मसाज़ सेन्टर में गाण्ड मरवाई
प्रेषक : पार्थ
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम पार्थ है, मेरा कद 5’6″ है, देखने में मेरा रंग साफ़ है और मैं न ज्यादा पतला और न मोटा हूँ।
मैं एक समलैंगिक लड़का हूँ। वैसे तो मेरा एक बॉयफ़्रेन्ड भी है, पर यह कहानी मेरे बॉयफ़्रेन्ड मिलने से पहली की है।
करीब दो साल पुरानी बात की है, मैं एक बार बारहवीं कक्षा की परीक्षा के बाद एक मालिश सेण्टर में गया ताकि मेरा शरीर थोड़ा रेलक्स फील करे। जैसे ही मैं सेण्टर पर पहुँचा तो मुझे इन्तजार करने को कहा गया। रात के नौ बज चुके थे, सेण्टर बंद होने का वक्त हो रहा था, आधे घंटे बाद मेरा नंबर आया तो एक बड़ा सुन्दर और स्मार्ट सा लड़का मुझे एक कमरे में ले गया। कमरे में एक लड़का तौलिये में था। वह काफी गोरा था और एकदम जिम वालों जैसी बॉडी थी, लम्बे बाल, सुन्दर चेहरा।
मैं अन्दर गया तो उसने मुझे एक तौलिया दिया और सारे कपड़े उतार कर तौलिया लपेट कर आने को कहा। उसकी आवाज़ में अच्छी सी मिठास थी।
जब मैं बाथरूम से आया तो सेंटर से सब लोग जा चुके थे, बस वह और मैं ही बचे थे। उसने मुझे तौलिया खोल कर बेड पर लेटने को कहा पेट के बल !
उसने मेरी कमर तक एक चादर डाल दी, फिर उसने अपने हाथ में काफी सारी क्रीम ली और मेरी कमर पर मालिश करनी शुरू की। करीब पंद्रह मिनट तक उसने मेरी कमर की मालिश की और फिर मेरे कन्धों पर क्रीम मलने लगा।
करीब दस मिनट बाद वह बेड पर चढ़ गया और अपने दोनों पैर मेरी कमर के दोनों तरफ कर दिए. अब वो मेरे चूतड़ों पर बैठा हुआ था। उसने मेरी कमर पर थोड़े मुक्कों की मालिश की और फिर मेरे कूल्हों पर से तौलिया हटा दिया।
अब मैं उसके सामने नंगा था। जैसे ही वो मेरी कमर मलने को झुकता, मुझे उसका लंड अपनी गांड पर दबता महसूस होता। फिर उसने काफी सारी क्रीम ली और मेरे चूतड़ों की मालिश शुरू कर दी।
उसने यह काफी देर तक किया और फिर उसने मेरी अंडकोष को दबा लिया। ऐसे ही मेरी गांड रगड़ते हुए उसने मेरी गांड में अपनी उंगली घुसा दी, यह बात मुझे बड़ी अजीब लगी।
फिर वो उतर कर सामने आया और अपना तौलिया निकाल दिया। उसका लण्ड एकदम सांप जैसा था, काला, एकदम नौ इंच का और मोटा।
फिर वो मेरे पास आया और बोला- मुझे पता है तुम गाण्ड मरवाते हो, मुझसे चुदोगे?
यह सुन कर मैं हक्का बक्का रह गया।
उसने अपना लंड मेरे पास किया और मेरा मन ललचा गया।
मैं उठ कर बैठा और उसने मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया। वह बोला- बड़े रसीले होंठ हैं तेरे तो !
और फिर उसने मेरे गले और छाती को चूमना और चाटना शुरू किया। फिर वह तेज़ी से मेरे निप्प्ल को काटने लगा। अब मेरा पूरा शरीर लाल हो चुका था।
मैं खड़ा हुआ और उसे अपने सामने बिठाया, मैं उसकी छाती पर किस करता करता उसके पेट की तरफ बढ़ा। अब मैंने उसके लंड के आसपास के बालों को सहलाया और उसकी जांघें चाटने लगा।