बदलते रिश्ते -4
रामलाल जब लिंग धोकर बाथरूम से लौटा तो उसके गोरे, मोटे और चिकने लिंग को देख कर अनीता की योनि लार चुआने लगी। योनि रामलाल के लिंग को गपकने के लिए बुरी तरह फड़फड़ाने लगी और अनिता ने लपक कर उसका मोटा तन-तनाया लिंग अपने मुँह में भर लिया और उतावली हो कर चूसने लगी।
रामलाल बोला- बहू, तू अब अपनी जांघें फैलाकर चित्त लेट जा और अपने नितम्बों के नीचे एक हल्का सा तकिया लगा ले।
‘ऐसा क्यों पिता जी?’
‘ऐसा करने से तेरी योनि पूरी तरह से फ़ैल जाएगी और उसमें मेरा यह मोटा-ताज़ी, हट्टा-कट्टा डण्डा बिना किसी परेशानी के सीधा अन्दर घुस जाएगा।’
अनीता ने वैसा ही किया।
रामलाल ने बहू के योनि-द्वार पर अपने लिंग का सुपाड़ा टिकाकर एक जोरदार झटका मारा कि उसका समूचा लिंग धचाक से अन्दर जा घुसा।
अनीता आनन्द से उछल पड़ी। वह मस्ती में आकर अपने कूल्हे और कमर उछाल-उछाल कर लिंग को ज्यादा से ज्यादा अन्दर-बाहर ले जाने की कोशिश में जुटी थी।
रामलाल बोला- बहू, तेरी तो वाकयी बहुत ही चुस्त है। कुदरत ने बड़ी ही फुर्सत में गढ़ी होगी तेरी योनि।
अनीता बोली- आपका हथियार कौन सा कम गजब का है। पिता जी, सच बताइए, सासू जी के अलावा और कितनी औरतों की फाड़ी है आपके इस मोटे लट्ठे ने?
रामलाल अनीता की योनि में लगातार जोरों के धक्के लगाता हुआ बोला- मैंने कभी इस बात का हिसाब नहीं लगाया। हाँ, तुझे एक बात से सावधान कर दूं। मेरे-तेरे बीच के इन संबधों की तेरी पड़ोसन जिठानी को को जरा भी भनक न लग जाए। वह बड़ी ही छिनाल किस्म की औरत है, हमें सारे में बदनाम करके ही छोड़ेगी।’
‘नहीं पिता जी, मैं क्या पागल हूँ जो किसी को भी इस बात की जरा भी भनक लगने दूँगी। वैसे, आप एक बात बताओ, क्या यह औरत आपसे बची हुई है?’
रामलाल जोरों से हंस पड़ा, बोला- तेरा यह सोचना बिल्कुल सही है बहू, इसने भी मुझसे एक बार नहीं, कितनी ही बार ठुकवाया है। ‘अच्छा, एक बात और पूछनी है आपसे..?’
‘पूछो बहू…’
‘पहली रात को क्या सासू जी आपका यह मोटा हथियार झेल पाई थीं?’
‘अरे कुछ मत पूछ बहू, जब मेरा तेरी सास के साथ ब्याह हुआ था तब उस पर अभी जवानी भी पूरी नहीं चढ़ी थी और मैं 18 साल का। इतना तजुर्बा भी कहाँ था तब मुझे कि पहले उसकी योनि को सहला-सहला कर गर्म करता और जब वह तैयार हो जाती तो मैं उसकी कुंवारी व अनछुई योनि में अपना लिंग धीरे-धीरे सरकाता। मैं तो बेचारी पर एकदम से टूट पड़ा था और उसे नंगी करने उसकी योनि के चिथड़े-चिथड़े कर डाले थे। बस उसकी नाजुक सी चूत फट कर खून के टसूए बहाती रही थी पूरे तीन दिन तक ! अगली बार जब मैंने उसकी ली तो पहले उसे खूब गर्म कर लिया था जिससे वह खुद ही अपने अन्दर डलवाने को राज़ी हो गई।
अनीता तपाक से बोली- जैसे मेरी योनि को सहला-सहला कर उसे आपने खौलती भट्टी बना दिया था आज।