भाभी की फुद्दी के प्यार में पड़ गया-4
भाभी एक विह्स्की की बोतल, क्रीम और दो दुप्पटा ले आई, मुझे सोफे पर बैठा देख कर वो बोली- अरे तू तो लगता है थक गया है, अभी तो पूरी रात पड़ी है, कैसे करेगा?
तभी मेरी नजर उनके हाथ पर गई तो मैंने पूछा- ये सब क्या है भाभी?
तो वो अपनी मैक्सी उतारते हुए बोली- रात का इंतजाम है।
इतना कहते हुए उन्होंने मेरे लौड़े की तरफ़ देखा और मुस्कुराई, फिर नीलम को पलंग पर पेट के बल लेटने को बोल कर मुझे बुलाया और शराब की बोतल से शराब नीलम की गांड पर डालते हुए पीने को बोली।
जैसे ही शराब की बूँद नीलम की गांड पर पड़ी, वो चिहुँकी और बोली- भाभी मेरी गांड सुरसुर कर रही है।
भाभी ने बोतल की ढक्कन में शराब निकाली और उसकी गांड में डाल दी और मुझे चाटने का इशारा किया।
मैं भाभी की बात को मानते हुए नीलम की गांड को चाटने लगा।
फिर भाभी ने अपने हाथ पर शराब ली और अपनी गांड में मल ली। फिर मेरे पास आकर मेरे लण्ड को चूसा और घोड़ी बनकर नीलम से बोली- जरा शरद की हेल्प कर!
नीलम ने भाभी की गांड को खोला और मैंने अपने सुपारे को गांड की छेद में सेट करके जोर लगाया, मेरा लौड़ा आधा गांड के अन्दर जा चुका था, दूसरे धक्के में मेरा पूरा लन्ड भाभी के गांड की सैर कर चुका था।
चूँकि भाभी पहले भी गांड मरा चुकी होगी तो उसे कोई प्राबल्म नहीं हुई।
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थोड़ी देर तक अपने गांड में मेरा लन्ड लेने के बाद भाभी नीलम से बोली- चल अब तू तैयार हो जा!
इतना कहकर भाभी ने नीलम के हाथ पीछे करके बाँध दिए, नीलम बोली- यह क्या कर रही हो?
तो भाभी बोली- दो मिनट चुप रह, बता रही हूँ।
इतना कहकर भाभी ने नीलम का मुँह अपने साथ लाए हुए दुप्पटे से बाँध दिया और बोली- हम लोग होटल में रूके हुए हैं, इसका लन्ड जब तेरी गांड में घुसेगा तो तू दर्द से चिल्लायेगी और होटल में सब कमरे आस-पास है और तू समझ सकती है कि यहाँ क्या हो सकता है, इसलिये मैंने ये सब किया है।
मैं भाभी की समझदारी का कायल हो गया कि सेक्स का मजा भी निर्विघ्न हो और किसी को पता भी न चले।
भाभी वैसे भी बहुत बड़ी चुदक्कड़ थी।
उधर भाभी ने नीलम की गांड में टूयूब से क्रीम लगा कर अपनी उंगली से उसे उसकी गांड के अन्दर तक डाल रही थी। फिर मेरे लौड़े को क्रीम से मल दिया, उसके बाद नीलम की गांड को फैलाते हुये बोली- एक झटके से लन्ड अन्दर डालो।
मैंने आज्ञा मानते हुए निशाना लेते हुए जोर लगाया, लगभग़ दो इंच लौड़ा नीलम की गांड में घुस चुका था, नीलम का मुँह दुप्पटे से बँधा होने के कारण उसकी घुटी-घुटी सी आवाज आ रही थी और अपनी पूरी ताकत लगा रही थी मुझसे अलग होने के लिये, लेकिन उसके हाथ बंधे होने से और मेरी पकड़ में होने के कारण वो अपने आप को छुटा नहीं पाई।