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सविता भाभी का बकरा-1

Story Hindi 3 pages 13 years ago

सविता भाभी का बकरा-1
मेरा नाम राजेश है, 22 साल का हूँ, मैं अभी कुंवारा हूँ।
कुछ समय पहले मेरी सरकारी नौकरी लखनऊ से 200 किलोमीटर दूर एक शहर में लगी तो मैं वहाँ अपने रिश्ते की एक मौसी के यहाँ रह रहा हूँ।
मौसी के एक बेटे, बहू घर में ऊपर, मैं और मौसी नीचे रहते हैं।
भैया सुबह आठ बजे नौकरी को चले जाते, सविता भाभी मौसी के साथ काम कराती रहती हैं।
लड़कियों को घूरना, मुठ मारना, ये सब और लड़कों की तरह मैं भी करता हूँ। मैंने किसी औरत या लड़की के बदन को हाथ नहीं लगाया था। ऊपर वाली सविता भाभी से एक दो बार मेरी हल्की फुलकी बात हुई थी लेकिन मैंने कभी उन्हें गलत नज़र से नहीं देखा था।
मेरे वहाँ जाने के 15-20 दिन बाद घर की पानी की मोटर ख़राब हो गई, पानी ऊपर नहीं चढ़ रहा था।
उस दिन मेरी छुट्टी थी, भैया घर पर नहीं थे, मौसी बाज़ार गई हुईं थीं। मैं घर मैं अकेला था।
कुछ देर बाद भाभी नीचे आईं और मुझे देखकर मुस्कराते हुए बोलीं- राजेश, तुम्हें नहाना हो तो नहा लो। अगर मैं एक बार नहाने लगी तो पूरा एक घण्टा लगेगा।
मैंने कहा- मेरी तो आज छुट्टी है, मैं तो आराम से नहा लूँगा। लेकिन आपको लगता नहीं कि एक घण्टा बहुत ज्यादा होता है?
भाभी मेरे सामने साड़ी उतारते हुए बोलीं- पूरा बदन मल मल कर नहाती हूँ, तभी तो इतनी चिकनी हूँ।

साड़ी उतार कर पलंग पर रखते हुए बोली- अच्छा बताओ, मैं माल लगती हूँ या नहीं?
मैंने आज पहली बार गलत नज़रों से आँख उठाकर देखा तो ब्लाउज-पेटीकोट में सविता भाभी को देखता ही रह गया… क्या मोटी मोटी कसी हुई चूचियाँ थी, ब्लाउज चूचियों से चिपका जा रहा था और निप्पलों के उभार भी साफ़ चमक रहे थे।
भाभी ने इस बीच पेटीकोट ढीला करके नाभि के नीचे बाँध लिया, अब पेटीकोट चूत के थोड़ा ऊपर ही बंधा था, गोरा चमकता पेट और गोल नाभि देखकर मेरा लौड़ा खड़ा हो गया था।
मैं कुछ बोलता, भाभी मेरे सामने सामान्य ज्ञान की किताब झुककर देखने लगीं और बोली- राजेश, यह किताब मुझे दे देना, मैं बीएड की तैयारी कर रही हूँ, उसमें काम आएगी।
झुकने से पेटीकोट उनके चूतड़ों की दरार में फंस गया था और भाभी के उभरे हुए चूतड़ गज़ब के सुन्दर लग रहे थे, मन कर रहा था कि उन पर हाथ फेर दूँ।
वो मुझे खुल कर अपनी जवानी दिखा रही थीं।
उसके बाद भाभी बाथरूम में चली गईं। बाथरूम में झांककर देख सकते थे पर मुझ लौड़ू की देखने की हिम्मत ही नहीं हुई।
आधे घण्टे के बाद भाभी की आवाज़ आई- राजेश, बाहर कोई है तो नहीं?
मैं बोला- नहीं, मेरे अलावा कोई नहीं है।
भाभी बोलीं- तुम जरा इधर तो आओ।
मैं बाथरूम के पास पहुँचा और बोला- क्या बात है?
भाभी ने बाथरूम का दरवाज़ा थोड़ा सा खोला, वो अपने एक हाथ से दोनों नंगे स्तन ढकने की कोशिश कर रही थीं और नीचे तौलिया बांधे थीं।

यह देखकर मेरा लंड पूरा कड़क हो गया था, मुझे अपनी चूचियों की तरफ देखते हुए वो हल्के से मुस्कराते हुए बोलीं- तुम से बातें करने के चक्कर में मैं कपड़े लाना ही भूल गई।
भाभी अपने एक हाथ से खिड़की पर रखी चाबी उठाने लगीं, चाबी उनके हाथों से फिसल गई, वो झुक कर चाबी उठाने लगीं।
इस बीच उनके दोनों हाथ स्तनों से हट गए और दोनों स्तन हवा में लहरा गए, झूलते स्तनों और नुकीली भूरी निप्पल को देखकर मेरे लंड ने पानी छोड़ दिया।
मैं एक टक सविता भाभी के उरोजों को घूरने लगा, भाभी ने भी बेशर्म होते हुए चाबी उठाई और स्तन हिलाते हुए बोलीं- इन संतरों को बाद में देख लेना, अभी तुम यह चाबी लो और जल्दी से ऊपर जाकर मेरी साड़ी और पेटीकोट ले आओ, पलंग पर रखे हैं।
ऊपर जाकर मैं भाभी की साड़ी, ब्लाउज और पेटीकोट ले आया, मैंने भाभी को कपड़े दे दिए।
भाभी जब बाहर निकलीं तो उन्होंने ब्लाउज हाथ में पकड़ रखा था और अपने नंगे दूधिया स्तनों पर गुलाबी साड़ी का पतला सा पल्ला डाल लिया था।
नंगे वक्ष-उभार चमक रहे थे, गुलाबी-चिकने स्तनों ने मेरे दिलो-दिमाग और लंड को घायल कर दिया था।
अपने होंट काटते हुए भाभी पल्लू हटा कर स्तन दिखाते हुए बोलीं- मेरे दुद्दू तुम्हें कैसे लगे? जल्दी बताओ न?
मेरा हाथ अपने लंड पर चला गया, होंटों पर अपनी जीभ फिराते हुए मैंने कहा- आपके दूद्दू बहुत सुंदर हैं।
भाभी भी आह भरते हुए बोलीं- तो देख क्या रहे हो? चूसो ना इन्हें!
उनके सुडौल तने हुए स्तनों और भाभी की अदाओं ने मेरे बदन में बिजली प्रवाहित कर दी थी, मैं बिल्ली की तरह आगे बढ़ा ही था कि तभी दरवाज़े की घण्टी बजी और मौसी की आवाज़ आई।
भाभी पल्ला सही करते हुए ऊपर भागीं और बोलीं- कल ऊपर आना, अच्छी तरह से चूसना… अभी चलती हूँ, बुढ़िया ने देख लिया तो घर से निकाल देगी !
और आँख मारते हुए वो ऊपर भाग गईं लेकिन मेरे लौड़े में न बुझने वाली आग लगा गई थी।
रात भर भाभी की जवानी याद कर कर के मैं अपना लोड़ा सहलाता रहा। बार बार उनके रसीले स्तन मेरी आँखों के सामने आ रहे थे।
मैंने उनके नाम की दो बार मुठ मारी तब जाकर नींद आई।
अगले दिन मौसी जब नाहने जा रही थीं, तभी भाभी की आवाज़ आई- मम्मीजी, आप और राजेश ऊपर आ जाओ, मैंने इडली बनाई है।
मौसी मुझसे बोलीं- राजेश, तू ऊपर जाकर इडली खा ले। मैं जल्दी से नहा कर आती हूँ।
भाभी ऊपर खड़ी सब सुन रही थीं।
मैं ऊपर चला गया।
भाभी मैक्सी में थीं, मुझसे बोली- चलो आज देवर जी ऊपर तो आए ! पहले चाय बनाती हूँ।
भाभी चाय बनाने लगीं।
आज मेरी नज़र बदली हुई थी, भाभी में मैं एक औरत देख रहा था।
पीछे से उनके चूतड़ बहुत सुंदर लग रहे थे।
भाभी ने चाय में दूध डालने के बाद मुड़कर मुझे देखा और मुस्कराते हुए अपनी एक चूची दबाते हुए बोलीं- दुद्दू पीना है?
मैं बोल मौसी आ जाएँगी।

भाभी दरवाज़े के पास गईं और दरवाज़ा बंद कर दिया, बुरा सा मुँह बनाते हुए बोली- बुढ़िया आधे घंटे से पहले नहीं आने वाली! साठ की हो रही है पर ऐसे मल मल कर नहाती है जैसे कि पच्चीस में बदल जाएगी।
फ़िर मुझसे बोली- तुम चूतियों की तरह इतनी दूर क्यों बैठे हो? पास आओ ना !
मैं पास पहुँच गया।
भाभी ने मुस्कराते हुए अपनी मैक्सी की चेन नीचे करी, उनके दोनों दूधिया स्तन बाहर निकाल आए, मुझसे रहा नहीं गया, मैंने दोनों हाथों में उनके स्तन पकड़ लिए और उन्हें 2-3 बार दबा दिया।
भाभी ने मेरे गालों पर एक पप्पी ली और बोलीं- तुम मेरे पीछे आकर इन संतरों से खेलो, साथ ही साथ मैं नाश्ता लगाती हूँ।
भाभी के पीछे आकर उनके कूल्हों से लण्ड चिपकाकर मैं चूचियाँ मलने लगा।
भाभी भी मज़े से दबवाते हुए हुए चाय और इडली का नाश्ता लगाने लगीं।
मेरा यह पहला मौका था जब किसी औरत के नंगे चूचे मैं दबा रहा था।
करीब दस मिनट तक मैं भाभी की चूचियों से खेलता रहा और जी भरकर मैंने उन्हें मसला, चूचियों की निप्पल मैंने घुमा घुमा कर खड़ी कर दीं थीं।
भाभी मुझे हटाकर बोलीं- आओ, अब हम बैठकर नाश्ता करते हैं। तुम्हारी मौसी को तो अभी दस मिनट और लगेंगे।
भाभी ने अपनी चूचियाँ खोल रखी थीं उन पर कटे के दो तीन निशान थे।
भाभी चाय की चुस्की लेते हुए बोलीं- कल रात तुम्हारे भैया ने दो बजे तक सोने नहीं दिया, एक बार मुझे नंगी करके मेरे ऊपर चढ़ जाते हैं तो तीन घंटे से पहले नहीं छोड़ते।
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अपनी चूची पर उंगली रखते हुए भाभी बोलीं- देखो, तुम्हारे भैया ने तुम्हारी भाभी की चूचियों पर कितना काट रखा है।
भाभी की बातों से मेरा लंड सुलगने लगा था, मैंने कहा- आप का बदन भी तो मस्त चिकना है, भैया की तो मौज ही मौज है।
कहानी जारी रहेगी।[email protected]

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