बारिश का दिन
मेरा नाम गौरव है और मेरी गर्लफ्रेंड का नाम जूली है।
मैं आज आप लोगों के सामने एक सच्ची घटना लेकर आया हूँ।
बात उन दिनों की है जब हम लोग कॉलेज में पढ़ा करते थे। जुलाई का महीना था और हम दोनों कॉलेज में घूम रहे थे, हम दोनों एक दूसरे को बहुत पसंद करते थे और अकसर साथ में समय बिताते थे। हर रोज की तरह हम उस दिन भी साथ में घूम रहे थे। उस दिन जूली ने जींस और टीशर्ट पहन रखी थी। वो उस दिन कुछ अलग सी लग रही थी मगर मैंने उसकी तारीफ नहीं की थी।
अचानक से बारिश होने लगी और हम दोनों एक कमरे में चले गए, हम दोनों थोड़ा सा भीग गए थे, मेरा मन उसे देख कर कुछ मचलने लगा था क्योंकि उसकी टीशर्ट गीली हो गई थी।
फिर हम लोग एक दूसरे से बाते करने लगे। तभी उस की नजर बाहर एक दृश्य पर पड़ी और वो शरमा गई और हंसने लगी तो कौतूहलवश मैंने भी देखा। वहाँ पर वही दृश्य चल रहा था जो भारत में गलियों, सड़कों पर आम तौर पर देखने को मिल जाता है। इस दृश्य को देख कर तो मेरा भी मन होने लगा था। मैं जूली के थोड़ा पास जाकर बैठ गया। उसने भी कोई आपति नहीं की। फिर मैंने उसके हाथों को पकड़ा, वैसे तो हम हमेशा हाथ पकड़ते थे मगर उस दिन उसके हाथों में एक अलग सा एहसास हुआ, मैंने हिम्मत जुटा कर उससे सेक्स के बारे में पूछा कि उसने पहले कभी किया है तो वो शरमाते हुए बोली- हट पागल ! यह भी कोई पूछने की बात है।
फिर उसने बताया कि उसने कभी किया तो नहीं है मगर उसे सब पता है।
तो मैंने पूछा- कैसे पता?
तो उसने बताया कि उसके भैया की नई शादी हुई है और उसके भैया रोज वही करते हैं।
तो मैंने पूछा- तुमने कैसे देखा?
तो वो बोली- भैया का कमरा मेरे कमरे के बगल में है और कमरे में एक छोटा सा छेद भी है, मैं वहीं से सबकुछ देखती हूँ !
इतना सुनने के बाद तो मेरा खड़ा होने लगा। न उसने भी शायद यह बात नोटिस कर ली थी। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉंम पर पढ़ रहे हैं।
फिर मैंने अपने ऊपर काबू किया और उसको चुम्बन के लिए बोला। वो शरमाते हुए नीचे देखने लगी। मैं समझ गया कि गुरु यही मौका है, ले लो चुम्मी !
मैंने उसे पीछे से पकड़ कर बाहों में भर लिया और जोर से चूम लिया। उसने भी मेरा साथ दिया लेकिन उस कमरे में कोई और भी था जो यह सब देख रहा था तो हम लोग वहाँ से निकल लिए।
बाहर का मौसम और भी सुहाना हो गया था, उसने मुझे अपने घर चलने को कहा, उसका घर वहीं थोड़ी ही दूर था। मैंने भी मना नहीं किया और हम दोनों उसके घर पहुँच गए। उसके पापा और मम्मी दोनों ही सरकारी नौकरी में थे तो घर पर कोई नहीं था।
उसने मुझे बाहर वाले कमरे में बिठा दिया और अन्दर चली गई।
मेरे तो तन-बदन में आग लगी हुई थी तो मैं भी उसके पीछे-पीछे चला गया, उसने शायद मुझे आते हुए देख लिया था तभी तो उसने दरवाजा पूरा बंद नहीं किया और एक एक करके अपने कपड़े उतारने लगी।