गलती की सजा-1
मैं चन्दन पटना का रहने वाला हूँ, आप सभी अन्तर्वासना के पाठकों को लण्डवत प्रणाम करता हूँ।
मैं आज आपको जो कहानी पेश करने जा रहा हूँ यह कहानी एकदम सच्ची कहानी है।
यह बात उन दिनों की है जब मैं पढ़ता था। मेरा घर तीन मंजिला है और आसपास के घरों में सबसे ऊँचा है। मैं हर दिन पढ़ने का बहाना करके छत पर चला जाता था और वहाँ जाकर छत से नीचे इधर-उधर देखता था। मेरे घर के आसपास बहुत सारी लड़कियाँ रहती हैं।
एक घर में दो बहनें रहती हैं जिनका नाम माधुरी और सुन्दरी है उन दोनों की उम्र करीब क्रमशः 22 और 24 है। दोनों बहनें कसम से क्या मस्त लौंडियाँ हैं, दोनों की शादी नहीं हुई है।
मेरा तो उन दोनों को देख कर चोदने का मन करता था लेकिन मुझे सुन्दरी ज्यादा पसंद थी क्योंकि वो बहुत गालियाँ देती है।
उन लोगों का बाथरूम जहाँ वो नहाती हैं, एकदम मेरे घर के पिछवाड़े में नीचे है, मैं हर दिन आराम से उन दोनों के नहाने का इंतज़ार करता था और सबसे ज्यादा सुन्दरी को नहाते देखता था।
कसम से! क्या खूबसूरत बदन है उसका! फिगर 36-30-36 है। जब वो नहाती है तब उसका गोरा, गदराया बदन देख कर मेरा तो 7 इंच का लण्ड भड़कने लगता है। मैं हर रोज उसे नहाते देख कर मुठ मारता था और गर्म-गर्म वीर्य कागज पर लेकर उस पर नीचे उसके नहाते समय ऊपर से गिरा देता था।
क्या मजा आता था!
मैं जब-जब उसकी गोल-गोल चूचियाँ देखता था, मेरा मन उन चूचियों दबा कर पीने को आतुर हो जाता था। माल ही ऐसा है!
मेरी यह शरारत बहुत दिन तक चली। एक दिन सुन्दरी को लगा कि मैं ऊपर से देख रहा हूँ तो उसने तुरंत साया अपने सरीर पर अच्छी तरह से लपेट कर पास के किसी कमरे में चली गई।
मैं तो डर गया, मेरी तो गाण्ड फटने लगी कि अगर उसने मेरे घर में कह दिया तो मेरे पापा मुझे बहुत मारेंगे।
मैं 2-3 दिन के लिए यह काम छोड़ दिया। फिर भी कहाँ मेरे मन उस गदराये बदन को देखे बिना मान रहा था। मैंने फिर से देखना शुरु कर दिया, फिर से मेरी मस्ती शुरु हो गई।
एक दिन मेरा वीर्य निकलने में देर हो गई और उसका नहाना खत्म हो गया और वो कपड़े पहन रही थी, तभी मेरा निकल गया और मैं उसके ऊपर डालने लगा।
फिर क्या! उसे किसी गर्म पदार्थ का अनभव हुआ और वो ऊपर की तरफ देखने लगी तो उसने मुझे देख लिया, फिर मुझे गालियाँ देने लगी…
मादरचोद… जा जाकर अपनी माँ का देख!
बहनचोद…जा जाकर अपनी बहन का बदन देख!
हरामी…! साला..!
मेरी तो उस दिन गाण्ड सूख गई, मैं तो पछता रहा था, अगर घर में पता चल गया तो मेरी खैर नहीं है।
मैं फिर सच में बहुत दिनों तक छत पर नहीं गया, मुझे बहुत डर हो गया था।
एक दिन मैं अपने घर के पास के बाग में गया जहाँ हमारे कुछ फलों के वृक्ष हैं।
वहाँ पास में ही सुन्दरी के परिवार की भी जमीन है लेकिन वहाँ कुछ भी नहीं था सिर्फ पुराने बाथरूम के जो तब कोई प्रयोग नहीं करता था।