दो जवान बेटियों की मम्मी की अन्तर्वासना- 6
भाभीजी की चूत चुदाई कहानी में पढ़ें कि भाभी ने मुझे अपने घर में रोक कर सुला लिया और रात को मेरे पास आ गयी. मैंने उस गर्म भाभी की फुद्दी को कैसे चोदा?
मैंने सरोज से कहा- यह तो आपने बहुत ही पक्का अरेंजमेंट किया है.
सरोज कहने लगी- राज हम आराम से जब मर्जी अपना काम कर लिया करेंगे.
मैंने कहा- बिल्कुल ठीक है, यदि मैं मेरे पुराने कमरे में रहता और बार- बार आपके यहां आता जाता या आप वहां आती जाती तो लोग शक करते.
सरोज कहने लगी- लोगों की तो मुझे वैसे भी परवाह नहीं है.
अब आगे की भाभीजी की चूत चुदाई कहानी:
मैंने सरोज भाभी के टॉप को ऊपर सरकाया और उनके मम्मों को सहलाने लगा.
सरोज भाभी एकदम उठी और उन्होंने ड्राइंग रूम की सारी लाइटें बंद कर दी. बस ड्राइंग रूम के रोशनदान से बाहर की स्ट्रीट लाइट आ रही थी.
मैंने सरोज को अपनी गोदी में बैठा लिया. मैं एक हाथ से उसके मम्मे को और एक हाथ से सरोज की चूत को मसलने लगा. थोड़ी देर में सरोज सिसकियां भरने लगी.
सरोज थोड़ा ऊपर उठी और मेरे लंड को लोअर में से निकाल कर अपने गालों से लगाने लगी. सरोज कभी मेरे लंड को चूमती, कभी होठों के ऊपर रगड़ती और कभी उसको मुंह में भर लेती.
इसके बाद सरोज पलटकर पेट के बल लेट गई. मैंने सरोज की स्कर्ट को उसके चूतड़ों से ऊपर उठाया और उन पर हाथ फिराने लगा. क्या गजब के चिकने और भरे हुए सॉलिड चूतड़ थे. उस दिन सरोज के अंदर से खुशबू आ रही थी. सरोज ने मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया.
सरोज बोली- राज तुम्हारे पास तो बहुत ही मस्त चीज है.
मैंने पूछा- क्या आपके हस्बैंड का इतना नहीं है?
सरोज कहने लगी- कहाँ, उनका तो बिल्कुल ही छोटा सा, पतला सा है. अब तो हमारे बीच कई साल से यह संबंध ही नहीं हुआ है.
सरोज चाहती थी कि मैं एक बार उसको नीचे लिटा कर रगड़ के चोद दूं. उसने अपने मुंह से लंड निकाला और एकदम मेरे साथ दीवान पर लेट गई.
उसने मुझे भी अपने ऊपर खींच लिया और कहने लगी- राज, एक बार मेरी चूत की प्यास बुझा दो, बाद में करेंगे यह सब, अब तो हमारे पास टाइम ही टाइम है, एक बार तुम अपने लौड़े का कमाल दिखाओ, मैं तो इसको पिक्चर हॉल में हाथ लगाकर ही पागल हो गई थी.
मैंने अपने दोनों कपड़े निकाले और मैं बिल्कुल नंगा हो गया. मैंने सरोज के टॉप को बाहर निकाल दिया और उसकी स्कर्ट के इलास्टिक में उंगलियां देकर नीचे खींच दिया. सरोज ने अपने हिप्स को ऊपर उठाया और उनसे स्कर्ट को नीचे गिरा दिया.
सरोज की चिकनी और गोरी जांघें और पाव रोटी सी फूली हुई चूत मुझे बहुत ही सुंदर लग रही थी. लेकिन लाइट कम होने की वजह से मैं अच्छी तरह से मजा नहीं ले पा रहा था. मैंने सरोज से कहा- भाभी कुछ दिखाई तो दे नहीं रहा है, इतने मन से आज तैयार हुई हो, बेडरूम में चल कर करें.
सरोज बोली- एक मिनट रुको. सरोज ने दोनों कपड़े पहने, दोबारा अपने बेडरूम से होती हुई पिछले आंगन में जो गैलरी खुलती थी, उस गैलरी का दरवाजा बंद किया और बेडरूम के सारे पर्दे लगाकर लाइट जला दी.
मैं सोच रहा था कि औरत जब कामवासना में डूब जाती है तो वह अपनी प्यास बुझाने के लिए कुछ भी कर सकती है. क्योंकि भाभी ने जवान लड़कियों के बीच में से कैसे मुझे अपनी प्यास बुझाने के लिए, अलग से अपने लिए अंदर रख लिया था.
सरोज ने मुझे बेडरूम में आने का इशारा किया. मैं भी अपने दोनों कपड़े उठाकर नंगा ही सरोज के बेडरूम में चला गया.
मैंने सरोज से पूछा बच्चे तो नहीं आ जाएंगे?
सरोज कहने लगी- दोनों लड़कियाँ मुझसे बहुत डरती हैं. तुम चिंता मत करो. उधर से गैलरी बंद है जिससे पीछे आंगन में कोई नहीं आ सकता और इधर से ड्राइंग रूम का दरवाजा तुमने बंद कर रखा है, इसलिए आज की रात पूरी मस्ती करेंगे.
यह सुनते ही मैंने सरोज को बांहों में उठा लिया और उसको जगह जगह से चूमने लग गया. सरोज तो दो दिन से वासना में डूबी हुई थी, उसने एकदम मेरा लण्ड पकड़ लिया.
सरोज ने दोनों कपड़े निकाले और चौड़ी टांगें फैला कर बेड पर लेट गई और मुझसे कहने लगी- आओ मेरे राजा, चोदो अपनी रानी को.
पहली बार मैंने रोशनी में सरोज भाभी का सुंदर, चिकना और सेक्सी शरीर देखा. भाभी का शरीर इतना गुदाज़ था कि जहां भी हाथ लगाओ, वही चीज मक्खन मलाई लग रही थी. सरोज भाभी के बड़े बड़े मम्मे बिल्कुल सुडौल और सख्त थे. भाभी के सुंदर पेट, चिकनी चूत और चूची देखकर यह कोई नहीं कह सकता था कि वह दो बच्चों की माँ है.
मैंने भाभी की जांघों पर हाथ फिराया और थोड़ा उनके घुटनों को मोड़ा तो भाभी की बहुत ही सुंदर अंदर से गुलाबी रंग लिए उनकी चूत दिखाई दी. गुलाबी छेद के अंदर पानी चमक रहा था. चूत के ऊपर दो छोटी छोटी है पिंक कलर की पत्तियां थी, भाभी का पेट बिल्कुल नर्म गुदाज़ और साफ था.
भाभी की जांघों, चूत और पेट के नीचे का हिस्सा उभरा हुआ और सुडौल था. भाभी की चूत इतनी साफ और सुंदर थी कि कुंवारी लड़कियों की तरह से चमक रही थी.
जब मैंने भाभी से पूछा तो उन्होंने बताया- मैं आज बिकिनी वैक्स करवा कर आई हूं.
मैंने पूछा- बिकिनी वैक्स क्या होता है?
तो भाभी ने कहा कि ब्यूटीशियन सारे शरीर पर से सारे रोवें खत्म कर देती है. यहां तक की चूत के ऊपर भी वह एक लेप लगाकर इसको भी साफ- सुथरी और सुंदर बना देती है.
मैंने भाभी से कहा- भाभी, अब तो यह आपको बार बार करवाना पड़ेगा?
भाभी कहने लगी- कोई बात नहीं मेरे राजा, मैं तुम्हारे को वह मजा दूंगी कि तुम याद रखोगे कि कोई मिली थी.
सरोज भाभी का बेडरूम इतना सुंदर था कि हर चीज नई और सुंदर तरीके से सजी हुई थी. ऐसा लग रहा था जैसे किसी रानी का बेडरूम हो. और भाभी भी सचमुच में रानी जितनी ही सुंदर लग रही थी. मैं अपने आप को खुशकिस्मत समझ रहा था कि इतनी सुंदर और पढ़ी लिखी लेडी की चूत में मेरा लण्ड जाने वाला है.
मैं भाभी के घुटनों की तरफ आ गया. मैंने घुटनों को खोला, अपने लंड को हाथ में पकड़ा और भाभी की चिकनी हुई चूत में लण्ड ऊपर नीचे चलाने लगा. मैंने भाभी के क्लीटोरियस को लण्ड से रगड़ना शुरू किया.
भाभी आहें भरने लगी.
लंड और चूत दोनों ही अपने अपने रस से चिकने हो चुके थे. भाभी जब मेरा हाथ पकड़कर अपनी ओर खींचने लगी तो मैंने अपने लण्ड के सुपारे को भाभी की चूत के छेद पर टिका दिया और धीरे धीरे लौड़ा अंदर करने लगा.
भाभी ने अपनी आंखें बंद कर ली और अपने नीचे वाले होंठ को दांत से दबा लिया.
दो मिनट तक मैं भाभी की चूत के छेद पर सुपारे को ही अंदर बाहर करता रहा. जब मैंने देखा कि भाभी तो बिल्कुल चुदवाने के लिए तैयार हैं तो मैंने लण्ड को आगे करते हुए एक झटके में सारा लंड भाभी की चूत में उतार दिया।
भाभी के मुंह से एक जोर की आवाज निकली- आ…आ… बहुत मजा आया.
अब भाभी ने एकदम अपने हाथ मेरी कमर के चारों तरफ कस लिए और बोली- राजा, जोर जोर से करो, बहुत जोर से करो, चोद दो मेरी चूत को, मेरी प्यास बुझा दो, करो … जोर … जोर … से … मैं जोर जोर से लंड अंदर- बाहर करने लगा.
मैंने भाभी की दोनों टांगों को अपने कंधे पर रख लिया और जोर जोर से लण्ड को भाभी की चूत में पेलने लगा.
भाभी बोलती रही और … जोर … जोर … से …
मैंने पूरा जोर लगाकर धकाधक अपनी स्पीड बढ़ा दी.