अस्पताल में प्यार
हाँ तो दोस्तों, मेरा नाम है विजय, उम्र २२ वर्ष। मैं बंगलोर में रहता हूँ। यहाँ रहने वाले हजारों लोगो की तरह मैं भी एक सॉफ्टवेयर इंजिनियर हूँ। तो मेरा अनुभव पेश है जो कि मैं आपके साथ बाटना चाहता हूँ। इसे कृपया मेरी कल्पना ना समझें।
मैं एक ६ फीट का गठीले शरीर का मालिक हूँ, लेकिन थोड़ा शर्मीला हूँ और लड़कियों से ज्यादा करीब नहीं रहा हूँ। उत्तर प्रदेश बोर्ड से मेरी शिक्षा होने के कारण मैं हमेशा लड़कों के स्कूल में ही रहा। कॉलेज में एक लड़की से ऐसा प्यार हुआ कि किसी दूसरी की तरफ नज़र उठा कर नहीं देखा।
लेकिन हाय री किस्मत, उसने मुझमें ज्यादा रुचि नहीं ली। तो अब तक की कहानी का निचोड़ यह है कि मैं २२ साल तक कुंवारा था।
किन्तु एक दिन मेरी किस्मत ने मेरा ऐसा साथ दिया कि वो दिन ज़िन्दगी भर के लिए यादगार बन गया और वही अनुभव मैं आप लोगो के साथ बांटना चाहता हूँ।
यहाँ बंगलोर में एक अस्पताल है, संत जोन्स हॉस्पिटल।
कुछ महीने पहले ही मेरी आँखों में कुछ परेशानी हो रही थी, तो मैं वहां गया, मैंने रजिस्टर कराया और डॉक्टर के कमरे के सामने बैठ कर इंतज़ार करने लगा। ऐसे ही १५ मिनट गुज़र गए। मैं परेशान था क्योंकि कोई भी मरीज़ अन्दर नहीं जा रहा था और न ही किसी का नाम पुकारा जा रहा था।
तो मैंने ऐसे ही डॉक्टर के कमरे के अन्दर झाँक कर देखा। सही बता रहा हूँ दोस्तो ! अन्दर जो लड़की बैठी थी वो जैसे कि कोई अप्सरा थी और वो डॉक्टर के सफेद लैब-कोट में तो मैं बता नहीं सकता कि कितनी सुन्दर लग रही थी !
वैसे मैं बता दूं कि डॉक्टर के लिए मेरा ख़ास आकर्षण रहा है हमेशा से।
हाँ तो मैंने उससे पूछा- इतने लोग इंतज़ार कर रहे हैं?
वो बोली- वो वहां पर इन्टर्न है और डॉक्टर अभी आये नहीं हैं ! इसीलिए !
और एक बहुत प्यारी सी मुस्कान दी। मेरे शरीर का रोम रोम खिल उठा उसे देखकर। मैं भी मुस्कुरा दिया और कहा- ओके !
मैं बाहर आकर बैठ गया किन्तु इस बार मैं ऐसी जगह बैठा जहाँ से कमरे के अन्दर वो मुझे दिख रही थी। उसने मेरी तरफ देखा और एक मध्यम सी मुस्कराहट दी, मैंने भी वही किया। इस से पहले कि इशारे कुछ और आगे बढ़ पाते, इतने में डॉक्टर आ गया और वो उसके साथ मरीजों को देखने में व्यस्त हो गई।
मेरी बारी आई, डॉक्टर ने आँखें देखीं और बोला- सामान्य जांच करा लो ! कोई ख़ास परेशानी नहीं है तुम्हारी आँखों में !
अब शायद आप लोगों को मालूम हो कि सामान्य जांच में एक टेस्ट होता है जिसमें एक डार्क-रूम में ले जाकर एक मशीन के जरिये रेटिना(आंख का हिस्सा) चेक किया जाता है. उस टेस्ट के लिए मुझे इंतज़ार करने के लिए बोला गया। मैं बाहर बैठ कर इंतज़ार करता रहा और बीच बीच में हमारी नज़रें मिलती रहीं।