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पड़ोसी लड़कियों की छोटी गांड चुदाई का मौक़ा मिला- 2

Story Hindi 4 pages 13 years ago

पड़ोसी लड़कियों की छोटी गांड चुदाई का मौक़ा मिला- 2
गांड गांड का खेल मैंने अपने पड़ोस की कई लड़कियों के साथ खेला. एक लड़की की गांड में पहली बार लंड पेला तो उसको बहुत दर्द हुआ, वो चीख पड़ी. तब क्या हुआ?
साथियो, मैं आपको अपनी सेक्स कहानी में उस समय का किस्सा सुना रहा हूँ जब इंटरनेट नहीं के बराबर था और हम सब गांड चुदाई वाले सेक्स का मजा ले रहे थे.
कहानी के पहले भागपड़ोसी लड़के लड़की को गांड गांड खेलते देखा
में अब तक आपने पढ़ा था कि मैंने सपना की गांड में लंड पेला तो उसे दर्द हुआ और वो चिल्ला उठी.
उसकी आवाज सुनकर मेरी बहन मोनी आ गई और पूछने लगी. मैंने उसे बताया कि वो गिर गई थी.
अब आगे गांड गांड का खेल:
फिर मोनी बोली- अब मुझे भूख लगी है, मैं अपने घर जा रही हूं.
मैं भी बाहर आ गया.
कमरे के बाहर सब मिले, फिर सबने लंच के बाद मिलने को बोला.
हम सब वहां से आ गए.
मैंने घर में आकर देखा तो मम्मी घर में नहीं थीं.
सोनी खाना ले आई और हम तीनों भाई बहनों ने साथ में खाया.
मैंने जल्दी से खाना खत्म किया और उन दोनों से पहले कल्लू के घर में आ गया.
वो सब खाना खा रहे थे.
मैं भी उनके पास ही बैठ गया.
खाना खाने के बाद सौरभ ने मुझसे कहा- चल बाजार घूमने चलते हैं.
पर मैंने मना कर दिया और वो कल्लू के साथ चला गया.

मैं सपना और सुची के साथ उनके कमरे में चला गया.
वहां जाकर मैंने सपना से पूछा- अब भी दर्द है क्या?
सपना- अब तो ठीक हूँ. वो तो थोड़ी देर हुआ था, फिर ठीक हो गई थी.
मैं- तो फिर से वो ही खेल खेलें?
सपना- हां चलो खेलते हैं.
सुची- यहां नहीं, कोई आ जाएगा. ऊपर चलो.
हम ऊपर आ गए तो मैंने आते ही अपना शॉर्ट्स नीचे करके खड़ा लंड दिखाया तो सुची ने भी अपनी सलवार उतार दी.
वो बोली- पहले मेरी में करो.
मैं उसके पीछे गया और गांड में लंड फंसा कर धक्का दे मारा.
सुची धक्का लगाने से आगे को सरक कर गिर गई.
मुझे लगा उसको चोट लग गई.
पर वो खड़ी हुई और दीवार पर हाथ रख कर बोली- अब डाल.
मैंने फिर से लंड पेल दिया और धक्के लगाने लगा.
वो लुच्ची मस्ती से गांड मरवा रही थी तो सपना हमें देख कर गर्म होने लगी.
वो बोली- समझ गई, अब मुझे भी करने दो.
सुची बोली- थोड़ी देर रुक जा, फिर कर लेना.
वो साली फिर से मम्मी को बताने की धमकी देने लगी.
सुची मुझसे बोली- पहले इस कुतिया के साथ ही खेल ले, मैं बाद में खेल लूंगी.
सपना ने अपनी स्कर्ट उठा दी, तो मैंने उसकी चूत देखी और बोला- सपना तेरे आगे से कर लूं?
तो सुची बोली- नहीं, आगे से कभी मत करना … वर्ना बच्चा हो जाएगा और सबको पता चल जाएगा.
हम सब डर गए और सपना झुक गई.
मैंने उसके सुराख में लंड डाल दिया.
इस बार लंड पूरा घुस गया.
वो दर्द से बिलबिला उठी और दीवार पर चिपक गई.
इससे लंड तो बाहर निकल आया पर सुराख खुलने से उसे दर्द हो रहा था.
तब लुच्ची हंसती हुई बोली- बड़ी जल्दी थी … अब फट गई.
सपना को गुस्सा आ गया.

उसने बोला- निक्कू तू घुसा … कितना भी दर्द हो, मैं बाहर नहीं निकालूंगी.
ये कह कर वो फिर से झुक गई.
मैंने लंड धीरे धीरे से डाला.
और सपना ने भी हिम्मत दिखाई तो अबकी बार वो हिली भी नहीं.
मैंने धक्के लगाने शुरु कर दिए, वो भी शांति से अपनी गांड में रगड़ कर मजे लेती रही.
तभी दरवाजा खुल गया और हमारी गांड चौड़ी हो गई क्योंकि हम दरवाजा अन्दर से बंद करना भूल गए थे.
मैं लंड निकाल कर शॉर्ट ऊपर करने लगा तो सपना भी सीधी खड़ी हो गई. उसकी स्कर्ट नीचे गिर गई.
हमने देखा तो हमारी सांस में सांस आई.
वो मेरी दोनों बहनें थीं.
तब सुची उनसे बोली- और कोई तो नहीं आ रहा?
मोनी बोली- हम दोनों तो अकेले आए हैं.
सुची- सौरभ और कल्लू नीचे हैं?
मोनी- वो दोनों नीचे नहीं हैं शायद बाजार गए हैं.
सोनी- रूम क्या खेल रहे हो?
सुची- छुपम छुपाई.
सोनी मोनी- हम भी खेलेंगे.
सपना- मैं नहीं खेलूंगी.
सुची हंसने लगी- चलो हम खेलते हैं.
हम सब हाथ पर हाथ रख ओड वन आउट करने लगे.
मैंने और सुची ने आंख मारी और हाथ को एक जैसे करने लगे तब सोनी का ओड हो गया. उसको ढूंढने के लिए जाना पड़ेगा.
तब सोनी बाहर निकल गई और हम सब छुपने लगे.
सपना ने मुझे बुलाया और मेरे कंधे पर हाथ रख कर चलने लगी.
मैं समझ गया और उसे कमरे के बाहर रखी वाली फोल्डिंग पर बैठा दिया.
उसे बाद मैं और सुची एक जगह छुप गए.
सुची सलवार उतार कर आ गई और मैं उसकी गांड में धक्के लगाने लगा.
थोड़ी देर में मेरी बहन सोनी आ गई और उसने हमें गांड रगड़ते हुए देख लिया.
वो भी चुप होकर आ गई और बोली- मुझे भी खेलना है.
सुची बोली- इसका बड़ा है. तुझे दर्द होगा. तू सपना की तरह चल भी नहीं पाएगी.
सोनी बोली- ज्यादा मत घुसाना थोड़ा सा घुसवा कर खेल लूंगी.
मैंने क़हा- चल ठीक है. सलवार उतार नीचे.
सोनी ने अपनी सलवार और पैंटी उतार दी और घोड़ी बन गई.
मैंने पीछे से लंड उसकी गांड के छेद पर रखा तो सुची बोली- थोड़ा थूक लगा ले.
मैंने ढेर सारा थूक लंड पर लगाया और उसके छेद पर भी डाल दिया.
फिर धीरे धीरे से अन्दर डाला तो वो हल्का सा डर रही थी.
पर मैंने रात की तरह पूरा नहीं पेला, सिर्फ टोपी ही अन्दर डाली और हल्का सा हिलाने लगा.
वो गर्दन पीछे घुमा कर देख रही थी कि दर्द न हो.
मैंने प्यार प्यार से उसको मजा दिया.
कुछ मिनट तक अन्दर बाहर करवाने के बाद वो थक गई और बोली- बस अब तुम दोनों खेलो.
मेरी छोटी बहन मोनी छुपी रही क्योंकि उसे ढूंढने वाली हमारी साथ गांड रगड़वा रही थी.
मैंने फिर से लुच्ची के गांड में डाल कर लंड खूब रगड़ा.
जब तक चोदा, तब तक उसकी चुत ने पानी नहीं छोड़ दिया.
हम सब फिर से छुपम छुपाई खेलने लगे.
पर सपना ने नीचे जाकर अपनी मम्मी को दर्द के बारे में बताया, तो उसकी मम्मी ने पूछा- क्या हुआ?
सपना ने बताया कि वो गिर गई.
उसकी मम्मी ने उसकी जांच की तो उन्हें चोट कहीं नहीं मिली.

उसकी मम्मी को लगा कि कुछ हल्की चोट लगी है, तो उसे आराम से लेट जाने को बोल कर उसे कमरे में भेज दिया.
हम सब भी सौरभ और कल्लू के आने के बाद फिर से खेलने लगे.
रात हुई तो वापस अपने घर आ गए.
ऐसे ही छुप छुप कर हम मस्ती करने लगे.
पर उस दिन के बाद सपना ने कभी गांड में नहीं रगड़वाया.
एक दिन लुच्ची हमारे घर आई और बोली- आज मैं अपने घर जा रही हूं चलो थोड़ा खेल लेते हैं.
मैं उसे अपने घर की छत ले गया और वहां कमरे में पड़े एक पुराने बेड पर लेटा कर गांड में लंड डाल कर मजा दिया.
तब सोनी और मोनी भी खेलने के लिए ऊपर आ गईं और उन दोनों ने हमें गांड में लंड डालते हुए देख लिया.
सोनी तो जानती थी पर मोनी दिक्कत कर सकती थी.
सुची बोली- मोनी को अन्दर बुलाओ वर्ना ये हमें फंसवा देगी.
मोनी को समझाया गया कि हम खेल रहे हैं, पर तुम मम्मी को मत बताना.
वो बोली- मुझे भी खेलना है.
मैंने उसे भी झुका लिया और पीछे से उसकी गांड में लंड डालने लगा.
तो सुची ने हाथ से लंड पकड़ लिया और उंगली से उसकी गांड का सुराख में रगड़ने लगी.
मोनी भी मजा लेने लगी.
उंगली ज्यादा मोटी नहीं थी तो उसे अच्छा लगा.
उसके बाद सोनी बोली- मुझे भी खेलना है.
मैं उसकी गांड में भी हल्का सा धक्का लगा कर धीरे धीरे से रगड़ने लगा.
वो भी मजे लेती रही.
सुची ने बताया- सपना की गांड में बहुत दर्द हो गया था, खून भी निकला. अभी तुम मोनी के अन्दर मत डालना. बस उंगली से कर देना. जब इसकी खुल जाए तब पेलना. वर्ना उसकी फट जाएगी.
हम सब कुछ देर गांड चुदाई का खेल कर नीचे आ गए.
थोड़ी देर बाद मैंने सुची से उसके घर में अकेले में पूछा- जरा ढंग से बताओ कि किसी नई के साथ कैसे खेला जाता है.
उसने मुझे एक किताब दिखाई.
उसमें गांड मारते हुए काफी चित्र थे.
उस किताब में तो काले नीग्रोज के बड़े बड़े लंड गांड में घुसे हुए दिख रहे थे.
मैं हैरान था कि इतने बड़े लंड भी होते हैं.
मैंने सुची से पूछा- इनके इतने बड़े कैसे हो गए हैं?
वो बोली- हर देश के अलग अलग साइज़ के होते हैं.
मैंने अगला सवाल दागा- क्या इनके बड़े आकार से दर्द नहीं होता होगा?
वो बोली- पहली बार गांड में डालने से दर्द सभी को होता है. मगर आदत हो जाती है, तब दर्द नहीं होता. बल्कि मजा आता है.
मैंने उससे कहा- क्या आगे मजा नहीं है?
वो बोली- मजा तो आगे ही आता है मगर बच्चा पैदा होने का खतरा कौन मोल ले.
मैंने मन में सोचा कि हां ये तो साला लफड़ा हो सकता है.
फिर मैं घर आ गया.
मैंने इस बता को भलीभांति समझ लिया था कि पहले गांड के छेद को ढीला करना जरूरी होता है.
दूसरे दिन सुची और उसका भाई सौरभ अपने पापा के साथ घर चले गए क्योंकि उनकी छुट्टी खत्म होने वाली थी.
अब हम तीनों भाई बहन अपने ही घर में खेलते थे क्योंकि माही और निकिता तो अभी अपने मामा के घर से वापस नहीं आई थीं.
सुची, सौरभ भी चले गए थे.

कभी कभी सपना और कल्लू हमारे घर खेलने के लिए आ जाते पर हम अब गांड में लंड रगड़ने वाला खेल नहीं खेलते थे क्योंकि मैं सोनी के साथ तो अकेले में कर लेता और इस बात का सबको पता ही नहीं चलता था.
एक हफ्ते बाद माही और निकिता भी वापस आ गए तो मैं उनके घर गया था.
वापस आकर मैं अपनी छत पर गया.
वहां देखा तो कल्लू साला मोनी की गांड में लंड पेल रहा था और वो मजे से लंड घुसवा रही थी.
सोनी भी उसके पास खड़ी थी.
उस काले सांड को मेरी गोरी सुंदर बहन के साथ देख कर मुझे तो गुस्सा आ गया.
मैं कमरे में घुसा और उसके कान पर थप्पड़ लगा दिया.
मेरी बहनें भी डर गईं, वो हमारे घर से भाग गया.
मैंने अपनी बहनों को डराया कि अगर उसके साथ खेलोगी तो मैं मम्मी को बता दूंगा, फिर तुम्हारी पिटाई होगी.
उस दिन के बाद उन्होंने कल्लू के घर जाना भी बंद कर दिया और सपना और कल्लू भी हमारे घर नहीं आते थे.
अब हम तीनों भाई बहन एक साथ गांड गांड के खेल का मजा लेने लगे थे.
फिर समय बदला तो सेक्स की जानकारी इंटरनेट पर मिलने लगी.
मैंने उसी समय जाना कि चूत में लंड पेलने से बच्चा होने के खतरे से निपटने की दवा भी आने लगी है और कंडोम भी मिलते हैं.
मैंने एक दिन कंडोम खरीदे और घर आ गया. अपनी बहन की चूत की सील तोड़ने की सोच कर मैंने उससे बात की.
उसने पहले तो मना कर दी.
मगर बाद में वो मुझसे कैसे चुदी, ये सब मैं आपको फिर कभी लिखूँगा.
आपको मेरी ये गांड गांड का खेल कहानी कैसी लगी, प्लीज़ कमेंट्स में बताएं.

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