भी फटकार लगाई थी कि उसे खुद अंजन के पीछे भागने की जगह उसे सूचना देनी चाहिए थी। यह अंजन को पकड़ने का बहुत अच्छा अवसर था जो उसके हाथ से निकल गया था। एसीपी सत्यपाल वागले को अपनी टीम के साथ सिंगापुर आए हुए वक्त हो गया था। मुंबई पुलिस की तरफ से उससे भी देरी के लिए स्प‌ष्टीकरण मांगा जा रहा था। उसके लिए जवाब देना मुश्किल हो रहा था।
एसीपी सत्यपाल वागले अपनी टीम के साथ कमरे में मीटिंग कर रहा था। उसने अपनी टीम से कहा,
"हमको सिंगापुर पुलिस पर निर्भर नहीं रहना है। अपनी कोशिशों को तेज़ करना होगा। मुंबई में मीडिया में हमारे बारे में लिखा जा रहा है कि हम सैर सपाटे के लिए सिंगापुर आए हैं। हमारे डिपार्टमेंट के अधिकारी मुझसे सवाल कर रहे हैं। इसलिए अब हर हाल में अंजन को ढूंढ़ कर गिरफ्तार करना है। अभी तक जो भी कोशिशें कर रहे थे उन्हें दोगुना कर दो। हमारी इज्ज़त का सवाल है।"
इंस्पेक्टर नदीम अंसारी ने कहा,
"सर हमने तो अपनी तरफ से पूरी कोशिश की थी। हमारे इन्फार्मर ने सटीक खबर दी थी। लेकिन सिंगापुर पुलिस सही से काम नहीं कर पाई। जब उस पूरे एरिया का घेराव किया गया था तो अंजन कहांँ गायब हो गया‌। ज़रूर लापरवाही बरती गई है।"
एसीपी सत्यपाल वागले ने तेज़ आवाज़ में कहा,
"उनकी लापरवाही का जवाब भी हमारे देश में हमसे मांगा जाएगा। इसलिए उनकी लापरवाही के बारे में बात करने की जगह अब अंजन को तलाशो।"
एसीपी सत्यपाल वागले ने अपनी टीम से कहा,
"यहाँ से निकलते ही अपने काम में लग जाओ। भूल जाओ कि आराम जैसा कोई शब्द है‌। बस अंजन को तलाशने के बारे में सोचो। एक दूसरे के संपर्क में रहना। छोटी से छोटी सूचना भी आपस में साझा करना। कुछ भी करके उस अंजन का पता लगाओ।"
उसकी टीम के चारों सदस्य उठकर खड़े हो गए। उसे इस बात का यकीन दिलाया कि वह सफल होकर ही चैन पाएंगे।
उनके जाने के बाद एसीपी सत्यपाल वागले अपना दिमाग दौड़ाने लगा।

पिछले दो घंटे से अजय मोहते का आदमी निर्भय के घर पर अंजन के लौट कर आने की राह देख रहा था। इतनी देर से वह लाइट बंद किए एकदम खामोशी से बैठा था।

अब वह इस तरह इंतज़ार करते हुए ऊब गया था।
अजय मोहते से खबर मिलने पर वह अंजन का काम तमाम करने के लिए यहाँ आया था। यहाँ आने के बाद उसे सिक्योरिटी गार्ड ने बताया कि रमन सिंह कुछ समय पहले कार से निकल कर कहीं गया है। उस आदमी ने तुरंत अजय मोहते को फोन करके बताया कि रमन सिंह यानी अंजन घर पर नहीं है। अजय मोहते ने उससे कहा कि वह खुद अंदर जाकर देखें।
सिक्योरिटी गार्ड के रोकने पर उसने उसे मार दिया। उसकी लाश को गार्डन में छिपा दिया। वह खुद अंदर गया। पूरा घर छान मारा पर अंजन सचमुच नहीं था।‌ उसने एक बार फिर अजय मोहते को फोन करके बताया कि अंजन घर पर नहीं है। अजय मोहते ने उससे कहा कि वह वहीं रहकर उसकी राह देखे।
तबसे वह अंजन के आने का इंतज़ार कर रहा था। लेकिन अब उसके लिए चुपचाप बैठे हुए इंतज़ार करना कठिन हो रहा था। उसने एक बार फिर अजय मोहते को फोन करने के बारे में सोचा। तब तक अजय मोहते ने उसे फोन कर दिया। वह उस पर गुस्सा हो रहा था कि इतनी देर से शांत क्यों बैठा था। उसने अपना काम किया या नहीं। उसके आदमी ने सारी बात बताई। अजय मोहते ने उससे वहाँ कुछ और देर रुकने को कहा।

अजय मोहते फिक्र में था। अंजन के इतनी देर तक घर ना लौटने का मतलब हो सकता था कि वह पुलिस के हाथ लग गया है। यह बात अजय मोहते के लिए ठीक नहीं थी। उसने सोचा कि अंजन की इतनी सटीक जानकारी मिलने के बाद भी अगर वह पुलिस के हाथ चढ़ गया तो यह उसके लिए एक बड़ी नाकामी होगी। वह सच जानने के लिए परेशान हो गया।

अजय मोहते से कुछ देर और इंतज़ार करने का आदेश मिलने पर उसका आदमी गुस्से से पागल हो गया। लेकिन इंतज़ार तो करना ही था। उसने सारे परदे बंद कर दिए। लाइट ऑन की। उसके बाद कम आवाज़ में टीवी खोलकर देखने लगा। चैनल बदलते हुए वह एक न्यूज़ चैनल पर आया। उस पर एक खबर चल रही थी। सिंगापुर पुलिस के एक सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज की नाकामी के बारे में बताया जा रहा था। उसने सारी खबर बहुत ध्यान से सुनी।

मुंबई में बैठा अजय मोहते परेशान हो रहा था। वह सोच रहा था कि किस तरह सच का पता लगाया जाए। तभी उसके आदमी का फोन आया। उसने जो कुछ बताया उसे सुनकर अजय मोहते को तसल्ली हुई। उसने अपने आदमी से कहा कि अगर पुलिस उसे पकड़ने में नाकामयाब रही है तो हो सकता है कि अंजन पुलिस से बचता हुआ देर रात घर लौटकर आए। इसलिए वह वहीं रहकर उसका इंतज़ार करे।

सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज इस समय बहुत गुस्से में था। उसके हाथ आते आते अंजन मछली की तरह फिसल गया था। उसे अपने सीनीयर्स की बातें सुननी पड़ी थीं। आज मीडिया में उसका नाम खूब उछल रहा था। सबसे बड़ी बात बाहर से आए एसीपी सत्यपाल वागले ने भी उसे अंजन के भाग जाने के लिए ज़िम्मेदार ठहराया था।

उसकी अब तक की सर्विस में पहली बार ऐसा हुआ था कि उसकी नाकामी के चर्चे हो रहे थे। उसके लिए सब बर्दाश्त कर पाना मुश्किल हो रहा था। अब सिर्फ एक ही रास्ता रह गया था। वह अंजन को गिरफ्तार करके उस पर उंगली उठाने वालों का मुंह बंद कर दे।
उसने आदेश दिया था कि बार के आसपास जितने भी सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जल्द से जल्द उनकी फुटेज उसके सामने पेश की जाए। उसने यह काम अपने जूनियर हान लिम को सौंपी थी। उसने उसे फोन करके डांट लगाई। हान लिम ने बताया कि बार के आसपास के एरिया में कुल बीस सीसीटीवी कैमरे मिले हैं। उनकी फुटेज लेने में समय लग रहा है। फिर भी वह जितनी जल्दी हो सकेगा उसके पास आने की कोशिश करेगा।
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज के लिए एक एक मिनट बहुत भारी हो रहा था। वह जानता था कि जितनी देर होगी अंजन को पुलिस से बचकर भाग जाने का उतना ही अधिक मौका मिलेगा।

अंजन एक मकान में बैठा था। वह टीवी पर सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज की नाकामी की खबर सुनकर खुश हो रहा था। उसे अपने ऊपर गर्व हो रहा था कि सही समय पर वह चेत गया। अगर थोड़ी भी देर की होती तो मुसीबत में पड़ जाता।
लेकिन अपने से अधिक उसे अपनी किस्मत पर गर्व हो रहा था। जब उसे लग रहा था कि किसी भी पल पुलिस उसे दबोच लेगी उसकी मदद करने वाला उसके सामने आ गया। जब वह गली में भाग रहा था तब उसके दिमाग में आ रहा था कि वह पुलिस के हाथ में पड़ जाएगा। पुलिस उसे हथकड़ी लगाकर ले जाएगी। उसे जेल में रहना पड़ेगा। एसीपी सत्यपाल वागले उसे अपने साथ मुंबई ले जाएगा। जिस शहर में वह शेर की तरह घूमता था वहाँ लोग उसे अपराधी कहकर बुलाएंगे।
ये सब बातें दिमाग़ में सोचता हुआ वह भाग रहा था कि अचानक उसके सामने प्रवेश गौतम आ गया। दो सालों के बाद मिलने पर भी वह उसे फौरन पहचान गया था। प्रवेश उससे कुछ कहता उससे पहले ही अंजन ने उससे कहा कि वह पुलिस से बचकर भाग रहा है। इसलिए पहले उसे किसी सुरक्षित जगह पर ले चले।
उसकी मुसीबत समझ कर प्रवेश ने उसका हाथ पकड़ा। उसे लेकर उस गली से बाहर निकल गया। उसके बाद एक दूसरी गली में घुस गया। कुछ अंतर जाने के बाद प्रवेश ने एक घर की कॉलबेल बजाई। दरवाज़ा खुला। वह उसे सीढ़ियों से ऊपरी हिस्से में ले गया।
इस समय अंजन उसी जगह पर था। यह जगह सुरक्षित थी लेकिन वह जानता था कि सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज अपनी नाकामी पर चुप नहीं बैठेगा। इस समय वह उस शेर की तरह चिढ़ा हुआ होगा जिसके हाथ से शिकार निकल गया हो। वह उसे गिरफ्तार करने के लिए आसपास का एरिया खंगालेगा। उसने प्रवेश से उसे किसी दूसरी जगह ले जाने की बात कही थी।
प्रवेश उसी इंतज़ाम के लिए कहीं गया हुआ था। जाते समय अंजन को कह गया था कि अगर कोई खतरा महसूस हो तो छत के रास्ते बगल वाले मकान में छिप जाए।

वह बहुत दिनों से बंद है। अंजन की देखभाल के लिए वह माइकल को उसके पास छोड़ गया था। माइकल भी मुंबई से उसके साथ यहाँ आया था। मुसीबत में अपनी रक्षा कर सके इसके लिए प्रवेश ने अंजन को एक गन भी दी थी।
प्रवेश को गए डेढ़ घंटे हो चुके थे। अभी तक उसने कोई खबर नहीं दी थी। अंजन को अब बेचैनी होने लगी थी। वह उठकर कमरे में टहलने लगा।

रिस्की लव - 53

प्रवेश गौतम और अंजन विश्वकर्मा की शुरुआत लगभग एक साथ ही हुई थी। दोनों राजन भाई के गैंग में काम करते थे।‌ उसके बाद अंजन अपने दोस्त पंकज सुर्वे के साथ रघुनाथ परिकर के लिए काम करने लगा।
प्रवेश गौतम कुछ सालों तक राजन भाई के लिए काम करता रहा। लेकिन वहाँ उसके तरक्की करने की कोई संभावना नहीं थी। उसी समय प्रवेश गौतम ने सुना कि रघुनाथ परिकर ने अंजन को अपनी कंपनी का हिस्सेदार बनाने ‌के साथ साथ अपना बहनोई बनाने का ऐलान किया है। उसे हैरानी हुई कि अंजन विश्वकर्मा जो कभी उसके साथ ही राजन भाई के गैंग में काम करता था ने इतनी सफलता हासिल कर ली।
प्रवेश गौतम भी अंजन की तरह उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखता था। राजन भाई के गैंग में काम करते हुए दोनों में इसी आधार पर दोस्ती हो गई थी। हालांकि अंजन पंकज के साथ अधिक रहता था। जब प्रवेश ने अंजन की सफलता के बारे में सुना तो वह उससे जाकर मिला। उससे कहा कि वह उसे भी कोई काम दिलवा दे।
अंजन रघुनाथ परिकर के लिए पहले जो काम करता था वह काम उसने प्रवेश गौतम को दिलवा दिया। वह उसके लिए सही तरह से काम कर रहा था। पर कुछ समय बाद अंजन ने महसूस किया कि प्रवेश गौतम को इस काम की जगह किसी और काम में बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। उसने तरुण काला की फिशिंग कंपनी की आड़ में मानव तस्करी का काम शुरू किया था। उसने प्रवेश गौतम को उस काम में प्रयोग करना शुरू कर दिया।
नए काम में प्रवेश गौतम और भी अच्छा साबित हुआ। उसका काम नौकरी या दूसरी चीज़ों का झांसा देकर लोगों को बाहर जाने के लिए तैयार करना था। यह काम वह बहुत अच्छी तरह से कर रहा था। पर दो साल पहले एक समस्या आ खड़ी हुई।
एक आदमी के बेटे को प्रवेश गौतम ने नौकरी के बहाने बाहर भेजा था। उसने पुलिस में शिकायत कर दी। उसका कहना था कि उसके बेटे को धोखे से बाहर ले जाकर उसे गुलाम बनाकर रखा गया है। उस समय मामला तूल पकड़ता उससे पहले ही अंजन ने अपनी जान पहचान का इस्तेमाल करके मामले को दबा दिया।
उसके बाद प्रवेश गौतम का उस काम में रहना अंजन को ठीक नहीं लगा था। उसने उसे कुछ पैसे देकर कहीं दूर चले जाने की सलाह दी। प्रवेश गौतम पैसे लेकर चला गया था। उसके बाद अंजन को इस बात की कोई खबर नहीं थी कि वह कहाँ है।
प्रवेश गौतम गली में अचानक उससे टकरा गया। वह उसे यहाँ ले आया। यहाँ आकर अंजन ने उसे सारी बात विस्तार से बताई।

अंजन ने उसकी आड़े वक्त में मदद की थी। इसलिए प्रवेश गौतम उसकी मदद करने के लिए तैयार हो गया। अब वह उसके लिए सुरक्षित जगह की व्यवस्था करने गया था।
अंजन यह नहीं जानता था कि प्रवेश गौतम सिंगापुर कैसे और कब आया। यहाँ आकर वह क्या कर रहा है। लेकिन जिस तरह से उसने आत्मविश्वास के साथ उसकी मदद करने की बात कही थी उससे स्पष्ट था कि उसकी यहाँ बहुत जान पहचान है।
अब अंजन से इंतज़ार मुश्किल हो रहा था। उसने माइकल को आवाज़ देकर बुलाया। उसने माइकल से कहा कि प्रवेश को फोन मिलाकर पूछे कि क्या बात है। माइकल ने कहा कि कुछ ही समय पहले प्रवेश का फोन आया था। वह कुछ देर में आ जाएगा।

हान लिम बार के आसपास जितने भी सीसीटीवी कैमरे थे उनकी फुटेज जुटाकर सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज के पास पहुँचा। दोनों ध्यान से उन फुटेज को चेक करने लगे। अंजन उन्हें बार से निकलता हुआ दिखा। पहले वह पार्किंग की तरफ बढ़ रहा था फिर अचानक मुड़ कर दूसरी तरफ भागने लगा। एक सीसीटीवी फुटेज में वह गली में घुसता दिखाई पड़ा। उस फुटेज को देखकर सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने कहा,
"इस गली की सीसीटीवी फुटेज दिखओ।"
हान लिम ने लैपटॉप पर उस गली के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज निकाली। अंजन उस गली में भागता हुआ दिखा। कुछ दूर जाकर वह एक मोड़ में मुड़ गया। सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने कहा,
"इसके आगे की सीसीटीवी फुटेज दिखाओ।"
एक बार फिर हान लिम ने लैपटॉप पर उसके आगे की सीसीटीवी फुटेज तलाशने की कोशिश की। लेकिन कोई फुटेज नहीं मिली। उसके बाद उन लोगों ने बाकी की बची हुई फुटेज देखी। किसी में भी अंजन दिखाई नहीं पड़ा।
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज अपनी जगह उठकर कमरे में टहलने लगा। टहलते हुए वह कुछ सोच रहा था। कुछ देर बाद वह वापस अपनी जगह पर आकर बैठ गया।‌ उसने हान लिम से कहा,
"अंजन गली में घुसा। कुछ आगे जाकर मुड़ गया।‌ लेकिन किसी भी सीसीटीवी फुटेज में वह निकलते हुए नहीं दिखा। इसका मतलब अंजन उसी गली में कहीं है। हो सकता है कि उस गली में उसका कोई पहचान वाला है। तभी उसमें घुसा होगा।"
वह एक बार फिर सोचने लगा। कुछ सोचकर उसने कहा,
"तैयारी करो....हम उस गली के हर घर की तलाशी लेंगे। इससे पहले कि अंजन निकल जाए हमें उसे पकड़ना है।"
हान लिम फौरन उसके आदेश का पालन करने के लिए चला गया।

सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने अपनी टीम के साथ उस गली को पूरी तरह घेर लिया।‌ उन लोगों ने हर घर में पूँछताछ करनी शुरू कर दी। बहुत देर तक पुलिस उस गली में और उसके आसपास अंजन की तलाश करती रही। पर उनके हाथ केवल निराशा ही लगी। एक और बार मात खाने से सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज उस घायल शेर की तरह था जो अपने शिकार को हासिल करने की ज़िद ठान लेता है।

सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज की हार केवल उसकी हार ही नहीं थी। एसीपी सत्यपाल वागले जानता था कि बार बार अंजन का इस तरह बचकर निकल जाना उसके लिए भी परेशानी पैदा कर रहा है। उसके सिंगापुर में रहने की अवधि समाप्त हो रही है। अगर वह अंजन के बिना मुंबई गया तो वहाँ उसकी भी खूब छीछालेदर होगी। उसने तय किया कि वह सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज के साथ मिलकर काम करेगा।

प्रवेश गौतम और अंजन एक फ्लैट में बैठे शराब पी रहे थे।‌ सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज के अपनी टीम के साथ पहुँचने के कुछ ही मिनटों पहले प्रवेश गौतम अंजन को लेकर निकल गया था। इस समय वह दोनों ईशन शहर में थे।
यह फ्लैट प्रवेश गौतम के एक दोस्त का था। उसने अपने दोस्त से बात की कि कुछ समय के लिए वह अपने एक जानने वाले को यहाँ ठहराना चाहता है। वह मान गया। प्रवेश उसे लेकर यहाँ आ गया।
अंजन जानता था कि अभी भी निश्चिंत होने का समय नहीं आया है। सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज अपनी इज्ज़त बचाने के लिए ‌उसे गिरफ्तार करने की हर संभव कोशिश करेगा। उसकी समस्या केवल वही नहीं है। उसे गिरफ्तार करने के लिए मुंबई से एसीपी सत्यपाल वागले भी अपनी टीम के साथ आया हुआ है। इसलिए अब उसे यहाँ से निकलने के लिए प्रवेश गौतम की मदद लेनी होगी। शराब पीते हुए उसने कहा,
"प्रवेश तुमने मेरी बहुत मदद की है। लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। मुझे किसी भी तरह सिंगापुर से बाहर निकलना है। क्या तुम मेरे थाईलैंड जाने की व्यवस्था कर सकते हो। वहाँ सोम आर्य नाम का एक होटल व्यापारी है। उसके होटल में मेरी भी हिस्सेदारी है। उससे पैसे लेकर मैंने वहीं काम शुरू करने के बारे में सोचा है जो फिशिंग बिज़नेस की आड़ में करता था। तुम बस एक बार मुझे यहाँ से निकलना दो।"
प्रवेश गौतम ने कुछ सोचकर कहा,
"तुम एक नई शुरुआत करना चाहते हो।"
इस सवाल पर अंजन उदास हो गया। वह सोच रहा था कि कैसे दिन आ गए हैं। कभी जो उसकी सफलता को देखकर अचंभित था। जो कभी उसके लिए काम करता था। आज उसके ही सामने मदद मांगनी पड़ रही है। लेकिन वह जानता था कि यह सह सोचकर कुछ हासिल नहीं होगा। एक बार मौका मिल जाए तो वह सबकुछ फिर हासिल कर लेगा। फिर सब लोग आश्चर्य से आँखें फैला कर उसकी सफलता देखेंगे। उसने कहा,
"करनी ही पड़ेगी। मेरा जो कुछ था वह छूट गया। अब तो यह पहचान भी छोड़नी होगी। लेकिन नई पहचान के साथ मैं फिर से सफल होकर दिखाऊँगा। बस यहाँ से निकल जाऊँ एक बार।"
"ठीक है मैं कोशिश करता हूँ कि तुम्हें थाईलैंड भिजवा सकूँ।"
"कोशिश करना जल्दी हो जाए।"
"मैं भी समझ रहा हूँ। तुम्हारी मदद इसलिए की कि तुमने मुंबई से भागने में मेरी मदद की थी। उसकी बदौलत ही मैं यहाँ आकर अपने दम पर कुछ कर पाया हूँ।

"
प्रवेश गौतम से अपनी मदद का आश्वासन मिलने के बाद अब अंजन को तसल्ली हुई थी। इसके साथ ही उसके मन में यह जानने का कौतुहल जागा था कि आखिर प्रवेश गौतम यहाँ क्या काम करता है। ऐसा क्या है जिसके कारण वह आत्मविश्वास के साथ उसकी मदद करने की बात कर रहा है।
प्रवेश गौतम चुपचाप शराब पी रहा था। अंजन अपना कौतुहल शांत करना चाहता था। उसने कहा,
"एक बात पूँछूँ प्रवेश...."
प्रवेश गौतम ने उसकी तरफ देखकर कहा,
"मैं समझ रहा हूँ कि तुम क्या जानना चाहते हो। तुम सोच रहे हो कि मैं यहाँ क्या करता हूँ ? सिर्फ दो सालों में ही ऐसा क्या हो गया कि मैं तुम्हारी मदद करने के लायक बन गया ?"
"हाँ.... मैं जानना चाहता हूँ कि तुम यहाँ कैसे आए ? क्या काम करते हो ?"
प्रवेश गौतम ने अपना और अंजन का गिलास भरा। उसके बाद अपनी कहानी सुनाने लगा।

रिस्की लव - 54

मुंबई से भागकर प्रवेश गौतम कुछ दिनों तक पंजाब में छिपकर रहा। उसके पास अंजन के दिए हुए पैसे थे। वह उनके दम पर ही वहाँ दिन गुज़ार रहा था। लेकिन वह जानता था कि इस तरह से बहुत दिनों तक गुज़ारा नहीं किया जा सकता है। उसे कोई नया काम शुरू करना होगा।
वह ऐसे किसी काम के बारे में सोचने लगा जहाँ थोड़े में अधिक मुनाफा मिल सके। अपनी इसी तलाश में वह ड्रग्स का धंधा करने वाले एक गिरोह से मिला। उनके साथ मिलकर वह ड्रग पैडलर बन गया।
उसका काम बार्डर पार से आने वाले माल को दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में पहुँचाना था। इस काम से उसे अच्छा पैसा मिल रहा था। वह इस काम में सैटेल हो गया था। तभी उस पर एक और मुसीबत आ गई। एक बार नोएडा में ड्रग्स की डिलीवरी देने के बाद वह मौज मस्ती के इरादे से एक डिस्को में पहुँचा। वह नशे में चूर मस्ती में डांस कर रहा था। तभी उसकी नज़र एक लड़की पर पड़ी। वह लड़की भी उसकी तरह मस्ती में चूर नाच रही थी।
कुछ देर बाद वह लड़की डांस फ्लोर से हटकर लाउंज में जाकर बैठ गई। प्रवेश गौतम भी डांस छोड़कर उसके पास जाकर बैठ गया। उसने उस लड़की से बातचीत शुरू कर दी। उस लड़की का नाम नैंसी चावला था। उसने बताया कि वह एक मॉडल है। किसी शूट के सिलसिले में नोएडा आई थी। प्रवेश ने उसे बताया कि पंजाब में उसका अपना बिज़नेस है। वह बिज़नेस के सिलसिले में नोएडा आया था। काम हो जाने के बाद मौज मस्ती के इरादे से डिस्को में आ गया था।
बातचीत में नैंसी ने प्रवेश गौतम पर अपना जादू चला दिया था। उसने प्रवेश गौतम से कहा कि क्यों ना आज रात दोनों मौज मस्ती करते हुए गुज़ारें। प्रवेश गौतम उसका इशारा समझ गया। उसने नोएडा के एक होटल में रूम बुक करा रखा था। वह नैंसी के साथ अपने रूम में चला गया।
अभी उन्हें आए हुए कुछ ही समय हुआ था कि प्रवेश गौतम के कमरे के दरवाज़े पर दस्तक हुई। प्रवेश को आश्चर्य हुआ कि इस समय कौन आ गया।

उसने नैंसी से कहा कि वह बिस्तर में ही रहे बाहर ना निकले। जब प्रवेश गौतम ने दरवाज़ा खोला तो एक आदमी उसे धक्का देकर अंदर आ गया। नैंसी को गालियां देते हुए बोला कि उसे छोड़कर यहाँ इस आदमी के साथ गुलछर्रे उड़ा रही है।‌ प्रवेश गौतम को कुछ समझ नहीं आ रहा था। उसने उस आदमी का कॉलर पकड़ कर पूँछा कि वह इस तरह की हरकत क्यों कर रहा है। उसके कमरे से निकल जाए वरना अच्छा नहीं होगा।
उस आदमी ने बताया कि वह दो सालों से नैंसी के साथ रिश्ते में है। लेकिन वह पिछले कुछ समय से उसे इग्नोर कर रही है। वह डिस्को से उन लोगों के पीछे लगा था। कुछ देर तक तो वह होटल के बार में बैठकर पीता रहा। लेकिन फिर उससे रहा नहीं गया। वह उसके कमरे का पता करके यहाँ तक आ गया। उसने नैंसी से कहा कि वह चुपचाप उसके ‌साथ चले। नैंसी ने उसके साथ जाने से मना कर दिया। प्रवेश गौतम ने उससे कहा कि उसे इन सारी बातों से कोई मतलब नहीं है। नैंसी अपनी मर्ज़ी से उसके साथ आई थी। अब वह यहाँ से चला जाए।
इस बात से नाराज़ होकर उस आदमी ने प्रवेश गौतम को एक मुक्का मार दिया। उसके होठ से खून निकलने लगा। प्रवेश गौतम का सर भन्ना गया। उस ऐसा लगा कि नैंसी के सामने उसका अपमान हो गया है। गुस्से में ‌उसने उस आदमी को मुक्का मारा। वह लड़खड़ा कर गिर गया। लेकिन उठकर उसने प्रवेश गौतम को एक तमाचा मार दिया। अब प्रवेश गौतम के सर पर खून सवार हो गया। उसने कमरे में सजावट के लिए रखे हुए वाज़ को उठाकर उसके सर पर मार दिया। उस आदमी के सर से खून का फव्वारा फूट पड़ा।
प्रवेश गौतम का गुस्सा शांत हुआ तो उसे समझ आया कि उससे बहुत बड़ी गलती हो गई है। उन दोनों के झगड़े की आवाज़ सुनकर होटल का मैनेजर भी कमरे में आ गया था। प्रवेश गौतम ने मैनेजर को समझाने का प्रयास किया पर उस आदमी की मौत हो चुकी थी। मैनेजर पुलिस को फोन करने जा रहा था। प्रवेश गौतम ने अपनी गन निकाल ली और उसके सहारे होटल से भाग निकला।
प्रवेश गौतम भागकर पंजाब तो पहुँच गया पर वह जानता था कि नोएडा में वह हत्या के गवाह छोड़कर आया है। अब उसके लिए यहाँ रहना खतरनाक है। एक ऐजेंट के साथ जुगाड़ करके वह सिंगापुर आ गया।

अंजन को यह तो पता चल गया था कि वह सिंगापुर कैसे पहुँचा। लेकिन वह सोच रहा था कि इतने कम समय में प्रवेश गौतम के हाथ ऐसा क्या लग गया कि उसके पास इतने पैसे आ गए। उसने कहा,
"यहाँ ऐसी कौन सी जादू की छड़ी हाथ लग गई कि तुम मेरी मदद करने की स्थिति में पहुँच गए।"
उसका सवाल सुनकर प्रवेश गौतम हंसकर बोला,
"जादू की छड़ी ही समझो। मैं एक ऐसा धंधा करता हूँ कि जिसमें अच्छा पैसा है।"
"ऐसा कौन सा काम करने लगे हो तुम ?"
"जैसे ड्रग्स और शराब का नशा है वैसे ही यह भी एक नशा है। नशे का आदी अपनी लत के लिए पैसे देने को तैयार रहता है।"
अंजन प्रश्न भरी नज़रों से उसकी तरफ देखने लगा।

प्रवेश गौतम ने आगे की कहानी सुनाई।

सिंगापुर आने के बाद वह एक नाइट क्लब में काम करने लगा। यहाँ शराब और ड्रग्स के नशे के साथ एक और नशे का कारोबार होता था। जिस्म का कारोबार। क्लाइंट्स को जवान और खूबसूरत लड़कियां सप्लाई की जाती थीं। क्लब में कुछ गुप्त कमरे थे जहाँ लड़कियां क्लाइंट्स का दिल बहलाती थीं। लेकिन इन गुप्त कमरों में गुप्त कैमरे भी होते थे। कैमरे जो रिकॉर्ड करते उन्हें एक फिल्म की तरह एडिट करके कुछ वेबसाइट्स पर बेच दिया जाता था। इसके अच्छे पैसे मिल जाते थे।
प्रवेश गौतम के दिमाग में आया कि क्यों ना वह भी यही काम करे। उसके पास जो पैसे थे उनके ज़रिए उसने कुछ उपकरण खरीदे। कुछ लड़के लड़कियों को पैसे का लालच देकर इस काम में शामिल कर लिया। वह फिल्में बनाता था और उन्हें कुछ खास लोगों को पैसों के बदले में एक वेबसाइट के ज़रिए बेचता था।

प्रवेश गौतम ने अंजन से कहा,
"जिस मकान में मैं तुम्हें ले गया था वह मैंने इसी काम के लिए किराए पर ली थी। काम हो जाने के बाद सारा सामान हटवा दिया था। सब निपटा कर मैं अपनी कार की तरफ जा रहा था कि तुमसे टकरा गया।"
"ओह तो तुम्हारी बड़े लोगों से जान पहचान है।"
"बहुत ज्यादा नहीं। लेकिन जितने लोगों से भी जान पहचान है वो काम के हैं।"
प्रवेश गौतम यह कहकर उठकर खड़ा हो गया। उसने कहा,
"मैं अब चलता हूँ। वैसे तो यहाँ सुरक्षित हो पर संभल कर रहना।"
प्रवेश गौतम चला गया। अंजन जो कुछ भी उसने बताया था उसके बारे में सोचने लगा। उसे लग रहा था कि अगर प्रवेश गौतम सबकुछ खोकर भी इतना कुछ पा सकता है तो वह क्यों नहीं। यह सोचकर उसके मन में एक उम्मीद जागी।

हॉस्पिटल के बेड पर लेटी हुई मीरा बहुत दुखी थी। वह पूरी तरह से टूट गई थी। वह ज़िंदगी के लिए संघर्ष कर रही थी पर उसके पास अपना कहने वाला कोई नहीं था। इस कठिन समय में वह एकदम अकेली थी। वह सोच रही थी कि काश इस समय उसके पास कोई होता। जो उसका सहारा बनता। अपनी तसल्ली भरी बातों से उसे लड़ने की ताकत देतीं।
अब वह बहुत पछताती थी। अपने अच्छे समय में उसने रिश्तों को अहमियत नहीं समझी। थोड़े से पैसों के लिए उसने रिश्तों को ठुकरा दिया। अंजन के साथ भी उसने ऐसा ही किया था। फिर भी उसने उसे माफ कर दिया था। लेकिन इस समय वह खुद मुसीबत में था। उसकी चाहकर भी कोई मदद नहीं कर सकता था।
उसके इलाज पर बहुत पैसा खर्च हो रहा था। उसके पास अब बहुत पैसे नहीं बचे थे। अपनी हालत के बारे ‌में सोचकर वह बहुत दुखी थी।

कीवियोंथैरेपी के बाद वह हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होकर उस एनजीओ में जा रही थी जो बीमारी से जूझ रहे लोगों की सहायता करते थे। वह तैयार होकर निकलने ही वाली थी कि एक शख्स उससे मिलने आया। उसने मीरा से कहा कि वह अंजन का दोस्त संजय मेहरा है। उससे मीरा की बीमारी के बारे ‌में सुना था।

वह खुद उसकी मदद के लिए नहीं आ सकता है। इसलिए उसने उसे मदद के लिए भेजा है। वह उसके साथ चले।
यह सुनकर मीरा को बहुत खुशी हुई। वह सोच रही थी कि इतना होने के बाद भी अंजन उसे कितना चाहता है। अपनी मुसीबत में भी उसका खयाल रखा। मदद के लिए अपने दोस्त को भेज दिया।
वह संजय मेहरा के साथ चली गई।

निर्भय और मानवी ने अजय मोहते की मदद कर दी थी। अब दोनों इस बात की राह देख रहे थे कि अजय मोहते अपना वादा निभाए। उन दोनों की सहायता करे। पर अब तक अजय मोहते की तरफ से उनकी मदद की कोई कोशिश नहीं हुई थी। निर्भय को यह भी पता चला था कि अंजन पुलिस के हाथ आते आते बच गया था। निर्भय अब सारे झंझटों से मुक्ति पाने के लिए परेशान था।
निर्भय ने लोकेश कुमार का नंबर मिलाया। पर कई बार मिलाने पर भी फोन नहीं उठा। कुछ देर में वह स्विचऑफ हो गया।

रिस्की लव - 55

निर्भय बहुत गुस्से में था। उसे लग रहा था कि अजय मोहते ने अपना काम बड़ी चालाकी से निकलवा लिया। अब जब उसकी बारी आई तो इत्मीनान से बैठ गया। उसे अपनी बेवकूफी पर भी गुस्सा आ रहा था। उस दिन उसने अजय मोहते का नंबर भी नहीं लिया था। लोकेश कुमार के फोन से ही उसने अजय मोहते से बात की थी।‌
उसने तो यह सोचकर अंजन के बारे में बता दिया था कि अजय मोहते उसके दुश्मन को सज़ा देगा। साथ में इस केस से बाहर निकलने में अजय मोहते की मदद भी मिल जाएगी। लेकिन दोनों ही काम नहीं हुए। उसकी इतनी सटीक खबर के बावजूद भी अजय मोहते अंजन का कुछ नहीं कर पाया। वह तो पुलिस से भी बचकर भाग निकला। अब जब उसकी मदद करने की बारी आई है तो अजय मोहते से संपर्क भी नहीं हो सकता। लोकेश कुमार का नंबर भी स्विचऑफ बता रहा था।
वह उठकर गार्डन में जाकर टहलने लगा। कुछ देर बाद मानवी भी वहाँ आ गई। दोनों गार्डन में ही बैठकर बातें करने लगे। मानवी ने कहा,
"अजय मोहते से कोई मदद मिलने की उम्मीद नज़र नहीं आती है। अब हमें अपनी तरफ से ही कुछ करना है। पैसों की कोई चिंता नहीं है। मैंने लंदन फोन करके कुछ पैसे ट्रांसफर करने को कहा है। पर इंस्पेक्टर कौशल सावंत हमारे खिलाफ सबूत इकट्ठे कर चुका है। हमें एक ऐसे वकील की ज़रूरत पड़ेगी जो बहुत चालाक हो।"
निर्भय कुछ क्षण शांत रहने के बाद बोला,
"अजय मोहते यहीं काम आ सकता था। वह मंत्री है। अपने राजनैतिक प्रभाव का इस्तेमाल करके केस कमज़ोर करवा सकता था। लेकिन उसने तो धोखा दे दिया।"
निर्भय और मानवी दोनों ही चुप हो गए। दोनों के मन में बहुत सी बातें चल रही थीं। निर्भय को लग रहा था कि ‌मौत के मुंह से निकल कर उसने जो बिज़नेस खड़ा किया था वह बेकार हो गया। वह बस किसी भी तरह से इस सब झंझट से निकल कर अपने बिज़नेस पर ध्यान देना चाहता था। मानवी के मन में भी कुछ ऐसी ही बातें चल रही थीं।

उसने निर्भय से कहा,
"कल रात देर तक बिस्तर पर पड़ी सोचती रही कि हम दोनों से ही बहुत गलत निर्णय हो गया। हमारी जिंदगी में इतना उथल पुथल होने के बावजूद हम दोनों ने अपनी राह पा ली थी। अंजन को सज़ा देने के जुनून ने सब बर्बाद कर दिया। अगर हमें उसे मारना ही था तो किसी और के ज़रिए भी यह काम करवा सकते थे।"
"मानवी....समय की बात होती है। आज हम जैसे सोच रहे हैं तब वैसे नहीं सोच पाए। अंजन से बदला लेने का जुनून इस कदर हावी था कि खुद उस पर हमला करने की गलती कर बैठे। लेकिन आज हम जिसे बेवकूफी समझ रहे हैं तब हमारे लिए वही सही था। हमने बेवकूफी की। यह तो हमारे सामने है। लेकिन अब उसका कोई लाभ नहीं है। अब जैसे भी हो हमें इससे निकलने का प्रयास करना है।"
यह कहकर निर्भय उठकर खड़ा हो गया। वह मानवी से बोला,
"चलकर थोड़ी देर बीच पर टहल कर आते हैं। मन बदल जाएगा। फिर सोचते हैं कि आगे क्या करना है।"
मानवी को उसकी बात सही लगी। दोनों बीच पर टहलने चले गए।

संजय मेहरा मीरा को एक घर में ले गया। वहाँ उसके रहने की सही व्यवस्था थी। एक नर्स उसकी देखभाल के लिए थी। मीरा सोच रही थी कि यह संजय मेहरा बहुत भला आदमी है। अंजन इतनी मुश्किल में है फिर भी दोस्ती निभा रहा है।
वह संजय मेहरा से कुछ पूँछ नहीं पाई थी। उसे यहाँ छोड़कर वह यह कहकर चला गया था कि बाद में आकर उससे मिलेगा। मीरा चाहती थी कि एक बार अंजन को फोन करके यह बता दे कि संजय मेहरा उसकी मदद के लिए पहुँच गया था। लेकिन उसने अपना सामान कई बार देखा। उसे अपना फोन नहीं मिल रहा था।
मीरा परेशान हो गई। सोचने लगी कि आखिरी बार उसने अपना फोन कब इस्तेमाल किया था। उसे याद आया कि कीमियोथेरेपी से पहले हॉस्पिटल से उसने अंजन से वीडियो कॉल पर बात की थी। उसके बाद उसे कीमियोथैरेपी के लिए ले जाया गया था। उसे लगा कि शायद उसका फोन हॉस्पिटल में ही छूट गया है। उसने अपने बेड में लगी बेल को दबाया। कुछ समय बाद नर्स कमरे में आकर बोली,
"क्या चाहिए मैम ?"
"लगता है कि मेरा मोबाइल हॉस्पिटल में ही छूट गया। आप प्लीज़ मिस्टर संजय मेहरा को फोन करके बता दीजिए।"
"सॉरी मैम.... मुझे निर्देश मिला है कि मैं आपकी देखभाल करूँ। इसके अलावा मैं आपकी कोई मदद नहीं कर सकती हूँ।"
नर्स ने बड़ी रुखाई से उसे जवाब दिया था। मीरा को अच्छा नहीं लगा। उसने कहा,
"ठीक है....घर में कोई नौकर हो तो उसे भेज दीजिए।"
"इस समय आपके और मेरे अलावा यहाँ कोई नहीं है।"
"यहाँ कोई फोन होगा। मैं खुद बात कर लूँगी। आप बस मिस्टर संजय मेहरा का नंबर दे दीजिए।"
"यहाँ कोई फोन नहीं है। अगर आपको इसके अलावा कोई काम हो तो बताइए।"
उसका रुखा व्यवहार मीरा के लिए असहनीय हो रहा था। उसने खीझकर कहा,
"आप मेरी कोई मदद नहीं कर सकती हैं। आप जाइए।"
नर्स चली गई। मीरा सोच में पड़ गई।

क्या उसने यहाँ आकर ठीक किया ? फिर उसके मन में आया कि संजय मेहरा अंजन का दोस्त है। बीमारी में उसकी मदद कर रहा है। इसमें उसका कोई स्वार्थ तो हो नहीं सकता है। ज़रूर यह नर्स बद्तमीज़ है। संजय मेहरा के आने पर वह उसकी शिकायत करेगी। यह सोचकर वह चुपचाप बिस्तर पर लेट गई।
उसके मन में आ रहा था। आजकल वह बहुत कमज़ोर हो गई है। अगर पहले जैसी होती तो बिस्तर से उठकर उस नर्स को उसकी रुखाई पर थप्पड़ मार देती। खुद हॉस्पिटल जाकर अपना फोन ले आती। यह सोचते हुए उसकी आँखों में आंसू आ गए। पहले जैसा कुछ बचा कहाँ था।‌ सबकुछ तो उलट पलट हो गया था।‌ पहले जैसा होता तो वह अपनी ज़िंदगी के दिन ना गिन रही होती। उसकी आँखों से आंसू की धारा बहने लगी।

अजय मोहते का आदमी बहुत समय तक अंजन के घर पर उसके आने की राह देखता रहा। जैसा अजय मोहते ने सोचा था अंजन लौटकर घर नहीं आया। अजय मोहते के आदमी ने उसे फोन किया तो उसने उससे कहा कि वह वहाँ से निकल जाए।

अजय मोहते ने लंदन फोन मिलाया। उसने अपने एक आदमी दिनकर प्रधान को फोन किया था। दिनकर प्रधान ही मीरा को संजय मेहरा बनकर मिला था। दिनकर प्रधान ने फोन उठाया तो अजय मोहते ने कहा,
"उसे पहुँचा दिया।"
"हाँ.... हॉस्पिटल से उस घर में पहुँचा दिया है। मुझे तो लगा था कि सवाल जवाब करेगी। पर अंजन का नाम सुनते ही मान गई। वैसे इस समय बहुत कमज़ोर और टूटी हुई है। इसलिए इतनी आसानी से यकीन कर लिया।"
"हाँ मैंने पता किया था। धोखा खाने के बाद भी अंजन उसे बहुत चाहता है। उसके लिए अपने दोस्त सागर खत्री का भी दुश्मन बन गया। सागर खत्री की रखैल अलीशिया ने इसके लिए अंजन की दीवानगी के बारे में बताया था। इसलिए उसे किडनैप किया है। अब अंजन को धमकी दूँगा कि अगर पुलिस के हाथ पड़ भी जाए तो मेरे बारे में कुछ ना बताए।"
"लेकिन सर उस लड़की को कैंसर है। बहुत बीमार है। अधिक समय ज़िंदा नहीं रहेगी।"
"कोई बात नहीं.... मैं अंजन को ढूंढ़ कर मार दूँ तब तक ज़िंदा रहे। अगर बीच में मर भी गई तो अंजन को इसकी खबर नहीं लगने देंगे। तुम्हारे पास उसका फोन है ना।"
"हाँ सर मैंने उसके सामान से निकाल लिया था।"
"तो जैसा मैंने कहा था वैसा करो।"
अजय मोहते ने फोन काट दिया। उसके चेहरे पर मुस्कान थी। लंदन में उसे सागर खत्री की गर्लफ्रेंड अलीशिया का पता चला। उसने अपने आदमियों के ज़रिए उसे उठवा लिया। उसने सबकुछ बता दिया। उसके बाद अजय मोहते ने दिनकर प्रधान को संजय मेहरा बनकर जाने के लिए कहा। वह मीरा से मिला और उसे उस मकान में रख दिया।
अजय मोहते जानता था कि मीरा कहीं भाग सके इस हालत में नहीं है। इसलिए उस मकान में कोई और नहीं था। उसने मीरा पर नज़र रखने के लिए पामेला नाम की एक औरत को नर्स बनाकर रखा था। पामेला को पुलिस विभाग से उसके गलत आचरण के कारण निकाल दिया गया था।

वह पैसों के लिए कोई भी गैरकानूनी काम करने से नहीं हिचकती थी।

दिनकर प्रधान उसी मकान के ऊपरी हिस्से में था। पामेला ने जाकर उसे सारी बात बताई कि कैसे मीरा अपने फोन के लिए परेशान हो रही थी। सब सुनकर दिनकर प्रधान ने पामेला को कुछ आदेश दिया।
पामेला ने मीरा को जूस में नींद की दवा मिलाकर पिला दिया। इसके कारण मीरा सो रही थी। पामेला ने मीरा के फोन से एक वीडियो बनाया। उसके बाद ऊपर बैठे दिनकर प्रधान के पास गई। दिनकर ने मीरा के फोन से वह वीडियो अंजन को भेज दिया। साथ में एक मैसेज भी था।

अंजन उस फ्लैट में बैठा अपनी स्थिति के बारे में सोचकर परेशान हो रहा था। उसने अपने लिए एक और पैग बनाया और पीने लगा। उसके फोन पर बीप हुई। उसने देखा कि मीरा ने एक वीडियो भेजा था। साथ में एक टेक्स्ट भी था।

रिस्की लव - 56

अंजन ने अपना गिलास टेबल पर रखा। सबसे पहले वीडियो के साथ आए हुए टेक्स्ट को पढ़ा। टेक्स्ट पढ़कर गुस्से से वह पागल हो उठा। पूरा मैसेज पढ़ने के बाद उसने वीडियो देखा। सिर्फ तीस सेकंड्स का वीडियो था। सोती हुई मीरा बहुत कमज़ोर लग रही थी। उसने अपना फोन टेबल पर रखा। शराब का गिलास उठाकर खाली कर दिया।
गुस्से में उससे बैठा भी नहीं जा रहा था। वह उठकर कमरे में टहलने लगा। मैसेज का एक एक शब्द हथौड़े की तरह दिमाग पर चोट कर रहा था।
'तुम्हारी प्रेमिका मीरा हमारे पास है। बेचारी बहुत बीमार है। फिर भी हमें उसे यहाँ लाना पड़ा। बेचारी तुम्हारा नाम सुनकर यहाँ चली आई। पर अब इस बीमारी की हालत में उसका इलाज कैसे होगा। बिना इलाज के तो और जल्दी मर जाएगी। पर हमारे हाथ में कुछ नहीं है। तुम चाहो तो उसे बचा सकते हो। पुलिस के हाथ आ जाओ तो हमारे बारे में मत बताना। तुम हमारा सहयोग करोगे तो हम उसका इलाज कराएंगे। नहीं तो तकलीफ से मरेगी बेचारी।'
अंजन की मुठ्ठियां तनी हुई थीं। अपने अंदर उपजे गुस्से को वह रोकने की कोशिश कर रहा था। कुछ ही देर में गुस्सा बेचारगी में बदल गया। वह रोने लगा। रोते हुए उसके मन ने उसे धिक्कारा। वह कायरों की तरह क्यों पेश आ रहा है। इसी दम पर वह अपना खोया हुआ सबकुछ वापस पाने की सोच रहा है। उसने अपने ऊपर शर्म आने लगी।
कुछ ही समय में उसके मन में अलग अलग तरह के भाव पैदा हुए थे। गुस्से से बेचारगी और फिर शर्मिंदगी तक पहुँच गया था। अपने मन की स्थिति को वह खुद ही समझ नहीं पा रहा था। तभी उसका फोन बजा। उसने फोन उठाया। अजय मोहते का फोन था। उसने कहा,
"क्यों अंजन.... अपने बाल नोच रहे हो या गुस्से में हाथ पैर पटक रहे हो। अब इससे अधिक तो कुछ कर नहीं सकते हो तुम।"
उसकी ज़हर भरी बात सुनकर अंजन गुस्से में बोला,
"बहुत बड़े कमीने हो तुम। इतने घटिया आदमी हो कि मुझे दबाने के लिए एक लड़की का सहारा ले रहे हो। वह भी बीमार लड़की का।

"
उधर से अजय मोहते के हंसने की आवाज़ आई। अजय मोहते ने कहा,
"सही कहा तुमने मैं बहुत बड़ा कमीना और घटिया इंसान हूँ। सिर्फ अपनी जीत के बारे में सोचता हूँ। चाहें कैसे भी मिले। अब अपनी माशूका की ज़िंदगी तुम ही बचा सकते हो। बेचारी बार बार कह रही थी कि मेरा अंजन आएगा। मुझे ले जाएगा। अब उस बेचारी को क्या पता कि उसका अंजन किसी काम का नहीं रहा।"
अजय मोहते ने जो आखिरी बात कही थी उसने अंजन के पुरुषत्व को बुरी तरह चोट पहुँचाई थी। उसने कहा,
"देख अजय मोहते अगर मीरा को कुछ हुआ तो मुझसे तुझे कोई नहीं बचा पाएगा।"
"अंजन समझदारी से काम लो। मैंने तुम्हें इसलिए फोन किया है कि तुम खुद को मेरे हवाले कर दो। मैं तुम्हें यकीन दिलाता हूँ कि तुम्हारी इस सारे झंझट से निकलने में मदद करूँगा। फिर तुम्हारी महबूबा तुम्हारे पास होगी। उसका इलाज कराना। आराम से एक नई ज़िंदगी जीना।"
"मैं तुम पर यकीन नहीं कर सकता हूँ।"
उस तरफ कुछ सेकेंड्स के लिए शांति रही। उसके बाद अजय मोहते ने कहा,
"अंजन ना तो तुम चाहते हो और ना ही मैं चाहता हूंँ कि तुम पुलिस के हाथ लगो। इसलिए मेरी बात मानो। मैं तुम्हें एक नई ज़िंदगी शुरू करने का अवसर दूँगा।"
"तुमने तो पहले भी मदद का वादा किया था। पर किया कुछ नहीं।"
उधर से अजय मोहते गुस्से में बोला,
"बेवकूफ के जैसे बात कर रहे हो। तुम्हें क्या लगता है कि तुम्हें वहाँ से निकालना जादू की छड़ी घुमाना है। भारत और सिंगापुर की पुलिस तुम्हारे पीछे है। पर फिर भी मैंने इंतज़ाम कर दिया था। मेरा आदमी तुम्हें खोजते हुए उस मकान में पहुँच गया था जहाँ तुम्हारी महबूबा तुम्हें ठहरा गई थी।"
उसकी इस बात को सुनकर अंजन को उस पर कुछ विश्वास हुआ। अजय मोहते ने आगे कहा,
"वो जब वहाँ पहुँचा तो तुम थे नहीं। तुम्हारा इंतज़ार करके लौट गया। बाद में पता चला कि तुम किसी बार से पुलिस से बचकर भागे हो। तुम्हारे ऊपर पुलिस का खतरा है इसलिए हमने तुम्हारी महबूबा को किडनैप कर लिया। अब तुम सोचकर फैसला कर लो क्या करना है।"
अपनी बात कहकर अजय मोहते फिर चुप हो गया। अंजन के मन में एक उथल पुथल शुरू हो गई थी। एक तरफ उसे लग रहा था कि अजय मोहते सच कह रहा है। उसने उसकी मदद के लिए अपना आदमी भेजा होगा। वह उस पर यकीन कर सकता है। लेकिन उसके मन से आवाज़ आ रही थी कि अजय मोहते झूठ बोल रहा है। इसलिए उसे सावधान रहना चाहिए।
उसके चुप रहने से अजय मोहते को लग रहा था कि अंजन उहापोह में है। नहीं तो अब तक साफ मना कर चुका होता। उसने कहा,
"अंजन तुम्हारे लिए एक एक पल मुश्किल है। पुलिस तुम्हें गिरफ्तार करने की हर संभव कोशिश करेगी। इसलिए तुम मुझे अपना पता बता दो। मैं अपने आदमी को भेजकर तुम्हारी मदद करूँगा।"
अब तक अंजन समझ चुका था कि अजय मोहते उसकी स्थिति को भांपकर जाल फैला रहा है।

लेकिन मीरा उसके कब्ज़े में थी। इसलिए वह समझदारी से काम लेना चाहता था। उसने कहा,
"अजय मोहते अभी मेरा दिमाग परेशान है। मैं तुम्हें सोच नहीं पा रहा हूँ। मुझे कुछ वक्त दो। मैं तुम्हें फोन करके बताता हूँ।"
"अंजन वक्त ही तो कम है तुम्हारे पास। फिर भी अगर तुम सोचना चाहते हो तो सोच लो। लेकिन जितनी जल्दी मेरी बात पर भरोसा कर लोगे उतना ही अच्छा होगा। लेकिन अगर पुलिस के हाथ लग जाओ तो याद रखना कि मीरा मेरे पास है।"
अजय मोहते ने यह कहकर कॉल काट दी।
मीरा को अपने कब्ज़े में लेकर अजय मोहते ने अंजन पर दबाव बना दिया था। यह दबाव था कि वह मीरा को उसके चंगुल से मुक्त करवा कर यह साबित कर दे कि अभी भी उसमें बहुत दम है। अंजन उस दबाव में आ गया था। इस समय वह बस यही सोच रहा था कि कुछ भी करके मीरा को अजय मोहते की कैद से छुड़ा ले।
उसे इस फ्लैट में आए लगभग तीस घंटे का समय हो चुका था। इस बीच प्रवेश गौतम एक बार ही आया था। वह उसे खाने पीने का सामान दे गया था। उसे आश्वासन दे गया था कि वह जल्दी ही कुछ करता है। लेकिन उसके बाद ना तो वह आया था और ना ही उसका फोन उठाया था। अंजन इस फ्लैट में एक कैदी की तरह था। वह केवल उस घड़ी का इंतज़ार कर सकता था जब प्रवेश गौतम उसे यहाँ से ले जाए। यह स्थिति बहुत असहनीय थी। उस पर अब यह एहसास और परेशान कर रहा था कि मीरा बीमारी की हालत में भी अजय मोहते की कैद में है।

निर्भय और मानवी बीच पर टहल कर वापस लौटे थे। नौकर ने चाय की ट्रे लाकर रख दी। मानवी अपने और निर्भय के लिए चाय बनाने लगी। निर्भय की बिना शुगर की चाय का कप उसकी तरफ बढ़ाते हुए बोली,
"अगर हमको ही करना है तो कोई अच्छा वकील तलाश करते हैं।"
निर्भय ने अपने कप से एक सिप लेकर कहा,
"नया वकील क्यों ढूंढ़ें। बैकुंठ आगरकर ने बेल दिलवाई है वह संभाल सकता है।"
अपने लिए चाय बनाते हुए मानवी ने कहा,
"बेल के केस में उसे बहुत मुश्किल हुई थी। अब बात इल्ज़ाम को झूठा साबित करने की है। मुझे लगता है कि हमें सोच समझकर निर्णय लेना चाहिए।"
उसकी बात सुनकर निर्भय सोच में पड़ गया। कुछ देर में बोला,
"सही कहा तुमने। थोड़ी सी गलती जेल पहुँचा सकती है। इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने हमारे खिलाफ बहुत कुछ जमा किया है। मैं सोच रहा हूँ कि एक बार फिर लोकेश कुमार का नंबर मिलाऊँ। बात हो जाती है तो इस संबंध में ही कुछ मदद मांग लेंगे।"
निर्भय ने चाय का कप रखा। मोबाइल निकाल कर लोकेश कुमार का नंबर मिलाया। उसने फोन स्पीकर पर डाल दिया। इस बार लोकेश ने फोन उठा लिया। उसके फोन उठाते ही निर्भय ने शिकायत की,
"चलिए आपका फोन तो उठा। मुझे तो लगा था कि आपका काम निकल गया अब बात होना मुश्किल है।"
लोकेश कुमार ने बड़ी शांति से कहा,
"वादा मंत्री जी की तरफ से हुआ है। वो अपना वादा अवश्य निभाएंगे।

जहाँ तक फोन ना उठने की बात है तो जब आप फोन मिला रहे थे तब मैं पार्टी की आवश्यक मीटिंग में था। इसलिए फोन स्विचऑफ कर दिया था। अभी कुछ देर पहले ही फुर्सत मिली है।"
"लोकेश जी हमारी मदद कैसे होगी ?"
"केस शुरू होने दीजिए। गवाह वही कहेंगे जो हम चाहेंगे।"
यह सुनकर निर्भय और मानवी दोनों के ही चेहरे चमक गए। निर्भय ने कहा,
"हम किसी अच्छे वकील की तलाश में थे।"
"आप कोई भी वकील कीजिए। गवाह उसके साथ होंगे।"
लोकेश ने फोन काट दिया। निर्भय अब संतुष्ट नज़र आ रहा था। उसने मानवी की तरफ देखा। वह भी खुश थी। निर्भय ने उससे कहा,
"आज कुक से कहो कि कुछ अच्छा बनाए।"
मानवी ने भी उसकी बात का समर्थन किया। वह उठकर कुक को निर्देश देने चली गई।

रिस्की लव - 57

मीरा नींद से जागी तो कमरे में अंधेरा था। उसे अनुभव हुआ कि वॉशरूम जाने की ज़रूरत है। उसने खुद उठने की कोशिश की। लेकिन वह उठ नहीं पाई। उसे बहुत कमज़ोरी महसूस हो रही थी। कुछ देर वह उदास पड़ी रही। फिर उसने बेड के पास लगी बेल का बटन दबाया। नर्स के आने की राह देखती रही। एक दो मिनट के अंतराल के बाद भी जब नर्स नहीं आई तो उसने दोबारा बेल बजाई। इस बार पामेला अंदर आई। कमरे की लाइट जलाकर बोली,
"क्या काम है ?"
पामेला ने उसी रुखाई से कहा जैसे पहले बात कर रही थी। मीरा को बहुत गुस्सा आया। उसका मन किया कि डांटकर भगा दे। लेकिन अपनी मजबूरी समझ रही थी। वॉशरूम जाना ज़रूरी था और वह उठ भी नहीं पा रही थी। उसने कहा,
"मुझे वॉशरूम जाना है।"
पामेला ने उसे घूरकर देखा। फिर आगे आकर उसकी उठने में मदद की। उसे वॉशरूम के ‌अंदर छोड़ कर बाहर खड़े होकर उसका इंतज़ार करने लगी। निवृत्त होकर मीरा वॉश बेसिन में हाथ धोने लगी तो दीवार पर लगे आइने में अपनी शक्ल देखी। उसके लिए खुद को पहचान पाना मुश्किल हो रहा था।‌ उसकी आँखों से आंसू बहने लगे। पर वह अधिक खड़ी नहीं रह पा रही थी। उसने आँखें धोईं नर्स को आवाज़ लगाई।
पामेला ने उसे दोबारा बिस्तर पर लाकर लिटा दिया। उसके बाद बोली,
"कुछ और चाहिए ?"
"मुझे कुछ खाने को चाहिए। मेरे सामान में मेरी दवाएं होंगी। उनका भी वक्त हो गया है।"
पामेला बिना कुछ बोले कमरे से चली गई। कुछ देर बाद खाने का सामान लेकर आई। मीरा को सहारा देकर बिस्तर पर बैठाया। ट्रे उसके सामने रखकर जाने लगी। मीरा ने उसे रोककर कहा,
"मिस्टर संजय मेहरा नहीं आए। मुझे मेरा फ़ोन चाहिए।"
"वो नहीं आए ?"
यह सुनकर मीरा चिढ़कर बोली,
"कब आएंगे ?"
"मुझे नहीं पता। मुझे जो कहा गया है वह कर रही हूँ। कुछ देर में आकर दवाएं खिला जाऊँगी।"
यह कहकर पामेला कमरे से चली गई।
कमरे से निकल कर पामेला सीधे दिनकर प्रधान के पास गई। उसे सारी बात बताई। दिनकर प्रधान ने उसे जाकर अपना काम करने के लिए कहा। कुछ देर सोचने के बाद उसने समय देखा। रात के नौ बज रहे थे।

उसने अंदाज़ लगाया कि इस समय मुंबई में रात के लगभग डेढ़ बजे होंगे। उसने अजय मोहते को फोन करने का खयाल स्थगित कर दिया।
अपने कमरे में खाना खाते हुए मीरा बेचैन हो रही थी। अब उसे इस बात का यकीन हो गया था कि उससे भूल हो गई है। उसे यहाँ मदद करने के लिए नहीं लाया गया है। संजय मेहरा ने उससे झूठ बोला था। वह दिमाग दौड़ाने लगी कि उसे कौन यहांँ लेकर आया होगा और क्यों ? पर उसकी कुछ समझ नहीं आ रहा था।
खाना छोड़कर उसने एक बार फिर बेल बजाई। कुछ देर बाद पामेला दवाओं के साथ कमरे में आई। यह देखकर कि अभी खाना पूरा नहीं खाया है वह बोली,
"क्यों बुलाया ? अभी तो खाना भी खत्म नहीं किया।"
"मुझे किसी भी तरह मिस्टर संजय मेहरा से बात करनी है।"
"मैंने भी कह दिया है कि मुझे कुछ नहीं पता। यह मेरा काम नहीं है। खाना खत्म हो जाए तो मैं दवाएं खिला दूँगी।"
मीरा ने गुस्से में कहा,
"आखिर बात क्या है ? मुझे यहाँ क्यों लाया गया है ?"
पामेला ने कहा,
"मुझे यह सब नहीं मालूम। मुझे जो आदेश मिला है मैं वह कर रही हूँ।"
उसने दवाएं मीरा के पास रखकर कहा,
"खाने के बाद दवाएं खा लेना।"
यह कहकर वह कमरे से निकल गई। एक बार फिर वह दिनकर प्रधान के पास गई। उसने कहा,
"मुझसे वह लड़की नहीं संभलेगी। बार बार परेशान कर रही है। संजय मेहरा से मिलना है इस बात की ज़िद कर रही है। मुझसे यह काम नहीं होगा।"
दिनकर प्रधान ने पामेला को घूरकर देखा। वह बोला,
"मुंह मांगा पैसा मिल रहा है तुम्हें। बेकार की बात मत करो।"
"मैं इस तरह नर्स की एक्टिंग नहीं कर सकती। जो कर सकती हूँ वह कराओ।"
"पहले क्यों तैयार हो गई थी ?"
दिनकर प्रधान ने गुस्से से कहा। पामेला कुछ नहीं बोली। दिनकर प्रधान जानता था कि अभी उसकी ज़रूरत है। कुछ नर्मी के साथ बोला,
"पामेला....वो बीमार लड़की है। तुम्हें बस उसकी थोड़ी बहुत मदद करनी है। पैसे तुम्हारे मन के हिसाब से हैं। कर लो। बस कुछ दिनों की बात है।"
पामेला ने गुस्से से कहा,
"बार बार वो अपने फोन और संजय मेहरा के लिए परेशान कर रही है। वह मुझसे बर्दाश्त नहीं होगा।"
दिनकर प्रधान ने कुछ सोचकर कहा,
"ठीक है उससे मिलकर उसे चुप करा देता हूँ। तुम जाओ।"
पामेला चली गई। कुछ देर तक मन में विचार करने के बाद दिनकर प्रधान मीरा से मिलने गया।

मीरा को यकीन हो गया था कि वह मुसीबत में है। उससे खाना भी नहीं खाया जा रहा था। लेकिन वह कुछ कर नहीं सकती थी। उसका शरीर कमज़ोर था। वॉशरूम तक जाने के लिए भी उसे सहारे की ज़रूरत पड़ रही थी। उसे किसी भी तरह अपनी ताकत बनाए रखनी थी। इसलिए वह जैसे तैसे खाना खा रही थी। खाना खाने के बाद उसने अपनी दवाएं भी खाईं। वह एक बार फिर बेल बजाकर नर्स को बुलाना चाहती थी। पर तभी कमरे का दरवाज़ा खुला। मीरा ने देखा संजय मेहरा उसके सामने खड़ा था।

मीरा ने कहा,
"मुझे यहाँ छोड़कर आप कहाँ चले गए थे ? मेरा फ़ोन भी नहीं मिल रहा है। शायद हॉस्पिटल में रह गया। जो नर्स आपने रखी है वो बहुत ही बदतमीज़ है।"
दिनकर प्रधान चुपचाप एक कुर्सी लेकर उसके पास बैठ गया। बड़ी ही शांति से बोला,
"नर्स ने बताया ना कि वो वही कर रही है जो उससे कहा गया है।"
यह सुनकर मीरा समझ गई कि नर्स सारी बातें उसको बता रही थी। उसने कहा,
"वो आपसे बात कर रही थी। लेकिन मैंने कितनी बार उससे कहा कि मुझे आपसे बात करनी है। लेकिन उसने नहीं कराई।"
"क्योंकी उससे ऐसा करने को नहीं कहा गया था।"
मीरा कुछ देर तक उसके चेहरे को घूरती रही। फिर बोली,
"मिस्टर संजय मेहरा सच सच बताइए कि मुझे यहाँ क्यों लाया गया है ?"
दिनकर प्रधान ने उसी तरह शांति से कहा,
"मैं संजय मेहरा नहीं हूँ। ना मैं अंजन को जानता हूँ और ना ही उसने मुझे तुम्हारी मदद के लिए भेजा था।"
मीरा यह सुनकर सन्न रह गई। कुछ देर तक उसके मुंह से आवाज़ भी नहीं निकल रही थी। दिनकर प्रधान ने कहा,
"तुमको एक खास काम से रखा गया है। क्या काम है जानने की ज़रूरत नहीं है। चुपचाप यहाँ रहो। काम होने पर तुम्हें छोड़ देंगे। हमारे साथ सहयोग करो। क्योंकी कुछ और करके इस स्थिति में अपनी मुसीबत को बुलाओगी। तुम्हारा फोन हमारे पास है। जब यहाँ से जाओगी मिल जाएगा।"
दिनकर प्रधान उठकर कमरे से बाहर चला गया। मीरा सकते में थी। कुछ देर बाद पामेला अंदर आई। बेड से खाने की ट्रे हटाई। मीरा को लिटाकर बोली,
"रात में ज़रूरत पड़े तो बेल बजा देना।"
पामेला जाते हुए कमरे की लाइट बुझा गई। मीरा की ज़िंदगी में छाया अंधेरा और गहरा हो गया था।

अजय मोहते से ‌बात करने के बाद से अंजन की उलझन और बढ़ गई थी। एक तरफ उसका मन कह रहा था कि उसका यकीन नहीं किया जाना चाहिए। वह धोखा देगा। लेकिन दूसरी तरफ उसे लग रहा था कि हो सकता है अजय मोहते सच कह रहा हो। वह उसकी मदद कर दे। अजय मोहते भी तो नहीं चाहता है कि वह पुलिस के हाथ लगे।
प्रवेश गौतम को उसने कई बार फोन मिलाया पर उससे बात नहीं हो पाई। वह समझ नहीं पा रहा था कि प्रवेश उससे बात क्यों नहीं कर रहा है। वह सोच रहा था कि जितना अधिक समय वह यहाँ रहेगा खतरा बढ़ता जाएगा।
उसे बार बार बीमारी की हालत में अजय मोहते की कैद में फंसी मीरा का खयाल आ रहा था। अजय मोहते ने उससे कहा था कि वह उसके आने की राह देख रही है। यह सुनकर उसे लग रहा था कि अगर वह मीरा की मदद नहीं कर पाया तो यह उसके लिए शर्मिंदा होने की बात होगी।
वह सोच रहा था कि उसके लिए कौन सा निर्णय सही होगा। अजय मोहते पर यकीन करना या प्रवेश गौतम से मदद की राह देखना। इस समय वह जिस हालत में था अपने दम पर कुछ करने की बात नहीं सोच पा रहा था।

अजय मोहते अभी सोकर ही उठा था कि दिनकर प्रधान ने फोन कर सारी बात बता दी। उसने कहा कि मीरा की हालत गंभीर है।

अगर उसे सही इलाज नहीं मिला तो मर जाएगी। अजय मोहते ने उससे कहा कि जब तक संभव हो मीरा को अपने पास रखे बाद में वह देख लेगा।
अपने स्लिपरर्स पहन कर वह कमरे के बाहर बरामदे में आकर बैठ गया। कल रात लोकेश कुमार ने भी फोन करके उसे बताया था कि निर्भय मदद मांग रहा था। लोकेश कुमार ने उसके नाम पर झूठा आश्वासन दे दिया था।‌
इस समय अंजन को लेकर मुंबई की मीडिया में फिर से बातें होने लगी थीं। एक मराठी अखबार ने अपने लेख में वन विभाग की ज़मीन का मुद्दा भी उठाया था।
अजय मोहते सोच रहा था कि जल्दी ही उसे सारी समस्याओं से निजात पानी होगी।

रिस्की लव - 58

सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज के ऊपर दबाव बढ़ गया था। अब तो उसे इस केस से हटाए जाने की मांग भी हो रही ‌थी। वह बीस साल से सिंगापुर पुलिस में था। अब तक उसने पूरी ईमानदारी के साथ अपना काम किया था। उसका रिकॉर्ड बहुत अच्छा था। लेकिन अंजन के केस ने उसकी प्रतिष्ठा को दांव पर लगा दिया था। उसकी कर्तव्यनिष्ठा पर सवाल उठाए जा रहे थे। वह चाहता था कि अंजन को गिरफ्तार करके सबको सही जवाब दे दे।
हान लिम दोबारा उस गली में गया था जहाँ अंजन को आखिरी बार सीसीटीवी फुटेज में देखा गया था। जिस मोड़ से वह गायब हुआ था हान लिम उसके आगे की गली में स्थित हर मकान में एक बार फिर पूँछताछ कर रहा था। उस गली में कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था। अंजन वहाँ से इस तरह गायब हो गया था जैसे कि कोई भूत हो। उस दिन भी पुलिस टीम ने सबसे पूँछताछ की थी लेकिन कुछ पता नहीं चला था। आज सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने उसे फिर से भेजा था।
बातचीत में एक नई बात पता चली। गली में अगल बगल के दो मकान खाली पड़े थे। उनमें से एक में कुछ दिनों के लिए कुछ लोगों का आना जाना हुआ था। हान लिम ने उन दोनों मकानों के मालिक के बारे में पता किया। दोनों मकानों का मालिक एक ही आदमी था। हान लिम ने इस बात की सूचना फौरन सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज को दी। उसने कहा कि वह पूँछताछ के लिए मकान मालिक को पुलिस स्टेशन ले आए।
पुलिस स्टेशन में उन दोनों मकानों के मालिक से कड़ाई से पूँछताछ हुई।‌ उसने पुलिस को बताया कि उसने दोनों मकानों में से एक मकान किसी भारतीय को दिया था। उसने मकान केवल दस दिनों के लिए लिया था पर किराया दो महीने का दिया था।‌ उसने कहा कि उसे नहीं पता कि लेने वाले ने किस उद्देश्य से मकान लिया था। उसने तो बस पैसों के लालच में दे दिया था। उसे किराएदार के बारे ‌में अधिक मालूम नहीं है। उसने दो माह की रकम एडवांस दे दी थी। वह उस व्यक्ति से सिर्फ एक बार मिला था जिसने मकान किराए पर लिया था।
मकान मालिक ने उस आदमी का स्केच बनवाया। स्केच देखकर सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज को वह कुछ पहचाना सा लगा।

उसने फौरन पुलिस डाटाबेस की जांच करवाई। उस शख्स का नाम प्रवेश गौतम था।
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज को याद आया कि एक बार उसे टिप मिली थी कि एक नाइट क्लब में गलत हरकतें होती हैं। जब वह अपनी टीम के साथ पहुँचा तो क्लब में ऐसा कुछ नहीं मिला। वहाँ उसने प्रवेश को देखा था। उसके बाद भी एक झगड़े के केस में प्रवेश गौतम को पुलिस थाने लाया गया था। इसलिए उसका रिकॉर्ड था।‌ उसने हान लिम को निर्देश दिया कि वह उस स्केच की कॉपियां निकलवा कर प्रवेश गौतम को तलाश करने के लिए अपने आदमी लगा दे।
हान लिम ने उसके आदेश का पालन किया। उस स्केच की कॉपियां बनवा कर अपने आदमियों को हिदायत दी कि प्रवेश गौतम नाम के हिंदुस्तानी को तलाश करें।

प्रवेश गौतम अपने काम में व्यस्त था। अंजन का फोन बार बार आ रहा था। लेकिन उस समय उसके लिए फोन उठाना संभव नहीं था।‌ उस समय उसने फोन साइलेंट पर कर दिया था। काम पूरा होने के बाद उसने अंजन को फोन करके कहा कि वह परेशान ना हो। फ्लैट में उसके लिए हर सामान मौजूद है। कुछ समय धैर्य रखकर वहीं रहे। वह उसके लिए कोशिश कर रहा है। समय निकाल कर उसके पास आएगा।
अंजन से बात करने के बाद प्रवेश गौतम उस शख्स से मिलने गया था जो अंजन को थाईलैंड भेजने में उसकी मदद कर सकता था। वह उस आदमी से मिलने के लिए एक छोटे से रेस्टोरेंट में गया था। उस आदमी ने जो वक्त दिया था उससे अधिक हो गया था। लेकिन अभी तक वह पहुँचा नहीं था। प्रवेश गौतम को उसका इंतज़ार करते हुए आधे घंटे से अधिक का समय हो गया था।
प्रवेश गौतम को लगा कि अब और अधिक इंतज़ार करने का कोई फायदा नहीं है। वह रेस्टोरेंट से निकल आया। वह अपनी कार की तरफ गया। कार का दरवाज़ा खोल ही रहा था कि किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा। प्रवेश गौतम ने घूम कर देखा तो वह एक पुलिस वाला था। उस पुलिस वाले ने कहा,
"मिस्टर प्रवेश गौतम। मैं इंस्पेक्टर हान लिम हूँ। आपको कुछ पूँछताछ के लिए पुलिस स्टेशन चलना होगा।"
प्रवेश गौतम अंदर से डर गया था। पर बाहर से सामान्य होने का दिखावा करते हुए बोला,
"मैं जान सकता हूँ कि किस संबंध में मुझे पूँछताछ के लिए ले जाया जा रहा है।"
"हमारे साथ चलिए पता चल जाएगा। हमारा सहयोग करिए नहीं तो आपके लिए कठिनाई होगी।"
प्रवेश गौतम ने देखा कि इंस्पेक्टर हान लिम के साथ दो लोग और थे। उसके लिए चुपचाप चले जाने में ही समझदारी थी। उसने अपनी कार लॉक की और चुपचाप पुलिस की गाड़ी की तरफ चल दिया।
हान लिम प्रवेश गौतम को लेकर ‌अपनी टीम के साथ पुलिस स्टेशन पहुँचा तो अचानक ही कुछ मीडिया वालों ने उन्हें घेर लिया। उसकी तरफ सवालों की बौछार होने लगी।
"आप लोग किसे गिरफ्तार करके लाए हैं ?"
"क्या ये उस अंजन विश्वकर्मा का साथी है जो बार में आपके हाथ आते आते बच गया था।

"
"आपने इसे कहाँ से गिरफ्तार किया ?"
इन सवालों के साथ कैमरे प्रवेश गौतम की तस्वीर ले रहे थे। हान लिम परेशान था कि मीडिया यहाँ कैसे आ गई। तब तक उसकी मदद के लिए और पुलिस वाले आ गए। प्रवेश गौतम को पुलिस स्टेशन के अंदर ले जाया गया।
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने अपने साथियों को शाबाशी दी। उन्हें भी इस बात का आश्चर्य हो रहा था कि अचानक मीडिया कहाँ से आ गई। लेकिन इस बात पर चिंता करने की जगह उसने प्रवेश गौतम से पूँछताछ शुरू कर दी।

मीरा को नींद नहीं आ रही थी। जबसे उसे सच पता था वह बस रो रही थी। बहुत देर तक रो लेने के बाद अब आंसू भी सूख गए थे। वह अब चुपचाप अपने बिस्तर पर लेटी छत को देख रही थी। अब उसे कोई उम्मीद नहीं रह गई थी। वह नहीं जानती थी कि उसे किस काम के लिए यहाँ कैद किया गया है। वह बस यह जानती थी कि उसकी ज़िंदगी जो पहले ही तकलीफों से गुज़र रही थी अब और मुश्किल में पड़ गई है। उसे अब इसी तरह घुट घुट कर बचे हुए दिन काटने होंगे।
वह अंदाज़ लगाने की कोशिश कर रही थी कि उसे किस मकसद से यहाँ लाया जा सकता है। सोचते हुए एक बात उसके दिमाग में आई। ये जो भी लोग हैं अंजन को जानते हैं। उसकी स्थित के बारे में भी जानते हैं। तभी तो अंजन का नाम लेकर उसे यहाँ लाए थे। ये लोग अंजन से किसी बात का बदला लेना चाहते हैं। इसलिए उसे धोखा देकर यहाँ कैद करके रखा है।
उसके दिमाग में आ रहा था कि अगर एक बार वह अंजन से बात कर सके तो कितना अच्छा होगा। हो सकता है कि वह उसकी मदद के लिए आ जाए। इस समय वह जिस मानसिक स्थिति में थी इस खयाल ने उसे तसल्ली दी। पर अंजन तक खबर पहुँचाने का कोई ज़रिया नहीं था।
मीरा को एक बार फिर वॉशरूम जाने की ज़रूरत महसूस हुई। वह नर्स को बुलाने के लिए बेल का बटन दबाने जा रही थी कि उसकी रुखाई को याद करके उसने अपना हाथ वापस खींच लिया। पहले भी जब वह नर्स को लेकर वॉशरूम गई थी तो उसे बहुत अजीब लग रहा था। लेकिन मजबूरी थी। उस समय वह उठ नहीं पा रही थी।
इस समय खाना खाने के बाद उसे इतनी कमज़ोरी नहीं लग रही थी। उसने सोचा कि एक बार खुद कोशिश करती है। अगर नहीं कर पाई तो नर्स को बुला लेगी। उसने कुछ देर शांत रहकर अपनी शक्ति बटोरी। कोशिश करके उठकर बैठ गई। फिर धीरे से खड़ी हो गई। इससे उसके अंदर आत्मविश्वास आ गया था। संभलकर कदम बढ़ाते हुए वह वॉशरूम तक पहुँच गई।
वाशरूम से लौटकर वह बिस्तर पर बैठ गई। एक बात उसके दिमाग में आई थी। क्यों ना एक बार कमरे से बाहर निकल कर देखे। पता तो चले यह जगह कैसी है। जब वह आई थी तो उसने अधिक ध्यान नहीं दिया था। वह उठी धीरे धीरे कदम रखती हुई दरवाज़े तक आई। दरवाज़ा खोलकर बाहर झांका। एक हॉल दिखाई पड़ा। मद्धम रोशनी थी। पर उसे और कोई दिखाई नहीं पड़ा। वह हिम्मत करके कमरे से बाहर निकल गई‌।

दिनकर प्रधान की निगाह पामेला पर थी। वह बहुत आकर्षक थी। यह सोचकर कि मीरा तो कमज़ोर है कुछ कर नहीं सकती है, उसने पामेला को अपने पास बुलाया था। खुले शब्दों में उसके सामने एक रंगीन रात बिताने की पेशकश की। पामेला भी रंगीन मिजाज़ थी। सुबह से यहाँ बैठे हुए ऊब गई थी। उसने दिनकर प्रधान की पेशकश स्वीकार करने में देर नहीं की।
ऊपर दोनों शराब के नशे में चूर एक दूसरे के आगोश में समाए हुए थे। दोनों मीरा की तरफ से पूरी तरह से बेफिक्र थे। उन्हें ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि नीचे मीरा कमरे के बाहर निकल कर हॉल में इधर उधर देख रही थी।
मीरा कुछ डरी हुई थी। लेकिन वह अब यह मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहती थी। इसलिए हॉल में देख रही थी कि शायद कोई फोन दिख जाए।

रिस्की लव - 59

मीरा को महसूस हो रहा था कि इस समय जैसे उसमें एक शक्ति आ गई थी। पहले जो कमज़ोरी लग रही थी वह अब नहीं थी। हॉल में टंगी घड़ी में सुबह के चार बजकर पाँच मिनट हुए थे। मीरा ने देखा कि हॉल में एक तरफ ऊपर जाने के लिए सीढ़ियां हैं। उसके बाईं तरफ मेनडोर था।‌ उसे याद आया कि वह यहीं से अंदर आई थी। उसके कमरे के ठीक सामने सीढ़ियों के बगल में एक दूसरा कमरा था। मीरा ने हॉल में देखा उसे कोई ‌फोन दिखाई नहीं पड़ा। उसने दूसरे कमरे में जाकर देखने का फैसला किया।‌
वह उस कमरे की तरफ गई। दरवाज़ा खोला। अंदर अंधेरा था। उसने हल्की रौशनी में देखा कि कमरे में एक बेड था। लेकिन बेड पर कोई नहीं था। वह कमरे में घुस गई। उसने लाइट जलाई। उसने देखा कि कमरे में एक टेबल और कुर्सी पड़ी थी। टेबल पर उसे एक मोबाइल दिखाई पड़ा। उसने वह मोबाइल उठा लिया। उसका स्क्रीन लॉक्ड नहीं था।

अंजन परेशान था इसलिए रात में बड़ी देर से नींद आई थी। इसलिए देर से सोकर उठा था। इस समय पौने ग्यारह बज रहे थे। फ्लैट में वह अकेला था। कहीं बाहर निकल नहीं सकता था। प्रवेश गौतम से भी कोई मदद की उम्मीद नहीं थी। वह इन सबसे बुरी तरह उकता गया था। कुछ ना कर सकने की खीझ मन को बेचैन कर रही थी।
बेडरूम से निकल कर वह हाल में आ गया। शीशे की दीवार के पार सूरज की रौशनी में चमकती ईमारतें दिखाई पड़ रही थीं। वह सोचने लगा कि सबकुछ जैसा पहले था वैसे ही चल रहा है। बस उसकी अपनी ज़िंदगी में उथल पुथल मची हुई है। ना जाने कब ज़िंदगी दोबारा ढर्रे पर आ पाएगी। पहले दोबारा सबकुछ हासिल कर लेने का जो आत्मविश्वास उसमें था वह बुरी तरह कमज़ोर पड़ गया था। इस समय उसकी हालत यह थी कि कुछ भी स्पष्ट नहीं था।
वह सोफे पर बैठ गया। अपना मन बदलने के लिए उसने टीवी खोल लिया। टीवी पर प्रोग्राम उसे समझ नहीं आ रहे थे। वह बस चैनल बदलता जा रहा था। चैनल बदलते हुए वह एक न्यूज़ चैनल पर आया। भाषा समझ नहीं आ रही थी पर जो स्क्रीन पर दिखाई दे रहा था उसने उसके होश उड़ा दिए।

स्क्रीन पर प्रवेश गौतम पुलिस के साथ दिखाई पड़ रहा था। उसने ढूंढ़ कर एक अंग्रेज़ी न्यूज़ चैनल लगाया। उसके हिसाब से कोई दो घंटे पहले प्रवेश गौतम पुलिस के हाथ लगा था। उससे पूँछताछ हो रही थी।
अंजन ने टीवी बंद कर दिया। परेशानी में वह हॉल में टहलने लगा। उसे ऐसा महसूस हुआ कि बेडरूम में उसके फोन की घंटी बज रही है। वह बेडरूम में गया। स्क्रीन पर कोई अंजान नंबर था। कुछ सोचकर उसने फोन उठा लिया। फोन उठते ही उधर से मीरा की आवाज़ सुनाई पड़ी। वह घबराई हुई बोल रही थी,
"अंजन.... अंजन प्लीज़ हेल्प मी। मुझे नहीं पता कि ये लोग कौन हैं पर इन्होंने मुझे कैद कर लिया है। मैं लंदन में ही कहीं हूँ। लेकिन बता नहीं सकती हूँ कहाँ। प्लीज़ तुम किसी तरह आ जाओ।"
अंजन ने उसे तसल्ली देते हुए कहा,
"मीरा तुम परेशान मत हो। मैं तुम्हें बचाने आऊँगा। तुम अपना खयाल रखना।"
"अंजन इन लोगों ने मेरा फ़ोन भी छीन लिया है। बड़ी मुश्किल से चोरी छिपे किसी और के फोन से बात कर रही हूँ। मेरे पास अधिक समय नहीं है। तुम जल्दी आ जाना।"
फोन कट गया। अंजन परेशान हो गया। उसने उस नंबर पर कॉल बैक किया तो एक अंग्रेज़ औरत ने उसे धमकाते हुए कहा कि अब मीरा की खैर नहीं है। उस औरत ने फोन काट दिया। उसके बाद दोबारा फोन नहीं लगा।
अंजन निढाल होकर फर्श पर बैठ गया। उसके बाद वहीं लेट गया। वह इस तरह से फर्श पर लेटा था जैसे कि उसे होश ही ना हो। कुछ समय तक वह बदहवास सा लेटा रहा। उसके मन ने पूरी तरह से हार मान ली थी।‌ यह भाव कि वह किसी भी लायक नहीं रहा उसे कचोट रहा था। मीरा की हालत के बारे में सोचकर उसका कलेजा फट रहा था। वह फोन पर बहुत असहाय लग रही थी। उससे गिड़गिड़ा कर मदद के लिए कह रही थी। लेकिन वह खुद इतना बेबस था कि उसकी कोई मदद नहीं कर सकता था।
उस अंग्रेज़ औरत ने जिस तरह से कहा था कि अब मीरा की खैर नहीं है उससे वह डर गया था। मीरा को लेकर उसके मन में अजीब से खयाल आ रहे थे। वह औरत कमज़ोर और बीमार मीरा को परेशान कर रही है। मीरा हाथ जोड़कर प्रार्थना कर रही है कि उसे छोड़ दे। लेकिन वह ज़ोर ज़ोर से हंस रही है। उसका मन कर रहा था कि किसी तरह भी लंदन पहुँच कर मीरा का उस पर जो भरोसा है उसे सच साबित कर दे।
यह सब सोचते हुए अजय मोहते के लिए उसका मन में गुस्से से भर गया था। वह उठा और अजय मोहते को फोन मिलाया। फोन उठाते ही अजय मोहते ने कहा,
"तो तुमने सोच लिया कि क्या करना है ?"
अंजन ने गुस्से में कहा,
"कमीने मुझसे कह रहे थे ‌कि अगर मैं पुलिस को कुछ नहीं बताऊँगा तो मीरा का खयाल रखोगे। यह खयाल रखा तुमने। बेचारी बहुत परेशान है।"
उसकी बात सुनकर अजय मोहते ने कहा,
"बात क्या हुई जो आपे से बाहर हो रहे हो ?"
अंजन ने उसी तरह गुस्से से कहा,
"मैं तो वैसे भी बर्बाद हो गया हूँ। लेकिन तुम्हें भी बर्बाद कर दूँगा।

अभी तक तुम मुझे धमकी दे रहे थे। अब मैं कह रहा हूँ। मीरा को सही इलाज के लिए हॉस्पिटल में भर्ती करवाओ। मुझे खबर दो। नहीं तो मैं खुद को पुलिस के हवाले कर दूँगा। तुम्हारे सारे कारनामे उन्हें बताऊँगा।"
"बकवास मत करो अंजन.... पुलिस के पास जाओगे तो तुम भी मुसीबत में पड़ जाओगे।‌"
"मैंने कहा ना कि मैं बर्बाद हो चुका हूँ। अब तुम्हें भी बर्बाद कर दूँगा। ऐसा नहीं होने देना चाहते हो तो मीरा को हॉस्पिटल में भर्ती करवाओ।"
अजय मोहते कुछ क्षण शांत रहने के बाद बोला,
"देखो मैं मीरा की मदद करूँगा। पर तुम कोई बेवकूफी मत करना। मैं तुम्हें भी वहाँ से निकलवाने का प्रबंध करता हूँ। बस तुम कहाँ हो बता दो। मैं तुम्हें सुरक्षित सिंगापुर से निकलवा दूँगा।"
अंजन ने कहा,
"मैंने अभी तक अपने आप को पुलिस से दूर रखा है। इसलिए तुम मीरा की मदद करो। जितनी जल्दी हो सके इस बात के सबूत भेजो कि वह हॉस्पिटल में है। नहीं तो फिर मैं वो करूँगा जो मैंने कहा था।"
यह कहकर अंजन ने फोन काट दिया। फोन काटने के बाद उसका दिमाग काम करने लगा। प्रवेश गौतम पूँछताछ में उसके बारे में बता देगा। उसे यहाँ से निकलना होगा। उसके दिमाग में सागर खत्री का फार्म हाउस आया। वह वहाँ जा चुका था। फिलहाल उसके पास कहीं और जाने की जगह नहीं थी। निर्भय का मकान अजय मोहते के आदमी ने देख लिया था। उसने फार्म हाउस जाने का फैसला किया।
वह फौरन उठा। प्रवेश गौतम उसे कुछ पैसे दे गया था। उन्हें जेव में रखा। इसके अलावा प्रवेश गौतम उसे एक कार की चाभी दे गया था। जो नीचे पार्किंग में थी। उसे भूख लग रही थी। पर खाने का समय नहीं था। वह फ्लैट से निकल कर लिफ्ट से नीचे चला गया।
अंजन पार्किंग में पहुँचा। अपनी कार की तरफ जा रहा था कि सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज सामने आ गया। उसकी गन अंजन पर तनी हुई थी। कुछ ही देर में दूसरे पुलिस वालों ने भी उसे घेर लिया। अंजन गिरफ्तार हो गया।

एक दूसरे से संतुष्ट होने के बाद पामेला और दिनकर प्रधान कुछ देर तक एक दूसरे के आगोश में बंधे पड़े रहे।‌ कुछ देर बाद पामेला उठकर खड़ी हो गई। उसने अपने कपड़े पहने और नीचे चली गई। जब वह अपने कमरे में पहुँची तो उसने देखा कि मीरा उसके फोन से किसी से बात कर रही थी।‌ पामेला बहुत गुस्से वाली पागल औरत थी। मीरा ने उसके फोन से अंजन से बात की थी। इस बात पर उसका गुस्सा सातवें आसमान पर था। उसने अपना फोन छीनकर कॉल काट दी। वह मीरा पर ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी। शोर सुनकर दिनकर प्रधान अपने बिस्तर से उठा। जब वह नीचे आया तो पामेला अंजन को फोन पर धमकी दे रही थी कि अब मीरा की खैर नहीं है।‌
दिनकर प्रधान ने उसे समझाने की कोशिश की पर वह नहीं मानी। गुस्से में उसने मीरा के बाल पकड़े और उसका सर ज़ोर से दीवार पर दे मारा। सर फट गया। खून निकल रहा था।

मीरा फर्श पर गिरी हुई थी। कुछ क्षणों में उसके प्राण निकल गए। यह देखकर दिनकर प्रधान परेशान के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। कुछ देर तक वह अपना सर पकड़े पामेला के बेड पर बैठा रहा।
पामेला भी घबरा गई थी। लेकिन वह पक्की खिलाड़ी थी। जल्दी ही उसने खुद को संभाल लिया। उसने दिनकर प्रधान से कहा कि जितनी जल्दी हो सके इस लाश को जंगल में जाकर फेंक आते हैं।
दिनकर उसकी मदद के लिए तैयार हो गया।

रिस्की लव - 60

अंजन की गिरफ्तारी के बाद सिंगापुर पुलिस की खूब तारीफ हो रही थी। खासकर सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज और उसकी टीम को खूब बधाइयां मिल रही थीं। इस समय सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज इंस्पेक्टर हान लिम के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहा था। एक पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए वह कह रहा था,
"मैं अंजन विश्वकर्मा की गिरफ्तारी पर अपनी टीम, मेरे साथी इंस्पेक्टर हान लिम को बधाई देता हूँ। भारत से भागकर आया यह अपराधी हमारे देश में एक नकली पासपोर्ट के माध्यम से दाखिल हुआ था। मैं पूरी कोशिश करूँगा कि अंजन विश्वकर्मा को इस जुर्म के लिए हमारे देश के कानून के हिसाब से सज़ा दिला सकूँ। पिछली बार हमसे थोड़ी चूक हो गई थी। यह अपराधी बचकर निकल गया था।‌ लेकिन इस बार हमने इसे बड़ी सावधानी के साथ घेरा था। अंजन विश्वकर्मा के एक साथी प्रवेश गौतम से हमें उसके छिपने के ठिकाने का सही पता चल गया था। हमने बिना कोई देरी किए उसे गिरफ्तार कर लिया।"
एक पत्रकार ने सवाल किया,
"प्रवेश गौतम के पकड़े जाने की खबर पहले ही मीडिया में आ गई थी। आपको नहीं लगता कि यह ठीक नहीं था। इस बार भी अंजन के भाग निकलने के पूरे चांसेज़ थे।"
एक दूसरे पत्रकार ने कहा,
"वह भाग रहा था। उसे अपनी कार में बैठते समय पकड़ा गया। मीडिया में उसके साथी की गिरफ्तारी की खबर क्यों दी गई ?"
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ‌ने गंभीरता से कहा,
"हमें भी इस बात का आश्चर्य है कि मीडिया तक खबर किसने पहुँचाई। पर हमारे ‌लिए अंजन विश्वकर्मा की गिरफ्तारी महत्वपूर्ण थी। अब वह पकड़ा जा चुका है। हम इस बात का भी पता लगा लेंगे। पर यह सवाल आप लोग अपने सहयोगियों से भी पूँछिए कि क्या कोई भी खबर ब्रेक करने से पहले ज़िम्मेदारी से उस पर विचार करना ज़रूरी नहीं है।"
पत्रकारो में खामोशी छा गई। कुछ देर बाद एक महिला पत्रकार ने पूँछा,
"भारत से भी एक टीम अंजन विश्वकर्मा को गिरफ्तार करने आई थी। क्या इस गिरफ्तारी में उनकी तरफ से भी कोई सहयोग मिला ?"
सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने कहा,
"हाँ मुंबई पुलिस की तरफ से एसीपी सत्यपाल वागले अपनी टीम लेकर आए थे। हमने उन्हें पूरा सहयोग दिया। लेकिन उनकी तरफ से ऐसी कोशिश नहीं हुई।

पर हम अपने देश में गैरकानूनी तरीके से आ गए अपराधियों को पकड़ने में सक्षम हैं। हमने अंजन विश्वकर्मा को गिरफ्तार कर लिया।"
उसके आगे प्रेस कॉन्फ्रेंस की कमान इंस्पेक्टर हान लिम ने संभाल ली। उसने बताया कि किस तरह उनकी टीम प्रवेश गौतम तक पहुँची। हान लिम ने यह भी बताया कि प्रवेश गौतम कुछ गैर कानूनी कामों में लिप्त है। उस पर अब अलग से जांच होगी।

एसीपी सत्यपाल वागले अपनी टीम के साथ कमरे में बैठे प्रेस कॉन्फ्रेंस देख रहा था। सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज ने सारा श्रेय सिंगापुर पुलिस को दिया था। उसने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत से आई पुलिस टीम ने उनका कोई सहयोग नहीं किया। यह सुनकर उन्हें बहुत गुस्सा आ रहा था। उन्होंने ने कहा,
"शर्म नहीं आती है इसे। बार में अंजन विश्वकर्मा के होने की खबर हमने इसे दी थी। तब इसने लापरवाही दिखाई और अंजन विश्वकर्मा भाग निकला। उसके बाद भी हमने कितनी बार मदद के लिए हाथ बढ़ाया। लेकिन अपने अहंकार में इसने हमारी तरफ ध्यान ही नहीं दिया। अब इस तरह की बात कर रहा है।"
इंस्पेक्टर नदीम अंसारी ने कहा,
"सर सही कह रहे हैं आप। बहुत ही बेशर्म इंसान है।"
एसीपी सत्यपाल वागले ने कहा,
"हमारी टीम भी तो निकम्मी साबित हुई। नहीं तो सेहरा हमारे सर सजता। अब तो मुंबई जाकर जवाब देते हुए नहीं बनेगा। लेकिन अब कोशिश करनी है कि अंजन विश्वकर्मा को लेकर ही जाएं।"
इंस्पेक्टर नदीम अंसारी ने कहा,
"सर सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज क्या यह होने देगा।"
उसके इस सवाल पर एसीपी सत्यपाल वागले खीझकर बोला,
"वो क्यों करने देगा। लेकिन क्या हम बेशर्मों की तरह मुंबई लौट जाएंगे।‌ वहाँ जाकर अपना जुलूस निकलवाएंगे।‌ ऐसा समझो कि अब बस लंगोट बची है। कोशिश करना है कि यह बची रहे।"
पहली बार एसीपी सत्यपाल वागले ने गुस्से में इस तरह की भाषा का प्रयोग किया था। उसकी टीम के मेंबर्स चुप हो गए।

मुंबई में अंजन विश्वकर्मा की गिरफ्तारी मीडिया में सुर्खियां बनी हुई थी। एक तरफ तो गिरफ्तारी के लिए सिंगापुर पुलिस की तारीफ हो रही थी वहीं दूसरी तरफ एसीपी सत्यपाल वागले और उसकी टीम की खूब लानत मलामत हो रही थी। एक बार फिर यह बात चर्चा में थी कि मुंबई पुलिस की वह टीम सिर्फ सैर सपाटे के लिए गई थी। उन लोगों ने अंजन विश्वकर्मा की गिरफ्तारी के लिए कोई प्रयास नहीं किए थे।
सिंगापुर पुलिस के सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज की तारीफ के साथ इस बात पर भी चर्चा हो रही थी कि वह अंजन विश्वकर्मा को पहले अपने देश में गैरकानूनी तरीके से घुसने के लिए सज़ा दिलाएगा। लोग इसे भी एसीपी सत्यपाल वागले की हार ही मान रहे थे।
लेकिन कुछ लोग एसीपी सत्यपाल वागले और उसकी टीम का समर्थन भी कर रहे थे।

उनका कहना था कि यह एसीपी सत्यपाल वागले के ही प्रयास थे जिनके कारण अंजन विश्वकर्मा के काले कारनामों पर से पर्दा हट सका। अंजन ने तो अपने काले कारनामों को दिखावे के कुछ अच्छे कामों के पीछे छिपा रखा था। जो लोग पहले अंजन का समर्थन कर रहे थे। एसीपी सत्यपाल वागले के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे वो सभी अब शांत हो गए थे।‌ वो ना तो अंजन के समर्थन में आ पा रहे थे और ना ही एसीपी सत्यपाल वागले की नाकामी पर उसे घेर पा रहे थे।

नफीस और शाहीन बालकनी ‌में बैठे चाय पी ‌रहे थे। शाहीन अब पूरी तरह से ठीक थी। उसे किसी तरह की कोई तकलीफ नहीं थी। नफीस के क्राइम पर आधारित प्रोग्राम का अंतिम एपीसोड प्रसारित हो चुका था। इस समय वह एक नए शो की तैयारी में जुटा था।‌ यह शो अभी वह प्रयोग के तौर पर बनाना चाहता था। इसलिए यह मात्र ग्यारह एपीसोड की एक सीरीज़ होने वाली थी।‌ उसके चैनल से उसे हरी झंडी मिल गई थी। अब वह आरंभ के कुछ एपीसोड्स की कहानी लिख रहा था।
उसके नए शो का नाम भटकी राहें था। इस शो के माध्यम से नफीस कुछ ऐसे नौजवानों की कहानी लोगों के सामने पेश करने वाला था जो हालात का शिकार होकर जुर्म के रास्ते में आगे बढ़ गए थे। इन कहानियों के लिए रीसर्च का काम विनोद के ज़िम्मे था। विनोद ने उसे अब तक चार नौजवानों के बारे में जानकारी एकत्र करके दी थी। नफीस अब उनकी कहानी पर काम कर रहा था।
शाहीन ने चाय पीते हुए उससे पूँछा,
"तुम्हारे आने वाले शो की क्या प्रोग्रेस है ?"
"दो कहानियों पर काम पूरा हो गया है। उनका स्क्रीनप्ले लिख रहा हूँ। उसके बाद शूटिंग की प्रक्रिया शुरू होगी। मैं बाकी की कहानियां तैयार करता रहूँगा।"
शाहीन ने सोचते हुए कहा,
"कॉन्सेप्ट तो नया है।"
नफीस गंभीर होकर बोला,
"इन कहानियों को लिखते समय मैं उन नौजवानों के बारे में सोचकर दुखी हो रहा था। कई बार ज़िंदगी ऐसे हालात पैदा कर देती है कि इंसान अपने आप को बेबस समझने लगता है। वह कर बैठता है जो वह कभी नहीं करना चाहता है।"
शाहीन ने उसकी तरफ ‌देखकर कहा,
"लेकिन सभी सिर्फ मजबूरी में अपराध का रास्ता नहीं अपनाते हैं। कुछ लोग जानबूझकर इस रास्ते पर आते हैं।"
नफीस समझ गया कि उसका इशारा अंजन की तरफ है। उसने कहा,
"तुम अंजन विश्वकर्मा की बात कर रही हो। बिल्कुल सही बात है। अंजन विश्वकर्मा जानबूझकर अपराध की दुनिया में आया। उसने जो किया सिर्फ अपने फायदे के लिए किया।"
"तब भी तुम उसके बारे में किताब लिख रहे हो‌ ?"
शाहीन ने अपनी बात कहकर उसकी तरफ सवालिया निगाहों से देखा।‌ नफीस ने कहा,
"उसने गलत किया तो आज कानून की गिरफ्त में है। उसकी किताब के ज़रिए यही संदेश लोगों तक जाएगा कि अपराध करने वालों का बुरा इल्ज़ाम होता है।"
शहीन अभी भी हार मानने वाली नहीं थी।

उसने कहा,
"अगर अंजन पकड़ा ना जाता तो ? तुमने तो पहले ही किताब लिखना शुरू कर दिया था।"
"ठीक है कि वह अभी पकड़ा गया। पर मैंने अब तक उसके बारे में जो लिखा कहीं भी उसके गलत कामों को ग्लोरीफाई नहीं किया। अपनी पिछली किताबों में भी मैंने अपराधियों के जीवन के अंधेरे पहलू दिखाए हैं। मेरे पिछले शो के हर एपीसोड के अंत में भी मैं यही कहता था कि गुनाह हमेशा दुर्गति के रास्ते पर ले जाता है।"
नफीस का यह तर्क सुनकर शाहीन कुछ नर्म पड़ी। वह सोचने लगी कि आज तक उसने यह कहकर कि उसे क्राइम पर लिखी किताबें और प्रोग्राम पसंद नहीं हैं, ना तो नफीस की किताबें पढ़ी थीं और ना ही प्रोग्राम देखा था। फिर भी उससे ऐसी बातें कर रही थी। उसने कहा,
"एक बात बताओ पिछली बातें तो तुम्हें पता थीं‌। अब नया जो कुछ भी अंजन विश्वकर्मा के साथ हुआ है उसके बारे में कैसे लिखोगे।"
"कोशिश करता हूँ कि ‌अंजन विश्वकर्मा के बारे में सबकुछ पता कर सकूँ।"
नफीस की चाय खत्म हो चुकी थी। खाली प्याला ट्रे में रखकर वह अंदर अपनी स्टडी में चला गया।

रिस्की लव - 61 - (अंतिम भाग)​

अजय मोहते को जब अंजन की गिरफ्तारी के बारे में पता चला तो वह घबरा गया। उसे लगने लगा कि अब उस पर भी गाज गिरने वाली है। पामेला ने मीरा को मारकर जो गलती की थी उससे वह पहले ही परेशान था। अब तो उसे अपने बचाव का कोई चांस ही नज़र नहीं आ रहा था।‌ अलग अलग तरह के खयाल उसके मन में आ रहे थे। कभी वह सोचता कि बात उसकी गिरफ्तारी तक आए उससे पहले ही वह किसी ऐसी जगह भाग जाए जहाँ बाकी की ज़िंदगी बिता सके। पर वह जानता था कि उसके लिए कहीं भी छिपकर रहना आसान नहीं होगा। वह राज्य सरकार में मंत्री है। अंजन के पास उसके भ्रष्टाचार के सुबूत मौजूद हैं। वह कहीं भी जाएगा पुलिस उसे ढूंढ़ निकालेगी।
वह सोचता था कि उसका यहाँ एक रुतबा है। बहुत सी प्रॉपर्टी है। सबकुछ छोड़कर आखिर कहाँ जाएगा। पर उसे लगता था कि अगर यहाँ से नहीं गया तो भ्रष्टाचार के लिए जेल जाना पड़ेगा। कभी उसे लगता था कि भागने की जगह वह यहीं रहे‌। अभी तो उसका रुतबा बरकरार है। वह उसका प्रयोग करके ऐसी व्यवस्था कर ले कि अंजन के इल्ज़ाम निराधार साबित हो जाएं।‌ एक बात और उसके मन में आ रही थी कि मामला कोर्ट में जाएगा। वैसे भी कोर्ट में मामले का निपटारा जल्दी नहीं हो पाएगा। उसे कुछ दिनों के लिए जेल जाना पड़ेगा। पर वह वकीलों के ज़रिए ज़मानत पर बाहर रह सकता है।
एक साथ कई विचार उसके दिमाग में आ रहे थे। उसका दिमाग बहुत परेशान था। वह समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे। उलझन में वह पागल हुआ जा रहा था।

मानवी और निर्भय भी अंजन की गिरफ्तारी की खबर सुनकर परेशान थे। उन दोनों ने सोचा था कि अजय मोहते अंजन को मरवा देगा। उनका बदला पूरा हो जाएगा। अजय मोहते उसके बदले में उनकी मदद करेगा।

‌ उन्हें अंजन पर हमला करने वाले केस से बाहर निकलवा लेगा। लेकिन अब अजय मोहते खुद मुसीबत में था। वह उनकी सहायता नहीं कर सकता था। निर्भय खबर मिलने के बाद से ही लोकेश कुमार का नंबर मिला रहा था। पर लोकेश कुमार का नंबर बंद था। निर्भय और मानवी ने तय किया कि अब वह अपनी कोशिश करेंगे। किसी अच्छे वकील को केस के लिए हायर करेंगे।
उन्होंने बैकुंठ आगरकर को बुलाया था। उसे सारी बात बताने के बाद निर्भय ने कहा,
"बैकुंठ तुमने बेल के लिए केस लड़ा था। पर अब बात हमें इस केस से बरी कराने की है। तुम सोच लो। क्या तुम हमें इस केस से बरी करवा सकते हो ?"
बैकुंठ आगरकर ने अंजन की गिरफ्तारी के बारे में सुना था। वह यह भी जानता था कि इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने इस केस के लिए बहुत से सबूत एकत्र किए हैं। उसने कुछ क्षणों तक ईमानदारी के साथ मन ही मन विश्लेषण किया। उसे लगा कि यह केस उसके लिए कठिन होगा। उसने ईमानदारी के साथ कहा,
"बेहतर होगा कि आप किसी दूसरे वकील को इस केस की ज़िम्मेदारी सौंपें। मैं आपको एक वकील का नाम सुझा सकता हूँ जो यह केस जीत सकता है। लेकिन वह गोवा के बहुत नामी और महंगे वकील हैं।"
निर्भय ने कहा,
"तुम मेरी मुलाकात उनसे करवा दो। फीस की कोई चिंता नहीं है।"
बैकुंठ आगरकर ने निर्भय की मुलाकात जॉली विंसेंट नाम के वकील से करवा दी। सब कहते थे कि जॉली विंसेंट बहुत ही शातिर वकील है। वह अब तक कोई केस नहीं हारा है। निर्भय और मानवी उसे केस सौंपकर निश्चिंत हो गए।

एसीपी सत्यपाल वागले ने अंजन को भारत ले जाने की अपनी कोशिशें तेज़ कर दी थीं। इसके लिए उसने मुंबई पुलिस की तरफ से उन सारे इल्ज़ामों की लिस्ट सिंगापुर सरकार को दी थी जो अंजन पर लगे थे। एसीपी सत्यपाल वागले ने सिंगापुर सरकार से प्रार्थना की थी कि अंजन पर बहुत संगीन आरोप हैं। अतः उसे भारत ले जाने की इजाज़त दी जाए। ताकी उस पर भारतीय कोर्ट में मुकदमा चलाकर उचित दंड दिया जा सके।
अपनी दलील में एसीपी सत्यपाल वागले ने कहा कि अंजन के साथ कुछ प्रभावशाली लोगों पर भी इल्ज़ाम है। अगर सही समय पर उसे भारत ले जाकर उसका बयान नहीं लिया गया तो वह प्रभावशाली लोग केस को कमज़ोर करने की कोशिश करेंगे।
सिंगापुर सरकार ने उन सारी दलीलों और अंजन पर लगे संगीन आरोपों पर गंभीरतापूर्वक विचार किया। उन्होंने अंजन को गैरकानूनी तरीके से सिंगापुर में आने के लिए फाइन तथा एक माह का करावास भुगतने की सज़ा दी। इस तरह से सीनियर इंस्पेक्टर राजेंद्र सेल्वाराज की बात का मान भी रह गया और अंजन को जल्दी भारत भेजने की बात भी पूरी हो गई।
एसीपी सत्यपाल वागले ने अंजन से सिंगापुर की जेल में मुलाकात की। उससे अजय मोहते समेत अन्य लोगों के खिलाफ बयान देने के लिए कहा। अंजन भी अब भटकाव से थक चुका था।

वह अपने किए की सज़ा भुगतना चाहता था। लेकिन उसे मीरा फ़िक्र थी। उसने एसीपी सत्यपाल वागले को सारी बात बताई। उससे निवेदन किया कि वह मीरा को बचा ले। उसने यह भी आश्वासन दिया कि वह अजय मोहते सहित सबके बारे में सच बताएगा।
एसीपी सत्यपाल वागले अंजन का बयान दर्ज़ करके भारत आए। उसके आधार पर अजय मोहते और अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाही करने की इजाज़त मांगी। अजय मोहते ने पहले ही अपनी बेल के लिए तैयारी कर रखी थी। पर उस पर लगे इल्ज़ामों की गंभीरता को देखते हुए उसे बेल नहीं मिली। एक कारण और था। राज्य की विपक्षी पार्टियों ने अजय मोहते के विरुद्ध सख्त कार्यवाही करने के लिए मोर्चा खोल दिया था।
अजय मोहते को कस्टडी में लेकर पूँछताछ हुई। अंजन ने जो सबूत दिए थे उनके आधार पर अजय मोहते हर तरफ से घिर गया था। उस मुकदमा दर्ज़ किया गया। अजय मोहते ने मीरा की हत्या की बात स्वीकार कर ली।
भारत आने पर अंजन के खिलाफ भी अलग अलग धाराओं में मुकदमे दर्ज़ किए गए। मीरा की हत्या की बात सुनकर वह टूट गया था। उसने सारे इल्ज़ामों को स्वीकार कर लिया। अंजन को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई। अजेय मोहते और अन्य लोगों को भी सज़ा हुई।

इंस्पेक्टर कौशल सावंत ने भी निर्भय और मानवी के विरुद्ध कई साक्ष्य एकत्र किए थे।‌ जॉली विंसेंट ने अपनी पूरी कोशिश की। कई बार साक्ष्यों को पलटने का भी प्रयास किया। पर अंत में जीत सच्चाई की हुई। जॉली विंसेंट अपने करियर का पहला केस हार गया। निर्भय और मानवी को अंजन पर जानलेवा हमला करने के आरोप में सज़ा सुनाई गई।

मीडिया में अंजन विश्वकर्मा पर बहुत कुछ कहा जा रहा था। खासकर सोशल मीडिया पर कई तरह की बातें और कहानियां चल रही थीं। बहुत सी कहानियों में उसे हीरो की तरह पेश किया जा रहा था। लोग कह रहे थे कि अगर वह अपने प्यार के हाथों मजबूर ना होता तो उसे जेल भेजना नामुमकिन था।
शाहीन भी अंजन पर आ रही खबरों पर नज़र बनाए हुए थी। उसे लग रहा था कि अंजन के बारे में जो कई तरह की कहानियां प्रचलित हो रही हैं वह समाज में एक गलत उदाहरण प्रस्तुत करेंगी। खासकर युवाओं के बीच उसकी छवि ऐसी हो जाएगी जैसे वह कोई रोल मॉडल हो। उसने नफीस से इस बारे में बात की। उससे कहा कि वह अंजन की सही कहानी लोगों तक लाए। जिससे नई पीढ़ी उसे अपना आदर्श ना माने।
नफीस ने प्रशासन से इस बात की अनुमति ले ली कि वह अपनी किताब के सिलसिले में उससे जेल में मिल सके। उसने प्रशासन के सामने वही दलील रखी जो शाहीन ने कहा था। उसे इजाज़त मिल गई। नफीस ने अंजन के साथ दस मुलाकातें कीं। उन मुलाकातों में उसने ना सिर्फ अंजन के साथ जो जो घटा वह जाना बल्कि उससे इस सबके विषय में उसकी व्यक्तिगत राय भी जान ली।
छह महीने की मेहनत के बाद नफीस ने अपनी किताब पूरी कर ली।

उसके पूर्व प्रकाशक ने उसे छाप भी दिया। किताब जब लोगों के पास पहुंँची तो लोगों ने उसे बहुत पसंद किया।
किताब की एक बात की बहुत अधिक चर्चा हो रही थी। वह थी अंजन का दिया हुआ बयान। उसे नफीस ने वैसे ही रखा था जैसा अंजन ने कहा था। उस बयान में अंजन ने कहा था कि गलत रास्ता कभी सही मंज़िल पर नहीं पहुँचाता है। वह पहले चमकीली दुनिया दिखाता है फिर आपको एक अंधेरी सुरंग में छोड़ देता है। अंजन ने कहा कि मीरा ने उसे धोखा दिया था। लेकिन फिर भी वह उसके प्यार को भुला नहीं सका था। उसकी मौत की खबर ने उसे तोड़ दिया। वह अपनी प्रेमिका के लिए कुछ भी नहीं कर पाया। ऐसे में उसे लगने लगा कि ताकत और पैसा किसी काम का नहीं है। उसने गलत तरीके से पैसा और रुतबा कमाया। अपने आप को सफल बनाने के लिए रिश्तों को सीढ़ी की तरह इस्तेमाल किया। लेकिन अंत में उसके हाथ कुछ भी नहीं आया।
नफीस की किताब नौजवानों के बीच बहुत लोकप्रिय हुई थी। इस किताब ने उनके सामने अंजन विश्वकर्मा की वह छवि रखी थी जो वास्तविक थी। उसमें ना उसका महिमा मंडन था और ना ही उसे समाज का रोग या कैंसर कहा गया था। इस किताब में अंजन विश्वकर्मा को एक साधारण इंसान की तरह पेश किया गया था। जिसमें कुछ अच्छाइयां और कुछ बुराइयां हैं। जो गलत रास्ते पर था जिसकी उसने सज़ा पाई।
अंजन विश्वकर्मा का एक ऐसा रूप पाठकों के सामने रखा गया था जिससे वो प्रभावित होने की जगह सबक ले सकें।

समाप्त​

Categories Hindi
More stories See all