जीना इसी का नाम है-4
अनीता ने अपने वक्ष पर मेरा चेहरा भींच लिया, मैं अपने नाक और होंठ उसके उभारों पर घुमा रहा था, तभी अनीता ने एक हाथ से अपना स्तन पकड़ा और उसका निप्पल मेरे मुख में डाल दिया।
मैं समझ गया कि वो क्या चाहती है।
मैंने बारी उसके चूचुक खूब चूसे, तभी बिजली चमकी मैंने देखा उसके उरोज ऐसे थे मानो संगमरमर के दो नरम टुकड़े जिस पर हल्के गुलाबी रंग की निप्पल लगी थी।
अब अनीता को मैंने चित लेटा दिया और उसकी जींस का बेल्ट और बटन खोल दिया, फिर उसकी जिप नीचे करते गया फिर जींस नीचे खिसकानी शुरू कर दी।
वो पैर मोड़ कर व हिला कर जींस उतारने में पूरा सहयोग कर रही थी।
मैंने उसकी पेंटी खींच कर निकाल दी तो अनीता उठ कर बैठ गई और मेरी पैंट को खींचने लगी।
मैंने अपनी पैंट निकाल दी तो उसने अंडरवियर के ऊपर से टटोल कर मेरे लंड पकड़ लिया और हाथ फेरने लगी।
मेरा लंड तन कर सख्त हो गया, उसने मेरी अंडरवियर नीचे खींचा, लंड झटके के साथ आजाद हो कर हवा में लहराने लगा।
अनीता उसे पकड़ लिया और सहलाते हुए उसकी लम्बाई मोटाई व सख्ती का जायजा लेने लगी, फिर धीरे से फुसफुसाई- नाईस, पर बाल साफ क्यों नहीं करते हो?
मेरा लंड अनीता के मुलायम हाथों में जाकर धन्य हो गया।
इसके बाद अनीता टांगें फैला कर चित लेट गई, मैं लंड लेकर उस पर चढ़ गया और लंड उसकी चूत में घुसेड़ने की कोशिश करने लगा पर लंड हर बार इधर उधर स्लिप हो रहा था।
अनीता हँस दी, बोली- घोंचू… पहली बार है क्या?
मैं बोला- हाँ…
अब अनीता ने लंड को पकड़ कर उसका सुपारा बाहर किया और उसे अपनी चूत के मुँह पर जमाया, फिर बोली- पुश… पर धीरे धीरे… हाँ…
लंड धीरे धीरे घुसता गया, जैसे ही लंड पूरा घुसा, अनीता के मुख से निकला- आह… सो गुड…
बिजली चमकी, मैंने देखा कि अनीता की आँखें बंद हैं, वो पूरी तरह से चुदाई का मजा ले रही थी।
मैंने धीरे धीरे धक्के मारने शुरू कर दिए, अनीता चुदते हुए बड़बड़ा रही थी- ओह, तुम कितने अच्छे हो… यह सब बहुत अच्छा लग रहा है… कई दिन के बाद मैं इतना सुख महसूस कर रही हूँ रे… हाय सचमुच बड़ा मजा आ रहा है… बड़ा दम है रे तुझमें… बड़े दिन बाद मर्द मिला है, हाय सी… सी… हाय…
उसकी बातों ने मेरी उत्तेजना बढ़ा दी, मैं तेजी से धक्के मारने लगा, अनीता बोली- मारो और मारो… हाय… जोर से… और जोर से…
अब अनीता हर धक्के पर चूत वाला पोरशन उछाल कर नीचे से धक्का लगाती, वो उत्तेजना में लगभग चिल्ला रही थी- ओह… ओह… उ..उ..उ…
मेरा लंड फुल टाईट हो कर पानी छोड़ रहा था, अनीता बोली- जोर से… पूरी ताकत से… आह मर गई… मजा आ गया… ओह… ओफ… ओफ… ओओ…
वो पूरी ताकत से मुझसे लिपट गई… लंड चूत में पूरा अंदर था और अपने मटेरियल की आखिरी किश्त छोड़ रहा था।
अनीता बोली- ऐसे ही मुझ पर पड़े रहो, अभी मत हटना…
कुछ देर वो ऐसे ही लिपटी रही, फिर हट गई।