पहली बार ममेरी बहन के साथ
हाय !
मेरा नाम राज़ सोलंकी है। मैं आज आपको अपनी पहली कहानी भेज रहा हूँ। मेरी उमर २७ साल, कद ५’१०”, दिखने में सेक्सी हूँ ।
यह बात करीब ८ साल पुरानी है। तब मेरे बड़े भाई की शादी का अवसर था और घर में सब रिश्तेदार आए हुए थे। उनमें मेरे मामा की दो लड़कियाँ भी थी।
हम सब पास में सोते थे- मेरी मम्मी, मामी, दीदी, फ़िर मेरे मामा की छोटी लड़की, उसके बाद मेरी जान जिसका मैं नाम नहीं बता सकता, उसके पास मैं ! हम पर कोई कभी शक नहीं कर सकता था क्योंकि वो मुझसे ४ साल बड़ी थी। हम दोनों एक दूसरे को पसंद करते थे पर कभी बोल नहीं सके।
शादी के दो दिन पहले की रात थी। हम सब लेट कर बातें कर रहे थे कि मैंने अचानक अपने पैरों पर कुछ महसूस किया। हाथ लगा कर देखा तो उसका पैर था।
मैंने उस से पूछा- यह क्या कर रही हो?
तो उसने बोला- सब को सो जाने दो, मैं बाद में बात करती हूँ।
मैंने कहा- ठीक है !
रात के करीब १:३० बजे होंगे, मैं भी सो गया था, उसने मुझे उठाया और पूछा कि वो मुझे कैसी लगती है।
मैंने कहा- अच्छी लगती हो !
तो उसने पूछा- कुछ करोगे नहीं ?
मैंने उससे पूछा- क्या करना है?
मुझे तब सेक्स के बारे में इतना कुछ पता नहीं था। तब उसने मेरा हाथ ले कर अपने सीने पर रख लिया। मैंने अनजान बनते हुए पूछा- यह क्या है? तब उसने कहा- क्यूँ ! कभी लड़की के साथ सेक्स नहीं किया क्या?
तो फिर मैं बोला- नहीं ! आज पहली बार किसी के वक्ष पर हाथ रखा है।
मैंने उससे पूछा- तुमने कभी सेक्स किया है?
तो उसने बोला- कोशिश की थी अपने बॉय-फ्रेंड के साथ ! पर दर्द हो रहा था तो पूरा मजा नहीं ले सकी !
मैंने कहा- आज क्या इरादा है?
तो वो बोल पड़ी- आज पूरा तो होने से रहा ! क्यूँकि सब पास में सो रहे हैं इसलिए !
फिर उस रात तो सिर्फ ऊपर के काम से ही मन को मसलना पड़ा। लेकिन भैया की शादी के दिन मुझे किस्मत की चाभी मिल गई।
शादी के दिन क्या हुआ कि बारात हमारे गाँव से ४३ किलोमीटर दूर वाले गाँव में जानी थी। सुबह से मेरे तबीयत थोड़ी ख़राब थी तो मैं फेरे होते ही पापा के साथ शाम के ७ बजे वापिस हो रहा था। तभी भैया के किसी दोस्त ने मेरे मामा की लड़की के बारे में कोई फ़िकरा कस दिया और भैया ने सुन लिया। तो भैया ने उन दोनों को भी मेरे और पापा के साथ वापिस भेज दिया।
फिर क्या था, पापा जीप में आगे बैठे थे हम सब पीछे। मैं और वो बहुत खुश हो रहे थे कि आज घर पर कोई नहीं है, आज हमारा काम बन जायेगा। करीब ८:४५ को हम घर पहुँच गए। पापा हॉल में अकेले सो रहे थे। हम तीनों कमरे में अकेले थे। मेरी तबीयत ठीक नहीं होने के कारण वो मुझसे बात करते करते मेरा सर दबा रही थी, उसकी छोटी बहन थोड़ी देर बात करते करते सो गई।
अब क्या था, वहां भैया की सुहागरात हो रही थी, यहाँ मेरी !पहले हम दोनों ने एक घण्टे तक चूमा-चाटी की आपस में।
फ़िर उसने मेरी पैंट खोल दी।