सहेली के ससुर से चुद गई मैं-2
मेरी मजेदार सेक्सी कहानी के पहले भागसहेली के ससुर से चुद गई मैं-1
में अब तक आपने पढ़ा कि मेरी सहेली वनिता के ससुर से मेरी सैटिंग जम गई थी.
अब आगे:
दूसरे दिन वनिता सुबह काम से बाहर चली गई. उस दिन 12 बजे से 2 बजे तक मैं भी अकेली थी. पति सुबह ही ऑफिस निकल गए थे.
वनिता के जाते ही उसके ससुर जी मेरे पास आ गए. मैंने दरवाजा खुला ही रखा था. मुझे पता था कि वनिता के जाते ही राजेन्द्र जी मेरे पास आ जाएंगे.
यही हुआ … वो वनिता के जाते ही मेरे घर आ गए. उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया.
मैं किचन में थी, वो वहीं आ गए और मुझे पीछे से पकड़ कर किस करने लगे.
तब मैं बोली- अंकल, हॉल में चलो, मैं वहीं आती हूँ.
ससुर जी हॉल में आ गए.
राजेन्द्र अंकल के जाने के बाद मैं भी हॉल में आकर उनके बाजू में बैठ गई. ससुर जी मुझे किस करने लगे.
मैं उनसे पूछने लगी- अंकल, आपको मेरे बारे में इतना गंदा विचार कैसे आ गया?
वे बोले- जब तुम हिला हिला कर मुझे अपना पिछवाड़ा देखाओगी, तो मैं क्या … कोई भी तुम्हारे पीछे पड़ जाएगा.
फिर कुछ देर हम दोनों ने बातें की. तभी वनिता का फोन आ गया. वो बोली- मैं तुम्हारे घर आ रही हूँ, ससुर जी कहां हैं.
मैं फोन पर जोर से बोली- हां जी, वो मेरे घर पर आए हुए हैं.
उसने फोन काट दिया.
राजेन्द्र ने मेरी तरफ देखा तो मैंने बताया कि वनिता का फोन था और वो इधर ही आ रही है. वो आपके बारे में पूछ रही थी.
वे ठीक होकर मुझे अलग बैठ गए.
कुछ दिन ऐसे ही चला.
फिर एक दिन पति को काम से बाहर जाना था तो पति ने मुझे फोन किया और बोले- मेरा बैग तैयार रखना, मुझे शाम को चेन्नई जाना है, मुझे कम से कम 15 दिन लग जाएंगे.
मैंने ओके कह कर फोन काटा और पति का सामान बैग में रखने लगी.
तभी वनिता आ गई और बैग लगाते देख कर बोली- लगता है, कहीं जा रही हो.
मैं बोली- नहीं यार … पति काम से बाहर जा रहे हैं.
वनिता बोली- वाओ यार … कब जा रहे हैं?
मैं बोली- आज रात में.
वो बोली- ओके …
कुछ देर हम दोनों ने बातें कीं और वो चली गई.
रात में पति आए, खाना खाकर थोड़ा आराम किया और 11 बजे वे निकल गए. उस रात मैं अकेली सोई.
दूसरे दिन वनिता दोपहर में घर आई और मुझसे पूछने लगी कि पति कब गए?
मैं बोली- रात में 11 बजे.
तब वो बोली- आज रात मैं ससुर जी को भेजती हूँ.
मैं मुस्कुरा दी. मैंने बोला- अरे यार तेरे पति क्या सोचेंगे?
तो वो बोली- कुछ नहीं, मैं बात कर लूंगी … और आज रात का खाना तू मेरे घर पर ही खाना.
मैं बोली- ओके, पर ये तो बता कि इसमें तेरा क्या फायदा है?
वो बोली- वो सब मैं बाद में बताऊंगी.
वो मुझे आंख मारकर चली गई.
रात में मैं उसके घर पर गई. मैंने आज फिर से वही रेड साड़ी और ब्लाउज पहना था.
वनिता के ससुर राजेन्द्र जी ने मुझे देख कर कहा- आओ कैसी हो?
मैं धीमे से बोली- मस्त हूँ.
तभी वनिता वहां आई और मुझसे बोली- चलो खाना खाते हैं.
हम सब खाना खाने बैठ गए. खाना खाते हुए ही वनिता बोली- बाबूजी, क्या आप आज सोने के लिए अनिषा के घर पर जा सकते हो? उसे अकेले सोने में डर लगता है.
वनिता के ससुर राजेन्द्र जी तुरंत मान गए. खाना होते ही मैं बर्तन समेटने में वनिता का थोड़ा हाथ बंटाने लगी.
वनिता बोली- यार छोड़ ये सब, जा आज मजे कर.
मैं हंस कर बोली- ओके.
मैं अपने घर पर आ गई. राजेन्द्र जी भी मेरे पीछे आ गए. मैंने दरवाजा बंद किया और बेडरूम में आ गई.
वहां जाते ही अंकल जी ने मुझे बांहों में भर लिया और किस करने लगे. साथ ही वे मेरे मम्मों को दबाने लगे.
मैं बोली- साड़ी तो चेंज कर लेने दो.
तो बोले- नहीं … चेंज क्या करना … अभी उतर जाएगी.
वे मुझे बेड पर लेटा कर किस करने लगे. उन्होंने धीरे धीरे मेरा ब्लाउज उतार दिया. मेरी साड़ी कब उतरी, मुझे पता ही नहीं चला. मैंने भी उनकी शर्ट उतार दी. मैंने उन्हें अपने नीचे लिटा कर किस करने लगी. उनका बरमूडा उतारा, तो उनका 8 का काला लंड सोया हुआ था.
मैं अंकल के लंड को हाथ में लेकर चूसने लगी.
वो भी दो मिनट में रेडी हो गए. फिर वो मेरी चुत में उंगली करने लगे. चूत में पराए मर्द की उंगली जाते ही मेरी सिसकारी निकलने लगी. मैं ‘उहु … अहहा..’ करने लगी.
वनिता के ससुर राजेन्द्र जी ने मुझे लिटा कर किस किया और मेरे मम्मों को दबाते हुए बोले- तुम बड़ी मस्त चीज हो मेरी जान … सारा मोहल्ला तुम्हें चोदना चाहता है.
वे मेरे ऊपर चढ़ गए. उनका लंड जो सोया हुआ 8 इंच का था, वो अब हाथ भर का लगने लगा था. अंकल ने अपना मूसल लंड हिलाते हुए मेरी चुत में सैट कर दिया. मेरी तरफ आंख मारते हुए धीरे धीरे अपने लंड को मेरी चूत के अन्दर डालने लगे. मैं भी अंकल का साथ दे रही थी. उनका आधा लंड अन्दर जाते ही मेरी आंखें फैलने लगीं. इतना बड़ा लंड मैंने आज तक नहीं लिया था.
तभी अंकल ने एक तेज धक्का मार दिया और अपना पूरा लंड मेरी चुत में पेल दिया. मेरी चीख निकल गई. पर अंकल ने मेरी चीख पर ध्यान न देते हुए मेरी चुदाई ज़ोर ज़ोर से शुरू कर दी. मेरी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ की आवाजें बेडरूम में गूंजने लगीं.
करीब पांच मिनट बाद मेरी चूत ने अंकल के लंड को अपने अन्दर सैट कर लिया और मुझे अंकल से चुदने में मजा आने लगा.
करीब दस मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के दौरान मैं दो बार झड़ गई. फिर अंकल ने भी मेरी चूत में ही अपना वीर्य छोड़ दिया.
इस तरह मेरी गैर मर्द से पहली चुदाई हुई.
फिर हम दोनों नंगे ही एक दूसरे से चिपक कर बात करने लगे.
मैंने कहा- कैसी लगी मेरी चुत?
तो वो बोले- मस्त … बड़ी टाईट लग रही थी. तेरा पति तुमको ढंग से नहीं चोदता है क्या?
मैं बोली- हां.
फिर अंकल बोले- मुझे औरतों की गांड पर चांटा मारते हुए चोदना पसंद है.
मैं बोली- जैसे आपको अच्छा लगे, आप मुझे चोद लो.
फिर कुछ देर बाद वो 69 में हो गए. मुझे जांघों में किस करते हुए मेरी चुत चाटने लगे और अपना लंड अंकल ने मेरे मुँह में दे दिया.
जैसे ही अंकल का लंड खड़ा हुआ, वो मुझे कुतिया बनने को बोले. मैं झट से डॉगी बन गई. अंकल मेरी गांड पर ज़ोर ज़ोर से चपत मारने लगे. मुझे उनके चांटों से बहुत दर्द हो रहा था. उन्होंने चांटे मार मार कर मेरी गांड लाल कर दी. साथ मेरे मम्मों को भी ज़ोर ज़ोर से मसल कर एकदम लाल कर दिया.
उसके बाद मुझे कुतिया पोज में मेरे पीछे से लंड फिट किया और मेरे मम्मों को दबाते हुए मेरी चुत में लंड ज़ोर से अन्दर तक पेल दिया. उनके हब्शी लंड से मुझे एकदम से दर्द हुआ और मैं रोने लगी.
पर वो नहीं माने और ज़ोर ज़ोर से मेरी चुदाई करने लगे. कुछ देर बाद मुझे भी मजा आने लगा था. मैं खुद अपनी गांड हिलाते हुए उनका लंड अन्दर तक लेने लगी.
इस तरह रात में वनिता के ससुर जी ने 3 बार मेरी चुत की चुदाई की. सारी रात सेक्स का मजा लेने के बाद हम दोनों सुबह 4 बजे सोए. फिर अंकल तो सुबह सात बजे ही उठ कर चले गए थे. पर मैं 11 बजे जाग सकी.
मैंने दिन देखा, तो वनिता के कई मिस कॉल पड़े थे. मैंने फोन उठाया ही था कि उसका फोन फिर से आ गया.
उसने मुझे बोला- यार, बाबू जी को लेकर साथ में नहा ले.
मैं बोली- ओके.
फिर वनिता के ससुर जी भी आ गए.
वो बोले- मैं नहाने जा रहा था, फिर सोचा तुमको जगा दूं.
तो मैं बोली- ओके अभी आप यहीं रुको, हम दोनों साथ में नहाते हैं.