All content free · updated every 5 minutes

कम्मो बदनाम हुई-1

Story Hindi 3 pages 11 years ago

कम्मो बदनाम हुई-1
प्रेम गुरु के दिल और कलम से
मेरा नाम कुसुम है पर प्यार से सभी मुझे कम्मो कहते हैं। मैं पूरी 18 की हो चुकी हूँ। मेरी चूत में खुजली तो बहुत पहले से ही शुरू हो गई थी पर अब बर्दाश्त से बाहर हो गया था। हर समय चूत में चींटियाँ से रेंगती रहती थी और लगता था अंदर कोई छोटी सी मछली फड़फड़ा रही है। चूत और जांघें सब टाईट हो जाती थी।
जब भी किसी जवान लड़के या मर्द को देखती तो मेरी चूत अपने आप गीली होकर आँसू बहाने लगती और मैं सिवाय उसकी पिटाई करने के और कुछ न कर पाने को मजबूर थी। मेरी चूत एक अदद लंड के लिए तरस रही थी और मुन्नी की तरह मेरा मन भी किसी मोटे लंड के लिए बदनाम हो जाने को करने लगा था। सच कहूँ तो अब तक मैंने अपनी इस निगोड़ी चूत से बस मूतने का ही काम लिया था। प्रेम गुरु की प्रेम कथाएँ पढ़ पढ़ कर मेरा मन गाना गाने को करता :
“कम्मो बदनाम हुई लंड गुरु तेरे लिए”
घर में मर्द के नाम पर बस ताऊजी ही थे। पापा का बहुत पहले देहांत हो गया था। कोई भाई था नहीं। मैं तो दिन रात इसी जुगाड़ में रहती थी कि कब मौका हाथ आये और मैं अपनी फड़कती मचलती चूत की खुजली मिटाऊँ।
आज वो मौका मिल ही गया। ताईजी अपने मायके गई हुई थी और मम्मी अपने ऑफिस चली गई थी। (वो एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करती हैं) मैं ताऊजी के कमरे की सफाई कर रही थी। घर में मेरे और ताऊजी के सिवा और कोई नहीं था। मैंने तय कर लिया था कि चाहे जो हो जाए मैं आज चुदवा कर ही रहूंगी। सफाई के दौरान मुझे पलंग के नीचे पड़ा एक कंडोम मिला। मैं सब जानती तो थी पर ताऊजी से चुदाई की बात शुरू करने का यह अच्छा बहाना मुझे मेरी किस्मत ने दे दिया था।
मैंने उस कंडोम को मुट्ठी में दबा लिया और सब कुछ सोच लिया। मुझे थोड़ी शर्म भी आ रही थी और झिझक भी थी। मैंने बिना ब्रा के स्कर्ट और टॉप डाल लिया और नीचे छोटी सी कच्छी पहन ली। फिर मैं ताऊजी के पास बालकनी में जाकर खड़ी हो गई जहां वो कुर्सी पर बैठे अखबार पढ़ रहे थे। मैंने अपनी मुट्ठी ऐसे बंद कर रखी थी जैसे मेरी मुट्ठी में कोई कारूँ का खजाना हो।
“ओह, कम्मो बेटी” आओ… आओ… कैसे आना हुआ? कुछ परेशान सी लग रही हो? क्या बात है?” ताऊजी ने मेरी मखमली जांघें घूरते हुए कहा।

“बस यूँ ही चली आई अकेले में मन नहीं लग रहा था !” मैंने अपने हाथ की मुट्ठी जोर से कस ली कुछ ऐसा नाटक किया जैसे मैं कुछ छिपा रही हूँ।
“तुम कुछ उदास भी लग रही हो बताओ ना क्या बात है, कोई परेशानी हो तो मुझे बताओ?” ताऊजी अपनी कुर्सी से उठ खड़े हुए।
मैं चुपचाप सर झुकाए खड़ी रही। मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था की बात कैसे शुरू की जाए। सोच कर तो बहुत कुछ आई थी पर अब मेरी हिम्मत जवाब देने लगी थी।

ताऊजी मेरे करीब आ गए और फिर उन्होंने मेरी ठुड्डी ऊपर उठाई और मेरे गालों को सहलाते हुए पूछा “क्या हुआ मेरी प्यारी बेटी को ? मेरी रानी क्यों उदास है ?”
मैंने थोड़ा सकपकाने का सटीक अभिनय करते हुए अपनी बंद मुट्ठी पीठ के पीछे कर ली और कहा,“नहीं क…… कुछ नहीं !”
उन्होंने मेरे नितंबों के पीछे लगा हाथ पकड़ लिया और मेरा हाथ आगे कर के मुट्ठी खोलते हए बोले “जरा देखें तो सही हमारी प्यारी बिटिया ने क्या छुपा रखा है ?”
जैसे ही मैंने मुट्ठी खोली कंडोम नीचे गिर गया। मैं अपनी मुंडी नीचे किये खड़ी रही। मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था। पता नहीं अब क्या होगा। क्या पता ताऊजी नाराज़ ही ना हो जाएँ।
“धत्त तेरे की…. बस इत्ती सी बात के लिए परेशान हो रही थी मेरी रानी बिटिया?” उन्होंने मेरी आँखों में झांकते हुए कहा।
“ताऊजी ये आपके कमरे में मिला था यह क्या है ?”
“ओह ये…. वो…ये…?” ताऊजी थोड़ा झिझक से रहे थे।
“ओह ताऊजी बताइये ना?” क्या है यह गुब्बारा तो नहीं हो सकता ?” मैंने उनकी आँखों में झांकते हुए पूछा।
मैंने महसूस किया कि उनकी साँसें तेज हो गई थी और पैंट का उभार भी साफ़ दिखाई देने लगा था। फिर वो हंसते हुए बोले “ओह…..अरे बेटी यह तो गर्भ निरोध है।”
“वो क्या होता है ?” मैं सब जानती तो थी पर मैंने अनजान बनते हुए पूछा।
“तुम्हें नहीं पता ? ओह… दरअसल इसे शारीरिक मिलन से पहले लिंग पर पहना जाता है।”
“क्यों?”
“ताकि लिंग से निकालने वाला रस योनि में ना जा पाए !”
“पर ऐसा क्यों ?” मैं अब पूरी बेशर्म बन गई थी।
“ऐसा करने से गर्भ नहीं ठहरता !” ताऊजी की हालत अब खराब होने लगी थी। उनकी पैंट में घमासान मचा था। मेरी चूत भी भी जोर जोर से फड़फड़ाने लगी थी।
“पर इसे लिंग पर कैसे पहनते हैं? मुझे भी दिखाइए ना पहनकर ?” मैंने ठुनकते हुए कहा।
“हाँ….हाँ मेरी प्यारी बेटी ! आओ मैं तुम्हें सब ठीक से समझाता हूँ !” कह कर उन्होंने मुझे अपनी बाहों में भर कर चूम लिया और फिर मुझे अपने से चिपकाये हुए अपने कमरे में ले आये।
“बेटी मैं तो कब से तुम्हें सारी बातें समझाना चाहता था। देखो ! सभी लड़कियों को शादी से पहले यह सब सीख लेना चाहिए। मैं तो कहता हूँ इसकी ट्रेनिंग भी कर लेनी चाहिए।”
“किसकी.. म….मेरा मेरा मतलब है कैसे ?”
“देखो बेटी ! एक ना एक दिन तो सभी लड़कियों को चुदना ही होता है। अगर शादी होने से पहले एक-दो बार चुद लिया जाए तो बहुत अच्छा रहता है। ऐसा करने से सुहागरात में किसी तरह की कोई समस्या नहीं आती। अगर तू पहले ही बता देती तो मैं तुम्हें सारी चीजें पहले ही ठीक से समझा देता !”
“कोई बात नहीं अब आप मुझे सारी चीजें समझा दो मेरे अच्छे ताऊजी !”
ताऊजी ने मुझे एक बार फिर से अपनी बाहों में भर कर चूम लिया और मेरे अनारों को भींचने लगे। मैं पूरी तरह गर्म हो गई थी।

थोड़ी देर की चूसा-चुसाई के बाद वो बोले, “बेटी अब तुम अपने सारे कपड़े उतार दो।”
“नहीं, मुझे शर्म आती है ! आपके सामने सारे कपड़े कैसे उतारूं ?” मैंने शर्माने की अच्छी एक्टिंग की।
“अरे बेटी इसमें शर्माने की क्या बात है मैंने तो तुम्हें बचपन में बहुत बार नंगा देखा है। बस अब तुम सारी शर्म लाज छोड़ दो। मैं तुम्हें कितना प्यार करता हूँ तुम नहीं जानती !”
“पर कंडोम तो आपको पहन कर दिखाना है मेरे कपड़े क्यों उतार रहे हैं?”
“ओ…हो…. चलो मैं भी अपने कपड़े उतार दूँगा तुम क्यों चिंता करती हो पहले तुम्हें कुछ और बातें समझाना जरुरी है।”
उसके बाद उन्होंने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मुझे अपनी बाहों में भर कर फिर से चूमना शुरू कर दिया। पहले मेरे होंठों को चूमा और फिर मेरे अनारों को चूसते रहे। फिर धीरे धीरे उन्होंने मेरी चूत को टटोला और उसकी गीली फांकों को चौड़ा करते हुए अपनी एक अंगुली मेरी चूत की दरार में डाल दी। मेरी चूत में तो पहले से ही पानी की धारा बह रही थी। अंगुली का स्पर्श पाते ही ऐसा लगा जैसे चूत के अंदर एक मीठी सी आग भड़क गई है। मैं उनकी कमर पकड़ कर जोर से लिपट गई। ताऊ जी अपनी अंगुली को जल्दी जल्दी अंदर-बाहर करने लगे। मेरी सीत्कार निकालने लगी।
आगे की कहानी दूसरे भाग में !
[email protected]

Categories Hindi
More stories See all