धोबी घाट पर माँ और मैं -15
माँ दांत पीस कर लगभग चीखते हुए बोलने लगी- ओह होओओ ओओह, शीई… ईईशस्स… साले कुत्ते, मेरे प्यारे बेटे, मेरे लाल, हाय रे, चूस और जोर से चूस अपनी माँ की बुर को, जीभ से चोद दे अभी, सीईई ईई चोद नाआआअ कुत्ते, हरामजादे और जोर से चोद सालेएए, चोद डाल अपनी माँ को, हाय निकला रे, मेरा तो निकल गया। ओह मेरे चुदक्कड़ बेटे, निकाल दिया रे… तूने तो अपनी माँ को अपनी जीभ से चोद डाला।
कहते हुए माँ ने अपने चूतड़ों को पहले तो खूब जोर-जोर से ऊपर की तरफ उछाला, फिर अपनी आँखों को बंद करके चूतड़ों को धीरे धीरे फुदकाते हुए झड़ने लगी- ओह गईईईई मैं, मेरे राजाआआ, मेरा निकल गया, मेरे सैंयाआआ। हाय तूने मुझे ज़न्नत की सैर करवा दी रे। हाय मेरे बेटे, ओह, ओह, मैं गई!
माँ की चूत मेरे मुँह पर खुल-बंद हो रही थी। बुर की दोनों फांकों से रस अब भी रिस रहा था पर माँ अब थोड़ी ठण्डी पड़ चुकी थी और उसकी आँखें बंद थी। उसने दोनों पैर फैला दिये थे और सुस्त सी होकर लंबी-लंबी सांसें छोड़ती हुई लेट गई।
मैंने अपनी जीभ से चोद चोद कर अपनी माँ को झाड़ दिया था।
मैंने बुर पर से अपने मुँह को हटा दिया और अपने सिर को माँ की जांघों पर रख कर लेट गया।
कुछ देर तक ऐसे ही लेटे रहने के बाद मैंने जब सिर उठा कर देखा तो पाया कि माँ अब भी अपने आँखों को बंद किये बेसुध होकर लेटी हुई है।
मैं चुपचाप उसके पैरों के बीच से उठा और उसकी बगल में जाकर लेट गया। मेरा लंड फिर से खड़ा हो चुका था पर मैंने चुपचाप लेटना
ही बेहतर समझा और माँ की ओर करवट लेकर मैंने अपने सिर को उसकी चूचियों से सटा दिया और एक हाथ पेट पर रख कर लेट
गया।
मैं भी थोड़ी बहुत थकावट महसूस कर रहा था, हालांकि लंड पूरा खड़ा था और चोदने की इच्छा बाकी थी। मैं अपने हाथों से माँ के पेट, नाभि और जांघों को सहला रहा था। मैं धीरे धीरे यह सारा काम कर रहा था और कोशिश कर रहा था कि माँ ना जागे।
मुझे लग रहा था कि अब तो माँ सो गई है और मुझे शायद मुठ मार कर ही संतोष करना पड़ेगा इसलिये मैं चाह रहा था कि सोते हुए थोड़ा सा माँ के बदन से खेल लूँ और फिर मुठ मार लूँगा।
मुझे माँ की जांघ बड़ी अच्छी लगी और मेरा दिल कर रहा था कि मैं उन्हें चूमूं और चाटूँ।
इसलिये मैं चुपचाप धीरे से उठा और फिर माँ के पैरों के पास बैठ गया।
माँ ने अपना एक पैर फैला रखा था और दूसरे पैर को घुटनों के पास से मोड़ कर रख हुआ था। इस अवस्था में वो बड़ी खूबसूरत लग रही थी, उसके बाल थोड़े बिखरे हुए थे, एक हाथ आँखों पर और दूसरा बगल में था।
पैरों के इस तरह से फैले होने से उसकी बुर और गांड दोनों का छेद स्पष्ट रूप से दिख रहा था।
धीरे धीरे मैं अपने होंठों को उसकी जांघों पर फेरने लगा और हल्की हल्की चुम्मियाँ उसकी रानों से शुरु करके उसके घुटनों तक देने लगा।