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मदद

Story Hindi 2 pages 13 years ago

मदद
प्रेषक : जय पटेल

मैं गुजरात के एक शहर का रहने वाला हूँ, मेरा नाम जय पटेल है। मैंने बहुत सारी कहानियाँ अन्तर्वासना पर पढ़ी हैं। मेरा भी मन हुआ कि मैं भी अपनी कहानी लिखूँ। मैंने मास्टर डिग्री तक पढ़ाई की है। परिवार में हम दो भाई और मम्मी-पापा ही हैं। मेरी बड़ी बुआ हमारे शहर से 40 किलोमीटर दूर गाँव में मेरे फ़ूफ़ा और 3 बेटियों और एक बेटे के साथ रहती हैं। बुआ की सबसे बड़ी लड़की की शादी हो गई और छोटी वाली सुमीता ने बारहवीं कक्षा पास करने के बाद कॉलेज की पढ़ाई के लिए हमारे शहर आना था। जब मैं उसके गाँव गया था तब हम दोनों टीवी देखते वक्त खूब सारी मस्ती करते थे। मैं उसे हमेशा कामुक नजर से देखता था क्योंकि जब कभी उसकी ब्रा और छोटे छोटे स्तन दिखाई देते थे तब मेरा लंड तम्बू बना लेता था।

वो कॉलेज में एडमिशन लेने शहर आई, मेरी बुआ का फ़ोन आया था कि अच्छे कॉलेज में उसका दाखिला करवा देना। मैंने उसको गर्ल्ज़ कॉलेज में एडमिशन दिला दिया। उसे हमारे ही घर रहना था।

उस दिन बारिश का मौसम था और मम्मी पापा बाहर गये थे, भाई ऑफिस में था, मैं और सुमीता ही घर में थे। मैं दिन में ही सोने को था कि तभी वो मेरे पास आई और मुझे एड्मिशन के लिए थेंक्स कहने लगी।

मैंने कहा- मैंने तेरा काम किया, तू भी मेरा एक काम कर दे।

सुमीता- आप एक बार कहकर तो देखिये।

मैं- पहले वादा करो !

सुमीता- वादा !

मैं- मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है, अपनी किसी सहेली से सेटिंग करवा दे !

सुमीता- मेरी ऐसी कोई सहेली नहीं जो आपसे दोस्ती लायक हो।

मैं- है तो पर तुम बताओ तब ना?

मेरा इशारा उसकी ही ओर था।

सुमीता- तो तुम्हीं बताओ कौन है?

मैं- कॉलेज में हाल में ही एडमिशन लिया है उसने !

वो- मेरे सिवा मेरी किसी भी सहेली ने कॉलेज में एडमिशन नहीं लिया।

मैं- मैं अगर नाम लूँ तो तू मेरी मदद करेगी?

सुमीता- हाँ, मैं कोशिश करूँगी।

मैं- मैं नाम लूँ और तुमे बुरा लगे तो?

सुमीता- ऐसा कुछ नहीं होगा।

मैं- पक्का?

सुमीता- पक्का ! बोला ना !

मैं- अगर बुरा लगे तो माफ़ कर देना !

सुमीता- इसमें बुरा क्यों लगेगा?

मैं- क्योंकि बुद्धू, मैं तेरी ही बात कर रहा हूँ।

सुमीता- पर आप मेरे भैया हैं।

मैं- तू अपना वादा तोड़ रही है !

फिर मैंने कहा- राजा-महाराजा भी यही करते थे और हम सिर्फ दोस्ती की बात कर रहे हैं।

सुमीता- इसमें करना क्या होगा?

मैं- हम दोनों अपनी निजी बातें एक दूसरे से करेंगे।

सुमीता- और कुछ?

मैं- अगर तू चाहे तो?

सुमीता- कैसे?

मैं- मैंने तेरी इतनी मदद की तो एक तू कर दे।

सुमीता- कैसी?

मैं- एक किस करने दे?

सुमीता- नहीं नहीं ! तुम मेरे भैया हो। यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉंम पर पढ़ रहे हैं।

मैं- सुभद्रा भी अर्जुन की बुआ की लड़की ही थी महाभारत में !

मैंने समझाते हुए कहा- और हम किसी को कुछ कहेंगे ही नहीं कि हमने ऐसा किया है।

उसने भाव तो बहुत खाए पर मेरे बार बार मनाने पर मान गई पर और कुछ करने को मना किया।

मैं समय न गंवाते हुए उसे किस करने लगा। वो थोड़ी देर ऐसे ही बैठी रही, बाद में वो भी साथ देने लगी। तभी मैं उसकी जीभ जोर जोर से चूसने लगा। बाद में मैं उसके चूचे को भी मसलने लगा, तभी उसने मेरा हाथ हटा दिया।

पर मैं कहाँ छोड़ने वाला था, मैंने उसका टॉप निकाल दिया, ब्रा भी निकाल दी और मैं उसकी चूचियाँ चूसने लगा। करीब 5 मिनट के बाद मैंने धीरे से उसके पायजामे में हाथ डाला और उसकी चूत को हाथ की उंगली से सहलाने लगा। फ़िर मैंने उसका पायजामा और पैंटी दोनों उतार दी और चूत चाटने लगा।

दस मिनट के बाद वो झर गई और बोली- अब मुझसे रहा नहीं जाता। तभी मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर रखा और एक धक्का लगाया तो उसकी चीख निकल गई- ओ ! ई… माआ आअ !

मैंने उसे लम्बा चुम्बन किया और उसकी आवाज़ मेरे मुँह में दब गई। एक पल को वो बेहोश सी हो गई और उसकी चूत से खून बहने लगा क्योंकि उसकी सील टूट चुकी थी।

वो रोने लगी- भैया, और मत करो, प्लीज़ निकाल लो ! दर्द हो रहा है।

फिर मैं वैसे ही उसके ऊपर पड़ा रहा और जब मुझे लगा कि उसका दर्द कम हुआ है तब मैं धक्के लगाने लगा। करीब 5 मिनट के बाद वो बोली- भैया, बहुत मज़ा आ रहा है।

मैं- ये भैया-भैया क्या लगा रखा है?

सुमीता- तो क्या बोलूँ?

मैं- जानू बोल ना !

सुमीता- ओ के जानू..

जब मेरा धक्के बढ़ने लगे तब वो आह..आह… बोलने लगी। तब मैंने डरकर अपना लंड उसके मुंह में रख दिया और हम 69 की हालत में हो गए। मैं उसकी चूत चाटने लगा और वो मेरा लण्ड चूसते हुए आह…उह्ह करती रही।

फ़िर मैंने उसकी चूत में लण्ड डाला और तेज़-तेज उसे चोदने लगा।

सुमीता को मज़ा आने लगा, वो बोली- जानू तुम मेरी फाड़ दो ! ऊउइ माँ ! आह ! उह !

जब मेरा झरने का वक्त आया और मेरा लंड और मोटा हुआ, तभी उसने अपनी चूत से मेरा लंड दबा दिया, मैंने झट से अपना लंड निकाल कर फ़िर से उसके मुँह में दे दिया और उसमें ही झर गया।

और तभी मैंने अपनी पैंट में देखा तो मैं पैंट में ही झर गया था ! यह एक सपना था ! मैं सोते हुए उसे नींद में सपने में चोद रहा था।

तभी वो आई और बोली- किन ख्यालो में थे?

मैंने कुछ नहीं कहा और मैं बाथरूम में चला गया और सब साफ कर लिया।

फिर मुझे बहुत शर्म महसूस हुई।

बाद में मुझे याद आया कि आज तक मैंने सिर्फ सपने में ही लड़कियों से सेक्स किया है…

प्लीज़ मुझे बताइयेगा कि मेरी कुंवारे लंड वाली कहानी कैसी लगी??

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