पहले प्रणय की वो याद
Xxx देसी सुहागरात कहानी में एक विधुर किसी विवाह में गया, वहां वर और वधू पक्ष में झगड़ा हो गया. वहां उस विधुर ने उस लड़की से विवाह कर लिया और उसे घर ले आया.
प्रिय पाठको, नमस्कार!
मेरा नाम विजय है।
मैं एक छोटे से गाँव का निवासी हूँ।
मेरी उम्र 36 वर्ष है। कद 5 फुट 8 इंच, रंग गहरा साँवला, काठी मजबूत और बालों भरा भालूई शरीर है।
खेती बाड़ी अच्छी चल रही है और भगवान का दिया सब कुछ है।
माँ है, एक बेटा है.
पर दुर्भाग्यवश दो वर्ष पहले मेरी पत्नी का देहांत हो गया था.
इसलिए तब से विधुर जीवन जी रहा हूँ।
Xxx देसी सुहागरात कहानी मेरी दूसरी शादी की है.
सबने कहा कि ब्याह कर ले, बच्चे को माँ, माँ को बहू और तुझे जीवनसंगिनी मिल जाएगी।
सुनने में तो रोमांचकारी लगता है पर पुरानी यादों को भुलाना आसान नहीं।
फिर कौन लड़की एक रंडुए से ब्याह करना चाहेगी जिसका एक 9 साल का लड़का भी हो।
खैर जीवन कट रहा था.
उन्हीं दिनों पड़ोस के गाँव में हमारे यहाँ के एक भले आदमी के लड़के का ब्याह तय हो गया।
हम सभी बाराती बन पड़ोस गाँव पहुँचे।
उन्होंने जमकर स्वागत किया।
लगन का समय भी आ गया पर न जाने किस बात पर कहा-सुनी हो गई।
मैंने पता किया तो पता चला कि लड़का दारू पीकर मंडप में बैठ गया है।
इसके पहले शादी से जुड़ी आर्थिक कुप्रथा को लेकर भी वहाँ तनाव उपज गया था।
खैर इन सब बातों का नतीजा ये हुआ कि लड़की ने सबके सामने उस पियक्कड़ लोभी लड़के से ब्याह करने को मना कर दिया।
बहुत हंगामा हुआ।
बारात पक्ष ने लड़की के चरित्र पर लांछन लगाया कि इसका कहीं चक्कर है।
मुझे यह सुनकर बुरा लगा।
यूँ किसी के चरित्र पर प्रश्न उठाना गलत है।
लड़की रो पड़ी।
उसने अपने चरित्र को बेदाग बताते हुए कहा- मैं यहाँ किसी भी और से ब्याह करने को तैयार हूँ। यदि किसी में हिम्मत है तो सामने आए।
सब चौंक गए और चुप हो गए।
न जाने मेरे मन में कहाँ से हिम्मत आई और मैंने भीड़ मैं से आवाज़ दी- मैं करूँगा ब्याह!
मैं बाराती था अतः सब मुझे कोसने लगे।
मेरे गाँव वाले ही मेरे खिलाफ हो गए।
मैंने तो लड़की का चेहरा तक नहीं देखा था।
लड़की वालों ने मुझे सुरक्षा दी।
मेरा नाम-काम पूछा और मंडप में बैठा दिया।
मेरे साथ मेरा बेटा भी था पर किसी ने कुछ नहीं पूछा।
ब्याह हो गया और लड़की जो अब मेरी ब्याहता पत्नी बन चुकी थी, मेरे बेटे के साथ बस में बैठकर मेरे घर आ गई।
पूरे गाँव में मेरी थू-थू हुई पर मैंने चिंता नहीं की।
माँ को सब बताया।
मेरी माँ समझदार थी, फिर उसे बहू भी चाहिए थी।
मोहल्ले के कुछ लोग इकट्ठे हो गए, रस्में हुई और रात आ गई।
आनन फानन में सुहाग की सेज सज गई और मुझे कमरे में भेज दिया गया।
मैंने पत्नी से कहा- जो भी आज हुआ, उससे तुम दुखी होगी. और वैसे भी यह शादी एक दुर्घटना जैसी ही है।