कवि की अन्तर्वासना
हूं मैं लगभग 32 वर्ष का, मध्य भारत में रहता
कर्म मेरा बहुचर्चित सा है, धूप छांव सब सहता!
आंखें नशीली रंग गेहुंआ, सामान्य सा मैं दिखता
अन्तर्वासना के पृष्ठ पर प्रथम कहानी लिखता!
मत पूछो कि हम अब तक, क्या खोऐ क्या पाए थे
कुछ लड़कियों का चुम्बन तो कुछ के स्तन दबाये थे!
मगर अब हमउम्र लड़कियां, बच्ची लगती थी
बड़े दूध और उठी गांड वाली ही अच्छी लगती थी!
इस उम्र में तो अब हर वक्त चूत की खुमारी थी
ऊपर का सब कर चुका था पर चूत नहीं मारी थी!
मैं चूतिया से कैसे बना चुदक्कड़, बताऊं कहानी
बात यह आज की नहीं … है 10-12 साल पुरानी!
यह कहानी है दुबली पतली पर, बड़े दूध वाली की
देखने में सीधी सादी सी पर अंदर से मतवाली की!
जिसे देखकर मेरे अंदर पहली बार हवस भड़की थी
वह हमारे कर्मचारी की मेरी हमउम्र ही लड़की थी!
देखकर मुझको बदले चाल और चूतड़ खूब मटकाती
यह मांगे या मैं खुद दे दूं … सोच सोच के सकुचाती!
स्वाभिमान के चलते चाहे यह पहले शुरुआत करे
मैं तो हां भर ही दूंगी, पहले आकर बात तो करे!
मैंने भी फिर मौका पाकर, बात एक दिन छेड़ी
वह पहले रूठी फिर मुस्काई करके नजरें टेढ़ी!
उसकी इस हरकत पर मैं फूला नहीं समाया
पकड़ के पीछे से मैंने उसको तनिक दबाया!
पतली कमर में हाथ डाल कर जैसे उसे घुमाया
एक झटके में एक दूजे को बाहों में हमने पाया!
मौन स्वीकृति मिली जो उसकी, मेरी हिम्मत बढ़ गई
नजर उसकी आंखों से हट, अब लाल होठों पर पड़ गई!
एक हाथ चूतड़ पर, दूसरा उसकी पीठ पर घूमे
कभी गाल तो कभी होंठ मैंने कस कर चूमे!
आलिंगन से शरीर में एक झुरझुरी सी लगी होने,
मैं उसकी मदहोशी में, और मुझमें लगी वो खोने!
कुछ देर में ही दोनों अगले चरण पर बढ़ने लगे
दोनों हाथ पीछे से हट अब छाती पर चलने लगे!
धीरे-धीरे करके उसकी कुर्ती सीने तक खिसकाई
फिर बारी-बारी उन खरबूजों की की खूब चुसाई!
आनाकानी की थोड़ी सी, फिर जमीं पर उसे लिटाया
मैंने भी देर न की और झट से उसके ऊपर आया!
पता नहीं था मुझको, वह कमाल कर देगी
पहली बार में ही वो चुदने को हाँ भर देगी!
मुझसे पहले भी उसका लफड़ा था किसी और से
मेरा पहला अनुभव था, वो गुजर चुकी थी इस दौर से!
वह बोली करना है जल्दी कर लो, मुझे घर जाना है
या फिर मुझको जाने भी दो, कल भी तो आना है!
चूंकि मेरा प्रथम प्रयास था, लगा मैं थोड़ा डरने
सोचा ना था काम ये इतनी जल्दी मिलेगा करने!
चूड़ीदार सलवार थी उसकी, एक ही पैर निकाला
जल्दी से चड्डी नीचे खिसका लंड जरा सम्भाला!
लंड को मेरे बिल्कुल न छूती, कुर्ती से मुँह ढकती
नौसिखिया कैसे करता है, चोर नजर से वह तकती!
पहली चुदाई की हड़बड़ी में आधा खड़ा ही लंड घुसाया
उसकी बुर खेली खाई थी, लंड झट से उसमें समाया!
लंड ने झट से पानी उगला, बस अठ दस झटके मारे
मैं खुद पर शर्मिंदा था, मेरा मन खुद को ही धिक्कारे!
मैं खिलाड़ी हारी टीम का, बिल्कुल