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सौतेली मां और बेटे की वासना का खेल- 3

Story Hindi 5 pages 12 years ago

सौतेली मां और बेटे की वासना का खेल- 3
स्टेप मॉम सन सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि कैसे मेरे पापा की दूसरी बीवी मेरे साथ चुदाई का मजा लेने लगी. वो मुझे अपने पति जैसे समझने लगी थी.
हैलो फ्रेंड्स, मैं विशाल आपको अपनी सगी मां के साथ सेक्स रिश्तों पर आधारित सेक्स कहानी सुना रहा था.
स्टेप मॉम सन सेक्स स्टोरी के पिछले भागसौतेली मां को चुदाई का मजा दिया
में अब तक आपने पढ़ा था कि मैं अपनी मां को भरोसा दिला रहा था कि हम दोनों अपने सेक्स रिश्ते उजागर नहीं होने देंगे.
अब आगे स्टेप मॉम सन सेक्स स्टोरी:
अब हम दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़ कर उंगलियों में उंगलियां फंसाए हुए एक-दूसरे की आंखों में आंखें डालकर देखने लगे.
मैं उनको किस करने के लिए आगे बढ़ गया. मेरी मां रज्जी की हाइट कम होने की वजह से वो अपने मुँह को ऊपर उठाने लगीं.
वो अपनी एड़ियों के बल उचकीं और खड़े होकर उन्होंने मुझे अपने होंठ सौंप दिए.
मैं मेरी मां रज्जी के होंठों में होंठ डालकर किस करने लगा.
थोड़ी देर में मेरी मां रज्जी ने अपने होंठ हटा लिए और हमारा किस रुक गया.
मैं- क्या हुआ जान?
मेरी मां रज्जी बोलीं- आपकी हाइट ज्यादा है. मुझे उचककर आपको किस करना पड़ रहा है.
मैं हंसने लगा और अपनी मां का हाथ पकड़कर उन्हें कमरे में ले गया.

जहां मां ने कपड़े बदल लिए.
बाहर अभी भी बारिश चल रही थी.
हम जिस रूम में थे, वहाँ एक छोटा बेड था … जिस पर सिर्फ एक आदमी सो सकता था.
मैं उस पर बैठ गया और मां से कहा- लाइट ऑन कर लो.
मां ने लाइट ऑन की और मेरे पास आकर खड़ी हो गईं.
मैंने देखा कि उनके चेहरे पर शर्म की लाली छाई थी.
मैं- आ जाओ मेरी गोदी में बैठ जाओ.
वो अपनी गांड एक तरफ डाल कर मेरी गोदी में बैठने लगीं.
मैं- ऐसे नहीं डियर रज्जी … अपनी दोनों टांगें दोनों तरफ डालकर बैठो.
मेरी मां रज्जी थोड़ा शर्माती हुई बोलीं- ऐसे कैसे बैठ सकती हूं … मैंने मैक्सी पहनी हुई है.
मैं- मैक्सी ऊपर कर लो और मेरी बांहों में आ जाओ जान.
मेरी मां रज्जी अपनी मैक्सी ऊपर करने लगीं और वो घुटनों से ऊपर तक मैक्सी करके बैठने लगीं.
मुझे उनकी गोरी टांगें और उसकी गोरी गांड दिखने लगी.
यह देखते ही मेरे मुँह से निकल गया- बाप रे रज्जी … तू तो माल है यार, कितनी हॉट है तू.
मेरी मां रज्जी हंस दीं और अपनी दोनों टांगें डालकर मेरी गोदी में बैठ गईं.
अब वो बोलीं- क्या बोले आप?
बस मां ने मेरे गले में हाथ डालकर मुझे अपने मम्मों से चिपका लिया.
मैं उनकी गोरी गांड पर हाथ फिराने लगा.
यूं ही हाथ फिराते हुए मैं अपने हाथ मां की पैंटी के अन्दर ले गया उनकी गांड के छेद को टटोलते हुए उनकी गांड को उंगली से सहला दिया.
उसी वक्त मेरी मां रज्जी मेरे मुँह में अपना मुँह डालकर मुझे किस करने लगीं.
हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे.

मैं नीचे से मां की गदरायी हुई गांड को दबाते और मसलते हुए अपनी मां को किस करने लगा.
कुछ पल बाद मैं मां से अलग हो गया और अपनी टी-शर्ट निकालने लगा.
मां मेरी छाती पर हाथ घुमाने लगीं तो मैंने उनसे मैक्सी निकालने को कहा.
मैं- मैक्सी निकाल दे रज्जी.
मेरी मां रज्जी- आप रात जैसे ही कर लो ना!
मैं- नहीं आज मैं तुझे नंगी करके चोदना चाहता हूँ.
मेरी मां रज्जी मेरी गोदी से उठकर खड़ी हो गईं और अपनी मैक्सी निकाल कर वो मेरे सामने खड़ी हो गईं.
उनका बदन अन्दर से गोरा और गदराया हुआ था.
मां ने काली ब्रा पहनी थी और उनके बूब्स लटके हुए थे. शरीर पर एक्स्ट्रा फैट्स था, उनका पेट लटका हुआ था.
मैंने उनसे कहा- अब पेटीकोट भी उतार दो.
वो पेटीकोट का नाड़ा खोलने लगीं और मैं अपनी मां का परिपक्व बदन देखे जा रहा था.
मेरी मां आज मेरे सामने नंगी हो रही थीं. ये देख कर मेरा बुल्ला टाइट हो रहा था.
मैं भी खड़ा हो गया और मेरी नाईटपैंट उतार दी.
मैं मां के सामने सिर्फ फ्रेंची में था.
मां ने मेरा फूला हुआ लौड़ा देखते हुए अपना पेटीकोट उतार दिया.
मेरा बुल्ला मेरी फ्रेंची से गुर्राता हुआ दिखाई दे रहा था.
मेरी मां रज्जी मेरा खड़ा लंड देखने लगीं.
मैं बेड पर बैठ गया और वो मेरे पास आने लगीं.
तो मैं बोला- जरा रुको मेरी जान … मुझे तुम्हें अच्छे से देखना है.
मां रुक गईं, मैं उन्हें नजर भर कर वासना से देखने लगा.
मेरी मां के गदराए पेट बार स्ट्रेच मार्क थे और पेट लटका हुआ था.
मैंने उन्हें पीछे घूमने को कहा तो वो घूम गईं. मैं मां की गोरी गांड देखने लगा.
उस पर भी स्ट्रेच मार्क थे. मैं वो देखने लगा और गांड को छूने लगा.
मैंने उनसे कहा- अब मेरे ऊपर आ जाओ.
वो अपनी दोनों टांगें मेरे दोनों तरफ डालती हुई मेरे बुल्ले पर अपनी चूत सैट करके बैठ गईं और मुझे बांहों में कस लिया.
वो मेरा नाम लेने लगीं- आंह विशुऊऊऊ … आप कितने गर्म हो.
मेरी मां रज्जी मुझे किस करने लगीं.
मैं भी उन्हें किस करने लगा.
हम दोनों एक दूसरे के बदन को झंझोड़ने लगे.
मैं उनका पूरे बदन अपने आगोश में लेने लगा. मैं और मेरी मां काम के नशे में डूबने लगे.
मैंने उनकी ब्रा खोल दी … वो मुझे चूमे जा रही थीं.
‘आआह विशुऊऊऊ …’ वो सीत्कार कर रही थीं और मैं ‘ओ राआजे मेरी जान आआह मेरी शोनाआआ …’ कह रहा था.
फिर मैंने मां को थोड़ा अलग किया और उनके मम्मों को दबाने लगा. उनके मम्मे हाथों में लेकर भींचने लगा.
मेरी मां के दूध लटके हुए थे और काफी नर्म थे. क्यों न होते … क्योंकि मेरी मां अब जवान नहीं थीं.
मैं उनके दोनों मम्मे बारी बारी से अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और उन पर दांत गड़ा कर काटने लगा.
वो आंख बंद करके मादक सिसकारियां लेने लगीं.
थोड़ी देर दूध चूसने के बाद हम दोनों ने वापस हगिंग और किसिंग की और एक दूसरे को मसलने लगे.

मुझे और रज्जी को ये भी याद नहीं था कि बाहर क्या चल रहा है.
हम दोनों बस एक दूसरे के आगोश में समाए हुए प्यार कर रहे थे.
मेरी मां रज्जी ने मेरी पूरी पीठ पर अपने नाखूनों से खरोंच कर निशान बना दिए थे.
हमारे बीच ये खेल करीब आधा घंटे से चल रहा था. हम दोनों उत्तेजित हो चुके थे और अब हम दोनों से ही रहा नहीं जा रहा था.
मैंने मां की आंखों में देख कर कहा- जान, मुझे अन्दर करना है.
मेरी मां रज्जी- हां जान, अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा है.
मैं- तो उठो और बेड पर लेट जाओ.
मेरी मां रज्जी- जानू, हम इस बेड पर नहीं कर पाएंगे, इधर जगह कम है.
ये कह कह मां ने एक दरी और तकिया नीचे बिछा दिया.
वो किसी पहलवान की तरह अपनी कमर पर हाथ रखती हुई बोलीं- आ जा अब नीचे हो जाए!
मैं- बैठे बैठे करने में तुम्हें प्रॉब्लम तो नहीं होगी ना!
मेरी मां रज्जी- नहीं, आप मेरे ऊपर चढ़ कर करो.
वो नीचे लेट गईं और अपनी टांगें खोलकर मुझसे अपनी चुत चुदाई का इशारा देने लगीं.
मैंने खड़े होकर अपनी फ्रेंची निकाल दी और लंड हिला दिया.
मेरी मां रज्जी, मेरे खड़े लौड़े को बाहर निकलता देख कर एक मादक सिसकारी लेती हुई बोलीं- आह कितना सॉलिड लंड है आपका.
मैं नीचे बैठ गया और मां के चिकने पैरों को पकड़ कर फैला दिए.
मेरी मां की पैंटी थोड़ी भीगी हुई थी, उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया था शायद.
मैं दोनों हाथों से अपनी मां रज्जी की पैंटी निकालने लगा.
वो अपनी कमर उठाकर मुझे साथ देने लगीं.
मैंने उनकी पैंटी निकाल कर ऊपर बेड पर रख दी.
आज मैं अपनी मां रज्जी की चूत को पहली बार देख रहा था.
उन्होंने अपने पैर पूरी तरह से खोलकर मेरी गांड पर रखे हुए थे.
मैं देख रहा था कि मां की चूत पर काफी घनी झांटें थीं पर टांगें खोलने की वजह से उनकी चूत की दरार खुली हुई थी.
उनकी चूत काफी गदरायी हुई और खुली हुई थी.
चॉकलेटी कलर की उनकी चूत की एकदम फैली हुई थी और फांकें दूर दूर थीं.
उनकी चूत का छेद आसानी ने नजर आ रहा था.
मेरी मां की चुत ने चार चार बच्चों को पैदा किया था और मेरे पापा अभी भी उनसे खुल कर चुदाई के मजे लेते थे.
ये बात उन्होंने खुद मुझे बताई थी.
मैंने मां की दोनों टांगों को थोड़ा और खोल दिया, जिसके कारण उनकी चूत पूरी तरह खुल गई थी.
मैं अपनी मां रज्जी से बोला- रज्जी, अपने हाथों से अपनी टांगें पकड़ कर ऊपर ले लो.
उन्होंने अपनी दोनों टांगें पेट पर खींच लीं.
मैंने मेरा बुल्ला अपने हाथ में पकड़ा और मां की चुत में लंड का सुपारा फेर दिया ताकि मां की चूत से निकलने वाली चिकनाई मेरे लौड़े के सुपारे पर लग जाए और चुदाई में मजा आ जाए.
मां की चुत की चिकनाई से मेरा बुल्ला भीग गया.
मैंने अपनी मां रज्जी से कहा- डालूं जान?
मेरी मां रज्जी- आंह विशु, आराम से डालना.
मैंने अपना बुल्ला मां की चूत पर रख कर धीरे से दबा दिया और मेरा बुल्ला आराम से उसकी चूत में घुस गया.

मेरे लंड की झांटें और मेरी मां की झांटों में लड़ाई होने लगी.
लंड अन्दर लेते ही मां ने अपनी टांगें चौड़ा दीं और मेरे नाम की सिसकारियां लेने लगीं- आंह विशुऊऊऊ अह आह!
मैं मां के ऊपर पूरा लेट गया और पूछा- क्या दर्द हो रहा है जान?
मेरी मां रज्जी- नहीं हम्म्म्म …
मैं- मजा आया!
मेरी मां रज्जी कुछ नहीं बोलीं और उन्होंने आंख बंद करके मेरी पीठ पर हाथ रख दिया.
मैं उनकी बांहों में समा गया और अपनी गांड आगे पीछे करते हुए मां की चुत में लंड के झटके देने लगा.
हम दोनों की चुदाई चालू हो गई.
चूंकि इस वक्त पूरे घर में मैं और मां ही थे और हम दोनों हॉल के बाजू वाले रूम में नीच बिस्तर बिछा कर चुदाई कर रहे थे.
हमारी तेज आवाजों से मस्ती गूंजने लगी थी जिसका डर हम दोनों को ही नहीं था.
मैं अपनी मां के ऊपर चढ़ कर उनकी चुत चुदाई कर रहा था.
मां ने मुझे अपनी बांहों में लिया हुआ था.
चुदाई के साथ साथ मैं और मां होंठों पर चूम चूस रहे थे.
मुझे उनके शरीर का मादक स्पर्श मिल रहा था जिससे मैं और अधिक उत्तेजित होकर अपनी मां की चुदाई करते टाइम ये भूल गया था कि आज मैं अपनी मां की चुदाई कर रहा हूँ.
मुझे लग रहा था कि मैं किसी रांड की चुदाई कर रहा हूँ.
हम एक दूसरे को किस करते जा रहे थे. मैं उनके दोनों हाथों की उंगलियों में अपनी उंगलियां फंसा कर उनके दोनों हाथों को ऊपर ले गया. तभी मुझे मां की बगलों से एक तेज पसीने की महक आई.
मैंने मां को किस करना छोड़ दिया और देखा कि मेरी मां के बगलों में घने बाल थे. जिस वजह से मां की बगलों में से कामुक महक आ रही थी.
मैं उनकी बगल चाटने और सूंघने लगा.
इससे मैं काफी उत्तेजित हो गया और जोर जोर से झटके मारने लगा.
मेरी मां रज्जी मेरा नाम लेते हुए मीठी सिसकारियां लेने लगीं- आंह विशूऊ आआह चोद दे … हम्मम ईईईई … जोर से पेल दे.
मैं मां को धकापेल चोदता रहा.
मां की चुत से पानी निकलने की वजह से मेरी और मां की चुत का इलाका पूरा भीग गया था.
इस कारण से चुदाई में छप छप की आवाज आने लगी थी.
हम दोनों मिशनरी पोजीशन में चुदाई का मजा लिए जा रहे थे.
करीब आधा घंटे के बाद मां फिर से झड़ गईं और मैं अभी भी अपनी मां को चोदे जा रहा था.
मेरा बुल्ला मां की चूत की गहराई में पूरा जाता और पूरा बाहर निकल कर फिर से अन्दर घुस जाता.
मैं इस वक्त अपनी मां की बहुत बढ़िया चुदाई कर रहा था. उनकी उम्र हो जाने के बावजूद भी मां के अन्दर चुदाई की आग थी.
कुछ देर बाद मैं झड़ने को आ गया और मैंने मां से कहा- रज्जी, मैं अन्दर झड़ रहा हूँ.
मेरी मां रज्जी मुझे मना करती रहीं लेकिन मैंने लंड का पूरा पानी उनकी चुत में छोड़ दिया.
हम दोनों एक दूसरे के ऊपर कुछ समय लेटे रहे.
दोस्तो, आपके मेल मिल रहे हैं और मैं सभी को रिप्लाई देने की कोशिश भी कर रहा हूँ.

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