चिरयौवना साली-28
लेखिका : कमला भट्टी
रात को जोरदार चुदाई के बाद जीजाजी और मैं बाथरूम में जाकर फ़्रेश हो आए और फ़िर जीजाजी बिस्तर पर आ कर मेरी पीठ से चिपक कर सो गए !
चुदाई की थकान से मुझे एकदम नींद आ गई और मैं सपनों की दुनिया में पहुँच गई।
मैंने सपने में देखा कि मैं सुनहरे पंखों वाली एक परी हूँ जो किसी अनजान लोक में उड़ रही हूँ, मैं बहुत ही गोरी, नाजुक और मासूम सी परी हूँ जो आज ही इस लोक में आई हूँ। मेरी कमसिन काया अभी तक यहाँ के तेज़ हवा के थपेड़े भी नहीं सहन कर पा रही है और मेरी प्यारी आँखें हर चीज को उत्सुकता से देख रही हैं।
चारों तरफ हरे भरे घास के मैदान, आकाश को चूमती बड़े बड़े पेड़ों की डालियाँ, बस जनजीवन नज़र नहीं आ रहा था।
उड़ते उड़ते थक गई तो नीचे हरी हरी घास का मैदान ऐसे दिख रहा था जैसे कोई कालीन बिछा हुआ हो।
तो उसे देख मैं अपनी माँ की सीख भूल गई कि किसी अनजान जगह ना तो जाना चाहिए और न ही रुकना चाहिए !
जमीन पर उतरते ही वहाँ की कोमल घास ने स्वागत किया, थोड़ा दूर वे विशालकाय पेड़ अब मुझे भयानक लग रहे थे ! उस घास पर बैठते ही लेटने का मन हुआ और मुझे थोड़ी देर में नींद आ गई।
मेरी नींद कोई भारी बोझ सीने पर आ जाने के कारण टूटी, मैंने देखा कि मेरे ऊपर एक काला कलूटा भारी भरकम दानव चढ़ा हुआ है, उसकी आँखों में वासना के साथ आश्चर्यमिश्रित ख़ुशी भी है कि आज उसे मेरे जैसी सुन्दर परी मिल रही है !
मुझ कोमल सी परी के लिए जिसने अभी सेक्स किया क्या कभी देखा भी नहीं, उसे एक धक्का सा लगा और चेतना-संज्ञा शून्य हो गई, तब तक उस दानव ने मेरे पर नोच दिए, उसके भारी हाथ मेरे कोमल हाथों से नहीं रुक रहे थे और मेरे पूरे शरीर को जैसे नोच रहे थे, मैं दर्द से कराह रही थी और मेरे दर्द को देख कर उस दानव के मुख से आनन्द भरी चीखें निकल रही थी। थोड़ी देर में ही मेरे परी लोक के कपड़े उसके हाथों से फट कर उतर चुके थे, अब मेरा बदन चमक रहा था जिसे देख कर वो दानव बौरा गया था और उसने भी अपने कपड़े फटाफट फाड़ डाले। अब वो मेरे टांगों के बीच आ गया, मैं अपने नाजुक हाथों से उसे दूर करने की भरसक कोशिश कर रही थी और उसके पत्थर जैसे सीने पर मुक्के बरसा रही थी जो उसे फ़ूल की तरह लग रहे थे और उसकी उत्तेजना में वृद्धि ही कर रहे थे। उसने मेरे पैर जबरदस्ती फ़ैला दिए उसका लिंगमुंड मेरी अक्षत योनि के मुख पर आ गया। उसने उसे मेरी चूत के छेद पर टिका कर एक धक्का मारा तो उसका लण्ड सारे किलों को मटियामेट करता अन्दर घुस गया। मेरे मुँह से आह की आवाज़ निकली और तभी मेरा सपना टूटा।