मेरी चालू बीवी-60
सम्पादक : इमरान
मेरा लण्ड भी पूरा तनतना रहा था मगर मैं अभी से सलोनी को चोद कर पूरा रात का मजा ख़राब नहीं करना चाहता था।
तभी वो वेटर फिर से कमरे में आ गयाम उसके हाथ में एक गिलास भी था…
वेटर श्याम- क्या साहब। चोद दिया क्या?? ऐसे कैसे मजा आया होगा आपको? लो, मैं यह नीम्बू पानी लाया हूँ… पहले इसको पिलाकर होश में लाओ, फिर आराम से इसकी चूत और गाण्ड दोनों मारना…
मैंने बिना कुछ बोले उससे गिलास ले लिया… सलोनी को उठाकर अपने कंधे पर अधलेटा किया और उसको वो नीम्बू पानी पिलाने की कोशिश करने लगा।
तभी वो वेटर साला मेरे सामने ही बैठ सलोनी की जांघें सहलाता हुआ बोला- साहब कुछ भी कहो… पर माल बहुत मस्त है… लगता है अभी नई ही धंधे में आई है… मैंने भी आज तक नहीं देखा…
मैं बेबस सा उसको देख रहा था, अब कुछ कह भी नहीं सकता था, अगर जरा भी उसको बोलता कि मेरी बीवी है तो साला सभी को बोल देता और सभी मेरी बहुत मजाक उड़ाते…
उसकी हिम्मत बढ़ती जा रही थी, उसने मेरे सामने ही सलोनी की चूत को अपने दोनों अंगूठों से खोलते हुए कहा- देखा साहब कितनी टाइट और पूरी लाल चूत है… और खुशबू भी ऐसी जैसी कुंवारी लड़की की चूत से आती है… सच साहब बहुत जानदार चूत है… मैं तो यहाँ रोज कई देखता हूँ पर ऐसी नहीं देखी…
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लग रहा था कि इस साले ने कसम खाई है वरना इसकी तो मार ही लेता…
बोलते बोलते कमीने ने अपना मुँह सलोनी की चूत पर लगा दिया…
मैं सलोनी के ऊपर वाले मुँह को किसी तरह खोलकर उसको नीम्बू पानी पिलाने में ही व्यस्त था…
और वो कमीना मेरी सलोनी के नीचे वाले होंठ पूरी तरह खोलकर मेरे ही सामने चूसने लगा।
सलोनी को भी अब हल्का हल्का होश आने लगा था… मुझे डर सा लगने लगा कि यह सब देखकर ना जाने वो क्या सोचने लगे कि क्या ये सब मैं ही करा रहा हूँ?
मैंने कसकर एक लात उस वेटर को मारी… वो दूर हट गया…
मैं- तू अपने कमीनेपन से बाज नहीं आएगा साले…
श्याम बड़े गंदे ढंग से अपने होंटों को चाटने लगा और बोला- क्या साहब…?? कितना मजा आ रहा था… सच बहुत मजेदार है तिकोनी इसकी… पहले भी आपने नहीं चूसने दी…
जैसे ही चूसने लगा तभी आ धमके… और अब भी नहीं…
मैं- साले ये कोई धंधे वाली नहीं है… घरेलू है… मेरे साथ केवल घूमने आई है…
श्याम- ओह तो यह बात है… किसी और की घरवाली के साथ मजे… कोई बात नहीं साहब… करो मजे…
सलोनी अब हल्के हल्के कुनमुनाने लगी तो मैंने उसको जाने का इशारा किया और वो शराफत से चला भी गया…
सलोनी- ओह क्या हुआ…?? मेरा सर…ओह यह सब?
मैं- कुछ नहीं जान… तुमको जरा ज्यादा हो गई थी, चलो बाहर चलकर बैठते हैं।
सलोनी ने खुद को व्यवस्थित किया, उसने मुझसे कोई बात नहीं की।