हम सभी एक रूम में सोते थे| एक रात मेरी आंख खुली तो देखा कि अंधेरे में मेरी मां पापा का लंड चूस रही थी| उस दिन से मेरा नजरिया बदल गया| अब मैं भी अपनी मां के बदन के मजे …
दोस्तो, मेरा नाम पवन है और मैं आपको एक कहानी बताना चाहता हूं जो मेरे और मेरी मां शीला (बदला हुआ नाम) के बारे में है| यह एक रीयल स्टोरी है| मैंने अन्तर्वासना पर मां-बेटे की चुदाई की कहानियों को कई बार पढ़ा था| मुझे पहले इस तरह की घटनाओं पर यकीन नहीं होता था जब तक कि इस तरह की घटना मेरे साथ नहीं हुई थी|
कहानी आगे बढ़ाने से पहले मैं आपको अपने बारे में बता देता हूं| मैं अभी 36 साल का हूं| ये कहानी तब की है जब मैं केवल 20 साल का था| उस वक्त मैंने अपने कॉलेज में एडमिशन लिया था| मेरे घर पर हम लोग 4 सदस्य थे|
मेरे पापा 50 साल के थे और मां 42 साल की थी| मेरी बड़ी दीदी थी जो 22 साल की थी| मेरी दीदी भी कॉलेज में पढ़ रही थी| उस वक्त मेरे पिता जी एक कंपनी में काम करते थे| मेरी मां घर का काम देखा करती थी|
हम लोग उस वक्त औरंगाबाद में एक किराये के मकान में रहा करते थे| मकान दो कमरे का छोटा सा घर था| एक रूम में हम सब लोग रहते थे और दूसरे में हम रसोई का काम कर लेते थे| छोटा सा बाथरूम था लेकिन काम चल जाता था|
अब मैं आपको अपनी मां के बारे में बताता हूं| मेरी मां ने केवल चौथी कक्षा तक पढ़ाई की थी| आप यूं कह सकते हैं कि मेरी मां को पढ़ना लिखना नहीं आता था| वह एक गांव की सीधी सादी महिला थी जो घर के काम के अलावा किसी चीज के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानती थी|
मेरी मां का रंग सांवला है| उसके नैन नक्श बहुत ही तीखे हैं| उनकी हाइट 4 फीट और 10 इंच की है| उसका बदन औसत सा है| मगर मेरी मां की चूचियां काफी मोटी और मांसल हैं|
हमारा घर छोटा था तो हम लोग सब एक ही रूम में सो जाते थे| पलंग पर मां और दीदी सोती थी| उनके बाजू में ही बिछौना लगा कर मैं और पापा सो जाते थे| मेरे पापा को शराब पीने की आदत थी| वो अक्सर मेरी मां के साथ मारपीट भी करते थे|
हम दोनों भाई बहन और यहां तक कि मेरी मां भी मेरे पापा से बहुत डरती थी| उनके सामने सब चुप ही रहते थे| मां भी चुपचाप मार खा लेती थी लेकिन कुछ बोल नहीं पाती थी|
एक रात की बात है कि हम लोग रोज की तरह सोये हुए थे| रात को अचानक ही मेरी आंख खुल गयी| मैंने बिना हिला डुले हुए देखा तो सामने का नजारा देख कर मेरे होश ही उड़ गये|
मेरे पापा पलंग के साथ में नंगे होकर खड़े हुए थे| मेरी मां मेरे पापा का लंड चूस रही थी| मेरे पापा मेरी दीदी के बोबे पर हल्की हल्की मसाज दे रहे थे| मगर दीदी गहरी नींद में थी और उसको कुछ पता नहीं चल रहा था|
मां मेरे पापा के हाथ को दीदी की चूचियों से बार बार हटा रही थी| पापा फिर से दीदी की चूचियों को छेड़ने लगते थे| ये नजारा देख कर मेरा लंड भी एकदम से टाइट हो गया और उछलने लगा|
उस समय रूम में ज्यादा रोशनी नहीं थी| बाहर से हल्की रोशनी आ रही थी जिसमें उन दोनों की हरकत का साफ साफ पता लग रहा था| मैं मां के बदन को देखने लगा| अंधेरा होने के कारण कुछ ज्यादा दिखाई नहीं पड़ रहा था लेकिन मां की चूचियां लटकती हुई दिख गयी थीं| उनकी चूची सच में ही बहुत मोटी थी जो किसी बड़ी फुटबाल के जैसे झूलती हुई दिख रही थीं|
उस रात के बाद से ही मां की ओर से मेरा देखने का नजरिया बदल गया था| अब मैं अपनी मां को नंगी देखने की कोशिश करने लगा था| जब भी मां बाथरूम में नहाने के लिए जाती थी तो मैं उन पर नजर जमाये रहता था| उनकी चूचियों को घूरता रहता था|
कई बार मैंने मां की चूचियों की घाटी को देखा था| मैं कई बार घर में अकेला होने पर मुठ मारने लगा था| अपनी मां की मोटी चूचियों और उनके नंगे बदन के बारे में सोच कर लंड को रगड़ता था और फिर वीर्य छोड़ कर सुकून मिलता था| मुझे सेक्स को लेकर आकर्षण तो था लेकिन अब ये आकर्षण मेरा जुनून बन गया था|
हर रात में अपने बिस्तर पर लेटा हुआ सोने का नाटक करने लगा था| मुझे हर रात इसी बात का इंतजार रहता था कि पापा और मां का सेक्स देखने का मौका मिलेगा| हर रात में इसी उम्मीद में गुजार देता था|
कई बार मैंने कोशिश की कि पापा और मां की पूरी चुदाई देखने का मौका मिल जाये लेकिन ऐसा अभी नहीं हो रहा था| शायद अभी सही वक्त नहीं आया था| एक दो बार मैंने पापा को मेरी मां के मुंह में लंड देकर चुसवाते हुए देखा लेकिन चुदाई नहीं देख पाया था|
ऐसे ही दिन बीतते गये और 6 महीने गुजर गये| उसके बाद हम लोगों अपना मकान बदलने का विचार किया| हमने एक दूसरा मकान किराये पर ले लिया| उस मकान में तीन कमरे थे|
नये मकान के तीनों ही कमरे एक सीधी लाइन में थे| पहले एक हॉल था और उसके बाद एक रसोई बनी हुई थी और तीसरा फिर एक रूम था अंदर की ओर|
इस मकान में आने के बाद हम लोगों के सोने की जगह भी बदल गयी थी| यहां पर रसोई अलग से थी| बाहर वाला हॉल भी काफी बड़ा था जिसमें काफी जगह थी| यहां पर आने के बाद मैं और मेरी बहन हॉल में सोते थे जबकि मां और पापा अंदर वाले बेडरूम में सोते थे|
घर बदलने के बाद अब एक और समस्या हो गयी थी| अब तो मुझे रात में उन दोनों की चुदाई देखने का मौका भी नहीं मिलने वाला था| मैं यही सोच कर परेशान रहने लगा था कि यहां तो कुछ देखने का चान्स ही नहीं मिल रहा है|
मैं सोच रहा था कि इससे अच्छा तो पुराना ही मकान था| वहां पर एक साथ सोते थे तो कुछ देख ही लिया करता था| कई दिनों तक मैं इसी ताक में रहा कि उन दोनों की चुदाई देखने को मिल जाये|
एक दिन मैंने पाया कि उनके रूम का दरवाजा खुला हुआ था| मैंने वहीं पर झांक कर देखा| मगर अंदर तो सब शांत था| मैंने थोड़ा इंतजार करने की सोची| मैं आधे घंटे तक वहीं खड़ा रहा लेकिन मां और पापा दोनों गहरी नींद में सो रहे थे|
कई दिन मैंने ऐसे ही चुदाई देखने की उम्मीद में कई रातें बर्बाद कर दीं| मैंने पाया कि रात में पापा और मां चुदाई नहीं कर रहे हैं| मेरे पापा नशे में पड़े रहते थे और मां सोई रहती थी|
फिर मैंने ठान लिया कि मैं पता करके रहूंगा कि ये दोनों सेक्स कब करते हैं| फिर मुझे पता चला कि पापा रात में नहीं बल्कि दिन में चुदाई करते हैं| रात को तो वो दारू पीकर नशे में पड़े रहते हैं| दिन में जब मैं और दीदी बाहर होते थे तो वो उस समय में चुदाई करते होंगे ऐसा मुझे लगने लगा था|
4 बजे मैं ट्यूशन पर चला जाता था| पापा दो बजे घर में आ जाते थे| घर में रहते हुए तो मैंने कभी उनको मां के साथ नहीं देखा था| जब 4 बजे मैं चला जाता था तो उसके बाद का मुझे पता नहीं था| मेरी बहन शाम को 5 बजे के आस पास आ जाती थी|
फिर 5|30 बजे तक मैं भी आ जाता था| मैंने अंदाजा लगा लिया कि पापा मेरी मां की चुदाई 2 से 3 के बीच में ही करते होंगे| फिर मैंने सोचा कि इन दोनों की चुदाई के बीच में सबसे बड़ा रोड़ा तो मैं ही हूं|
मेरे रहते तो मैं कभी इन दोनों का सेक्स नहीं देख पाऊंगा| इसलिए मैंने एक एक्सट्रा क्लास का बहाना कर लिया| मैंने मां को कह दिया कि मैंने पढ़ाई के लिए एक और क्लास ले ली है|
मैं अब हर रोज 2 बजे ही क्लास के लिए बाहर निकल जाता था| उस वक्त पापा घर पर आ रहे होते थे और मैं घर से जा रहा होता