मेरी मदमस्त रंगीली बीवी-20
तीनों ही अपने लन्डों को बाहर निकाल कर सहला रहे थे और सलोनी को इशारे कर रहे थे, सलोनी भी उन्हें देखते हुये मेरे लन्ड को मसल रही थी।
शायद सलोनी उनके लौड़ों को देख कर कुछ और सोच रही थी कि यह उन तीनों में से किसी लंड है?
और तभी…!!
सलोनी मेरे लंड को छोड़ नंगी ही उठ कर खड़ी हो गई, बोली- मैं जरा फ्रेश हो कर आ रही हूँ!
बस इतना कह कर वह बाथरूम की तरफ़ नंगी चली गई। वैसे भी वह सेक्स करने के बाद कपड़े नहीं पहनती!
बाथरूम का एक दरवाज़ा बाहर वाले कमरे में खुलता है, शायद उसने कोई प्रोग्राम सोचा था।
मैं ऐसे ही नंगा लेटा हुआ था कि बाहर से हल्की हल्की आवाजें आने लगी और उधर का दरवाजा भी हल्के से खोलने की आवाज आई,
मैंने उसी पर्दे के पीछे से देखा, थोड़ा सा अन्तर आया, वही कमरा था… वही पर्दा था, पहले मैं उस ओर था… इस बार इस तरफ़ हूँ।
पहले मैं ड्राइंगरूम में था, अब बैडरूम में हूँ, मगर वे चारों फ़िर से वही सब करने लगे थे।
सलोनी पूरी नग्न खड़ी थी, कलुआ, पप्पू खड़े हुए ही उसके स्तन मसल रहे थे चचा नीचे बैठ कर सलोनी की दोनों टांगों को फैला कर मेरे लंड के रस से भीगी हुई सलोनी की चूत चाट रहे थे।
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सलोनी की आँखें बन्द थी वरना वह मुझे पर्दे से झाँकते हुए देख सकती थी।
उसको बहुत मज़ा आ रहा होगा, उसने पप्पू और कलुआ के लंड अपने हाठों में पकड़े हुये थे।
कुछ ही देर में सलोनी ने अपने हाथों से उन लड़कों का पानी निकाल दिया जो बैठे हुये जावेद चचा पर गिरा।
लेकिन उन्होंने कोई गुस्सा नहीं दिखाया, आराम से सलोनी की चूत को चाटते रहे।
फिर सलोनी चचा को खड़ा करके उनका लंड भी हिलाने लगी।
जावेद चचा ने सलोनी को कुछ कहा, सलोनी ने एक बार मना किया लेकिन फिर नीचे बैठ कर वह उनके लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी।
और कुछ देर बाद चचा का वीर्य भी निकल गया।
सलोनी वैसे ही बाथरूम से अन्दर आई… मैं जल्दी से बेड पर आकर सो गया।
सलोनी कुछ देर बाद कमरे में आई और मुझे उठाने लगी।
उसने अब नाईटी पहन ली थी लेकिन नाईटी के अन्दर पता नहीं उसने कुछ पहना भी या नहीं!
सलोनी- सुनो लगता है कि वे बाहर अपना काम कर चुके हैं, जाओ उनको वापिस भेज आओ, मुझे घर के काम भी निबटाने हैं अब!
मुझे हंसी आ गई, मुझे पता था कि उन्होंने कौन सा काम निपटाया था।
फिर भी मैंने उठ कर टी-शर्ट और लोअर पहना और बाहर आया।
बाहर अब सब सामान्य था… जैसे वे कुछ जानते ही नहीं! मुझको भी सामान्य ही रहना था क्योंकि तभी मेरी इज्जत रह सकती थी।
चचा ने कहा- साब, काम हो गया, कल सवेरे हम सामान यहीं से ट्रक में लदवा देंगे, यहीं से चला जाएगा। पर आप लोग कब जाएँगे?
मैंने कहा केवल इतना- बता दूँगा! अभी तुम जाओ, ये 500 रुपए लो, कुछ खा पी लेना, बाकी मैंने ट्रांसपोर्ट में पैसे दे दिये हैं।