लड़कपन की यादें-1
मैं काफ़ी समय से अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। अधिकतर झूठी कहानियों के बीच इसकी कुछ कहानियाँ मुझे बहुत अच्छी लगी।
इस कहानी के लेखन और विशेषकर सम्पादन में अन्तर्वासना के ही एक लेखक ‘प्रीत आर्य’ ने मेरी बहुत मदद की इसके लिए मैं उनका हृदय से आभारी हूँ।
उन्ही की प्रेरणा से मैं अपने बीते पलों की एक कहानी आपके समक्ष रखने जा रहा हूँ।प्रीत आर्य जी की कहानियाँ आप यहाँ पढ़ सकते हैं!
मैं 33 वर्षीय अभिमन्यु राजस्थान के एक प्रसिद्ध शहर में अपनी 29 वर्षीया पत्नी व दो बच्चों के साथ सुखमय वैवाहिक जीवन बिता रहा हूँ।
यह कहानी लगभग काफ़ी वर्ष पहले शुरू हुई जब मैं बहुत छोटा था।
मैं तब अपने मम्मी, डैडी के साथ अपने तीन मंजिला घर में रहता था। घर में कई कमरे होने के कारण मुझे अपने लिए अलग से कमरा मिला था जिसमें मैं पढ़ता, अपने दोस्तों के साथ खेलता और रात को सोता था।
रसोई और ड्राइंग रूम सबसे निचली मंजिल पर, मम्मी-डैडी का बैडरूम और एक गेस्ट रूम उसके ऊपर की मंजिल पर और मेरा कमरा व एक और गेस्ट रूम तीसरी मंजिल पर था।
उसके ऊपर सिर्फ़ बड़ी छत थी जहाँ मैं और मेरे दोस्त बैडमिन्टन खेला करते थे।
आपको बता दूँ कि तब हमारे देश में टेक्नोलॉजी का विकास होना शुरू ही हुआ था अर्थात् मोबाइल, इन्टरनेट, सीडी, डीवीडी प्रचलन में नहीं थे।
आज मोबाइल, इन्टरनेट और टीवी के बदौलत किशोरवय नौनिहाल भी सैक्स के बारे में सब जानते हैं। तब ऐसा नहीं था… हालांकि उस ज़माने के विपरीत मुझे सैक्स के बारे में ज्ञान मेरी कम उम्र में ही हो गया था जब एक दिन मैंने अपने डैडी की अलमारी में छुपा कर रखी सैक्स कहानियों की किताबों का खज़ाना देख लिया था।
पहली ही किताब में सैक्स का सचित्र विस्तृत ज्ञान था… लिंग, योनि, उरोज़, नितम्ब, हस्तमैथुन, सहवास, सम्भोग के विभिन्न आसन, रतिक्रिया, गर्भधारण, परिवार नियोजन आदि सैक्स के सभी विषयों पर सरल भाषा में बहुत अधिक साहित्य उस सीरिज़ की 4 किताबों में था जिसे पढ़ कर मैं दंग रह गया था।
जिस चीज़ को सभी बड़े, मम्मी, डैडी गंदी बात कह कर छुपाने की कोशिश कर रहे थे, वह तो मेरी जीवन का सबसे मनपसंद विषय बनने जा रहा था।
मैं एक-एक किताब लाता व पढ़ कर चुपचाप उसे अपनी जगह पर रख देता।
इस प्रकार मैंने एक-एक कर के वहाँ रखी सभी 27-28 कहानियों व सैक्सज्ञान की किताबें कई-कई बार पढ़ी।
इस साहित्य से मैं विद्वान तो नहीं बन गया पर सैक्स के विषय में आधारभूत ज्ञान मुझे हो गया था।
कुछ दिन बाद वहीं एक वीडियो कैसेट मिली जिस पर इंग्लिश मूवी का नाम व (A) लोगो था।
मुझे तुरंत याद आया कि एक बार दूरदर्शन पर शुक्रवार देर रात आने वाली मूवी को देखने की जिद करने पर (A) सर्टिफिकेट वाली मूवी बता कर मम्मी ने मुझे नहीं देखने दी थी और कहा था कि यह मूवीज बड़ों के देखने के लिए होती है।