पराये मर्द के नीचे लेट कर लिया मजा -1
अन्तर्वासना के सभी पाठकों को मेरी तरफ से यानि कि पम्मी की तरफ से प्रणाम !
यह अन्तर्वासना पर मेरी दूसरी कहानी है। लोगों की चुदाई की कहानियाँ पढ़ पढ़ कर चूत गीली हो जाती है।
पहली कहानी में जिस तरह मैंने बताया था कि मेरे पति एक फौजी हैं। और मेरे घर में काम करने वाले एक सीरी (जो की औरत की चुदाई का माहिर निकला) ने किस तरह दोपहर में मेरी प्यास बुझाई !
उस दिन जल्दी जल्दी में हम मजे से नहीं चुदाई कर सके। मैंने उसको रात को १२ बजे अपने कमरे की खिड़की पर आने को कहा।
वो बोला- सुहागरात मनानी है क्या छोटी दुल्हन?
मैंने कहा- तैयार रहना ! जो जी में आये समझ लो ! मुझे तेरा लौड़ा फिर लेना है !
ठीक बारह बजे मेरा इशारा पाकर वो खिड़की पर आया। उसको अन्दर खींच मैंने खिड़की बंद करते हुए पर्दा आगे किया। बाहर बहुत गर्मी थी, ए.सी में आकर उसको सकून सा मिला। उसे पसीना आने की वजह से मैं उसको पकड़ बाथरूम में ले गई, उसके सारे कपड़े उतार दिए, अपने भी, दोनों अलफ नंगे !
उसका लुल्ला लटक रहा था, कितना सांप जैसा !
मैंने शावर चलाया और नीचे उसके साथ लिपट कर खड़ी हो गई। पानी के बूंदें मेरे यौवन को निखार रहीं थीं। बूँद बूँद मेरे चिकने जिस्म से फिसल रही थी, वो मेरा अंग अंग सहला, चाट रहा था, मेरे मुहं से सिसकियाँ निकल रहीं थी।
मेरे आलीशान बाथरूम में, जो मैंने बहुत तबीयत से बनवाया था, वहीं फर्श पर मैं नीचे बैठ गई। पहले उसके लौड़े को सहलाया, फिर मुँह में डाल लिया। वह कितना मजा आ रहा था ! देखते ही देखते तन कर डण्डा बन गया। उसका पूरा लौड़ा मैंने मुँह में ले ले कर चूसा। उसने मुझे वहीं चित्त कर दिया, पकड़ कर नीचे लिटा मेरे ऊपर सवार हो गया।
अह ! अह !
धीरे से उसने अन्दर डाल दिया और चोदने लगा।
वाह मेरे घोड़े और चोद साले ! पक्का चोदू है ! मैं क्यूँ तड़प रही थी इतने दिन से ! अह ! अह ! और घस्से मार ! जोर जोर से ठोक ! वाह मेरे लौड़े !
पानी के नीचे चुदाई का अलग मजा मिलता है।
बोला- चल साली कुतिया बन जा !
मैं कुतिया की तरह चलती हुई टब किनारे जा रुकी, वो पीछे से आया और डाल दिया !
मेरे हाथ टब में और घुटने बाहर !
उसका मोटा लौड़ा धमाल मचाने लगा।
वाह मेरी बुलबुल ! कमाल की चीज़ है तू ! तेरी जैसे को तेरा पति कैसे ठंडी करता होगा ! क्या हुस्न मिला है ! तुझे साली जिंदगी भर चोदता रहूँगा ! अह ! आहा !
और जोर से रगड़ हरामी ! अपनी मालकिन की भोंसड़ी मार मार कर फाड़ डाल ! आज रात पड़ी है ! डर भी नहीं साले ! और तेज़ ! अह ! अह !
साली कुतिया ! नौकर से चुदा कर कैसा लग रहा है ?
हीरा है तू ! पता नहीं नज़र से कैसे बचा रहा !
ले साली ! उसने ऊँगली गांड में डाल दी और फिर दो ऊँगली करते करते उसने लगभग हाथ ही डाल देता, अगर मैं चीखती ना !
मैं गई साईं ! झड़ने वाली हूँ ! जोर से रगड़ ! हः ! अह ! हा !
कहते कहते मैं झड़ने लगी।