कॉलेज़ की दोस्त
प्रेषक : पंकज मयूर
मैं आज आपको एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ।
यह कहानी मेरे साथ १० दिन पहले हुई एक घटना है।
मैं एक विद्यार्थी हूँ और बी ए के पहले साल में पढ़ता हूँ।
मैं कॉलेज में जब नया नया गया तो कुछ दिनों बाद ही हमारा एक नया ग्रुप बन गया जिसमें ३ लड़के और ८ लड़कियाँ थी। हम सब हर रोज एक साथ ही बैठते थे क्लास में, क्योंकि हमारी क्लास में पूरे लम्बे लम्बे बैंच थे जिस पर तक़रीबन ८ से १० विद्यार्थी बैठ सकते थे। जब भी हमारा कोई पीरियड फ्री होता तो हम सब या तो कैंटीन में बैठ जाते थे या फिर ग्राउंड में बैठ जाते थे। हम सब दोस्त आपस में अपनी सभी बातें करते थे एक दूसरे के साथ, यहाँ तक कि निजी बातें भी।
कई बार मैंने शेफाली यानी हमारे ग्रुप की एक लड़की को मेरी तरफ गौर से देखते हुए देखा। वो टकटकी लगा कर मुझे ही देख रही होती थी। यह सिलसिला काफी दिनों तक चला तो मुझे महसूस हुआ कि उसे मुझमें रूचि है। वो हर किसी से मेरे बारे में ही बात करती थी। यह सब देख कर मुझे भी उसमे रूचि बढ़ने लगी। उसके बाद जब भी हम कभी कैंटीन या क्लास में बैठते तो वो और मैं एक साथ बैठने लगे।
आपको मैं बताना तो भूल ही गया कि उसका रंग एक दम सफ़ेद था, वह थोड़ी पतली थी जिससे बहुत सेक्सी लगती थी। उसका फिगर ३४-२६-३६ के करीब होगा।
एक दिन मैंने सोचा क्यों न इससे बात की जाए इस बारे !
तो मैंने उससे पूछा कि क्या तुम मुझ से प्यार करती हो? मेरे इस सवाल से वो हक्की बक्की रह गई और चुप चाप खड़ी रही। तो मैंने उससे फिर से कहा कि जवाब तो दो !
तो वो शरमाते हुए वहां से भाग गई और बोली कि मुझे नहीं पता !
तो मैं समझ गया कि आग तो दोनों तरफ लगी है। मैंने उससे अगले दिन फिर जवाब माँगा तो उसने धीरे से हाँ कर दी और कहने लगी कि ग्रुप में इस बारे में किसीको पता नहीं चलना चाहिए तो मैंने हाँ में जवाब दिया क्यों कि मैं भी यही चाहता था। इस तरह हम दोनों में बातें गहरी होती गई और सारी सारी रात हम दोनों फ़ोन पर बात करने लगे।
एक दिन हम दोनों ने मूवी देखने की सोची और वो मान गई। मूवी लगी थी- दोस्ताना !
हम सुबह ही कॉलेज से निकल गए और थिएटर जाकर टिकेट ख़रीदे। हमें एक तरफ कोने की सीट मिली और अन्दर की तरफ मैं बैठ गया और बाहर उसे बिठाया।
पिक्चर शुरू हो गई। शुरुआत में ही शिल्पा शेट्टी के गर्म दृश्य आने लगे। मैं गरम होने लगा, मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और सहलाने लगा। उसने कुछ नहीं कहा तो काफी देर तक मैं ऐसे ही उसके हाथ के साथ अपना हाथ फेरता रहा। मैं पूरा गरम हो चूका था पर मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी कि मैं इससे आगे बढूँ !
इतनी देर में मुझे पता ही नहीं चला कि कब मध्यांतर हो गया और मैं कोल्ड ड्रिंक्स लेने बाहर चला गया।