मेरा चोदू यार-1
दोस्तो, आज मैं आपको अपने एक दोस्त की बात बताने जा रहा हूँ।
यह बिल्कुल सच्ची घटना है, और जैसे जैसे उसने मुझे बताया, मैं ठीक वैसे ही आपको बता रहा हूँ। कहानी के सभी पात्र सच्चे हैं, सभी घटनाएँ सच्ची हैं।
मेरे इस मित्र का नाम है निर्मल।
नाम निर्मल है मगर है बहुत सख्त जान।
पहले आपको इस निर्मल की ही बात बताता हूँ। हमारे दफ्तर में आने से पहले ये महाशय अपने घर में डेयरी फार्म का काम करते थे। घर में बहुत सी गाय भैंसे थी, सुबह सुबह लोगों के घरों में दूध डालने भी जाता था।
बात तब की है जब ये साहब पढ़ते थे, नई नई जवानी चढ़ी थी, एक दिन सुबह सुबह किसी के घर दूध डालने गए, यही कोई 5 सवा 5 बजे का समय था और भी बहुत से घरों में दूध डाल कर आ चुका था, और बहुत से घरों में अभी जाना था।
मगर इस घर में जाकर जब उसने घंटी बजाई तो अंदर से एक आंटी आई हाथ में बर्तन लेकर, करीब 45-50 की उम्र, गोरा साफ रंग मगर बेडोल थुलथुला जिस्म, एक पतली सी नाईटी पहनी हुई।
अब निर्मल ज़मीन पर बैठा, उसको देख रहा था।
जब वो आंटी आई और दूध डलवाने के लिए झुकी तो उसके अंदर कर सारा सामान उसकी नाईटी के खुले गले से निर्मल के सामने आ गया।
अब निर्मल तो उसी को देख कर हिल गया, इतने बड़े बड़े बोबे… इसकी तो टिकटिकी बंध गई।
इसकी नज़रों को ताड़ कर आंटी भी नीचे बैठ गई, जब वो बैठी तो घुटने साथ लगने से आंटी के बोबे और भी ज़्यादा उभर कर निर्मल के सामने आ गए।
निर्मल खड़ा हो गया और पाजामे में खड़ा उसका जवान लंड भी आंटी के सामने प्रकट हो गया।
अब यह आंटी के बोबे घूर रहा था और आंटी इसका खड़ा लंड… दोनों के दिलों में न जाने क्या तूफान चल रहा था।
इसने बड़े आराम से टाइम लगा कर दूध डाला।
आंटी तो तजुर्बेकार थी, वो भाँप गई, के लोंडा उसके अधेड़ यौवन पर रीझ गया है। अब ये ऐसा मौका था, जब कुछ भी हो सकता था, घर में सब सो रहे थे, किसी को कानो कान खबर नहीं होनी थी, अगर आंटी आज इस कच्चे केले को खा जाए, और न ही किसी को पता चलना था, अगर निर्मल इस आंटी को चबा डाले।
बिना कहे दोनों मे अंदर अंदर ही बात कर ली।
आंटी बोली- मुझे लगता है आज तूने दूध पूरा नहीं डाला है, मुझे इसको नापना पड़ेगा।
‘नहीं आंटी जी, दूध पूरा, जैसे मर्ज़ी नाप लो!’ निर्मल बोला। आंटी बोली, ‘चल ऐसा कर मेरे साथ किचन में आ, वहाँ पे पौना रखा है नापने का।’
आंटी दूध लेकर किचन में चली गई और निर्मल पीछे पीछे।
ड्राइंग रूम की बत्ती जल रही थी, बाकी सारे घर की बत्तियाँ बंद थी। आंटी किचन में गई, निर्मल भी पीछे पीछे किचन में गया, मगर आंटी ने किचन की बत्ती नहीं जलाई।
जब निर्मल किचन में आंटी के पीछे खड़ा था तो आंटी ने दूध वाला बर्तन रखा और पाजामे के ऊपर से ही निर्मल का लंड पकड़ कर बोली- इसे क्या हुआ है?
निर्मल चुप।
आंटी ने किचन के बाहर देखा और अपनी नाईटी उठाई और किचन में ही घोड़ी बन गई।