दोस्तो, मेरा नाम आकाश है।
मैं उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के सोंगर गांव में रहता हूं।
मेरी उम्र 19 साल है और मेरे लन्ड का साइज 8 इंच है।
लॉकडाउन में मैं खूब पोर्न देखता था और दिन में 2 से 3 बार मुठ मार लेता था।
मुझे पोर्न देखने की लत लग चुकी थी जो आज भी कायम है।
इसी लत के कारण मैंने इतना लंड हिलाया है कि हिला-हिलाकर इसे लम्बा-तगड़ा मूसल बना डाला है।
मुठ ज्यादा मारने के कारण मुझे लगता है कि मेरा लंड इतना लम्बा-मोटा हो गया है।
खैर, चलिए अब देसी हॉट भाभी Xxx चुदाई की कहानी शुरू करते हैं।
तो उस दिन मैं अपने घर में बैठा फ्री फायर खेल रहा था।
मेरे पापा ने कहा- जाओ खेत में से चरी (घास) काट लाओ, भैंस को खिलाना है।
मैंने कहा- अभी धूप है, बाद में जाऊंगा।
इस पर पापा ने मुझसे कहा- चुपचाप चला जा, दिन रात सिर्फ मोबाइल में लगा रहता है, जा जल्दी जा!
तो मैंने कुछ नहीं कहा और चुपचाप साइकल लेकर खेत की तरफ निकल गया।
मुझे क्या पता था कि खेत में एक चूत मेरा इंतज़ार कर रही है।
खेत मेरे घर से 1 किलोमीटर दूर पड़ता है।
मैं खेत में पहुंचा और साइकल खड़ी कर दी।
अंदर जाकर मैं घास काटने लगा।
तभी मुझे अहसास हुआ कि कोई मेरे अरहर के खेत में घुसा हुआ है।
अरहर के पेड़ हिलते दिखाई दे रहे थे जिससे मेरा शक गहराने लगा।
मैं उठकर खेत में जाने लगा।
धीरे-धीरे मैं अरहर के पेड़ों को हटाता हुआ अंदर खेत में घुसा चला जा रहा था।
सामने अभी तक कुछ दिखाई नहीं दिया था।
थोड़ा और अंदर पहुंचा तो सामने थोड़ी खुली जगह थी जो खेतों के बीचोंबीच थी।
वहां का नजारा देखकर लंड में एकदम से वासना का झटका सा लगा।
सामने एक औरत साड़ी उठाकर टांगें खोले बैठी थी और चूत में लगातार उंगली से सहलाते हुए आह … सी … आह … सी … कर रही थी।
मैं तो सन्न रह गया … मैं वहां से बिल्कुल नहीं हिला ताकि उसे थोड़ी सी भी मेरे वहां होने की भनक न लगे।
चुपचाप छिपा हुआ सामने के नजारे को देखने लगा।
उस देसी भाभी का फिगर किसी पोर्न स्टार से कम नहीं लग रहा था।
पल्लू चूचियों से हट गया था और चूचे एकदम से ब्लाउज में तने हुए थे।
ऐसी तनी हुई चूचियां देखकर मैं तो वासना में बहने लगा।
उसकी चूत एकदम रसीली थी जिसमें वो तेजी से उंगली चलाए जा रही थी।
कसम से मैं बता नहीं सकता कि उस वक्त मुझे कितना मज़ा आ रहा था।
मैं 2 मिनट तक उसे देखता रहा फिर मुझमें थोड़ी हिम्मत आई।
धीरे से बिना आवाज किए मैं दूसरी तरफ से जाकर भाभी के पीछे की तरफ जा पहुंचा।
अब तक भाभी ने अपना ब्लाउज खोल स्तन भी नंगे कर लिए थे।
वह एक हाथ से चूत को सहला रही थी और एक हाथ से स्तनों को मसल रही थी।
धीरे-धीरे मेरे कदम उस चुदासी भाभी की तरफ बढ़ रहे थे।
खेत में सूखे पड़े पत्तों की हल्की आवाज भी हो रही थी जिससे मुझे डर भी लग रहा था कि बनने से पहले ही काम बिगड़ न जाए।
लेकिन वह अभी भी आह … अम्म … सीसी … करके अपनी चूत को सहलाने का मजा ले रही थी।
मैं जाते-जाते भाभी के काफी करीब पहुंच गया।
मेरे और भाभी के बीच केवल दो कदम की ही दूरी रह गई थी।
वह अपनी चूत की आग में इतनी खोई हुई थी कि मेरी आहट सुन नहीं पा रही थी।
मैंने पीछे से जाकर एकदम उसकी चूचियों को दबोच लिया।
भाभी को मैंने कस कर भींच रखा था और चूचियां हाथों से दबा रहा था।
वह एकदम से उछली और पकड़ छुड़ाकर खड़ी हो गई, बोली- कौन हो तुम?
मैंने बिना डरे, हिम्मत करके कहा- मैं वो हूं जिसकी आपको इस वक्त सबसे ज्यादा जरूरत है!
पैंट में अपना तना हुआ लंड सहलाते हुए मैंने कहा.
भाभी ने पैंट में मेरे लंड का तंबू देख लिया और मुस्करा दी।
बोली- छोटे बच्चे हो अभी तो तुम बबुआ! इस मुनिया की आग तुमसे न बुझेगी। क्या ही मजा दे सकोगे तुम!
मैं बोला- बिना आजमाए ही इतरा रही हो भाभी? एक बार करके तो देखो, मजा न आए तो कहना!
लेकिन वो राजी नहीं हुई।
मैं इस मौके को गंवाना नहीं चाहता था।
भाभी की चुदाई मुझे हर हालत में करनी ही थी।
उसकी सांवली, रसीली चूत में लंड पेले बिना अब चैन नहीं मिलने वाला था।
मैंने बिना देर किए पैंट खोलकर अंडरवियर समेत नीचे कर दी, और लंड निकाल कर खड़ा हो गया।
वो लंड को देखकर चौंक गई!
बोली- अरे बबुआ, बड़े ही छुपे रुस्तम हो, इतना बड़ा लौड़ा! लंड तो असली है एकदम, मेरे पति का तो आधा भी नहीं है इसका।
मैं बोला- तो फिर हो जाए भाभी एक बार?
उसने मुस्कराते हुए हां में मुंडी हिला दी।
मैं भी बिना एक पल की देरी किए उस पर टूट पड़ा।
उसे वहीं बिछे कपड़े पर गिराकर दबोच लिया।
पोर्न देख देखकर मैं चुदाई का बहुत ज्यादा आदी हो चुका था।
मुझे सबकुछ करना आता था।
हर किस्म की चूत को चोद सकता था मैं!
मैंने भाभी को नीचे लिटाकर पहले उसकी दोनों चूचियों के बीच में लंड फंसा दिया।
वह भी दोनों हाथों से चूचियों को पास लाकर भींचते हुए चूची चुदाई करवाने लगी।
मैं बता नहीं सकता कि मुझे कितना अच्छा लग रहा था।
दोस्तो, उस वक्त मैं जन्नत की सैर कर रहा था।
कुछ देर तक स्तन मैथुन करने के बाद मैंने लंड हटाया और उसके ऊपर लेटकर उसके होंठों को पीने लगा।
वह भी मेरा पूरा साथ देने लगी।
बीच-बीच में मैं उसके होंठों को आइक्रीम की तरह चाट भी रहा था।
होंठ पूरे गीले और रसीले हो चुके थे।
मैं उसके मुंह में जीभ दे रहा था, और वह भी मेरी जीभ को ऐसे चूस रही थी जैसे लौड़ा चूस रही हो।
कभी-कभी मैं उसकी चूत में उंगली भी कर रहा था।
हर बार उंगली जब अंदर जाती तो उसकी जांघें अपने आप खुल जातीं, और मैं उंगली पूरी अंदर तक घुसेड़ कर कुरेद देता।
वह चुदास में अब पागल सी हुई जा रही थी।
फिर दो-चार मिनट में ही परेशान होकर बोली- बस अब चोद दे हरामी, मर जाऊंगी … चोद दे ये चूत … आह्ह … लंड घुसाई देओ बबुआ!
लेकिन मैं भाभी की चुदास का पूरा मजा लेना चाहता था।
मैंने भाभी की चूत पर लंड तो लगाया लेकिन अंदर घुसाए बिना ऊपर ही रगड़ने लगा; उसकी चूत की फांकों को लंड के टोपे से खोलकर-खोलकर छेड़ने लगा।
इससे वह और ज्यादा पगला गई।
वह बोली- चोद दे मादरचोद … बहन के लौड़े … घुसा दे लंड मेरी चूत में … क्यों तड़पा रहा है!
जब भाभी चुदास में एकदम रोने को हो गई तब मुझे उस पर थोड़ा तरस आया।
मैंने लंड को चूत के छेद पर सेट कर दिया।
चूत पहले से ही पूरी गीली हुई पड़ी थी, रस रह रहकर बाहर आ रहा था।
अब मैं भी उस चूत को चोदे बिना नहीं रह सकता था।
मैंने लंड एक झटके के साथ अंदर सरका दिया जिससे भाभी की आह निकल गई।
उसके साथ ही मेरे मुंह से भी आनंद भरी आह … निकली।
आह्ह … क्या गर्म चूत थी उस चुदक्कड़ भाभी की!
एकदम भट्टी की तरह तप रही थी।
ऊपर से पानी इतना छोड़ रही थी कि लंड को कसम से मजा आ गया।
लंड अंदर जाते ही भाभी के चेहरे पर एक संतुष्टि का भाव तैर गया और वह दर्द के साथ ही हल्की सी मुस्करा भी दी।
मैंने एक और झटका दिया और आधे से ज्यादा लंड भाभी की चूत में उतर गया।
इसी के साथ उसकी एक और आह्ह … निकली।
मैंने चूची भींचते हुए तीसरा झटका मारा और पूरा का पूरा लंड जड़ तक भाभी की चूत में उतार दिया।
भाभी को दर्द भी हुआ लेकिन मजा भी मिल गया।