परिवार में बेनाम से मधुर रिश्ते- 4
बाप बेटी सेक्स कहानी में पढ़ें कि मेरा भाई मम्मी को चोद चुका था, मैं भी पापा के साथ सेक्स करना चाहती थी. तो माँ के कहने पर मैंने क्या किया?
दोस्तो, मैं कविता अपनी सेक्स कहानी के उस मोड़ पर आ गयी हूँ, जहां से अब सब कुछ सिमट रहा है.
अब इस सेक्स कहानी में हमारी मां सुनीता, भाई शिवम और मैं ही रह गई हूँ, बाक़ी सब बिखर सा गया था.
इससे पहले मैं आगे बढ़कर आपको अपने परिवार की सेक्स कहानी सुनाना शुरू करूं, आपको पिछली सेक्स कहानीपरिवार में बेनाम से मधुर रिश्ते- 3
के बारे थोड़ा बता देती हूँ.
मेरी मां सुनीता, मेरे ताऊ जी से चुदती थीं. फिर वो ताऊ जी के लड़के अनिकेत से भी चुदने लगी थीं.
मैं अपने भाई शिवम से चुदती थी और मेरे साथ मेरी चचेरी बहन का लड़का विवेक और लड़की लूसी, जो जवान थे, वो भी मेरे साथ चुदाई का मजा लेते थे.
इस चुदाई में अनिकेत भैया भी मुझे चोद लेते थे और साथ में लूसी को भी!
बात आगे बढ़ी और मेरे भाई शिवम ने किसी तरह प्लानिंग करके अपनी मां सुनीता को चोद दिया.
अब आगे बाप बेटी सेक्स कहानी:
उस दिन शिवम ने मां को चोदा तो मां बोली- ये तुम दोनों ने क्या कर दिया है. अगर किसी को पता चला तो क्या होगा?
भाई ने कहा- आपने भी तो वही किया था. आपकी करतूत के बारे में किसी को पता चला क्या?
मां बोली- मैं और सबकी बात नहीं करती … मगर तुम्हारे पापा को पता चला तो क्या होगा?
मैंने कहा- ये कौन बताएगा?
मां बोली- मेरा मतलब समझो बेटा … अब इस खेल से अनिकेत विवेक लोगों को किसी तरह हटाओ. ये तुम्हारा काम है. वो कल को किसी से कुछ भी कह सकते हैं.
भाई बोला- मैं अकेले कैसे रोक सकता हूँ, आपको भी साथ देना होगा.
मां बोली- हां मैं साथ दूंगी. मगर पहले तुम उस वीडियो को डिलीट करो.
मैं बोली- वो मेरे मोबाइल में है. वो मैं डिलीट कर दूंगी.
भाई मुझे मना करने लगा.
वो मां से बोला कि यदि वीडियो डिलीट हो गया तो तुम बदल जाओगी.
मां बोली- तुमने मेरे साथ सब कुछ कर लिया है. अब मैं बदल कर भी क्या करूंगी. तुमने मुझे जीभर कर चोद तो लिया है.
शिवम हंस कर बोला- अभी तो सिर्फ चखा है. अभी बहुत काम करना बाक़ी है मां.
मां बोली- हां जो मन आए सो कर लेना. मगर तुम्हारे पापा क़ो पता नहीं चलना चाहिए … नहीं तो बहुत दिक़्क़त हो जाएगी.
भाई बोला- तो आप पापा को भी साथ मिला लो न!
मां बोली- तुम्हारे पापा जान गए तो जानते भी हो कि क्या होगा, कुछ पता भी है तुमको! कितनी आसानी से कह दिया कि पापा को भी मिला लो.
मैं बोली- पापा को मैं पटा लूँगी लेकिन आपको साथ देना पड़ेगा मां.
मां बोली- वो नहीं मानेंगे.
मैंने कहा- उनको पटाना मेरा काम है, बस जो मैं कहूँगी, वो तुमको करना होगा.
मां तैयार तो थीं, पर वो डर रही थीं.
जब हम दोनों ने मां से कहा- यदि पापा तैयार हुए, तभी हम उन लोगों को रोक पाएंगे.
मां बोली- चलो देखा जाएगा, पहले उन लोगों को बीच से हटाओ.
मेरा भाई अपनी वासना नहीं रोक पा रहा था. वो मां की चूचियों को दबाते हुए बोला- इतनी बड़ी चूची तो पूरे मुहल्ले में किसी की नहीं होगी.
मां उससे कुछ नहीं बोल रही थी.
मैंने कहा- मां शर्माने की जरूरत नहीं है. खुल कर मजा लो.
मां की चूचियों को मैंने भी दबाते हुए कहा- भाई सच कह रहा है मां, आपकी चूची मेरे हाथ में नहीं आ रही है.
मेरी मां 5 फुट 4 इंच लंबी है. उसकी 38 सी नाप की चूचियां, पीछे की तरफ़ को निकली हुई विशालकाय गांड बड़ी मस्त है.
मां की बड़ी चुचियों और फैली हुई गांड ने भाई के लंड को फिर से खड़ा कर दिया था.
जल्द ही कमरे में नंगा नाच शुरू हो गया.
भाई ने मां की साड़ी, ब्लाउज़, पेटीकोट उतार कर फैंक दिया और मां पूरी तरह नंगी हो गयी.
भाई ने घुटनों के बल बैठ कर मां की चूत में अपने मुँह को लगा दिया.
मां अभी शान्त थी.
भाई ने मुझसे कहा- खड़ी क्यों हो अपनी चूत का पानी मां को भी चुसाओ.
मैंने भी अपने कपड़े निकाल कर फैंक दिए और मां को लिटा कर उनके मुँह पर अपनी चूत को रख दिया.
मां मेरी चूत को चाटने लगी.
भाई मां से बोला- कभी ऐसा मजा किया है?
मां बोली- नहीं, पहली बार कर रही हूँ.
फिर भाई ने अपना लंड मां की चूत में डाल दिया.
मां पूरी तरह ग़र्म हो चुकी थी. मां बोली- तुम आज उस मंज़िल को पा गए हो, जिसको दुनिया में बहुत कम लोग पा सके हैं. तुम अपने बाप से ज़्यादा मज़ेदार चोदते हो.
मैं बोली- मुझे भी दिला दो पापा का लंड … सारा काम आसान हो जाएगा. पूरा घर मज़े लेगा और किसी को पता भी नहीं चलेगा.
मां बोली- ये काम तो तुम ही कर सकती हो. मैं कैसे करूंगी?
भाई बोला- आपको हेल्प करनी होगी.
मां बोली- अब तो मैं तुम्हारी हो गयी हूँ. जो पाप कर दिया है, अब उसके बारे में सोच कर क्या करना.
भाई बोला- कोई पाप नहीं किया है. ये तो बेटे का हक़ होता है. आपने कोई जीव या सांड को देखा हो तो बताइए कि क्या वो अपनी मां या बहन देखता है, तो बस चोदने के लिए ही चढ़ जाता है या नहीं! ये सारे नियम हम लोगों ने ही बना लिए हैं. इस परम्परा को ख़त्म कर देना चाहिए. हर बेटे को अपनी मां के लिए और मां को बेटे के लिए तैयार रहना चाहिए. सबसे पहले मां को बेटे का लंड लेने का अधिकार होना चाहिए.
मैं अपने भाई की बात सुनकर मुस्कुरा दी.
अब तक कमरे में चुदाई का माहौल बन गया था.
मेरी मां अब एकदम ग़र्म हो चुकी थी. मां बोली- अब तो मैं तेरी हो चुकी हूँ. अब तेरा जो मन करे सो कर.
मैं अपना पूरा लंड मां की चूत में डाल कर चोदने लगा.
मां की विशालकाय चूचियां पानी की लहरों की तरह हिलोरें मार रही थीं.
मैं अपनी मां की एक चूची को दबा रही थी और ये देख कर भाई ने लंड की रफ्तार को बढ़ा दिया.
कोई 20 मिनट मां चोदने के बाद भाई ने अपने लंड का पानी मां की चूत में ग़िरा दिया.
मां भी शांत हो चुकी थी.
लेकिन मेरी गर्मी अभी बाक़ी थी. मैंने भाई से कहा- मेरा क्या होगा?
भाई ने कहा- लंड खड़ा हो जाने दो … आपको भी चोद देता हूँ.
मां मुझसे बोली- जब तक तेरा काम मैं कर देती हूँ. आज मैं अपना 26 साल का अनुभव बताती हूँ.
मां ने मुझे 69 की पोजिशन में कर दिया और मेरी चूत को चाटने लगी.
कुछ मिनट चाटने के बाद मां ने भाई का लंड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी.
भाई का लंड दुबारा खड़ा हो गया. भाई ने अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया और मां ने अपनी चूत को मेरे मुँह पर रख कर रगड़ना शुरू कर दिया.
मां हम दोनों के साथ इतना खुल गयी थी जैसे वो वर्षों से बेटे का लंड ले रही हो.
मां कामुक आवाजें निकाल रही थी और कुछ ही देर बाद उसने अपनी चूत से पेशाब करना शुरू कर दिया.
उसका मूत मेरे मुँह में अन्दर गिरने लगा.
मां ने इतना मूता कि मेरी प्यास बुझ गई. काफी सारा मूत बाहर भी गिर गया था.
उधर भाई ने भी अपने लंड का पानी मेरी चूत में छोड़ दिया था.
हम तीनों लोग शांत हो गए.
मां बोली- अब मैं रात में तुम लोगों के पास तुम्हारे पापा के सोने के बाद आ जाऊंगी.
मैं बोली- यार, पापा को भी मिला लो न!
मां बोली- ये काम तुम्हारा है.
मैंने कहा- तुम कुछ मदद करो न!
मां बोली- मैं भी चाहती हूँ सब खुल कर हो … पूरा परिवार मज़े ले. तुम लोग उनको मना लो, चाहे जैसे मनाओ, मुझे कोई आपत्ति नहीं है.
उस दिन चुदाई के बाद मैंने सोच लिया था कि पापा को कैसे सैट करना है.