मेरी बीवी की उलटन पलटन-8
सुबह चौधरी को कुछ काम था, मैं सो के उठी तो वो जा चुका था।
मैंने और चौधराइन ने फ्रेश हो के नहा धो के नाश्ता किया।
मैं जाने लगी, तो पहली बार चौधराईन ने मुझे बांहों में भरा, मेरे होंठ चूमे- तू अच्छी है, बहुत मज़ा दिया … आती रहा कर!
मैं उससे चिपकी हुई खड़ी रही।
“क्या बात छोरी, कोई परेशानी है? या कुछ चाहिए?”
“जी!”
“क्या चाहिए, बोल?”
मैंने धीरे से उसके कान में फुसफुसा के कहा- जी आज जाने से पहले एक बार और आपके चूतड़ों को चूमना चाहती हूँ और …
“बोल बोल … खुल के बोल?”
“और एक बार आपकी चूत की सुनहरी धार से तृप्त होना चाहती हूँ.”
“हाय हाय तू बड़ी प्यारी है कामिनी … आज पहले पीछे!”
और उसने अपना लहंगा कमर तक उठा दिया।
उसके नीचे शायद वो कभी कुछ नहीं पहनती थी। मैंने जी भर कर उसके चूतड़ों को प्यार किया, गांड को चूसा चाटा।
फिर उसने मुझे आगे आने को कहा और बोली- छोरी अच्छे से मुंह लगा ले … मैं धीरे धीरे करूँगी, बाहर नहीं गिरना चाहिए.
“नहीं गिरेगा!”
मैंने अपने होंठ चूत से जोड़ दिए, बांहें चूतड़ों पे कस गयीं और फिर आहिस्ता आहिस्ता चौधराइन का सुनहरी जल मेरे मुंह में आने लगा। वो मूतती रही और उसका पेशाब मेरे गले को तर करता रहा।
फिर मैंने प्यार से उसकी चूत को चाटा।
मैं खड़ी हुई और उसने प्यार से मुझे अपने सीने से लगा लिया- तू बहुत प्यारी है! कभी कोई काम हो तो बताना। एक मिनट रुक!
वो अंदर गयी और बाहर आकर नोटों की एक गड्डी मेरी ब्रा में डाल दी।
मैंने निकाल के वापस कर दी- माफ कीजिये … पर मैं पैसे नहीं लूंगी। आपका प्यार मिलता रहे बस!
उसने पैसे तो ले लिए लेकिन अपने गले से चेन निकाल के मेरे में गले में डाल दी- अब ये वापस नहीं लूंगी.
मैं मुस्कुरा दी।
हम दोनों ने होंठों का एक चुम्बन लिया और फिर मैं वहां से चल पड़ी।
मैं मम्मी के घर से वापस आ गयी थी और अपने दोनों पतियों के साथ रहने लगी थी, खुशी खुशी।
एक दिन:
उपिन्दर आया हुआ था। हम तीनों शाम को चाय पी रहे थे। तब मैंने दोनों को बताया कि शैली की शादी की तारीख पास आ गयी है।
अंजू बोली- हाँ …
उपिन्दर ने कहा- मज़ा तो तब है जब शादी के बाद सुहागरात से पहले शैली मेरे नीचे आये!
अंजू ने कुछ सोचा और फिर एक हाथ मेरी बगल में डाला और मेरी चुचियाँ दबाने लगी। मैं समझ गयी कि इसके अंदर कुछ खुराफात चल रही है।
मैंने पूछा- क्या इरादा है पतिदेव?
बोली- सोच कितना मज़ा आएगा। फेरों के बाद तेरी बहन लाल जोड़े में हमारे पास आये। तेरे पहले पति की चूत को प्यार करे और तेरे दूसरे पति और बॉय फ्रेंड से चुदवाये। सुहागरात की पूरी रिहर्सल हो जाएगी.
उपिन्दर बोला- मेरा तो सोच सोच के ही खड़ा हो रहा है.
अंजू ने कहा- मेरी भी चूत में पानी आ रहा है। पर ये होगा कैसे?
“एक तरीका बन सकता है.” मैंने कहा।
“कैसे?”
“देखो, मेरी मम्मी तुम दोनों की क्या लगती है ये तो हमें पता ही है.”
अंजू बोली- कामिनी, तू कहने में शरमा क्यों रही है? तेरी माँ हमारी रखैल है, माल है हमारा। पर हम ये बात उससे कहेंगे तो वो थोड़े ही मानेगी.
“हाँ, ऐसे तो शायद न माने, लेकिन जो मैं सोच रही हूँ वो ये कि … देखो तुम्हारे ख्याल से मम्मी सिर्फ उपिन्दर के नीचे लेटती है?”
“अरे नहीं अपने शहर में भी कइयों के बिस्तर गरम करती होगी.”
“सही है, लेकिन उसे सबसे ज्यादा पसन्द है उपिन्दर, इसका मस्त लण्ड, इसके धक्के! मेरा आईडिया ये है कि मम्मी को यहाँ बुलाएं और उसके बाद उपिन्दर उसे एक दो दिन खूब प्यार करे!”
“मतलब तबियत से रगड़े, पेले”
“हाँ अंजू, जब मम्मी खुश हो जाएगी तो मैं उसे मना लूँगी। प्रोग्राम कैसे हो ये मम्मी जुगाड़ लगा लेगी और फिर शैली को मौका मिल जाएगा तो वो तो खुशी खुशी सुहागरात की रिहर्सल करेगी.”
“ठीक है।”
उपिन्दर ने फोन लगाया, स्पीकर ऑन किया:
“हैल्लो उपिन्दर, कैसे हो?”
“वैसे तो ठीक हूँ, पर आज रानी तेरी बड़ी याद आ रही है.”
“अच्छा जी, कितनी याद आ रही है?”
“अंडरवियर फटने को है.”
“लगता है अंजू या कामिनी कोई तुम्हारे पास सब खोल के बैठी है.”
“अरे नहीं मालिनी मेरी जान, मैं अपने घर में हूँ, अकेला!”
अंजू ने मेरी चुचियाँ दबाईं और मुस्कुराई।
“जल्दी से सब कुछ खोल कर आजा मेरी बांहों में!”
“ठीक है मैं कल शाम तक कामिनी के घर पहुंच जाऊंगी!”
अंजू बोली- आ तो रही है, अब कल का क्या प्रोग्राम है।
मैंने दोनों को समझा दिया।
अगले दिन शाम को मम्मी आयी।
“अरे मम्मी आप? कोई खबर नहीं की?”
मम्मी बस मुस्कुरा दी।
मैं अंजू और मम्मी चाय पी रहे थे। मम्मी कुछ बेचैन लग रही थीं।
अंजू ने पूछ ही लिया- कुछ परेशान लग रही हैं?
“वो असल में उपिन्दर ने बड़ा ज़ोर दे कर बुलाया था, मैं सोच रही थी कि वो यहीं होगा.”
हम दोनों खिलखिला के हंस पड़े।
“तुम दोनों को पता है?”
अंजू ने मम्मी का पल्लू गिराया, दोनों चुचियाँ दबाईं- हाँ उसे और उसके लण्ड को आपकी याद आ रही थी। आज स्पेशल प्रोग्राम होगा.
“उसमें स्पेशल क्या?”
“आज उपिन्दर आपके साथ सुहागरात मनाएगा.”
“अरे मतलब मेरी लेगा न?”
“मतलब ये कि अभी आप नई नवेली दुल्हन की तरह सजेंगी, वो आएगा, आपको अपने घर ले जाएगा और फुल सुहागरात होगी.”
मम्मी शरमा गयी।
फिर मम्मी ने लाल जोड़ा पहना, लिपस्टिक, बिंदी, नई चूड़ियां, पूरी सज के तैयार हो गयीं।
उपिन्दर आया, बड़े प्यार से मम्मी का हाथ पकड़ा और गाड़ी में बिठा लिया।
“अरे कामिनी, अंजू तुम लोग नहीं चलोगे?”
“मम्मी हमारा वहां क्या काम?”
वे दोनों चले गए।
हम दोनों बैठ गए, बोतल खुल गयी, पेग शुरू हो गए।
अंजू ने कहा- अब तक तो सब ठीक हो रहा है.
“हाँ मम्मी बहुत खुश लग रही थीं। वहां बिस्तर पे फूल बिछे हुए हैं। बढ़िया शराब और उपिन्दर का हथियार। सुबह तक मम्मी मस्त हो जाएंगी और कल हमारा काम हो जाएगा.”
ऐसी ही बातें करते हुए हम बेड पे आ गए।
चुम्मियां शुरू हो गयी, कपड़े उतर गए।
वो मेरी चुचियाँ दबा रही थी, अचानक बोली- कामिनी, उपिन्दर को फोन करते हैं, पूछते हैं क्या हो रहा है.
“अंजू पूछना क्या, पता तो हमें है ही कि क्या हो रहा होगा। दोनों शराब के नशे में होंगे। बिस्तर पे फूल मसले जा रहे होंगे, उपिन्दर का लण्ड मस्त खड़ा होगा। मेरी माँ नंगी या तो टांगें चौड़ी कर के लेटी होगी, या घोड़ी बनी होगी। लौड़ा उसकी भोसड़ी में होगा, उपिन्दर पेल रहा होगा, मेरी माँ चुद रही होगी। कमरे में फचाक फचाक की आवाज़ आ रही होगी.”
“हाय रानी क्या बयान किया है, आ जा मेरी जांघों के बीच!”
मैंने मुंह लगा दिया। मेरे होंठ चिपक गए अंजू की खूबसूरत चूत पे। जीभ फिसलने लगी, कभी चूत की फांकों पर, कभी गहराई के अंदर।
फिर वो पलट के मेरे ऊपर आ गयी। वो मेरे ऊपर लेटी हुई थी। जांघों के बीच में मेरा मुंह और उसके चूतड़ों पर लिपटे हुई मेरी बांहें। मैं अपने पति की चूत के स्वाद और सुगन्ध की मस्ती में थी। कभी कभी उसकी कमर हिलने लगती थी, जैसे कोई मर्द औरत का मुंह चोद रहा हो। फिर उसकी चूत का पानी झड़ के मेरे अंदर आ गया। हम एक दूसरे से लिपट गए।
“दूसरे छेद का स्वाद लेगी?”
“ये भी कोई पूछने की बात है? तुम मेरे चेहरे पे बैठोगी?”
“नहीं.” कह के वो उल्टी लेट गयी और मैं प्यार करने लगी।
मैंने उसके चूतड़ों पे चुम्बनों की झड़ी लगा दी। फिर उन्हें चौड़ा किया और चूसने चाटने लगी भूरे छेद को।