आठ साल बाद मिला चाची से-4
प्रेषक : संदीप शर्मा
मैं चाची को धक्के लगा लगा कर जोर जोर से चोद रहा था और चाची हर धक्के पर वाह मेरे राजा …. और जोर से …. और जोर से …. चोद दो…. आज आग बुझा दी तुमने मेरे राजा मेरी चूत की जैसी बातें बोल रही थी।
हर धक्के पर चाची के मुँह से आवाज निकल रही थी और मेरा जोश और बढ़ रहा था। तभी चाची ने अपनी चूत का पानी एक बार और छोड़ दिया और मैंने भी अपनी पूरी ताकत से धक्के लगाये और दस-बारह धक्कों में ही मैं भी चाची की चूत में ही झड़ गया।
इसके बाद मैं तो काफी देर तक चाची की चूत में ही लण्ड डाल कर पड़ा रहा, लम्बी लम्बी सांसे लेता रहा जब तक कि मेरे शरीर में थोड़ी जान नहीं आ गई और चाची मुझे पकड़ कर सो गई।
कुछ मिनटों के बाद जब मेरे शरीर में थोड़ी सी जान आई तो मैंने देखा कि चाची के बाल अभी भी हल्के गीले ही थे और चाची क्या सुंदर लग रही थी ! मैं क्या बताऊँ आपको !
इस सबके बाद मुझे भूख लग गई थी और मैं यह भी जानता था कि चाची को अगर मैं फिर से चोदना चाहता हूँ तो उनके शरीर में थोड़ी सी जान भी होनी चाहिए जो मैं पहले ही पूरी तरह से निकाल चुका था। मैं उठा, अंडरवियर पहना, फिर रसोई में चला गया। चूंकि चाची के ससुर इंदौर में ही रह चुके हैं और उनके परिवार के कई लोग इंदौर में ही रहते हैं इसलिए उनके पास गैस चूल्हा भी था जिससे मुझे कोई तकलीफ नहीं हुई रसोई में कुछ भी पकाने में।
मैंने रसोई में दूध को शक्कर डाल कर गर्म किया, रात के जो चावल रखे थे उन्हें भूना और गर्मागर्म दूध और चावल लेकर चाची के पास गया, उनको जगाया और खाने के लिए दिया। जैसे ही मैंने चाची को खाने के लिए चावल दिए और चाची ने दूध देखा तो उनका पहला सवाल था- यह किसने बनाया?
मैंने जवाब दिया- मैंने ही बनाया है !
यह सुन कर चाची बोली- भूख लगी थी तो मुझसे बोल देते, मैं बना देती !
और मेरा जवाब था- आप भी तो थक गई थी, अगर मैंने बना दिया तो क्या गलत हो गया? और मैं जानता हूँ आपको भी भूख लगी होगी इस खेल के बाद !
यह सुनना था कि चाची ने मुझे गले लगा लिया और फिर एक प्यारा सा चुम्बन दे दिया और इसके बाद चाची बड़े प्यार से मुझे चुम्बन पर चुम्बन देती रही और मुझे ऐसे चूमती रही जैसे मुझसे ज्यादा प्यारा कोई है ही नहीं उनके लिए इस पूरी दुनिया में।
उसके बाद मैंने उनको अलग किया और अपने हाथों से खाना खिलाया, दूध पिलाया और उनके साथ मैंने भी खाया।