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बस स्टॉप पर एक भाभी से दोस्ती और प्यार- 3

Story Hindi 5 pages 15 years ago

बस स्टॉप पर एक भाभी से दोस्ती और प्यार- 3
दोस्तो, मैं आपको बस स्टॉप पर मिली एक हसीना स्वीटी की सेक्स कहानी सुना रहा हूँ. इस भाग में पढ़ें कि मैंने पहली बार उसे कैसे चूमा.
पिछले भागबस स्टॉप पर मिली भाभी ने घर बुलाया
में अब तक आपने पढ़ा था कि स्वीटी ने मुझे रात को अपने घर डिनर के लिए बुलाया था.
अब आगे :
जैसा उसने कहा था, मैंने बेल नहीं बजायी और सीधा अन्दर चला गया.
हॉल में एक धीमी रोशनी आ रही थी, वो किचन की लाइट जलने से आ रही थी.
पूरा घर एकदम चमकता हुआ, हल्की हल्की खुशबू थो, मानो पूरे घर में प्यार की महक फैली हुई थी.
मैं बिना कुछ बोले अन्दर चला गया.
उसने काले रंग का थ्री-पीस वाला नाइट वियर पहना हुआ था.
पीछे से उसका फिगर कमाल का लग रहा था.
मैं बस चुप खड़ा उसको देख रहा था, या ये कहो आंखों से उसे चोद रहा था.
मेरा लंड कब सलामी देने को तैयार हो गया, पता ही नहीं चला.

तभी अचानक से मेरा फ़ोन बजा, जिससे वो डर गयी.
मैंने भी हड़बड़ाहट में फ़ोन साइलेंट किया.
उसने कहा- कब आए, तुमने तो मुझे डरा ही दिया.
मैंने सिर्फ मुस्कान बिखेर दी.
वो बोली- सुनो, अगर परेशानी ना हो तो तुम यहीं खाना खा लो. कहां घर ले जाओगे, ठंडा हो जाएगा. तुम्हें तो वैसे भी गर्म खाना और गर्म रोटी पसंद है ना!
मैंने कहा- तुम्हें सब पता है कि मुझे क्या पसंद है … क्या नहीं?
उसने कहा- हां अब बैठो, मैं खाना लगाती हूँ.
मैं हॉल में जाकर बैठ गया.
वो एक थाली सजा कर लायी, जिसमें छोले भटूरे प्याज और गुलाब जामुन थे.
वो बोली- तुम शुरू करो, मैं गर्म गर्म भटूरा बनाती हूँ.
पर मेरा ध्यान भटूरे या खाने पर गया ही नहीं, मैं तो बस उसे ही देखता रह गया.
साक्षात सेक्स की देवी लग रही थी.
उसने नीचे शायद ब्रा नहीं पहनी थी तो उसके चुच्चे और निप्पल जैसे ‘मुझे छू लो …’ ऐसा कह कर आमंत्रित कर रहे थे.
वो कब ये सब बोल कर मुड़ गयी, मैं समझ ही नहीं पाया.
वो थोड़ी देर में एक प्लेट में दो भटूरे और लस्सी लेकर आयी.
मैंने उससे कहा- तुम भी बैठो ना साथ में!
उसने कहा- मैंने शाम को ही खा लिया था.
मैंने कहा- कोई नहीं, एक बाईट पर साथ बैठो न!
उसने कहा- ठीक है, एक मिनट बस अभी आई.
वो जल्दी से एक और भटूरा बना कर चिल्लायी- दो और बना लूँ ना!
मैंने कहा- नहीं नहीं, मेरा हो गया.
वो अन्दर से आयी- क्या हो गया … अच्छा नहीं बना क्या?
ये कहती हुई वो मेरे सामने ही बैठ गयी.
पता नहीं क्यों आज मेरी नज़र उसके चूचों से हट ही नहीं रही थी.
वो जब भी कुछ रखने या उठाने को झुकती, उसकी खुली छाती … बाप रे एकदम सफ़ेद दूध मलाई जैसे चुच्चे मेरे सामने नंगे दिख जाते.
मेरा तो दिमाग ही ख़राब हो गया था.
आज इसे चोदना ही है … मैंने मन बना लिया था.
उसने बहुत प्यार से खाना खिलाया और बाद में कहा- बैठो, मैं चाय बनाती हूँ.
चाय रख कर, सब सामान संभाल कर रख आई और मेरे पास आकर बैठ गयी.
मैं उसे बस देखे जा रहा था.

उसके जिस्म के उतार चढ़ाव … उसका चेहरा उसकी बातें, मीठी आवाज़, मुझ पर कुछ अजीब सा जादू कर रही थी.
बातें करते वो कब मेरे करीब आ गयी और मेरी जांघ पर अपना हाथ रख बात करने लगी, मुझे पता ही नहीं चला.
पर जब उसने हाथ रखा तो ऐसा करंट सा लगा कि मेरा लंड जैसे जींस फाड़ कर बाहर आ जाएगा.
मैं थोड़ा दूर होकर बैठने की कोशिश करने लगा तो उसने मजाक बनाया कि क्या हुआ … डर गए क्या. सुबह तो बड़ा बोल रहे थे, चूम लूंगा और ना जाने क्या क्या.
पता नहीं मुझे क्या हुआ, मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
मेरे अचानक ऐसे हमले के लिए शायद वो तैयार नहीं थी.
जब तक वो समझ पाती, मैंने उससे बांहों में भर लिया था. उसकी चूचियां मेरे सीने से ऐसे सट गई थी कि जैसे उसके दोनों चुच्चे मुझमें समा जाएंगे.
मेरे हाथ उसकी कमर और पीठ पर इतने बलपूर्वक चिपके थे कि वो चाहती, तो भी मुझसे अपने आपको छुड़ा नहीं पाती.
उसने कुछ बोलने, मुझसे दूर होने की कोशिश भी की शायद … पर तब तक देर हो चुकी थी.
मेरी जीभ उसके मुँह में एक बार घूम कर मजा ले चुकी थी.
मैं जैसे किस करने में डिग्री कर चुका हूँ, उतने अनुभवी खिलाड़ी की तरह उसके होंठों को चूस रहा था.
मेरे हाथ उसकी उत्तेजना को बढ़ाने की कोशिश में लगे थे.
उसने मुझे दूर करने के लिए बार बार अपना मुँह अलग करने की नाकाम कोशिश की.
पर मैं तो मैं हूँ ना … कुछ नहीं चलने दी.
कितने दिनों से प्यासा था उसके रस को पीने के लिए. आज तो जैसे मैं उसमें खो जाना चाहता था.
उसकी ना अब हां में बदलने लगी थी. उसकी सांसें तेज़ होने लगी थीं. निप्पल कड़क होने लगे थे. मैं उन्हें अपनी छाती में महसूस कर पा रहा था.
मेरा हाथ उसके चूतड़ों को सहला रहे थे. मैं कभी उसकी गर्दन, कभी कानों, कभी होंठों को चूसने में लगा था.
मेरे एक हाथ ने घूमते घूमते कब उन पहाड़ों पर अपना कब्ज़ा कर लिया, पता ही नहीं चला.
मैंने उसके निप्पल पर अपनी उंगलियां घुमाना शुरू कर दीं.
मेरा एक हाथ उसकी कमर पर चल रहा था और जीभ ने गर्दन और उसके होंठों का बुरा हाल कर रखा था.
उस पल जैसे मैं स्वर्ग में था.
एक दूसरे की जीभ मानो जैसे मदिरा पान करा रही हो.
वो भी मेरे जोश का जवाब पूरा साथ देकर मुझे और दीवाना कर रही थी.
फिर अचानक से उसने खुद को मुझसे दूर कर दिया.
अब कमरे में एकदम ख़ामोशी छा गई थी. वो आंख बंद किए बैठी रही.
मैंने कहा- क्या हुआ?
उसने कोई जवाब नहीं दिया.
उसने बंद आंखों से ही अपने कपड़े ठीक किए और मुझसे कहा- विक्की तुम जाओ यहां से, अभी के अभी … प्लीज जाओ.
मैं कुछ कहता, उससे पहले वो गेट खोल कर खड़ी हो गयी.
उसकी आंखों में आंसू थे.
एक पल में मैं सपनों के आसमान से नीचे आ गिरा था.
क्या कहूँ, क्या नहीं, कुछ समझ नहीं आ रहा था.
मैंने अभी ‘सॉरी पर …’ इतना ही कहा था कि उसने थोड़ा ऊंचा स्वर करके कहा- विक्की, प्लीज यहां से अभी के अभी चले जाओ.

उसका इतना बेरुखा व्यव्हार मुझे कुछ अच्छा नहीं लगा. मैं चुपचाप वापस घर आ गया.
उसको मैसेज में कितनी ही बार सॉरी लिखा कि क्या हुआ, प्लीज बात तो करो न.
मैंने न जाने कितनी बार लिखा.
पर उसने एक बात का भी जवाब नहीं दिया. जबकि उसने सब मैसेज देखे, व्हाट्सैप की नीली लाइनें मुझे उसकी खामोशी बता रही थीं.
वो पूरी रात जगी भी रही, पर जवाब कुछ नहीं दिया.
मैं डर गया कि शायद मैंने जल्दी की … या उसकी परमीशन या उसका मन भी तो जानना था, पर उस पल ना जाने मेरे दिमाग में क्या फितूर चढ़ गया था.
अब जो होना था, हो गया.
मैंने शायद सब बिगाड़ लिया था. अब उसे कैसे फेस करूंगा, क्या कहूंगा. वो कभी बात करेगी या नहीं, इसमें ही पूरी रात निकल गयी.
आज मेरी बेटी साथ नहीं थी, वो मां के साथ मुंबई गयी थी. तो बस स्टॉप पर भी नहीं जा सकता था.
क्या करूं … कैसे करूं … कुछ समझ नहीं आ रहा था.
मैं दूध लेने के बहाने उसके सामने से गुजरा पर उसने तो देखा तक नहीं.
जो लड़की मेरी गाड़ी की आवाज से चहक जाती थी, उसने देखा भी नहीं.
मैं उदास हो गया.
दूध लिया और उसे देखते हुए उसके एकदम पास से गुजरा, बच्चों को नमस्ते किया और बाय भी.
मेरी आंखें कब नम हो गईं, पता ही नहीं चला, जिसे उसने भी भांप लिया था … और दूसरी ओर मुँह करके खड़ी हो गयी.
मैं घर आया ओर एक बड़ा सा मैसेज लिखा- गलती हुई, पर क्या करता तुमसे प्यार हो गया है. दूर नहीं रह पाया, जब भी पास होता हूँ … तो मन करता है कि ये कर लूं … वो कर लूं!
मैंने पता नहीं क्या क्या लिख डाला, मुझे खुद समझ नहीं आ रहा था कि मुझे क्या हो गया है.
एक चुत ही तो थी, हजारों मिलती हैं विक्की तुझे … क्यों सेंटी हो रहा है. चुदी तो ठीक, नहीं तो कोई और सही सोचने वाला मैं, आज नम आंखों से उसको सॉरी लिख रहा था.
खैर … मैंने मैसेज भेजा और उसने देखा भी. जैसे वो मेरा ही वाटसऍप खोल कर बैठी थी.
फिर मैं नहा लिया और ऑफिस जाने के कपड़े निकाल कर बैठ गया.
तभी घर की बेल बजी.
मुझे पता था कि कामवाली आई होगी.
पर आज मन उदास था तो जल्दी ऑफिस जाकर बिजी हो जाना चाहता था.
दरवाजा खोलते ही मैंने बिना देखे कहा- अंजू, काम के लिए कल आना, आज मुझे जल्दी जाना है.
मैं अपने फ़ोन मैं उसकी प्रोफाइल पिक्चर देखते हुए बोल रहा था कि सामने से आवाज आयी- पिक्चर देखने के लिए टाइम है और जो खुद सामने खड़ी है, उसका कोई परवाह नहीं.
उसकी आवाज सुन कर जैसे पता नहीं क्या हुआ, मेरी आंखों में आंसू आ गए. मैं कुछ बोल ही नहीं पाया.
उसने मुझे कस कर सीने से लगा लिया.
‘दरवाजा तो बंद करो, कोई देख लेगा.’
मैंने उसको बांहों में लिए हुए ही दरवाजा बंद कर दिया ओर दोनों ने कस कर एक दूसरे की धड़कनों को एक दूसरे से जैसे बातें करा रहे हों, ऐसे बस चिपक से गए.
उसने काले रंग की टी-शर्ट और ब्लू जींस पहनी थी.
मैंने सॉरी कहा, तो उसने मेरे होंठों पर अपनी एक उंगली रख कर मुझे चुप करा दिया.

उसने कहा- मेरी धड़कनें सुनो, इतनी हिम्मत जुटानी पड़ी यहां आने के लिए. मेरे पैर कांप रहे हैं विक्की, प्लीज कुछ बोलो नहीं, बस मुझे ये पल, ये लम्हा जी लेने दो.
बस उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए.
मैं उस पल को शायद शब्दों में बता ही नहीं सकूंगा.
पर उस पल में जैसे मुझे जन्नत मिल गयी थी.
उसकी आंखें अभी भी बंद थीं, धड़कने मुझे महसूस हो रही थीं.
उसके होंठ कभी मेरे नीचे के होंठ को, कभी ऊपर के होंठ को हल्के दबाव के साथ चूस रहे थे.
हम दोनों जैसे एक दूसरे में खो जाना चाहते थे.
मैं भी उसके होंठ को अपने होंठों से रगड़ रहा था.
धीरे धीरे जितनी बार एक दूसरे के होंठों को एक दूसरे से रगड़ते, उतना नशा, उतनी कामुकता बढ़ती जा रही थी.
उसने अपने पैर को मेरे पैरों पर रख लिया था.
हम दोनों लगातार एक दूसरे के होंठों को चूसे जा रहे थे.
मेरे हाथ उसकी पीठ पर कमर पर मानो जैसे कोई चित्रकारी बनाने की कोशिशें कर रहे थे.
मैं उसको अपने पैरों पर ही लिए चूमता हुआ अपने बेडरूम में ले आया.
उसको तो शायद ये पता भी न चला हो. उसने अपने दोनों हाथों से मेरा चेहरा पकड़ा हुआ था.
हम अभी भी एक दूसरे को बस चूम रहे थे.
मेरा लंड एकदम कड़क होकर उसकी चुत के साथ होली खेलने के लिए तैयार हो चुका था. लोअर में तम्बू बना लंड उसकी चूत पर दबाव बना रहा था.
शायद उसको भी मेरे लंड का उभार समझ आ चुका था. वो भी अपनी गांड को धीरे धीरे उठा कर मेरे लंड के दबाव पर अपनी चुत पर रगड़ने लगी थी.
उसकी तेज सांसें जोर जोर से कभी मेरी गर्दन, कभी चेहरे, कभी होंठों पर अपना हक जता रही थीं.
उसने मुझे होंठों से चूमते हुए अपने गीले होंठों को गर्दन तक लाकर मेरी गर्दन पर अपने दांतों से हल्के से काटा.
मेरी उत्तेजना को और भड़काने के लिए ये काफी था.
हम अभी भी खड़े थे और एक दूसरे के होंठों को चूमते, गर्दन को चूमते प्यार कर रहे थे.
मेरा एक हाथ उसकी गर्दन को पकड़े हुए था और एक हाथ टी-शर्ट के ऊपर से ही उसके चूचों को सहला रहा था.
हम बिना कपड़े उतारे ही मानो एक दूसरे को चोद रहे थे. मेरा लंड उसकी जींस फाड़ कर उसकी चूत में घुस जाने के लिए बैचैन हो रहा था.
मैंने उसे बांहों में लेकर बेड पर लिटा लिया और खुद उसके ऊपर आकर उसकी गर्दन को बेतहाशा चूमने लगा.
जब भी चूमते चूमते मैं उसके कानों तक जाता, तो वो तड़प उठती थी.
मैंने शायद उसकी कमजोर नस पकड़ ली थी. अब मैं अपने होंठों को उसके होंठों पर चलाते, कभी जीभ से उसकी गर्दन, कभी कान, कभी उसकी जीभ से अपनी जीभ चुसवा कर उसको गर्म करने में लगा था.
जींस पहने होने के बाद भी उसकी चूत में से निकल रही गर्माहट को मैं अपनी जांघों में महसूस कर रहा था.
अब हम दोनों लेटे थे तो मेरे दोनों हाथ और पैर उसके प्रेम रस को पीने के लिए आजाद थे.

मैं लगातार उसको किस कर रहा था और एक हाथ से कभी उसका पेट, कभी उसकी नाभि, कभी उसके चूचों को सहला रहा था.
जब भी मैं उसके कान को चूसता, वो तड़प कर अपना चेहरा ऐसे ऊंचा कर लेती मानो वो आनन्द के सागर में डुबकी लगा रही हो.
मैं हर उस पल में, जब वो मेरी कामपाश में बहना चाहती थी, अपना एक कदम आगे बढ़ा देता.
ऐसे ही इस बार मैंने अपना हाथ उसकी टी-शर्ट के अन्दर डाला और उसकी कसी हुई ब्रा के अन्दर उसके मलाई जैसे मासूम चूचों को अपनी हथेली में भर लिया.
मैं जब जब उनको दबाता, वो तड़प कर आह्ह भर कर रह जाती.
मैंने उसको पूरी तरह से अपनी में समा लेने के लिए तैयार कर लिया था.
वो आंखें बंद किए मुझे पूरी तरह से अपने आपको समर्पित कर चुकी थी.
मैं भी एक पक्के खिलाड़ी की तरह उसके हर अंग से खेल रहा था.
मुझे कोई जल्दी नहीं थी … न ही उसे.
दोस्तो, स्वीटी के साथ चुदाई की कहानी का पूरा रस मैं अगले भाग में लिखूंगा.
तब तक मुझे मेल लिखें और बताएं कि आपको ये सेक्स कहानी कैसी लग रही है.
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कहानी का अगला भाग: बस स्टॉप पर एक भाभी से दोस्ती और प्यार- 4

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