मेरी चालू बीवी-67
सम्पादक – इमरान
एक तो बहुत मस्त रात थी और किस्मत भी इतनी शानदार थी कि रात ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी।
मेरे लण्ड ने तो आज पूरे मजे लेने थे, वो बड़े ही रिदम के साथ ऋज़ू की चूत में आ जा रहा था, उसके हर कोने में घूम रहा था।
ऋज़ू भी किसी नृत्यांगना की तरह अपने चूतड़ों को घुमा घुमा कर चुदवा रही थी।
मेरा मजा तो कई गुना बढ़ गया था क्योंकि मेरे सामने मेरी जान सलोनी पूरी मस्त थी और पूरी नंगी होकर एक अजनबी से मजे कर रही थी।
इस मजे के लिए तो मैं अपनी पूरी सम्पत्ति दांव पर लगा सकता था पर किस्मत से यह मजा मुझे आज मुफ़्त में ही बिना किसी मेहनत के ही मिल गया था।
मैं यह सोच सोच कर ऋज़ू की चूत में जोरदार धक्के मार रहा था कि आज के बाद तो हम दोनों और भी मजे करेंगे क्योंकि जिस बात के लिए मैं सारी योजना बना रहा था कि हम दोनों आपस में खुलकर अनजान लोगों से सेक्स करें !
वो हम दोनों ही रोज कर तो रहे थे… पर आपस में नहीं खुल पा रहे थे… वो सब आज अचानक ही हो गया था… अब देखते हैं यह रात हमारे जीवन में कैसा नया मोड़ लेकर आती है…
मैं लगातार देख केवल सलोनी को ही रहा था कि वो कैसे मजे ले रही है और मजे की बात यह थी कि वो भी मुझे ही देख रही थी.. शायद उसके मन में भी वही सब था जो मेरे मन में था.. उसको भी मेरी चुदाई देखने में मजा आ रहा था…
मैंने ऋज़ू के चूतड़ों को अपने दोनों हाथों से थाम रखा था और उसको चोदे जा रहा था।
वो मोटा किसी धौकनी की तरह हाँफ़े जा रहा था, फिर वो सलोनी की ओर मुँह करके बैठ गया।
मुझे उसकी पीठ ही नजर आ रही थी पर सलोनी जैसे सब समझ गई थी कि मैं अब सब कुछ देखना चाह रहा हूँ…
उसने कमोड से खड़ी होकर बहुत ही मुश्किल से उस मोटे को खड़ा किया।
मैंने देखा उठते समय मोटे के हाथ सलोनी के चूतड़ों पर थे।
सलोनी ने मोटे को कमोड पर बैठा दिया…
मैंने मोटे के लण्ड को देखने की कोशिश की मगर मुझे कहीं दिखाई नहीं दिया…
सलोनी भी उसके टांगों के बीच हाथ चला रही थी…
तभी वो मोटा खड़ा हो गया…
अरे यह क्या है..???? बिल्कुल छोटा सा मुरझाया हुआ… बच्चों की नुन्नी भी उससे बड़ी होती है…
इतने बड़े पेट और मोटी मोटी जाँघों के बीच उसका लण्ड तो नहीं हाँ लुल्ली दिख ही नहीं रही थी…
सलोनी उसको भी अपनी सेक्सी उँगलियों से हिला कर देख रही थी मगर उसमें बिल्कुल भी जान नहीं थी।
कैसा मर्द था साला ! इतनी सेक्सी लड़की उसके लण्ड को सहला रही है और वो मुदों की तरह बैठा है !
तभी ऋज़ू ने भी उस ओर देखा और ‘हा हा हा हा हा हा हा’ जोर से हंसने लगी
मैं- क्या हुआ? क्यों हंस रही है??
ऋज़ू- अरे कहाँ राख में चिंगारी ढून्ढ रही है ! यह तो ऐसा ही है साला.. एक बार पानी निकलने के बाद अब कल ही जागेगा.. वो तो मेरे पति का बॉस है… तभी झेल रही हूँ वरना.. !!
मोटा आदमी- कमीनी चुपचाप क्यों नहीं चुदवा लेती..