हिंदी सेक्स.कॉम सर्च करके अन्तर्वासना मिली, फिर चूत मिली
मैं गाँव में 12वीं की पढ़ाई कर रहा था। उन दिनों मैंने नया नया इंटरनेट सीखा था, मैं इन्टरनेट पर हिंदी सेक्स.कॉम सर्च किया करता था, तभी मुझे अन्तर्वासना साईट मिली थी.
यहीं मेरे गांव में ठीक मेरे घर के बगल वाले घर में एक लड़की रहती थी, उसका नाम लवली था और वो मेरे साथ स्कूल में पढ़ती थी। मैं उसे तभी से चाहता था। वैसे वो मुझे फ्रेंड ही मानती थी, पर मैं उसे दिल ही दिल में बहुत चाहता था। हम लोग बचपन से ही साथ-साथ कई तरह के खेल खेलते रहे थे, जैसे कभी कबड्डी, कभी कुश्ती।
उसी बहाने मैं उसके मम्मों को छू लिया करता था। वैसे उस समय उसके चूचे थोड़े छोटे थे.. मगर छूने पर काफी अच्छे लगते थे।
मुझे सेक्स का ज्यादा पता नहीं था मगर मैं सेक्स के बारे में जानना चाहता था तो मैंने नेट कनेक्शन लिया और उस पर हिंदी सेक्स.कॉम सर्च कर रहा था कि तब मुझे अन्तर्वासना हिन्दी सेक्स की साईट मिली. यहाँ से मैंने काफी कुछ सीखा.
अन्तर्वासना पर मेरी यह पहली सेक्स स्टोरी है। यह कहानी 4 साल पहले शुरू हुई थी, तब मैं एग्जाम की तैयारी कर रहा था. मैं और लवली इकट्ठे बैठ कर पढ़ते थे.
एक दिन लवली के घर पर कोई नहीं था। सारे लोग किसी रिलेटिव के शादी में गए हुए थे और एग्जाम नजदीक थे, लवली नहीं गई थी। इस दौरान मैं उसके घर पर पढ़ने जाता ही था।
उस दिन पढ़ते-पढ़ते काफी रात हो गई थी.. वो चाय बनाने चली गई।
मेरे मन में ख्याल आया कि आज अकेले में उसके चूचे दबाने को किसी तरह मिल जाएं तो मजा आ जाए। फिर अचानक से मेरे दिल में ये ख्याल पक्का हुआ और मैं किचन की तरफ आ गया।
मैंने लवली से बोला- तुम तो हमेशा मेरे से हर खेल में हार जाती हो, कभी हमसे जीतोगी भी या नहीं?
वो बोली- वो तो मैं हमेशा इसीलिए हार जाती हूँ क्योंकि मेरे जीतने से तेरी इज्जत चली जाएगी।
फिर मैं बोला- चलो आज ये बात भूल कर जीत कर दिखाओ।
बोली- ठीक है.. चलो कुश्ती लड़ते हैं।
मैं भी बोला- ठीक है आ जा।
फिर हम लोग बेडरूम में आए और हाथ में हाथ डाल कर लड़ने लगे। फिर धीरे-धीरे मैंने दांव लगा कर उसके मम्मों को पकड़ लिया और दबाने लगा। मुझे मजा आने लगा तो अब मैं अनजाना सा शो करके कभी उसके चूचे और कभी गांड पकड़ कर उसे गिराने लगा।
एक बार तो दांव ऐसा लगा कि मैं उसके शरीर पर पूरा चढ़ गया और उसके पेट की तरफ से टॉप में हाथ करने लगा।
तभी वो कुछ समझ गई और बोली- ये क्या कर रहे हो?
मैं बोला- कुछ भी तो नहीं।
वो बोली- मैं सब समझ रही हूँ.. तुम मेरे दूध दबा रहे थे।
फिर मैं बोला- वो तो गलती से दब गया था।
‘अच्छा.. तो कोई बात नहीं..’ वो बोली।
‘तुम्हें अच्छा लगा?’ मैं बोला।
तो बोली- हाँ कुछ अलग सा होने तो लगा था।
फिर मैं बोला- मुझे तुम्हारे दूध देखना है।
वो बोली- पर तुम किसी को बोलोगे तो नहीं?
मैंने बोला- नहीं बोलूंगा।