रक्षिता की भाभी और उनकी सहेलियाँ
आप सभी दोस्तों को प्यार जिन्होंने मुझे मेल किया.. मेरे लंड को चाहने वाली सभी लड़कियों, भाभियों और आंटियो की गरम मस्त चूत को मेरे 7.5 इंच के लंड का प्रणाम … आशा करता हूँ कि सभी चूत और लौड़ों को मेरी यह कहानी भी पहले वाली कहानियों की तरह ही पसंद आएगी।
आपने कुछ दिनों पहले मेरी और रक्षिता कीजयपुर में पतंगबाजी
औररक्षिता और उसकी भाभी
पढ़ी होगी,
आज मैं उसके आगे की कहानी वहाँ से शुरू करता हूँ जब रक्षिता की भाभी विशाखा ने कहा था कि रोहित तू कल आना में अपनी सहेलियों को बुला कर लाऊगी ….
अगले दिन यानि 16 जनवरी, 2010 को मैं भाभी के घर गया। वहाँ पहले से उनकी दो सहेलियाँ बैठी थी जो मेरा ही इंतजार कर रही थी …..
भाभी ने उनका परिचय कराया- एक का नाम श्रुति था, वो भाभी की तरह ही मस्त फिगर वाली थी..
दूसरी मुस्कान ! उसका रंग सांवला था पर बदन अच्छा था ..
भाभी बोली- आज तुझे हम तीनों को चोदना है…
मैं बोला- फिर तो आज बहुत मजा आएगा !
श्रुति बोली- यार विशाखा ! रोहित तो बहुत मस्त है ! लगता है कि बहुत मजा आने वाला है …
मैं बोला- क्यों नहीं जानेमन ! बहुत मजा आएगा..
फिर श्रुति उठी, टीवी चालू किया और डी वी डी प्लयेर में ब्लू फिल्म लगा कर बोली- अब चुदाई में दुगना मजा आएगा…
फिर मैंने बारी बारी से तीनों को चूमा और साथ में स्तन भी दबाता चला गया…
फिर मैंने कहा- पहले किसे चोदूँ?
श्रुति बोली- पहले मुझे चोदो लेकिन हम सबको एक साथ नंगा करो…
फिर मैं कहाँ रुकने वाला था… मैं भी था कमीना, इन सारी रांडों को चोदने का इससे अच्छा मौका कब मिलेगा … मैंने समय ना गंवाते हुए सबसे पहले सबसे सेक्सी श्रुति को चूमते हुए उसका ब्लाउज उतार फेंका और उसके चूची को मुँह में चूसने लगा…
तभी भाभी उठी और बाहर चली गई..
मुस्कान उठी और मेरी तरफ आई, पहले तो उसने मुझे चूमा, फिर मेरी जींस की जिप खोली और मेरे लंड को बाहर निकाल कर बोली- श्रुति, देख क्या मस्त लंड है इसका !
जैसे ही श्रुति ने देखा, मुझसे छुटी और मेरे लंड को चूसने लगी, बोली- रोहित, तेरा तो वाकई में मोटा, मस्त लंड है ! आज तो मस्त चुदाई होने वाली है…
तभी भाभी आ गई, बोली- अभी तुम्हें इतना मजा आ रहा है, सोचो, बाद में कितना मजा आएगा !
फिर मैंने श्रुति की साड़ी उतारी और उसका पेटीकोट उतार कर फेंक दिया … अब वो सिर्फ पैन्टी में थी। मैं पैन्टी में से ही उसकी चूत को रगड़ने लगा…
उसके मुँह से आह आऽऽह की आवाजें आने लगी…
फिर मैंने ऐसे ही मुस्कान और भाभी के सारे कपड़े उतार दिए। अब वो तीनों रंडियाँ सिर्फ पैंटी में ही थी …तीनों मुझसे चुदवाने के लिए ऐसे तड़प रही थी जैसे बरसों की प्यासी हों…
तभी श्रुति उठी और डी.वी.डी बदल दी। उसमें एक लड़का चार औरतो को चोदता है …
मैं समझ गया कि ये तीनों भी इसी की तरह चुदवाएँगी।