साली की चूत चुदाई के साथ पड़ोसन की गांड
आपने मेरी पिछली कहानीसाली की चुदाई उसने मेरी गांड मारी
पढ़ी होगी।
अब उससे आगे की कहानी अगली सुबह से शुरू :
मैं बिस्तर से उठा और बाथरूम की तरफ की बढ़ा ही था कि- दरवाज़ा खोल दीपक, खोल!
अरे यह तो दादा जी की आवाज है!
इतनी देर तक सोते हो? और वो कहाँ है?
कौन? मैंने पूछा।
तुम्हारी साली?
अभी सो रही है।
इतने में फ़ोन आया- मैं मम्मी के साथ आज यहाँ से बाजार जाऊँगी, तुम ऑफिस से वापिस आते वक़्त मुझे ले लेना क्योंकि मम्मी-पापा यहीं से वापिस चले जायेंगे।
मुझसे तो कुछ बोलते नहीं बना- हाँ हाँ! ठीक है! बस यही मुँह से निकला।
फिर नित्य क्रियाओं से निवृत होने के बाद देखा कि साली जी अभी भी आराम फरमा रही हैं।
मैंने रसोई में जाकर चाय बनाई और ले जा कर पेश की तो मैडम ने एक प्यार भरी जादू की झप्पी मुझे दे दी।
मैंने कहा- मैं अभी आता हूँ!
मैंने दादा जी को चाय दी और पूछा- आप क्या खायेंगे?
तो बोले- अभी भूख नहीं है! मैं आज ओरछा जा रहा हूँ! मुझे कुछ पैसे दे दो!
ओरछा हमारे झाँसी शहर से 18 किमी दूर एक धार्मिक और मनोरम घूमने लायक जगह है, वहाँ हिन्दुओं के अलावा विदेशी भी आते हैं. मैंने उनके हाथ में 500 रुपए दिए और वो चाय पी कर चले गए।
अब मैंने अन्दर जाकर देखा तो साली जी चाय पी चुकी थी।
कपड़े तो हम दोनों ही पहन कर नहीं सोये थे, मैंने तो उठकर बस तौलिया ही लपेटा था।
तो बस अब क्या था मैं तौलिया भी हटा कर बिस्तर में कूद पड़ा।
वो भी बेसब्री से यही चाह रही थी और हम दोनों एक दूसरे में समाने की कोशिश करने लगे ही थे कि इतने में फिर बाहर से आवाज आई- भाभी! ओ भाभी!
अरे! यह तो गुड्डी की आवाज है।
गुड्डी हमारे मोहल्ले की ही लड़की है जिसकी शादी एक गरीब परिवार में हुई थी अब वो अपने पति के साथ हमारे पड़ोस में ही किराये पर रहने लगी थी, मेरी नज़र उस पर काफी दिनों से थी।
तब मुझे याद आया कि गेट खुला ही रह गया था। अभी हम लोग संभल भी नहीं पाए थे कि वो बे तकल्लुफी से अन्दर तक आ गई और हमें उस हालत में देख कर बोली- अरे वाह! आज तो पांचों ऊँगलियाँ घी में और सर कड़ाही में है!
मैं यह बात सुन कर अवाक् रह गया, यह मुँह पर हाथ रख कर भागने की जगह यह क्या कह रही है!
तभी उसने खुलासा किया- भाई साहब, औरतों पर मर्द निगाह रख सकते हैं तो औरते भी यह कर सकती हैं। लेकिन मैं तो आज यहाँ मौज करने आई थी मुझे यह मालूम नहीं था कि हमारे माल पर पहले से कोई और हाथ साफ़ कर रहा है।
इससे पहले मैं कुछ कह पाता वो लपक कर बिस्तर में आ गई और बोली- भाई साहब! आज ऑफिस में कह दो कि तबियत ख़राब है और मेन गेट लगा आओ! नहीं तो कोई तीसरी आ गई तो जाने क्या होगा आपका?
चलो भाई अब बहुत सर खा लिया आपका! अब मुद्दे की बात पर आ जाते हैं।
हम तीनों में तय हुआ कि कोई भी शाम छः बजे तक कपड़े नहीं पहनेगा।