मैं भ्रम में रह गया-3
प्रेषक : जितेन्द्र कुमार
आख़िर जब वो पूरा घुस गया तब मैंने दीदी के पाँव अपने कंधों पर लिए और तल्लीनता से उसे चोदने लगा। दीदी संकोचन करके लण्ड को दबाने की कला अच्छी तरह जानती थी। बीस मिनट की चुदाई में वो दो बार झड़ी। मैंने भी पिचकारी छोड़ दी और कुछ देर बाद दीदी के बदन से नीचे उतर गया।
कुछ ही देर बाद दुबारा चुदाई के लिये दीदी को तैयार करने के लिए मैं उसके बदन से खेलने लगा। इस तरह हम बाकी की पूरी रात चुदाई करते रहे।
सुबह फिर भाई बहन किसी को कुछ ना शक हो रक्षाबन्धन मनाया। पूरे दिन काफी घूमना फिरना हुआ, फिर रात घिर आई जिसका हमें इन्तजार था, हम कुल मिला जुला कर पूरा फायदा उठा रहे थे। आज किसी दूसरे तरीके से चुदाई का मन मैंने बना लिया था।
मेरे पास आते ही उसने मेरे होंठ अपने होंठों में दबा लिये और उसे चूसने लगी। मैं आनन्द के मारे तड़प उठा।
मेरा लण्ड तन कर बड़ा हो गया और उसकी चूत लप-लप करने लगी मेरा लौड़ा खाने के लिये।
पर अपना पजामा खोलने के लिये हाथ बढ़ाया तो वो हाथ पकड़ कर बोली- भैया ना कर ऐसे, मैं तो लुट जाऊँगी… हाय रे कोई तो बचाओ !
मैं धीरे से मुस्कुराया क्योंकि ऐसा तो स्टाइल मैंने सोचा भी नहीं था।
तभी उसने अपना ब्लाऊज़ उतार कर एक तरफ़ डाल दिया।
“अब दीदी, यह पेटीकोट उतार कर अपनी मुनिया के दर्शन करा दो !”
मैंने कमर से जोर से धक्का दिया और यह भी ख्याल रखा कि उसे चोट ना लग जाये। पर वो तो बहुत ही होशियार निकली। उसने खड़ी होकर मुझे भी खड़ा कर दिया। मेरा पाजामा उतार कर नीचे सरका दिया। अब मैं बिल्कुल नंगा था, मेरे सारे बदन में सनसनी सी फ़ैल गई थी। इतने समय से मैं चोदने का प्रोग्राम कर रहा था और यहाँ तो तैयारी जोर की मिल गई। बस अब स्वाद ले लेकर खाना था। उसने कहा- भाई, मेरी चूत देखो, देख भैया, मेरा तूने क्या हाल कर दिया है, बस अब बहुत हो गया, मुझे कपड़े पहनने दे !
“तो यह मेरा लौड़ा कौन खायेगा?” कहकर मैंने अपना लण्ड उसके हाथों में पकड़ा दिया।
“आह ! दैया री, इतना मोटा लण्ड ! (जैसे आज तक देख ही नहीं था) मुझे तो मजा आ जायेगा चुदवाने में। मेरे दिल की कली खिल उठी।” मैंने मन ही मन उसके मुख ऐसी बातें सुन कर मजे में उसकी चूत ही चूस ली। वो धीरे से मेरे पास आई और मुझे लिपटा लिया।
आज तो अलग मजे मिल रहे थे जैसे पहली बार चोद रहा हूँ,”दीदी, शरम ना करो, रोज चुदती हो, पर आज तुम फ़ड़वा लो !”
वो मुझे बुरी तरह चूसने और चूमने लगी। उसकी कठोर चूचियाँ मेरे लण्ड के नजदीक टकरा रही थी। मेरा लण्ड उसकी चूत के द्वार में घुसने के लिये बेकरार था बस उसे लपेटने के चक्कर में था।
तभी दीदी का एक हाथ मेरे सर पर आ गया और उसने मुझे दबा कर नीचे बैठाना चालू कर दिया। मैं समझ गया कि चूत को चाटना है।