मीरा दीदी की गाण्ड चुदाई
प्रेषक : राजेश अय्यर
आज तक मैं अन्तरवासना पर यही पढ़ते आया हूँ कि दोस्तों मैं अगली कहानी लेकर हाजिर हूँ। इसका मतलब पाठक काल्पनिक कहानी भी भेजते हैं।
परन्तु मेरे पास ऐसी काल्पनिक नहीं अपितु सत्य घटना है जो मेरे साथ घटी है।
बात कुछ साल पहले की है मेरे एक दूर के रिश्ते के मामा जी एक बड़े शहर में उच्च अधिकारी हैं। मेरी मम्मी ने गर्मी की छुटिटयों में मुझे उनके घर भेज दिया कि जाओ घूम कर आ जाओ।
घर में मामा, मामी, व उनकी बेटी मीरा जो उस समय १८ वर्ष की थी । वह बहुत सुन्दर है।
एक दिन मामी जी ने कहा- राज ,तुम मीरा को स्कूटी चलाना सिखा दो !
हालाँकि मैं दीदी से छोटा था फिर भी मैं गाड़ी चलाना जानता था।
मैं दीदी को आगे बिठाता था और मैं पीछे बैठता था । यूँ तो मेरा लंड रोज ही अकड़ जाता था लेकिन एक दिन दीदी ने अपने पिछवाड़े पर कुछ दबाब महसूस किया। घर आकर गाड़ी खड़ी करते ही गुस्सा करने लगी और कहने लगी- अभी मम्मी को बताती हूँ।
शायद उसने अपनी मम्मी को कुछ बताया भी क्योंकि मामी जी ने एक दो बार मेरे अंग की तरफ गौर से देखा, जब मैं लन्च के लिए नेकर पहन कर टेबल पर आता था।
फिर दो दिन के बाद दीदी ने फिर गाड़ी निकाली। लेकिन इस बार भी उसमें तनाव आ गया, परन्तु मीरा दीदी ने घर आकर मुझे डांटा नहीं बल्कि दूसरी मंजिल में अपने कमरे में ले गई और वहाँ जाकर उन्होंने मुझसे कहा- जरा दिखाओ पैंट खोलकर ! मैं भी तो देखूं क्या चुभता है मुझे ।
मैं शरमा गया और दीदी का कहना टाल दिया ।
फिर अगले दिन मामा जी व मामी जी को अचानक दो दिन के लिए गाँव जाना पड़ा तो मामी जी बोलकर गईं कि डरना नहीं, दोनो भाई बहन नीचे ही सोना और कोई बात होने से तृप्ति आँटी को फोन करके बुला लेना।
आज देखा कि मीरा दीदी बहुत खुश थीं। रात को खाना खाने के बाद दीदी ने जल्दी टी वी बन्द कर दिया और ताश ले आई और कहा- जो हारेगा उसे दूसरे की पीठ मालिश करनी पड़ेगी।
मैं पहले से ही डरा था इसलिए समहत हो गया। अब मैं जीत गया तो भी मैं मालिश कराना नहीं चाहता था लेकिन दीदी ने कमर पर ऐसे ही हाथ फिराते हुए एक बार हाथ को लन्ड से छू दिया जो अपने पूरे आकार में था।
फिर इस बार दीदी जीत गई। जब मैंने मालिश शुरू की तो दीदी ने उल्टी होकर धीरे धीरे अपना पजामा और कच्छा नीचे कर दिया। दीदी की दूध जैसी सफेद गाण्ड देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो गये और मेरे लन्ड से कुछ चिपचिपा पदार्थ रिसने लगा।
अचानक दीदी ने पलटकर कहा- राजू, तुम क्या देख रहे हो? मम्मी से कह दूंगी और अगर कुछ नहीं देख रहे हो तो यह क्या है दिखाओ पैन्ट खोलकर !
आज मैंने पैन्ट खोलकर दिखा ही दिया।
दीदी तो जैसे पागल हो गई, कहने लगी- बाप रे ! इतना बड़ा और मोटा !
मैंने कहा- अब क्या तुम भी दिखा सकती हो?
मीरा दीदी तैयार हो गई और उन्होंने नीचे के सारे कपड़े उतार दिये।