बिहारी नौकर ने मेरी कुंवारी चूत को चोदा
मेरा नाम मनप्रीत कौर है, मैं पंजाब के लुधियाना में एक गांव में रहती हूँ. हमारे परिवार में 3 लोग हैं, मेरे पापा मेरा छोटा भाई और मैं.
मेरे पापा खेती का काम करते हैं. हमारा घर गांव से बाहर खेतों में है. मेरा भाई कॉलेज में पढ़ाई करता है.
अब मैं अपने बारे में बताती हूँ. मेरी उम्र 26 साल है मैंने बी एस सी नर्सिंग की हुई है मेरा कद 5’7″ इंच है, मेरा रंग दूध जैसे गोरा है मेरी छाती 38″ और कमर 34″ है. मेरे चूतड़ बहुत गोल और बाहर को निकले हुए हैं जिनको देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो जाये. मैं अपनी पूरी बॉडी की वैक्सिंग करवा के रखती हूँ.
हमारे घर में खेती और भैंसों का काम करने के लिए एक बिहारी नौकर रखा हुआ है, उसका नाम राजेश है, वो देखने में बहुत सुन्दर लगता है और बॉडी वी बहुत अच्छी बनाई हुई है. मेरा भाई कॉलेज में रहता है दिन में और पापा खेती के काम में बिजी रहते हैं. कई बार भैंसों का दूध निकालने में मुझे राजेश की मदद करनी पड़ती है.
मुझे टाइट सूट पहनने का बहुत शौक है. राजेश की उम्र 30 साल की है और उसकी मुझ पर निगाह रहती थी, इसका मुझे पता था लेकिन मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया था.
एक दिन मेरी सहेली ने मुझे एक इंडियन सेक्स वीडियोस साईट पर से एक पोर्न वीडियो का लिंक सेंड किया, उसको देख कर मुझमें सेक्स की इच्छा जागने लगी थी. फिर मैं रोज़ उस साईट पर पोर्न वीडियो देखने लग गयी थी पर मुझे संतुष्टि नहीं मिल रही थी.
तभी एक दिन मैंने राजेश को, घर के बाहर जो हमारे खेतों में मोटर है, उसको वहां नहाते हुए देखा. मुझे उसका लंड अंडरवियर में से दिख गया वो काफी मोटा और बड़ा लग रहा था. राजेश ने भी मुझे देख लिया, हम दोनों ने बस एक स्माइल ही पास की. फिर मैं घर के अंदर आ गयी.
उस दिन से मैंने राजेश के बारे में सोचना शुरू कर दिया, वैसे मुझे घर मैं बहुत टाइम मिलता था, जब हम दोनों ही घर पर होते लेकिन फिर भी मन में डर रहता था.
अब जब भी मैं दूध निकालती थी तो मैं अपने बदन को थोड़ा एक्सपोज़ करती रहती थी राजेश को… वो भी समझने लगा था मेरी हरकतों को!
एक दिन भैंसों के बीच मेरे चूतड़ उसके लंड से छू गए. वो क्या टच था मुझ में से तो करंट सा निकल गया था.
उस दिन के बाद तो इस तरह से टच करना रोज़ का काम हो गया था.
एक दिन तो राजेश ने मेरे बूब्स को भी पकड़ लिया था और मसलने लगा था. मैंने उसे रोका कि किसी दिन सेफ जगह पर करेंगे. उसके मुँह में तो पानी आ गया था.
हम किसी दिन का इंतज़ार करने लगे जब घर पर कोई न हो और हमारे पास खुला टाइम हो!
तो वो दिन तो नहीं आया.
मगर एक रात आ गयी जिस दिन मेरा भाई घर पर नहीं था और पापा बीमार थे. मैंने उनको एक छोटी सी नींद की गोली दे दी थी और में बाहर खेतों में मोटर वाले कमरे पर चली गयी. वहां राजेश मेरा इंतज़ार कर रहा था.