मेरी सहेली और मैं अमेरिका जाकर चुदी-2
मेरी हिंदी पोर्न स्टोरी के पहले भागमेरी सहेली और मैं अमेरिका जाकर चुदी-1
में आपने पढ़ा कि कैसे मैं अपनी सहेली के साथ अमेरिका जाकर फकिंग होल या ग्लोरी होल में चुदी.
अब आगे:
मगर वो लंड अभी भी कड़क था, वैसे ही तना हुआ। मैंने कविता की ओर देखा, उसकी आँखों में भी शरारत थी।
हम अपने होटल वापिस आ गई. और फिर से प्रवीण को फोन लगाया और उसे कहा- यार प्रवीण एक बात बता, वो क्लब के 6 नंबर होल वाला हबशी लड़का हमें मिल सकता है, एक पूरे दिन या पूरी रात के लिए?
प्रवीण ने क्लब में फोन किया और बताया- हाँ मिल जाएगा, बस पैसे लेगा अपने।
मैंने कहा- ठीक है, जितने पैसे कहता है, दे देंगे, मगर हमें वैसे दो बंदे चाहिए, दोनों के लिए एक एक।
प्रवीण बोला- ओ के मैडम, आपका काम हो जाएगा।
अगले दिन करीब 11 बजे वो दोनों हबशी लड़के हमारे रूम में आ गए। मैंने खुद दरवाजा खोल कर उनको अंदर बुलाया।
हम दोनों तो सुबह से ही पी रही थी तो दोनों पूरे सुरूर में थी. हमने उनको भी व्हिस्की ऑफर की मगर उन्होंने सिर्फ बीयर पी।
बस जैसे ही उनको बीयर खत्म हुई, कविता बोली- तो चलो फिर शुरू हो जाओ।
एक लड़के ने पूछा- क्या पसंद करेंगी आप?
कविता बोली- हिंदुस्तान में हमारी बहुत इज्ज़त है, लोग बहुत झुकते हैं हमारे आगे, बहुतों को हमने बहुत जलील किया है, आज हमारा दिल है जलील होने का, हमें अपनी कुतिया बनाओ, हमें हर वो बात कहो, जिस से हमें ज़लालत महसूस हो, हमारी माँ बहन बेटी, बहू, हर किसी को गाली निकालो। बस ये समझो कि हम तुम्हारी गुलाम हैं, और तुम जैसे चाहो हमें चोदो, बस माँ चोद कर रख दो हमारी।
मैंने कविता से कहा- अरे पागल है क्या? ये क्या बकवास कर रही है। उनके जिस्म देखे हैं, कितने तगड़े हैं, इनका तो एक एक झापड़ भी नहीं सह पाएँगी हम।
वो बोली- अरे वह क्या आइडिया दिया!
फिर उन लड़कों से बोली- सुनो लड़को, तुम चाहो तो हमें पीट भी सकते हो, पर हमें नंगी करने के बाद।
मैं तो अवाक सी खड़ी कविता को देखती रही.
मगर इतने में ही एक लड़के ने आगे बढ़ कर मेरा नाईट गाउन खींचा और एक झटके से उतार दिया। अब नाईट गाउन के नीचे मैंने कुछ पहना नहीं था तो मैं तो एक सेकंड में नंगी हो गई।
इतने में दूसरे लड़के ने कविता का भी नाईट गाउन खोल कर उसे भी नंगी कर दिया। पहले उन्होंने हम दोनों को उसी नंगी हालत में ऊपर से नीचे तक देखा। हमारे बड़े बड़े मम्मे, चौड़े कूल्हे, मोटी मोटी जांघें, बेशक हम सब साफ सफाई करके आई थी.
मगर फिर भी अब हम दोनों चालीस साल के करीब पहुँच चुकी थी, तो तब जिस्म में वो 20 साल की लड़की वाला करार तो नहीं था पर अपने आप को फिट रख कर हम दोनों आज भी इतनी कामुक तो दिखती थी कि किसी भी मर्द का मन हरामीपन से भर दे और वो हमें चोदने के सपने बुनने लगे।
मैंने कहा- आप लोगों ने हमें तो नंगी कर दिया, अपने कपड़े भी तो उतार कर हम अपने खूबसूरत जिस्म दिखाओ।
उन दोनों ने अपने कपड़े उतार दिये। गहरे भूरे या कुछ कुछ काले रंग के बदन, मगर कसरत करके बहुत ही तराशे हुये। नीचे लटक रहे दोनों 7 इंच लंबे और मोटे लंड, जिनके हल्के भूरे टोपे भी बाहर निकले हुये थे।
मैं एक हबशी लड़के के सामने जाकर घुटने टेक कर बैठ गई, उसका ढीला सोया हुआ लंड मेरे चेहरे के बिल्कुल सामने, बिल्कुल पास था। मैंने उसका लंड हाथ में पकड़ा और उसके टोपे को चूमा।
वो बोला- क्या आपको मेरा लंड पसंद आया?
मैंने कहा- हाँ, बहुत पसंद आया, तभी तो तुम्हें यहाँ बुलाया है क्योंकि ग्लोरी होल में मुझे वो मज़ा नहीं आया जो मैं चाहती थी।
वो बोला- आपको मेरे लंड में ऐसा क्या खास लगा?
मैंने कहा- आप लोगों में और हिंदुस्तानी मर्दों में बहुत फर्क है। जितना आपका लंड इस ढीली सोई हुई हालात में है, इतना तो हिंदुस्तानी मर्दों का पूरा अकड़ने के बाद भी नहीं होता। मेरे पति का पूरा तना हुआ लंड सिर्फ छह इंच का है, और तुम्हारा ढीला लटका लंड भी सात इंच का है, और जब ये पूरा खड़ा होगा तो ये 10 इंच तक जाएगा।
वो बोला- पूरे 11 इंच।
मैंने कहा- तो, यही तो बात है, इतना शानदार साइज़, क्या लंबाई, क्या मोटाई … और जब ये अंदर जाता है, तो लगता है, पेट तक पहुँच गया। इसी लिए तो आजकल हिंदुस्तानी औरतों को नीग्रो लड़के बहुत पसंद आ रहे हैं।
कविता बोली- और सिर्फ इसी वजह से हम अपने पति, अपने बच्चे, अपना परिवार, अपनी मान मर्यादा सब छोड़ कर यहाँ आई हैं, अपनी माँ चुदवाने।
हम सभी हंस पड़े।
तो वो लड़का बोला- तो फिर सोच क्या रही हो रंडी की औलादों, चलो अपने अपने यार के लंड चूसो, इन्हें खड़ा करो ताकि हम तुम रंडियों की माँ चोद सकें।
इसमें हमें क्या दिक्कत थी, मैंने और कविता दोनों ने उन लड़कों के लंड पकड़े और लगी चूसने।
एक बात है, दुनिया भर में कहीं भी चले जाओ, साला मर्द के लंड का स्वाद हमेशा एक सा ही होता है.
कोई 2 मिनट की लंड चुसवाई में ही दोनों लड़कों के लंड टन्न टनाटन हो गए। फिर वो दोनों लड़के एक साथ खड़े हो गए, मुझे दोनों लंड पकड़ा दिये, चूसने को और कविता को उन्होंने खड़ा
कर लिया और दोनों उसके होंठ, गाल मम्मे सब चूसने चाटने लगे।
मैंने भी दोनों लड़कों के लंड और आण्ड सब चूसे चाटे। फिर पहले मुझे बिस्तर पर लेटाया गया और एक लड़का मेरी फुद्दी चाटने लगा, और दूसरा मेरी छाती पर चढ़ बैठा और अपना लंड उसने मेरे मुंह में ठूंस दिया।
कविता भी मेरे पास ही लेटी थी। वो लड़का कभी अपना लंड मेरे मुंह में डालता, कभी कविता के मुंह में! हम दोनों सहेलियों के थूक से तर हुआ लंड बारी बारी से एक दूसरी के मुंह में आ जा रहा था, और हमें इस तरह से एक दूसरी का थूक चाटने में भी कोई दिक्कत नहीं थी।
फिर उस लड़के ने कविता को उसके बालों से पकड़ा और उसका मुंह मेरे मुंह पर रख दिया।
“चूस कुतिया, इस कुतिया की जीभ चूस, इसके होंठ चाट हराम की जनी।”
मैं और कविता एक दूसरी के होंठ चूसने लगी, तो उस लड़के ने भी अपनी लंबी जीभ निकाल कर हम दोनों के होंठों के बीच फंसा दी, हम दोनों अपनी जीभों से उसकी हबशी की गुलाबी जीभ चाट रही थी, मगर मेरी तो फुद्दी की भी चटाई हो रही थी तो मैं तो ज़्यादा तड़प रही थी।
फिर जो लड़का मेरी फुद्दी चाट रहा था, उसने कविता को सीधा करके लेटाया, और उसकी फुद्दी चाटने लगा।
गर्म, कामुक कविता तड़प उठी, उसकी आँखों से आँसू बह निकले, वो बड़े ही कातर स्वर में बोली- प्लीज चोदो मुझे! मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकती, अपना मोटा लंड मेरी फुद्दी में डालो यार, प्लीज़। वो घिघिया रही थी।
हबशी लड़का बोला- नहीं, मुझे तेरी चूत नहीं मरनी, बोल तू और किस की चूत मुझे दिलवायेगी?
कविता बोली- जिसकी तुम कहो, मेरी सहेली पास लेटी है, इसकी मार लो, मेरी मार लो, और जिसको कहोगे मैं दिलवा दूँगी।
उस हबशी लड़के ने कविता के सर के बाल पकड़ कर खींचे और उसके मुंह पर थूक दिया- साली, मादरचोद, मुझे तेरी माँ की चूत मारनी है, दिलवाएगी कुतिया, बोल?
कविता बोली- हाँ दिलवा दूँगी, मेरी माँ की भी दिलवा दूँगी।
वो फिर बोला- और तेरी बहन की?
कविता बोली- हाँ, उसकी भी मार लेना।
वो फिर गरजा- और तेरी जवान बेटी की?
कविता तो फूट पड़ी- हाँ, मेरी बेटी अभी छोटी है, पर जवान हो चुकी है, हाँ उसकी भी मार लेना, पर अभी मेरी मारो, प्लीज़ यार, मेरी मारो पहले।