बिन मेहनत घर में लौड़ा मिल गया
प्रणाम मेरे लवर्स को, मेरे आशिकों को, मेरे पाठकों को ! इतना रिस्पांस क्या बताऊँ, मुझे समझ ही नहीं आती किससे चुदवाऊँ, कैसे चुदवाऊँ, कब चुदवाऊँ, हर किसी से एक समय पर तो मैं मरवा नहीं सकता हूँ, तीन चार हों, तो फिर भी हैंडल हो जाएगा, दस से ज्यादा एक ही डेट को मुझे मिलना चाहते हैं। खैर मैंने अपना मोबाइल ही बंद रखा हुआ है। कहते हैं ना कि ‘दाने दाने पर लिखा होता है खाने वाले का नाम’ ऐसे ही लौड़े लौड़े पर लिखा होता है गांड और चूत मरवाने वाले/वाली का नाम !
आज मैं जिस चुदाई को लिखने लगा हूँ, मुझे रात तक मालूम ही कुछ नहीं था। सभी घर वाले माँ, डैड, दादी सभी घर में थे, मैं अपने सर्दी के कपड़े वगैरा लेने घर आया था, मैंने अपने एक दो लवर्स से कहा भी था कि मुझे चोदना है तो आज ही मिलना पड़ेगा लेकिन अफ़सोस उन्होंने भी मेरी मेल नहीं पढ़ी। मैं मायूस था, बाहर गया, वहाँ से बियर की दो बोतल डकारी और घर लौटा।
अभी मैं खाना खाकर ऊपर रूम में जाने के लिए चला ही था कि माँ ने मुझे कहा- सनी बेटा, आज तुम दादी वाले रूम में सो जाओ।
“वो क्यूँ?”
“एक्चुअली तेरे पापा के ऑफिस से एक माली को बुलाया है साथ का गार्डन बनवाने के लिए !”
तो माँ, इसमें मैं क्या करूँ?”
“क्यूँकि नीचे हम उसको सुला नहीं सकते थे ! है तो इनके जान पहचान का, लेकिन बिहारी है ऐसे नीचे सुलाना अजीब लगेगा।”
लेकिन माँ, मुझे अपने कंप्यूटर पर काम करना है, आप जानती हैं कि कंपनी का काम रात को ही होता है !’
“तो इसमें क्या हुआ? तुम कर लेना काम ! वो रहा मेहनत करने वाला ! उसको लेटते नींद आ गई होगी ! तुम जाकर अपना काम करके नीचे आकर सो जाना !”
पापा ने भी कहा और वे सोने चले गए।
कुछ देर टीव़ी के चैनल पलटने के बाद मैं ऊपर आ गया, उसके रूम की लाइट बंद थी लेकिन पोर्च की लाइट ऑन थी, पहले मुझे लगा किसी की नींद खराब होगी, रहने देता हूँ, सुबह सही, लेकिन फिर सोचा कि थोड़ा कर लेता हूँ !
मैंने धीरे से दरवाज़ा खोला, साथ में स्विच था, खोलते मैंने लाइट ऑन कर डाली, जो मैंने देखा, देखता ही रह गया, उसका लंड उसकी मुठी में था टी वी पर भोजपुरी फिल्म देख रहा था।
वो मुझे देख सीधा हो गया, उसके रंग उड़ गए, पहले मेरे भी उड़े थे लेकिन जब गौर से उसके लौड़े को कुछ सेकण्ड के लिए निहारा, उसको देखा मेरा जिस्म मचलने लगा, उसने मुझे लौड़ा देखते हुए को देखा था- बाबू जी, हैं तो मर्द ही न ! हम भी देख रहे थे, आप भी देखते ही होंगे न ! और यह तो करते होंगे नहीं।
“मैं तो कुछ और करता हूँ।