भाभी की कसी चूत का राज
सभी पाठकों को मेरा सलाम, यह मेरी पहली कहानी है. मैं बचपन से ही सेक्स के लिए उतावला रहा हूँ.
यह कहानी तब की है, जब मैं बी.कॉम प्रथम वर्ष में पढ़ता था.
मेरे पड़ोस में एक जोड़ा रहने आया. उनकी शादी हुए चार-पाँच साल ही हुए थे. मेरा उनसे मेल-जोल होने लगा. मैं उनको भैया और भाभी कहता था. मेरा उनके घर आना-जाना शुरू हो गया.
एक बार भैया ने रात को दस बजे मुझे फोन किया कि मैं उनके घर आऊँ. मैं तुरंत उनके घर गया.
उनको रात को किसी ज़रूरी काम से दिल्ली जाना था.
भैया ने कहा- उनको बस-स्टैंड जाना है, तुम्हारी भाभी को डर लगता है इसलिए हो सके तो तुम आज रात को हमारे घर पर ही सो जाओ.
मैंने कहा- ठीक है.
मैं आधे घंटे में उन को बस-स्टैंड पहुँचा कर वापस भाभी के पास आ गया. भैया की माँ भी उस दिन बाहर गई हुई थीं. भाभी को मैंने कहा- वो अन्दर रूम में सो जाएं, मैं बाहर सो जाता हूँ.
भाभी ने कहा- ठीक है.
भाभी ने मुझे जान-बूझ कर पतली सी चादर दी ताकि मुझे ठंड लगे. करीब आधे घन्टे में वो पानी पीने के बहाने से बाहर आई तो मैं ठण्ड से सिकुड़ रहा था. भाभी ने कहा- ठण्ड लग रही है तो अन्दर सो जाओ. मैं तुरन्त तैयार हो गया. अन्दर केवल एक डबल-बेड था.
भाभी ने कहा- यहीं सो जाओ.
मैं थोड़ा सकुचाया. फिर मैं भी वहीं सो गया.
करीब आधे घन्टे बाद मैंने पाया कि भाभी की एक टाँग मेरी टाँग पर चढ़ी है. टाँग पर से साड़ी ऊपर हो गई थी और भाभी की गोरी-गोरी मादक जाँघ मुझे मखमल की तरह लग रही थी. मैंने भी धीरे से अपनी टाँग भाभी की टाँग पर रख दी. मेरा आठ इंच का मूसल खड़ा होने लगा. मैंने धीरे-धीरे टाँग को रगड़ना शुरू किया तो भाभी ने भी जवाब दिया. मुझे हर झंडी मिल गई.
फिर धीरे-धीरे मैं भाभी के पास आता गया और मैंने भाभी की चूचियों पर अपना हाथ रख दिया तो भाभी सोने का नाटक करने लगीं. अब मैंने भाभी की मादक, रसीली और भरी-भरी चूचियों को हल्के-हल्के दबाना शुरू किया.
अचानक भाभी जाग गईं और कहने लगीं- तुम क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- मुझे नींद में पता नहीं चला, सॉरी.!
मैं उठ कर बाहर सोने के लिए जाने लगा, तो भाभी ने कहा- कहीं नहीं जाना है.., यहीं सोना है!
फिर भाभी ने मुझे एक भद्दी सी गाली भी दी और कहा- मादरचोद, लण्ड खड़ा करने की हिम्मत है, पर डालने की नहीं!
मैंने भाभी से कहा- लण्ड तो आपने ही खड़ा किया था.
भाभी हँसने लगीं.
भाभी उठीं और रसोई से जाकर गरमा-गरम दूध लेकर आईं, फिर मैंने दूध पिया.
उन्होंने कहा- सर्दी बहुत है.. न!
मैंने कहा- अभी सर्दी भगा देता हूँ.
भाभी बोलीं- तो देर क्यों कर रहे हो!
मैंने भाभी को पलंग पर ही पटक दिया, उनकी साड़ी को ऊपर कर दिया और उनकी पेंटी में हाथ डाल दिया.
अचानक मुझे लगा कि जैसे मैंने कोई भठ्ठी में हाथ डाल दिया है.
मैंने भाभी की फूली हुई मेंढक के माफिक रसीली चूत को मसलना शुरू किया.