बुड्ढों के महान लौड़े
आपका प्यारा दुलारा : सनी
एक बार फिर हाज़िर हूँ..
नमस्ते गुरूजी, प्रणाम दोस्तो, कैसे हैं सभी !
अन्तर्वासना का धन्यवाद कैसे करूँ जिसकी वजह से मेरी चुदाई लोगों के सामने आ रही है और मुझे बहुत लौड़ों की पेशकश आने लगी है। अब तो मेरी गाण्ड और मस्त हो चुकी है, और गुदगुदी हो गई है।
दोस्तो, आप सब ने मुझे कितना प्यार दिया यह मैं शब्दों से ब्यान नहीं कर सकता।
आज मैं अपना एक और ताज़ा-ताज़ा, जबरदस्त मेरे साथ हुआ कांड सबके सामने लेकर आया हूं। मैंने पिछली होली पर भी चुदाई का नज़ारा लिया था यहाँ तक कि उस दिन एक रण्डी के सामने मैंने अपनी गाण्ड मरवाई और फिर उसकी चूत मारी। वैसे मुझे लड़की चोदने में इतनी दिलचस्पी नहीं है।
आज फिर से मैंने इतिहास दोहरा दिया है, यह होली भी रंगों के साथ लौडों से रंगीन की। होली खेलने के लिए मैं डिफेंस कालोनी चला गया। रंग से लथपथ था, टीशर्ट मम्मों से चिपकी पड़ी थी, मैंने बनियान जानबूझ कर नहीं पहनी थी, पजामा भी सफ़ेद था काले रंग की पैंटी मैंने स्पेशल खरीदी लड़कियों वाली, दुनिया रंग से रंग हुई पड़ी थी मगर कुछ दिनों से मेरी गाण्ड सूखी थी, मेरी गाण्ड में खुजली मचने लगी थी, ग्यारह दिनों से मुझे लौड़ा हासिल नहीं हो पाया था। फाइनल पेपरों की वजह से मेरा इन्टरनेट भी बंद था।
होली के कारण मुझे जाने का बहाना मिला, मैंने भी चाहने वालों को फ़ोन लगाए। सभी होली खेलने के लिए गए हुए थे। डिफेंस कालोनी के सामने आनन्द कालोनी में मेरे दो आशिक रहते थे, प्रवासी थे बिहार से काम करने आये थे, उनके शानदार से काले से लौड़ों का दीवाना होकर उनको ले चुका था, वहां भी ताला लटका था।
मेरे अरमान टूट गए, वो अब वहाँ से जा चुके थे।
मैंने बाईक रोक कर इधर-उधर नज़रें दौड़ाई मगर लड़के तो लड़कियों के पीछे पड़े थे। हर लड़का अकेली लड़की ढूंढ उसके मम्मों को दबाने-सहलाने की ताक में था रंग लगाने के बहाने !
मेरी नज़र डिफेंस कालोनी में पार्क के कोने पर इनोवा कार खड़ी दिखी, वहाँ तीन बंदे खड़े थे, उनके हाथों में शराब के पैग थे, वो काफी उम्र के लग रहे थे। सफ़ेद बाल भी थे थोड़े थोड़े, सभी पचास के आसपास लग रहे थे।
मैंने दो गुब्बारे अपने मम्मों पर फोड़ दिए क्यूंकि मेरी टीशर्ट सूख गई थी। गीले होते ही फिर चिपक गई, एक गुब्बारा गाण्ड पर फोड़ा।
रंग लेकर बाईक लगा उनकी तरफ बढ़ने लगा।
होली मुबारक ! होली मुबारक ! मैंने उनके ऊपर रंग फेंका और गुब्बारा निकाल मारा।
“बुरा न मानो होली है ! कहा।
उनको गुस्सा आ गया, यही मैं चाहता था।
साले यह क्या किया? तुझे हम ही मिले? पकड़ो साले को ! पकड़ो इसको !
एक ने मुझे पकड़ लिया।
मैंने कहा- होली में बुरा नहीं मानते हैं।
अपनी उम्र के लोगों से खेलते हैं ! उसने चांटा खींचा।