माँ-बेटी को चोदने की इच्छा-10
पिछली कहानी मैं आपने पढ़ा:
पापा भी बोले- हाँ.. ये ठीक रहेगा।
तो मैंने बोला- एक मिनट आप रुकिए.. मैं अभी आया।
मैं अपने कमरे में गया और लोअर पहना और टी-शर्ट पहन कर आ गया और अपने पापा के साथ उनके घर पहुँच गया।
फिर पापा उनके घर के बाहर मुझे ड्राप करके वापस चले गए।
मैंने विनोद के घर की घण्टी बजाई।
मेरे घण्टी बजाते ही दरवाज़ा खुला..
मुझे ऐसा लगा जैसे माया घंटों से मेरे आने का इंतज़ार कर रही हो।
दरवाज़ा खुलते ही मेरी नजर माया पर पड़ी जो कि बला की खूबसूरत लग रही थी।
मैंने आज उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक महसूस की.. जो कि शायद उसकी वर्षों बाद यौन-लालसा की तृप्ति का सन्देश दे रही थी।
फिर मैंने घर के अन्दर प्रवेश किया और दरवाज़ा बंद करके उसको अपनी बाँहों में कैद कर लिया और वो भी मेरे बाँहों में कुछ इस तरह सिमटी की जैसे हम वर्षों के बिछड़े हों।
फिर कुछ देर इसी तरह खड़े रहने के बाद मैंने उसकी आँखों में झांकते हुए उसकी ढेर सारी तारीफ़ की.. जिससे उसको चरमानन्द प्राप्त हुआ और खुश होकर प्यार से मुझे चुम्बन करते हुए राहुल ‘आई लव यू’ बोलने लगी।
सच यार… मुझे भी कुछ समझ न आ रहा था कि ये सब सच है या मात्र एक कल्पना…
क्योंकि लड़कियों के बारे में तो सोचना अलग बात होती है, पर जब आपको एक एक्सपीरिएंस्ड औरत गर्ल-फ्रेंड के रूप में मिल जाए और वो भी माया जैसी.. तो जिन्दगी ही बदल जाए।
वो मुझे इस तरह खोया हुआ देखकर बोली- कहाँ खो जाते हो जान..
तो मैंने बोला- तुम हो ही इतनी सुन्दर.. समझ ही नहीं आता कि तुझे प्यार करूँ या तेरे रूप को ही देखता रहूँ।
तो इस पर वो बोली- तुम्हें पूरी छूट है.. कुछ भी करो.. बस मुझे अब छोड़ के न जाना.. वर्ना मैं मर जाऊँगी.. तुम्हें एक पल के लिए भी अपने से दूर नहीं देख सकती।
उसके दिल में शायद मेरे लिए अपने पति से भी ज्यादा प्यार जाग चुका था।
तो मैंने बोला- माया ये सब तो ठीक है.. पर जब मेरे माँ-बाप मेरी शादी कर देंगे तब?
तो वो कहने लगी- मैं भी तो शादीशुदा हूँ.. कोई बात नहीं.. बस अपने दिल से मुझे कभी अलग मत करना.. तुम जो चाहोगे वो मैं दूंगी और जो चाहोगे मैं वैसा ही करुँगी।
तो मैंने उसे फिर से अपनी बाँहों में भर लिया और उसके गालों और आँखों को चूमने लगा।
उसकी ख़ुशी की झलक उसके चेहरे पर साफ़ दिखाई दे रही थी। फिर मैंने उसके उरोज़ों को मसलना प्रारम्भ कर दिया.. जिससे उसकी ‘आह’ निकलने लगी।
मैंने जैसे ही उसके चूचों को आजाद करने के लिए उसकी कुर्ती उठाई तो वो बोली- जरा सब्र भी करो.. आज तो पूरी रात अपनी है.. जैसे चाहो वैसे प्यार कर लेना.. पहले हम खाना खा लेते हैं।
तो मैंने पूछा- आज क्या बना है?
उन्होंने बोला- तुम्हारे मन का है।
तो मैंने कहा- आपको कैसे पता.. मुझे क्या अच्छा लगता है?
तो वो बोली- उस दिन पार्टी में जब विनोद को बता रहे थे..