भतीजी की नशीली चूत की दोबारा चुदाई
दोस्तो, आप लोगों के लिए मैं फिर से अपना अनुभव लेकर आया हूँ.. आपको मालूम है ही कि अनिता जैन मेरी सगी भतीजी है.. उसकी चूत रस मैं निकाल चुका हूँ.. वह रंग से तो सांवली है.. लेकिन बहुत ही सुन्दर है।
मेरा लंड उसकी चूत की सील तोड़ चुका है। उसका सुन्दर सा गदराया बदन.. जो भी देखता है.. खुश हो जाता है। उसके सीने पर बड़े-बड़े सेब के आकार के सख्त मम्मे थिरकते हैं.. और चलते समय उसके चूतड़ों को लेफ्ट-राईट करते हुए देख कर मुझ जैसे चोदू मर्दों के लौड़े खड़े हो जाते हैं.. ऐसी मदनिका की सील मैं तोड़ चुका हूँ। वह दिवाली मनाने आई थी.. लेकिन उसकी चूत का बैंड बजा कर मैंने खून की होली मना दी थी।
एक दिन मैं काम से शहर गया था और दोपहर के समय लौट आया और आकर मैंने अनीता से पूछा- सब घर के लोग कहाँ गए हैं?
तब उसने कहा- सब लोग खेत में गए हैं।
सुनकर मैं बहुत खुश हुआ।
वह पानी लेकर आई.. पानी पीने के बाद मैंने बिना कुछ कहे अपनी बाँहें फैला दीं.. वह मेरे सीने से आकर लिपट गई।
एक अल्हड़ गदराया माल मेरे आगोश में सिमटा हुआ था, मैं उसकी पीठ सहलाने लगा।
मैं धीरे से पलंग पर बैठ गया। मैंने उसके पतले होंठों पर अपने होंठ रख दिए, उसके रसीले अधरों का शहद चूसने लगा।
शायद उसकी चूत भी मेरे लंड का इंतजार कर रही थी।
मैंने उसे जाँघों पर बिठाया और उसके सीने पर टिके हुए उसके बड़े-बड़े सेब मेरे हाथों में आ गए थे। मैंने जोर से उसके मस्त संतरों को दबाया।
‘आाहहह..’ करके उसने मेरे होंठों से अपने होंठ मिला दिए, मैं मस्ती से उसके बड़े-बड़े गोले दबा रहा था।
आज उसने शर्ट और स्कर्ट पहना हुआ था। वो बहुत सुन्दर लग रही थी। मेरी भतीजी कली थी.. लेकिन मैं उसे फूल बना चुका था।
आज चूत की खुजली के चलते ये मासूम सी कली मेरा साथ दे रही थी।
उसने कहा- काका पहले खाना खा लो..
मैंने लौड़ा उठाते हुए कहा- अनीता जान, पहले इसकी भूख मिटानी है।
वह मेरी जाँघों पर बैठी थी.. उसके बड़े-बड़े चूतड़ों के नीचे मेरा लंड दबा हुआ था।
मैंने उसका स्कर्ट ऊपर उठाया उसकी भरी हुई रान.. चिकना बदन.. उसकी जाँघों में मैंने हाथ घुसाया। उसकी जाँघों की नरमाहट क्या खूब थी।
तब वह बोली- काका दरवाजा खुला ही रखोगे क्या?
तब मैंने उसे कहा- चल जल्दी से बंद कर आ।
वह उठी अपने चूतड़ों को मटकाती हुई गई.. दरवाजा बंद करके वापस आ गई।
मैं अपने कपड़े उतारने लगा.. मैं निक्कर में था.. वह आकर मुझे लिपट गई। वह भी गरम हो गई थी़। तब मैं उसके बड़े-बड़े कूल्हों को दबाने लगा।
मैंने उसे पलंग पर लिटाया उसकी स्कर्ट का हुक खोलने लगा और धीरे से नीचे को खिसका दिया। उसने खुद भी स्कर्ट हो हटाने के लिए अपने चूतड़ों को उचका लिया। उसकी चिकनी जाँघें.. भरा हुआ मांसल जिस्म.. उसकी चूत पर छोटी सी सफेद चड्डी.. वह भी एकदम कसी हुई.. आह्ह..