होली खेल कर भाभी पटाई फ़िर खेत में भाभी की चूत की चुदाई की
मैं प्रेम यादव अलवर राजस्थान से… आप सभी दोस्तों और भाभियों को मेरा नमस्कार!
मैं पहली बार कहानी लिख रहा हूँ, अगर कोई ग़लती हो जाए तो माफ़ करना!
मेरा खुद का बिजनेस है। मेरी हाइट 5’9″ है, मेरे लंड का नाप 6″ है, दिखने में मैं हैंडसम हूँ ऐसा मेरे दोस्त कहते हैं… वैसे हूँ भी! वैसे मैं हूँ पतला, पर दम है, ऐसा भाभी कहती है।
अब आते हैं कहानी पर… यह कहानी मेरी और मेरी विधवा भाभी की है। भाभी का नाम अनिता है, एकदम मस्त माल सबका लंड खड़ा कर देने वाला फिगर है 32-28-34 का, रंग दूध की तरह सफेद!
मेरी स्कूल टाइम से ही कई गर्लफ्रेंड रही पर मैंने कभी किसी के साथ ग़लत नहीं किया, मेरे से बहुत भाभी भी सेक्स करने को तैयार हैं, कुछ एक की वासना शांत भी की पर अनिता में जो बात है वो औरो में नहीं!
बात अभी कुछ दिन की है, मैं सुबह छत पर कबूतरों को दाना डालने गया तो मेरी नज़र भाभी पर गई, वो सलवार का नाड़ा खोल रही थी और फिर पेशाब करने बैठ गई। मैं छुप कर काफ़ी देर तक देखता रहा, मैंने दाना डाला और नीचे आ गया।
एक दो बार फिर ऐसा हुआ पर मैंने खास ध्यान नहीं दिया।
फिर होली का दिन था, मैं उनके घर होली खेलने चला गया, सभी बच्चे होली खेल रहे थे। मैंने सभी को गुलाल लगाया… भाभी को भी!
थोड़ी देर बाद भाभी ने बाल्टी पानी से भर के मेरे ऊपर डाल दी, मुझे भी अब बदला लेना था तो मैंने भी बाल्टी में पक्का रंग मिलाया और भाभी पर डाल दिया।
भीगने से भाभी के कपड़े बदन से चिपक गये, जिससे उनके मोटे मोटे कूल्हे और चुची गजब ढा रहे थे, देख कर मेरा लंड फुंफकार मारने लगा।
मैंने भाभी को पकड़ लिया और उनके गीले बदन पर गुलाल मलने लगा.. मैंने उनके कमीज़ में हाथ डाल कर उनकी चुची पर खूब रंग लगाया, मेरे पकड़ने से मेरा लंड उनके कूल्हो के बीच में चुभने लगा जिससे वो भी मस्ती में मस्त हो गई, उन्होंने अंजान बनते हुए मेरे लंड को छू लिया और उसे भींच दिया.. उम्म्ह… अहह… हय… याह…
उन्होंने ये सब ऐसे किया जैसे सब ग़लती से हो गया हो।
उसके बाद मैंने भाभी को उठा कर कीचड़ में डालने लगा.. तो इस धक्कम पेल में मेरा हाथ उनकी चूत को काफ़ी बार टच कर गया।
वो और मस्ती में आ गई.. अब मुझे ग्रीन सिग्नल दिखाई दे रहा था।
फिर कुछ दिन मैं भाभी की घर नहीं गया।
उसके बाद मैं जब भी उनके घर जाता वो मुझे छेड़ने लगी.. अब फिर होली खेलते है, मैं हंस के टाल देता..
फिर एक दिन मैंने मज़ाक में कह दिया कि तो पिचकारी से खेलते हैं सफेद रंग लगा कर!
इस पर वो मुझे नशीली नज़रों से देख कर मुस्कराने लगी।
इतना था कि मैंने उन्हें पकड़ लिया.. वो कहने लगी- अभी नहीं, कोई देख लेगा।
मैंने उनसे मिलने के लिए बोला, वो मान गई।