चाँदनी चौक की तंग गलियों में
मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ, मैं 24 वर्षीय जवान मस्त लड़का हूँ, अभी तक कई कुंवारी चूतों का मजा ले चुका हूँ। मैंने पहली चुदाई दिल्ली में की थी, वह चुदाई आज भी मुझे याद है, उसका चीखना और चिल्लाना आज भी मेरे कानों में मधुर स्वर की तरह गूंजता है। मन-मस्तिष्क में गुदगुदी कर उसकी कुंवारी चूत की याद दिलाती है। अब मैं आपको उस सच्ची कहानी के बारे में बताता हूँ। यह घटना आज से तीन साल पहले की है।
मैं राहुल दिल्ली में रहता हूँ, कभी मेरी एक खूबसूरत गर्लफ्रेंड हुआ करती थी। मेरी गर्लफ्रेंड एक बड़े घर की बेटी थी और उसने ही मुझे क्लास में प्रपोज किया था। आज वो किसी की बीवी है…
उस समय मैं चाँदनी चौक की तंग गलियों में रोज शाम उसे घर छोड़ने जाता था।
एक दिन उसने मुझे अपने घर पर पार्टी देने के नाम पर बुलाया। पहले तो मैंने मना किया, फिर जब उसने बोला- अरे बाबा कोई नहीं होगा, बस हम तुम !
तो मैं मान गया, तय समय के अनुसार मैं उसके घर पहुँच गया।
गेट पर पहुँच कर मैंने घंटी बजाई..
अन्दर से आवाज आई- आई जी..
मैं समझ गया यह मेरी जान स्नेहा है।
जब उसने गेट खोला तो मैं उसे देखता यह गया… मेरे मुँह से निकल गया- क्या माल लग रही हो..
उसने यह सुनते मेरी तरफ देखा और मुस्कुरा दी।
मैं अन्दर गया और सोफे पर बैठ गया..
उसने भी दरवाजे बंद किये और मेरे सामने आकर मुझे चूमते हुए बोली- जानू, आप कुछ भूल रहे हो..
मैंने थोड़ी देर सोचा और बोला- नहीं तो?
उसने मेरा हाथ पकड़ा और अन्दर ले गई…
कमरे में लाईट बंद थी और मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है।
अचानक लाईट जली और मैंने देखा कि सामने केक रखा हुआ है और उसके पास में ही स्नेहा की बुआ की लड़की दीप्ति और उसकी सहेली नाज़िया खड़ी है।
तब अचानक यह आया कि आज ही के दिन मैं स्नेहा से एक साल पहले क्लासरूम में एक प्रेमी के रूप में मिला था।
दोस्तो, आप भी सोच रहे होंगे कि मैं एक साल तक कहाँ था… स्नेहा के साथ होकर भी उसके पास नहीं था, अपनी किताबों में और अपने सपनों में खोया था क्योंकि स्नेहा ने मुझे कुछ ऐसा बोल दिया था…
मुझे सब याद आ गया था, तब मुझे स्नेहा ने वादा किया था कि जिस दिन तुम्हारे सपने सच होने लगेंगे उस दिन मैं एक मजेदार पार्टी दूँगी और तुम जो चाहोगे वो कर सकोगे…
मन ही मन खुश होने के बाद मैंने बोला- हाँ मुझे याद है… बोलो जी अब क्या करना है…?
स्नेहा ने मेरा हाथ पकड़ कर बोला- पहले केक काटना है !
हमने केक काटा.. सबने मिल कर केक और मिठाइयाँ खाई, फिर दीप्ति और उसकी सहेली नाज़िया वहाँ से स्नेहा की बुआ के घर चली गई, उनका घर पास में ही था।